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  • किसानों के लिए बड़ा फैसला भू अर्जन पर चार गुना मुआवजा भाजपा किसान मोर्चा ने जताया आभार

    किसानों के लिए बड़ा फैसला भू अर्जन पर चार गुना मुआवजा भाजपा किसान मोर्चा ने जताया आभार


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में किसानों के हित में लिए गए एक बड़े फैसले के बाद उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा भू अर्जन के मामलों में किसानों को चार गुना मुआवजा देने की घोषणा के बाद किसान वर्ग के साथ साथ भाजपा कार्यकर्ताओं में भी खुशी की लहर दौड़ गई है। इस फैसले को किसानों के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताया जा रहा है।

    भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला न केवल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम है बल्कि उनके सम्मान और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।

    कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत लिए गए इस निर्णय की खुशी में आगर मालवा के छावनी नाका क्षेत्र में भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। इस दौरान पटाखे फोड़े गए और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और उन्होंने सरकार के इस फैसले को किसानों के लिए नई उम्मीद का प्रतीक बताया।

    कार्यकर्ताओं ने कहा कि लंबे समय से किसान उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे और यह निर्णय उनकी उस मांग को पूरा करता है। भू अर्जन के दौरान किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम बेहद जरूरी था। अब चार गुना मुआवजा मिलने से किसानों को राहत मिलेगी और वे अपनी आजीविका को बेहतर तरीके से संभाल सकेंगे।

    इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष ओम मालवीय, पूर्व जिला अध्यक्ष करण सिंह यादव और किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष दिनेश परमार सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है और आने वाले समय में ऐसे और भी फैसले लिए जाएंगे।

    यह फैसला प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूती देने और किसानों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के इस कदम से किसानों में भरोसा बढ़ा है और उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस कराने में मदद मिलेगी।

  • आगर मालवा में दर्दनाक हादसा अज्ञात वाहन की टक्कर से मां की मौत बेटा घायल

    आगर मालवा में दर्दनाक हादसा अज्ञात वाहन की टक्कर से मां की मौत बेटा घायल


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में 38 वर्षीय सपना माली की मौत हो गई जबकि उनका बेटा रोहित घायल हो गया। घटना आगर और आमला मार्ग पर ग्राम मोयाखेड़ा के पास हुई जब एक अज्ञात वाहन ने पीछे से उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।
    जानकारी के अनुसार सपना अपने बेटे रोहित के साथ नलखेड़ा क्षेत्र के बड़ागांव में आयोजित एक मान कार्यक्रम में शामिल होकर अपने घर लौट रही थीं। रात का समय होने के कारण सड़क पर दृश्यता कम थी और इसी दौरान तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उनकी स्कूटी को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
    हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने सपना को मृत घोषित कर दिया। वहीं उनके बेटे रोहित को गंभीर चोटें आई हैं और उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसका इलाज जारी है। परिजनों के अनुसार सपना एक गृहिणी थीं और परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल रही थीं। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी है जिनमें से बेटी की शादी हो चुकी है।
    इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय लोगों ने सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों और लापरवाही से ड्राइविंग को इस तरह के हादसों की बड़ी वजह बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर अक्सर तेज गति से वाहन चलते हैं जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मध्य प्रदेश पुलिस के अंतर्गत कोतवाली थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी वाहन की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
    शनिवार सुबह जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई जिसके बाद सपना का शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सावधानी की जरूरत को उजागर किया है। वहीं पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय सतर्कता बरतें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
  • उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में प्रचंड गर्मी से लोग बेहाल …. अगले 4 दिन हीटवेव का अलर्ट

    उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में प्रचंड गर्मी से लोग बेहाल …. अगले 4 दिन हीटवेव का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India) के मैदानी भागों और मध्य भारत (Central India) में प्रचंड गर्मी (Extreme heat.) ने कोहराम मचा दिया है। आसमान से बरसती आग और औद्योगिक इकाइयों व वाहनों से फैलते प्रदूषण ने दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR.) समेत बड़े शहरों में दुश्वारियां और बढ़ा दी हैं। ज्यादातर इलाकों में लू चल रही है और सुबह 10 बजे के बाद से ही घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।

    अभी तीन से चार दिन यही स्थित बनी रहने और लू चलने की प्रबल संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम हिमालयी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर में गरज-चमक के साथ बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से मौसम खुशनुमा बना हुआ है।

    इन राज्यों में चलेगी लू, नहीं मिलेगी गरमी से राहत
    भारतीय मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में पिछले कई दिनों से लू चल रही है। इससे लू की स्थिति और भी गंभीर हो गई। आईएमडी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल, मणिपुर, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर बारिश और तेज हवाएं चलने से लोगों को गर्मी से राहत भी मिली।


    गरमी बढ़ाने वाला अल नीनो इस साल फिर ढाएगा कहर

    संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि पिछली बार दुनिया का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली मौसमी घटना अल नीनो के इस साल 2026 के मध्य में फिर से लौटने की उम्मीद है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र की मौसम एवं जलवायु एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा कि आगामी मई से जुलाई के बीच अल नीनो के हालात बनने के पूरे आसार हैं और इसके शुरुआती संकेत भी दिखने लगे हैं।

    यह मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सतह के तापमान को बढ़ाती है। इससे हवाओं, दबाव और वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन आता है। मौसम की स्थिति अल नीनो और उसके विपरीत ला नीना और सामान्य स्थिति के बीच बदलती रहती है। पिछले अल नीनो के कारण 2023 अब तक का दूसरा सबसे गर्म साल और 2024 अब तक का सबसे गर्म साल बना।


    भीषण गर्मी की चपेट में यूपी

    उत्तर प्रदेश में प्रचंड गर्मी अपने पूरे रंग में है। शुक्रवार को प्रदेश के ज्यादातर इलाके भीषण गर्मी के चपेट में रहे। तपिश के प्रकोप से अब जनजीवन और लोगों का कामकाज प्रभावित होने लगा है। प्रयागराज, वाराणसी, हरदोई, आगरा, मेरठ,अलीगढ़ और शाहजहांपुर जैसे शहरों भयानक लू के थपेड़ों का प्रकोप रहा और दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। 45.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ प्रयागराज प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। वहीं 44.3 डिग्री, बांदा और हमीरपुर में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।


    तेजी से बढ़ रहा समुद्री सतह का तापमान

    डब्ल्यूएमओ ने कहा कि उसके नवीनतम मासिक वैश्विक मौसमी जलवायु अपडेट में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो मई-जुलाई की शुरुआत में अल नीनो की स्थिति की संभावित वापसी की तरफ इशारा करता है। पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि अगले तीन महीनों में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहेगा।

    डब्ल्यूएमओ ने कहा कि हालांकि, जलवायु परिवर्तन से अल नीनो घटनाओं की तीव्रता नहीं बढ़ती है, लेकिन यह इससे जुड़े असर को बढ़ा सकता है, क्योंकि गर्म महासागर और वायुमंडल से लू और भारी वर्षा जैसी चरम मौसम घटनाओं के लिए ऊर्जा और नमी की उपलब्धता बढ़ जाती है।़

  • AAP को सबसे बड़ा झटका, राघव चड्ढा नहीं, इस सांसद के जाने से हिला केजरीवाल का पूरा संगठन

    AAP को सबसे बड़ा झटका, राघव चड्ढा नहीं, इस सांसद के जाने से हिला केजरीवाल का पूरा संगठन

    नई दिल्ली। 24 अप्रैल 2026 आम आदमी पार्टी के इतिहास में एक बड़े राजनीतिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है। यह दिन सिर्फ राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने के कारण नहीं, बल्कि इसलिए अहम बन गया क्योंकि अरविंद केजरीवाल की टीम में पहली बार इतनी बड़ी टूट देखने को मिली। पार्टी का संसदीय दल बिखर गया और बागी गुट ने एक तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में विलय कर लिया।

    हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम में सबसे बड़ा नुकसान संदीप पाठक के जाने से हुआ है। उनकी भूमिका सिर्फ एक सांसद की नहीं, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की रीढ़ के रूप में देखी जाती थी।

    साल 2022 में जब आम आदमी पार्टी ने हरभजन सिंह और अशोक मित्तल जैसे चेहरों को राज्यसभा भेजा, तब सबसे ज्यादा चर्चा संदीप पाठक को लेकर हुई थी, क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे। लेकिन पर्दे के पीछे उनकी भूमिका बेहद प्रभावशाली थी, जिसे पहचान देते हुए उन्हें उच्च सदन में भेजा गया था।

    2016 में पार्टी से जुड़ने वाले संदीप पाठक ने संगठन के भीतर तेजी से अपनी जगह बनाई। उनकी सार्वजनिक उपस्थिति भले कम रही, लेकिन पार्टी की रणनीति और विस्तार में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। यही वजह रही कि जब तीन राज्यसभा सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने का ऐलान किया, तो सबसे बड़ा झटका संदीप पाठक के फैसले से लगा।

    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, स्वाति मालीवाल या राघव चड्ढा के जाने की आशंका पहले से थी, लेकिन संदीप पाठक का जाना अप्रत्याशित रहा। वहीं अशोक मित्तल और हरभजन सिंह के रुख में बदलाव को उतना चौंकाने वाला नहीं माना गया।

    रणनीति के मास्टरमाइंड थे पाठक
    संदीप पाठक को 2022 में संगठन महासचिव बनाया गया था और वे पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते थे। पंजाब में पार्टी की जीत के पीछे उनकी रणनीति को अहम माना जाता है। इसके अलावा गोवा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनावी रणनीति तैयार करने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। उनकी अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे, तब उनसे मिलने के लिए सुनीता केजरीवाल और बिभव कुमार के साथ संदीप पाठक को ही भेजा गया था।

    कैसे जीता भरोसा
    संदीप पाठक ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत आम आदमी पार्टी में दिल्ली डायलॉग कमीशन से की थी, जहां वे आशीष खेतान के साथ काम करते थे। अपनी रणनीतिक समझ और संगठन क्षमता के दम पर उन्होंने जल्दी ही केजरीवाल का भरोसा जीत लिया और पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक के बाद सबसे अहम पद तक पहुंचे।

    राघव चड्ढा का जाना क्यों कम असरदार
    हालांकि राघव चड्ढा की लोकप्रियता आम जनता में ज्यादा रही है, लेकिन पिछले डेढ़ साल में उनकी सक्रियता पार्टी में कम हो गई थी। वे पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के सदस्य जरूर थे, लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी लगभग खत्म हो चुकी थी। ऐसे में उनका अलग होना अपेक्षित माना जा रहा था।

  • MP में अब सप्ताह में 6 दिन गेहूं खरीदी…. किसान 9 मई तक कर सकेंगे स्लॉट बुक- CM ने की घोषणा

    MP में अब सप्ताह में 6 दिन गेहूं खरीदी…. किसान 9 मई तक कर सकेंगे स्लॉट बुक- CM ने की घोषणा


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुए किसानों के हित में कई अहम घोषणाएं की हैं. उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन (Record Wheat Production) को देखते हुए राज्य ने केंद्र सरकार से खरीदी सीमा बढ़ाने का आग्रह किया था, जिसे स्वीकार करते हुए अब गेहूं उपार्जन लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है. इससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अब गेहूं खरीदी सप्ताह में 6 दिन होगी और स्लॉट बुकिंग की तारीख 9 मई तक बढ़ा दी गई है।

    CM यादव ने बताया कि रिकॉर्ड उत्पादन को देखते हुए सरकार ने खरीदी व्यवस्था को और सुगम बनाया है. गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है।


    6 दिन होगी गेहूं खरीदी

    अब गेहूं उपार्जन सप्ताह में 6 दिन होगा. शनिवार का अवकाश समाप्त कर दिया गया है ताकि किसान निर्बाध रूप से अपनी फसल बेच सकें. वहीं, 30 अप्रैल तक समाप्त होने वाली स्लॉट बुकिंग की अवधि को अब 9 मई 2026 तक बढ़ा दिया गया है।


    भूमि अधिग्रहण पर 4 गुना मुआवजा

    मुख्यमंत्री ने भू-अर्जन को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी दी. अब किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा. यह कदम किसानों के अधिकारों की रक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.


    फसलों पर बोनस और अन्य प्रोत्साहन

    तय समर्थन मूल्य (MSP) पर उड़द की खरीदी के साथ किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त बोनस राशि दी जाएगी। सरसों पर भावांतर योजना के सकारात्मक परिणाम मिले हैं, जिससे किसानों को MSP से भी अधिक दाम मिल रहे हैं। ‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है. साथ ही, कृषक मित्र योजना में 90% सब्सिडी पर सोलर पंप दिए जा रहे हैं।


    मध्य प्रदेश बनेगा ‘मिल्क कैपिटल’

    पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को आय का मुख्य जरिया बनाने के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है. प्रदेश में 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है. हर दिन का दूध संकलन 10 लाख किलो के पार पहुंच गया है. दुग्ध उत्पादक किसानों को अब दूध का दाम 8 से 10 रुपये प्रति किलो बढ़कर मिल रहा है।


    यूरिया की उपलब्धता

    वैश्विक युद्ध स्थितियों के बावजूद प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं होने दी गई है. वर्तमान में 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है. वितरण प्रणाली को डिजिटल और आधुनिक बनाया गया है ताकि किसानों को बिना लंबी लाइनों के खाद मिल सके।

  • 'मैंने प्यार किया' के 37 साल बाद भी बरकरार है भाग्यश्री की मासूमियत का जादू।

    'मैंने प्यार किया' के 37 साल बाद भी बरकरार है भाग्यश्री की मासूमियत का जादू।


    नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री आज इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस हैं। अपनी मासूमियत से दर्शकों का दिल जीतने वाली भाग्यश्री ने सलमान खान के साथ फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से बॉलीवुड में डेब्यू में किया था।

    भाग्यश्री
    इस फिल्म ने भाग्यश्री और सलमान खान को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया था। फिल्म की कहानी ही नहीं, बल्कि इसके गाने भी काफी हिट रहे, जिसे आज भी काफी पसंद किया जाता है।

    भाग्यश्री की एक बहन मधुवंती

    लेकिन क्या आप जानते हैं भाग्यश्री की तरह ही उनकी बहन भी एक्ट्रेस रही हैं। हालांकि, उनकी किस्मत ने उनका साथ नहीं। जी हां, भाग्यश्री की एक बहन हैं, जिनका नाम मधुवंती पटवर्धन है।

    भाग्यश्री ने सलमान संग किया डेब्यू
    मधुवंती ने भी अपनी बहन भाग्यश्री की तरह ही बड़े सुपरस्टार के साथ डेब्यू किया था। हालांकि, जब भाग्यश्री ने सलमान के साथ डेब्यू किया तब वो बड़े स्टार नहीं थे।

    दो आंखें बारह हाथ

    वहीं, मधुवंती ने जब 1997 में जब गोविंदा के साथ डेब्यू किया तब वो बड़े सुपरस्टार थे। मधुवंती ने गोविंदा के साथ ‘दो आंखें बारह हाथ’ साइन की थी तब उन्हें लगा कि ये उनके करियर के लिए सबसे अच्छा लॉन्च है।

    गोविंदा के भाई कीर्ति कुमार

    ‘दो आंखें बारह हाथ’ को गोविंदा के भाई कीर्ति कुमार ने डायरेक्ट किया था। उस वक्त गोविंदा का अच्छा खासा काम चल रहा था। वहीं, ये उनके घर की फिल्म थी, तो जब भी उन्हें टाइम मिलता था वो इसके लिए काम करते।

    मूवी पूरी तरह से बर्बाद हो गई
    हालांकि, कहानी कहा जा रही है, बाकी चीजों कैसी हैं, इस पर गोविंदा ने भी कभी ध्यान नहीं दिया। इसे अच्छा बनाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन कभी देरी की वजह से कभी पैसों की दिक्कत के चलते ये मूवी पूरी तरह से बर्बाद हो गई।

    बुरी तरह से पिट गई फिल्म
    ‘दो आंखें बारह हाथ’ फिल्म जब रिलीज हुई तब भी इसने जरा भी अच्छी छाप नहीं छोड़ी। मधुवंती को लगा था कि ये उनके करियर की लिए बेस्ट साबित होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ये मूवी बुरी तरह से पिट गई।

    मधुवंती का रोल तो कुछ था ही नहीं

    फिल्म को रिलीज होने के काफी वक्त लगा, कहानी भी कुछ खास नहीं थी। वहीं, देखा जाए तो मधुवंती का रोल तो कुछ था ही नहीं। वहीं, जब गोविंदा किसी फिल्म में होते हैं तो सबकी नजरें सिर्फ गोविंदा पर ही होती थी।

    मधुवंती का करियर पूरी तरह से ठप पड़ गया

    ऐसे में मधुवंती अपनी एक्टिंग और डांसिंग से वो चार्म नहीं ला पाई कि वो ऑडियंस को लुभा पाए। यही वजह थी ये फिल्म औंधे मुंह गिरी और मधुवंती का करियर पूरी तरह से ठप पड़ गया।

  • कैबिनेटः मंत्रियों के वेतन में 50% कटौती कर 14,000 करोड़ का कर्ज चुकाएगी तेलंगाना सरकार

    कैबिनेटः मंत्रियों के वेतन में 50% कटौती कर 14,000 करोड़ का कर्ज चुकाएगी तेलंगाना सरकार


    हैदराबाद।
    तेलंगाना (Telangana) की रेवंत रेड्डी सरकार (Revanth Reddy Government) ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए एक मिसाल पेश की है. मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों के वेतन में 50% की स्वैच्छिक कटौती करने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 14,000 करोड़ रुपये के बकाया को 100 दिनों के अंदर निपटाने के लिए एक ठोस एक्शन प्लान को मंजूरी दी है।

    दरअसल, राज्य सरकार वर्तमान में भारी वित्तीय बोझ और लगभग 14,000 करोड़ रुपये की देनदारियों का सामना कर रही है, जिसमें से 8,000 करोड़ रुपये पेंशनभोगियों और 6,200 करोड़ रुपये सेवारत कर्मचारियों के बकाया हैं. पिछली सरकार के समय से रुके इन भुगतानों को सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट ने 100 दिनों की एक कार्य योजना तैयार की है. सरकार ने इसके साथ ही केलेश्वरम परियोजना की सीबीआई जांच तेज करने और गच्चीबोवली स्टेडियम को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले भी लिए हैं. संसाधनों की कमी को देखते हुए मंत्रियों ने खुद पहल कर ये वित्तीय योगदान देने का संकल्प लिया है।

    गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपने हक के पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि जब तेलंगाना राज्य बना था, तब कोई बकाया नहीं था, लेकिन अब ये राशि बहुत बढ़ गई है. सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 8,000 करोड़ रुपये के भुगतान को प्राथमिकता देते हुए एक संसाधन जुटाव उप-समिति बनाई गई है. ये समिति कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संघों से बात कर समाधान निकालेगी. मंत्रियों के 50% वेतन कटौती के बाद अब अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी इसी तरह के उपायों पर विचार किया जा सकता है.


    कालेश्वर प्रोजेक्ट

    इसके अलावा कैबिनेट में कई मुद्दों पर चर्चा की और कई फैसले लिए. कैबिनेट ने कालेश्वरम परियोजना पर जस्टिस पी.सी. घोष आयोग की रिपोर्ट और हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर भी चर्चा की.

    अदालत ने आयोग की वैधता को बरकरार रखा है. हालांकि, प्रक्रियात्मक कमियों की ओर इशारा किया है. सरकार ने पाया कि सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के नौ महीने बाद भी जांच शुरू नहीं हुई है. अब राज्य सरकार दिल्ली के कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार करेगी और सीबीआई से जांच में तेजी लाने की अपील करेगी.


    गच्चीबोवली स्टेडियम बनेगा स्पोर्ट्स हब

    बैठक में हैदराबाद के गच्चीबोवली स्टेडियम को लेकर एक बड़ा विजन पेश किया गया है. इसे पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा. 76 एकड़ में फैले इस परिसर के 64 एकड़ हिस्से में 21 खेलों के लिए सुविधाएं बनाई जाएंगी. स्टेडियम की क्षमता 20,000 से बढ़ाकर 50,000 की जाएगी और यहां एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी भी स्थापित होगी. बाकी 12 एकड़ जमीन का व्यावसायिक उपयोग होगा, जिससे होने वाली आय को खेलों और एथलीटों के विकास पर खर्च किया जाएगा।

    इसके अलावा मंथनी निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की पुरानी मांग को पूरा करते हुए कैबिनेट ने चिन्ना केलेश्वरम परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को हरी झंडी दे दी है. इसके लिए 166.67 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे 45,000 एकड़ जमीन को सिंचाई का लाभ मिलेगा. साथ ही मंचेरियल जिले के हाजीपुर में श्रीपदा येल्लमपल्ली परियोजना के पास एक एकीकृत एक्वा पार्क स्थापित करने के लिए 85.10 एकड़ जमीन आवंटित की गई है.

    RTC कर्मचारियों से अपील
    कैबिनेट ने आरटीसी (RTC) कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत का रास्ता चुनने की अपील की है. डिप्टी सीएम के नेतृत्व में एक आधिकारिक समिति उनकी समस्याओं को सुनने के लिए तैयार है. इसके साथ ही, जिन प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, वहां नामांकन के माध्यम से शासी निकायों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है. सरकार का ये पूरा रोडमैप वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

  • World Malaria Day: मलेरिया के साथ दूसरी बीमारियों का बढ़ रहा खतरा, मल्टी-इंफेक्शन ने बढ़ाई इलाज की चुनौती

    World Malaria Day: मलेरिया के साथ दूसरी बीमारियों का बढ़ रहा खतरा, मल्टी-इंफेक्शन ने बढ़ाई इलाज की चुनौती

    नई दिल्ली। विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर सामने आई एक अहम जानकारी ने मलेरिया को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर बुखार को मलेरिया मानकर इलाज शुरू कर देना कई बार जोखिम भरा साबित हो सकता है। दिल्ली के अस्पतालों में किए गए अध्ययन में पाया गया है कि कई मरीजों में मलेरिया के साथ डेंगू, चिकनगुनिया या टाइफाइड जैसी बीमारियां भी एक साथ मौजूद हैं। यह मल्टी-इंफेक्शन डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

    वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल में जुलाई 2022 से नवंबर 2023 के बीच किए गए अध्ययन में 4259 बुखार के मरीजों की जांच की गई। इनमें से 87 मरीज (करीब 2.04%) मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें लगभग 45 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जिनमें मलेरिया के साथ अन्य संक्रमण भी मौजूद थे, जिससे बीमारी की पहचान और उपचार दोनों जटिल हो गए।

    अध्ययन में Plasmodium vivax और Plasmodium falciparum दोनों तरह के संक्रमण दर्ज किए गए। मरीजों में ठंड लगना (80.46%), पीलिया (51.72%), मांसपेशियों में दर्द (56.32%), पूरे शरीर में दर्द (54.02%) और लीवर व स्प्लीन का बढ़ना (64.37%) प्रमुख लक्षण पाए गए। कुछ गंभीर मामलों में एनीमिया भी बड़ी जटिलता के रूप में सामने आया।

    माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रो. डॉ. मोनिका मटलानी के अनुसार, जब मलेरिया अन्य संक्रमणों के साथ होता है तो लक्षण आपस में मिल जाते हैं। इससे सही समय पर बीमारी की पहचान करना कठिन हो जाता है और इलाज में देरी हो सकती है। उन्होंने बताया कि जुलाई से सितंबर के बीच मलेरिया का खतरा सबसे ज्यादा रहता है और पुरुषों में संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक देखा गया है।

    वहीं All India Institute of Medical Sciences के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल के अनुसार, दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया सभी मच्छरों से फैलते हैं, जबकि टाइफाइड दूषित पानी और खराब स्वच्छता से जुड़ा है। ऐसे में इन बीमारियों को अलग-अलग पहचानना चुनौतीपूर्ण हो जाता है और कई मामलों में एक से अधिक संक्रमण एक साथ पाए जाते हैं।

    प्रमुख लक्षण:-
    तेज बुखार के साथ ठंड और कंपकंपी
    अत्यधिक पसीना आना
    सिरदर्द और कमजोरी
    मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द
    उल्टी या मतली
    भूख कम लगना
    चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना
    गंभीर स्थिति में पीलिया

    बचाव के उपाय:-
    मच्छरदानी का इस्तेमाल करें
    घर के आसपास पानी जमा न होने दें
    पूरी बाजू के कपड़े पहनें
    बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  • US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….

    US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….


    तेहरान।
    यूएस-इजरायल और ईरान (US-Israel and Iran) के बीच चल रही जंग में एक बार फ‍िर से समझौते की कोश‍िश की जा रही है. शांत‍ि की उम्‍मीद में शुक्रवार को 110 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंचने वाले क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में ग‍िरावट देखी जा रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) के उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू होने की उम्‍मीद की जा रही है. इससे बाजार को मजबूती म‍िली है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का यह दूसरा दौर हो सकता है. हालांकि, ईरान ने शांति वार्ता में सीधा ह‍िस्‍सा लेने से साफ मना क‍िया है।

    शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान क्रूड ऑयल का दाम चढ़कर 106 डॉलर प्रत‍ि बैरल के करीब पहुंच गया था. लेक‍िन शाम होते-होते ईरान के प्रत‍िन‍िध‍िमंडल के पाक‍िस्‍तान पहुंचने के बाद इसमें ग‍िरावट देखी गई. WTI क्रूड का दाम ग‍िरकर 94.40 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह 105 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. 28 फरवरी को इजरायल की तरफ से ईरान पर हमला क‍िये जाने के बाद क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है।


    तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी

    होर्मुज बंद होने से तेल की ग्‍लोबल लेवल पर सप्‍लाई चेन टूट चुकी है. इससे आने वाले समय में भी तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी. इससे पहले गुरुवार को भी तेल की कीमत 3% से ज्यादा बढ़ गई थीं. क्रूड ऑयल के दाम में प‍िछले पांच द‍िन से तेजी देखी जा रही थी. अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नहीं बनी तो लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है और तेल के दाम और ज्यादा बढ़ सकते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है क‍ि यद‍ि स्थिति और बिगड़ी तो दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं।


    भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

    सोशल मीडिया पर जारी क‍िये जा रहे दावों को खारिज करते हुए पेट्रोलियम म‍िन‍िस्‍टर ने कहा है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा करने का फिलहाल कोई प्‍लान नहीं है. मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा गया कि फिलहाल इसे लेकर कोई योजना नहीं है. उन्होंने उन रिपोर्ट्स को फेक करार दिया, जिसमें दावे किए जा रहे हैं कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में 25 से 28 रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है.

    आज द‍िल्‍ली में पेट्रोल-डीजल के रेट

    – दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.71

    – मुंबईमें पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.01

    – कोलकाता में पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹91.81

    – चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84, डीजल ₹92.38

  • मंदिर में मातम के बीच डांस परिवार ने निभाई आखिरी इच्छा सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    मंदिर में मातम के बीच डांस परिवार ने निभाई आखिरी इच्छा सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस


    नई दिल्ली । थाईलैंड के नखोन सी थाम्मरत प्रांत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान और विभाजित कर दिया है। यहां एक बौद्ध मंदिर में हुए अंतिम संस्कार के दौरान ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देखकर लोग स्तब्ध रह गए। एक 59 वर्षीय व्यक्ति की अंतिम विदाई पर उसके परिवार ने पारंपरिक शोक के बजाय जश्न का माहौल बनाया और ताबूत के सामने कोयोट डांसर्स से प्रदर्शन कराया।

    यह घटना रॉन फिबुन जिले के वाट थेप्पानोम चुआट मंदिर में हुई जहां अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्में पूरी होने के बाद अचानक तीन महिला डांसर्स ने ताबूत के सामने डांस करना शुरू कर दिया। बताया गया कि यह पूरा आयोजन मृतक की अंतिम इच्छा के अनुसार किया गया था। डांसर्स ने कोरियोग्राफ किया हुआ परफॉर्मेंस मंदिर परिसर के भीतर प्रस्तुत किया जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

    मृतक के परिवार का कहना है कि वह व्यक्ति बेहद खुशमिजाज स्वभाव का था और हमेशा जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता था। उन्होंने अपने अंतिम संदेश में यह इच्छा जताई थी कि उनकी विदाई पर रोने की बजाय लोग उनके जीवन का जश्न मनाएं। इसी सोच को सम्मान देते हुए परिवार ने अंतिम संस्कार को एक अलग रूप देने का निर्णय लिया और शोक सभा को उत्सव में बदल दिया।

    बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अंतिम प्रार्थना और मंत्रोच्चार पूरा करने के बाद यह डांस परफॉर्मेंस शुरू हुआ। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को देखा और इसे सोशल मीडिया पर लाइव भी किया गया। वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया और दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।

    हालांकि, इस घटना को लेकर लोगों की राय बंटी हुई नजर आ रही है। एक वर्ग का मानना है कि यह मृतक की अंतिम इच्छा का सम्मान है और जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने का प्रतीक है। वहीं दूसरा वर्ग इसे धार्मिक स्थल की मर्यादा के खिलाफ बता रहा है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस तरह का प्रदर्शन खासकर मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर उचित नहीं है।

    मरने वाले व्यक्ति का निधन 15 अप्रैल को हुआ था और उन्होंने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह नहीं चाहते कि उनकी मृत्यु पर लोग दुखी हों। उनका मानना था कि मृत्यु जीवन का हिस्सा है और इसे सहजता से स्वीकार करना चाहिए। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए परिवार ने पारंपरिक शोक को हटाकर एक अलग प्रकार का अंतिम संस्कार आयोजित किया।

    यह घटना न सिर्फ थाईलैंड में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर इसे जीवन को सेलिब्रेट करने का तरीका माना जा रहा है वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक और धार्मिक मर्यादाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।