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  • ग्राहकों को झटके पर झटके दे रहे बैंक…. सेवाओं पर बढ़ेगा शुल्क….कई सुविधाएं होंगी बंद

    ग्राहकों को झटके पर झटके दे रहे बैंक…. सेवाओं पर बढ़ेगा शुल्क….कई सुविधाएं होंगी बंद


    नई दिल्ली।
    बैंक (Banks) से जुड़ी सेवाओं का शुल्क (Service fees) लगातार बढ़ाया जा रहा है या फिर नए सिरे से शुल्क लगाए जा रहा है। इस वर्ष बैंकों ने एटीएम (ATM) से निकासी, क्रेडिट कार्ड (Credit card), चेक बुक जारी कराने से लेकर अन्य सेवाओं पर अपने शुल्क में बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही, कई तरह के सेवाओं को बंद कर दिया है या फिर सीमित किया गया है। अब आने वाले साल में भी कई बैंक व वॉलेट ऐप अपनी सेवाओं को सीमित करने और शुल्क बढ़ाने जा रहे हैं।

    आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) आने वाले वर्ष में अपनी कई सेवाओं को महंगा करने जा रहा है। 15 जनवरी 2026 से क्रेडिट कार्ड के जरिए गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले ट्रांजैक्शन पर दो फीसदी शुल्क लगेगाा। इसी तरह से अमेजॉन, पेटीएम, मोबिक्विक जैसे थर्ड पार्टी वॉलेट ऐप में पांच हजार से अधिक की धनराशि भेजने पर एक प्रतिशत शुल्क देना होगा।

    अगर बैंक शाखा में जाकर कैश में क्रेडिट कार्ड का बिल जमा करते हैं तो 150 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जो अभी तक 100 रुपये था। बैंक द्वारा इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर बुकमाईशो के जरिए दिए जाने वाले फिल्म के मुफ्त लाभ एक फरवरी 2026 से बंद कर दिए जाएंगे। साथ ही, अन्य श्रेणी के कार्ड पर फिल्म ऑफर का लाभ उठाने के लिए खर्च की शर्त निर्धारित की गई है। मुफ्त फिल्म का लाभ उठाने के लिए कम से कम 25 हजार रुपये पिछली तिमाही में खर्च करने होंगे।

    रूबिक्स और सैफिरो जैसे क्रेडिट कार्ड पर हर महीने 20 हजार रुपये खर्च करने पर ही रिवॉर्ड पांइंट्स मिलेंगे। जबकि प्लेटिनम और कोरल श्रेणी के कार्ड पर ट्रांसपोर्ट खर्च की सीमा 10 हजार रुपये प्रति महीने तय की गई है।


    एयरटेल वॉलेट पर लगाएगा वार्षिक शुल्क

    एयरटेल पेमेंट बैंक ने एक जनवरी से वॉलेट पर 75 रुपये प्रति वर्ष (जीएसटी को छोड़कर) का वार्षिक रखरखाव शुल्क (एएमसी) लगाने का फैसला लिया है। एयरटेल की तरफ से कहा गया है कि यदि शुल्क लगाते समय पर्याप्त शेष राशि उपलब्ध नहीं है, तो उपलब्ध शेष राशि डेबिट कर दी जाएगी। ऐसे में शेष राशि अगली बार धनराशि जमा होने पर स्वतः कट कर ली जाएगी।


    पहले मुफ्त सेवा, फिर लगाते गए शुल्क

    मोबाइल पर डिजिटल मोड में पैसे रखने के लिए भारत में सबसे पहले वर्ष 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट आया लेकिन वॉलेट के क्षेत्र में असली बदलाव वर्ष 2010 से शुरू हुआ जब पेटीएम की शुरुआत हुई। इसके बाद तमाम कंपनियां वॉलेट ऐप के जरिए डिजिटल लेनदेन की सुविधा प्रदान करने के लिए मैदान में आई। शुरुआत में अधिकांश कंपनियों ने अपनी सेवा का मुफ्त रखा, लेकिन अब फरवरी 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क लगाने की शुरुआत की। इसी तरह से अन्य वॉलेट कंपनियों ने केवीईसी के लिए 15 रुपये शुल्क साथ में जीएसटी लगाने का फैसला लिया।


    केवाईसी न कराने पर जुर्माना

    इसके साथ ही, केवाईसी न कराने वाले ग्राहकों पर पांच रुपये प्रति तिमाही का जुर्माना भी लगाना शुरू किया। इसी तरह से अब क्रेडिट व डेबिट कार्ड के जरिए वॉलेट में पैसा डाले पर 1.5 प्रतिशत सर्विस चार्ज लगाया जाता है। हालांकि कई वॉलेट ऐप ने अभी तक कई चार्ज नहीं लगाए हैं।


    सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का एक ही लोगो होगा

    राज्य स्तर पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के एकीकरण के बाद सरकार ने अब उनके लिए नया लोगो जारी किया गया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के साथ मिलकर जारी किया गया है। यह देश में काम कर रहे सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एकीकृत ब्रांड पहचान स्थापित करेगा। इस लोगो में एक लौ है जो तीन स्तरों से मिलकर बनी है।

  • महाकाल मंदिर विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला तकिया मस्जिद की याचिका खारिज

    उज्जैन । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार महाकाल लोक फेज-2के लिए तकिया मस्जिद की भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मोहम्मद तैय्यब भूमि का मालिक नहीं है बल्कि केवल उपासक भक्तहै इसलिए उसे भूमि अधिग्रहण पर सवाल उठाने का कानूनी अधिकार नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

    याचिका में यह दावा किया गया था कि 1985 से यह भूमि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और अधिग्रहण के समय उचित मुआवजा पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि महाकाल मंदिर के विस्तार के लिए भूमि का अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य के अंतर्गत नहीं आता और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 25 26 और 300-A का उल्लंघन होता है।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में पहले से वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध थे और याचिकाकर्ता केवल मुआवजे की आपत्ति ही उठा सकता था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भूमि अधिग्रहण की वैधता पर विचार नहीं करेगा क्योंकि याचिकाकर्ता भूमि का मालिक नहीं है।

    इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी महाकाल लोक फेज-2 परियोजना से जुड़ी मुआवजे को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता न तो भू-स्वामी हैं और न ही टाइटल होल्डर इसलिए वे केवल मुआवजे के संदर्भ में सवाल उठा सकते हैं। इस फैसले से महाकाल लोक फेज-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को कानूनी मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार और सार्वजनिक स्थलों के पुनर्विकास का हिस्सा है जिसे बड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वता प्राप्त है।

  • पाकिस्तान को बड़ा झटका… सऊदी अरब ने 50 हजार से ज्यादा भिखारियों को किया डिपोर्ट

    पाकिस्तान को बड़ा झटका… सऊदी अरब ने 50 हजार से ज्यादा भिखारियों को किया डिपोर्ट


    दुबई।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) और संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates- UAE) पाकिस्तानी नागरिकों (Pakistani citizens) पर कड़ी नजर रखे हुए है। उसने पाकिस्तान को उसकी सही जगह दिखाते हुए 50 हजार से ज्यादा भिखारियों (More than 50,000 beggars) को अपने देश से वापस भगा दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रेंड पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। सऊदी अरब ने लगभग 56,000 पाकिस्तानी भिखारियों को डिपोर्ट कर दिया है, जबकि UAE ने वीजा नियमों को और सख्त कर दिया है। पिछले महीने ही, UAE ने ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा देना बंद कर दिया था, क्योंकि उसे इस बात की चिंता थी कि लोग खाड़ी देश में जाकर क्रिमिनल एक्टिविटीज और भीख मांगने में शामिल हो रहे हैं।

    पाकिस्तान के अधिकारियों ने इस साल 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को विदेश यात्रा करने से रोक दिया, क्योंकि देश ने मानव तस्करी पर रोक लगाने और संभावित भिखारियों को रोकने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह जानकारी आगा रफीउल्लाह की अध्यक्षता में नेशनल असेंबली की ओवरसीज पाकिस्तानी और मानवाधिकार मामलों की स्थायी समिति की बैठक के दौरान साझा की गई।

    फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के डायरेक्टर जनरल, रिफत मुख्तार रजा ने संसदीय पैनल को ब्रीफिंग देते हुए लागू किए गए उपायों का विवरण दिया। उन्होंने कहा, “इस साल अकेले विभिन्न हवाई अड्डों पर कम से कम 51,000 पाकिस्तानियों को उतारा गया।” उन्होंने कहा कि यात्रा करने से रोके गए कई लोग यूरोप और सऊदी अरब जाने की कोशिश कर रहे थे। किंगडम जाने वाले लोग उमराह करने का बहाना बना रहे थे, जबकि यूरोपीय देशों में जाने वालों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं थे।

    UAE ने भी इसी आधार पर 6,000 पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया, जबकि अजरबैजान ने लगभग 2,500 भिखारियों को देश से निकाल दिया। समिति को उन पाकिस्तानियों के बारे में भी बताया गया जो अलग-अलग देशों में गए लेकिन कभी वापस नहीं लौटे। रजा ने कहा कि इस साल 24,000 पाकिस्तानी कंबोडिया गए, जिनमें से 12,000 अभी तक वापस नहीं आए हैं, जबकि 4,000 टूरिस्ट वीज़ा पर म्यांमार गए और लगभग 2,500 वापस नहीं आए।

    FIA प्रमुख ने कहा कि सख्त नियंत्रण से पाकिस्तान की पासपोर्ट रैंकिंग 118 से 92 हो गई है, यह देखते हुए कि पाकिस्तान पहले अवैध प्रवासन के लिए शीर्ष पांच देशों में से था, लेकिन अब संशोधित नीतियों के कारण उस सूची से बाहर हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि यूरोप में अवैध प्रवासन में कमी आई है, पिछले साल 8,000 पाकिस्तानियों ने अवैध रूप से यात्रा की थी, जबकि इस साल यह संख्या 4,000 थी। FIA DG ने समिति को यह भी बताया कि दुबई और जर्मनी ने आधिकारिक पासपोर्ट के लिए वीज़ा-फ्री कर दिया है, जबकि जनवरी के मध्य तक एक ई-इमिग्रेशन एप्लिकेशन लॉन्च किया जाएगा।

  • Aus vs Eng: आर्चर ने झटके 5 विकेट, फिर भी मजबूत स्थिति में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड पर कसा शिकंजा

    Aus vs Eng: आर्चर ने झटके 5 विकेट, फिर भी मजबूत स्थिति में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड पर कसा शिकंजा


    एडिलेड ।
    ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड (Australia vs England) के बीच एडिलेड में जारी तीसरे एशेज टेस्ट मैच (Third Ashes Test Match) पर मेजबान ऑस्ट्रेलिया का शिकंजा कस गया है। भले ही इंग्लैंड के लिए तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर (Fast bowler Jofra Archer) ने फाइव विकेट हॉल प्राप्त किया हो, लेकिन जिस तरह का खेल ऑस्ट्रेलिया (Australia) ने पहले दो मैचों में दिखाया था, उसी खेल को कंगारू टीम आगे भी जारी रखे हुए है। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 371 रनों का स्कोर बना दिया, जबकि शुरुआत टीम की अच्छी नहीं थी। उधर, इंग्लैंड को अपनी पहली पारी में शुरुआत अच्छी नहीं मिली। इस तरह कहा जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच पर भी अपनी पकड़ बना ली है।

    इस मुकाबले की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया की टीम के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी थी। हालांकि, शुरुआत अच्छी नहीं रही थी, लेकिन एलेक्स कैरी ने 106 रनों की पारी खेलकर ऑस्ट्रेलिया की वापसी करा दी। कैरी के अलावा उस्मान ख्वाजा ने भी दमदार 82 रन बनाए, जो स्टीव स्मिथ की जगह खेल रहे थे। स्मिथ मैच से ठीक पहले अनफिट पाए गए थे। ऐसे में ख्वाजा को खेलने का मौका मिला। मिचेल स्टार्क ने भी 54 रनों की पारी खेली, जिससे इंग्लैंड की टीम बैकफुट पर चली गई। 32 रन जोश इंग्लिस ने भी बनाए।

    उधर, इंग्लैंड के लिए मैच के दूसरे दिन की सुबह जोफ्रा आर्चर ने फाइव विकेट हॉल प्राप्त किया। वहीं, 2-2 विकेट ब्रायडन कार्स और विल जैक्स को मिले। ऑस्ट्रेलिया को 371 पर आउट करने के बाद इंग्लैंड ने बल्लेबाजी शुरू की। ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड की टीम पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाएगी, लेकिन जैसे ही 37 रन पर पहला विकेट गिरा तो अगले 5 रनों के भीतर दो और विकेट गिर गए। इस तरह इंग्लैंड की टीम पर एशेज सीरीज को गंवाने का खतरा मंडरा रहा है।


    सीरीज हार का खतरा

    इंग्लैंड की टीम पहले ही दो मैच हार चुकी है और अब अगर एडिलेड में जारी इस मैच को भी हार जाती है तो फिर सीरीज 3-0 से गंवा देगी। सीरीज के दो मुकाबले बाकी रहेंगे, लेकिन उन मैचों के नतीजों का असर सीरीज की हार-जीत पर नहीं पड़ेगा। जरूर स्कोरलाइन में बदलाव हो सकता है, लेकिन एशेज ट्रॉफी मेजबान ऑस्ट्रेलिया के पास ही रहेगी। ऐसे में इसी मैच में इंग्लैंड को दमदार वापसी करते हुए मैच जीतने के बारे में सोचना होगा।

  • Russia-Ukraine War: दोनों देशों ने खोए हजारों सैनिक और नागरिक, अरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट

    Russia-Ukraine War: दोनों देशों ने खोए हजारों सैनिक और नागरिक, अरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग (Russia Ukraine War) के कुछ ही हफ्तों में 4 साल पूरे हो जाएंगे। इन सालों में दोनों देशों ने अपने हजारों सैनिकों और नागरिकों को खो दिया है। वहीं अरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट (Billions dollars worth Infrastructure destroyed) हो चुके हैं। अब इस युद्ध को लेकर विशेषज्ञों ने रूस को आगाह किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक रूस को यूक्रेन पर हमले की भारी आर्थिक कीमत चुकानी होगी। यह भी कहा गया है कि भले ही युद्ध आज ही खत्म क्यों न हो जाए, रूस को इससे उबरने में कई साल लग जाएंगे।

    विश्लेषकों ने कहा है कि बढ़ते सैन्य खर्च और घटती आमदनी की वजह से पुतिन की सरकार की कर्ज पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। बुधवार को रूसी सरकार ने करीब बॉन्ड बेचकर करीब 108.9 अरब रूबल का कर्ज लिया। इसके साथ ही 2025 में अब तक कुल कर्ज जारी करने का आंकड़ा 7.9 ट्रिलियन रूबल पहुंच गया है।


    रूस के पास नहीं बचे विकल्प

    वहीं कर्ज लेने के रूस के पास बॉन्ड बेचने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। देश का रेनिडे रिजर्व यानी आपातकालीन बचत का आधे से ज्यादा हिस्सा खत्म हो चुका है। वहीं बजट घाटा भी बढ़ गया है। इसकी बड़ी वजह सैन्य खर्च में 30 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद तेल और गैस जैसी कमोडिटी से होने वाली कमाई में भी गिरावट आई है।

    आने वाले सालों में रूस के सामने कई मुसीबतें हैं। तेल की कीमतें बढ़ने, रूबल के मजबूत होने, आर्थिक ग्रोथ अनुमान से कम रहने और सैन्य खर्च बढ़ने की वजह से रूस की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं और तेल-गैस से कमाई घटी, तो रूस के सामने तीन ही रास्ते होंगे। या तो टैक्स बढ़ाए जाएं, या दूसरे जरूरी खर्चों में कटौती हो, या फिर और ज्यादा कर्ज लिया जाए।

  • ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त

    ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त


    नई दिल्ली।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने पंजाब (Punjab) में PACL से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय एजेंसी ने गुरुवार को PACL और अन्य के मामले में चल रही जांच के सिलसिले में पंजाब के लुधियाना (Ludhiana, Punjab) में स्थित 3436.56 करोड़ रुपये की 169 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। ईडी ने कहा कि उसकी जांच में पता चला है कि “लाखों निवेशकों से जुटाए गए फंड का एक हिस्सा PACL के नाम पर इन 169 अचल संपत्तियों को खरीदने में इस्तेमाल किया गया था, जिनकी मौजूदा कीमत 3436.56 करोड़ रुपये है।”

    प्रवर्तन निदेशालय के दिल्ली जोनल ऑफिस ने इन संपत्तियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जब्त किया है। यह कार्रवाई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा PACL लिमिटेड, PGF लिमिटेड, दिवंगत निर्मल सिंह भंगू और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 120-B और 420 के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर की गई जांच के बाद की गई है।


    क्या है पूरा मामला?

    बता दें कि यह मामला PACL द्वारा बड़े पैमाने पर चलाई गई धोखाधड़ी वाली पोंजी स्कीम और सामूहिक निवेश योजनाओं से संबंधित है। इन योजनाओं के जरिए PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों ने धोखे से भोले-भाले निवेशकों से लगभग 48,000 करोड़ रुपये जुटाए और उसका गबन कर लिया। ईडी ने इस मामले में अब तक 5,602 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिसमें देश बार में स्थित पर्ल ग्रुप की घरेलू संपत्तियां और विदेशी संपत्तियां दोनों शामिल हैं। इसके अलावा, इस मामले में अब तक एक अभियोजन शिकायत और दो पूरक अभियोजन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं।

  • MP में खून की दलाली का पर्दाफाश एसडीएम ने फिल्मी अंदाज में पुलिस के साथ किया स्टिंग ऑपरेशन 3 दलाल रंगे हाथ पकड़े गए

    MP में खून की दलाली का पर्दाफाश एसडीएम ने फिल्मी अंदाज में पुलिस के साथ किया स्टिंग ऑपरेशन 3 दलाल रंगे हाथ पकड़े गए


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना में खून की दलाली का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां अस्पताल के बाहर खून बेचने वाले दलालों का एक बड़ा नेटवर्क चल रहा था। प्रशासन ने इस अवैध धंधे का पर्दाफाश करने के लिए एक फिल्मी अंदाज में स्टिंग ऑपरेशन किया और तीन दलालों को रंगे हाथ पकड़ लिया।

    सतना जिला अस्पताल के बाहर खून के सौदागरों का यह नेटवर्क सक्रिय था जो मरीजों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें 5000 रुपये में खून बेच रहे थे। गुरुवार को एसडीएम राहुल सिलाड़िया और कोतवाली टीआई रावेंद्र द्विवेदी ने इस काले कारोबार को उजागर करने के लिए सुनियोजित तरीके से स्टिंग ऑपरेशन किया।

    एसडीएम ने इस ऑपरेशन के लिए 500 200 और 100 के नोटों से 4500 रुपये की गड्डी तैयार की और उनके सीरियल नंबर पहले से दर्ज कर लिए। फिर एक व्यक्ति को नकली ग्राहक बनाकर दलालों के पास भेजा गया। जैसे ही ग्राहक ने दलाल को पैसे दिए और दलाल ने कहा कि डोनर आ रहा है पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई की और दलालों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान वही चिन्हित नोट बरामद हुए जिन्हें पहले से नोट किया गया था जिससे उनके खून की दलाली में शामिल होने की पुष्टि हो गई।

    जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के सामने स्थित चाय की दुकानों और फल के ठेले पर ये दलाल अक्सर बैठे रहते थे। वे मरीजों के परेशान परिजनों से संपर्क करते थे और उन्हें खून दिलाने के नाम पर मोटी रकम लेते थे। पुलिस ने इस ऑपरेशन में तीन दलालों रजनीश साहू करसरामोहम्मद कैफ कामता टोलाऔर अनिल गुप्ता टिकुरिया टोला को गिरफ्तार किया।

    एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने इस कार्रवाई के बारे में बताया कि उन्हें ब्लड की दलाली की सूचना मिली थी और उसी आधार पर उन्होंने योजना बनाई। जब एक दलाल ने 4500 रुपये में खून उपलब्ध कराने का वादा किया तो पुलिस ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया और उसके पास से वही नोट बरामद किए गए जो पहले चिन्हित किए गए थे।

    इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि इस रैकेट के चलने में अस्पताल के भीतर से भी मदद मिल रही हो सकती है। अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़ा कोई कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है और पुलिस इस संभावना पर भी गहन जांच कर रही है।यह कार्रवाई एक सख्त संदेश देती है कि प्रशासन अब ऐसे अवैध कारोबारों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी कार्रवाई करेगा।

  • एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग छापा… इस मामले में दी दबिश

    एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग छापा… इस मामले में दी दबिश


    मुम्बई।
    बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी (Bollywood actress Shilpa Shetty) के मुंबई वाले घर पर इनकम टैक्स अधिकारियों (Income Tax Officials) ने रेड (Raid) मारी है। ये मामला उनकी बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी कंपनी (Bastian Hospitality Company) से जुड़ा है। वह इस कंपनी की को-ओनर हैं। इस कंपनी के मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और गोवा में ‘बेस्टियन’ नाम से क्लब्स और रेस्टोरेंट्स हैं। आयकर विभाग को संदेह है कि होटल व्यवसाय में निवेश, आय और टैक्स भुगतान को लेकर गड़बड़ियां। ऐसे में वह बैस्टियन रेस्टोरेंट (Bastian) से संबंधित वित्तीय लेन-देन और कथित टैक्स अनियमितताओं की जांच कर रहे हैं।


    इन जगहों पर मारे छापे

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयकर विभाग, कंपनी के आउटलेट और इसके प्रमोटरों के घर पर रेड मार रही है। ये छापेमारी बुधवार को शुरू हुई थी और अब जांच शिल्पा शेट्टी के घर तक पहुंच गई है।


    शिल्पा शेट्टी के साथ ये हैं को-ओनर

    बस्टियन पब की शुरुआत बिजनेसमैन रंजीत बिंद्रा की कंपनी बस्टियन हॉस्पिटैलिटी ने की थी। शिल्पा शेट्टी ने साल 2019 में इस वेंचर में 50% की हिस्सेदारी खरीदी और इसकी को-ओनर बन गईं।


    आरोपों पर शिल्पा का बयान

    शिल्पा शेट्टी ने आयकर विभाग की रेड से पहले इन आरोपों से इनकार किया था और इन्हें बेबुनियाद था। उन्होंने कहा था, “जांच में पूरा सहयोग करने के बाद, हमें पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा और हमें अपने देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। हम मीडिया से सम्मानपूर्वक आग्रह करते हैं कि इस मामले में संयम बरतें क्योंकि मामला अभी कोर्ट में है।”

  • MP: सतना में हो रहा था खून का काला कारोबार, SDM ने फिल्मी अंदाज में स्टिंग कर 3 को दबोचा

    MP: सतना में हो रहा था खून का काला कारोबार, SDM ने फिल्मी अंदाज में स्टिंग कर 3 को दबोचा


    सतना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिला अस्पताल (Satna District Hospital) की साख तार-तार हो चुकी है। एक तरफ अस्पताल के भीतर दिल्ली और भोपाल की टीमें थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों (Thalassemia Children) को HIV संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले की फाइलें खंगाल रही हैं, तो दूसरी तरफ अस्पताल के गेट पर ही खून के सौदागर इंसानी मजबूरी का फायदा उठाकर 5000 रुपए में खून बेच रहे हैं। गुरुवार को प्रशासन ने इस ‘काले खेल’ का पर्दाफाश करने के लिए बिल्कुल फिल्मी अंदाज में जाल बिछाया। एसडीएम सिटी राहुल सिलाड़िया (SDM City Rahul Siladia) और कोतवाली टीआई रावेंद्र द्विवेदी (TI Ravindra Dwivedi) ने एक सुनियोजित स्टिंग ऑपरेशन कर खून की दलाली करने वाले 3 लोगों को रंगे हाथों दबोच लिया।


    नोटों के नंबर नोट किए, वीडियो बनाया और भेजा ‘नकली ग्राहक’

    दलालों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एसडीएम ने पुख्ता सबूत तैयार किए थे। इसके लिए उन्होंने 500, 200 और 100 के नोटों से 4500 रुपए की एक गड्डी तैयार की और इन सभी नोटों के सीरियल नंबर पहले से एक रजिस्टर में दर्ज कर लिए। सबूत के तौर पर नोटों का टाइम स्टैम्प वाला एक वीडियो भी बनाया गया, फिर एक व्यक्ति को ‘नकली ग्राहक’ बनाकर खून खरीदने भेजा गया।

    ग्राहक के रूप में पहुंचे शख्स ने जैसे ही दलाल को पैसे दिए और दलाल ने उससे कहा कि डोनर आ रहा है, वैसे ही इशारा मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम ने धावा बोल दिया। दलाल की जेब की तलाशी लेने पर वही चिन्हित नोट बरामद हुए, जिनका नंबर प्रशासन ने पहले से नोट कर रखा था।


    ऐसे चल रहा था नेटवर्क

    इस कार्रवाई ने अस्पताल परिसर के बाहर चल रहे खून के अवैध धंधे की पोल खोल दी है। जांच में सामने आया कि अस्पताल के ठीक सामने मौजूद चाय की टपरियों और फलों के ठेलों पर ये दलाल बैठे रहते थे। मरीज के परेशान परिजनों को देखते ही ये उन्हें घेर लेते थे और ब्लड दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस ने मौके से तीन दलालों को गिरफ्तार किया है, इसमें रजनीश साहू (निवासी करसरा), मोहम्मद कैफ (निवासी कामता टोला), अनिल गुप्ता (निवासी टिकुरिया टोला) शामिल हैं।


    एसडीएम ने किया पर्दाफाश

    इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने बताया कि हमें ब्लड की दलाली की सूचना मिली थी। इस पर हमने योजना बनाकर कुछ नोटों को चिन्हित किया और उनका वीडियो रिकॉर्ड कर एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर भेज दिया। अस्पताल के सामने खड़े फल के ठेले पर मिले एक दलाल ने बदले में 4500 रुपए की मांग की। जैसे ही दलाल ने पैसे लिए, हमने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से वही चिन्हित नोट बरामद हुए हैं। इससे साफ है कि दुकानों की आड़ में खून का अवैध कारोबार चल रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।


    अंदर से कौन कर रहा है मदद?

    सूत्रों के मुताबिक अस्पताल के भीतर की मिलीभगत के बिना यह रैकेट चलना नामुमकिन है। बड़ा सवाल यह है कि दलाल बाहर पैसा ले रहा है, तो अंदर से ब्लड या डोनर कौन मैनेज कर रहा है? क्या ब्लड बैंक का कोई कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा है? फिलहाल पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ करते हुए इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रही है।

  • MP: उज्जैन में महाकाल मंदिर विस्तार को चुनौती वाली तकिया मस्जिद की याचिका SC ने की खारिज

    MP: उज्जैन में महाकाल मंदिर विस्तार को चुनौती वाली तकिया मस्जिद की याचिका SC ने की खारिज


    उज्जैन।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उज्जैन (Ujjain) में महाकाल मंदिर परिसर (Mahakal Temple complex) के विस्तार (महाकाल लोक फेज-2) के लिए तकिया मस्जिद (Takiya Mosque) की जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता जमीन का मालिक नहीं, बल्कि केवल एक उपासक (भक्त) है, इसलिए उसे अधिग्रहण को चुनौती देने का कानूनी अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला मोहम्मद तैय्यब बनाम शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग मामले में सुनाया।


    अदालत ने क्या कहा

    सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि याचिका में अधिग्रहण की अधिसूचनाओं को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि आपत्ति केवल मुआवजा तक सीमित है। ऐसे मामलों में कानून के तहत वैकल्पिक वैधानिक उपाय मौजूद हैं। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हूज़ेफ़ा अहमदी, जो याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए, से कहा- “मूल प्रश्न वही है। अधिग्रहण को चुनौती नहीं दी गई है, केवल अवॉर्ड को।” अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता भूमि का स्वामी नहीं, केवल उपासक है, इसलिए अधिग्रहण की वैधता पर सवाल उठाने का उसे अधिकार नहीं है।


    याचिकाकर्ता की दलीलें

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन अनिवार्य है, जिसे नहीं कराया गया। इसके अलावा कहा गया कि हाई कोर्ट ने यह मानकर फैसला दिया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही पुष्टि हो चुकी है, जबकि ऐसा नहीं था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ।


    पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं

    गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट तकिया मस्जिद के ध्वस्तीकरण को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका भी खारिज कर चुका है। उस मामले में अदालत ने राज्य सरकार के इस रुख को स्वीकार किया था कि जमीन अधिग्रहित हो चुकी है और मुआवजा भी दिया जा चुका है, जबकि किसी भी आपत्ति के लिए 2013 कानून के तहत वैधानिक रास्ते उपलब्ध हैं।

    हाई कोर्ट का फैसला
    इससे पहले 11 जनवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी महाकाल लोक फेज-2 परियोजना से जुड़ी जमीन के मुआवजे को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता न तो रिकॉर्डेड भू-स्वामी हैं और न ही टाइटल-होल्डर, इसलिए वे अधिग्रहण को नहीं, बल्कि केवल मुआवजे को लेकर धारा 64 के तहत संदर्भ मांग सकते हैं।


    याचिका में क्या कहा गया था

    याचिका में दावा किया गया था कि अधिग्रहित जमीन 1985 से मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दर्ज वक्फ संपत्ति है और 11 जनवरी 2025 को मस्जिद को गिरा दिया गया। साथ ही यह तर्क दिया गया कि महाकाल मंदिर परिसर के लिए पार्किंग और अन्य सुविधाओं के विस्तार हेतु भूमि लेना सार्वजनिक उद्देश्य की परिभाषा में नहीं आता और इससे संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-A का उल्लंघन होता है। इसके अलावा वक्फ अधिनियम की धारा 91 के उल्लंघन और आपात शक्तियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया था।

    अब आगे क्या?

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ महाकाल लोक फेज-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को अंतिम कानूनी मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर और उससे जुड़े सार्वजनिक स्थलों के बड़े पुनर्विकास का हिस्सा है। याचिका अधिवक्ता वैभव चौधरी के माध्यम से दाखिल की गई थी।