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  • क्रिकेट की एक गेंद ने ,छीनी दो जानें दोस्ती निभाने उतरे, और मौत ने घेरा

    क्रिकेट की एक गेंद ने ,छीनी दो जानें दोस्ती निभाने उतरे, और मौत ने घेरा


    देवास । देवास जिले के नेवरी इलाके में एक साधारण सा खेल अचानक ऐसी त्रासदी में बदल गया जिसने पूरे गांव को शोक और सन्नाटे में डुबो दिया खेत के पास बने एक खाली मैदान में बच्चे रोज की तरह क्रिकेट खेल रहे थे हंसी ठिठोली और खेल का उत्साह अपने चरम पर था तभी खेलते खेलते गेंद पास के एक पुराने कुएं में जा गिरी किसी ने नहीं सोचा था कि यही एक छोटी सी घटना दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लेगी

    करीब पंद्रह वर्षीय देवेंद्र सबसे पहले गेंद निकालने के लिए कुएं में उतरा बताया जा रहा है कि कुएं में पानी का स्तर काफी ज्यादा था और फिसलन भी थी जैसे ही वह नीचे पहुंचा उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पानी में डूबने लगा ऊपर खड़े उसके साथियों के बीच अचानक चीख पुकार मच गई इसी बीच अपने दोस्त को बचाने की कोशिश में सोलह वर्षीय राजवीर बिना कुछ सोचे समझे कुएं में कूद पड़ा लेकिन यह बहादुरी दोनों के लिए भारी पड़ गई

    दोनों एक दूसरे को पकड़कर खुद को बचाने की कोशिश करते रहे लेकिन पानी की गहराई और घबराहट ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया कुछ ही पलों में दोनों पानी में समा गए ऊपर खड़े बच्चों की चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया काफी मशक्कत के बाद दोनों को कुएं से बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया

    इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और मातम का माहौल है सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली बात यह रही कि देवेंद्र का उसी दिन जन्मदिन था जिस दिन उसकी जिंदगी खत्म हो गई वह अपनी विधवा मां का इकलौता सहारा था पिता के निधन के बाद मां ने बेटे के सहारे ही जिंदगी को थाम रखा था लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था बेटे का शव देखते ही मां का विलाप हर किसी की आंखें नम कर गया

    राजवीर भी अपने परिवार का चहेता था और उसकी अचानक मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया दोनों बच्चों की दोस्ती और एक दूसरे के लिए जान जोखिम में डालने की कोशिश अब गांव के हर व्यक्ति के दिल को चुभ रही है

    पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और घटना के सभी पहलुओं को देखा जा रहा है पोस्टमार्टम के बाद दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार एक साथ किया जाएगा गांव में हर व्यक्ति इस हादसे को याद कर सहम उठा है और यह सवाल हर किसी के मन में है कि अगर थोड़ी सी सावधानी बरती जाती तो शायद ये दो जिंदगियां बच सकती थीं

    यह हादसा एक कड़वी सीख भी छोड़ गया है कि खुले कुएं और असुरक्षित स्थान बच्चों के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं एक छोटी सी लापरवाही कब बड़ी त्रासदी बन जाए इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है

  • जेल अस्पताल में फांसी लगाकर बंदी ने दी जान, 2 साल से काट रहा था सजा

    जेल अस्पताल में फांसी लगाकर बंदी ने दी जान, 2 साल से काट रहा था सजा


    नई दिल्ली। जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र केंद्रीय जेल में सोमवार सुबह सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां एक बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 8:30 बजे जेल के अस्पताल वार्ड नंबर-3 के बाथरूम में बंदी का शव गमछे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही जेल अधीक्षक, जेलर और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

    2024 से जेल में था बंद, हत्या का मामला चल रहा था

    मृतक की पहचान गुड्डू उर्फ राजा विश्वकर्मा (58) के रूप में हुई है, जो 16 अगस्त 2024 से जेल में बंद था। वह संजीवनी नगर क्षेत्र का निवासी था और उसके खिलाफ हत्या समेत कई धाराओं में मामला दर्ज था। बताया जा रहा है कि वह शुगर जैसी बीमारी से भी पीड़ित था। फिलहाल उसका केस अदालत में विचाराधीन था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह जेल अस्पताल में भर्ती था, जहां उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।

    मजिस्ट्रेट जांच के आदेश, परिजनों को दी गई सूचना

    घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने मजिस्ट्रेट जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परिजनों को भी सूचना दे दी गई है और शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।

    एक दिन पहले भोपाल जेल में भी हुआ था ऐसा ही मामला

    इस घटना से एक दिन पहले भोपाल की सेंट्रल जेल में भी एक बंदी ने आत्महत्या कर ली थी। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने जेल परिसर की गौशाला में पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। इस मामले में गांधी मेडिकल कॉलेज में शव रखवाकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

  • फिर चर्चा में ट्रंप का ‘नोबेल कनेक्शन’: मचाडो बोलीं—वह ऐसे नेता…

    फिर चर्चा में ट्रंप का ‘नोबेल कनेक्शन’: मचाडो बोलीं—वह ऐसे नेता…

    वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप और नोबेल पुरस्कार को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार वजह बनी हैं कोरिना मचाडो, जिन्होंने ट्रंप की खुलकर तारीफ करते हुए उन्हें ऐसा नेता बताया है, जिसने वेनेजुएला की आज़ादी के लिए जोखिम उठाया।
    मचाडो ने क्या कहा?

    मैड्रिड में आयोजित एक कार्यक्रम में मचाडो ने कहा कि दुनिया ट्रंप को ऐसे नेता के रूप में देखती है, जिन्होंने वेनेजुएला को तानाशाही से मुक्त कराने के प्रयास में अपने देश के नागरिकों की जान तक खतरे में डाली।
    उन्होंने यह भी साफ किया कि अपने फैसलों को लेकर उन्हें कोई पछतावा नहीं है।

    ‘नोबेल पदक’ को लेकर क्यों मचा विवाद?

    रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार मिला था, जिसके बाद उन्होंने अपना पदक ट्रंप को सौंप दिया।

    इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी।

    हालांकि, नोबेल समिति ने स्पष्ट किया कि

    पुरस्कार किसी एक व्यक्ति को ही दिया जाता है
    इसे न ट्रांसफर किया जा सकता है, न साझा

    यानी पदक भले किसी के पास हो, लेकिन सम्मान का अधिकार मूल विजेता के पास ही रहता है।

    ट्रंप और नोबेल—पुराना रिश्ता

    ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चा में रहे हैं।

    उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने का दावा करते हुए खुद को इस पुरस्कार का दावेदार बताया था।

    लेकिन समिति ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए उनके नाम पर विचार नहीं किया।

    वेनेजुएला की राजनीति भी बनी वजह

    इस पूरे मामले के पीछे निकोलस मादुरो सरकार के खिलाफ अमेरिकी रुख भी एक अहम कारण रहा। मचाडो ने इसे वेनेजुएला के लिए ऐतिहासिक बताया, जबकि कई विशेषज्ञ इसे राजनीतिक रणनीति मानते हैं।

    ट्रंप और नोबेल पुरस्कार को लेकर विवाद नया नहीं है, लेकिन मचाडो के ताजा बयान ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह मामला सिर्फ एक पदक का नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, छवि और प्रभाव की जंग का हिस्सा बन चुका है।
  • Astro Tips: इस सुगंधित वस्तु से मजबूत होते हैं चंद्र शुक्र गुरु

    Astro Tips: इस सुगंधित वस्तु से मजबूत होते हैं चंद्र शुक्र गुरु


    उज्‍जैन। चंदन सुगंध तो फैलाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही चंदन एक शक्तिशाली वस्तु है जो आपकी कुंडली के तीन ग्रह को एक साथ मजबूत कर कई परेशानियों से उबार सकता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंदन जीवन में खुशियां लाने का कारक बन सकता है. इससे जुड़े उपाय धन से लेकर पारिवारिक समस्याओं का भी अंत कर सकता है. इसके साथ ही एक चंद्रमा, गुरु बृहस्पति और शुक्र ग्रह के दोष को कुंडली से दूर कर इन्हें मजबूत कर सकता है. आइए जानते हैं चंदन के प्रभावशाली उपाय क्या हैं, साथ ही ये भी जानेंगे कि चंदन का चंद्रमा, गुरु बृहस्पति और शुक्र ग्रह से क्या संबंध है.

    चंदन और गुरु बृहस्पति ग्रह-
    ज्योतिष शास्त्र में चंदन और गुरु बृहस्पति ग्रह का बहुत गहरा संबंध बताया गया है. गुरु ग्रह भाग्य और ज्ञान के का कारक है. कुंडली में गुरु मजबूत होने का अर्थ है कि भाग्य तेज है और भाग्य तेज होने पर हर ओर से व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है. ऐसे व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. गुरुवार के दिन माथे पर सफेद या पीले चंदन का तिलक नियमित रूप से लगाएं तो इसके लाभ दिखने लगेंगे. मन शांत रहेगा.

    चंदन और शुक्र ग्रह-
    ज्योतिष शास्त्र में सफेद चंदन को शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है. शुक्र ग्रह के मजबूत होने पर जातक को सुख-समृद्धि, प्रेम और सौदर्य प्राप्त होता है. ऐसे में शुक्रवार को नियमित रूप से सफेद चंदन का तिलक लगाएं, चंदन का सुगंध लगाएं और स्नान के पानी में चंदन मिलाएं तो शुक्र मजबूत होगा. जिससे धन और परिवार संबंधी दिक्कतें दूर होने लगेंगी.

    चंदन और चंद्रमा-
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंदन का गहरा संबंध चंद्रमा से भी माना गया है. चंदन और चंद्रमा दोनों ही मानसिक शांति और शीतलता के कारक हैं. मन के कारक चंद्रमा के मजबूत रहने पर जातक भावनात्मक रूप से स्थिर रहता है और धन संबंधी सही निर्णय लेता है. ऐसे में चंद्रमा को मजबूत करने के लिए अगर हर दिन घर से निकलने से पहले ललाट और गले पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं तो चंद्रमा को मजबूत किया जा सकता है.

    घर के सुख और समृद्धि के लिए उपाय
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर के सुख और समृद्धि के लिए पुष्य नक्षत्र में पड़ने वाले गुरुवार के दिन चंदन के पेड़ की जड़ में सिंदूर, पीले चावल चढ़ाएं और जल अर्पित करें. धूप-दीप दिखाएं और फिर दूसरे दिन उसी चंदन के पेड़ की थोड़ी सी लकड़ी लाल कपड़े में बांधें व घर के मुख्य द्वार पर टांगें. घर में सकारात्मक ऊर्जा, खुशियां व समृद्धि आएगी.

    आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उपाय
    लाल कपड़े में चंदन की लकड़ी बांधे और इसे मां लक्ष्मी को चढ़ाएं. अब माता लक्ष्मी और चंदन की पूजा करें व कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें. अब इस चंदन को धन वाली जगह पर रखें. आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगेगी और धन-धान्य की कभी कमी नहीं होगी.

    वैवाहिक जीवन में सुख लाने के लिए उपाय
    वैवाहिक जीवन में सुख बढ़े इसके लिए शुभ तिथि या मुहूर्त में चंदन की जड़ को गंगाजल से शुद्ध करें और इसे फिटकरी के साथ छोटी सी पोटली बनाकर कमर में बांधें. सुख और पति पत्नी के बीच का प्रेम बढ़ेगा.

    नजर दोष दूर करने के उपाय
    बच्चे के ऊपर से नजर दोष हटाने के लिए उसे चंदन की छाल का धुआं दिखाए. बुरी शक्तियां दूर होंगी और मन शांत होगा. हर दिन बच्चे को चंदन का तिलक लगाएं.

    वास्तु दोष दूर करने का उपाय
    घर का वास्तु दोष दूर करना है तो चंदन का चूरा, अश्वगंधा और गोखरू चूर्ण लें और इसमें कपूर मिला लें और इसी चूर्ण से नियमिक 40 दिन तक हवन करें. लाभ दिखेगा. इसके अलावा घर के पश्चिम या दक्षिण दिशा में एक चंदन का पेड़ लगाने से भी घर का वास्तु ठीक हो जाएगा.

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर शुरू होगी बातचीत, सहमति के बाद क्यों अटक गया मामला?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर शुरू होगी बातचीत, सहमति के बाद क्यों अटक गया मामला?

    नई दिल्ली। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (BTA) को लेकर आज 20 अप्रैल से वॉशिंगटन डीसी में अहम दौर की बातचीत शुरू हो रही है। तीन दिन तक चलने वाली इस वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे। उनके साथ कस्टम और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल रहेंगे।

    टैरिफ बदलाव से बिगड़ा समीकरण

    यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी टैरिफ नीति में बड़ा बदलाव आया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों के आयात पर 10% का अस्थायी टैरिफ लागू कर दिया।

    पहले प्रस्तावित डील के तहत अमेरिका भारत के उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने पर सहमत था, लेकिन नए नियम के बाद सभी देशों पर समान शुल्क लगने से भारत को मिलने वाला खास फायदा कम हो गया। यही वजह है कि अब दोनों देशों को डील की शर्तों पर फिर से विचार करना पड़ रहा है।

    सेक्शन 301 भी बड़ा मुद्दा

    बातचीत में सेक्शन 301 के तहत अमेरिका द्वारा शुरू की गई जांच भी अहम मुद्दा रहेगी। अमेरिका का आरोप है कि भारत कुछ क्षेत्रों में अनुचित व्यापारिक नीतियां अपनाता है, जबकि भारत ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इन्हें खत्म करने की मांग की है।

    किन सेक्टर पर होगी चर्चा?

    प्रस्तावित डील में भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने का संकेत दिया था। इनमें शामिल हैं:

    सोयाबीन तेल
    ड्राई फ्रूट्स
    फल
    वाइन और स्पिरिट्स
    पशु आहार

    इसके बदले भारत ने ऊर्जा, एविएशन, टेक्नोलॉजी और कोकिंग कोल जैसे क्षेत्रों में अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर तक आयात बढ़ाने की इच्छा जताई है।

    कृषि सेक्टर बना सबसे बड़ा अड़ंगा

    अमेरिका की ओर से बाजार पहुंच (Market Access) सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा है कि अमेरिका भारतीय बाजार में अपने निर्यात के लिए बेहतर अवसर चाहता है।

    खासतौर पर कृषि क्षेत्र—जहां टैरिफ ज्यादा हैं—विवाद का केंद्र बन गया है।

    सेब पर टैरिफ बना विवाद की जड़

    अमेरिका ने भारत में सेब पर 50% टैरिफ को बड़ा मुद्दा बताया है। इसका असर साफ दिखा है:

    2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी: 53%
    अब घटकर: करीब 8.5%

    इस दौरान ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

    क्यों फंसा पेंच?

    अमेरिकी टैरिफ नीति में अचानक बदलाव
    सेक्शन 301 की जांच
    कृषि और खासकर सेब जैसे उत्पादों पर ऊंचा शुल्क
    भारत को मिलने वाला पहले का तुलनात्मक लाभ खत्म होना

    अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह नया दौर दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक लाभ वाली ट्रेड डील का रास्ता साफ कर पाएगा या नहीं।

  • ग्वालियर में सनसनीखेज वारदात, पोते ने दादी का हाथ चबाया; नशे में किया हंगामा

    ग्वालियर में सनसनीखेज वारदात, पोते ने दादी का हाथ चबाया; नशे में किया हंगामा


    नई दिल्ली। ग्वालियर के इंदरगंज थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां शराब के नशे में एक युवक ने अपनी ही 70 वर्षीय दादी पर बर्बर हमला कर दिया। खल्लासीपुरा इलाके में रहने वाली कलावती श्रीवास पर उनके पोते मनीष (22) ने ऐसा हमला किया कि उनका हाथ बुरी तरह जख्मी हो गया और हड्डी तक नजर आने लगी। यह दिल दहला देने वाली घटना रविवार रात की बताई जा रही है, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी।

    चाचा-चाची से शुरू हुआ विवाद, हिंसा में बदला माहौल

    जानकारी के अनुसार, आरोपी मनीष शराब के नशे में घर पहुंचा और किसी बात को लेकर अपने चाचा विनोद और चाची चेतना से झगड़ा करने लगा। विवाद इतना बढ़ गया कि उसने दोनों के साथ मारपीट शुरू कर दी। घर का माहौल अचानक हिंसक हो गया और परिवार के लोग घबरा गए।

    बीच-बचाव करने आई दादी बनीं शिकार

    जब घर में झगड़ा बढ़ता देख बुजुर्ग दादी कलावती बीच-बचाव के लिए आगे आईं, तो आरोपी का गुस्सा उन पर टूट पड़ा। मनीष ने दादी के हाथ को दांतों से इस कदर काटा कि मांस तक निकल गया और हड्डी साफ दिखाई देने लगी। घटना की भयावहता ने परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी स्तब्ध कर दिया।

    आरोपी फरार, पुलिस कर रही तलाश

    घटना के बाद घायल दादी और चाची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इंदरगंज थाना प्रभारी दीप्ति सिंह तोमर के मुताबिक, आरोपी घटना के बाद से फरार है और उसकी तलाश के लिए टीम गठित कर दी गई है।

  • हम एक ठो गलती काम किए… बंगाल में पीएम मोदी को 10 रुपये की झालमुड़ी खिलाने वाले को किस बात का मलाल है?

    हम एक ठो गलती काम किए… बंगाल में पीएम मोदी को 10 रुपये की झालमुड़ी खिलाने वाले को किस बात का मलाल है?

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल के झारग्राम शहर में झालमुड़ी की दुकान लगाने वाले विक्रम ने सपने भी नहीं सोचा था कि एक दिन देश के प्रधानमंत्री उसके पास 10 रुपये की झालमुड़ी खाने आएंगे. अब वह काफी खुश हैं. पीएम ने उनसे 10 मिनट तक बातचीत की. वीडियो टीवी चैनलों पर छाया हुआ है. सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है.
    आम ग्राहकों की तरह दुकानदार विक्रम ने पीएम से यह भी पूछा कि आप प्याज तो खाते हैं न? हालांकि उसे अब एक बात का मलाल है.

    पीएम के जाने के बाद मीडिया ने उसे घेर लिया. विक्रम ने बताया कि पीएम जब आए थे तब क्या-क्या बातचीत हुई. झालमुड़ी वाले ने बताया कि पीएम ने कहा झालमुड़ी बनाओ. मैं पैसे नहीं मांग रहा था, लेकिन वह बोले कि नहीं-नहीं कितना हुआ? फिर पैसा हम रख लिए. मेरी मम्मी और पापा का नाम पूछे. पूछे कि कहां के रहने वाले हैं. मैंने कहा कि मैं बिहार का हूं. बोले- बिहार में कहां? मैंने बताया कि गया का हूं. मैंने बताया कि गरीबी के कारण 9वीं तक ही पढ़ पाया. पीएम ने पूछा कि कितने का रोजगार कर लेते हो. दुकानदार विक्रम साव ने बताया हजार-1200 रुपये का.
    झालमुड़ी वाले को मलाल किस बात का है?

    हां, विक्रम ने बताया कि पीएम ने कुछ भी राजनीतिक बातचीत नहीं की.

    आगे उन्होंने अफसोस या कहिए इस बात का मलाल जाहिर किया कि वह यही गलती कर गए कि कोई सिग्नेचर (पीएम का) नहीं लिए. विक्रम बोले, ‘हम एक ठो यही गलती काम किए. कोई सिग्नेचर-उग्नेचर नहीं लिए.’

    आगे आप वीडियो में देखिए कि पीएम कैसे झालमुड़ी की दुकान पर आते हैं, ऑर्डर करते हैं, प्याज के लिए दुकानदार पूछता है, पीएम 10 रुपये देते हैं और बाद में दुकानदार की तारीफ करने के साथ ही महिलाओं के साथ झालमुड़ी बांटकर खाते हैं.

    विक्रम के पिता का नाम उत्तम और माता का नाम सुनीता देवी है. उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री मेरी दुकान में आए, मसाला-मुड़ी खाए, यही बड़ी बात है.

    हां, वीडियो के आखिर में देखिए. पीएम बगल में खड़ी एक महिला को झालमुड़ी खिलाने के लिए हाथ पर रखते हैं. वह प्रणाम की मुद्रा में झालमुड़ी लेती हैं और कहती हैं कि प्रसाद है सर. इसके बाद वह झालमुड़ी को अपने सिर पर चढ़ा लेती हैं. इसी तरह आसपास खड़ी महिलाएं पीएम के हाथों झालमुड़ी खाकर काफी खुश दिखीं.
  • अनिका की बीमारी बनी चुनौती, बढ़ते वजन के इलाज के लिए चाहिए 2.40 करोड़

    अनिका की बीमारी बनी चुनौती, बढ़ते वजन के इलाज के लिए चाहिए 2.40 करोड़


    नई दिल्ली। गंभीर बीमारी से जूझ रही मासूम अनिका शर्मा की जिंदगी इन दिनों समय और पैसों के खिलाफ एक कठिन लड़ाई बन गई है। अनिका स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 (SMA Type-2) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है, जिसके इलाज के लिए उसे एक खास इंजेक्शन की जरूरत है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई जा रही है। परिवार ने समाज की मदद से अब तक 6 करोड़ 60 लाख रुपए जुटा लिए हैं, लेकिन अभी भी 2 करोड़ 40 लाख रुपए की कमी है। इस बीच अनिका का लगातार बढ़ता वजन माता-पिता की चिंता को और बढ़ा रहा है, क्योंकि यह इंजेक्शन 2 साल की उम्र या 13.5 किलो वजन से पहले लगना बेहद जरूरी है। हाल ही में जांच में अनिका का वजन 10 किलो 930 ग्राम तक पहुंच गया है, जिससे परिवार के सामने समय की चुनौती और गंभीर हो गई है।

    सेलिब्रिटियों तक पहुंचे माता-पिता, हर दरवाजे पर मदद की गुहार

    बेटी की जिंदगी बचाने के लिए अनिका के माता-पिता हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में वे हाल ही में मुंबई पहुंचे, जहां उन्होंने कई नामी हस्तियों से मुलाकात कर मदद की अपील की। इस दौरान वे सोनू सूद, प्रेम चोपड़ा, हिंदुस्तानी भाऊ और हुसैन मंसूरी जैसे लोगों से मिले। कुछ सेलिब्रिटीज ने उनकी अपील के वीडियो भी बनाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मदद की गुहार पहुंच सके। वहीं, माता-पिता ने अभिनेता सलमान खान से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन कई दिनों इंतजार के बावजूद मुलाकात नहीं हो सकी। इसके अलावा वे अलग-अलग जगहों पर कैंप लगाकर भी लोगों से सहयोग मांग रहे हैं।

    हर दिन बढ़ती चुनौती, परिवार के पास ‘आखिरी मौका’

    अनिका की मां सरिता शर्मा के मुताबिक, बच्ची की तबीयत भी इन दिनों ठीक नहीं चल रही है, जिससे चिंता और बढ़ गई है। बढ़ता वजन इलाज की समयसीमा को तेजी से करीब ला रहा है, ऐसे में परिवार के पास यह एक तरह से आखिरी मौका है। डॉक्टरों के अनुसार, तय सीमा के बाद यह महंगा इंजेक्शन असरदार नहीं रहेगा, इसलिए समय रहते इलाज होना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि परिवार हर दिन, हर पल पैसे जुटाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है।

    पिता की अपील 24 हजार लोग आगे आएं तो बच सकती है बेटी की जान

    अनिका के पिता प्रवीण शर्मा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि अगर 24 हजार लोग सिर्फ 1-1 हजार रुपए की मदद कर दें, तो बाकी के 2 करोड़ 40 लाख रुपए आसानी से जुटाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि अब तक जो रकम जुटी है, वह आम लोगों के सहयोग से ही संभव हो पाई है। परिवार को उम्मीद है कि आगे भी इसी तरह लोगों का समर्थन मिलता रहा तो उनकी बेटी का इलाज समय पर हो सकेगा। आने वाले दिनों में वे दिल्ली जाकर अनिका की जांच करवाने वाले हैं, ताकि इलाज की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

  • अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति की झलक, स्पेस स्टेशन पर हुआ बिहू डांस वायरल

    अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति की झलक, स्पेस स्टेशन पर हुआ बिहू डांस वायरल


    नई दिल्ली। अंतरिक्ष की शून्यता में जब धरती की संस्कृति की झलक दिखे तो वह पल अपने आप में खास बन जाता है। ऐसा ही एक अनोखा दृश्य तब देखने को मिला जब माइक फिंके ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर बिहू नृत्य कर सभी को चौंका दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में फिंके पारंपरिक असमिया ‘गमोसा’ पहने नजर आते हैं और बिहू गीत की धुन पर थिरकते दिखाई देते हैं। खास बात यह है कि फिंके का असम से निजी जुड़ाव भी है उनकी पत्नी रेनिता सैकिया असम की रहने वाली हैं, जिसके चलते यह प्रस्तुति और भी भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण बन जाती है। अंतरिक्ष जैसे वैज्ञानिक माहौल में इस तरह भारतीय लोकसंस्कृति की झलक देखना लोगों के लिए गर्व का विषय बन गया है।

    सीएम सरमा ने की सराहना, बोले असम की संस्कृति का वैश्विक सम्मान
    इस अनोखे प्रदर्शन की सराहना करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो साझा किया। उन्होंने ‘बिहू बिनंदिया’ टैग के साथ लिखा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में बिहू नृत्य देखना असम की संस्कृति के लिए गौरव का क्षण है। सरमा ने फिंके के इस प्रयास को असमिया परंपरा के प्रति सम्मान बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिहू पर दिए गए विशेष ध्यान के बाद अब इस त्योहार को वैश्विक पहचान मिल रही है। गौरतलब है कि असम में हर साल रोंगाली बिहू के अवसर पर नववर्ष का स्वागत बड़े उत्साह से किया जाता है और यह त्योहार राज्य की पहचान बन चुका है।

    पहले भी दिखा चुके हैं अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति की झलक
    यह पहला मौका नहीं है जब माइक फिंके ने अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी वे अपनी एक अंतरिक्ष यात्रा के दौरान बिहू नृत्य का वीडियो साझा कर चुके हैं। चार अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा रह चुके फिंके ने जनवरी के मध्य में अपनी हालिया उड़ान पूरी की थी। हालांकि, वायरल हो रहा यह नया वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। फिर भी यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और लोग इसे संस्कृति और विज्ञान के अनोखे संगम के रूप में देख रहे हैं।

    ‘बिहू बिनंदिया’ से बना विश्व रिकॉर्ड, पीएम मोदी भी रहे साक्षी
    असम में बिहू को लेकर उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल 2023 में गुवाहाटी में लगभग 10,000 कलाकारों ने एक साथ ‘बिहू बिनंदिया’ प्रस्तुति देकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे थे। अब जब अंतरिक्ष तक बिहू की गूंज पहुंच चुकी है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि असम की यह पारंपरिक कला वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रही है।

  • उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी का सुसाइड, जेल प्रशासन में हड़कंप

    उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी का सुसाइड, जेल प्रशासन में हड़कंप


    नई दिल्ली। राजधानी Bhopal की Bhopal Central Jail में रविवार शाम एक बंदी द्वारा आत्महत्या किए जाने से हड़कंप मच गया। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा 58 वर्षीय गुड्डू आदिवासी जेल परिसर की गौशाला में पेड़ से लटका मिला।

    गौशाला में काम के दौरान उठाया खौफनाक कदम

    पुलिस के अनुसार, गुड्डू आदिवासी वर्ष 2017 से जेल में बंद था और गौशाला में गौसेवक के रूप में कार्य करता था। रविवार को वह रोज की तरह अन्य बंदियों के साथ काम करने गया था। शाम करीब 5:30 बजे जब वह बाकी बंदियों के साथ लौट रहा था, तब पानी का पंप बंद करने के लिए उसे वापस भेजा गया यही उसका आखिरी पल साबित हुआ।

    प्रहरी ने देखा फंदे पर लटका शव

    काफी देर तक वापस न लौटने पर जेल प्रहरी अंदर गया, जहां गुड्डू पेड़ से रस्सी के सहारे लटका मिला। उसने गायों को बांधने वाली रस्सी से ही फंदा बनाया था। तुरंत जेल प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई।

    परिजनों से दूरी और मानसिक तनाव की आशंका

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतक से उसके परिजन मिलने नहीं आते थे और वह कभी पैरोल पर भी नहीं गया था। ऐसे में मानसिक तनाव और अकेलेपन को आत्महत्या की वजह माना जा रहा है। वहीं, कुछ सूत्रों के अनुसार जेल अधिकारियों से उसका विवाद भी चल रहा था।

    पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम आज

    Gandhi Medical College की मर्चुरी में शव रखवाया गया है। सोमवार सुबह परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा। Gandhinagar Police Station ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    भोपाल सेंट्रल जेल की यह घटना जेल प्रशासन और बंदियों की मानसिक स्थिति पर कई सवाल खड़े करती है। जांच के बाद ही आत्महत्या के पीछे की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी।