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  • Bollywood Singer Spotlight: 15,000 गानों की गायिका कविता कृष्णमूर्ति, श्रीदेवी के सॉन्ग से मिली अपार सफलता

    Bollywood Singer Spotlight: 15,000 गानों की गायिका कविता कृष्णमूर्ति, श्रीदेवी के सॉन्ग से मिली अपार सफलता

    नई दिल्ली। कविता कृष्णमूर्ति बेहतरीन गायकों में शुमार हैं। उनके नाम 15 हजार गाने हैं। कविता कृष्णमूर्ति का जन्म 25 जनवरी 1958 को दिल्ली में हुआ था। गायिका का असली नाम शारदा कृष्णमूर्ति है, हालांकि वह कविता के नाम से जानी जाती हैं। कविता ने महज 9 साल की उम्र में मशहूर गायिका लता मंगेशकर के साथ अपना पहला बांग्ला गाना गाया था। जिसके बाद वह एक गायिका बनने का सपना देखने लगीं।
    विज्ञापनों में गाने का मिला मौका
    कविता ने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से पढ़ाई की है। उस दौरान वह कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रहती थीं। तभी एक कार्यक्रम में मन्ना डे ने कविता का गाना सुना और उसके बाद उन्हें विज्ञापन में गाना गाने का मौका दिया।

    मिस्टर इंडिया में गाना गाकर हुईं फेमस
    इसके बाद साल 1980 में कविता ने ‘मांग भरो सजना’ गाने से अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि इस गाने को फिल्म से हटा दिया गया था। उसके बाद कविता ने साल 1985 में आई फिल्म प्यार झुकता नहीं में बतौर प्लेबैक सिंगर गाना गाया। उसके बाद अनिल कपूर और श्रीदेवी की फिल्म मिस्टर इंडिया में हवा हवाई और करते हैं हम प्यार मिस्टर इंडिया से, गाने गाए। दोनों ही गाने सुपरहिट रहे। इन दोनों गानों के बाद कविता के करियर में उछाल आया। सिंगर कविता कृष्णमूर्ति ने आनंद मिलिंद, उदित नारायण, ए आर रहमान जैसे बेहतरीन गायकों के साथ काम किया है।

    कई अवॉर्ड्स से नवाजा गया
    कविता कृष्णमूर्ति को साल 2005 में पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्होंने अपने करियर में चार फिल्मफेयर, बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड्स भी हासिल किए हैं। कविता को अकोलैड्स में स्टारडस्ट मिलेनियम 2000 अवार्ड्स में ‘बेस्ट सिंगर ऑफ द मिलेनियम अवॉर्ड और बेहतरीन फिल्म देवदास के गाने डोला रे डोला के लिए जी सिने 2003 अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

    बेंगलुरु में चला रहीं हैं म्यूजिक संस्थान
    कविता कृष्णमूर्ति की पर्सनल जिंदगी की बात की जाए तो उन्होंने साल 1999 में डॉ एल सुब्रमण्यम से शादी कर ली थी। कविता की कोई संतान नहीं है। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर बेंगलुरु में सुब्रमण्यम एकेडमी ऑफ परफोर्मिंग आर्ट्स नामक म्यूजिक संस्थान की शुरुआत की।

  • बैतूल में खाद्य विभाग का 'सफाई सर्जिकल स्ट्राइक': गंदगी मिलने पर दुकानें बंद, चौपाटी पर मचा हड़कंप

    बैतूल में खाद्य विभाग का 'सफाई सर्जिकल स्ट्राइक': गंदगी मिलने पर दुकानें बंद, चौपाटी पर मचा हड़कंप


    बैतूल । आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और लापरवाह दुकानदारों के खिलाफ बैतूल जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शहर के खान-पान के प्रमुख ठिकानों, विशेषकर चौपाटी क्षेत्र में एक सघन जांच अभियान चलाया। इस दौरान कई दुकानों में गंदगी और अस्वच्छता का आलम देखकर अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल बंद करा दिया। विभाग की इस अचानक हुई छापेमारी से पूरे बाजार में हड़कंप मच गया और कई दुकानदार अपनी खामियां छिपाते नजर आए।

    जांच दल ने विशेष रूप से चौपाटी पर लगने वाले स्टॉल्स को निशाने पर लिया। इस दौरान चलित खाद्य प्रयोगशाला को भी साथ रखा गया था, जिससे नमूनों की मौके पर ही जांच संभव हो सकी। टीम ने दुकानों से पानीपुरी का पानी, आलू मसाला, पनीर, मंचूरियन, सॉस और विभिन्न प्रकार की चटनियों के नमूने लिए। परीक्षण में कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता मानकों से कम पाई गई, वहीं कुछ स्थानों पर इस्तेमाल होने वाले सॉस और चटनी के रंग व गुणवत्ता संदेहास्पद मिली।

    सबसे गंभीर स्थिति स्वच्छता के मोर्चे पर देखी गई। कई दुकानों पर साफ-सफाई के बुनियादी मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। बर्तनों की गंदगी और कचरे के सही निपटान की व्यवस्था न होने के कारण खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने संबंधित दुकानों को अस्थायी रूप से बंद रवा दिया। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि व्यापार अपनी जगह है लेकिन लोगों के स्वास्थ्य के साथ समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    विभाग ने सभी दुकानदारों को अंतिम और सख्त चेतावनी देते हुए निर्देश दिए हैं कि यदि दोबारा जांच के दौरान परिसर में गंदगी पाई गई या खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि हुई तो न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा बल्कि संबंधित प्रतिष्ठान का खाद्य पंजीयन स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा। प्रशासन के इस कदम की आम नागरिकों ने सराहना की है क्योंकि बाहर मिलने वाले स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं।

  • धार्मिक उपाय: Jaya Ekadashi पर करें यह पूजा, मिलेगा मोक्ष और पापों से मुक्ति

    धार्मिक उपाय: Jaya Ekadashi पर करें यह पूजा, मिलेगा मोक्ष और पापों से मुक्ति


    नई दिल्ली। Jaya Ekadashi Puja Benefits: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी को सबसे फलदायी माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि वह पिशाच योनी जैसी कष्टदायक स्थितियों से भी मुक्त हो जाता है. इस साल यानी 2026 में जया एकादशी बेहद खास होने वाली है, क्योंकि इस दिन एक-दो नहीं बल्कि चार अद्भुत संयोग बन रहे हैं.

    जया एकादशी पर बन रहे हैं ये खास संयोग
    ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार जया एकादशी पर इंद्र योग, रवि योग, भद्रावास योग और शिववास योग का दुर्लभ मेल हो रहा है. इन योगों में की गई पूजा और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. विशेषकर रवि योग को दोषों का नाश करने वाला और शिववास योग को सुख-समृद्धि प्रदाता माना जाता है.

    कब रखा जाएगा जया एकादशी का व्रत?
    पंचांग के अनुसार,

    एकादशी तिथि शुरू: 28 जनवरी 2026, शाम 4 बजकर 34 मिनट से.
    एकादशी तिथि समापन: 29 जनवरी 2026, रात 1 बजकर 56 मिनट तक.
    व्रत की तारीख: उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के अनुसार, जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा.

    जया एकादशी की पूजा विधि
    अगर आप अपने जीवन के दुखों और अनजाने में हुए पापों से मुक्ति चाहते हैं, तो इस विधि से पूजा करें. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें. हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें.

    वेदी स्थापना: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें.

    पूजन सामग्री: भगवान को पीले फूल, पीले फल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें.

    पंचामृत स्नान: श्री हरि को पंचामृत से स्नान कराएं. ध्यान रहे कि भोग में तुलसी दल (पत्ता) जरूर शामिल करें, क्योंकि तुलसी के बिना विष्णु जी भोग स्वीकार नहीं करते.

    मंत्र जाप: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और जया एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें.

    जया एकादशी का महत्व
    पद्म पुराण के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को नीच योनि में जन्म नहीं लेना पड़ता. कथाओं में उल्लेख है कि इस व्रत के असर से ही माल्यवान नामक गंधर्व को पिशाच योनि से मुक्ति मिली थी. यह व्रत व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और पुराने संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है.

  • सिंगरौली: शिकारियों पर कड़ा प्रहार, डॉग स्क्वाड की मदद से पकड़े गए करंट लगाकर वन्यजीवों की जान लेने वाले 4 आरोपी

    सिंगरौली: शिकारियों पर कड़ा प्रहार, डॉग स्क्वाड की मदद से पकड़े गए करंट लगाकर वन्यजीवों की जान लेने वाले 4 आरोपी


    सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में बेजुबान वन्यजीवों के खिलाफ क्रूरता का एक बड़ा मामला सामने आया है। वन मंडल के गोरबी परिक्षेत्र अंतर्गत सिलफोरी बीट में करंट बिछाकर नीलगाय और लोमड़ी जैसे प्राणियों का शिकार करने वाले चार शातिर आरोपियों को वन विभाग ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस पूरी कार्रवाई में सबसे अहम भूमिका संजय टाइगर रिजर्व की डॉग स्क्वाड टीम की रही जिसने गंध स्मेल के आधार पर आरोपियों के घर तक पहुंचकर वन अमले का काम आसान कर दिया।

    घटना 16 जनवरी की रात की है जब मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि सिलफोरी बीट के जंगलों में अवैध रूप से वन्य प्राणियों का शिकार किया गया है। सूचना मिलते ही बीट प्रभारी अनिल कुमार साकेत दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान घटनास्थल का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए। शिकारियों ने बड़ी ही चालाकी से 11 हजार केवी की हाईटेंशन विद्युत लाइन से अवैध कनेक्शन जोड़कर जमीन पर बाइंडिंग वायर बिछा रखा था। इसके लिए जमीन में सब्बल से छेद कर बांस की खूटियां गाड़ी गई थीं। इस जानलेवा जाल की चपेट में आने से एक नीलगाय एक लोमड़ी और एक सियार की तड़प-तड़पकर मौत हो गई।

    आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो चुके थे लेकिन वन विभाग ने हार नहीं मानी। 17 जनवरी को सीधी से संजय टाइगर रिजर्व की विशेष डॉग स्क्वाड टीम को बुलाया गया। खोजी कुत्ते ने घटनास्थल से मिले बाइंडिंग वायर की गंध पकड़ी और सीधे मुख्य आरोपी अमरेश कुमार के घर जा पहुंचा। तलाशी के दौरान घर से 250 ग्राम बाइंडिंग वायर बांस की खूटियां जीआई तार और चौंकाने वाली बात यह कि जंगली सूअर के बाल व हड्डियां भी बरामद हुईं।

    वन परिक्षेत्र अधिकारी अभिषेक सिंह के निर्देशन में 21 जनवरी को दबिश देकर मुख्य आरोपी अमरेश कुमार और उसके तीन साथियों बिहारी सिंह रामदुलारे सिंह व सिपाहीलाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। सभी आरोपी ग्राम सिलफोरी के ही निवासी हैं। रेंज कार्यालय में बयान दर्ज करने के बाद आरोपियों को वैढ़न न्यायालय में पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायाधीश विशाल रिछारिया ने आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी और उन्हें जिला जेल पचौर भेजने के आदेश दिए। इस कार्रवाई ने वन्यजीवों के शिकार में लिप्त गिरोहों के बीच कड़ा संदेश भेजा है।

  • दमोह में सनसनी: कुएं में उतराती मिली मां और 3 माह के मासूम की लाश, हत्या या आत्महत्या के उलझाव में फंसी पुलिस

    दमोह में सनसनी: कुएं में उतराती मिली मां और 3 माह के मासूम की लाश, हत्या या आत्महत्या के उलझाव में फंसी पुलिस


    दमोह । मध्यप्रदेश के दमोह जिले से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जिले के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र में एक सरकारी कुएं के भीतर 35 वर्षीय महिला और उसके महज तीन महीने के दुधमुंहे बच्चे की लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने न केवल पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के बीच भी गहरे शोक और संदेह का माहौल पैदा कर दिया है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर एक मां और उसके मासूम बच्चे की जल समाधि के पीछे की असली वजह क्या है।

    घटना तेंदूखेड़ा के वार्ड नंबर एक स्थित एक सरकारी कुएं की है। शुक्रवार की सुबह जब नगर पालिका के सफाई कर्मचारी रोजाना की तरह अपने काम पर निकले और उनकी नजर कुएं के भीतर पड़ी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कुएं के ठहरे हुए पानी में एक महिला और एक छोटे बच्चे का शव उतरा रहा था। शोर मचते ही वहां भारी भीड़ जमा हो गई और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला। मृतकों की पहचान 35 वर्षीय जयंती केवट और उसके 3 माह के पुत्र दीपांश केवट के रूप में हुई है।

    इस घटना ने कई अनसुलझे सवालों को जन्म दे दिया है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। पहली नजर में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है जिसमें मानसिक तनाव या पारिवारिक कलह के कारण मां ने आत्मघाती कदम उठाया होगा। हालांकि, पुलिस हत्या के एंगल को भी पूरी तरह से खारिज नहीं कर रही है। क्या किसी ने जयंती और उसके मासूम बच्चे को कुएं में धकेला? या फिर यह किसी गहरे षड्यंत्र का हिस्सा है? इन तमाम बिंदुओं पर पुलिस की टीम सघन जांच कर रही है।

    तेंदूखेड़ा पुलिस ने पंचनामा तैयार कर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही समय और कारणों का खुलासा हो पाएगा। मृतिका के परिजनों और ससुराल पक्ष से भी पूछताछ की जा रही है ताकि जयंती के अंतिम घंटों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। एक हंसते-खेलते परिवार की इस तरह दुखद समाप्ति ने क्षेत्र में मातम पसरा दिया है वहीं मासूम दीपांश की मौत ने लोगों की आंखों में आंसू ला दिए हैं। फिलहाल पुलिस की तहकीकात जारी है और जल्द ही इस गुत्थी के सुलझने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • रहस्यमयी मामला: बंद कमरे में था प्रेमी, खोजबीन के दौरान एक आवाज से हुआ बड़ा खुलासा

    रहस्यमयी मामला: बंद कमरे में था प्रेमी, खोजबीन के दौरान एक आवाज से हुआ बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली। यूपी के कानपुर में चकेरी क्षेत्र के एक गांव में फिल्मी वाकया हुआ। शुक्रवार को प्रेमिका के बुलाने पर प्रेमी उसके घर पहुंच गया। कुछ देर बाद ही प्रेमिका की आंटी (चाची ) पहुंची और युवक की आवाज सुनकर दरवाजा खटखटाया। युवती ने दरवाजा नहीं खोला। अंदर प्रेमी को बक्से में बंद कर ताला लगा दिया। चाची ने उसके भाई-मां को फोन कर बुला लिया। तब भी दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस बुलाई गई। करीब 45 मिनट बाद युवती ने दरवाजा खोला। अंदर घुसा युवक गायब था। तलाश के बीच बक्से में छटपटा रहे युवक की आवाज निकल गई। पुलिस ने ताला खुलवाकर उसे निकाला तो प्रेमी की सांस फूल रही थी। उससे पूछताछ की जा रही है।
    पुलिस के मुताबिक युवती का इलाके में रहने वाले युवक से पिछले कुछ सालों से प्रेम-प्रसंग चल रहा है। शुक्रवार सुबह युवती का बड़ा भाई ट्रैक्टर लेकर बाहर चला गया। उसकी मां फैक्ट्री में काम करने चली गई। इस बीच अकेले होने पर युवती ने फोन कर प्रेमी को घर बुला लिया। कुछ देर बाद ही पड़ोस में रहने वाली आंटी उसके घर पहुंची और बाहर से युवक की आवाज सुनकर दरवाजा खटखटाने लगीं।
    युवती ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद आंटी ने युवती के भाई और मां के साथ ही पुलिस को फोन कर बुलाया। कुछ देर बाद युवती का भाई घर पहुंच गया। पुलिस की मौजूदगी में भाई ने भी दरवाजा खटखटाते हुए देर तक आवाज लगाई तो युवती ने दरवाजा खोला। परिजनों ने अंदर किसी युवक के आने की बात पूछी तो युवती ने इनकार कर दिया। घर में खोजने पर भी वह नहीं मिला।

    तब तक प्रेमी को बक्से में कैद हुए एक घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका था। अंदर वह छटपटाने लगा। उसकी सांस फूल रही थी। उसकी कराह बक्से के अंदर सुनाई दी तो चाची व भाई ने युवती से चाभी मांगी। वह चाभी न देने पर अड़ी थी। बमुश्किल उसने चाभी दी। खोलने पर अंदर बुरी तरह हांफता हुआ प्रेमी निकला। थाना प्रभारी अजय प्रकाश मिश्र ने बताया कि युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। परिजनों की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

  • भाग्यशाली हथेलियां: आपके हाथ के ये 5 निशान बदल सकते हैं किस्मत, जानें क्या आप भी बनेंगे धनवान?

    भाग्यशाली हथेलियां: आपके हाथ के ये 5 निशान बदल सकते हैं किस्मत, जानें क्या आप भी बनेंगे धनवान?

    नई दिल्ली । हस्तरेखा शास्त्रके अनुसार, हमारी हथेलियां केवल चमड़ी पर खिंची हुई रेखाएं नहीं हैं बल्कि ये हमारे कर्मों और आने वाले भविष्य का दर्पण होती हैं। सामुद्रिक शास्त्र में कुछ ऐसे विशिष्ट निशानों और पर्वतों का उल्लेख किया गया है, जो किसी व्यक्ति को रंक से राजा बनाने की क्षमता रखते हैं। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आपकी आर्थिक स्थिति और मान-सम्मान का ग्राफ कैसा रहेगा तो अपनी हथेली में इन 5 प्रमुख निशानों को गौर से देखें।

    सूर्य पर्वत पर ‘विजय’ की रेखा

    हथेली में अनामिका उंगली के ठीक नीचे वाले उभार को सूर्य पर्वत कहा जाता है। यदि इस स्थान पर कोई स्पष्ट और बिना कटी-फटी रेखा दिखाई दे तो इसे सूर्य रेखा कहते हैं। यह रेखा व्यक्ति की सफलता का पैमाना है। प्रभाव जिस जातक के हाथ में यह रेखा गहरी होती है, उसे समाज में उच्च पद प्रतिष्ठा और सरकारी लाभ प्राप्त होता है। ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन भी काफी सामंजस्यपूर्ण और सुखी रहता है।

    मस्तिष्क रेखा पर त्रिकोण

    मस्तिष्क रेखा का अंत यदि दो भागों में विभाजित होकर एक त्रिकोण जैसी आकृति बना दे तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। आर्थिक पक्ष हस्तरेखा विशेषज्ञों के अनुसार, यह निशान व्यक्ति की कुशाग्र बुद्धि और धन संचय करने की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है। ऐसे लोगों को जीवन में कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता।

    हथेली में अर्धचंद्र का बनना

    जब आप अपनी दोनों हथेलियों को आपस में जोड़ते हैं और हृदय रेखाएं मिलकर एक सुंदर आधा चाँद बनाती हैं तो यह आपके व्यक्तित्व और भाग्य के बारे में बहुत कुछ कहता है। संकेत यह निशान विलासितापूर्ण जीवन का प्रतीक है। ऐसे लोग स्वभाव से बहुत आकर्षक होते हैं और जीवन में हर तरह की भौतिक सुख-सुविधाएं हासिल करते हैं।

    हृदय रेखा पर ‘त्रिशूल

    यदि हृदय रेखा के अंत में गुरु पर्वत तर्जनी उंगली के नीचे के पास त्रिशूल का निशान बनता है, तो यह जातक पर दैवीय कृपा का संकेत है। सफलता ऐसे लोग समाज में पूजनीय होते हैं और परोपकारी स्वभाव के कारण बहुत ख्याति प्राप्त करते हैं। इनके पास धन के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रचुर मात्रा में होती है।

    शुक्र पर्वत का उभार

    अंगूठे के नीचे वाले हिस्से को शुक्र पर्वत कहा जाता है। यदि यह हिस्सा मांसल साफ और गुलाबी आभा लिए हुए है तो जातक भाग्यशाली होता है। ऐश्वर्य शुक्र पर्वत का विकसित होना प्रेम, सौंदर्य और अपार संपत्ति का कारक है। ऐसे व्यक्ति का जीवन सुख-साधनों से भरा रहता है।
  • पानी में हाथ रखते ही क्यों सिकुड़ जाती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का विज्ञान और सेहत से जुड़े संकेत

    पानी में हाथ रखते ही क्यों सिकुड़ जाती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का विज्ञान और सेहत से जुड़े संकेत


    नई दिल्ली । अक्सर नहाते समय कपड़े धोते समय या स्विमिंग पूल में घंटों बिताने के बाद हम देखते हैं कि हमारे हाथ और पैरों की उंगलियों की त्वचा अजीब तरह से सिकुड़ गई है। इसे देखकर मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पानी के संपर्क में आते ही शरीर ऐसा व्यवहार क्यों करता है मेडिकल भाषा में फिंगर्स प्रून कही जाने वाली यह स्थिति ज्यादातर सामान्य होती है, लेकिन कभी-कभी यह आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी बीमारी का अलार्म भी हो सकती है।

    क्यों आती हैं उंगलियों पर झुर्रियां

    वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी में उंगलियों का सिकुड़ना केवल एक भौतिक क्रिया नहीं बल्कि हमारे स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की एक सोची-समझी प्रतिक्रिया है। जब हम लंबे समय तक पानी में रहते हैं तो मस्तिष्क नसों को संकेत भेजता है जिससे त्वचा के नीचे की रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं। ऐसा होने से उंगलियों की सतह पर झुर्रियां बन जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह झुर्रियां पानी के भीतर गीली चीजों पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद करती हैं ठीक उसी तरह जैसे टायरों की ग्रिप सड़क पर फिसलने से बचाती है।

    कब यह चिंता का विषय है

    हालांकि पानी से बाहर आने के कुछ देर बाद उंगलियां सामान्य हो जाती हैं लेकिन अगर यह समस्या बिना पानी के भी हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो यह नीचे दी गई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है डायबिटीज हाई ब्लड शुगर के कारण शरीर की पसीने की ग्रंथियां और तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं। इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है और उंगलियों में समय से पहले या बार-बार सिकुड़न दिखने लगती है। यदि इसके साथ आपको अधिक प्यास लगना, धुंधली नजर या बार-बार पेशाब आने जैसी शिकायत है, तो शुगर की जांच जरूर कराएं।

    विटामिन B12 की कमी: शरीर में विटामिन B12 की कमी नसों के कामकाज को प्रभावित करती है। इसकी कमी से उंगलियों में बेवजह सिकुड़न हाथों-पैरों में झुनझुनी, थकान और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शाकाहारी लोग इसकी पूर्ति के लिए दूध दही और पनीर का सेवन बढ़ा सकते हैं। डिहाइड्रेशन और थायराइड शरीर में पानी की भारी कमी होने पर त्वचा अपनी लोच खो देती है, जिससे वह झुर्रीदार दिखने लगती है। वहीं थायराइड विकार भी त्वचा के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर उसे ड्राई और सिकुड़ा हुआ बना सकते हैं।

    सावधानी कब बरतें

    यदि उंगलियों के सिकुड़ने के साथ आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है हाथों-पैरों में तेज दर्द या जकड़न। त्वचा का असामान्य रूप से मोटा होना। बिना पानी के संपर्क में आए ही उंगलियों का बार-बार सिकुड़ना। घाव भरने में देरी या बार-बार त्वचा संक्रमण।

  • सर्दियों में बिना खर्च चेहरे पर आएगा 'गोल्डन ग्लो', बस रसोई में रखी इन 3 चीजों का ऐसे करें इस्तेमाल

    सर्दियों में बिना खर्च चेहरे पर आएगा 'गोल्डन ग्लो', बस रसोई में रखी इन 3 चीजों का ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली।सर्दियों का मौसम आते ही स्किन का रूखा होना और निखार खो जाना एक आम समस्या है. अगर आप भी अपनी त्वचा को लेकर चिंतित हैं और महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर पैसा खर्च नहीं करना चाहते, तो यह खबर आपके लिए है. अमेठी के जानकारों और आयुर्वेद विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे आसान घरेलू उपाय साझा किए हैं, जो आपकी रसोई में मौजूद चीजों से ही आपकी स्किन को गुड लुकिंग और हैंडसम बना देंगे. ये नुस्खे न केवल त्वचा की समस्या दूर करते हैं, बल्कि उसे भरपूर पोषण भी देते हैं.
    नारियल का दूध: रूखेपन और एलर्जी का काल
    सर्दियों की ठंडी हवाएं त्वचा की नमी छीन लेती हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नारियल का दूध स्किन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है और चेहरे का रूखापन दूर भगाता है. इसके नियमित इस्तेमाल से अनावश्यक स्किन एलर्जी खत्म होती है और चेहरे पर एक नेचुरल ग्लो निखार आता है. यह आसानी से उपलब्ध है और पूरी तरह सुरक्षित है.
    मलाई और बादाम पेस्ट: दाग-धब्बों की छुट्टी
    चेहरे पर दाने, मस्से या आंखों के नीचे काले घेरे  डार्क सर्कल्स व्यक्तित्व को फीका कर देते हैं. इनसे निपटने के लिए दूध की मलाई और बादाम का पेस्ट सबसे कारगर है. मलाई त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करती है, वहीं बादाम का पेस्ट दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करता है. इस पेस्ट के इस्तेमाल से त्वचा बेदाग और साफ नजर आने लगती है.

    पपीता और हरी सब्जियां: भीतर से आएगा निखार
    खूबसूरत त्वचा के लिए केवल बाहरी लेप ही नहीं, बल्कि खान-पान भी जरूरी है. पपीता और हरी पत्तेदार सब्जियां विटामिन का खजाना होती हैं. ये शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करती हैं और औषधि की तरह काम करती हैं. इनके सेवन से खून साफ होता है और त्वचा में अंदरूनी निखार आता है, जिससे चेहरा आकर्षक दिखने लगता है.

    एक्सपर्ट की राय: केमिकल फ्री और नो साइड इफेक्ट
    आयुर्वेद के वरिष्ठ डॉक्टर मनोज तिवारी ने लोकल 18 को बताया कि इन घरेलू औषधियों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता. चूंकि ये नुस्खे आप खुद घर पर तैयार करते हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह के हानिकारक केमिकल या मिलावट की गुंजाइश नहीं रहती. उन्होंने कहा कि आप अपनी जरूरत के अनुसार इन्हें तैयार कर सकते हैं और बिना किसी डर के दाग-धब्बों से छुटकारा पा सकते हैं.

  • महाभारत का महासूत्र: आखिर 18 अंक में ही क्यों सिमटा है युद्ध से लेकर ज्ञान तक का रहस्य?

    महाभारत का महासूत्र: आखिर 18 अंक में ही क्यों सिमटा है युद्ध से लेकर ज्ञान तक का रहस्य?


    नई दिल्ली । महाभारत केवल दुनिया का सबसे विशाल महाकाव्य नहीं है बल्कि यह जीवन दर्शन रहस्यमयी प्रतीकों और कूटनीति की एक ऐसी गहरी संरचना है जिसे समझना आज भी विद्वानों के लिए कौतूहल का विषय है। इस महागाथा की गहराई में उतरते ही एक विशिष्ट संख्या बार-बार हमारे सामने उभरकर आती है और वह है 18 । कुरुक्षेत्र के रक्तरंजित मैदान से लेकर कुरुवंश के विनाश और गीता के दिव्य ज्ञान तक महाभारत की पूरी कथा इसी 18 अंक के इर्द गिर्द सिमटी हुई है। आखिर क्या यह महज एक संयोग है या इसके पीछे ब्रह्मांड का कोई गूढ़ गणित छिपा है आइए इस रहस्यों से भरी कड़ियों को विस्तार से समझते हैं।

    महाभारत की संरचना में 18 का वर्चस्व

    महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित इस अद्भुत ग्रंथ की हर परत में 18 का अंक समाहित है जो इसे अन्य महाकाव्यों से अलग और अधिक वैज्ञानिक बनाता है 18 पर्वों का संकलन: महाभारत की पूरी कथा को 18 मुख्य पर्वों अध्यायों के समूह में विभाजित किया गया है। आदि पर्व से शुरू होकर यह स्वर्गारोहण पर्व पर समाप्त होती है, जो जीवन की यात्रा के विभिन्न चरणों को दर्शाती है।

    18 दिनों का महासंग्राम: इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध, कुरुक्षेत्र का संग्राम ठीक 18 दिनों तक चला था। माना जाता है कि इन 18 दिनों में ही संसार की पुरानी व्यवस्था ध्वस्त हुई और धर्म के नए युग का सूत्रपात हुआ।गीता के 18 अध्याय: कुरुक्षेत्र की रणभेरी बजने से ठीक पहले, अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने जो ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ सुनाई, उसमें भी ठीक 18 अध्याय हैं। यह मनुष्य के 18 तरह के मानसिक द्वंद्वों और उनके समाधान का प्रतीक है।

    18 अक्षौहिणी सेना: युद्ध के मैदान में कुल 18 अक्षौहिणी सेनाएं उतरी थीं। इनमें से 11 कौरवों के पक्ष में थीं और 7 पांडवों की ओर से लड़ीं। आश्चर्यजनक रूप से इनका योग भी 18 ही है। 18 जीवित योद्धा: भीषण नरसंहार के बाद जब युद्ध समाप्त हुआ, तो पांडवों के पांचों भाई, श्रीकृष्ण और सात्यकि सहित कुल 18 प्रमुख योद्धा ही जीवित बचे थे।

    क्या है इसका आध्यात्मिक और गणितीय आधार

    अंक ज्योतिष और सनातन परंपरा की दृष्टि से देखें तो ’18’ का योग 9 -1+8=9 होता है। अंक 9 को भारतीय संस्कृति में पूर्णता और ‘सनातन’ का प्रतीक माना गया है क्योंकि 9 का पहाड़ा कभी अपनी मूल प्रकृति नहीं बदलता। यह इस बात का संकेत है कि महाभारत का युद्ध केवल जमीन के एक टुकड़े के लिए नहीं, बल्कि मानव चेतना की पूर्णता और धर्म की स्थापना के महा-उद्देश्य के लिए लड़ा गया था। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार 18 पुराण भी हैं जो बताते हैं कि व्यास जी ने ज्ञान के हर क्षेत्र को इसी संख्या में बांधने का प्रयास किया। महाभारत का यह महासूत्र हमें सिखाता है कि जीवन के हर संघर्ष और हर ज्ञान की एक निश्चित सीमा और पूर्णता होती है।