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  • ग्राउंड रिपोर्ट: ममता बनर्जी और मुस्लिम वोट बैंक-दरार की आहट या कायम है भरोसा?

    ग्राउंड रिपोर्ट: ममता बनर्जी और मुस्लिम वोट बैंक-दरार की आहट या कायम है भरोसा?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल तेजी से बदलता नजर आ रहा है। लंबे समय तक सत्ता की धुरी रहे मुस्लिम मतदाता इस बार एकजुट नहीं दिख रहे, जिससे ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। पिछले चुनावों में मुस्लिम बहुल इलाकों में एकतरफा समर्थन पाने वाली पार्टी अब मतदाता सूची में नाम कटने, स्थानीय असंतोष और नए राजनीतिक विकल्पों के कारण दबाव में है।
    एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट में बदलाव बना बड़ा मुद्दा
    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद लाखों नाम हटने की चर्चा ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। अनुमान के मुताबिक करीब 91 लाख नाम सूची से बाहर हुए हैं, जिनमें लगभग 34 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता बताए जा रहे हैं, जबकि राज्य में उनकी आबादी करीब 27 प्रतिशत है। इस बदलाव से मुस्लिम वोट शेयर में 2.5 से 3 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। 2021 में TMC और भाजपा के बीच वोट शेयर का अंतर करीब 8 प्रतिशत था, ऐसे में यह कमी कई सीटों पर समीकरण बदल सकती है।
    करीबी मुकाबले वाली सीटों पर बढ़ा खतरा
    पिछले चुनाव में तृणमूल ने 37 सीटें 5 प्रतिशत से कम अंतर से जीती थीं। अब यदि किसी सीट पर 10-20 हजार वोट भी कम होते हैं, तो नतीजे पलट सकते हैं। नादिया की करीमपुर, मुर्शिदाबाद की डोमकल और भवानीपुर जैसी सीटें इसका उदाहरण हैं, जहां मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम कटने की बात सामने आई है। इससे चुनावी मुकाबला और ज्यादा कांटे का हो सकता है।
    उत्तर बंगाल में स्थानीय बनाम राज्य की राजनीति
    मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में दिलचस्प स्थिति बन गई है। यहां अधीर रंजन चौधरी का प्रभाव अब भी कायम है। कई मतदाता राज्य स्तर पर TMC को समर्थन देने की बात करते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अलग विकल्प चुनने की सोच रखते हैं। यह दोहरी रणनीति चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
    भांगड़ मॉडल: बदलते वोटर ट्रेंड का संकेत
    दक्षिण 24 परगना की भांगड़ सीट मुस्लिम वोट बैंक में बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है। यहां नौशाद सिद्दीकी की जीत ने संकेत दिया कि अब वोट एक दिशा में नहीं जा रहा। उनकी पार्टी ISF और वाम मोर्चे का गठबंधन युवाओं को आकर्षित कर रहा है और कई सीटों पर प्रभाव बढ़ा रहा है।
    डर और विकल्प के बीच उलझा मतदाता
    मुस्लिम मतदाताओं के बीच भाजपा का डर अब भी एकजुटता का कारण बना हुआ है, लेकिन साथ ही बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग भी तेज हो रही है। कई लोग मानते हैं कि अब सिर्फ एक पार्टी पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है और विकल्प तलाशना भी जरूरी है।
    हुमायूं कबीर का अलग सुर
    पूर्व TMC नेता हुमायूं कबीर ने अलग पार्टी बनाकर मुस्लिम समाज को वास्तविक हिस्सेदारी देने की बात उठाई है। उनका आरोप है कि केवल प्रतीकात्मक राजनीति से समुदाय का भला नहीं हो सकता। इस तरह के बयान विपक्ष को मजबूत आधार दे रहे हैं।
    दरार साफ, नतीजा अभी बाकी
    कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक में दरार साफ दिखाई दे रही है, लेकिन इसकी अंतिम दिशा अभी तय नहीं है। मतदाता अब राज्य की स्थिरता और स्थानीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। 2026 का चुनाव इसी बदलते मिजाज की असली परीक्षा साबित होगा।
  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे


    नई दिल्ली।
    वैश्विक बाजार (Global market) में कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में मंगलवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक बयान के बाद तेल की कीमतें करीब 5% तक बढ़ गईं, जिससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई। ट्रंप ने साफ कहा कि वे ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (ceasefire) को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए तैयार है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    इस बयान का असर तुरंत बाजार पर दिखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब $99.78 प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI (West Texas Intermediate) भी बढ़कर लगभग $94.36 प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा है।


    क्यों बढ़ी तेल की कीमत?

    तेल की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईरान-अमेरिका तनाव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने एक ईरानी ऑयल टैंकर को समुद्र में रोक लिया, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि ईरान शांति वार्ता में शामिल होगा या नहीं। ऐसी अनिश्चितता के कारण निवेशकों में डर बढ़ जाता है और वे तेल जैसे कमोडिटी में पैसा लगाते हैं, जिससे कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं।


    होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर

    तेल सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे अहम रास्ता स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) भी इस तनाव से प्रभावित हुआ है। यह रास्ता दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई को संभालता है, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि पिछले 24 घंटों में यहां से सिर्फ 3 जहाज ही गुजर पाए। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो तेल की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

    दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
    तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है, यानी कि इससे महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है। यूरोप में तो हालात को देखते हुए एयरलाइंस के लिए भी एडवाइजरी जारी करने की तैयारी हो रही है, ताकि जेट फ्यूल की कमी जैसी स्थिति से निपटा जा सके।


    रूस और यूरोप की स्थिति

    इस बीच रूस और यूरोप के बीच तेल सप्लाई को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया है कि एक अहम पाइपलाइन दोबारा शुरू हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ खबर है कि रूस मई से कुछ सप्लाई रोक सकता है। इससे भी वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।


    आगे क्या होगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रह सकता है और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, तो तेल की कीमतें $100 के पार भी जा सकती हैं। हालांकि, अगर कूटनीतिक बातचीत सफल रहती है, तो कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है।

  • UP: GRP ने ट्रेन से 16 लाख रुपये के साथ युवक को दबोचा … दो बैगों में भरी थीं नोटों की गड्डियां

    UP: GRP ने ट्रेन से 16 लाख रुपये के साथ युवक को दबोचा … दो बैगों में भरी थीं नोटों की गड्डियां


    वाराणसी।
    यूपी (Up) के वाराणसी में कैंट स्टेशन (वाराणसी जंक्शन) (Varanasi Cantt Station -Varanasi Junction) पर मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जीआरपी (GRP) ने ट्रेन के अंदर से दो बैग में भारी मात्रा में नई करंसी बरामद की। बेगमपुरा एक्सप्रेस (Begumpura Express) के जनरल कोच में सफर कर रहे एक युवक के पास से 16 लाख रुपये के नए नोट मिले। बैग खोलते ही उसमें भरीं 10 से लेकर 200 रुपये तक के नोटों की नई गड्डियां देखकर पुलिस टीम भी दंग रह गई।


    प्लेटफॉर्म नंबर आठ पर बिछाया गया जाल

    जीआरपी प्रभारी निरीक्षक रजोल नागर ने बताया कि जीआरपी, आरपीएफ और सीआईबी की संयुक्त टीम प्लेटफॉर्म नंबर आठ पर चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बेगमपुरा एक्सप्रेस के जनरल कंपार्टमेंट में तिलहर (शाहजहांपुर) निवासी रवि गुलाटी संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिया। जब उसके पिट्ठू और ट्रॉली बैग की तलाशी ली गई, तो उसके अंदर नोटों का जखीरा मिला। थाने लाकर जब गिनती की गई तो 10, 20, 50, 100 और 200 रुपये की नई करंसी की गड्डियों का कुल मूल्य 16 लाख रुपये निकला।


    दस्तावेज नहीं दिखा सका आरोपी

    पूछताछ के दौरान रवि गुलाटी ने दावा किया कि उसकी तिलहर में कॉस्मेटिक की दुकान है और उसने शादी-विवाह के सीजन में मांग को देखते हुए बाजार से यह नई करंसी जुटाई थी। वह मंगलवार सुबह काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से वाराणसी आया था और बेगमपुरा एक्सप्रेस से वापस जा रहा था। हालांकि, इतनी बड़ी नकदी के संबंध में वह कोई भी वैध दस्तावेज या रसीद पेश नहीं कर सका।


    आयकर विभाग को सौंपी गई रकम

    जीआरपी प्रभारी ने बताया कि बरामद रकम और युवक को आयकर विभाग की टीम (निरीक्षक उमेश कुमार राम, अमित कुमार और कर सहायक नीरज) के हवाले कर दिया गया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि पश्चिमी यूपी के बाजारों में नई करंसी की कालाबाजारी के लिए यह खेप ले जाई जा रही थी। इस कार्रवाई में आरपीएफ इंस्पेक्टर संदीप यादव और सीआईबी के एएसआई राकेश कुमार सिंह समेत पूरी टीम की मुख्य भूमिका रही।


    बैंकों की भूमिका संदिग्ध

    जो करंसी बरामद की गई है वह किसी न किसी बैंक से ही निकाली गई मानी जा रही है। इतनी बड़ी तादात में एक व्यक्ति को करेंसी देने वाले बैंककी भूमिका भी संदिग्ध हो गई है। माना जा रहा है कि पुलिस की जांच का दायरा बढ़ा तो बैंक के अधिकारी और कर्मचारी भी शिकंजे में आएंगे। हालांकि पुलिस ने अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा है। लेकिन जांच से इनकार भी नहीं किया गया है।

  • ‘धुरंधर’ के बाद नई तैयारी में Aditya Dhar, एक और फिल्म पर काम शुरू

    ‘धुरंधर’ के बाद नई तैयारी में Aditya Dhar, एक और फिल्म पर काम शुरू


    नई दिल्ली। बॉलीवुड डायरेक्टर Aditya Dhar अपनी हिट फ्रेंचाइजी “धुरंधर” को लेकर एक नया और अनोखा प्रयोग करने जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, “धुरंधर” और “धुरंधर द रिवेंज” की सफलता के बाद अब फिल्म की मेकिंग यानी बिहाइंड द सीन्स (BTS) पर आधारित एक अलग फिल्म बनाने की तैयारी चल रही है, जिसे थिएटर्स में रिलीज किया जा सकता है।
    क्या होगा इस खास फिल्म में?
    इस फिल्म में दर्शकों को शूटिंग के दौरान के अनदेखे पल, सेट पर हुई तैयारियां, मेकिंग प्रोसेस और कलाकारों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देखने को मिलेंगे। खास बात यह है कि Ranveer Singh और Arjun Rampal जैसे बड़े सितारों के इंटरव्यू भी इसी फिल्म में पहली बार सामने आएंगे।
    फुल-लेंथ फीचर फिल्म की तरह रिलीज
    मेकर्स इस BTS कंटेंट को सिर्फ डॉक्यूमेंट्री तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि इसे एक पूरी फीचर फिल्म के रूप में पेश करने की योजना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फिल्म 2026 के आखिर तक सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है और बाद में इसे OTT प्लेटफॉर्म पर भी लाया जाएगा।
    पहली बार होगा ऐसा प्रयोग
    भारतीय सिनेमा में यह एक अनोखा प्रयोग माना जा रहा है। अब तक फिल्मों के BTS वीडियो सोशल मीडिया या प्रमोशन के तौर पर ही रिलीज होते थे, लेकिन पहली बार किसी फिल्म की पूरी मेकिंग को बड़े पर्दे पर अलग फिल्म की तरह दिखाने की योजना है।
    रिलीज से पहले सख्त गोपनीयता
    फिल्म की टीम इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी सतर्क है। मेकर्स नहीं चाहते कि कोई भी BTS फुटेज रिलीज से पहले लीक हो, इसलिए कलाकार भी फिलहाल मीडिया इंटरव्यू से दूरी बनाए हुए हैं। उनका उद्देश्य है कि दर्शक पहली बार पूरा अनुभव थिएटर में ही लें।
    फैंस के लिए खास तोहफा
    ‘धुरंधर’ के फैंस के लिए यह फिल्म एक अलग ही अनुभव लेकर आएगी, जहां वे अपने पसंदीदा सितारों और फिल्म के पीछे की मेहनत को करीब से देख सकेंगे।

  • सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,

    सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने मंगलवार को सबरीमाला मामले (Sabarimala case) में सुनवाई की। पीठ ने सवाल किया कि कोई भक्त जो मंदिर में मौजूदा देवता को अपना मूल रचियता मानता है, उसके स्पर्श मात्र से मूर्ति या देवता अपवित्र कैसे हो सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय पीठ ने ये सवाल सबरीमाला मंदिर के मुख्य तांत्री (पुजारी) की दलीलों को सुनने के बाद किया।


    पुजारी की दलील

    पुजारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि ने छठे दिन की बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी श्रद्धालु का पूजा स्थल में प्रवेश करने का अधिकार, उस देवता की विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए। कहा कि जब कोई भक्त पूजा के लिए मंदिर जाता है, तो वह देवता की विशेषताओं के उलट नहीं हो सकता। अदालत ने सवाल किया कि मंदिर में यदि किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश या किसी अन्य स्थिति के आधार पर मूर्ति स्पर्श से रोका जाए, तो क्या संविधान मूकदर्शक बना रहेगा?

    पीठ सबरीमाला सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर रही है। सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने ही 2018 के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार अर्जी दी है, जिसमें महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई।


    ‘भक्त के लिए संविधान को ही आगे आना होगा’

    सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए नौ जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह ने मुख्य पुजारी से पूछा कि जब किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश के आधार पर देवता को छूने से रोका जाए, तो क्या तब संविधान दखल दे सकता है? उन्होंने पूछा कि श्रद्धालु की सहायता के लिए कौन आगे आएगा, जिसे देवी-देवता को स्पर्श करने की अनुमति नहीं है। इस स्थिति में अदालत की क्या भूमिका होगी? इसके बार उन्होंने स्वयं इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि यह कार्य संविधान को ही करना होगा।


    रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग

    सुनवाई के दौरान सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने पीठ से कहा कि किसी भी मंदिर में होने वाले समारोह और रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग है। इसलिए यह एक धार्मिक प्रथा है। ऐसी प्रथा को जारी रखना, जो कि एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, पूजा के अधिकार का ही हिस्सा होगा। अधिवक्ता ने कहा कि अनुच्छेद- 25 के तहत पूजा का अधिकार केवल वही व्यक्ति मांग सकता है, जिसका उस देवता में विश्वास हो, जिसमें देवता की विशिष्ट विशेषताएं भी शामिल हों।

    उन्होंने कहा कोई भी व्यक्ति जो मंदिर की मूर्ति में विश्वास रखता है और देवता को अपना ईश्वर मानता है, वह मंदिर की मूल विशेषताओं के विपरीत कोई कार्य नहीं करेगा, क्योंकि ऐसी प्रथा को उसके धर्म की प्रथा का हिस्सा नहीं माना जा सकता। अधिवक्ता गिरी ने कहा कि अनुच्छेद 25(1) के तहत मेरा अधिकार जहां तक पूजा स्थल में प्रवेश का अधिकार शामिल है, उसे मंदिरों द्वारा की जाने वाली प्रथाओं- देवता की विशेषताओं के अनुरूप ही होना होगा।


    ‘रचयिता और उसकी रचना के बीच फर्क नहीं’

    अधिवक्ता गिरि के तर्क पर जस्टिस अमनुल्लाह ने सवाल किया कि जब मैं किसी मंदिर में जाता हूं, तो मेरा मूल विश्वास यह होता है कि वह भगवान हैं, वह मेरे रचयिता हैं। उन्होंने ही मुझे बनाया है। है ना? मैं वहां सौ फीसदी विश्वास के साथ जाता हूं और पूरी तरह समर्पित होता हूं। मेरे दिल में जरा भी अशुद्धि नहीं होती और वहां, मुझसे कहा जाता है कि विभिन्न वजहों से मुझे हमेशा के लिए देवता को छूने की इजाजत नहीं है।


    धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा से बाहर?

    संविधान पीठ ने कहा कि यह बात स्वीकार करना मुश्किल है कि धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। पीठ ने सवाल किया कि सामाजिक सुधार के नाम पर ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने वाले कानूनों की जांच और कौन करेगा? सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘हम धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमाओं से अवगत है और इसके लिए विस्तृत दलीलों की कोई आवश्यकता नहीं है।

  • ‘राजा शिवाजी’ में दमदार स्टारकास्ट: Riteish Deshmukh ने लिए 15 करोड़, बाकी सितारों की फीस भी चर्चा में

    ‘राजा शिवाजी’ में दमदार स्टारकास्ट: Riteish Deshmukh ने लिए 15 करोड़, बाकी सितारों की फीस भी चर्चा में


    नई दिल्ली ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म “राजा शिवाजी” इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल है। फिल्म में Riteish Deshmukh छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। 1 मई 2026 को रिलीज होने जा रही इस फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी फीस को लेकर भी खूब चर्चा है।

    रितेश देशमुख
    फिल्म के लीड एक्टर और डायरेक्टर Riteish Deshmukh ने इस प्रोजेक्ट के लिए कथित तौर पर 15 से 18 करोड़ रुपये की फीस ली है। यह उनके करियर का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

    अभिषेक बच्चन
    Abhishek Bachchan इस फिल्म में संभाजी शाहजी भोसले के किरदार में नजर आएंगे। यह उनकी मराठी सिनेमा में डेब्यू फिल्म भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 6 से 8 करोड़ रुपये फीस ली है।

    संजय दत्त
    Sanjay Dutt फिल्म में अफजल खान की भूमिका निभा रहे हैं। उनके इस दमदार किरदार के लिए उन्हें कथित तौर पर 8 से 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

    महेश मांजरेकर
    Mahesh Manjrekar ‘राजा शिवाजी’ में लखुजी जाधव का किरदार निभा रहे हैं। उन्हें इस भूमिका के लिए करीब 2 से 3 करोड़ रुपये मिले हैं।

    फरदीन खान
    Fardeen Khan फिल्म में मुगल बादशाह शाहजहां के रोल में नजर आएंगे। उनकी फीस 2 से 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    भाग्यश्री
    Bhagyashree इस फिल्म में जीजाबाई (छत्रपति शिवाजी महाराज की मां) की अहम भूमिका निभा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें 1 से 2 करोड़ रुपये फीस मिली है।

    बड़ी स्टारकास्ट, बड़ा बजट
    फिल्म की स्टारकास्ट और उनके किरदारों को देखते हुए साफ है कि “राजा शिवाजी” बड़े बजट और भव्य स्तर पर तैयार की गई है। ऐतिहासिक किरदारों और दमदार कलाकारों के साथ यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ा असर डाल सकती है।

  • ब्राह्मण लड़का कैसे बना ‘नबी अहमद’? Ravindra Kaushik की हैरान कर देने वाली कहानी

    ब्राह्मण लड़का कैसे बना ‘नबी अहमद’? Ravindra Kaushik की हैरान कर देने वाली कहानी


    नई दिल्ली। हाल ही में फिल्म “धुरंधर 2” के रिलीज के बाद भारत के चर्चित जासूस रविंद्र कौशिक एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। फिल्म में दिखाए गए किरदार की तुलना उनसे की जा रही है, लेकिन उनके परिवार का कहना है कि असल जिंदगी में जासूसी की दुनिया फिल्मी कहानी से बिल्कुल अलग होती है।
    ब्राह्मण परिवार का बेटा बना पाकिस्तान में ‘नबी अहमद’
    राजस्थान के गंगानगर में जन्मे रविंद्र कौशिक एक साधारण ब्राह्मण परिवार से थे। उनकी प्रतिभा और अभिनय कौशल को देखते हुए उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी द्वारा चुना गया। ट्रेनिंग के बाद उन्हें पाकिस्तान भेजा गया, जहां उन्होंने अपनी पहचान बदलकर ‘नबी अहमद शाकिर’ के नाम से जिंदगी शुरू की और वर्षों तक भारत के लिए अहम जानकारियां जुटाईं।
    भारत के पहले ‘रेजिडेंट एजेंट’
    रविंद्र कौशिक को भारत का पहला ‘रेजिडेंट एजेंट’ माना जाता है। यानी वे केवल जानकारी जुटाने के लिए नहीं गए थे, बल्कि वहां स्थायी रूप से रहकर एक पूरी नई पहचान बनाई—शादी की, परिवार बसाया और समाज में घुलमिल गए। यह उस समय भारत की खुफिया रणनीति का पहला बड़ा प्रयोग था।
    फिल्मी जासूसों से क्यों अलग थे?
    परिवार के अनुसार, फिल्मों में दिखाया जाता है कि जासूस खुलकर लड़ाई करते हैं या हीरो की तरह नजर आते हैं, जबकि असल में जासूस का काम गुप्त रहना होता है। वे कभी ध्यान आकर्षित नहीं करते। दिलचस्प बात यह भी है कि जहां आमतौर पर जासूसों का व्यक्तित्व साधारण रखा जाता है ताकि वे भीड़ में खो जाएं, वहीं रविंद्र कौशिक दिखने में आकर्षक और व्यक्तित्ववान थे—जो इस पेशे के लिए असामान्य माना जाता है।
    परिवार से भी छिपाई सच्चाई
    उनकी बहन के मुताबिक, परिवार को कभी यह नहीं बताया गया कि वे जासूसी कर रहे हैं। घर पर अधिकारी आते-जाते थे, लेकिन उनकी असली पहचान का किसी को अंदाजा नहीं था। रविंद्र कौशिक ने अपनी भूमिका को आखिरी सांस तक निभाया और परिवार को सिर्फ यही बताया कि वे एक अच्छी नौकरी कर रहे हैं।
    पाकिस्तान में गिरफ्तारी और दर्दनाक अंत
    एक अन्य एजेंट की गलती से उनकी पहचान उजागर हो गई और उन्हें पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया। वहां उन्हें वर्षों तक जेल में कठोर यातनाएं दी गईं। गंभीर बीमारियों और खराब हालात के चलते उनकी मौत हो गई।
    परिवार को उनकी मौत की जानकारी भी सीधे भारत से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठन के जरिए ईमेल से मिली जिसमें बताया गया कि ‘नबी अहमद शाकिर उर्फ रविंद्र कौशिक अब इस दुनिया में नहीं रहे।’
    सरकारी मदद पर उठे सवाल
    परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी और मौत के बाद उन्हें न तो पर्याप्त सहायता मिली और न ही कोई आधिकारिक सांत्वना। उनकी शहादत को लेकर भी लंबे समय तक स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
    देशभक्ति और अभिनय का अनोखा संगम
    रविंद्र कौशिक एक अच्छे कलाकार भी थे और देशभक्ति की भावना से प्रेरित थे। उन्हें अभिनय के जरिए देश सेवा का मौका मिला और उन्होंने इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया यहां तक कि अपनी असली पहचान तक त्याग दी।
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  • मरने का सीन करते-करते सच में दुनिया छोड़ गया यह एक्टर, सेट पर छा गया सन्नाटा

    मरने का सीन करते-करते सच में दुनिया छोड़ गया यह एक्टर, सेट पर छा गया सन्नाटा



    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के लोकप्रिय कॉमेडी एक्टर गोप ने अपनी अदाकारी से लाखों दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी, लेकिन उनकी जिंदगी का अंत इतना अप्रत्याशित था कि फिल्म इंडस्ट्री भी हैरान रह गई।

    कॉमेडी से बने दर्शकों के चहेते

    गोप अपने समय के उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिनकी स्क्रीन एंट्री ही लोगों को हंसा देती थी। उनकी कॉमिक टाइमिंग और अनोखे किरदार उन्हें खास बनाते थे। फिल्म “पतंगा” और अन्य कई फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाईं। मशहूर गाना “मेरे पिया गए रंगून” भी उनकी फिल्म का हिस्सा रहा, जिसने उन्हें और लोकप्रिय बना दिया।

    फिल्मों में अनोखे किरदारों से छा गए

    गोप के किरदारों के नाम भी उतने ही मजेदार और यादगार थे जितना उनका अभिनय। “मक्खी चूस” में “मानिक लाल मक्खी चूस”, “पाकेटमार” में “उधार चंद डब्बू” और “तराना” में उनकी भूमिका ने दर्शकों को खूब हंसाया। उन्होंने कुछ फिल्मों में विलेन का रोल भी निभाया, लेकिन उसमें भी कॉमिक अंदाज बनाए रखा।

    याकूब के साथ बनी हिट जोड़ी

    गोप और अभिनेता याकूब की जोड़ी उस दौर की चर्चित जोड़ियों में से एक थी। दोनों ने साथ मिलकर कई फिल्मों में काम किया और दर्शकों को खूब मनोरंजन दिया।

    निजी जीवन और व्यक्तित्व

    गोप की निजी जिंदगी भी उतनी ही दिलचस्प थी। उन्होंने अभिनेत्री लतिका से विवाह किया था, जो एंग्लो-नेपाली मूल की थीं। शादी के लिए उन्होंने धर्म परिवर्तन भी किया था। कहा जाता है कि उनके निधन के बाद उनकी पत्नी बच्चों के साथ विदेश चली गई थीं।

    फिल्म ‘तीसरी आंख’ और वह दर्दनाक घटना

    सबसे चौंकाने वाली घटना उनकी अंतिम फिल्म “तीसरी आंख” की शूटिंग के दौरान हुई। एक सीन में उन्हें हार्ट अटैक का अभिनय करना था। उन्होंने बेहद वास्तविक अभिनय करते हुए गिरने का सीन किया। क्रू को लगा कि यह बेहतरीन परफॉर्मेंस है और “कट” बोलने के बाद भी वे नहीं उठे। बाद में पता चला कि गोप को सच में दिल का दौरा पड़ा था और उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

    सेट पर तालियां, लेकिन लौट नहीं सके

    सबसे दुखद बात यह रही कि जिस सीन में उन्होंने मौत का अभिनय किया, उसी सीन के बाद लोग उनकी परफॉर्मेंस की तारीफ में तालियां बजाते रहे, जबकि वास्तव में वह इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे।

    एक युग का अंत

    गोप का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका था। दर्शक जो उन्हें हमेशा हंसते हुए देखते थे, उनकी अचानक हुई मृत्यु से गहरे सदमे में चले गए।

  • चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट

    चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट


    देहरादून।
    इंतजार की घड़ियां अब खत्म हो चुकी है। आज 22 अप्रैल 2026 को सुबह केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट खोल दिए गए हैं। भगवान शिव (Lord Shiva.) के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद ही खास है। मंदिर के द्वार खुलने से पहले ही धाम में भक्ति का माहौल बन गया। वहीं बीती शाम ही यहां पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की चल विग्रह डोली पहुंचीं। बता दें कि ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल 6 महीने के लिए बाबा केदार की इस डोली को ठंडी के दिनों में केदारनाथ धाम से ऊखीमठ ले जाया जाता है। मौसम सही होते ही इस डोली को वापस केदारनाथ लाया जाता है।

    आज सुबह से ही केदारनाथ में हर हर महादेव के जयकारों से साथ हजारों भक्त पहुंचते रहें। बता दें कि ये सिर्फ एक मंदिर या ज्योतिर्लिंग नहीं है बल्कि आस्था और विश्वास का अटूट केंद्र है। इसी वजह से केदारनाथ मंदिर का कपाट खुलना भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। आइए जानते हैं कि इस मंदिर से जुड़ी जानकारियां-


    इतने बजे खुले केदारनाथ मंदिर के कपाट

    आज सुबह 8 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रों और पूरे विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के खास मौके पर मंदिर को कई क्विंटल फूलों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया जिससे इसकी भव्यता देखते ही बन रही है। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।


    भोग 25 अप्रैल से शुरू

    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के पहले दिन मंदिर में खास पूजा और आरती की गई। वहीं परंपरा के अनुसार नियमित भोग और पूरी तरह से तय दिनचर्या वाली पूजा 25 अप्रैल से शुरू होगी। यानी शुरुआती कुछ दिनों में यहां विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद रोज की पूजा सामान्य तरीके से होती है।


    केदारनाथ से पहले किनके दर्शन करना जरूरी?

    मान्यता है कि केदारनाथ जाने से पहले भगवान भैरवनाथ के दर्शन करना जरूरी है। भैरवनाथ मंदिर केदारनाथ धाम के पास ही ऊंचाई पर स्थित है। कहा जाता है कि जब सर्दियों में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तब भैरवनाथ ही पूरे धाम की रक्षा करते हैं। उन्हें यहां का क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। ऐसे में लोग केदारनाथ के दर्शन करने से पहले भैरवनाथ मंदिर में ही मत्था टेकते हैं। ऐसा माना जाता है कि भैरवनाथ के दर्शन के बिना केदारनाथ यात्रा अधूरी है। लोगों का मानना है कि भैरवनाथ मंदिर में दर्शन करने से केदारनाथ यात्रा सफल और सुरक्षित होती है।

    केदारनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। ऐसे में यहां दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। कपाट खुलते ही देश-विदेश से तमाम श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


    कब खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट

    केदारनाथ के बाद अब सबकी नजरें भगवान विष्णु के पवित्र धाम बद्रीनाथ पर हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट कल यानी 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। कपाट के खुलने का समय सुबह 6:15 बजे है। बता दें कि ये चारधाम यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है। बद्रीनाथ को धरती का बैकुंठ यानी भगवान विष्णु का निवास स्थान कहा जाता है।

  • MP समेत पूरा उत्तर-पश्चिम भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में… इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    MP समेत पूरा उत्तर-पश्चिम भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में… इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट


    भोपाल।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 22 अप्रैल को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग-अलग रहेगा। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत (North-west and central India.) में भीषण गर्मी और लू (Extreme heat and heat wave.) का असर जारी रहेगा। पूर्वोत्तर, दक्षिण और कुछ पश्चिमी हिस्सों में बारिश व आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। पहले बात उत्तर-पश्चिम भारत की करें तो राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। इन इलाकों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक जा सकता है और लू चलने की संभावना है।

    IMD के अनुसार, खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान (Western Rajasthan.) और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आज भी हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 24 घंटों के दौरान भी लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ने और लू चलने का अनुमान है। राजधानी लखनऊ में दिन का तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है, जबकि रात का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है।


    मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में गर्मी, कुछ इलाकों में बारिश

    मध्य भारत यानी मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में भी मौसम काफी गर्म रहेगा। यहां तापमान में और बढ़ोतरी के संकेत हैं। कई जगहों पर लू जैसी स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बादल छाने से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन यह राहत अस्थायी होगी और कुल मिलाकर गर्मी का असर बना रहेगा। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मौसम का मिजाज थोड़ा अलग रहेगा। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे- असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश) में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि आंधी-तूफान और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा।


    असम में भारी बारिश जारी रहने की संभावना

    अधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, असम में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने और जान-माल की हानि से बचने के लिए सावधानियां बरतने के लिए कहा है। इसमें कहा गया कि आने वाले दिनों में छिटपुट बारिश और आंधी चलने की संभावना है। सभी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, दक्षिण भारत और तटीय इलाकों की बात करें तो केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा। इसके साथ ही कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। महाराष्ट्र और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में भी 22 अप्रैल को हल्की बारिश और आंधी की संभावना है, जिससे अस्थायी राहत मिलेगी लेकिन उमस बनी रहेगी।