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  • सरकार की तैयारी… EV वाहनों से होगी लंबी दूरी की यात्रा, नहीं रहेगा रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर

    सरकार की तैयारी… EV वाहनों से होगी लंबी दूरी की यात्रा, नहीं रहेगा रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric vehicles) को लंबी दूरी की यात्रा के लिए ज्यादा भरोसेमंद बनाने की दिशा में सरकार एक नई पहल पर काम कर रही है। इसके तहत देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे (Major Expressways) और हाईवे (Highway) पर ईवी कमांड सेंटर (EV Command Center) और रास्ते पर सहायता पहुंचाने वाला नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इस कदम का मकसद इलेक्ट्रिक वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता मानी जाने वाली ‘रेंज एंग्जायटी’, यानी रास्ते में बैटरी खत्म होने के डर को कम करना है।

    सरकारी स्तर पर इस बात पर सहमति बन रही है कि केवल चार्जिंग स्टेशन बनाना ही काफी नहीं है। जब तक इलेक्ट्रिक वाहनों को यात्रा के दौरान तकनीकी सहायता, आपात मदद और रियल-टाइम सपोर्ट नहीं मिलेगा, तब तक लंबी दूरी की ईवी यात्रा को लेकर लोगों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाएगा। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे-आधारित ईवी सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।


    संकट में आते ही तुरंत मदद मिलेगी

    प्रस्तावित योजना के तहत एक्सप्रेसवे पर ईवी-आधारित कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। ये सेंटर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तरह काम करेंगे। यहां से यात्रा कर रहे इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी।

    इन कमांड सेंटरों से तुरंत रास्ते में ही सहायता, बैटरी से जुड़ी समस्याओं में सहायता, चार्जिंग से संबंधित मार्गदर्शन और वाहन की बेसिक जांच जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे अगर कोई वाहन रास्ते में तकनीकी खराबी या बैटरी समस्या के कारण रुक जाता है, तो उसे तुरंत सहायता मिल सकेगी।


    दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे होगा पहला ईवी कॉरिडोर

    इस योजना के तहत दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। करीब 1,300 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर संपूर्ण सहायता प्रणाली तैयार की जी सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस पूरे मार्ग पर चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग के साथ-साथ तकनीकी और आपात सहायता भी मिलती रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।


    सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर होगा जोर

    सरकार इस पूरे ढांचे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित करने पर विचार कर रही है। इसमें वाहन निर्माता कंपनियां, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता और निजी रोडसाइड असिस्टेंस कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होने की उम्मीद है।


    ईवी अपनाने को मिलेगा बढ़ावा

    भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़त अभी मुख्य रूप से शहरों तक सीमित है। लंबी दूरी की यात्रा में भरोसे की कमी अब भी एक बड़ी बाधा है। एक्सप्रेसवे पर ईवी-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर और कमांड सेंटर की व्यवस्था होने से ईवी को पेट्रोल-डीजल वाहनों का व्यावहारिक विकल्प बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि देश के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

  • हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक व लिथियम बैटरी डिवाइसेस पर रोक, DGCA ने कड़े किए नियम

    हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक व लिथियम बैटरी डिवाइसेस पर रोक, DGCA ने कड़े किए नियम


    नई दिल्ली।
    अगर आप भी फ्लाइट (Flights) से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल, भारत ने फ्लाइट (Flights) में पावर बैंक (Power Bank) और लिथियम बैटरी वाली डिवाइसेस (Lithium batteries Devices) को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। डीजीसीए ने फ्लाइट के दौरान फोन या अन्य चीजों को चार्ज करने वाले पावर बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। दुनियाभर में पावर बैंक से आग लगने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।

    डीजीसीए ने इसको लेकर पिछले साल नवंबर में एक एडइवाजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि पावर बैंक और स्पेयर बैटरी सिर्फ हैंड लगेज में ले जाने की इजाजत होगी। उसे ओवरहेड कपार्टमेंट में नहीं रख सकते हैं। इसके पीछे आग लगने की वजह बताई गई थी और कहा गया था कि आग लगने पर उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

    लिथियम बैटरी से आग बहुत तेजी से पकड़ती है, क्योंकि इस बैटरी में एनर्जी बहुत अधिक होती है। इस आग को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता है। एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरक्राफ्ट के केबिन के अंदर छोटी सी बैटरी में लगी आग भी तेजी से फैल सकती है, इसलिए बचाव बहुत जरूरी है।

    डीजीसीए के सर्कुलर में कहा गया है, “अलग-अलग रिचार्जेबल डिवाइस में लिथियम बैटरी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से हवाई जहाज से लिथियम बैटरी ले जाने में बढ़ोतरी हुई है। पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और लिथियम बैटरी वाले ऐसे ही डिवाइस आग लगने का कारण बन सकते हैं और जहाज में आग लगा सकते हैं।” आगे कहा गया है, “ओवरहेड स्टोरेज डिब्बे में या कैरी-ऑन बैगेज के अंदर रखी लिथियम बैटरी छिपी हो सकती हैं, उन तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, या यात्री या क्रू मेंबर उन पर आसानी से नजर नहीं रख सकते। इससे धुआं या आग लगने का पता चलने और उस पर कार्रवाई करने में देरी हो सकती है, जिससे फ्लाइट की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है।”

    मौजूदा एविएशन सेफ्टी गाइडलाइंस के अनुसार, पावर बैंक सिर्फ केबिन बैगेज में ले जाने की इजाजत है, चेक-इन लगेज में नहीं। हालांकि, यात्रियों को फ्लाइट के दौरान पावर बैंक से डिवाइस चार्ज करने की इजाजत नहीं है। एयरलाइंस ने अब यात्रियों को इस पाबंदी के बारे में बताने के लिए बोर्डिंग अनाउंसमेंट और इनफ्लाइट ब्रीफिंग के जरिए याद दिलाना शुरू कर दिया है।

  • SC की अनुमति के बावजूद किसी भी हाईकोर्ट में नहीं हुई एड-हॉक जज की नियुक्ति

    SC की अनुमति के बावजूद किसी भी हाईकोर्ट में नहीं हुई एड-हॉक जज की नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा करीब एक साल पहले लंबित आपराधिक मामलों के निस्तारण के लिए मार्ग प्रशस्त किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी हाई कोर्ट (High Court) में तदर्थ (एड-हॉक) न्यायाधीशों की नियुक्ति (Appointment Ad-Hoc Judges) नहीं हुई है। वजह, उच्च न्यायालयों ने इस दिशा में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया से परिचित लोगों के अनुसार, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी ने भी तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश नहीं की है।

    सर्वोच्च न्यायालय ने 18 लाख से अधिक आपराधिक मामलों के लंबित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए 30 जनवरी, 2025 को उच्च न्यायालयों को तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति दी थी। जिनकी संख्या न्यायालय की कुल स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। केंद्रीय विधि मंत्रालय को हालांकि, अभी तक किसी भी हाई कोर्ट के कॉलेजियम से सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ आधार पर नियुक्त करने के लिए कोई सिफारिश प्राप्त नहीं हुई है।

    संविधान का अनुच्छेद 224ए उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के प्रबंधन में सहायता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने की अनुमति देता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित उच्च न्यायालय के कॉलेजियम विधि मंत्रालय के न्याय विभाग को उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले उम्मीदवारों के नाम या सिफारिशें भेजते हैं। इसके बाद विभाग उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और विवरण जोड़ता है और फिर उन्हें उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को भेज देता है। इसके बाद उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेता है और सरकार को चयनित व्यक्तियों को न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश करता है। राष्ट्रपति नवनियुक्त न्यायाधीश के ‘नियुक्ति पत्र’ पर हस्ताक्षर करते हैं।

    तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया स्थायी जैसी ही रहेगी, सिवाय इसके कि राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि एक मामले को छोड़कर, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ उच्च न्यायालय न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है। उच्च न्यायालयों में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति पर 20 अप्रैल, 2021 को दिए गए फैसले में उच्चतम न्यायालय ने कुछ शर्तें लगाई थीं। हालांकि, बाद में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई (एक अन्य पूर्व प्रधान न्यायाधीश) और सूर्यकांत (वर्तमान प्रधान न्यायाधीश) की विशेष पीठ ने कुछ शर्तों में ढील दी और कुछ को स्थगित रखा।

    पूर्व प्रधान न्यायाधीश एसए बोब्डे द्वारा लिखित इस फैसले में, लंबित मामलों को निस्तारित करने के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को दो से तीन साल की अवधि के लिए तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।

  • एशेज : जो रूट ने 41वां टेस्ट शतक जड़ रिकी पोंटिंग के रिकॉर्ड की बराबरी की

    एशेज : जो रूट ने 41वां टेस्ट शतक जड़ रिकी पोंटिंग के रिकॉर्ड की बराबरी की


    सिडनी।
    इंग्लैंड (England) के स्टार बल्लेबाज जो रूट (Star batsman Joe Root) ने ऑस्ट्रेलिया (Australia) के खिलाफ सिडनी में जारी 5वें और आखिरी टेस्ट मैच में शतक जड़ दिग्गजों की बराबरी कर ली है। यह उनका इस सीरीज का दूसरा और करियर का 41वां टेस्ट शतक (41st Test century) है। जो रूट इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया में एक एशेज सीरीज में एक से ज्यादा शतक जड़ने वाले चौथे इंग्लिश बल्लेबाज बन गए हैं। वहीं टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतक जड़ने वाले बल्लेबाजों की रेस में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग की बराबरी कर ली है। रूट अब इस लिस्ट में संयुक्त रूप से तीसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। उनके आगे अब सिर्फ जैक कैलिस और ‘क्रिकेट के भगवान’ कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर रह गए हैं।

    जो रूट ने अपना 41वां टेस्ट शतक 146 गेंदों में पूरा किया। वह उस समय बल्लेबाजी करने आए थे जब इंग्लैंड 51 पर 2 विकेट खो चुका था। उन्होंने उप-कप्तान हैरी ब्रूक के साथ 169 रनों की साझेदारी भी की। रूट अपनी पारी में अभी तक 11 चौके लगा चुके हैं।

    जो रूट अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की रेस में सचिन तेंदुलकर और जैक कैलिस के बाद संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। पोंटिंग और रूट के अब बराबर 41-41 शतक हैं। रूट की नजरें अब जैक कैलिस और फिर सचिन तेंदुलकर को पछाड़ने पर होगी।

    टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतक
    51 – सचिन तेंदुलकर
    45 – जैक्स कैलिस
    41 – रिकी पोंटिंग
    41 – जो रूट
    38 – कुमार संगकारा

    1994/95 के बाद से घर के बाद एशेज सीरीज में एक से ज्यादा शतक लगाने वाले जो रूट चौथे इंग्लैंड के बल्लेबाज बने हैं। उनसे पहले ये कारनामा माइकल वॉन, एलिस्टर कुक और जोनाथन ट्रॉट कर चुके हैं।


    1994/95 के बाद से इंग्लैंड के लिए अवे एशेज सीरीज में एक से ज्यादा शतक

    3 – माइकल वॉन 2002/03 में
    3 – एलिस्टर कुक 2010/11 में
    2 – जोनाथन ट्रॉट 2010/11 में
    2 – जो रूट 2025/26 में

    2021 के बाद जो रूट ने ऐसी लय पकड़ी है कि उनका कोई सानी नहीं रहा है। वह 2021 से टेस्ट क्रिकेट में कुल 24 शतक ठोक चुके हैं, वहीं इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर मौजूद खिलाड़ियों के 10-10 शतक ही हैं।


    2021 से सबसे ज्यादा टेस्ट शतक

    24 – जो रूट
    10 – स्टीवन स्मिथ
    10 – केन विलियमसन
    10 – हैरी ब्रूक
    10 – शुभमन गिल

    बात मुकाबले की करें तो, इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया था। पहले दिन खराब मौसम की वजह से 45 ओवर का ही खेल हो पाया। दूसरे दिन इंग्लैंड खबर लिखे जाने तक 5 विकेट के नुकसान पर 286 रन बोर्ड पर लगा चुका है।

  • उत्तराखंड में गंगा घाटों पर सिर्फ हिंदुओं को मिलेगा प्रवेश… गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक की तैयारी

    उत्तराखंड में गंगा घाटों पर सिर्फ हिंदुओं को मिलेगा प्रवेश… गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक की तैयारी


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में सनातन आस्था (Sanatan faith) के प्रमुख केंद्र हरिद्वार और ऋषिकेश (Haridwar and Rishikesh) में गंगा के घाटों (Ganges Ghats) पर भविष्य में केवल हिन्दू धर्मावलंबियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। राज्य सरकार गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की तैयारी कर रही है। मालूम हो तमाम संत इस संबंध में कई बार प्रदेश सरकार से मांग कर चुके हैं।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस संबंध में पूर्व से कानून लागू है। अधिकारियों को इस कानून का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं। हमारी सरकार चाहती है कि इस कानून को और सख्ती तथा व्यापक रूप से लागू किया जाए।

    सूत्रों के अनुसार, हर की पैड़ी समेत कुछ प्रमुख गंगा घाटों पर प्रवेश को लेकर देश की आजादी से पहले से ही कुछ नियम लागू हैं। वर्ष 1954 के निकाय ऐक्ट के अनुसार, हरिद्वार कुछ क्षेत्रों में गैर हिंदू संपत्ति नहीं खरीद सकते।

    जानकारों के अनुसार, इस प्रतिबंध पर सख्ती से अमल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कई संतों ने समय समय पर हरिद्वार में प्रतिबंधित क्षेत्र में जमीन खरीदने, गंगा घाटों में गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने और उनके शहरी क्षेत्र में रात को ठहरने पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया है।

  • केरल के त्रिशूर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में लगी भीषण आग, 500 से अधिक बाइकें जलकर राख

    केरल के त्रिशूर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में लगी भीषण आग, 500 से अधिक बाइकें जलकर राख


    त्रिशूर।
    केरल (Kerala) के त्रिशूर में रेलवे स्टेशन (Thrissur Railway Station) के पार्किंग क्षेत्र में रविवार को आग लग जाने से सैकड़ों दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। पुलिस की प्राथमिकी में कहा गया है कि लगभग 500 दोपहिया वाहन (500 Two-Wheelers Burnt) जलकर खाक हो गए, लेकिन दक्षिणी रेलवे (Southern Railway) ने अपने बयान में कहा कि लगभग 250 वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि पार्किंग क्षेत्र में सुबह छह बजकर 20 मिनट पर आग लगी और इस संबंध में अग्निशमन विभाग को छह बजकर 40 मिनट पर जानकारी मिली।

    शुरू में पुलिस और दमकल कर्मियों को संदेह जताया कि बिजली के तार से निकली चिंगारी किसी ढके हुए दोपहिया वाहन पर गिरने से आग लगी होगी। हालांकि, रेलवे ने अपने बयान में दावा किया कि आग ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) या रेलवे के किसी विद्युत उपकरण से नहीं लगी थी। रेलवे ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि आग खड़े दोपहिया वाहनों में से किसी एक से लगी। अधिकारियों का अनुमान है कि शेड में लगभग 500 दोपहिया वाहन खड़े थे, जिनमें से अधिकतर इस घटना में जलकर खाक हो गए।


    5 दमकल गाड़ियों ने पाया काबू

    अधिकारियों ने बताया कि पांच दमकल गाड़ियां भेजी गईं और सुबह करीब 7.45 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक आग फैलने और आगे नुकसान होने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गये। अधिकारी ने कहा कि आग जिस जगह लगी, उसके पास रेलवे पटरी पर एक इंजन खड़ा था लेकिन रेलवे ने उसे कोई बड़ा नुकसान होने की पुष्टि नहीं की। अधिकारी ने बताया कि दोपहिया वाहनों के अलावा टिन की चादरों से ढका पूरा शेड भी आग में क्षतिग्रस्त हो गया।

    दमकल अधिकारियों ने बताया कि पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने आग लगने के सटीक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। पार्किंग क्षेत्र सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में था। हालांकि, आग में सीसीटीवी कंट्रोल यूनिट और हार्ड डिस्क क्षतिग्रस्त हो गई, जिन्हें स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। त्रिशूर पश्चिम पुलिस ने आग लगने की घटना के संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


    बाइक के साथ कैश भी जला

    प्राथमिकी के अनुसार, रेलवे स्टेशन के पश्चिमी हिस्से में पार्किंग सुविधा संचालित करने का ठेका रखने वाली अश्वथी एंटरप्राइजेज की पार्किंग शुल्क छापने वाली मशीन समेत लगभग 500 दोपहिया वाहन आग में जलकर खाक हो गए। प्राथमिकी में यह भी बताया गया है कि अश्वथी एंटरप्राइजेज के कर्मचारियों के दो मोबाइल फोन और 10000 रुपये नकद भी आग में नष्ट हो गए।

    राज्य पुलिस प्रमुख आर ए चंद्रशेखर ने भी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस घटना के मद्देनजर केरल में सशुल्क पार्किंग सुविधाओं पर आग संबंधी ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। चंद्रशेखर ने कहा कि प्रारंभिक बयानों से संकेत मिलता है कि संभव है की एक इलेक्ट्रिक लाइन से निकली चिंगारी के कारण आग लगी लेकिन इसकी पुष्टि के लिए जांच की जरूरत है।

  • वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित

    वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) द्वारा वेनेजुएला (Venezuela) पर की गई सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक वित्तीय बाजारों (Global financial markets) में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। इससे भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market), सोने, चांदी और कच्चे तेल पर संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। जानें, निवेशकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

    अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ता नजर आ रहा है। वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है, इसलिए इस घटनाक्रम ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और शेयर बाजार से लेकर सोना-चांदी तथा कच्चे तेल तक सभी एसेट क्लास पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है।

    भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो फिलहाल किसी बड़ी घबराहट के संकेत नहीं हैं, लेकिन अस्थिरता बढ़ने की संभावना जरूर बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिसका दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस और उपभोक्ता आधारित कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।

    दूसरी ओर डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में आईटी कंपनियों के शेयरों को कुछ समर्थन मिल सकता है। कुल मिलाकर बाजार में बड़ी गिरावट की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनती दिख रही है।


    सोने पर इफेक्ट

    भू-राजनीतिक तनाव का सीधा फायदा सोने को मिलता दिख रहा है। अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं और सोना पारंपरिक रूप से उनका पसंदीदा विकल्प रहा है। वेनेजुएला संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच सकता है।


    चांदी में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा

    चांदी पर इस घटनाक्रम का असर थोड़ा अलग नजर आता है। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग चांदी को सहारा देती है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता औद्योगिक मांग को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में तेजी के साथ तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।


    महंगा हो सकता है कच्चा तेल

    कच्चे तेल के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति संतुलित है, क्योंकि वेनेजुएला से वैश्विक बाजार में पहले ही सीमित मात्रा में तेल की आपूर्ति हो रही थी। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई से तेल बाजार में ‘रिस्क प्रीमियम’ जुड़ गया है। यदि तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता आती है, तो कच्चा तेल आने वाले समय में महंगा हो सकता है।

    भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह फिलहाल वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात नहीं करता और उसकी आपूर्ति रूस तथा पश्चिम एशिया से स्थिर बनी हुई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी भारत को इस वैश्विक संकट से निपटने में सहारा दे सकता है।

  • MP में कड़ाके की ठंड और घने कोहरा…. दिन में भी कांप रहे लोग, 16 जिलों में स्कूलों की छुट्टी

    MP में कड़ाके की ठंड और घने कोहरा…. दिन में भी कांप रहे लोग, 16 जिलों में स्कूलों की छुट्टी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) इन दिनों भीषण ठंड (Severe cold), घने कोहरे (Dense fog) और शीतलहर (Cold wave) की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। सरकार के आदेश पर 16 जिलों में स्कूलों में छुट्टियां (School Closed) घोषित की गई हैं। भोपाल समेत कुछ जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदली गई है। वहीं, ट्रेन और फ्लाइट सेवाओं पर भी कोहरे का असर पड़ा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिनों तक हालात ऐसे ही बने रहने की संभावना है।


    35 से अधिक जिलों में घना कोहरा

    सोमवार सुबह भोपाल, इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, आगर-मालवा, शाजापुर, विदिशा, सागर, दमोह, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया और कटनी में घना कोहरा छाया रहा। दिन के दौरान राजगढ़, दतिया, छतरपुर और उमरिया में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है।


    इन 16 जिलों में स्कूल बंद

    कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के चलते राज्य के कई जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इंदौर में कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल तीन दिन के लिए बंद रहेंगे, जबकि उज्जैन में नर्सरी से कक्षा 5 तक एक दिन की छुट्टी दी गई है। मंदसौर में नर्सरी से कक्षा 8 तक दो दिन का अवकाश रहेगा। शाजापुर और विदिशा में नर्सरी से कक्षा 8 (विदिशा में कक्षा 5 तक) के स्कूल 5 और 6 जनवरी को बंद रहेंगे। ग्वालियर में भी नर्सरी से कक्षा 8 तक 5–6 जनवरी को स्कूल बंद रहेंगे और 7 जनवरी से दोबारा खुलेंगे।

    कहीं तीन तो कहीं दो दिन अवकाश
    वहीं, अशोकनगर में 5 जनवरी को स्कूलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रखे गए हैं। रायसेन में नर्सरी से कक्षा 5 तक के स्कूल 7 जनवरी तक बंद रहेंगे। आगर मालवा में कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल दो दिन बंद रहेंगे और आंगनवाड़ी केंद्रों में भी अवकाश रहेगा। टीकमगढ़, नीमच और रतलाम में नर्सरी से कक्षा 8 तक के स्कूल 5–6 जनवरी को बंद रहेंगे, जबकि हरदा में सोमवार को नर्सरी से कक्षा 8 तक अवकाश घोषित किया गया है। राजगढ़ में कक्षा 8 तक के स्कूल एक दिन के लिए बंद रहेंगे। मंडला में नर्सरी से कक्षा 8 तक 5–6 जनवरी को स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। वहीं जबलपुर में भी नर्सरी से कक्षा 8 तक 5–6 जनवरी को स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे, हालांकि परीक्षाएं अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी।


    भोपाल और धार में स्कूलों के समय में बदलाव

    ठंड और कोहरे को देखते हुए भोपाल और धार में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। भोपाल में नर्सरी से कक्षा 8 तक के सभी स्कूल अब सुबह 9:30 बजे के बाद ही खुलेंगे। वहीं धार जिले में भी नर्सरी से कक्षा 8 तक के स्कूलों का संचालन 9:30 बजे के बाद किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं अपने सामान्य समय पर ही संचालित होंगी।

  • वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की नजर अब उनके बेटे पर

    वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की नजर अब उनके बेटे पर


    कराकास।
    वेनेजुएला (Venezuelan) के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (President Nicolás Maduro) और उनकी पत्नी को अमेरिका (America) ने गिरफ्तार किया है। उनके ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अमेरिका काफी समय से माइग्रेशन और ड्रग तस्करी को लेकर मादुरो के पीछे पड़ा था। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन की निगाहें मादुरो के बेटे पर भी टेढ़ी हैं। आखिर कौन है मादुरो का बेटा और क्या है उसका नाम? इसके अलावा यह भी जानेंगे कि आखिर अमेरिका मादुरो के बेटे से इतना ज्यादा खफा क्यों है…


    पहली पत्नी से जन्म

    निकोलस के बेटे का नाम है निकोलस अर्नेस्टो मादुरो ग्वेरा और उसे प्रिंस के नाम से भी जाना जाता है। प्रिंस का जन्म 1990 में मादुरो की पहली पत्नी, एड्रियाना गुएरा अंगुलो के यहां हुआ था। उसे मादुरो के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में जाना जाता है। अमेरिका ने उसे भी वेनेजुएला के ड्रग ऑपरेशन के आरोपियों की लिस्ट में रखा है। ट्रंप प्रशासन ने मादुरो और उनकी पत्नी के साथ उनके बेटे पर भी ड्रग ट्रैफिकिंग, नार्को-टेररिज्म और हथियारों की तस्करी में आरोप तय किए हैं। अभियोजकों का आरोप है कि तीनों ने अमेरिका में कोकीन की बड़ी मात्रा तस्करी करने की साजिश रची ताकि कोलंबियाई गुरिल्ला समूहों, मैक्सिकन कार्टेल और वेनेजुएला की गैंगों को फायदा मिल सके।


    नार्कोटिक्स नेटवर्क का योजनाकार

    अमेरिका के संघीय अभियोजक उसे एक व्यापक नार्कोटिक्स नेटवर्क का प्रमुख योजनाकार बताते हैं। इस नेटवर्क ने वेनेजुएला से अमेरिका तक कोकीन ले जाने के लिए देश के संसाधनों, सैन्य कर्मियों और राजनीतिक प्रभाव का फायदा उठाया। 2014 और 2015 के बीच, वह कथित तौर पर हर महीने दो बार सरकारी विमान फाल्कन 900 जेट पर मार्गरीटा द्वीप की यात्रा करता था। हर उड़ान से पहले, विमान में कथित तौर पर बड़े, टेप से लिपटे कोकीन के पैकेज लोड किए जाते थे और सैन्य कर्मी उनके अंदर की सामग्री से पूरी तरह परिचित होते थे। एक हलफनामे में दावा किया गया है कि मादुरो ग्वेरा ने दावा किया कि विमान जहां चाहे उड़ सकता है, यहां तक ​​कि अमेरिकी हवाई क्षेत्र में भी।


    ड्रग संगठन में काम करने का आरोप

    इसके अलावा प्रिंस पर कार्टेल दे लॉस सोल्स के भीतर काम करने का आरोप है, जो वेनेजुएला का ड्रग संगठन है। यह संगठन कथित रूप से उच्च-स्तरीय सरकारी अधिकारियों के नेतृत्व में है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इस कार्टेल ने पीडीवीएसए के विमान, राष्ट्रपति हैंगर और राजनयिक चैनलों का उपयोग कानून प्रवर्तन से खेपों को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी को सुविधाजनक बनाने के लिए किया। अभियोग पत्र के मुताबिक ड्रग्स से हुई कमाई राजनीतिक अभियानों में इस्तेमाल की गई।

  • दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण

    दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण


    नई दिल्ली । इंदौर में दूषित पेयजल से हुई गंभीर घटनाओं के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शहर में कहीं भी पीने के पानी में गंदगी की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। शनिवार को कलेक्टर ऋतुराज सिंह, नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार और नगर निगम सभापति रवि जैन ने शहर के वार्ड क्रमांक 44 और 45 के अंतर्गत आने वाले नागदा और पालनगर क्षेत्रों का दौरा कर जलदाय व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र की पानी की टंकियों, सप्लाई लाइनों और नल कनेक्शनों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कई स्थानों पर गंभीर खामियां सामने आईं। कुछ नल कनेक्शन नालियों के बेहद पास पाए गए, वहीं कई जगह नलों में टोटियां तक नहीं लगी थीं, जिससे गंदा पानी पाइपलाइन में जाने का खतरा बना हुआ था। अधिकारियों ने मौके पर ही नगर निगम की टीम को तत्काल टोटियां लगाने और कनेक्शन दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया निरीक्षण

    कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि यह निरीक्षण मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया है। दूषित पानी से हुई मौतों को प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।निरीक्षण के दौरान पानी की हार्डनेस की भी जांच की गई और विभिन्न स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी सैंपल्स की लैब में समयबद्ध जांच हो और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।

    नालियों के पास पाइपलाइन बनी खतरे की वजह

    स्थानीय रहवासियों ने अधिकारियों को बताया कि गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग पर नाली का गंदा पानी अक्सर सड़क पर बहता रहता है। चूंकि अधिकांश पानी की लाइनें और नल कनेक्शन नालियों के पास हैं, ऐसे में सीवेज का पानी पीने की सप्लाई में मिलने का खतरा बना रहता है। निरीक्षण के दौरान एक खुली टोटी भी मिली, जिससे दूषित पानी सीधे पाइपलाइन में जा रहा था। इस पर निगम अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन के आदेश

    कलेक्टर ने बताया कि शहर की सभी पानी की टंकियों की साफ-सफाई का काम एक दिन पहले ही शुरू कर दिया गया है। साथ ही सात दिनों के भीतर पूरे शहर में पानी की व्यापक टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को सभी वार्डों में टंकियों की गहन सफाई, क्लोरीनेशन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां-जहां पानी की सप्लाई में गंदगी मिलने की आशंका है, वहां संबंधित प्वाइंट्स को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। इसके अलावा सीवरेज लाइनों में लीकेज की जांच कर कहीं भी पानी और सीवर की मिक्सिंग पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सभापति ने बताई निरीक्षण की स्थिति

    नगर निगम सभापति रवि जैन ने बताया कि वार्ड क्रमांक 44 और 45 में कई जगह नाली और पानी की लाइनें साथ-साथ चल रही हैं। कुछ स्थानों पर लीकेज भी सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान गणेश मंदिर पहुंच मार्ग पर नाली का पानी ऊपर आता हुआ पाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। इन सभी बिंदुओं पर निगम की टीम को तुरंत सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार अब सभी वार्डों में नियमित और सतत निरीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

    नागरिकों से की गई अपील

    प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं भी पीने के पानी में गंदगी, बदबू या रंग बदलने जैसी समस्या नजर आए, तो तुरंत नगर निगम या संबंधित वार्ड कार्यालय को इसकी सूचना दें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
    दूषित पानी की घटना के बाद प्रशासन की इस सक्रियता को शहरवासियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, हालांकि लोग चाहते हैं कि यह सतर्कता सिर्फ निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।