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  • Holi 2026: जिद्दी रंगों और एलर्जी को कहें 'बाय-बाय', बस ये आसान प्री और पोस्ट स्किन केयर रूटीन बचाएंगे आपका निखार

    Holi 2026: जिद्दी रंगों और एलर्जी को कहें 'बाय-बाय', बस ये आसान प्री और पोस्ट स्किन केयर रूटीन बचाएंगे आपका निखार


    नई दिल्ली ।होली के त्योहार में रंगों की मस्ती तभी फीकी पड़ने लगती है जब स्किन एलर्जी या जिद्दी केमिकल वाले रंगों का डर सताने लगता है। अक्सर लोग अपनी त्वचा के खराब होने के खौफ से खुद को घर के अंदर कैद कर लेते हैं, लेकिन सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आप सही Pre-Holi और Post-Holi स्किन केयर रूटीन अपनाएं, तो आप बिना किसी फिक्र के गुलाल और पानी का भरपूर आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं वे प्रभावी टिप्स जो आपकी त्वचा को रंगों के दुष्प्रभाव से बचाकर उसे रेशमी और चमकदार बनाए रखेंगे।

    होली से पहले: सुरक्षा की ढाल तैयार करें

    होली के मैदान में उतरने से पहले अपनी त्वचा पर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनाना जरूरी है, ताकि रंग रोमछिद्रों के अंदर न समा सकें। इसके लिए सबसे पहला कदम है “त्वचा को डीप मॉइस्चराइज करना”। घर से बाहर निकलने से पहले स्किन को अच्छे से हाइड्रेट करें। आप लाइट वेट मॉइस्चराइजर या हाइलूरोनिक एसिड वाले सीरम का उपयोग कर सकते हैं। यह त्वचा और रंगों के बीच एक फिजिकल बैरियर बना देता है। यदि आपकी स्किन ड्राई है, तो तेल आधारित मॉइस्चराइजर लगाना सबसे बेहतर विकल्प है।

    दूसरा महत्वपूर्ण टिप है “एक्सफोलिएशन से दूरी”। होली से कम से कम दो दिन पहले किसी भी तरह के स्क्रब या फेस पीलिंग ट्रीटमेंट से बचें। एक्सफोलिएशन से डेड स्किन हट जाती है, जिससे नई त्वचा काफी संवेदनशील हो जाती है और रंगों के केमिकल उस पर तुरंत जलन या रैशेज पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही, अपने नाखूनों की सुरक्षा करना न भूलें। नाखूनों पर क्लियर नेल पॉलिश या बेस कोट की एक परत लगाएं, ताकि रंग अंदर तक न फंसे और बाद में आसानी से साफ हो जाए। अंत में एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना अनिवार्य है। धूप में घंटों होली खेलने से होने वाली टैनिंग और UV किरणों के नुकसान से बचने के लिए इसे चेहरे, गर्दन और बाहों पर जरूर लगाएं।

    होली के बाद: ऐसे लौटाएं अपनी खोई हुई रौनक
    रंगों से सराबोर होने के बाद बारी आती है उन्हें सही तरीके से साफ करने की। यहाँ सबसे बड़ी गलती लोग “गर्म पानी” का इस्तेमाल करके करते हैं। हमेशा याद रखें कि रंगों को ठंडे पानी से ही धोना चाहिए। गर्म पानी रंगों को त्वचा पर और अधिक पक्का कर देता है, जिससे उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है।

    त्वचा से रंग हटाने के लिए किसी कठोर साबुन के बजाय “जेंटल और हाइड्रेटिंग फेस क्लींजर” का चुनाव करें। इसे सर्कुलर मोशन में हल्के हाथों से रगड़ें और फिर पानी से धो लें। ध्यान रहे कि चेहरा सुखाते समय तौलिए से रगड़ें नहीं, बल्कि हल्के हाथों से थपथपाकर Pat dry सुखाएं। एक बार रंग निकल जाने के बाद, नमी को लॉक करना सबसे जरूरी है। त्वचा के नेचुरल हाइड्रेशन लेवल को बहाल करने के लिए रिपेयरिंग सीरम और एक हैवी मॉइस्चराइजर लगाएं। अंत में भले ही होली खत्म हो गई हो, लेकिन अगले कुछ दिनों तक सनस्क्रीन का उपयोग जारी रखें, क्योंकि रंगों के संपर्क में आने के बाद स्किन काफी सेंसिटिव हो जाती है और सूरज की रोशनी उसे जल्दी नुकसान पहुंचा सकती है।

  • पद्मावत के बाद अब सोमनाथ की गाथा! पर्दे पर जीवंत होगा गजनवी का हमला और महादेव के मंदिर का पुनरुत्थान; भंसाली का नया मास्टरस्ट्रोक।

    पद्मावत के बाद अब सोमनाथ की गाथा! पर्दे पर जीवंत होगा गजनवी का हमला और महादेव के मंदिर का पुनरुत्थान; भंसाली का नया मास्टरस्ट्रोक।


    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली अपनी भव्यता और ऐतिहासिक कहानियों को जीवंत करने के लिए जाने जाते हैं। इस शिवरात्रि पर उन्होंने अपनी नई महात्वाकांक्षी फिल्म ‘जय सोमनाथ’ की घोषणा कर मनोरंजन जगत और इतिहास प्रेमियों में हलचल पैदा कर दी है। यह फिल्म केवल एक मंदिर की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस अदम्य शक्ति और कभी न हारने वाली हिम्मत का प्रतीक है, जिसने सदियों तक विदेशी आक्रांताओं के वार सहे, लेकिन हर बार पहले से अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ी हुई। इस बार भंसाली ने मशहूर निर्देशक केतन मेहता के साथ हाथ मिलाया है, जो इस बात का संकेत है कि सोमनाथ मंदिर के 17 बार विध्वंस और पुनर्निर्माण की गाथा को बहुत ही गहराई और भव्यता के साथ पर्दे पर उतारा जाएगा।

    इतिहास के पन्नों को पलटें तो सोमनाथ मंदिर पर लगभग छह सदियों तक बार-बार क्रूर हमले हुए। इस श्रृंखला में सबसे विनाशकारी हमला 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, गजनवी ने न केवल मंदिर की अकूत संपत्ति लूटी, बल्कि पवित्र ज्योतिर्लिंग को भी भारी नुकसान पहुंचाया। हमलों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा; 1299 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के जनरल उलग खान ने हमला कर मूर्ति को दिल्ली ले जाने का दुस्साहस किया। इसके बाद 1395 में जफर खान, 1451 में महमूद बेगड़ा और अंततः 1665 में मुगल शासक औरंगजेब के आदेशों पर इस आस्था के केंद्र को बार-बार खंडित किया गया। भंसाली की यह फिल्म इन जख्मों और उनसे उबरने की भारतीय जिजीविषा को बड़े पर्दे पर पेश करेगी।

    संजय लीला भंसाली का इतिहास से पुराना नाता रहा है। इससे पहले उन्होंने ‘पद्मावत’ के जरिए रानी पद्मावती के त्याग और जौहर की उस शौर्य गाथा को दिखाया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। खिलजी के उन्माद और राजपूतों की आन-बान-शान को भंसाली ने जिस बारीकी से फिल्माया, वह आज भी मिसाल है। इसके अलावा ‘हीरामंडी’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि वे बीते हुए कल को वर्तमान में जीवंत करने की अद्भुत कला रखते हैं।

    ‘जय सोमनाथ’ के जरिए पहली बार भारतीय इतिहास का वह काला अध्याय और उसके बाद की विजय गाथा सामने आ रही है, जिसे अब तक मुख्यधारा के सिनेमा ने अछूता छोड़ दिया था। केतन मेहता की ऐतिहासिक समझ और भंसाली की भव्य सिनेमैटोग्राफी का मिलन इस फिल्म को दशक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक फिल्म बना सकता है। यह फिल्म न केवल महमूद गजनवी की बर्बरता को उजागर करेगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि कैसे हर विध्वंस के बाद करोड़ों भारतीयों की आस्था ने सोमनाथ को फिर से संवारा और आज भी वह गौरव के साथ खड़ा है।

  • दिल्ली में घर खरीदना बन गया लक्जरी, जानें सर्कल रेट के हिसाब से सबसे महंगे 5 इलाके

    दिल्ली में घर खरीदना बन गया लक्जरी, जानें सर्कल रेट के हिसाब से सबसे महंगे 5 इलाके


    नई दिल्ली । देश की राजधानी नई दिल्ली में घर खरीदना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुका है। खासतौर पर ए-कैटेगरी के इलाके, जहां सर्कल रेट सबसे ऊंचे हैं, वहां संपत्ति लेना सामान्य खरीदार के लिए आसान नहीं। राजधानी में ए से लेकर एच श्रेणियों तक के इलाके हैं, जिनमें ए-कैटेगरी का न्यूनतम सर्कल रेट करीब 7.74 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंचता है। ऐसे इलाकों में बड़े-बड़े बंगले, लक्जरी फ्लैट और प्रीमियम मार्केट मिलते हैं।

    सबसे महंगा इलाका है लुटियंस बंगला जोन, जिसे LBZ भी कहा जाता है। राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और कई केंद्रीय मंत्रियों के घरों के पास फैले इस इलाके में बड़े प्लॉट और विशाल बंगले हैं। पृथ्वीराज रोड और अमृता शेरगिल मार्ग जैसे प्रतिष्ठित पते इसी क्षेत्र में आते हैं। इसकी कीमतें देश में सबसे ऊंची मानी जाती हैं और यहां घर खरीदना सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि सामाजिक हैसियत का प्रतीक भी है।

    इसके बाद आता है गोल्फ लिंक्स। दिल्ली गोल्फ कोर्स के पास स्थित यह इलाका शांत वातावरण और बड़े प्लॉट वाले लक्जरी घरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां घर लेना सिर्फ आर्थिक क्षमता नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर और प्रतिष्ठा दिखाने का तरीका भी है।

    तीसरे नंबर पर है जोर बाग, जो लोदी गार्डन और सफदरजंग मकबरे के पास स्थित है। सीमित प्लॉट और उच्च मांग के कारण यहां कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं। यह इलाका हाई-प्रोफाइल कारोबारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की पसंदीदा जगह माना जाता है।

    चौथे स्थान पर है चाणक्यपुरी, दिल्ली का डिप्लोमैटिक एन्क्लेव। यहां कई विदेशी दूतावास, चौड़ी सड़कें, हरियाली और उच्च सुरक्षा है। ए-कैटेगरी में शामिल होने के कारण सर्कल रेट राजधानी में सबसे अधिक है।

    पांचवें नंबर पर है ग्रेटर कैलाश GK-1 और GK-2। यह साउथ दिल्ली का प्रमुख रिहायशी और प्रीमियम मार्केट वाला इलाका है। यहां लक्जरी फ्लैट, हाई-एंड बिल्डर फ्लोर मौजूद हैं। भले ही कुछ हिस्सों में अपार्टमेंट संस्कृति भी है, फिर भी सर्कल रेट ए-कैटेगरी में आता है।

    इन इलाकों की कीमतें लोकेशन, सीमित जमीन, सत्ता और प्रशासनिक केंद्र के नजदीक होने, हरियाली और सुरक्षा के कारण ऊंची हैं। मांग अधिक और आपूर्ति सीमित होने से सर्कल रेट और बाजार मूल्य दोनों लगातार ऊंचे बने रहते हैं। दिल्ली में घर लेना कई लोगों का सपना है, लेकिन इन इलाकों में रहना केवल सपनों की पूर्ति नहीं बल्कि सामाजिक स्तर और जीवनशैली का प्रतीक भी है।

  • ब्राजील बना भारत का 'सुपर पार्टनर': रेयर अर्थ मिनरल्स से लेकर एयरोस्पेस तक 9 बड़े समझौते, चीन के एकाधिकार पर मोदी का सीधा प्रहार!

    ब्राजील बना भारत का 'सुपर पार्टनर': रेयर अर्थ मिनरल्स से लेकर एयरोस्पेस तक 9 बड़े समझौते, चीन के एकाधिकार पर मोदी का सीधा प्रहार!


    नई दिल्ली ।दुनिया भर में ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग और खनन पर लगभग 70% से 90% तक नियंत्रण रखने वाला चीन अब मुश्किल में पड़ सकता है। अपनी इस ताकत के दम पर समय-समय पर दुनिया को आंख दिखाने वाले चीन की हेकड़ी को शांत करने के लिए भारत ने एक मास्टरस्ट्रोक खेला है। शनिवार को भारत और ब्राजील के बीच एक ऐसी ऐतिहासिक ट्रेड डील हुई है, जो न केवल चीन पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन के समीकरण को भी पूरी तरह बदल कर रख देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने जरूरी मिनरल्स और स्टील सप्लाई चेन में सहयोग के लिए समझौतों पर मुहर लगा दी है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस साझेदारी को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि ब्राजील के साथ हुए इस खनिज समझौते से चीन पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम होगी और यह एक मजबूत, सुरक्षित सप्लाई चेन बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस मुलाकात के दौरान भारत और ब्राजील ने साल 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है। आपको बता दें कि 2006 में जहां यह व्यापार महज 2.4 अरब डॉलर था, वहीं अब यह 15 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, लेकिन दोनों नेताओं का मानना है कि दोनों देशों की क्षमता इससे कहीं अधिक है।

    इस ऐतिहासिक अवसर पर कुल 9 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें सबसे प्रमुख है ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ के क्षेत्र में सहयोग और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बनाई गई ‘डिजिटल साझेदारी’। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि ब्राजील के पास नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क जैसे बहुमूल्य खनिज संसाधनों का भंडार है, जबकि भारत के पास विश्व स्तरीय तकनीक और विनिर्माण क्षमता है। जब ये दोनों शक्तियां हाथ मिलाएंगी, तो दुनिया को एक वैकल्पिक और विश्वसनीय औद्योगिक पार्टनर मिलेगा।

    व्यापारिक मोर्चे पर भी बड़े कदम उठाए गए हैं। एनएमडीसी, वेल और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच करीब 500 मिलियन डॉलर की लागत से लौह अयस्क ब्लेंडिंग सुविधा स्थापित करने पर सहमति बनी है। इसके अलावा, एयरोस्पेस क्षेत्र में एक बड़ी सफलता तब मिली जब ब्राजील की दिग्गज कंपनी ‘एम्ब्रेयर’ और ‘अडानी डिफेंस’ ने भारत में ई175 रीजनल जेट की असेंबली लाइन स्थापित करने का फैसला किया। फार्मा क्षेत्र में भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं के संयुक्त शोध के लिए हाथ मिलाया गया है। साफ है कि भारत और ब्राजील की यह नई जुगलबंदी न केवल चीन के आर्थिक दबदबे को चुनौती दे रही है, बल्कि विकासशील देशों के हितों को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित भी कर रही है।

  • सोना-चांदी की कीमतों में 'यू-टर्न': रिकवरी के बाद भी हाई लेवल से ₹1.67 लाख सस्ती है चांदी, जानें निवेश का सही मौका!

    सोना-चांदी की कीमतों में 'यू-टर्न': रिकवरी के बाद भी हाई लेवल से ₹1.67 लाख सस्ती है चांदी, जानें निवेश का सही मौका!


    नई दिल्ली ।भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बीते एक सप्ताह के दौरान हलचल तेज रही है। लंबे समय की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों ने एक बार फिर ‘यू-टर्न’ लिया है और निवेशकों के चेहरों पर चमक लौट आई है। बीते हफ्ते दोनों कीमती धातुओं में जोरदार उछाल देखने को मिला, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस हालिया तेजी के बावजूद सोना और चांदी अपने ऑल-टाइम हाई लेवल से अब भी काफी रियायती दरों पर उपलब्ध हैं। खास तौर पर चांदी की बात करें तो यह अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर से अभी भी 1.67 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती मिल रही है, जो खरीदारों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।

    बाजार के आंकड़ों पर गौर करें तो चांदी की कीमतों में बीते सप्ताह जबरदस्त रिकवरी दर्ज की गई है। हफ्ते भर के भीतर चांदी 8,584 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हुई है। 13 फरवरी को जहां चांदी 2,44,360 रुपये पर बंद हुई थी, वहीं शुक्रवार तक यह उछलकर 2,52,944 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, यदि हम इसकी तुलना 29 जनवरी के उस ऐतिहासिक दिन से करें जब चांदी ने पहली बार 4 लाख का आंकड़ा पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलो का “लाइफ टाइम हाई” छुआ था, तो मौजूदा भाव अब भी 1,67,104 रुपये प्रति किलोग्राम कम है। चांदी की कीमतों में आया यह “क्रैश” उन लोगों के लिए मुफीद है जो लंबी अवधि के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं।

    चांदी की ही राह पर चलते हुए सोने ने भी बीते सप्ताह अपनी चमक बिखेरी है। एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना हफ्ते भर में 981 रुपये महंगा होकर 1,56,876 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। सोने की कहानी भी चांदी जैसी ही है; बीते महीने 29 जनवरी को सोना भागते हुए 1,93,096 रुपये के शिखर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद आई भारी गिरावट की वजह से यह अब भी अपने हाई लेवल से लगभग 36,220 रुपये सस्ता बना हुआ है।

    घरेलू बाजार की बात करें तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट के अनुसार, शुद्धता के आधार पर सोने की कीमतों में भी बदलाव आया है। वर्तमान में 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,55,066 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। वहीं, आभूषणों के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,51,340 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। इसके अलावा, 20 कैरेट सोने का रेट 1,38,010 रुपये और 18 कैरेट का भाव 1,25,600 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह हालिया रिकवरी वैश्विक अनिश्चितताओं का परिणाम हो सकती है, लेकिन हाई लेवल से भारी गिरावट के कारण अभी भी बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ है।

  • शहडोल में नशे पर बड़ा प्रहार: लेडी ड्रग पेडलर शबनम बी गिरफ्तार, 730 ऑनरेक्स सिरप जब्त

    शहडोल में नशे पर बड़ा प्रहार: लेडी ड्रग पेडलर शबनम बी गिरफ्तार, 730 ऑनरेक्स सिरप जब्त


    शहडोल । शहडोल जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अब तक की बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कोतवाली थाना पुलिस ने दुर्गा कॉलोनी स्थित टेक्निकल ग्राउंड के पास रहने वाली कथित लेडी ड्रग पेडलर शबनम बी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 730 नग ऑनरेक्स कफ सिरप जब्त किया है। जब्त सिरप की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये बताई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी शबनम बी पहले भी नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त पाई जा चुकी है। लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने सुनियोजित रणनीति बनाकर दबिश दी और उसे रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि आरोपी बाहरी राज्यों से नशीली सामग्री मंगाकर जिले में युवाओं के बीच सप्लाई कर रही थी जिससे युवा वर्ग तेजी से नशे की चपेट में आ रहा था।

    कार्रवाई के दौरान एक संगठित गिरोह का खुलासा भी हुआ है। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में बंटी उसका बेटा और दामाद के अलावा अंतरराज्यीय तस्कर रमेश जायसवाल सहित अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पांच अन्य संदिग्धों की पहचान भी कर ली गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह से जुड़े सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।

    कोतवाली थाना प्रभारी राघवेंद्र तिवारी ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नशे के खिलाफ यह विशेष अभियान चलाया गया। 730 ऑनरेक्स सिरप के साथ एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया गया है जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

    इस सख्त कार्रवाई के बाद जिले में नशा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं आमजन ने पुलिस की इस पहल की सराहना की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

  • इंदौर-भोपाल घटनाक्रम पर गरमाई सियासत, PCC चीफ जीतू पटवारी ने CS को लिखा पत्र

    इंदौर-भोपाल घटनाक्रम पर गरमाई सियासत, PCC चीफ जीतू पटवारी ने CS को लिखा पत्र


    भोपाल । भोपाल और इंदौर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट और पार्टी कार्यालयों पर हुए कथित हमलों को लेकर प्रदेश की सियासत तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी आपत्ति जताते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र लिखा है।

    जीतू पटवारी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि भोपाल, इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यालयों पर संगठित रूप से हमला किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं पर जानलेवा हमले का प्रयास किया गया, जबकि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बनी रही। पटवारी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया है।

    उन्होंने कहा कि पीसीसी कार्यालय पर हुए प्रदर्शन ने गुंडागर्दी का रूप ले लिया। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और कार्यालयों में तोड़फोड़ की कोशिश की गई। उनके अनुसार, यह घटनाएं प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होंगी।

    पत्र में पटवारी ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी भी स्तर पर राजनीतिक संरक्षण या सहमति की भूमिका पाई जाती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता का कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर विश्वास कायम रह सके। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

    इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

  • मार्च 2026 में 'रवि' और 'सोम' प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग: महादेव की कृपा पाने के लिए नोट कर लें शुभ मुहूर्त और तिथि

    मार्च 2026 में 'रवि' और 'सोम' प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग: महादेव की कृपा पाने के लिए नोट कर लें शुभ मुहूर्त और तिथि


    नई दिल्ली ।हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को सर्वोत्तम माना गया है। पौराणिक मान्यताओं और शिव पुराण के अनुसार, त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में महादेव स्वयं शिवलिंग में साक्षात विराजमान होते हैं। मार्च 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए विशेष होने वाला है, क्योंकि इस महीने में दो अत्यंत फलदायी प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। पहला व्रत जहाँ रविवार को होने के कारण “रवि प्रदोष” कहलाएगा, वहीं दूसरा व्रत सोमवार को होने की वजह से “सोम प्रदोष” के नाम से जाना जाएगा। शास्त्रों में इन दोनों ही वारों पर पड़ने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, जो साधक को आरोग्य और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

    मार्च महीने के पहले प्रदोष व्रत की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी तिथि से हो रही है। पंचांग के अनुसार, यह तिथि 28 फरवरी की रात 08 बजकर 43 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 1 मार्च, रविवार को रात 09 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए 1 मार्च को “रवि प्रदोष व्रत” रखा जाएगा। इस दिन महादेव की पूजा के लिए शाम 06 बजकर 21 मिनट से लेकर 07 बजकर 09 मिनट तक का समय सबसे शुभ रहेगा। रविवार को प्रदोष व्रत रखने से सूर्य देव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे व्यक्ति को मान-सम्मान और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

    वहीं, मार्च का दूसरा प्रदोष व्रत चैत्र कृष्ण त्रयोदशी को पड़ेगा। इसकी तिथि 16 मार्च 2026 को सुबह 09:40 बजे प्रारंभ होकर 17 मार्च की सुबह 09:23 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल की गणना के अनुसार, यह व्रत 16 मार्च को रखा जाएगा। सोमवार का दिन होने के कारण यह “सोम प्रदोष” कहलाएगा, जिसे शिवजी का सबसे प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन पूजा का मुहूर्त शाम 06:30 बजे से रात 08:54 बजे तक रहेगा। सोम प्रदोष का व्रत करने से वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं और चंद्रमा की शुभता बढ़ती है।

    प्रदोष व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन निराहार रहकर शिवलिंग पर जल, दूध और विशेष रूप से “बेलपत्र” अर्पित करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है। यह व्रत क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों से मुक्ति दिलाकर मन में सकारात्मकता का संचार करता है। यदि आप भी महादेव की असीम अनुकंपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने घर में सुख-शांति की कामना रखते हैं, तो मार्च के इन दो विशेष तिथियों को अपनी डायरी में जरूर नोट कर लें।

  • झोपड़ी में स्कूल, फाइलों में कवर्ड गांव: बुरहानपुर के बोमल्यापाट में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

    झोपड़ी में स्कूल, फाइलों में कवर्ड गांव: बुरहानपुर के बोमल्यापाट में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल


    बुरहानपुर । बुरहानपुर जिले के आदिवासी अंचल में स्थित मांडवा ग्राम पंचायत का बोमल्यापाट फाल्या आज भी बुनियादी शिक्षा सुविधाओं के लिए तरस रहा है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां के करीब 60 बच्चे एक मजदूर की झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सरकारी फाइलों में गांव को कवर्ड दिखाया गया है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न पक्का स्कूल भवन है न नियमित शिक्षक और न ही आने-जाने के लिए सड़क।

    ग्रामीणों के अनुसार बच्चे कपड़े बिछाकर झोपड़ी में बैठते हैं। बरसात में कीचड़ और गर्मी में तपती जमीन ही उनका क्लासरूम बनती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां कक्षा 9वीं की छात्रा सीमा बडोले खुद छोटे बच्चों को पढ़ा रही हैं। उन्हें वन विभाग के एक नाकेदार कैलाश द्वारा 3000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया गया है ताकि किसी तरह पढ़ाई जारी रह सके। सवाल उठता है कि क्या आदिवासी बस्ती की शिक्षा अब दान और व्यक्तिगत सहयोग पर चलेगी?

    ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की जनप्रतिनिधि भी आदिवासी समाज से आती हैं इसके बावजूद बच्चों को बुनियादी स्कूल तक नसीब नहीं है। चुनाव के समय वादे होते हैं लेकिन उसके बाद हालात जस के तस बने रहते हैं। छात्र राजेश और राहुल सहित अन्य बच्चों का कहना है कि वे पढ़ना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी उनके सपनों के आड़े आ रही है। ग्राम के युवा मास्टर रावत ने शासन से तत्काल स्कूल भवन नियमित शिक्षक और सड़क की मांग की है।

    सरकारी योजनाओं के दावों के बीच बोमल्यापाट की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जब इस संबंध में नेपानगर के एसडीएम भागीरथ वाखला से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि यदि गांव धरती आभा योजना में छूट गया है तो प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा और शिक्षा विभाग से सर्वे कराया जाएगा। वहीं आदिवासी विभाग के उपसंचालक भारत जांचपुरे ने भरोसा दिलाया कि प्रस्ताव तैयार कर डीपीसी के माध्यम से भोपाल भेजा जाएगा और बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

    हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक सिर्फ सर्वे और प्रस्ताव की प्रक्रिया चलती रहेगी? 78 वर्षों बाद भी यदि एक गांव में स्कूल भवन और शिक्षक की व्यवस्था नहीं हो पाती तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। बोमल्यापाट के बच्चे आज भी झोपड़ी में बैठकर भविष्य संवारने का सपना देख रहे हैं। अब देखना है कि शासन-प्रशासन इन बच्चों के लिए ठोस कदम उठाता है या यह बस्ती यूं ही कागजों में कवर्ड और जमीन पर उपेक्षित बनी रहेगी।

  • टी20 वर्ल्ड कप 2026: क्या बारिश बुझा देगी पाकिस्तान की सेमीफाइनल की उम्मीदें? समझिए समीकरण

    टी20 वर्ल्ड कप 2026: क्या बारिश बुझा देगी पाकिस्तान की सेमीफाइनल की उम्मीदें? समझिए समीकरण


    नई दिल्ली ।कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में शनिवार को कुदरत का करिश्मा कुछ ऐसा रहा कि मैदान पर खिलाड़ियों के बजाय सिर्फ बारिश की बूंदें नजर आईं। पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला टी20 वर्ल्ड कप का अहम मुकाबला बिना एक भी गेंद फेंके रद्द हो गया। इस मैच के रद्द होने और दोनों टीमों को एक-एक अंक मिलने के बाद, ग्रुप की स्थिति अब बेहद रोमांचक और साथ ही पेचीदा हो गई है। खास तौर पर पाकिस्तान के लिए, जिसका नेट रन रेट फिलहाल चिंता का विषय है, अब सेमीफाइनल की डगर कांटों भरी नजर आ रही है।

    चूंकि इन मैचों के लिए कोई ‘रिजर्व डे’ नहीं रखा गया है, इसलिए अंक साझा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अब पाकिस्तान के पास कुल एक अंक है और आगे की राह बिल्कुल साफ है: “करो या मरो”। पाकिस्तान को अब 24 फरवरी को इंग्लैंड और 28 फरवरी को श्रीलंका के खिलाफ अपने दोनों बचे हुए मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे। यदि पाकिस्तान ये दोनों मैच जीत लेता है, तो उसके पास कुल पांच अंक हो जाएंगे, जो उसे सेमीफाइनल के दरवाजे तक ले जाने के लिए पर्याप्त होंगे। तीन मैचों के ग्रुप में पांच अंक एक ऐसा ‘सेफ स्कोर’ है, जिसे पार करना किसी भी दूसरी टीम के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।

    असली पेंच तब फंसेगा जब पाकिस्तान एक मैच जीते और एक हार जाए। ऐसी स्थिति में टीम के पास केवल तीन अंक होंगे और फिर बात “नेट रन रेट” और दूसरी टीमों के नतीजों पर टिक जाएगी। पाकिस्तान का इतिहास गवाह है कि नेट रन रेट के मामले में वह अक्सर पिछड़ जाता है, इसलिए एक भी हार या एक और मैच का बारिश में धुलना सीधे तौर पर टीम को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा सकता है। प्रशंसकों की दुआएं अब सिर्फ जीत के लिए नहीं, बल्कि साफ मौसम के लिए भी होंगी।

    दिलचस्प बात यह है कि सांख्यिकीय दृष्टि से इस मैच के धुलने का पाकिस्तान और न्यूजीलैंड को थोड़ा फायदा भी हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सभी चारों टीमों को बराबर शक्तिशाली माना जाए, तो मैच रद्द होने से दोनों टीमों के खाते में एक गारंटीड अंक जुड़ गया है और हार का खतरा टल गया है। आंकड़ों के लिहाज से अब पाकिस्तान और न्यूजीलैंड की सेमीफाइनल में पहुंचने की संभावना लगभग 56.25% हो गई है, जबकि इंग्लैंड और श्रीलंका, जिन्हें अभी जोखिम भरे मैच खेलने हैं, उनकी संभावना 43.75% के आसपास है। हालांकि, यह गणित केवल तभी काम करेगा जब पाकिस्तान मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करे। फिलहाल, पाकिस्तान के लिए टूर्नामेंट का हर ओवर एक ‘फाइनल’ की तरह है।