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  • Rishi Kapoor का मजेदार किस्सा: लड़की के कपड़ों में पहुंचे जेंट्स वॉशरूम, फिर हुआ ये दिलचस्प वाकया

    Rishi Kapoor का मजेदार किस्सा: लड़की के कपड़ों में पहुंचे जेंट्स वॉशरूम, फिर हुआ ये दिलचस्प वाकया


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Rishi Kapoor ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन फिल्म Rafoo Chakkar से जुड़ा एक किस्सा आज भी लोगों को हैरान कर देता है। इस फिल्म में उन्हें कहानी के अनुसार लड़की का गेटअप लेना पड़ा था, और इसी दौरान उनके साथ एक ऐसा मजेदार वाकया हुआ जिसे सुनकर कोई भी मुस्कुरा उठे।

    फीमेल आउटफिट में मजबूरी में जाना पड़ा जेंट्स वॉशरूम

    दरअसल, फिल्म Rafoo Chakkar की शूटिंग के दौरान ऋषि कपूर पूरी तरह लड़की के लुक में थे। इसी बीच उन्हें वॉशरूम जाने की जरूरत पड़ी। अब समस्या यह थी कि वे महिला शौचालय में जा नहीं सकते थे, इसलिए मजबूरी में उन्हें जेंट्स वॉशरूम जाना पड़ा। लेकिन जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें असली लड़की समझ लिया। हालात ऐसे हो गए कि वॉशरूम में मौजूद लोग खुद शर्म से असहज हो गए और समझ नहीं पाए कि आखिर क्या हो रहा है।

    विदेशी लोग ढूंढते-ढूंढते पहुंच गए सेट तक

    इस मजेदार घटना का जिक्र खुद Rishi Kapoor ने अपनी किताब में किया था। उन्होंने बताया कि वॉशरूम में मौजूद कुछ विदेशी लोग तो उन्हें “लड़की” समझकर बाहर तक ढूंढने निकल पड़े। जब वे लोग सेट तक पहुंचे, तब जाकर उन्हें सच्चाई का पता चला कि जिसे वे ढूंढ रहे थे, वह कोई और नहीं बल्कि फिल्म के स्टार ऋषि कपूर ही हैं। यह सुनकर सभी हैरान रह गए।

    चाइल्ड आर्टिस्ट से सुपरस्टार बनने तक का सफर

    ऋषि कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट Mera Naam Joker से की थी, जिसे उनके पिता Raj Kapoor ने निर्देशित किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला। इसके बाद उन्होंने बतौर लीड एक्टर Bobby से डेब्यू किया, जिसमें उनके साथ Dimple Kapadia नजर आईं। यह फिल्म सुपरहिट रही और ऋषि कपूर रातों-रात स्टार बन गए।

    रोमांटिक हीरो से लेकर मजबूत किरदारों तक

    अपने करियर में उन्होंने Amar Akbar Anthony, Karz, Chandni, Damini और Kapoor & Sons जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। फिल्मों के दौरान ही उन्हें अपनी को-स्टार Neetu Kapoor से प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली।

    कैंसर से जंग और आखिरी सफर

    साल 2018 में ऋषि कपूर को कैंसर होने का पता चला, जिसके बाद उन्होंने New York में इलाज कराया। करीब दो साल तक बीमारी से लड़ने के बाद 2020 में उनका निधन हो गया। उनकी आखिरी फिल्म Sharmaji Namkeen थी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

  • MI vs CSK Highlights: Chennai Super Kings ने वानखेड़े में मचाया तहलका, मुंबई की टीम पूरी तरह फेल

    MI vs CSK Highlights: Chennai Super Kings ने वानखेड़े में मचाया तहलका, मुंबई की टीम पूरी तरह फेल


    नई दिल्ली । Chennai Super Kings ने गुरुवार को खेले गए मुकाबले में Mumbai Indians को 103 रनों से हराकर एकतरफा जीत दर्ज की। Wankhede Stadium में खेले गए इस मैच में चेन्नई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 207 रन बनाए, जिसके जवाब में मुंबई की टीम 19 ओवर में महज 104 रन पर सिमट गई।

    संजू सैमसन का तूफानी शतक, मुंबई के गेंदबाज बेबस

    चेन्नई की जीत के हीरो रहे Sanju Samson, जिन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 54 गेंदों में नाबाद 101 रन ठोके। उनकी इस पारी में चौकों-छक्कों की बरसात देखने को मिली। सैमसन ने पारी की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और मुंबई के गेंदबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया।
    उनकी इस पारी की बदौलत चेन्नई ने मजबूत स्कोर खड़ा किया। सैमसन अब टी20 में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में Rohit Sharma की बराबरी पर पहुंच गए हैं।

    शुरुआती झटकों के बाद भी चेन्नई ने बनाई बड़ी स्कोरिंग

    हालांकि चेन्नई को कप्तान Ruturaj Gaikwad के रूप में जल्दी झटका लगा, लेकिन सैमसन ने पारी को संभाला। बीच में Shivam Dube और Dewald Brevis ने भी अहम योगदान दिया, जिससे टीम 200 के पार पहुंच सकी। मुंबई के लिए Jasprit Bumrah, Mitchell Santner और अन्य गेंदबाजों को विकेट तो मिले, लेकिन रन रोकने में वे नाकाम रहे।

    मुंबई की पारी बिखरी, लगातार गिरते रहे विकेट

    208 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी Mumbai Indians की शुरुआत बेहद खराब रही। शुरुआती ओवरों में ही टीम ने कई अहम विकेट गंवा दिए। Quinton de Kock और अन्य बल्लेबाज सस्ते में पवेलियन लौट गए। कुछ देर के लिए Suryakumar Yadav और Tilak Varma ने पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन साझेदारी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। इसके बाद Hardik Pandya और Sherfane Rutherford बिना खाता खोले आउट हो गए, जिससे मुंबई की हार तय हो गई।

    चेन्नई के गेंदबाजों का कमाल

    चेन्नई की ओर से Akeal Hosein ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट झटके। वहीं Noor Ahmad ने 2 विकेट लेकर मुंबई की कमर तोड़ दी। अन्य गेंदबाजों ने भी किफायती गेंदबाजी कर मुंबई को दबाव में बनाए रखा, जिसका नतीजा यह रहा कि पूरी टीम 104 रन पर ऑलआउट हो गई।

    श्रद्धांजलि के साथ उतरी चेन्नई टीम

    इस मुकाबले में चेन्नई की टीम काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरी। यह कदम खिलाड़ी Mukesh Choudhary की मां को श्रद्धांजलि देने के लिए उठाया गया, जिनका हाल ही में निधन हुआ था।

  • अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..

    अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..


    नई दिल्ली। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed के सरगना Masood Azhar को लेकर इस समय कई तरह की अटकलें और चर्चाएं सामने आ रही हैं। लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नजर न आने के कारण उसके स्वास्थ्य और वर्तमान स्थिति को लेकर संगठन के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे असमंजस का माहौल बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार, संगठन के भीतर यह चर्चा तेज है कि मसूद अजहर की तबीयत ठीक नहीं है और वह लंबे समय से सक्रिय रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि, कुछ आकलन यह भी बताते हैं कि उसकी स्थिति को लेकर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है, ताकि संगठन के भीतर मनोबल पर असर न पड़े बताया जा रहा है कि पहले जहां वह नियमित रूप से अपने कैडरों को संबोधित करता था और गतिविधियों में सक्रिय रहता था, वहीं अब उसकी सार्वजनिक उपस्थिति लगभग समाप्त हो चुकी है। इससे संगठन के अंदर भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है।

    खुफिया आकलनों में यह भी संकेत मिलता है कि हाल की घटनाओं और आंतरिक दबावों के कारण उसका प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    इसी बीच यह भी कहा जा रहा है कि संगठन अब संभावित रूप से नए नेतृत्व की तैयारी कर रहा है, क्योंकि मौजूदा हालात में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे पुराने और नए सदस्यों के बीच अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

    अब तक मसूद अजहर की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है, और पूरा मामला रहस्य बना हुआ है। इसी वजह से उसके भविष्य और संगठन में उसकी भूमिका को लेकर लगातार अटकलें जारी हैं।

  • भारत-पाक तनाव पर बयान: क्या दोबारा Balakot Airstrike जैसा कदम संभव? पूर्व अमेरिकी राजदूत ने जताई चिंता

    भारत-पाक तनाव पर बयान: क्या दोबारा Balakot Airstrike जैसा कदम संभव? पूर्व अमेरिकी राजदूत ने जताई चिंता


    नई दिल्ली । भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत Kenneth Juster ने वैश्विक कूटनीति को लेकर एक अहम चेतावनी दी है। Hudson Institute में आयोजित ‘द न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि United States और Pakistan के बीच बढ़ती नजदीकियां भविष्य में भारत के रणनीतिक फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। खासतौर पर, सीमा पार आतंकवाद के मामलों में भारत की प्रतिक्रिया पहले जैसी आक्रामक नहीं रह सकती।

    पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों में नई गर्माहट, भारत के लिए संकेत

    जस्टर ने अपने संबोधन में कहा कि Donald Trump प्रशासन के दौरान पाकिस्तान ने वाशिंगटन के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करने में सफलता पाई है। हालात ऐसे बने हैं कि पाकिस्तान अब अमेरिका और Iran के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की स्थिति में भी आ गया है।

    यह बदलाव केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। जस्टर के मुताबिक, यह भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि इससे दक्षिण एशिया की शक्ति-संतुलन की दिशा बदल सकती है।

    आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘कड़ी प्रतिक्रिया’ पर सवाल

    पूर्व राजदूत ने खास तौर पर भारत की आतंकवाद विरोधी नीति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में कोई बड़ा आतंकी हमला होता है, तो भारत को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ सकता है कि क्या उसे अमेरिका का वही समर्थन मिलेगा, जैसा पहले मिला था।

    उन्होंने Pulwama attack और उसके जवाब में हुई Balakot airstrike को उदाहरण के तौर पर याद किया। जस्टर के मुताबिक, उस समय भारत को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला था, लेकिन बदलते समीकरणों में भविष्य की स्थिति अलग हो सकती है।

    रणनीतिक संतुलन की चुनौती: भारत के सामने नई कूटनीतिक परीक्षा

    जस्टर का मानना है कि अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों की मजबूती भारत के लिए एक ‘डिप्लोमैटिक टेस्ट’ बन सकती है। भारत को अब अपने फैसले केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लेने होंगे।

    हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि India और अमेरिका के संबंध अभी भी मजबूत हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

    भारत-अमेरिका साझेदारी पर भरोसा, भविष्य को लेकर उम्मीद

    करीब 26 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए जस्टर ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते समय के साथ और मजबूत हो सकते हैं। दोनों देशों को पारस्परिक हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए, ताकि रणनीतिक साझेदारी और गहरी हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि 21वीं सदी में भारत का उदय एक बड़ी भू-राजनीतिक कहानी है। भारत की जनसंख्या, विशाल बाजार, तकनीकी क्षमता और सैन्य शक्ति उसे वैश्विक मंच पर एक अहम खिलाड़ी बनाती है। ऐसे में अमेरिका के लिए भी यह जरूरी है कि वह इस उभरती ताकत के साथ सकारात्मक भूमिका निभाए।

  • भारत ‘सपेरों का देश’ नहीं, ग्लोबल टेक हब: Rashtriya Swayamsevak Sangh महासचिव का बयान

    भारत ‘सपेरों का देश’ नहीं, ग्लोबल टेक हब: Rashtriya Swayamsevak Sangh महासचिव का बयान


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह Dattatreya Hosabale ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान भारत और संघ को लेकर फैली वैश्विक धारणाओं पर खुलकर बात की। Hudson Institute में आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में उन्होंने कहा कि भारत को अब भी “सपेरों और गरीबी” के नजरिए से देखना एक बड़ी भूल है, जबकि आज देश एक तेजी से उभरता हुआ टेक्नोलॉजी हब और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

    ‘RSS को KKK बताना पूरी तरह गलत’, पश्चिमी नैरेटिव पर हमला

    होसबोले ने पश्चिमी देशों में RSS को लेकर फैली गलतफहमियों पर भी तीखा जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि संघ को अमेरिका के कुख्यात संगठन Ku Klux Klan से जोड़ना पूरी तरह निराधार और भ्रामक है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से एक खास नैरेटिव के तहत RSS को ‘हिंदू वर्चस्ववादी’, ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ और ‘आधुनिकीकरण के खिलाफ’ संगठन के रूप में पेश किया गया है, जबकि इसके सकारात्मक कार्यों को नजरअंदाज किया जाता रहा है।

    भारत की छवि पर सवाल: ‘सिर्फ गरीबी नहीं, टेक्नोलॉजी में भी ताकत’

    होसबोले ने कहा कि पश्चिमी दुनिया में भारत की जो छवि बनाई गई है, वह अधूरी और पुरानी है। उन्होंने कहा कि आज का India स्टार्टअप, डिजिटल इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    उनके मुताबिक, भारत को सिर्फ भीड़, झुग्गियों और पारंपरिक छवियों तक सीमित करना वास्तविकता से दूर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान को समझना जरूरी है।

    हिंदू दर्शन: ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सोच, वर्चस्व की नहीं

    हिंदू विचारधारा पर बोलते हुए होसबोले ने कहा कि इसकी मूल भावना पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की है। उन्होंने बताया कि हिंदू संस्कृति ‘एकत्व’ में विश्वास करती है, जहां हर जीव और प्रकृति के हर तत्व को सम्मान दिया जाता है।

    उन्होंने तर्क दिया कि जब मूल दर्शन ही समावेशी है, तो ‘वर्चस्ववाद’ का आरोप स्वतः ही गलत साबित होता है।

    83 हजार शाखाएं और सेवा कार्यों का विस्तार

    RSS के कामकाज पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि संगठन देशभर में रोजाना करीब 83 हजार शाखाएं चलाता है। इनका उद्देश्य समाज में सेवा भावना, अनुशासन और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि संघ शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम करता है।

    आधुनिकीकरण और संस्कृति साथ-साथ संभव

    होसबोले ने इस धारणा को भी खारिज किया कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे के विरोधी हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि Japan और China जैसे देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखते हुए आधुनिकता में आगे बढ़े हैं।

    उनके अनुसार, भारत भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को कायम रखते हुए तकनीकी और औद्योगिक प्रगति कर सकता है।

  • टीम इंडिया के 'लिटिल मास्टर' के करियर का वह अनोखा मोड़ जब पाकिस्तान के लिए की फील्डिंग

    टीम इंडिया के 'लिटिल मास्टर' के करियर का वह अनोखा मोड़ जब पाकिस्तान के लिए की फील्डिंग

    नई दिल्ली। क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जिनके नाम के बिना इस खेल का इतिहास अधूरा है। उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ हुई थी, लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही योजना बना रखी थी। बहुत कम क्रिकेट प्रेमी इस बात से वाकिफ हैं कि भारत के लिए नीली जर्सी पहनने से लगभग दो साल पहले ही सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान की जर्सी पहनकर मैदान पर अपना जौहर दिखाया था।
    यह घटना साल 1987 की है जब मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत और पाकिस्तान के बीच एक विशेष मुकाबला आयोजित किया गया था। इस मैच में सचिन एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं बल्कि एक उत्साही किशोर के रूप में मौजूद थे जो खेल की बारीकियों को समझने की कोशिश कर रहे थे।

    मैच के दौरान एक ऐसा समय आया जब पाकिस्तान की टीम को फील्डरों की कमी का सामना करना पड़ा। लंच ब्रेक के दौरान जब पाकिस्तान के प्रमुख खिलाड़ी जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर मैदान से बाहर गए, तो कप्तान इमरान खान को सब्स्टीट्यूट फील्डर की जरूरत पड़ी। उस समय वहां मौजूद 15 साल के सचिन तेंदुलकर को मैदान पर जाने का मौका मिला।

    इमरान खान ने इस फुर्तीले लड़के को लॉन्ग-ऑन बाउंड्री पर तैनात किया। यह पल बेहद रोमांचक था क्योंकि जिस खिलाड़ी को भविष्य में भारतीय क्रिकेट का आधार स्तंभ बनना था, वह उस समय अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी देश की मदद कर रहा था। यह खेल भावना का एक ऐसा उदाहरण था जो आज के दौर में शायद ही कहीं देखने को मिले।

    मैदान पर अपनी तैनाती के दौरान सचिन ने अपनी पूरी ऊर्जा के साथ फील्डिंग की। इसी दौरान भारतीय कप्तान कपिल देव ने हवा में एक ऊंचा शॉट खेला जो सीधा सचिन की ओर जा रहा था। सचिन ने उस गेंद को लपकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी और करीब 15 मीटर तक दौड़ लगाई, लेकिन गेंद उनके हाथों से कुछ ही दूरी पर गिर गई। बाद में सचिन ने अपनी आत्मकथा में इस बात का अफसोस जताया था कि अगर वह उस समय लॉन्ग-ऑन की जगह मिड-ऑन पर तैनात होते, तो वह निश्चित ही कपिल देव का कैच पकड़ लेते। यह छोटी सी घटना उस अटूट जुनून को दर्शाती है जो सचिन के मन में बचपन से ही खेल के प्रति था।

    सचिन तेंदुलकर का यह अनसुना किस्सा न केवल उनके प्रशंसकों को रोमांचित करता है, बल्कि यह भी बताता है कि महानता की शुरुआत अक्सर अप्रत्याशित रास्तों से होती है। पाकिस्तान की ओर से कुछ देर के लिए की गई वह फील्डिंग आज क्रिकेट जगत की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। 15 साल के उस बालक ने तब शायद ही सोचा होगा कि जिस टीम के लिए वह आज फील्डिंग कर रहा है, उसी टीम के सबसे खतरनाक गेंदबाजों के खिलाफ वह भविष्य में विश्व रिकॉर्ड की झड़ी लगा देगा। यह ऐतिहासिक पल आज भी ब्रेबोर्न स्टेडियम की यादों में जिंदा है और सचिन के महान सफर का एक अमूल्य हिस्सा है।

  • IIT पास तलाकशुदा युवक की ‘वर्जिन ब्राह्मण लड़की’ की मांग पर बवाल, सोशल मीडिया पर हुई जमकर आलोचना

    IIT पास तलाकशुदा युवक की ‘वर्जिन ब्राह्मण लड़की’ की मांग पर बवाल, सोशल मीडिया पर हुई जमकर आलोचना


    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसी कहानी वायरल हो रही है, जिसने रिश्तों, पसंद और समाज की सोच पर बड़ी बहस छेड़ दी है। मामला एक 37 वर्षीय IIT पास तलाकशुदा युवक से जुड़ा है, जिसकी दुल्हन को लेकर रखी गई शर्तें इंटरनेट पर चर्चा और आलोचना का विषय बन गई हैं। इस पूरे मामले को सामने लाया मैचमेकर और डेटिंग कोच Oindrila Kapoor ने। उन्होंने बताया कि उनके पास एक क्लाइंट आया, जो एक मल्टी-बिलियन डॉलर कंपनी में डायरेक्टर है। प्रोफेशनली सफल होने के बावजूद उसकी शादी के लिए रखी गई शर्तें बेहद सख्त और चौंकाने वाली थीं।
    30 साल से कम उम्र, ब्राह्मण और ‘नो पास्ट रिलेशन’ की मांग युवक की मांग थी कि उसकी होने वाली पत्नी 30 साल से कम उम्र की हो, ब्राह्मण परिवार से आती हो, कभी किसी रिलेशनशिप में न रही हो और ‘वर्जिन’ हो। साथ ही वह पहले से शादीशुदा भी न हो। यहां सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि खुद युवक तलाकशुदा है, लेकिन उसने अपने लिए ऐसी किसी शर्त को जरूरी नहीं माना।
    ‘महिलाओं के ज्यादा पार्टनर = बेवफाई’, युवक का तर्क
    जब Oindrila Kapoor ने इन शर्तों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया, तो युवक ने एक कथित रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि जिन महिलाओं के अधिक पार्टनर होते हैं, उनके बेवफा होने की संभावना ज्यादा होती है।
    हालांकि, जब उससे पूछा गया कि क्या यही तर्क एक तलाकशुदा पुरुष पर भी लागू होगा, तो उसने इसे खारिज करते हुए कहा “मैं पुरुष हूं, इसलिए यह तुलना सही नहीं है।”
    पितृसत्तात्मक सोच या व्यक्तिगत पसंद?
    युवक के इस बयान ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी। कई लोगों ने इसे स्पष्ट दोहरे मापदंड और पितृसत्तात्मक मानसिकता का उदाहरण बताया।
    Oindrila Kapoor ने भी इस सोच को गलत बताते हुए उसे क्लाइंट बनाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि सोच का है और ऐसी सोच के साथ वह महिलाओं के साथ अन्याय करेगा।
    इंटरनेट पर छिड़ी बहस, आलोचना ज्यादा
    पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए। एक बड़ा वर्ग युवक की आलोचना करता नजर आया। लोगों ने इसे महिलाओं का अपमान बताया और तंज कसते हुए कहा कि शायद इसी सोच के कारण उसका तलाक हुआ होगा।
    कुछ यूजर्स ने यहां तक कहा कि तलाकशुदा व्यक्ति को समान स्थिति वाले पार्टनर की तलाश करनी चाहिए।
    हालांकि, कुछ लोगों ने युवक का बचाव भी किया। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार है और तलाकशुदा होना तथा कई रिश्तों में रहना अलग-अलग बातें हैं।
    बदलते भारत में पुरानी सोच की झलक
    यह मामला ऐसे दौर में सामने आया है जब भारत में शादी को लेकर सोच बदल रही है। शहरी और शिक्षित वर्ग में शादी की उम्र बढ़ रही है, लेकिन दुल्हन के लिए कम उम्र और ‘परफेक्ट’ छवि की अपेक्षा अब भी बनी हुई है।
    तलाक की दर भले ही भारत में अभी कम हो, लेकिन मेट्रो शहरों में यह धीरे-धीरे बढ़ रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या आधुनिक शिक्षा और करियर के बावजूद समाज का एक हिस्सा अब भी पारंपरिक और असमान सोच से बाहर नहीं निकल पाया है।

  • गेहूं खरीदी पर सियासी संग्राम तेज सरकार के दावों पर कांग्रेस का बड़ा हमला

    गेहूं खरीदी पर सियासी संग्राम तेज सरकार के दावों पर कांग्रेस का बड़ा हमला


    भोपाल । मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा खरीदी का कोटा बढ़ाने के दावों के बीच अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जमीनी हकीकत सरकार के दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

    कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार भले ही 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का दावा कर रही हो लेकिन असल स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पिछले पंद्रह दिनों के आंकड़े ही सरकार की पोल खोलने के लिए काफी हैं। उनके अनुसार इस अवधि में लगभग 2.25 लाख किसानों से केवल 9.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो पाई है जबकि राज्य में कुल 19.04 लाख किसानों से खरीदी किया जाना बाकी है।

    उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मध्यप्रदेश में वास्तविक आवश्यकता लगभग 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की है लेकिन वर्तमान गति को देखते हुए यह लक्ष्य बेहद दूर दिखाई दे रहा है। चौधरी का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो पूरी खरीदी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब छह महीने का समय लग सकता है जो किसानों के हित में बिल्कुल भी नहीं है।

    कांग्रेस नेता ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल विज्ञापनों के जरिए उपलब्धियां दिखाने में लगी हुई है जबकि जमीनी स्तर पर किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर गेहूं की खरीदी को घुन या मिट्टी का हवाला देकर रोक दिया जा रहा है जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में खड़े हैं लेकिन खरीदी प्रक्रिया धीमी होने के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है।

    चौधरी ने यह भी कहा कि सरकार को किसानों को भ्रमित करना बंद करना चाहिए और वास्तविक स्थिति को स्वीकार करते हुए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार 24 घंटे के भीतर खरीदी प्रक्रिया को तेज करे ताकि किसानों को राहत मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसानों से किए गए वादों को निभाना सरकार की जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी हर साल एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहता है क्योंकि बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में खरीदी की धीमी रफ्तार न केवल किसानों की आय को प्रभावित करती है बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या वास्तव में खरीदी प्रक्रिया को तेज करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

  • Summer Travel Guide: भीषण गर्मी में राहत देने वाली खूबसूरत जगहें, घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन

    Summer Travel Guide: भीषण गर्मी में राहत देने वाली खूबसूरत जगहें, घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन


    नई दिल्ली। इस समय गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और लगतार गर्मी बढ़ती ही जाएगी। गर्मियों की तपती धूप से राहत पाने के लिए ठंडी और सुकून भरी जगहों की तलाश हर किसी को होती है। भारत में कई ऐसे खूबसूरत हिल स्टेशन और ठंडी जगहें हैं, जहां आप गर्मी से बचकर आरामदायक छुट्टियां बिता सकते हैं। चलिए जानते हैं वो घूमने की जगहें।

    वैली ऑफ फ्लावर्स
    उत्तराखंड की मशहूर वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक गर्मियों में बेहद खूबसूरत लगती है। यहां चारों तरफ रंग-बिरंगे फूल और हरियाली देखने को मिलती है, जो ट्रेकिंग के शौकीनों को खास अनुभव देती है। यहां आने के बाद आपका मन जहां से जाने को बिलकुल भी नहीं करेगा। यहां आप कई तस्वीरें भी खींच सकती हैं।

    मनाली
    इस समय मनाली जाने का अच्छा ऑप्शन हैं। गर्मियों के लिए ये सबसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन में से एक है। यहां का ठंडा मौसम, बर्फ से ढके पहाड़ और हरी-भरी वादियां पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती हैं। आप यहां रोहतांग पास, सोलंग वैली और एडवेंचर एक्टिविटीज का मजा ले सकते हैं।

    गुलमर्ग
    अगर आप कश्मीर की खूबसूरती देखना चाहते हैं, तो गुलमर्ग जरूर जाएं। यहां का ठंडा मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य इसे “धरती का स्वर्ग” बनाता है। आप यहां केबल कार राइड और बर्फीले नजारों का आनंद ले सकते हैं।यहां के नजारे ही इतने प्यारे होते हैं कि आप यहां आने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

    जुकू वैली
    नागालैंड की जुकू वैली ट्रेक अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यहां हरे-भरे मैदान और खूबसूरत फूल देखने को मिलते हैं, जो इसे एक अलग और यादगार ट्रेकिंग डेस्टिनेशन बनाते हैं।

    शिलॉन्ग
    शिलॉन्ग को ‘पूर्व का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है और यह भारत के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक है। यहां का ठंडा और सुहावना मौसम, हरियाली से भरी पहाड़ियां और झरने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गर्मियों में भी यहां का तापमान काफी आरामदायक रहता है, इसलिए यह घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

  • हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा, तेज गर्मी में सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ीं

    हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा, तेज गर्मी में सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ीं


    नई दिल्ली । प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ने के साथ ही लोगों की सेहत पर इसका सीधा असर दिखने लगा है। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण अस्पतालों और क्लीनिकों में हीट स्ट्रोक, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी शिकायतों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति लापरवाही करने पर गंभीर रूप भी ले सकती है।

    हीट स्ट्रोक क्या है और कैसे होता है
    हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान नियंत्रण से बाहर हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। तेज धूप में लंबे समय तक रहने, पर्याप्त पानी न पीने और अत्यधिक शारीरिक श्रम करने से यह स्थिति बनती है। इसमें शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे दिमाग और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।

    सिरदर्द और चक्कर आने के मुख्य कारण
    गर्मी में शरीर में पानी और नमक की कमी (डिहाइड्रेशन) होने लगती है, जिससे ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। इसी कारण लोगों को सिरदर्द, कमजोरी, थकान और चक्कर आने की शिकायत होती है। कई बार तेज धूप में अचानक बाहर निकलने से भी यह समस्या बढ़ जाती है।

    किन लोगों को ज्यादा खतरा
    बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर इस मौसम में ज्यादा जोखिम में रहते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

    हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण
    विशेषज्ञों के अनुसार हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों में तेज सिरदर्द, चक्कर, मतली, त्वचा का लाल होना, अत्यधिक पसीना या अचानक पसीना बंद हो जाना शामिल है। गंभीर स्थिति में मरीज बेहोश भी हो सकता है, जो आपातकालीन स्थिति मानी जाती है।

    गर्मी से बचाव के उपाय
    डॉक्टर सलाह देते हैं कि दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी या ओआरएस का सेवन करें। तली-भुनी चीजों से भी बचना चाहिए।

    कब लें तुरंत चिकित्सा सहायता
    अगर किसी व्यक्ति को तेज चक्कर, बेहोशी, लगातार उल्टी या शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर हीट स्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है।