सीने में जकड़न का कारण
आयुर्वेदिक उपाय
छाती की मालिश
भाप लेना
चूर्ण का सेवन

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एम्स भोपाल इस वर्ष ‘ट्रांसप्लांट’ के लिए समर्पित एक नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इस ऑपरेशन थिएटर के शुरू होने से हृदय लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट अब एक ही छत के नीचे संक्रमण रहित वातावरण में किए जा सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वेटिंग लिस्ट कम हो सकेगी और अधिक मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा जिससे उनका जीवन बचाया जा सकेगा।
इसके अलावा गामा नाइफ तकनीक का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर और मस्तिष्क के अन्य जटिल रोगों के इलाज में किया जाएगा। गामा नाइफ के माध्यम से बिना चीरा लगाए सटीक रेडिएशन के जरिए ट्यूमर का इलाज संभव हो सकेगा। यह तकनीक विशेषकर उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जिन्हें ब्रेन ट्यूमर के इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
एम्स भोपाल के इस नए कदम से अब मरीजों को दिल्ली मुंबई या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी क्योंकि यहां उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। संस्थान का पूरा फोकस इस वर्ष डायग्नोस्टिक सेवाओं को और बेहतर बनाने और क्रिटिकल केयर की क्षमता को बढ़ाने पररहेगा।यह पहल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के मरीजों केलिए भी राहत लेकर आएगी क्योंकि अब उन्हें उच्च गुणवत्ता वालेउपचार के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

पहले मेट्रो का संचालन सुबह 9 बजे से शुरू होता था लेकिन अब एम्स स्टेशन से मेट्रो दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। वहीं शाम का आखिरी ट्रिप अब साढ़े सात बजे होगा जबकि पहले यह समय देर रात तक था। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि मेट्रो को अपेक्षित संख्या में यात्री नहीं मिल रहे हैं। शुरुआत के दिनों में भी मेट्रो की सवारी में गिरावट देखी गई है और अब यह स्थिति इस हद तक पहुँच चुकी है कि मेट्रो को दिन में कम ट्रिप्स करने पड़ रहे हैं।
भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को हुआ था जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल ने इसका उद्घाटन किया। इसके बाद 21 दिसंबर से मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ था। उद्घाटन के पहले दिन लोगों में मेट्रो को लेकर काफी उत्साह था और 6568 पैसेंजर ने मेट्रो में सफर किया था। हालांकि इसके बाद यात्रियों की संख्या में गिरावट आई और मेट्रो के संचालन के लिए आवश्यक पैसेंजर संख्या नहीं जुटाई जा सकी।
भोपाल मेट्रो के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मेट्रो का संचालन काफी महंगा होता है और इसकी लागत को कवर करने के लिए पैसेंजर की संख्या जरूरी है। अब मेट्रो को यात्रा की स्थिति में सुधार लाने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार करना होगा।

पुलिस ने एआई तकनीक का उपयोग कर महिला का स्कैच तैयार कराया। इस स्कैच के आधार पर जब पुलिस ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया तो उन्होंने महिला की पहचान “कल्लो उर्फ कालीबाई” के रूप में की। वह अक्सर उस क्षेत्र में घूमती रहती थी और वहां के स्थानीय लोग उसे पहचानते थे।
स्कैच के आधार पर पुलिस ने फिर से सीसीटीवी फुटेज की जांच की और देखा कि महिला एक युवक के साथ घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर सड़क पर चलती हुई दिखाई दी थी। पुलिस ने इस युवक को प्रमुख संदेही मानते हुए उसकी तलाश शुरू की। संदेही की जैकेट भी घटनास्थल से मिले महिला के कपड़ों के पास पाई गई जिससे पुलिस को और सबूत मिले हैं।
इस खोज ने पुलिस को मामले की दिशा में महत्वपूर्ण मदद दी है और इस जघन्य हत्या के आरोपी तक पहुंचने के प्रयासों को तेज किया है। पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कोशिश करेंगे।यह घटना ग्वालियर के कटारे फार्म में सोमवार को हुई थी जब महिला की लाश झाड़ियों में पाई गई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी और अब एआई तकनीक के सहारे इस हत्याकांड के पीछे के रहस्यों को सुलझाने में मदद मिल रही है।

मरीज सतीष सेन ने बताया कि वे शुक्रवार शाम करीब पांच बजे पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते जेपी अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में पहुंचे थे। ओपीडी में उस वक्त कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और इंटर्न डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया। इसके बाद मरीज को एक्स-रे की सिफारिश की गई और दर्द की दवा लिखी गई जो बाद में फफूंद लगी हुई मिली।
इस घटना ने अस्पताल में चिकित्सा गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज को अगर दवा की स्थिति का पता न चलता तो इसे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा माना जा सकता था। इसके अलावा सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने भी ओपीडी में इलाज के स्तर को प्रभावित किया।
इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य संगठनों नेप्रशासन से कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जासके और मरीजों को बेहतर इलाज और दवाइयां मिल सकें। अस्पताल प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत कदम उठाने चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को गुणवत्ता वाली दवाइयां और इलाज मिले।

गैस त्रासदी से पीड़ित इन इलाकों के लोग अब तक बेहतर पानी की सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति ने इन बस्तियों में स्थित हैंडपंप और कुओं के पानी की जांच की और उसमें भारी मात्रा में हैवी मेटल डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन पाए गए।
2018 में किए गए पानी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पाइपलाइन के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा बहुत अधिक थी जो लोगों के लिए गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और आज भी लोग इस गंदे पानी को पीने को मजबूर हैं।
गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक है क्योंकि पहले ही वे जानलेवा गैसों से प्रभावित हुए थे और अब उन्हें दूषित पानी पीने के कारण नए स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ रहा है। इन बस्तियों के निवासी बार-बार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई सार्थक समाधान नहीं निकल सका है।
इस संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए गैस पीड़ित संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन भी किया है लेकिन शासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। 2017 में नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र देकर जलापूर्ति में सुधार करने का वादा किया था लेकिन सात साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
यह संकट सिर्फ पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी खतरा बन चुका है। नागरिक समाज और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं ताकि इन 42 बस्तियों के लोगों को साफ पानी मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामी पूरी तरह से उजागर हो चुकी है और अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके और दूषित पानी के कारण फैलने वाले संक्रमण को रोका जा सके।
स्थानीय निवासियों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि दूषित पानी पीने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पानी की जांच शुरू कर दी है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी लगातार बनी हुई है।यह मामला प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि दूषित पानी पीने से होने वाली मौतें आम बात नहीं हैं और यह स्थिति तत्काल ध्यान देने योग्य है।

मीडिया रिपोर्टस में बताया गया है कि किम जोंग ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए ट्रंप को यहां तक चेताया कि यह टकराव विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर मादुरो को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की यह कार्रवाई सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरा है। किम जोंग ने यहां तक कह दिया कि ऐसी कार्रवाइयों से विश्व युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।
किम जोंग ने अमेरिका पर लगाया आरोप
इस दौरान उत्तर कोरियाई नेता ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में जबरन दखल दे रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। किम जोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान किया जाए और मादुरो को जल्द रिहा किया जाए।
रूस समेत ये बड़े देश अमेरिका के खिलाफ
बता दें कि वेनेजुएला पर अमेरिका के इस कार्रवाई को कई देशों ने गलत ठहराया है। रूस से लेकर कोलंबिया, क्यूबा, चिली, मेक्सिको, ब्राजील, ईरान, स्पेन और जर्मनी तक। इन सभी देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की है। रूस ने यहां तक कह दिया कि वेनेजुएला को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है और बाहरी सैन्य हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। रूस ने संवाद के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।
वहीं कोलंबिया ने कहा कि वेनेजुएला पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। कोलंबिया ने यह साफ किया कि वह सैन्य टकराव नहीं चाहता, लेकिन शांति और मानव गरिमा की रक्षा जरूरी है। सुरक्षा कारणों से उसने वेनेजुएला सीमा पर अपनी सेना तैनात की।
क्या वैश्विक मोड़ ले सकता है अमेरिका-वेनेजुएला तनाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग का यह बयान वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकता है, क्योंकि पहले ही अमेरिका की कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने चिंता जताई है। ऐसे में अमेरिका-वेनेजुएला विवाद अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण शहरवासियों को दिन और रात दोनों समय ठंडक का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में अगले एक हफ्ते तक कोहरे और शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। 4 से 6 जनवरी के बीच न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है।
वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इंदौर में नमी आ रही है और उत्तरी हवाओं की वजह से ठंडक का असर दिन में भी महसूस हो रहा है। हालांकि तीन दिन बाद हवाओं का रुख पश्चिमी होने से तापमान में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। 10 जनवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बनेगा जिसके प्रभाव से इंदौर का तापमान बढ़ सकता है।
शुक्रवार रात तीन बजे से शनिवार सुबह 4.30 बजे तक घना कोहरा छाया रहा और इस दौरान दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई। दिन में धूप भी बहुत कम समय के लिए निकली और अधिकांश समय बादल छाए रहे। शनिवार को इंदौर का अधिकतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री कम था जबकि न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था।भोपाल स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन दिनों तक इंदौर में शीतलता बरकरार रहेगी। रविवार तक कोहरे का असर जारी रहेगा और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।