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  • मच्छरों और बदबू से परेशान हैं? कूलर में डालें फिटकरी और पाएं ठंडी, साफ और सुरक्षित हवा

    मच्छरों और बदबू से परेशान हैं? कूलर में डालें फिटकरी और पाएं ठंडी, साफ और सुरक्षित हवा


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम में एयर कूलर आम लोगों के लिए राहत का सबसे सस्ता और असरदार साधन बन जाता है खासकर मिडिल क्लास परिवारों में कूलर का उपयोग तेजी से बढ़ जाता है लेकिन इसके साथ एक बड़ी समस्या भी सामने आती है और वह है कूलर के टैंक में जमा गंदा पानी और उससे आने वाली बदबू यह समस्या न केवल असहजता पैदा करती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है

    दरअसल कूलर में जमा पानी कुछ ही दिनों में गंदा होने लगता है और उसमें बैक्टीरिया तथा सूक्ष्म जीव पनपने लगते हैं यही कारण है कि कूलर चलाने पर कमरे में सीलन और बदबू महसूस होती है इसके अलावा रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल जगह बन जाता है जिससे डेंगू मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है

    ऐसी स्थिति में अगर आप इस समस्या से राहत पाना चाहते हैं तो आपकी रसोई में मौजूद एक साधारण सी चीज फिटकरी बेहद कारगर साबित हो सकती है फिटकरी का उपयोग सदियों से पानी को साफ करने के लिए किया जाता रहा है और इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है जब फिटकरी को पानी में डाला जाता है तो यह उसमें मौजूद गंदगी के सूक्ष्म कणों को आपस में जोड़ देती है जिससे वे भारी होकर टैंक की तली में बैठ जाते हैं और ऊपर का पानी साफ और पारदर्शी हो जाता है

    कूलर के टैंक में फिटकरी का एक छोटा सा टुकड़ा डालने से पानी लंबे समय तक साफ बना रहता है और उसमें गंदगी जल्दी जमा नहीं होती इसके साथ ही यह मच्छरों के लार्वा के पनपने की संभावना को भी कम कर देता है क्योंकि फिटकरी पानी के रासायनिक संतुलन में ऐसा बदलाव लाती है जो मच्छरों के लिए अनुकूल नहीं होता

    इसके अलावा फिटकरी में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं जो पानी में मौजूद बैक्टीरिया और हानिकारक जीवाणुओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं यही वजह है कि कूलर से आने वाली बदबू भी धीरे धीरे खत्म हो जाती है जब पानी साफ और बैक्टीरिया मुक्त होता है तो कूलर से निकलने वाली हवा भी ताजी और ठंडी महसूस होती है

    हालांकि फिटकरी का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है विशेषज्ञों के अनुसार कूलर के टैंक में बहुत अधिक मात्रा में फिटकरी डालना सही नहीं है एक छोटा सा टुकड़ा ही पर्याप्त होता है अधिक मात्रा में उपयोग करने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है

    इसके साथ ही केवल फिटकरी पर निर्भर रहना भी सही नहीं है कूलर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है टैंक और पैड्स को समय समय पर साफ करना चाहिए ताकि फंगस और गंदगी जमा न हो सके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर तीन से चार दिन में कूलर का पानी पूरी तरह बदलना एक अच्छी आदत है

    अगर आप इन आसान घरेलू उपायों को अपनाते हैं तो न केवल कूलर की बदबू और गंदगी से छुटकारा पा सकते हैं बल्कि अपने परिवार को मच्छरों से होने वाली खतरनाक बीमारियों से भी सुरक्षित रख सकते हैं

  • बालों की सेहत का राज गर्मियों में कितनी बार धोएं बाल और कैसे रखें नैचुरल चमक बरकरार

    बालों की सेहत का राज गर्मियों में कितनी बार धोएं बाल और कैसे रखें नैचुरल चमक बरकरार

    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही तेज धूप पसीना धूल और प्रदूषण का असर सबसे पहले हमारे बालों और सिर की त्वचा पर दिखाई देने लगता है। इस दौरान कई लोगों के बाल चिपचिपे और बेजान हो जाते हैं तो कुछ लोगों को रूखेपन और बाल झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या गर्मियों में रोजाना बाल धोना चाहिए या फिर सीमित बार ही शैंपू करना बेहतर होता है

    दरअसल हमारे सिर की त्वचा प्राकृतिक रूप से एक तेल बनाती है जिसे सीबम कहा जाता है। यह तेल बालों को पोषण देता है और उन्हें सूखने से बचाकर उनकी प्राकृतिक चमक बनाए रखता है। लेकिन गर्मियों में अत्यधिक पसीना आने के कारण यह तेल धूल और गंदगी के साथ मिलकर सिर में चिपचिपाहट पैदा कर देता है। यदि लंबे समय तक बाल साफ नहीं किए जाएं तो इससे खुजली डैंड्रफ और बाल झड़ने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं

    हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रोजाना शैंपू करना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार बार बार शैंपू करने से सिर की त्वचा का प्राकृतिक तेल कम हो जाता है जिससे बाल कमजोर और रूखे हो सकते हैं। इसलिए बाल धोने की सही आवृत्ति हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति पर निर्भर करती है

    जिन लोगों के बाल तैलीय यानी ऑयली होते हैं उन्हें सप्ताह में लगभग तीन बार बाल धोने की सलाह दी जाती है ताकि अतिरिक्त तेल और गंदगी साफ हो सके। वहीं जिन लोगों के बाल सूखे या घुंघराले होते हैं उनके लिए सप्ताह में एक या दो बार शैंपू करना पर्याप्त होता है। घुंघराले बालों में प्राकृतिक तेल नीचे तक आसानी से नहीं पहुंच पाता जिससे वे जल्दी सूख जाते हैं जबकि सीधे और पतले बाल जल्दी ऑयली नजर आते हैं

    बाल धोने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उन्हें धोने की आवृत्ति। बहुत ज्यादा गर्म पानी से बाल धोना नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि इससे बालों की नमी खत्म हो जाती है और वे बेजान दिखने लगते हैं। हमेशा हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना बेहतर होता है

    शैंपू लगाने का सही तरीका यह है कि पहले उसे हथेली पर लेकर हल्का झाग बना लें और फिर धीरे धीरे सिर की त्वचा पर लगाएं। बालों को जोर से रगड़ने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बाल टूट सकते हैं। इसके बाद साफ पानी से बालों को अच्छी तरह धोना जरूरी है ताकि कोई केमिकल अवशेष न रह जाए

    शैंपू के बाद कंडीशनर का इस्तेमाल भी बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह बालों को मुलायम बनाता है और उन्हें टूटने से बचाता है। खासकर लंबे और सूखे बालों वाले लोगों के लिए कंडीशनर बेहद जरूरी माना जाता है

    अंत में यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति के बाल अलग होते हैं इसलिए एक ही नियम सभी पर लागू नहीं होता। सही जानकारी और संतुलित देखभाल से ही आप गर्मियों में भी अपने बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रख सकते हैं

  • ना कोल्ड ड्रिंक ना जूस, गर्मी में शरीर को ठंडा रखेगा घर का बना कच्चे आम का झोलिया

    ना कोल्ड ड्रिंक ना जूस, गर्मी में शरीर को ठंडा रखेगा घर का बना कच्चे आम का झोलिया

    नई दिल्ली । भीषण गर्मी और तपती धूप के इस मौसम में जब तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है तब शरीर को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है ऐसे में लू और डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है लोग राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड जूस का सहारा लेते हैं लेकिन ये पेय पदार्थ शरीर को तात्कालिक राहत देने के बजाय कई बार नुकसान भी पहुंचा सकते हैं ऐसे समय में किचन में मौजूद एक देसी और पारंपरिक उपाय आपकी सेहत के लिए किसी अमृत से कम नहीं है और वह है कच्चे आम से बना झोलिया

    कच्चे आम जिसे कैरी भी कहा जाता है गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है इससे बना झोलिया न केवल स्वाद में चटपटा और ताजगी भरा होता है बल्कि यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और लू से बचाने में मदद करता है खास बात यह है कि इसे घर पर बहुत ही कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है

    झोलिया बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे आम को धोकर छील लिया जाता है और छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है इसके बाद एक बर्तन में पानी गरम करके आम के टुकड़ों को कुछ मिनट तक उबाला जाता है जब आम नरम हो जाए तो उसे ठंडा कर लिया जाता है इसके बाद मिक्सर में उबले हुए आम के साथ पुदीना हरा धनिया हरी मिर्च और कुछ खास मसाले मिलाए जाते हैं इसमें काला नमक सादा नमक काली मिर्च और स्वादानुसार चीनी डालकर इसे अच्छी तरह पीस लिया जाता है

    जब यह मिश्रण स्मूद हो जाए तो इसे छानकर ठंडा किया जाता है और जरूरत के अनुसार पानी या बर्फ मिलाकर सर्व किया जाता है यह पेय न केवल प्यास बुझाता है बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है

    गर्मी के मौसम में कच्चे आम का झोलिया पीने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं यह पाचन को बेहतर बनाता है शरीर को ऊर्जा देता है और लू के प्रभाव से बचाता है साथ ही इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में पानी की कमी को दूर करने में सहायक होते हैं

    खास बात यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक पेय है जिसमें किसी प्रकार के केमिकल या प्रिजर्वेटिव नहीं होते इसलिए यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए सुरक्षित और फायदेमंद है इसे आप घर आए मेहमानों को भी ठंडे शरबत के रूप में परोस सकते हैं या फिर इसे पानी पुरी के पानी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं

    आज जब लोग हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर लौट रहे हैं ऐसे में कच्चे आम का झोलिया एक बार फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है यह न केवल स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम है बल्कि भारतीय परंपरा का भी एक अहम हिस्सा है जो हमें प्राकृतिक तरीकों से स्वस्थ रहने की सीख देता है

  • पानी पीने के बाद भी नहीं बुझ रही प्यास? शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत

    पानी पीने के बाद भी नहीं बुझ रही प्यास? शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत


    नई दिल्ली ।गर्मी के मौसम में बार-बार प्यास लगना और गला सूखना आम बात मानी जाती है लेकिन जब पर्याप्त पानी पीने के बाद भी यह समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है यह शरीर द्वारा दिया जाने वाला एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है जिसे मेडिकल भाषा में जेरोस्टोमिया कहा जाता है

    जेरोस्टोमिया वह स्थिति है जिसमें मुंह में लार का उत्पादन कम हो जाता है लार हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि यह भोजन को पचाने में मदद करती है मुंह को नम बनाए रखती है और बैक्टीरिया से बचाव करती है जब लार ग्रंथियां ठीक से काम नहीं करतीं तो मुंह में सूखापन महसूस होने लगता है और व्यक्ति को बार बार पानी पीने की जरूरत पड़ती है

    हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यह समस्या केवल पानी की कमी नहीं बल्कि कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकती है इनमें सबसे प्रमुख डायबिटीज है जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है तो किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए अधिक पेशाब बनाती है जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और मुंह सूखने लगता है साथ ही लगातार प्यास भी महसूस होती है

    इसके अलावा यह लक्षण अल्जाइमर स्ट्रोक एचआईवी संक्रमण और नर्व डैमेज जैसी गंभीर स्थितियों से भी जुड़े हो सकते हैं कई मामलों में यह ऑटोइम्यून डिसऑर्डर का संकेत भी होता है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही अपनी लार ग्रंथियों को प्रभावित करने लगती है विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कई बार यह समस्या बीमारियों के बजाय दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी हो सकती है हाई ब्लड प्रेशर एलर्जी डिप्रेशन या घबराहट की दवाएं लार ग्रंथियों की कार्यक्षमता को कम कर देती हैं जिससे मुंह सूखने की समस्या बढ़ जाती है

    इस स्थिति से बचने के लिए केवल सादा पानी पीना पर्याप्त नहीं होता शरीर को सही तरीके से हाइड्रेट रखना जरूरी है इसके लिए नींबू पानी नारियल पानी और ओआरएस का सेवन फायदेमंद माना जाता है इसके साथ ही तरबूज खरबूजा खीरा और ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फलों को आहार में शामिल करना चाहिए चाय कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा सकते हैं पानी में पुदीना या नींबू डालकर पीना भी राहत दे सकता है

    अगर यह समस्या कई दिनों तक बनी रहती है और इसके साथ चबाने या निगलने में कठिनाई महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए समय पर जांच और इलाज से कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है

  • 25 अप्रैल राशिफल: आज सितारे क्या संकेत दे रहे हैं?

    25 अप्रैल राशिफल: आज सितारे क्या संकेत दे रहे हैं?

    नई दिल्ली । 25 अप्रैल 2026, शनिवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस दिन का स्वामी ग्रह शनि कर्म, न्याय और फल देने वाला ग्रह है। शनि व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसे परिणाम प्रदान करता है, इसलिए इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव डाल रही है। कुछ राशियों के लिए यह दिन सफलता और लाभ के नए द्वार खोल रहा है, तो कुछ को धैर्य और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता होगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह दिन जीवन के कई क्षेत्रों में बदलाव और अवसर लेकर आ सकता है।


    2. मेष से कर्क राशि तक कैसा रहेगा दिन

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। स्वभाव में हल्कापन और मजाकिया अंदाज रहेगा, लेकिन परिवार में तनाव की स्थिति बन सकती है। आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं, हालांकि जीवनसाथी के खर्चों पर नियंत्रण जरूरी होगा। वृषभ राशि के लिए दिन शुभ है, कार्यक्षेत्र में सराहना और परिवार से खुशखबरी मिल सकती है। मिथुन राशि वालों पर काम का दबाव बढ़ेगा लेकिन रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। कर्क राशि के लिए यह दिन आर्थिक और करियर दोनों दृष्टि से लाभकारी रहेगा, स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलेगा।


    3. सिंह से तुला राशि तक मिलाजुला असर

    सिंह राशि के जातकों को कार्यस्थल की राजनीति से दूर रहने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि अधिक दबाव से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। परिवार और भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा। कन्या राशि के लिए यह दिन नए अवसरों से भरा रहेगा, लेकिन खर्चों में बढ़ोतरी संभव है। तुला राशि के लिए आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी है, हालांकि सही निर्णय से लाभ और नए संपर्क बन सकते हैं। पारिवारिक मामलों में आपकी भूमिका अहम रहेगी और संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।


    4. वृश्चिक से कुंभ राशि तक बनेंगे शुभ योग

    वृश्चिक राशि के लिए यह दिन लाभकारी साबित होगा, रुका हुआ धन वापस मिलने और करियर में प्रगति के योग हैं। धनु राशि वालों को प्रॉपर्टी और कानूनी मामलों में सावधानी रखनी होगी, क्योंकि निर्णय मनमाफिक नहीं हो सकते। मकर राशि के जातकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और निवेश से लाभ मिलेगा, साथ ही परिवार में शुभ कार्य के संकेत हैं। कुंभ राशि के लिए भाग्य का पूरा साथ मिलेगा, दोस्तों के साथ समय अच्छा बीतेगा और कार्यक्षेत्र में बदलाव के योग बन रहे हैं।


    5. मीन राशि के लिए सतर्कता जरूरी, दिन रहेगा संतुलित

    मीन राशि के जातकों के लिए यह दिन सतर्क रहने का संकेत दे रहा है। ऑफिस में राजनीति से बचना जरूरी होगा और कार्यभार बढ़ सकता है। आर्थिक स्थिति में खर्च बढ़ने के योग हैं, इसलिए संतुलन बनाकर चलना जरूरी रहेगा। परिवार और दोस्तों का सहयोग मिलेगा, जिससे मानसिक शांति बनी रहेगी। प्रेम जीवन में विश्वास बढ़ेगा, लेकिन सेहत को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। कुल मिलाकर यह दिन कई राशियों के लिए अवसरों से भरा रहेगा, जबकि कुछ को संयम और समझदारी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।

  • शनि दोष से मुक्ति के अचूक उपाय हर शनिवार करें ये सरल काम और पाए सफलता

    शनि दोष से मुक्ति के अचूक उपाय हर शनिवार करें ये सरल काम और पाए सफलता


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मों का फल देने वाला माना जाता है इसलिए उनका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर डालता है। बहुत से लोग शनि का नाम सुनते ही डर जाते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि शनि देव केवल उन लोगों को दंड देते हैं जो गलत मार्ग पर चलते हैं जबकि सच्चे और मेहनती लोगों को ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। यदि किसी की कुंडली में साढ़ेसाती ढैय्या या शनि दोष चल रहा हो तो जीवन में कई तरह की परेशानियां सामने आने लगती हैं जैसे आर्थिक संकट मानसिक तनाव और काम में रुकावट। ऐसे में शनिवार के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन की दिशा बदल सकते हैं और शनि देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

    शनिवार की शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। दीपक जलाते समय ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जप करना चाहिए। मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में सभी देवी देवताओं का वास होता है और शनि देव विशेष रूप से इससे प्रसन्न होते हैं। दीपक जलाने के बाद पीपल की सात बार परिक्रमा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक प्रभाव धीरे धीरे समाप्त होने लगते हैं।

    छाया दान को शनि दोष दूर करने का अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है। इसके लिए एक लोहे या मिट्टी के पात्र में सरसों का तेल लें और उसमें अपना चेहरा देखें। इसके बाद उस तेल को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें या शनि मंदिर में अर्पित करें। ऐसा करने से यह माना जाता है कि व्यक्ति के जीवन की नकारात्मकता उस तेल के माध्यम से दूर हो जाती है और ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होने लगते हैं।

    हनुमान जी की पूजा भी शनि दोष से मुक्ति का सरल और प्रभावी मार्ग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी ने शनि देव को कष्ट से मुक्त कराया था जिसके बाद शनि देव ने वचन दिया कि जो भी व्यक्ति हनुमान जी की भक्ति करेगा उसे वे कष्ट नहीं देंगे। इसलिए शनिवार के दिन हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना विशेष लाभकारी माना जाता है। इससे मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

    इसके अलावा जानवरों और पक्षियों की सेवा भी शनि देव को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ तरीका है। शनिवार के दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल लगी रोटी खिलाना और पक्षियों को सात प्रकार के अनाज देना पुण्यदायी माना जाता है। यह सेवा भावना शनि देव को प्रिय है और इससे जीवन में स्थिरता और संतुलन आता है।

    जरूरतमंदों की सहायता करना भी शनि कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण उपाय है। शनिवार को काले तिल काली उड़द काला कपड़ा कंबल या जूते दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि का मार्ग खुलता है। यह कर्म शनि देव को अत्यंत प्रिय होता है क्योंकि वे न्याय और सेवा भावना को महत्व देते हैं।

    कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। शनिवार के दिन लोहा नमक सरसों का तेल और लकड़ी खरीदने से बचना चाहिए। साथ ही इस दिन मांस और शराब जैसे तामसिक पदार्थों से दूर रहना चाहिए और किसी के साथ भी गलत व्यवहार नहीं करना चाहिए। सही आचरण और इन उपायों का पालन करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में नई रोशनी आती है।

  • दमोह में गौशालाओं की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए 25 अप्रैल को अहम बैठक

    दमोह में गौशालाओं की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए 25 अप्रैल को अहम बैठक


    दमोह, 24 अप्रैल:
    जिले में संचालित गौशालाओं की व्यवस्था को बेहतर और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में विभिन्न गौशालाओं के निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर व्यवस्थाओं में खामियां सामने आईं, जिन्हें सुधारने के लिए अब ठोस रणनीति तैयार की जा रही है।

    इसी क्रम में कलेक्टर ने 25 अप्रैल को गौशाला संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस बैठक में गौशालाओं के संचालन, उपलब्ध संसाधनों, साफ-सफाई, पशुओं के स्वास्थ्य, चारे-पानी की व्यवस्था और गौवंश की समुचित देखभाल जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई गौशालाओं में मूलभूत सुविधाओं की कमी है, जिससे गौवंश के रखरखाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन अब इन कमियों को दूर करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने जा रहा है, ताकि हर गौशाला में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

    कलेक्टर श्री यादव ने आमजन से भी इस पहल में सहभागिता की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही गौशालाओं की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। नागरिक अपने सुझाव देकर इस अभियान को मजबूत बना सकते हैं।

    प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि जिले की सभी गौशालाओं में गौ माताओं को बेहतर सुविधा, पर्याप्त पोषण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी देखभाल उच्च स्तर पर सुनिश्चित हो सके।

  • राघव चड्ढा के फैसले से AAP में असंतोष उजागर, पार्टी संरचना और नेतृत्व शैली पर उठे गंभीर सवाल..

    राघव चड्ढा के फैसले से AAP में असंतोष उजागर, पार्टी संरचना और नेतृत्व शैली पर उठे गंभीर सवाल..

    नई दिल्ली में राजनीतिक माहौल उस समय अचानक बदल गया जब आम आदमी पार्टी से जुड़े राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय से पार्टी के सक्रिय चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा का यह कदम कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी अप्रत्याशित माना जा रहा है।

    सूत्रों और सामने आई जानकारी के अनुसार, इस निर्णय के पीछे कई आंतरिक कारण माने जा रहे हैं। सबसे पहला कारण संगठन के मूल विचारों से दूरी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि जिस उद्देश्य और सिद्धांतों के आधार पर पार्टी का गठन हुआ था, उसमें समय के साथ बदलाव आया है और यही बदलाव कई वरिष्ठ नेताओं को असहज कर रहा था। राघव चड्ढा का मानना है कि संगठन अपने शुरुआती लक्ष्य से भटकता नजर आ रहा था, जिससे लंबे समय से जुड़े नेताओं में असंतोष बढ़ता गया।

    दूसरे कारण के रूप में पार्टी संगठन में कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर असंतोष सामने आया है। कई नेताओं का मानना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं की भूमिका को धीरे धीरे कम किया गया, जिससे संगठनात्मक संतुलन प्रभावित हुआ। इससे पार्टी के भीतर एक अलग तरह की असहजता पैदा होने लगी थी, जो समय के साथ और गहरी होती चली गई।

    तीसरा कारण नेतृत्व शैली और निर्णय प्रक्रिया में बदलाव बताया जा रहा है। संगठन के भीतर हाल के वर्षों में लिए गए कई निर्णयों को लेकर असहमति बढ़ी और कई नेताओं को यह महसूस होने लगा कि उनकी राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से पार्टी के भीतर संवाद की कमी और दूरी बढ़ने लगी।

    चौथा कारण व्यक्तिगत राजनीतिक दिशा से जुड़ा माना जा रहा है। युवा नेतृत्व के तौर पर राघव चड्ढा को लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत भूमिका निभाने वाला चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनके सामने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प और अवसर भी उभर रहे थे, जिसने उनके निर्णय को प्रभावित किया।

    पांचवां कारण पार्टी के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान और अलगाव की स्थिति को बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय से यह संकेत मिल रहे थे कि संगठन में एकजुटता की कमी बढ़ रही है और विभिन्न गुटों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि कई नेता धीरे धीरे अपने रास्ते अलग करने की दिशा में बढ़ने लगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में गहन चर्चा को जन्म दिया है। जहां कुछ लोग इसे संगठनात्मक पुनर्गठन का परिणाम मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे नेतृत्व और कार्यशैली में बदलाव की आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस निर्णय का राजनीतिक संतुलन और पार्टी की रणनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

  • दमोह में बिजली बकायेदारों पर सख्ती, विभाग ने शुरू की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई

    दमोह में बिजली बकायेदारों पर सख्ती, विभाग ने शुरू की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई


    दमोह । दमोह शहर में बिजली बिल बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग के अनुसार शहर में लगभग 7 हजार उपभोक्ताओं पर करीब 4 करोड़ 68 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है, जिसे वसूलने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
    बिजली विभाग द्वारा कनेक्शन काटने की कार्रवाई के बावजूद कई उपभोक्ता अवैध रूप से बिजली का उपयोग करते पाए गए हैं। ऐसे मामलों में विभाग ने सख्ती दिखाते हुए चार नामजद आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कर जांच के लिए मामला सौंपा है। ये आरोपी अवैध रूप से लाइन से छेड़छाड़ कर बिजली का उपयोग कर रहे थे।
    विभाग ने बकाया राशि जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 146 एवं 147 के तहत आरआरसी नोटिस जारी कर कुर्की की कार्रवाई भी शुरू कर दी है।इसी क्रम में अधीक्षण अभियंता के निर्देशन में 24 अप्रैल को विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान फीडर नंबर 24 में कार्रवाई करते हुए शिवशक्ति मंदिर के पास रहने वाली माया/देवेंद्र जाटव, जिन पर 64 हजार रुपये बकाया था, तथा मल्लपुरा नया बाजार क्षेत्र के निवासी दयाशंकर/डल्लू प्रसाद अहिरवार, जिन पर 42,178 रुपये बकाया था, के दो वाहनों को जब्त किया गया।
    अधीक्षण अभियंता ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और बकाया भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की संपत्ति कुर्क कर नीलामी तक की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सहायक अभियंताओं को तहसीलदार की शक्तियां प्रदान की गई हैं, जिससे राजस्व वसूली की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
    अपील:
    बिजली विभाग ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने लंबित बिजली बिलों का शीघ्र भुगतान करें, अन्यथा उन्हें सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

  • घुटनों और कूल्हों की कमजोरी का आसान इलाज, नी मूवमेंट से पाएं संतुलन और ताकत

    घुटनों और कूल्हों की कमजोरी का आसान इलाज, नी मूवमेंट से पाएं संतुलन और ताकत


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती जीवनशैली का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ नजर आने लगा है लंबे समय तक बैठकर काम करना शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान के कारण घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में दर्द कमजोरी और अकड़न जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं पहले ये समस्याएं उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देती थीं लेकिन अब युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं है

    ऐसे में योग का एक बेहद आसान लेकिन प्रभावी अभ्यास नी मूवमेंट लोगों के लिए राहत का जरिया बन सकता है जिसे समस्थिति भी कहा जाता है यह एक बेसिक योग मुद्रा है लेकिन इसके फायदे बेहद व्यापक हैं भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार यह अभ्यास न केवल घुटनों और हिप जॉइंट्स को मजबूत बनाता है बल्कि शरीर के निचले हिस्से की स्थिरता और ताकत भी बढ़ाता है

    नी मूवमेंट को करने के लिए किसी विशेष उपकरण या जगह की जरूरत नहीं होती इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को आपस में मिला लें हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें और नजर सामने की ओर स्थिर रखें इसके बाद धीरे धीरे अपने शरीर को ऐसे नीचे झुकाएं जैसे आप हवा में कुर्सी पर बैठने जा रहे हों इस स्थिति में शरीर को संतुलित रखते हुए कुछ मिनट तक रुकना होता है

    यह अभ्यास देखने में जितना सरल लगता है उतना ही असरदार है नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में मजबूती आती है साथ ही जांघों और पिंडलियों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद है क्योंकि यह शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और कमजोरी को दूर करता है

    नी मूवमेंट का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह शरीर के संतुलन को बेहतर बनाता है जिससे रोजमर्रा के काम करना आसान हो जाता है इसके साथ ही यह मानसिक एकाग्रता को भी बढ़ाता है जब आप इस मुद्रा में स्थिर रहते हैं तो आपका ध्यान पूरी तरह शरीर और सांस पर केंद्रित होता है जिससे तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है

    यह अभ्यास केवल शारीरिक मजबूती तक सीमित नहीं है बल्कि यह शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने में भी मदद करता है व्यस्त दिनचर्या में यदि रोजाना कुछ मिनट भी इस अभ्यास के लिए निकाल लिए जाएं तो यह लंबे समय में बड़े फायदे दे सकता है

    हालांकि यह एक सरल योग अभ्यास है लेकिन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं है जिन लोगों को गंभीर जोड़ों की समस्या या आर्थराइटिस है उन्हें इसे करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए स्वस्थ व्यक्ति इसे नियमित रूप से अपनाकर अपने शरीर को मजबूत और संतुलित बना सकते हैं