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  • ईरान में भड़की जनता, आगजनी के बीच 50 से ज्यादा शहरों तक फैला आंदोलन

    ईरान में भड़की जनता, आगजनी के बीच 50 से ज्यादा शहरों तक फैला आंदोलन


    तेहरान। ईरान की खराब अर्थव्यवस्था के कारण शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ग्रामीण इलाकों में फैल गए है। प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है। 5 लोगों की मौत गुरुवार को जबकि एक शख्स की मौत बुधवार को हुई थी। झड़पों में ईरान की पैरामिलिट्री फोर्सेस के एक जवान की भी मौत हुई है जबकि 13 से ज्यादा घायल हैं।
    50 से ज्यादा शहरों तक फैला आंदोलन

    ईरान में हिंसक आंदोलन को दौरान हुई मौतों के बाद प्रदर्शकारी बेकाबू होते दिख रहे हैं। तेहरान से शुरू हुआ प्रदर्शन अब ईरान के 50 से ज्यादा शहरों तक पहुंच गया है। बढ़ती महंगाई को लेकर शुरू हुआ ये प्रदर्शन सुरक्षाबलों की कार्रवाई के बाद और तेज हो गया है। सबसे ज्यादा हिंसक झड़पें तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में 300 किलोमीटर स्थित अजना शहर में हुई हैं। यह शहर ईरान के लोरेस्तान सूबे में पड़ता है।

    सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प

    ईरान के लोरदेगान में सुरक्षा बलों और हथियारबंद प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़प हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने गवर्नर के ऑफिस में आग लगा दी है। खबरों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने कुछ शहरों में ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड की बिल्डिंग्स पर भी कब्जा कर लिया है। अदालतों की बिल्डिंग्स पर भी प्रदर्शनकारी बैठ गए हैं।

    ईरान की सरकारी मीडिया ने 6 लोगों की गिरफ्तारी की खबर दी है हालांकि ये नहीं बताया कि ये गिरफ्तारियां क्यों की गई हैं। इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक अलग-अलग शहरों में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
    तेहरान से शुरू हुआ था विरोध प्रदर्शन

    ईरान में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला राजधानी तेहरान से शुरू हुआ था। सबसे पहले तेहरान के कारोबारियों ने बिजनेस की खराब होती हालत के खिलाफ प्रोटेस्ट मार्च निकाला इसके बाद, व्यापारियों के विरोध प्रदर्शन में तेहरान यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स भी शामिल हो गए। इसके बाद तो आंदोलन की आग दूसरे शहरों में फैल गई और अब पूरे ईरान में प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं।

    अमेरिका और यूरोपीय देशों ने लगाए प्रतिबंध

    बता दें कि, 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए हैं। पांबदियों की वजह से ईरान की माली हालत खस्ता हो गई है। बीते साल जून में पहले इजरायल के साथ झड़प फिर अमेरिकी बमबारी के बाद ईरान ने न्यूक्लियर सेक्टर में इंटरनेशनल संगठनों के साथ सहयोग बंद कर दिया इसके बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए।

  • वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो बस ड्राइवर से लेकर राष्ट्रपति तक

    वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो बस ड्राइवर से लेकर राष्ट्रपति तक


    मुंबई। अमेरिका ने शुक्रवार देर रात को वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हमले किए। साथ ही कहा कि देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया गया है और देश से बाहर ले जाया गया है। आइए आपको निकोलस मादुरो की जीवन यात्रा से आपको रूबरू कराते हैं। निकोलस मादुरो ने बस चालक से वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय किया। हालांकि उन पर देश में लोकतंत्र के पतन और आर्थिक तबाही को लेकर आंखे मूंदे रहने के आरोप लगे। विभिन्न मोर्चों पर कई महीने के अमेरिकी दबाव के बाद ये घटनाक्रम सामने आया है।

    ऐसे शुरू हुआ सफर
    मादुरो ऐसे समय में शासन कर रहे थे, जब पिछले कुछ महीने से अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करने और उसे अपने नियंत्रण में लेने के इरादों की अटकलों को हवा दी जा रही थी। अमेरिकी हमले का उद्देश्य उस स्वघोषित समाजवादी क्रांति को समाप्त करना था, जिसे मादुरो के दिवंगत राजनीतिक गुरु और पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज ने 1999 में शुरू किया था।

    शावेज की तरह, मादुरो ने भी अमेरिका को वेनेजुएला के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। साथ ही लोकतांत्रिक मानदंडों को बहाल करने के किसी भी प्रयास के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन प्रशासन की कड़ी आलोचना की थी।

    40 साल पहले राजनीतिक करियर की शुरुआत
    मादुरो का राजनीतिक करियर लगभग 40 साल पहले शुरू हुआ था। 1986 में, वह एक साल के वैचारिक प्रशिक्षण के लिए क्यूबा गए, जो हाई स्कूल के बाद उनकी एकमात्र औपचारिक शिक्षा थी। वापस लौटने पर, मादुरो ने काराकस में बस चालक के रूप में काम किया, जहां वह जल्दी ही एक श्रमिक संघ के नेता बन गए।

    1990 के दशक में वेनेजुएला की खुफिया एजेंसियों ने उन्हें क्यूबा सरकार से घनिष्ठ संबंध रखने वाले घोर वामपंथी के रूप में चिन्हित किया। मादुरो ने अंततः बस चालक की नौकरी छोड़ दी और उस राजनीतिक आंदोलन में शामिल हो गए जिसे शावेज ने खड़ा किया था।

    शावेज ने घोषित किया उत्तराधिकारी
    शावेज को वर्षों पहले एक असफल सैन्य तख्तापलट का नेतृत्व करने के लिए 1994 में राष्ट्रपति से क्षमादान मिला था, जिसके बाद उन्होंने राजनीतिक अभियान शुरू किया था। साल 2013 में अपने निधन से पहले राष्ट्र को दिए गए अपने अंतिम संबोधन में शावेज ने मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद से मादुरो लगातार इस पद पर बने हुए थे। इससे पहले मादुरो देश के विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति भी रहे चुके थे।

    कितनी है संपत्ति
    सालों तक भ्रष्टाचार के दावों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि निकोलस मादुरो के पास कितनी प्रॉपर्टी है। कोई विस्तृत सार्वजनिक वित्तीय विवरण भी उपलब्ध नहीं है। आंकड़े काफी भिन्न हैं। कुछ आकलनों के अनुसार, उनकी रिपोर्ट की गई संपत्ति अन्य नेताओं की तुलना में कम है जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप है। हालांकि सेलेब्रिटी नेट वर्थ के अनुसार, मादुरो की अनुमानित संपत्ति लगभग 2 मिलियन डॉलर है।

  • सर्दियों की सुपरहिट सब्जियां, गर्म तासीर से सेहत मजबूत, बीमारियां रहेंगी दूर

    सर्दियों की सुपरहिट सब्जियां, गर्म तासीर से सेहत मजबूत, बीमारियां रहेंगी दूर


    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही शरीर को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। ठंड के कारण इम्युनिटी कमजोर पड़ सकती है, पाचन धीमा हो जाता है और सर्दी-खांसी जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे समय में डाइट में गर्म तासीर वाली सब्जियों को शामिल करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, ये सब्जियां न केवल शरीर को अंदर से गर्म रखती हैं, बल्कि रोगों से लड़ने की ताकत भी बढ़ाती हैं।

    मूली: सर्दियों की पहली पसंद
    सर्दियों की सबसे लोकप्रिय और फायदेमंद सब्जियों में मूली का नाम सबसे ऊपर आता है। मूली की तासीर गर्म होती है और यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती है। ठंड के मौसम में मूली खाने से गैस, कब्ज और अपच की समस्या कम होती है। मूली का सलाद, सब्जी और पराठा सर्दियों में खास तौर पर पसंद किया जाता है।

    इसके अलावा मूली में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

    लहसुन: सर्दियों का प्राकृतिक औषधि
    लहसुन को आयुर्वेद में सर्दियों का प्राकृतिक औषधि माना जाता है। इसकी गर्म तासीर शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाती है और इम्युनिटी को मजबूत करती है। नियमित रूप से लहसुन का सेवन सर्दी-खांसी, जुकाम और संक्रमण से बचाव में मदद करता है। कुछ विशेषज्ञ इसे सुबह खाली पेट लेने की सलाह भी देते हैं, जिससे यह अधिक प्रभावी होता है। लहसुन में एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से स्वस्थ बनाए रखते हैं।

    अदरक: शरीर में तुरंत गर्माहट
    अदरक सर्दियों की सबसे असरदार जड़ी-बूटी मानी जाती है। चाय में अदरक का इस्तेमाल हो या सब्जियों में, यह शरीर को तुरंत गर्माहट देती है। अदरक गले की खराश, खांसी और जुकाम से राहत दिलाने में मदद करता है।

    इसके अलावा यह पाचन सुधारने और मेटाबॉलिज्म को तेज करने में भी सहायक है। अदरक का नियमित सेवन शरीर को ठंड से लड़ने की क्षमता देता है और एनर्जी लेवल को बनाए रखता है।

    चुकंदर: खून की कमी और कमजोरी से बचाव
    सर्दियों में चुकंदर का सेवन भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। आयरन और फाइबर से भरपूर चुकंदर खून की कमी दूर करता है और शरीर में गर्माहट बनाए रखता है। ठंड के मौसम में चुकंदर का सलाद या जूस ऊर्जा देने के साथ-साथ कमजोरी से भी बचाता है। इसके अलावा चुकंदर में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय और लिवर की सेहत के लिए भी लाभकारी हैं।

    हरी मिर्च: पाचन और गर्माहट का साथी
    सर्दियों में हरी मिर्च का सेवन सीमित मात्रा में फायदेमंद होता है।

    इसकी गर्म तासीर शरीर का तापमान संतुलित रखती है और पाचन तंत्र को सक्रिय बनाती है। हालांकि अधिक मात्रा में हरी मिर्च खाने से पेट की समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इसका सेवन संयमित रूप से करना चाहिए। हरी मिर्च में विटामिन सी और कैप्साइसिन शरीर की इम्युनिटी और ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करते हैं।

    पालक: हरी पत्तेदार वरदान
    सर्दियों में हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक को विशेष स्थान दिया जाता है। पालक आयरन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होती है। यह न केवल शरीर को गर्म रखने में मदद करती है, बल्कि इम्युनिटी बढ़ाकर मौसमी बीमारियों से भी बचाती है।

    पालक की सब्जी, सूप या सलाद के रूप में सेवन शरीर को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है।

    संतुलित डाइट से सर्दियों में सेहतमंद जीवन
    कुल मिलाकर, सर्दियों में गर्म तासीर वाली सब्जियां शरीर को ठंड से बचाने के साथ-साथ संपूर्ण स्वास्थ्य को मजबूत बनाती हैं। मूली, लहसुन, अदरक, चुकंदर, हरी मिर्च और पालक जैसी सब्जियों को संतुलित मात्रा में रोज़ाना डाइट में शामिल करने से न केवल सर्दियों में बीमारियों से बचाव होता है, बल्कि शरीर में ऊर्जा और एनर्जी का स्तर भी बना रहता है।

    यदि इन्हें नियमित रूप से सेवन किया जाए, तो सर्दियों का मौसम भी फिट और सक्रिय होकर बिताया जा सकता है। इसलिए इस ठंड में अपने आहार में गर्म तासीर वाली सब्जियों को शामिल करना न भूलें और सेहतमंद जीवन का आनंद लें।इसमें सर्दियों की सब्जियों के फायदे, तासीर, पाचन, इम्युनिटी और सेवन के तरीके सभी को एकदम जानकारीपूर्ण और रोचक तरीके से शामिल किया गया है।

  • सर्दियों में कर रहे हैं नेपाल घूमने की प्लानिंग? ये 5 जगहें करे लें नोट नजारें देख वहीं बस जाने का करेगा मन

    सर्दियों में कर रहे हैं नेपाल घूमने की प्लानिंग? ये 5 जगहें करे लें नोट नजारें देख वहीं बस जाने का करेगा मन


    नई दिल्ली ।हर किसी की चाह होती है कि वह सर्दियों में सफेद चादर से ढकी वादियों में घूमने जाए. अगर आप भी ऐसी ही कुछ प्लानिंग कर रहे हैं तो नेपाल एक बेहतरीन और किफायती ऑप्शन हो सकता है. बता दें कि सर्दियों में नेपाल का नजारा बिल्कुल बदल जाता है यहां का साफ आसमान और बर्फ से ढके पहाड़ आपकी आंखों को सुकून देंगे और मन मोह लेंगे. इसी कड़ी में आज हम आपके लिए नेपाल की 5 खूबसूरत जगहों की लिस्ट लेकर आए हैं जहां आप सर्दियों में घूम सकते हैं और प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का आनंद उठा सकते हैं.  किस हिल स्टेशन को भारत का इटली कहा जाता है? जानिए सस्ते में कैसे घूमकर आएं ये खूबसूरत जगह
    1. पोखरा नेपाल
    अगर आप नेपाल घूमने जा रहे हैं तो पोखरा भी जरूर घूमकर आएं. यहां अन्नपूर्णा पर्वतों की श्रृंखलाएं की खूबसूरती आपका दिल ही जीत लेगी. इसके अलावा सर्दियों में यहां का साफ आसमान पूरे नजारे में चार-चांद लगा देते हैं. यहां आप बस और फ्लाइट दोनों से पहुंच सकते हैं.

    2. चितवन नेपाल

    आपको अगर जंगल सफारी का मजा लेना है तो नेपाल में स्थित चितवन नेशनल पार्क जरूर जाएं. यह पार्क अपनी हरियाली शांत नदियों और वन्यजीवों के लिए फेमस है. यहां आपको बाघ गैंडा हाथी हिरण जैसे जानवर देखने को मिल सकते हैं. सर्दियों में यहां का मौसम बेहद सुखद होता है जो सफारी को और भी रोमांचक बना देता है.

    3. पून हिल्स नेपाल

    अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हैं तो नेपाल में पून हिल्स जाना बिल्कुल न भूलें. यह जगह ट्रेकिंग लवर्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है जो आपको मंत्रमुग्ध कर देगा. पून हिल्स का ट्रेक आसान माना जाता है इसलिए शुरुआती ट्रेकर्स के लिए भी यह परफेक्ट है.

  • सेवा जब विश्वास बन जाए : आरोग्य भारती ने मप्र में ऐसे बदली स्वास्थ्य की सोच और तस्वीर

    सेवा जब विश्वास बन जाए : आरोग्य भारती ने मप्र में ऐसे बदली स्वास्थ्य की सोच और तस्वीर


    भोपाल।
    बीमारी जब शरीर से पहले मन को तोड़ने लगे, जब इलाज का नाम सुनते ही जेब का हिसाब लगाया जाने लगे और जब अस्पताल किसी डरावनी जगह जैसे लगने लगें, तब समाज को केवल डॉक्टर नहीं, भरोसे की जरूरत होती है।

    आज देश के साथ मध्य प्रदेश में “आरोग्य भारती” ने पिछले वर्षों में यही भरोसा लौटाने का काम किया है।

    निःशुल्क सेवाएँ, संवेदनशील व्यवहार और समग्र स्वास्थ्य दृष्टि के माध्यम से यह संगठन उन लाखों लोगों के लिए आशा बन गया है, जिन्‍हें कल तक धनाभाव में उचित स्वास्थ्य देखभाल से वंचित रह जाना पड़ता था। कहने का मतलब कि गरीब से आमजन तक ये स्वास्थ्य सेवाएं बना किसी भेदभाव के निशुल्क दी जा रही हैं, यह ऐसे समाज के लिए बहुत दुखद और प्रेरणा देने वाला है।

    दरअसल, “आरोग्य भारती” कोई नया संगठन नहीं है, ये वर्ष 2002 से स्वास्थ्य संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय एक वैचारिक आंदोलन है। इसका मूल मंत्र है; “रोग से पहले स्वास्थ्य”। यही कारण है कि संगठन इलाज के साथ-साथ जीवनशैली, आहार, योग, पर्यावरण और मानसिक संतुलन को भी स्वास्थ्य का अभिन्न अंग मानता है।

    व्‍यवहारिक धरातल पर “आरोग्य भारती” का कार्यदर्शन

    “आरोग्य भारती” का विश्वास है कि स्वास्थ्य सेवा मानवता, संवेदना और परंपराओं को समर्प‍ित भारत में चिकित्‍सकों और दवाओं तक सीमित नहीं हो सकती। समाज को अपने स्वास्थ्य के प्रति कर्तव्य और उत्तरदायित्व का बोध कराना उतना ही आवश्यक है, जितना कि दैनन्‍दिन जीवन में जरूरी व्‍यवहार को सामान्‍यत: आवश्‍यक माना गया है। इसलिए इसी सोच को साथ ले संगठन आज सभी चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों, सेवाभावी नागरिकों और स्वयंसेवकों को जोड़ते हुए देशभर में कार्य का विस्तार करते हुए अपना कार्य सफलता के साथ कर रहा है।

    आज संगठन की सक्रिय इकाइयाँ देश के 43 प्रांतों और 900 से अधिक जिलों में कार्य कर रही हैं। मध्य प्रदेश में यह कार्य विशेष रूप से प्रभावी रूप में सामने आया है, जहाँ “आरोग्य भारती” के सेवा प्रकल्प समाज की वास्तविक जरूरतों से जुड़े हुए हैं।

    आरोग्य मित्र : समाज के भीतर से निकला समाधान

    स्वास्थ्य को समाज की जड़ों तक पहुँचाने के लिए “आरोग्य भारती” ने ‘आरोग्य मित्र’ की संकल्पना विकसित की। सामान्य शैक्षणिक योग्यता रखने वाले सेवाभावी युवक-युवतियों को प्राथमिक स्वास्थ्य, जीवनशैली, योग, आहार, घरेलू उपचार, प्राथमिक उपचार और सीपीआर जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। उल्‍लेखित है कि बीते 24 वर्षों में 375 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 9000 से अधिक स्वयंसेवक तैयार किए जा चुके हैं। यही आरोग्य मित्र आज गाँव-गाँव, बस्तियों और शहरी कॉलोनियों में स्वास्थ्य जागरूकता का कार्य कर रहे हैं।

    भोपाल : सेवा का जीवंत मॉडल

    देखने में आया है कि मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में “आरोग्य भारती” के सेवा कार्य मॉडल के रूप में सामने आए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर संगठन की गंभीरता का प्रमाण है निःशुल्क स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम। वर्ष 2021 से निरंतर चल रहे 9 केंद्रों के माध्यम से अब तक 20 हजार से अधिक बच्चों को स्वर्ण प्राशन दिया जा चुका है। यह उन परिवारों के लिए वरदान है जो महँगी दवाइयाँ और सप्लीमेंट नहीं खरीद सकते। इसी तरह भोपाल के आसपास पांच गाँवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों का परिणाम केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वहाँ के स्वास्थ्य आँकड़ों में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है। समय रहते रोगों की पहचान और जीवनशैली सुधार से लोगों की दवा-निर्भरता कम हुई है।

    योग और जीवनशैली : दवा से पहले समाधान

    भोपाल में 22 स्थानों पर नियमित निःशुल्क योग कक्षाएँ संचालित हो रही हैं। इनमें शामिल होने वाले अधिकांश लोग ऐसे हैं जो या तो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या लंबे समय से दवाओं पर निर्भर रहे हैं। योग ने उन्हें शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी दिया है। साथ ही पांच विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य प्रबोधन का कार्य बच्चों में स्वास्थ्य संस्कार विकसित कर रहा है। स्वच्छता, आहार, दिनचर्या और तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देकर आरोग्य भारती भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने में जुटा है।

    महिला टोली : दे रहीं घर-घर स्वास्थ्य की ताकत

    इतना ही नहीं संपूर्ण मध्य प्रदेश में महिला टोली के माध्यम से घरेलू उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल महिलाओं को केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं बनाती, बल्कि उन्हें परिवार और समाज के लिए स्वास्थ्य की धुरी बनाती है। साधारण घरेलू उपायों से छोटे-मोटे रोगों का समाधान गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है।

    पर्यावरण और स्वास्थ्य का साझा सरोकार

    “आरोग्य भारती” का मानना है कि प्रदूषित पर्यावरण में स्वस्थ समाज की कल्पना संभव नहीं। इसी सोच से प्रतिदिन कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लिया गया। अब तक 1697 पौधे लगाए जा चुके हैं और सभी जीवित हैं, जिनका पूरा रिकॉर्ड रखा गया है। यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य में निवेश जैसा है।

    शिवपुरी की अनुकरणीय पहल ला रही रंग

    “आरोग्य भारती” जिला इकाई शिवपुरी ने सेवा का एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया। शिवपुरी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में आर्थोपेडिक विभाग में एक इंडक्शन, मातृत्व एवं शिशु विभाग में दो इंडक्शन, लगवाकर रोगियों की सुविधा में स्थायी सुधार किया गया। यह दिखाता है कि आरोग्य भारती सेवा को केवल शिविरों तक सीमित नहीं रखता।

    उत्सव से जागरूकता तक

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, धन्वंतरि जयंती और आयुर्वेद दिवस जैसे आयोजनों को आरोग्य भारती ने जन-जागरूकता के उत्सव में बदला है। एक ही वर्ष में लाखों लोगों की सहभागिता इस बात का प्रखर प्रमाण है कि समाज इस स्‍वास्‍थ्‍य के आन्‍दोलन और विचार से जुड़ रहा है।

    आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय कहते हैं, “आरोग्य भारती स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक सेवा संगठन है । जिसके माध्‍यम से देश में अनेक सेवा कार्य नित्‍यप्रति सम्‍पन्‍न हो रहे हैं। उनमें मध्य प्रदेश में भी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आज संगठन कई प्रकल्प चला रहा है। यह कार्य निरंतर ठीक ढंग से चलता रहे इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्य किया जा रहा है। आरोग्य भारती का प्रयास है कि मध्य प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक वनस्पति संपदाओं का उपयोग करते हुए रोगी तो स्वस्थ हो ही साथ में स्वस्थ व्यक्ति भी रोगी न बने।”

    उन्‍होंने आगे बताया, “हमारा प्रयास रहता है कि वनवासी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को प्रशिक्षित कर आरोग्य मित्र बना सकें । ताकि उनके माध्‍यम से लोगों की जीवन शैली में सुधार कर अधिकाधिक लोगों को स्वस्थ रख पाएं। साथ ही सर्व समावेशी चिकित्सा पद्धति का विकास हो, जिससे कि चिकित्सा पद्धति आधारित चिकित्सा न होकर रोगी आधारित चिकित्सा हो और रोगी जल्दी स्वस्थ हो सके, यह हमारी प्राथमिकता के साथ भविष्य का दृष्टिकोण है।”

    उधर, इस संबंध में आरोग्‍य भारती के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख मिहिर कुमार कहते हैं कि “माई हेल्थ माई रिपॉन्सबिलिटी” की भावना जब समाज में जड़ पकड़ लेगी, तब स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण संभव होगा। इसी सोच को लेकर आरोग्‍य भारती का गठन हुआ और अपने गठन से लेकर आज तक संगठन इसी उद्देश्‍य को लेकर प्रमुखता से चल रहा है, हमारे संगठन का कुल लक्ष्य यही है कि कोई भी चिकित्सा, पद्धति आधारित नहीं होनी चाहिए वह रोगी आधारित चिकित्सा विकसित होनी चाहिए, वास्‍तव में हम इसी लक्ष्‍य को लेकर आज आगे बढ़ रहे हैं।

  • अगर हम बोलने लगेंगे तो…' अजित पवार के हफ्ताखोरी वाले आरोप पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार

    अगर हम बोलने लगेंगे तो…' अजित पवार के हफ्ताखोरी वाले आरोप पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में जैसे जैसे नगर निगम चुनाव सामने आ रहे हैं वैसे-वैसे राजनीतिक गठबंधन की जड़ें हिलती दिख रही है. ताजा बयान बाजी महायुति में शामिल एनसीपी की ओर से आया है. कोई और नहीं बल्कि खुद NCP अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने बीजेपी पर ही आरोप लगा दिए हैं.

    एनसीपी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने पुणे के पिंपरी चिंचवड़ इलाके में बीजेपी पर करप्शन और हफ्ताखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार ने कहा बीजेपी ने पिंपरी चिंचवड़ इलाके में जम कर पैसे लूटे. उन्होंने कहा कि बीजेपी हफ्ताखोरी करती है मेरे पास सबूत है. मुझ पर भी 70000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया गया था और जिन्होंने आरोप लगाया मैं उन्हीं के साथ बैठा हूं. क्या वे सब आज मेरे साथ हैं या नहीं? मुझे बताओ…

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण की कड़ी प्रतिक्रिया
    अजीत पवार के आरोपों पर बीजेपी ने तुरंत पलटवार किया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण ने कहा कि अगर बीजेपी बोलने लगी तो अजीत पवार मुश्किल में पड़ जाएंगे. उन्होंने कहा कि अजीत पवार को पहले अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए. रविन्द्र चव्हाण ने आरोपों को चुनावी समय में दिया गया बयान बताया और इसे पूरी तरह अनुचित करार दिया.

    संबंधित एजेंसियों के पास जाना चाहिए था- रविन्द्र चव्हाण
    रविन्द्र चव्हाण ने कहा कि अजित पवार जैसा अनुभवी नेता अगर गंभीर आरोप लगाता है तो उसे मीडिया में बयानबाजी करने के बजाय संबंधित एजेंसियों के पास जाना चाहिए था. आईएएनएस के अनुसार उन्होंने कहा कि यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पार्टी पर है. चव्हाण ने चेतावनी दी कि आरोप प्रत्यारोप की मर्यादा तय होनी चाहिए क्योंकि पलटवार हुआ तो अजीत पवार को ही ज्यादा परेशानी होगी.

  • धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ ने दूसरे दिन 10 करोड़ क्लब में बनाई जगह, ‘धुरंधर’ अभी भी आगे

    धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ ने दूसरे दिन 10 करोड़ क्लब में बनाई जगह, ‘धुरंधर’ अभी भी आगे

    नई दिल्ली। नए साल के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। धर्मेंद्र और अगस्त्य नंदा की फिल्म ‘इक्कीस’ ने देशभक्ति और भावनात्मक कहानी के दम पर दर्शकों का दिल जीतते हुए दूसरे दिन 10 करोड़ रुपये के क्लब में अपनी जगह बनाई। फिल्म ने सीमित स्क्रीन और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद अच्छा कारोबार किया, लेकिन ‘धुरंधर’ अपनी लगातार सफल प्रदर्शन के कारण कुल कमाई में अभी भी आगे बना हुआ है। दर्शक फिल्म को सिर्फ कमाई के लिहाज से नहीं, बल्कि इसके भावनात्मक असर और कहानी के कारण भी पसंद कर रहे हैं।

    बॉक्स ऑफिस पर ‘इक्कीस’ की कमाई

    Sacnilk की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, धर्मेंद्र और अगस्त्य नंदा की फिल्म ने दूसरे दिन 3.50 करोड़ रुपये की कमाई की। पहले दिन 7 करोड़ की कमाई के बाद यह थोड़ा धीमा हुआ, लेकिन दो दिनों का कुल कलेक्शन अब 10.50 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि दूसरे दिन की कमाई में गिरावट सामान्य है, क्योंकि फिल्म को सीमित शो और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई दर्शक विशेष रूप से धर्मेंद्र को देखने थिएटर आए, ताकि उनके आखिरी प्रदर्शनों की झलक देख सकें।

    धर्मेंद्र की मौजूदगी ने दिल जीता

    1 जनवरी 2026 को रिलीज हुई ‘इक्कीस’ धर्मेंद्र की आखिरी बड़े पर्दे की फिल्म है। उनके अभिनय ने फिल्म में भावनात्मक गहराई भर दी और यह सिनेमा प्रेमियों के लिए खास अनुभव बन गई। फिल्म के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी ‘धुरंधर’ से प्रतिस्पर्धा, जो पहले ही थिएट्रिकल रन में सफल रही थी। स्थिति और भी कठिन हो गई, जब ‘धुरंधर’ को ‘इक्कीस’ के रिलीज से सिर्फ एक दिन पहले संशोधित संस्करण में फिर से रिलीज किया गया। बावजूद इसके, धर्मेंद्र की मौजूदगी ने दर्शकों को थिएटर तक खींचा।

    ‘धुरंधर’ का दबदबा बरकरार

    जहां ‘इक्कीस’ ने भावनात्मक और सीमित कमाई के साथ बॉक्स ऑफिस पर कदम रखा, वहीं आदित्य धर निर्देशित ‘धुरंधर’ ने अपने असाधारण प्रदर्शन को जारी रखा। नए साल के दिन यानी अपने 28वें दिन, फिल्म ने लगभग 15.75 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की। ट्रेड एनालिस्ट्स के अनुसार, यह प्रदर्शन ऐतिहासिक है क्योंकि बहुत कम फिल्में अपने लंबे थिएट्रिकल रन के दौरान इतनी देर तक दोहरे अंकों में कमाई कर पाती हैं। फिल्म का री-रिलीज वर्जन बॉक्स ऑफिस पर इसकी पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    ‘इक्कीस’ की कहानी

    ‘इक्कीस’ फिल्म भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता, सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची कहानी पर आधारित है। धर्मेंद्र फिल्म में अरुण के पिता, एम.एल. खेत्रपाल का किरदार निभा रहे हैं, जो भावनात्मक गहराई जोड़ता है। यह फिल्म अगस्त्य नंदा के लिए बड़े पर्दे पर डेब्यू भी है और इसे श्रीराम राघवन ने निर्देशित किया है।

    कहानी अरुण की मिलिट्री ट्रेनिंग के शुरुआती दिनों से लेकर युद्ध के मैदान तक के साहसिक सफर को दिखाती है। इसमें उनकी 21 साल की उम्र में दिखाई गई हिम्मत, देशभक्ति और अंतिम बलिदान को प्रमुखता दी गई है। फिल्म में जयदीप अहलावत, सिमर भाटिया और सिकंदर खेर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

  • NEET Aspirant की मौत से हड़कंप, सब्जी खाने के बाद दिमाग में हुई गंभीर बीमारी

    NEET Aspirant की मौत से हड़कंप, सब्जी खाने के बाद दिमाग में हुई गंभीर बीमारी

    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद मामला सामने आया है, जिसने असंतुलित और असाफ-सुथरे खाने के गंभीर स्वास्थ्य खतरों को उजागर कर दिया है। नीट की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा इलमा की दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, पत्ता गोभी के जरिए शरीर में पहुंचा परजीवी (कीड़ा) दिमाग तक पहुँच गया, जिससे वहां करीब 25 गांठें बन गईं।

    इलमा कौन थीं?

    मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के गांव चुचैला कलां निवासी किसान नदीम अहमद की बड़ी बेटी इलमा एक प्राइवेट स्कूल में इंटरमीडियेट की छात्रा थी। साथ ही वह नीट की तैयारी भी कर रही थी। परिवार के अनुसार, इलमा पढ़ाई में होशियार थी और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी। उसकी पढ़ाई और स्वास्थ्य के प्रति परिजनों की चिंता इसे और भी दर्दनाक बनाती है।

    कैसे बिगड़ी तबीयत?

    परिजनों ने बताया कि करीब एक महीने पहले इलमा को टाइफाइड हुआ था। इसके बाद उसकी सेहत लगातार गिरती चली गई। पहले उसे नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सीटी स्कैन और एमआरआई रिपोर्ट में दिमाग में 7-8 गांठें सामने आईं। इलाज के बाद कुछ समय के लिए उसकी हालत में सुधार हुआ, लेकिन फिर अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। दोबारा जांच कराने पर डॉक्टर भी हैरान रह गए, क्योंकि अब दिमाग में गांठों की संख्या बढ़कर 25 हो गई थी।

    दिल्ली में भी नहीं बच सकी जान

    हालत गंभीर होने पर 22 दिसंबर को परिवार इलमा को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने दिमाग का ऑपरेशन किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 29 दिसंबर को इलाज के दौरान इलमा की मौत हो गई। पिता के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि पत्ता गोभी के जरिए शरीर में गया परजीवी दिमाग तक पहुंच गया, जिसने गांठों का रूप ले लिया और जानलेवा साबित हुआ।

    यह पहला मामला नहीं

    इससे ठीक एक सप्ताह पहले, अमरोहा के अफगानान मोहल्ले में 11वीं कक्षा की छात्रा अहाना की भी दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बताया कि लगातार फास्ट फूड और असंतुलित भोजन की वजह से उसका पाचन तंत्र पूरी तरह खराब हो गया था। ऑपरेशन के बाद भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    विशेषज्ञों की चेतावनी

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि असंतुलित आहार, बिना धोई गई सब्जियां और फास्ट फूड की आदतें बच्चों और युवाओं के लिए जानलेवा हो सकती हैं। ऐसे संक्रमण और परजीवी तेजी से शरीर में फैल सकते हैं और दिमाग जैसी संवेदनशील जगह तक पहुँचकर गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। लगातार सामने आ रहे ये मामले यह साफ संकेत दे रहे हैं कि खाने-पीने में साफ-सफाई और संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

  • प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर हमला: अब आयोग को BJP ऑफिस से काम करना चाहिए

    प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर हमला: अब आयोग को BJP ऑफिस से काम करना चाहिए



    नई दिल्ली।
    महाराष्ट्र नगर निगम और निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चरम पर है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रियंका ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के दौरान खुलेआम धांधली हो रही है, लेकिन राज्य चुनाव आयोग जानबूझकर आंखें मूंदकर बैठा है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में चुनाव चोरी हो रहा है।

    राज्य चुनाव आयोग अंधा बन चुका है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को बंद कर देना चाहिए और अब उसे बीजेपी ऑफिस से ही काम करना चाहिए।”

    प्रियंका ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर चुनाव के दौरान खुलेआम धमकियां दे रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। उनके अनुसार, इस वजह से आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।

    इंदौर दूषित पानी मामले पर भी सरकार को घेरा
    प्रियंका चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश सरकार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को देश को शर्मसार करने वाली घटना बताया और कहा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इससे पहले मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई मौतों के मामले को दबाने की कोशिश की गई थी, और अब इंदौर की घटना में भी सरकार जवाबदेही से बच रही है।

    प्रियंका के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। उनके आरोप-प्रत्यारोप ने चुनाव आयोग और राज्य सरकारों की निष्पक्षता पर बहस को तेज कर दिया है।

  • Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    नई दिल्ली। पिछले साल चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड उछाल देखा था। तेजी के चलते चांदी की कीमत प्रति किलो 2.54 लाख रुपये तक पहुँच गई थी। हालांकि, अब घरेलू बाजार में यह गिरकर 2.35 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है। 2025 में चांदी की कीमत में लगभग 180% की बढ़ोतरी हुई थी, जिसका मुख्य कारण बढ़ती डिमांड और सप्लाई में कमी थी। लेकिन अब मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि FY27 के अंत तक चांदी की कीमत में 60% तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।

    तेजी के पीछे की वजहें

    चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई कारण थे। सबसे पहले, सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलाव की घोषणा ने इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ा दी। इसके अलावा, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव के कारण पेरू और चाड से सप्लाई प्रभावित हुई। साथ ही, 1 जनवरी 2026 से चीन द्वारा चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन ने भी कीमतें बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। ये सभी कारक मिलकर चांदी को बाजार में महँगी बनाने का काम कर रहे थे।

    एक्सपर्ट्स क्यों जताते हैं गिरावट की आशंका?

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें अब खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं। इंडस्ट्रियल डिमांड पर कीमतों की बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ सकता है। फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल इंडस्ट्री पहले ही चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल बढ़ा रही है। वहीं बैटरी सेक्टर में भी चांदी से कॉपर बाइंडिंग तकनीक अपनाने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में चांदी की मांग घटने की संभावना है और FY27 के अंत तक कीमतों में 60% तक की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है।

    इतिहास खुद को दोहरा सकता है

    चांदी के इतिहास पर नजर डालें तो अक्सर बुल मार्केट के बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता बताते हैं कि 1980 में हंट ब्रदर्स ने दुनिया के लगभग एक-तिहाई सिल्वर रिजर्व जमा कर लिए थे। इसके बाद एक्सचेंजों ने मार्जिन मनी बढ़ा दी, जिससे सिल्वर की कीमत $49.50 से गिरकर $11 प्रति औंस हो गई। इसी तरह 2011 में भी चांदी $48 प्रति औंस पर पहुंचने के बाद लगभग 75% गिर गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतिहास एक बार फिर दोहरा सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

    निवेशकों के लिए संदेश

    चांदी में हाल की तेजी निवेशकों के लिए अवसर और जोखिम दोनों लेकर आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्री की मांग घटने और विकल्पों के इस्तेमाल के चलते चांदी की कीमतें तेजी से घट सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ भावनाओं के आधार पर निवेश करने की बजाय सावधानीपूर्वक योजना और मार्केट ट्रेंड्स की निगरानी करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, पिछले साल की रिकॉर्ड तेजी के बावजूद चांदी के बाजार में मंदी की संभावना बढ़ गई है। FY27 तक 60% तक गिरावट की चेतावनी निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।