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  • टी20 विश्व कप फाइनल में आचार संहिता उल्लंघन पर अर्शदीप सिंह पर जुर्माना

    टी20 विश्व कप फाइनल में आचार संहिता उल्लंघन पर अर्शदीप सिंह पर जुर्माना

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    अहमदाबाद। भारत के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में मैच फीस का 15 प्रतिशत जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए मुकाबले के दौरान की घटना को लेकर की गई है।

    आईसीसी के अनुसार अर्शदीप ने खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के लिए निर्धारित आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 का उल्लंघन किया, जो अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की ओर अनुचित या खतरनाक तरीके से गेंद या अन्य उपकरण फेंकने से संबंधित है। यह घटना न्यूजीलैंड की पारी के 11वें ओवर में हुई, जब अर्शदीप ने अपनी गेंदबाजी के फॉलो-थ्रू के दौरान गेंद को तेजी से फेंका, जो बल्लेबाज डेरिल मिशेल के पैड से जा टकराई। इसे अनुचित आचरण मानते हुए अंपायरों ने मामला दर्ज किया।

    इस उल्लंघन के चलते अर्शदीप के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ा गया है। पिछले 24 महीनों में यह उनका पहला अपराध है। अर्शदीप ने आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी एंडी पाईक्राफ्ट द्वारा प्रस्तावित सजा को स्वीकार कर लिया, जिसके कारण औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी।

    मैदान पर मौजूद अंपायर रिचर्ड इलिंगवर्थ और एलेक्स व्हार्फ के साथ तीसरे अंपायर अल्लाहुद्दीन पालेकर और चौथे अंपायर एड्रियन होल्डस्टॉक ने यह आरोप लगाया था। आईसीसी नियमों के अनुसार लेवल-1 के उल्लंघन पर आधिकारिक चेतावनी से लेकर मैच फीस का अधिकतम 50 प्रतिशत तक जुर्माना और एक या दो डिमेरिट अंक दिए जा सकते हैं।

  • एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने हवाई टिकट पर बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, हवाई यात्रा होगी महंगी

    एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने हवाई टिकट पर बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, हवाई यात्रा होगी महंगी


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में तेजी आने पर एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस घरेलू उड़ानों के टिकट पर 399 रुपये का ईंधन अधिभार 12 मार्च से लागू करेंगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी ईंधन अधिभार को बढ़ाया जाएगा। इससे हवाई यात्रा महंगी हो जाएगी।

    कंपनी ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है। एयरलाइन ने कहा कि 12 मार्च से घरेलू उड़ानों के टिकट पर 399 रुपये का ईंधन अधिभार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर ईंधन अधिभार बढ़ाया जाएगा।


    जानें कितना लगेगा सरचार्ज

    एयरलाइन की ओर से जारी बयान के अनुसार 12 मार्च से घरेलू उड़ानों के हर टिकट पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाया जाएगा। ये शुल्क सार्क देशों की उड़ानों पर भी लागू होगा। अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भी सरचार्ज बढ़ाया गया है। पश्चिम एशिया के लिए उड़ानों पर 10 डॉलर का फ्यूल सरचार्ज लिया जाएगा। वहीं, अफ्रीका के लिए यह शुल्क 30 डॉलर से बढ़ाकर 90 डॉलर कर दिया गया है। दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए यह 20 डॉलर बढ़ाकर 60 डॉलर कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि ये सभी बदलाव 12 मार्च से लागू होंगे। सिंगापुर के लिए उड़ानों पर भी अब फ्यूल सरचार्ज लिया जाएगा, जबकि अभी तक इस रूट पर ऐसा कोई शुल्क नहीं था।

  • बुलेट ट्रेन से जुड़ेगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, 20 मिनट में पहुंचेंगे दिल्ली

    बुलेट ट्रेन से जुड़ेगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, 20 मिनट में पहुंचेंगे दिल्ली


    नोएडा।
    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बुलेट ट्रेन परियोजना से भी जोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मंगलवार को नेशनल हाई-स्पीड रेल कारपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के अधिकारी यमुना विकास प्राधिकरण के मुख्यालय पहुंचे। इस दौरान एयरपोर्ट के पास स्टेशन बनाने के लिए जमीन की उपलब्धता, यात्री क्षमता और डिजाइन पर चर्चा हुई। अधिकारियों के मुताबिक, बुलेट ट्रेन के लिए एयरपोर्ट के पास भूमिगत स्टेशन बनाए जाने को उपयुक्त पाया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन से लिंक किया जाना है। इसकी डीपीआर बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके एलाइनमेंट को तय करने के लिए मंगलवार को एनएचएसआरसीएल की टीम यमुना प्राधिकरण पहुंची।

    एनएचएसआरसीएल के प्रिंसिपल चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सुधीर कुमार गुप्ता ने इस दौरान यमुना विकास प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह और एसीईओ शैलेंद्र भाटिया से मुलाकात की। प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ उनकी तकनीकी टीम ने भी बुलेट ट्रेन के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए अपनी जरूरत को साझा किया।

    एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर में दो स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इसमें एक नोएडा के सेक्टर-148 में होगा जोकि ग्रेटर नोएडा के भी नजदीक रहेगा। दूसरा स्टेशन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जेवर में बनाया जाना प्रस्तावित है। इस स्टेशन को नोएडा एयरपोर्ट के ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर (जीटीसी) में भूमिगत बनाने की योजना पर सहमति बनी है। एयरपोर्ट के जीटीसी पर पहले से ही मेट्रो व नमो भारत का भूमिगत स्टेशन प्रस्तावित है। रेलवे की ओर से इसी जगह से चोला और रुंधी तक रेलवे ट्रैक से नोएडा एयरपोर्ट को जोड़ा जाना है। इस पूरी योजना की जानकारी भी साझा कर दी गई है जिससे डिजाइन में सुविधा मिल सके। इसका फायदा यह होगा कि जब बुलेट ट्रेन का भूमिगत स्टेशन बनाया जाए, तो पहले से प्रस्तावित या निर्माणाधीन परियोजनाएं प्रभावित नहीं होंगीं।

    दिल्ली-वाराणसी रूट को पिछले महीने ही केंद्रीय बजट में मंजूरी मिली है। इसके बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने में तेजी आई है। डीपीआर बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई है जिससे रूट में शामिल स्टेशन तय कर जल्दी निर्माण शुरू हो सके।अधिकारियों का कहना है कि बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली के सराय काले खां से नोएडा एयरपोर्ट का 70 किलोमीटर का सफर करीब 20 मिनट में पूरा हो जाएगा। अधिकांश भाग इसका एलिवेटेड रहेगा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच इसे एक्सप्रेसवे के सेंट्रल वर्ज पर बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके बाद यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए एयरपोर्ट तक एलाइनमेंट बनाया जाएगा। इससे नोएडा एयरपोर्ट हाईस्पीड ट्रेन से सीधे जुड़ने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन जाएगा।

  • मप्र कैबिनेट ने दी मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को मंजूरी, विकास कार्यों के लिए 33,240 करोड़ रुपये स्वीकृत

    मप्र कैबिनेट ने दी मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को मंजूरी, विकास कार्यों के लिए 33,240 करोड़ रुपये स्वीकृत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही मंत्रि-परिषद ने कल्याणकारी योजनाओं सहित विभिन्न सात विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं की आगामी 5 वर्षों तक निरंतरता के लिए लगभग 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

    प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री यंग इंटनर्स फॉर गुड-गवर्नेंस प्रोगाम को भी मंजूरी दी है। सिंगरौली के चितरंगी में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल 7 नवीन पदों के सृजन की भी मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने मैहर, कैमोर जिला कटनी और निमरानी जिला खरगोन में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के 3 औषधालय खोलने सहित चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है।

    उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा “मुख्यमंत्री यंग इंटर्नस फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम” को 3 वर्ष के लिए क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग को अग्रिम कार्यवाही तथा प्रक्रिया निर्धारण कर नियमों एवं निर्देशों को जारी कर क्रियान्वयन के लिए अधिकृत किया गया है।

    निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट की निरंतरता की स्वीकृति
    काश्यप ने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा मध्य प्रदेश वृत्तिकर अधिनियम, 1995 के अंतर्गत निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट को 31 मार्च, 2030 तक निरंतर किये जाने की स्वीकृति दी गयी गई है।


    7 जिलों के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना का अनुमोदन

    उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना अंतर्गत चयनित 07 जिलों में पारंपरिक व विशिष्ट उत्पाद के सरंक्षण, विकास और विपणन हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगामी 5 वर्षों में 37.50 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस परियोजना में चयनित 07 जिलों में सीधी जिले में दरी एवं कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी, हाथकरघा वस्त्र, भोपाल मे जरी-जरदोजी एवं जूट उत्पाद (जैसे पर्स आदि), धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट में आगामी 5 वर्षों के लिए 37.50 करोड़ रूपये की डी.पी.आर, तैयार की गयी है।इस परियोजना से स्थानीय शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग, विपणन तथा बाजार उपलब्धता जैसी सुविधायें प्रदान की जाएगी। यह परियोजना प्रदेश में स्थानीय उद्यमिता को बढावा, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।


    सिंगरौली में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित 7 पदों की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने चितरंगी जिला सिंगरौली में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड का एक नवीन पद और उनके कार्यालयीन अमले के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 नवीन पद सहित कुल 7 नवीन पदों का सृजन किये जाने की स्वीकृत प्रदान की है।


    मैहर, कैमोर और निमरानी में 3 नये औषधालयों को मंजूरी

    मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (इएसआईसी) द्वारा मैहर (जिला-मैहर), कैमोर (जिला कटनी), तथा निमरानी (जिला खरगौन) में 3 नये औषधालयों को खोलने एवं चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों का सृजन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मैहर, कैमोर तथा निमरानी में नये कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय खोलने एवं नये पद सृजित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे रजिस्टर्ड 15,686 श्रमिकों एवं उन पर आश्रित लगभग 62,744 परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी।

    इसके साथ ही मंत्रि-परिषद् द्वारा निर्णय लिया गया कि रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, यथा वितरण हानियों में कमीं तथा वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण और विकास कार्यों के लिए प्राप्त केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य की वितरण कंपनियों को राज्य शासन द्वारा अनुदान के स्थान पर अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी।स्कीम के अंतर्गत माह नवम्बर 2024 तक ऋण के रूप में प्रदत्त राशि 887 करोड़ 91 लाख रुपये को राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान किए जाने का अनुमोदन किया गया।

    वहीं, मंत्रि-परिषद् द्वारावित्त विभाग की लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया के अन्तर्गत 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि (01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक) के लिए निरंतरता के लिए कुल 63 करोड़ 76 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मंत्रि-परिषद द्वारा खनिज साधन विभाग के अंतर्गत “खनिज अधिभार का रक्षित निधि में अतंरण” योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखे जाने के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

    मंत्रि परिषद द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की 31 मार्च 2031 तक निरंरता एवं सुचारू संचालन के लिये 7,127 करोड़ 38 लाख रूपये और योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय अंतर्गत संचालित 10 योजनाओं की 31 मार्च, 2031 तक निरंतरता के लिए 2,064 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के विकास और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित अन्य कार्यों से संबंधित योजनाओं की वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए कुल राशि 1,645 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गयी है।

    मंत्रि-परिषद द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए 3,773 करोड़ रुपये और एमएसएमई विभाग के अंतर्गत प्रोत्साहन व्यवसाय निवेश सवंर्धन/सुविधा प्रदाय योजना और स्टार्ट-अप पॉलिसी का क्रियान्वयन योजना सहित अन्य कार्यों की आगामी 5 वर्षों तक निरंतरता के लिए 11,361 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

  • रानी दुर्गावती अभयारण्य बनेगा चीतों का तीसरा घर : मोहन यादव

    रानी दुर्गावती अभयारण्य बनेगा चीतों का तीसरा घर : मोहन यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नौरादेही का रानी दुर्गावती अभयारण्य चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है। जल्द ही वहां भी चीते छोड़े जाएंगे।

    मुख्यमंत्री यादव ने मंगलवार को मंत्रिपरिषद् की बैठक से पहले मंत्रियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में चीते तेजी से फल-फूल रहे हैं। हाल ही में पांच नये शावकों की आमद से चीतों का परिवार और भी समृद्ध हुआ है। सरकार करीब दो महीने बाद रानी दुर्गावती अभयारण्य में भी चीते छोड़ने जा रही है। इससे मध्य प्रदेश में चीतों के तीन घर तैयार हो जाएंगे। हम मगर/घड़ियाल और कछुए भी विभिन्न जल क्षेत्रों में मुक्त करेंगे, ताकि हमारी जैव सम्पदा और भी समृद्ध हो सके।

    यादव ने कहा कि टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर सफलता का परचम लहराया है। खेलने वाले कुल 20 देश, 55 मैच और विजेता- भारत, यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम ने दृढ़ संकल्प, साहस और पराक्रम से यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि हमारे खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में देश का मान-सम्मान बढ़ाया है।

    मुख्यमंत्री ने संघ लोक सेवा आयोग-2026 के हालिया घोषित रिजल्ट में मध्य प्रदेश के दो होनहार अभ्यर्थियों द्वारा टॉप टेन अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त करने पर दोनों ही अभ्यर्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रदेश के कई विद्यार्थियों का यूपीएससी की परीक्षा में आईएएस, आईपीएस, आईआरएस इत्यादि कई पदों पर चयन हुआ है। हमारे विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में चयनित होकर प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं।

    उन्होंने मंत्रियों से कहा कि मध्य प्रदेश में जल संचयन के लिए चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल द्वारा सराहना की गई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने गत 05 मार्च को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा था कि मध्य प्रदेश सामुदायिक सहभागिता से जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन देश के सामने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मध्य प्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। मध्य प्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। जल संचयन के प्रोत्साहन के लिए भारत सरकार भी जल इस दिशा में जनभागीदारी से ऐसा ही कदम बढ़ाने जा रही है।

    यादव ने बताया कि इस अभियान के प्रथम चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। दूसरे चरण में भी मध्यप्रदेश में 72 हजार 647 जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए हैं और 64 हजार 395 जल संरचना निर्माण कार्य फिलहाल प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस साल 19 मार्च 2026 से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में दस्तावेजों के डिजिटल पंजीयन का काम शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश में प्रति वर्ष करीब 16 लाख से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन किया जाता है। यह एक बड़ा काम है पर हम इसे समय-सीमा में ही पूरा करेंगे। संपदा 2.0 प्रणाली से दस्तावेजों का पूर्णत: पेपरलेस ई- पंजीयन शुरु कर दिया है। यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करेगी। संपदा प्रणाली से ई-पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग की सुविधा प्रदान कर पूरी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक बनाया गया है। इस प्रणाली में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी ई-स्टॉम्प तैयार कर सकता है। यह व्यवस्था लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं उपार्जन पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। साथ ही दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन के लिए उड़द की खरीद पर भी 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। उड़द की खरीद पर बोनस देने के मामले में मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने यह कदम उठाया है। गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अवधि 10 मार्च 2026 रखी गई थी। मुख्यमंत्री ने किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


    खाड़ी देशों में वर्तमान स्थिति के मद्देनजर हेल्पलाइन-कंट्रोल रूम स्थापित

    पश्चिम एशिया के हालात का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे मध्य प्रदेश के निवासियों की सहायता के लिए मध्य प्रदेश भवन नई दिल्ली में एवं भोपाल के वल्लभ भवन (मंत्रालय) में 24×7 हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। मध्य प्रदेश के निवासी जो खाड़ी देशों में अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय, पर्यटन, इत्यादि के लिए गए और वर्तमान परिस्थतियों में किसी प्रकार की सहायता की अपेक्षा करते हों तो वे कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। मध्यप्रदेश के लोगों की सकुशल स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए हम सभी कदम उठा रहे हैं। अब तक हजारों लोगों की सकुशल स्वदेश वापसी हो चुकी है।

  • मप्र में कमर्शियल गैस का संकट गहराया, कई शहरों में बुकिंग बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर असर

    मप्र में कमर्शियल गैस का संकट गहराया, कई शहरों में बुकिंग बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर असर


    भोपाल।
    ईरान पर जारी अमेरिकी-इजराइल सैन्य कार्रवाई के बीच वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। इसका असर अब मध्य प्रदेश में भी दिखने लगा है। प्रदेश के कई शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी गई है, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है।

    एलपीजी एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके गुप्ता के मुताबिक भोपाल में सोमवार से कमर्शियल सिलेंडर जारी नहीं किए गए हैं। हालांकि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को इस रोक से छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ परेशानी होना सामान्य है और प्रशासन इस बात पर नजर रख रहा है कि कमर्शियल सप्लाई बंद होने के बाद घरेलू सिलेंडरों का दुरुपयोग व्यावसायिक कामों में न हो। वहीं प्रदेश सरकार का कहना है कि घरेलू गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है।


    अब 25 दिन बाद ही बुक होगा अगला सिलेंडर

    घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब उपभोक्ता पिछली डिलीवरी की तारीख से 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर सकेंगे, जबकि पहले यह अवधि 21 दिन थी। तेल कंपनियों का दावा है कि घरेलू गैस की सप्लाई में कोई कमी नहीं है और स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है।


    गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें, लोगों की परेशानी बढ़ी

    हालांकि अधिकारियों के दावों के बीच गैस एजेंसियों पर घरेलू सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने सिलेंडर मिलने में देरी की शिकायत की है। एक उपभोक्ता अंजू विश्वकर्मा ने बताया कि स्लिप मिलने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। वहीं जयपाल बागड़े ने कहा कि एजेंसी से गैस लेने का समय दिया गया था, लेकिन बाद में अगले दिन आने को कहा गया।


    कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से व्यापारियों में चिंता

    कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रुकने से होटल-रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दुकानदार राजकुमार जैन ने बताया कि व्यापारियों के पास केवल एक-दो दिन का ही स्टॉक बचा है। यदि जल्द सप्लाई शुरू नहीं हुई तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारिक संगठनों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।


    भोपाल: 2000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट संकट में

    भोपाल में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकने से होटल-रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल और मंत्री अजय देवनानी के अनुसार शहर के करीब 2000 होटल-रेस्टोरेंट कमर्शियल गैस पर निर्भर हैं। शादी-समारोह के सीजन में बड़े होटल एक बार में 10-15 सिलेंडर तक और छोटे होटल 2-4 सिलेंडर तक इस्तेमाल करते हैं। फिलहाल कुछ जगह स्टॉक बचा है, लेकिन दो-तीन दिन में खत्म होने की आशंका है।

    सराफा एसोसिएशन के मुताबिक गैस संकट का असर सोना-चांदी के करीब 3000 कारीगरों पर भी पड़ सकता है, जिन्हें रोज करीब 300 सिलेंडर की जरूरत होती है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने ऑयल कंपनियों, गैस एजेंसियों और व्यापार संगठनों की बैठक बुलाकर जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


    ग्वालियर: कमर्शियल सिलेंडर की बुकिंग बंद

    ग्वालियर में कमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग पूरी तरह बंद कर दी गई है। ग्वालियर-चंबल LPG फेडरेशन के अनुसार फिलहाल केवल अस्पताल और इमरजेंसी सेवाओं को ही सिलेंडर दिए जा रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी में 5-6 दिन का समय लग रहा है। होटल संचालकों का कहना है कि गैस नहीं मिलने पर कारोबार प्रभावित होगा और कई लोग इंडक्शन चूल्हे जैसे विकल्प तलाश रहे हैं।

    इंदौर: फिलहाल राहत, लेकिन बढ़ सकती है परेशानी
    इंदौर में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद है। घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी 4-5 दिन में हो रही है। इंदौर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी के अनुसार अभी होटल इंडस्ट्री को बड़ा संकट नहीं आया है, लेकिन आने वाले दिनों में स्थिति गंभीर हो सकती है। होटल संचालकों ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाने और मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी की है।


    जबलपुर: होटल व्यवसाय पर असर शुरू

    जबलपुर में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने गैस सप्लाई कम होने की शिकायत की है। होटल व्यवसायियों का कहना है कि इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर में गैस सप्लाई सीमित कर दी गई है, जिससे कारोबार प्रभावित हो सकता है।


    उज्जैन: रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर

    उज्जैन में दो दिन से कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। कलेक्टर रोशन सिंह के अनुसार फिलहाल कमर्शियल गैस केवल अस्पताल और स्कूलों को दी जा रही है। घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग अब 25 दिन बाद होगी और डिलीवरी में 5-7 दिन लग सकते हैं। एजेंसियों के अनुसार घबराहट में लोग बड़ी संख्या में बुकिंग करा रहे हैं।


    प्रदेश में रोज इतनी गैस सप्लाई

    भोपाल: करीब 15 हजार सिलेंडर
    इंदौर: करीब 25 हजार
    जबलपुर: 20-25 हजार
    ग्वालियर: करीब 20 हजार
    सागर: 6-8 हजार
    छोटे जिलों में: करीब 2 हजार सिलेंडर रोज
    एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अनुसार मध्यप्रदेश में सवा करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता हैं।

    सरकार का दावा: सप्लाई सामान्य

    कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल और गैस की उपलब्धता की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक है और घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है। सरकार ने लोगों से अफवाहों से बचने और अधिकृत जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।


    जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू

    केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया है। इसके तहत गैस को चार श्रेणियों में बांटा गया है—
    घरेलू रसोई गैस और सीएनजी को पूरी सप्लाई
    खाद कारखानों को लगभग 70% गैस
    बड़े उद्योगों को लगभग 80% गैस
    छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट को भी पुरानी खपत के आधार पर करीब 80% गैस

  • आखिर क्यों महादेव ने काटा ब्रह्मा जी का पांचवां सिर? सृष्टि के रचयिता की एक भूल और पौराणिक कथा का रहस्य

    आखिर क्यों महादेव ने काटा ब्रह्मा जी का पांचवां सिर? सृष्टि के रचयिता की एक भूल और पौराणिक कथा का रहस्य


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और शिव का विशेष महत्व माना जाता है। इनमें ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। आम तौर पर हम उन्हें चार मुखों वाले चतुर्मुख रूप में देखते हैं, लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुरुआत में ब्रह्मा जी के पांच मुख हुआ करते थे। एक पौराणिक कथा के अनुसार उनकी एक भूल के कारण भगवान शिव ने उनका पांचवां सिर कटवा दिया, जिसके बाद वे चतुर्मुख रूप में ही पूजे जाने लगे।

    इस कथा का उल्लेख Shiva Purana में मिलता है। इसके अनुसार सृष्टि की रचना करते समय ब्रह्मा जी ने Satarupa नाम की एक अत्यंत सुंदर स्त्री की रचना की। सतरूपा अत्यंत तेजस्वी और मनमोहक रूप वाली थीं। कथा के अनुसार उनके सौंदर्य को देखकर स्वयं ब्रह्मा जी भी आकर्षित हो गए।

    बताया जाता है कि जब सतरूपा को यह आभास हुआ कि ब्रह्मा जी की दृष्टि उन पर है, तो उन्होंने उनसे बचने के लिए अलग-अलग दिशाओं में जाना शुरू कर दिया। सतरूपा जब जिस दिशा में जातीं, ब्रह्मा जी उन्हें देखने के लिए उसी दिशा में अपना एक मुख प्रकट कर लेते। इस तरह उन्होंने चारों दिशाओं में देखने के लिए चार मुख बना लिए। लेकिन जब सतरूपा आकाश की ओर बढ़ीं, तब ब्रह्मा जी ने ऊपर की ओर देखने के लिए अपना पांचवां मुख भी प्रकट कर लिया।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह आचरण मर्यादा के विरुद्ध माना गया, क्योंकि सतरूपा उनकी ही रचना थीं और उन्हें मानस पुत्री के समान माना जाता था। यह सब देखकर Shiva अत्यंत क्रोधित हो गए। धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए उन्होंने अपने उग्र स्वरूप Kala Bhairava को प्रकट किया और ब्रह्मा जी को दंड देने का आदेश दिया।

    महादेव के आदेश पर काल भैरव ने तुरंत ब्रह्मा जी के उस पांचवें सिर को काट दिया, जो ऊपर की ओर था। इसी घटना के बाद से ब्रह्मा जी के केवल चार मुख ही रह गए और वे चतुर्मुख रूप में ही जाने जाने लगे। बाद में ब्रह्मा जी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान शिव से क्षमा मांगी।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार इस घटना का एक और प्रभाव यह भी माना जाता है कि ब्रह्मा जी की पूजा अन्य देवताओं की तुलना में बहुत कम होती है। कहा जाता है कि बाद में Saraswati के श्राप के कारण भी उनकी व्यापक पूजा नहीं हो पाई।

    हालांकि भारत में एक ऐसा स्थान है जहां ब्रह्मा जी का प्रमुख और प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर ब्रह्मा मंदिर में है, जो पुष्कर, राजस्थान में स्थित है। यह मंदिर ब्रह्मा जी के सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक माना जाता है, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस तरह यह पौराणिक कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग ही नहीं, बल्कि मर्यादा, संयम और धर्म के महत्व का संदेश भी देती है।

  • पीएम सूर्य घर योजना को मिली रफ्तार: देश में 25 लाख से ज्यादा रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित

    पीएम सूर्य घर योजना को मिली रफ्तार: देश में 25 लाख से ज्यादा रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित

    नई दिल्ली । देश में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार ने मंगलवार को संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत 5 मार्च 2026 तक देशभर में 25 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इस तरह यह योजना देश में सौर ऊर्जा के विस्तार और हरित ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनती जा रही है।

    राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने बताया कि राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 25,02,217 घरों में सफलतापूर्वक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इससे साफ है कि लोग इस योजना के प्रति तेजी से रुचि दिखा रहे हैं और अपने घरों में सौर ऊर्जा अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।

    सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत अब तक 14,585.29 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में इस योजना पर 7,822.92 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस योजना के विस्तार पर लगातार निवेश बढ़ा रही है ताकि अधिक से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाई जा सके।

    दरअसल प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को वर्ष 2024 में शुरू किया गया था। यह एक डिमांड-ड्रिवन योजना है यानी इसमें वही उपभोक्ता शामिल होते हैं जो स्वयं आवेदन करते हैं। देश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ता जिनके पास स्थानीय बिजली वितरण कंपनी यानी डिस्कॉम से जुड़ा बिजली कनेक्शन है वे राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना है साथ ही पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करना भी है।

    सरकार का अनुमान है कि यदि देश में एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो जाते हैं तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव हो सकेगा। इतना ही नहीं इन सोलर सिस्टम का औसत जीवनकाल करीब 25 साल माना जाता है और इस अवधि में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

    सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 के अंत तक इस योजना के क्रियान्वयन में गुजरात महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश केरल और राजस्थान जैसे राज्य सबसे आगे रहे हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाए हैं।

    एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है जिसमें सौर पवन जैव ऊर्जा और जल विद्युत जैसी ऊर्जा शामिल हैं। इसके अलावा 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी देश के ऊर्जा उत्पादन में योगदान दे रही है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को भी लागू किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन उपयोग और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है।

  • मदुरै एयरपोर्ट हुआ इंटरनेशनल, केंद्र ने बढ़ाई तमिलनाडु की ग्लोबल कनेक्टिविटी

    मदुरै एयरपोर्ट हुआ इंटरनेशनल, केंद्र ने बढ़ाई तमिलनाडु की ग्लोबल कनेक्टिविटी


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित कर दिया। मंत्रिमंडल के बयान में कहा गया कि मदुरै, जो मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध है, का यह हवाई अड्डा दक्षिणी तमिलनाडु का प्रमुख प्रवेश द्वार है। यह न केवल पर्यटन और तीर्थयात्रा को बढ़ावा देगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

    मंत्रिमंडल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को गति मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री एवं व्यवसायों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। मदुरै हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप है, जिससे यह दक्षिण भारत में यात्रा और पर्यटन के लिए एक अहम केंद्र बन जाएगा।

    2047 तक 350 हवाई अड्डों का लक्ष्य और विमानन क्षेत्र में नई दिशा
    केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि भारत में वर्तमान में 164 हवाई अड्डे संचालित हैं और सरकार का लक्ष्य 2047 तक लगभग 200 और हवाई अड्डे जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौती केवल हवाई अड्डे बनाने की नहीं, बल्कि “भारत में अधिक विमान कैसे लाए जाएं” की है।

    नायडू के अनुसार, विमान निर्माण प्रणाली को तैयार करके भारत नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अगला बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है। यह प्रणाली न केवल अगले 10-20 वर्षों में बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक विमान निर्माण और निर्यात केंद्र बनाने में भी मदद करेगी।

    पिछले दस वर्षों में भारत में हवाई अड्डों की संख्या, यात्री संख्या और विमान बेड़े में दोगुनी वृद्धि हुई है। मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नागरिक उड्डयन सुधारों का परिणाम बताया। विशेष रूप से उड़ान योजना ने देश में विमानन क्षेत्र की गति और पहुँच बढ़ाई है।

    नायडू ने यह भी कहा कि नागर विमानन मंत्रालय विमानन क्षेत्र में निवेश और निर्माण के लिए भारत के साथ साझेदारी करने वाले सभी लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे न केवल हवाई परिवहन सुविधा बढ़ेगी, बल्कि विमानन उद्योग में रोजगार और आर्थिक अवसर भी बढ़ेंगे।

    मदुरै एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय दर्जे का महत्व
    मदुरै एयरपोर्ट का अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से दक्षिण भारत में पर्यटन, व्यापार और धार्मिक यात्रा को नया impulso मिलेगा। यह कदम न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि स्थानीय व्यवसायों और पर्यटन उद्योग के लिए भी आर्थिक विकास का अवसर लेकर आएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के आने से मदुरै और आसपास के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

  • सोलर ऊर्जा में बड़ी छलांग, पीएम सूर्य घर योजना के तहत 25 लाख से अधिक छतों पर सोलर सिस्टम

    सोलर ऊर्जा में बड़ी छलांग, पीएम सूर्य घर योजना के तहत 25 लाख से अधिक छतों पर सोलर सिस्टम


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने देशभर में जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि 5 मार्च 2026 तक कुल 25,02,217 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 14,585.29 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 2024-25 में इस पर 7,822.92 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

    ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि योजना के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 25 लाख से अधिक घरों में सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं। यह योजना 2024 में शुरू की गई थी और यह डिमांड-ड्रिवन योजना है। इसके तहत देश के सभी घरेलू उपभोक्ता, जिनके पास स्थानीय डिस्कॉम से बिजली कनेक्शन है, राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपनी छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं।

    सौर ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरणीय लाभ
    सरकार का अनुमान है कि अगर एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाएँ, तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव होगा। इसके साथ ही इन सिस्टम के 25 साल के जीवनकाल में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। इस पहल से ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

    2025 के अंत तक योजना को लागू करने में गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान सबसे आगे रहे हैं। ये राज्य सौर ऊर्जा के उत्पादन और घरों में सोलर सिस्टम के विस्तार में शीर्ष पर हैं।

    नॉन-फॉसिल फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन में भारत की प्रगति
    मंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है, जिसमें 135.81 गीगावाट सौर ऊर्जा, 54.51 गीगावाट पवन ऊर्जा, 11.61 गीगावाट जैव ऊर्जा, 5.16 गीगावाट लघु जल विद्युत और 50.91 गीगावाट वृहद जल विद्युत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी शामिल है।

    सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को भी लागू किया है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह मिशन देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है और भविष्य में हरित ऊर्जा समाधान के लिए भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।