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  • चेन्नई ने दर्ज की सबसे बड़ी जीत, रनों के अंतर से बनाया नया कीर्तिमान..

    चेन्नई ने दर्ज की सबसे बड़ी जीत, रनों के अंतर से बनाया नया कीर्तिमान..


    नई दिल्ली। क्रिकेट के ऐतिहासिक मैदान वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए सीजन के 33वें मुकाबले में चेन्नई ने मेजबान मुंबई को खेल के हर विभाग में पूरी तरह से पछाड़ दिया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी चेन्नई की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 207 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। चेन्नई की इस पारी के सूत्रधार सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन रहे, जिन्होंने मात्र 54 गेंदों में नाबाद 101 रनों की शतकीय पारी खेलकर विपक्षी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। इस शतक के साथ सैमसन ने टी20 प्रारूप में रोहित शर्मा के 8 शतकों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है और अब वे इस सूची में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।

    208 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। टीम ने महज 11 रनों के स्कोर पर अपने 3 महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। सलामी जोड़ी और शुरुआती बल्लेबाज खाता खोलने में भी संघर्ष करते नजर आए। मध्यक्रम में सूर्यकुमार यादव (35) और तिलक वर्मा (37) ने 70 रनों की साझेदारी कर पारी को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन स्पिन गेंदबाजों के घातक जाल के सामने मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह ढह गया। कप्तान और अनुभवी विदेशी खिलाड़ी भी बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। पूरी टीम 19 ओवर में महज 104 रनों पर सिमट गई।

    गेंदबाजी में चेन्नई की ओर से अकील होसेन सबसे सफल रहे, जिन्होंने 4 विकेट चटकाकर मुंबई की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। वहीं नूर अहमद ने भी दो महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं। यह मैच चेन्नई के लिए भावनात्मक रूप से भी खास था, क्योंकि पूरी टीम ने अपने एक साथी खिलाड़ी की दिवंगत माता को श्रद्धांजलि देने के लिए काली पट्टी बांधकर मैदान संभाला था। उस तेज गेंदबाज ने भी व्यक्तिगत दुख के बावजूद टीम के लिए शानदार खेल दिखाया और एक विकेट हासिल किया। इस जीत के साथ ही चेन्नई ने मुंबई के खिलाफ सर्वाधिक जीत दर्ज करने वाली टीम बनने का गौरव भी प्राप्त कर लिया है।

    प्रशंसकों को इस मैच में कुछ दिग्गज खिलाड़ियों की वापसी की उम्मीद थी, लेकिन चोट और फिटनेस संबंधी कारणों से वे मैदान पर नहीं उतर सके। इस करारी हार ने मुंबई के लिए मौजूदा सीजन की राह को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है, जबकि चेन्नई ने इस धमाकेदार प्रदर्शन से अंक तालिका में अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। वानखेड़े की पिच पर स्पिनरों का बोलबाला रहा, जहाँ मेहमान टीम के फिरकी गेंदबाजों ने बल्लेबाजों को क्रीज पर टिकने का कोई मौका नहीं दिया।

  • IPS को धमकी मामले में सियासत गरमाई जीतू पटवारी ने पुलिस की चुप्पी पर साधा निशाना


    भोपाल । भोपाल में बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी द्वारा एक आईपीएस अधिकारी को कथित धमकी दिए जाने के मामले ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश पुलिस की भूमिका और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पुलिस तंत्र को एक खुला पत्र लिखते हुए न केवल मौजूदा व्यवस्था पर टिप्पणी की है बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता को लेकर भी तीखी चिंता जताई है।

    अपने पत्र में जीतू पटवारी ने लिखा कि यह घटना केवल किसी एक व्यक्ति की भाषा या व्यवहार का मामला नहीं है, बल्कि यह उस खतरनाक माहौल का संकेत है जिसमें सत्ता का अहंकार कानून और संविधान पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां सत्ताधारी दल से जुड़े लोग पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने या उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इन घटनाओं के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया अक्सर सीमित और संयमित रह जाती है।

    पटवारी ने पुलिस अधिकारियों से सवाल करते हुए पूछा कि आखिर कौन सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण देश के सबसे प्रशिक्षित और अनुशासित अधिकारी भी रक्षात्मक स्थिति में नजर आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब अन्याय के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत होती है तब पुलिस की आवाज कमजोर क्यों पड़ जाती है और आम नागरिकों के मामलों में वही तंत्र इतना कठोर कैसे हो जाता है।

    अपने पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि पुलिस निष्पक्ष होकर और संविधान के दायरे में काम करे तो किसी भी नेता या प्रभावशाली व्यक्ति की हिम्मत नहीं होगी कि वह कानून पर दबाव डाल सके। लेकिन जब पुलिस को दबाव में काम करना पड़ता है तो उसकी स्वतंत्रता और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित होती हैं।

    जीतू पटवारी ने IPS एसोसिएशन के पत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें आक्रोश कम और विवशता अधिक नजर आती है। उनके अनुसार यह स्थिति केवल पुलिस के लिए नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यदि कानून लागू करने वाली संस्था ही कमजोर दिखाई देगी तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा।

    हालांकि उन्होंने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यह आलोचना पुलिस बल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों पुलिसकर्मी दिन रात अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा करते हैं और उनके साहस और मेहनत का पूरा देश सम्मान करता है। उनका संदेश उन परिस्थितियों के खिलाफ है जो पुलिस को उसकी मूल भूमिका से दूर कर रही हैं।

    पटवारी ने कहा कि पुलिस को अपने भीतर के साहस को याद रखना चाहिए और संविधान को अपना सबसे बड़ा संरक्षक मानना चाहिए न कि किसी व्यक्ति या सत्ता को। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कानून की रक्षा करने वाले ही चुप हो जाएंगे तो समाज में अन्याय को बढ़ावा मिलेगा और कानून का शासन कमजोर पड़ जाएगा।

    यह पूरा मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है जहां एक तरफ कांग्रेस पुलिस की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। फिलहाल इस पत्र ने मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

  • मासूम की मौत पर सनसनी: Rewa में शरीर पर चोट के निशान, परिवार ने जताई हत्या की आशंका

    मासूम की मौत पर सनसनी: Rewa में शरीर पर चोट के निशान, परिवार ने जताई हत्या की आशंका

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Rewa जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 7 साल की बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने सौतेली मां पर बेरहमी से पिटाई कर हत्या करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
    भाई का आरोप रात में पीटा, फिर बिगड़ी हालत
    मृतक बच्ची रागिनी साकेत के भाई पुष्पराज साकेत ने आरोप लगाया कि घटना वाली रात करीब 12 बजे उनकी सौतेली मां ने रागिनी को बुरी तरह पीटा। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, उसे तेज बुखार आया और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई।
    भाई का कहना है कि पिटाई इतनी ज्यादा थी कि बहन की हालत संभल नहीं पाई।
    दादी का दावा शरीर पर थे चोट के कई निशान
    बच्ची की दादी गोमती साकेत ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रागिनी के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे और उसे पानी तक नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची दर्द से तड़पती रही, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिल सका।
    80 किमी दूर गांव में हुई घटना
    यह घटना रीवा मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के आमिर कोनी गांव की है। बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता मनोज साकेत जब शाम को घर लौटे, तो रागिनी की हालत बेहद खराब थी। वे उसे तुरंत एक निजी डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
    दूसरी शादी के बाद बढ़ी थीं मारपीट की घटनाएं
    परिजनों का कहना है कि पिता की दूसरी शादी के बाद से ही बच्चों के साथ मारपीट की घटनाएं बढ़ गई थीं। भाई-बहनों ने भी आरोप लगाया कि सौतेली मां अक्सर उन्हें प्रताड़ित करती थी और घटना वाले दिन भी रागिनी को बुरी तरह पीटा गया था।
    तीन डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम
    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां तीन डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया है। फिलहाल सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।
    पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
    इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जब थाना प्रभारी Balkesh Dwivedi से जानकारी ली गई, तो उन्हें बच्ची और परिजनों के नाम तक स्पष्ट नहीं थे। इससे जांच की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
    हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    सार:
  • जगन्नाथपुर मंदिर में हिंसक वारदात के बाद प्रशासन पर सवाल, हाई सिक्योरिटी जोन में अपराध ने खड़े किए नए प्रश्न

    जगन्नाथपुर मंदिर में हिंसक वारदात के बाद प्रशासन पर सवाल, हाई सिक्योरिटी जोन में अपराध ने खड़े किए नए प्रश्न


    नई दिल्ली। रांची के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र स्थित जगन्नाथपुर मंदिर परिसर में गुरुवार देर रात हुई एक आपराधिक घटना ने पूरे शहर में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। मंदिर में तैनात सुरक्षा गार्ड की अज्ञात अपराधियों द्वारा हत्या कर दी गई, जिसके बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में यह मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं लग रहा है, बल्कि इसमें लूट की संभावना भी सामने आ रही है क्योंकि दान पेटी से नकदी गायब होने की आशंका जताई गई है।

    मृतक गार्ड की पहचान बिरसा मुंडा के रूप में हुई है, जो लंबे समय से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में कार्यरत थे। पुलिस का अनुमान है कि अपराधी संभवतः दान पेटी से धन निकालने के इरादे से मंदिर परिसर में घुसे थे और जब गार्ड ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो उन्होंने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे मंदिर परिसर को घेराबंदी में लेकर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस ने इस मामले में कई स्तरों पर जांच शुरू की है और घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है, जिसमें एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियां सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस इसी सुराग के आधार पर आगे की जांच कर रही है। साथ ही फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड को भी जांच में शामिल किया गया है ताकि तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

    इस घटना ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की वारदात होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाता है। यह इलाका पहले से ही सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में इस घटना ने लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है।

    घटना के बाद विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रिया सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। कई लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, खासकर उन स्थानों पर जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है।

    पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और निगरानी को और सख्त किया गया है।

  • भोपाल से बड़ा संदेश ,देने की तैयारी में CM मोहन यादव, रात 9 बजे लाइव संबोधन से बढ़ी हलचल

    भोपाल से बड़ा संदेश ,देने की तैयारी में CM मोहन यादव, रात 9 बजे लाइव संबोधन से बढ़ी हलचल


    भोपाल । भोपाल में आज रात प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल एक बार फिर बढ़ने वाली है क्योंकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रात 9 बजे सोशल मीडिया पर लाइव आकर प्रदेशवासियों को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर इस बात की जानकारी साझा की है जिसके बाद से ही लोगों के बीच उत्सुकता और अटकलों का दौर तेज हो गया है।

    मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा है कि वे एक महत्वपूर्ण विषय को लेकर प्रदेश की जनता से सीधा संवाद करेंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह विषय क्या होगा लेकिन इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। माना जा रहा है कि यह संबोधन किसी बड़ी योजना घोषणा नीति बदलाव या जनकल्याण से जुड़े अहम फैसले से जुड़ा हो सकता है।

    इस लाइव कार्यक्रम को केवल औपचारिक संबोधन नहीं माना जा रहा है बल्कि इसे मध्यप्रदेश के विकास और आने वाले समय की दिशा तय करने वाला संवाद बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह कदम उनकी संवादात्मक और पारदर्शी कार्यशैली को भी दर्शाता है जिसमें वे सीधे जनता से जुड़कर उनकी राय और सुझावों को महत्व देते हैं।

    पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से संवाद करते रहे हैं और विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी इसी माध्यम से साझा करते आए हैं। उनकी यह शैली सरकार और जनता के बीच विश्वास और संवाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।

    राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह लाइव संबोधन किसी नई विकास योजना या बड़े प्रशासनिक निर्णय से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा यह भी संभावना जताई जा रही है कि इसमें किसानों युवाओं या रोजगार से जुड़े किसी बड़े फैसले की घोषणा हो सकती है। हालांकि आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है जिससे लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    प्रदेशभर में लोग इस लाइव संबोधन का इंतजार कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे संभावित बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं जबकि कुछ इसे सरकार की जनसंपर्क रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।

    कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का यह संबोधन आज रात प्रदेश की नजरों का केंद्र रहने वाला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे जनता के सामने क्या बड़ा संदेश रखते हैं और क्या कोई नई घोषणा प्रदेश के विकास की दिशा को और गति देती है या नहीं।

  • इस मंदिर में छिपी है महाभारत काल की सबसे भावुक प्रेम और बलिदान की अनकही दास्तां

    इस मंदिर में छिपी है महाभारत काल की सबसे भावुक प्रेम और बलिदान की अनकही दास्तां

    नई दिल्ली। भारत रहस्यों और विविध परंपराओं की भूमि है, जहाँ हर मंदिर और उत्सव के पीछे कोई न कोई गहरी पौराणिक गाथा छिपी होती है। तमिलनाडु के कूवगम क्षेत्र में स्थापित एक विशेष मंदिर, जिसे अरावन मंदिर के नाम से जाना जाता है, एक ऐसी ही अनोखी और भावुक परंपरा का गवाह है। यह मंदिर विशेष रूप से एक विशिष्ट समाज के लिए पवित्र माना जाता है, क्योंकि यहाँ पूजे जाने वाले देवता अरावन, महाभारत के महान योद्धा अर्जुन के पुत्र थे। हर साल यहाँ एक भव्य उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ पहले विवाह का उल्लास मनाया जाता है और अगले ही पल चारों ओर वियोग का मातम छा जाता है।

    इस अनूठी परंपरा के पीछे महाभारत काल की एक मार्मिक कथा जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों की विजय सुनिश्चित करने के लिए एक कठिन परीक्षा की घड़ी आई थी, जहाँ धर्म की रक्षा के लिए एक महान योद्धा की बलि आवश्यक थी। अर्जुन के पुत्र अरावन स्वेच्छा से अपना बलिदान देने के लिए आगे आए, लेकिन उनकी एक अंतिम शर्त थी कि वे अविवाहित रहकर मृत्यु को प्राप्त नहीं होना चाहते। संकट यह था कि जो व्यक्ति अगले दिन ही वीरगति को प्राप्त होने वाला हो, उससे अपनी पुत्री का विवाह करने के लिए कोई तैयार नहीं था। ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु ने स्वयं ‘मोहिनी’ का रूप धारण किया और अरावन से विवाह रचाया। विवाह की अगली सुबह अरावन ने अपना बलिदान दे दिया और मोहिनी रूपी भगवान ने एक विधवा की तरह उनकी मृत्यु पर विलाप किया।

    यही कारण है कि आज भी एक विशेष समुदाय के लोग खुद को मोहिनी का रूप मानते हैं और अरावन देवता को अपना आराध्य स्वीकार करते हैं। उत्सव के दौरान, मंदिर में विवाह का प्रतीक माने जाने वाले सूत्र बांधे जाते हैं, जो अरावन देवता के साथ उनके मिलन का प्रतीक होता है। उस रात पूरा परिसर उत्सव और खुशियों से सराबोर रहता है। लेकिन जैसे ही अगली सुबह होती है और अरावन की प्रतिमा के बलिदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है, वैसे ही खुशियां मातम में बदल जाती हैं। लोग अपनी चूड़ियां तोड़ देते हैं, सुहाग के प्रतीक हटा देते हैं और सफेद वस्त्र धारण कर अपने देवता की मृत्यु का शोक मनाते हैं।

    करीब 18 दिनों तक चलने वाले इस पारंपरिक उत्सव में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं होते, बल्कि कला, सौंदर्य और गायन जैसी कई प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है, जो इस समुदाय की प्रतिभा को प्रदर्शित करती हैं। यह मंदिर और यहाँ की परंपरा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि आस्था और बलिदान की कहानियाँ किस तरह सदियों बाद भी समाज के एक विशिष्ट वर्ग की पहचान का आधार बनी हुई हैं। अरावन का बलिदान न केवल इतिहास की एक घटना थी, बल्कि इसने एक ऐसे देवता को जन्म दिया जो आज भी लाखों लोगों के सुख और दुख का एकमात्र सहारा हैं।

  • बीमा कंपनी पर 5 हजार का जुर्माना, कार एक्सीडेंट क्लेम नहीं देने पर देना होगा ₹31,320

    बीमा कंपनी पर 5 हजार का जुर्माना, कार एक्सीडेंट क्लेम नहीं देने पर देना होगा ₹31,320


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Sagar में बीमा क्लेम को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। कार एक्सीडेंट के बाद क्लेम राशि नहीं देने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमा कंपनी को फटकार लगाते हुए ग्राहक के पक्ष में निर्णय सुनाया है। आयोग ने कंपनी को बीमा राशि, ब्याज, मुआवजा और केस खर्च मिलाकर तय समय में भुगतान करने का आदेश दिया है।
    वाराणसी के रहने वाले उपभोक्ता ने लगाई थी गुहार
    यह मामला मूल रूप से Varanasi निवासी तेजबहादुर बिंद का है, जो वर्तमान में सागर की स्टेट कॉलोनी में रहते हैं। उन्होंने IFFCO Tokio General Insurance Company Limited और Adinath Cars Private Limited (नेक्सा, सागर) के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
    बीमा होने के बावजूद क्लेम अटका
    तेजबहादुर के मुताबिक, उनकी कार (MP 15 ZK 5718) का बीमा नवंबर 2024 से नवंबर 2025 तक वैध था। 17 मार्च 2025 को कार की बैक लाइट टूट गई थी। अगले दिन वे सर्विस सेंटर पहुंचे, लेकिन पार्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण गाड़ी वापस ले आए। इसके बाद 29 मार्च 2025 को Narmadapuram में ट्रैफिक जाम के दौरान उनकी कार आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई, जिससे गाड़ी को नुकसान पहुंचा। उन्होंने तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दी और 1 अप्रैल को गाड़ी मरम्मत के लिए जमा कर दी। कंपनी ने भुगतान से किया इनकार सर्विस सेंटर ने मरम्मत का खर्च बताकर क्लेम प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बीमा कंपनी ने भुगतान करने से मना कर दिया। इससे परेशान होकर तेजबहादुर ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
    आयोग का सख्त रुख सेवा में कमी मानी
    सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद आयोग ने माना कि बीमा कंपनी की ओर से सेवा में कमी (deficiency in service) हुई है। आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी ग्राहक को 31,320 रुपए की क्लेम राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। इसके अलावा 5,000 रुपए मुआवजा और 2,000 रुपए केस खर्च के रूप में भी देने होंगे।
    दो महीने में करना होगा भुगतान
    आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पूरी राशि का भुगतान दो महीने के भीतर किया जाए और बीमा क्लेम का निपटारा समय पर किया जाए।
    उपभोक्ताओं के लिए अहम संदेश
    यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है, जो बीमा क्लेम में देरी या इंकार का सामना करते हैं। इससे साफ है कि अगर कंपनी नियमों के अनुसार सेवा नहीं देती, तो उपभोक्ता आयोग से न्याय मिल सकता है।
  • फिरौती की साजिश नाकाम इंदौर में अपहृत दोनों बच्चे बरामद पुलिस ने दंपती समेत 4 को दबोचा

    फिरौती की साजिश नाकाम इंदौर में अपहृत दोनों बच्चे बरामद पुलिस ने दंपती समेत 4 को दबोचा

    इंदौर । इंदौर में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक सनसनीखेज अपहरण मामले का महज सात घंटे में खुलासा कर दिया और अपहृत दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस मामले में पुलिस ने पति पत्नी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिनमें एक भाई बहन की जोड़ी भी शामिल है। फिरौती के तौर पर 15 लाख रुपए की मांग की गई थी जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था।

    घटना गुरुवार शाम की है जब तिरुपति गार्डन क्षेत्र से 9 वर्षीय नैतिक सोनकर और 11 वर्षीय सम्राट अचानक लापता हो गए। दोनों बच्चे शाम करीब 6 बजे तक गार्डन में क्रिकेट खेल रहे थे लेकिन कुछ ही देर बाद उनका कोई पता नहीं चला। परिवार ने जब तलाश शुरू की तो सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए जिसमें एक युवती बच्चों को अपने साथ ले जाती हुई नजर आई। इसी के बाद मामला गंभीर हो गया और पुलिस को सूचना दी गई।

    बच्चों के दादा पूनमचंद जयदेव ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक वीडियो कॉल के जरिए 15 लाख रुपए की फिरौती की मांग की गई है। कॉल आने के तुरंत बाद फोन बंद कर दिया गया जिससे मामला और संदिग्ध हो गया। सूचना मिलते ही टीआई सुरेंद्र रघुवंशी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई।

    पुलिस ने तुरंत कई थानों की टीमों को सक्रिय किया जिनमें संयोगितागंज बड़ी ग्वालटोली राजेंद्र नगर द्वारकापुरी तुकोगंज और पलासिया थाना शामिल थे। साथ ही जिस नंबर से फिरौती की कॉल आई थी उसे सर्विलांस पर लगाया गया और उसकी लोकेशन ट्रेस की जाने लगी। इसी दौरान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपी युवती के रूट की पहचान की जिससे जांच को दिशा मिली।

    जांच के दौरान पता चला कि सभी आरोपी आपस में व्हाट्सएप के जरिए संपर्क में थे और वहीं से योजना बनाई गई थी। एक नंबर से ही वीडियो कॉल कर फिरौती की मांग की गई थी। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से लोकेशन ट्रेस करते हुए राजेंद्र नगर के दत्त नगर स्थित एक बिल्डिंग पर दबिश दी जहां बच्चों को रखा गया था।

    एसीपी तुषार सिंह ने बताया कि पुलिस टीम ने बेहद सतर्कता से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को घेर लिया। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने भागने की कोशिश की लेकिन सभी को मौके पर ही पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में विनीत पिता राजेश उम्र 22 वर्ष राधिका पिता राजेश उम्र 18 वर्ष ललित पिता दशरथ सेन उम्र 21 वर्ष और तनीषा पति ललित उम्र 21 वर्ष शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार तनीषा ने ही बच्चों को अपने साथ ले जाने की योजना बनाई थी और वह राधिका की सहेली है। अच्छी बात यह रही कि बच्चों को किसी तरह की चोट या नुकसान नहीं पहुंचाया गया और दोनों पूरी तरह सुरक्षित पाए गए। मेडिकल जांच के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई गई है।

    इस पूरे ऑपरेशन में इंदौर पुलिस की तेज कार्रवाई और समन्वय की सराहना की जा रही है। महज कुछ घंटों में अपहरण जैसे गंभीर मामले का खुलासा कर बच्चों को सुरक्षित बरामद करना पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस साजिश के पीछे के पूरे नेटवर्क और कारणों का पता लगाया जा सके।

  • दर्दनाक हादसा: Jabalpur में तीनों छात्राओं की मौत, एक फार्मासिस्ट तो दूसरी बनना चाहती थी डॉक्टर

    दर्दनाक हादसा: Jabalpur में तीनों छात्राओं की मौत, एक फार्मासिस्ट तो दूसरी बनना चाहती थी डॉक्टर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Jabalpur में दिल दहला देने वाले बरगी नहर हादसे में डूबी तीन बहनों में से तीसरी युवती का शव भी बरामद कर लिया गया है। गुरुवार रात करीब 11 बजे 23 वर्षीय शीतल पटेल का शव घटनास्थल से कुछ दूरी पर मिला। इससे पहले सानिया पटेल (14) और सृष्टि पटेल (17) के शव हादसे के कुछ घंटों बाद ही मिल गए थे। तीनों का शुक्रवार को पोस्टमार्टम किया गया और आज शहर के अलग-अलग शमशान घाटों पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
    रिश्ते में बहनें, एक ही हादसे में बुझ गए तीन घरों के चिराग
    बरगी थाना क्षेत्र के सालीवाड़ा गांव में हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। तीनों लड़कियां मामा-बुआ के रिश्ते से बहनें थीं और एक पारिवारिक शादी में शामिल होने आई थीं। अचानक हुए इस हादसे ने खुशियों के माहौल को मातम में बदल दिया।
    रील बनाते समय फिसला पैर, तेज बहाव में बह गईं
    गुरुवार सुबह करीब 11 बजे पांच लड़कियां नहर पर नहाने और वीडियो (रील) बनाने गई थीं। बताया जा रहा है कि सृष्टि नहर में थी, जबकि बाकी लड़कियां किनारे पर मोबाइल से वीडियो बना रही थीं। तभी पैर फिसलने से चार लड़कियां तेज बहाव में बह गईं।
    मौके पर मौजूद एक सहेली ने हिम्मत दिखाते हुए एक लड़की को बचा लिया, लेकिन बाकी तीनों तेज धारा में दूर तक बह गईं। स्थानीय लोगों ने बचाने की कोशिश की, पर पानी का बहाव इतना तेज था कि वे सफल नहीं हो सके। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन चलाकर तीनों के शव बरामद किए।
    अधूरे रह गए सपने: कोई बनने वाली थी फार्मासिस्ट, कोई डॉक्टर
    इस हादसे में सिर्फ जानें ही नहीं गईं, बल्कि कई सपने भी टूट गए। शीतल पटेल ने फार्मेसी की पढ़ाई पूरी कर ली थी और चार महीने बाद उसकी शादी Bhopal में तय थी। वहीं सृष्टि पटेल ने 12वीं अच्छे अंकों से पास की थी और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी।
    सानिया अभी पढ़ाई कर रही थी और परिवार की उम्मीदों का हिस्सा थी। तीनों बेटियों की एक साथ मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
    परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
    मर्चुरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हर किसी की आंखें नम हैं और गांव में शोक का माहौल है। शादी में शामिल होने आईं बेटियां अब हमेशा के लिए खामोश हो गईं।
    नहर किनारे सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
    इस हादसे के बाद एक बार फिर नहरों और जलाशयों के किनारे सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरगी नहर पर अक्सर लोग नहाने और घूमने आते हैं, लेकिन यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

  • मतदान में बढ़ती भागीदारी को लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया..

    मतदान में बढ़ती भागीदारी को लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया..


    नई दिल्ली। कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में दर्ज हुए रिकॉर्ड मतदान ने लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर देशभर में चर्चा को जन्म दिया है। इस चरण में मतदान प्रतिशत 92 प्रतिशत के करीब पहुंच गया, जिसे अब तक के चुनावी इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया है और विभिन्न स्तरों पर इसे लोकतंत्र की मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस उच्च मतदान प्रतिशत पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से भी संतोष व्यक्त किया गया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब नागरिक बड़ी संख्या में मतदान करते हैं तो यह लोकतंत्र की मजबूती का संकेत होता है। उन्होंने कहा कि वोट डालने की प्रक्रिया केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है और जब लोग इसे गंभीरता से लेते हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होती है।

    न्यायालय की पीठ के अन्य सदस्यों ने भी चुनावी माहौल पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पहले चरण के दौरान किसी बड़े स्तर की हिंसक घटना की जानकारी नहीं मिली, जो चुनाव प्रक्रिया के लिए एक सकारात्मक संकेत है। शांतिपूर्ण मतदान यह दर्शाता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों का भरोसा बना हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है।

    सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि लोकतंत्र में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ही उसकी वास्तविक शक्ति होती है। जब मतदाता बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचते हैं, तो यह न केवल राजनीतिक प्रक्रिया को मजबूत करता है बल्कि सामाजिक स्थिरता को भी बढ़ावा देता है।

    इस दौरान सॉलिसिटर जनरल ने भी मतदान प्रतिशत को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह जनता के लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में सुरक्षा बलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही और अधिकांश स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। कुछ स्थानों पर मामूली घटनाओं को छोड़कर पूरा चरण व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।

    आंकड़ों के अनुसार इस चरण में कुल मतदान लगभग 91.78 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो वर्ष 2011 के 84.72 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है। यह वृद्धि इस बात का संकेत मानी जा रही है कि मतदाताओं में जागरूकता बढ़ी है और वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिक सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

    महिला मतदाताओं की भागीदारी इस चरण में विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों की तुलना में अधिक दर्ज किया गया, जो सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी में बढ़ते संतुलन को दर्शाता है। यह रुझान पिछले कुछ वर्षों से लगातार देखा जा रहा है और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    समग्र रूप से देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में हुए इस उच्च मतदान ने यह स्पष्ट किया है कि मतदाता अपनी भूमिका को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं और लोकतंत्र में अपनी सक्रिय भागीदारी को गंभीरता से ले रहे हैं। शांतिपूर्ण वातावरण में इतनी बड़ी संख्या में मतदान का होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत करता है।