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  • BJP के मिशन 2027 की हरिद्वार से होगी शुरुआत, अमित शाह 7 मार्च को करेंगे शंखनाद

    BJP के मिशन 2027 की हरिद्वार से होगी शुरुआत, अमित शाह 7 मार्च को करेंगे शंखनाद


    देहरादून।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) मिशन 2027 का बिगुल हरिद्वार (Haridwar) से फूंकने जा रही है। इसीलिए पार्टी ने विशेष रणनीति के तहत सरकार के चार साल पर आयोजित किए जा रहे जश्न के कार्यक्रमों की शुरूआत हरिद्वार से करने का निर्णय लिया है। सात मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) मिशन 2027 के लिए रोडमैप तय करेंगे।


    हरिद्वार ही क्यों चुना

    दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनावों में हरिद्वार से भाजपा बुरी तरह पिछड़ गई थी। राज्य की सत्ता में लौटने के बावजूद हरिद्वार में भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और 11 विधानसभा सीटों में से पार्टी महज तीन सीटों पर सिमट कर रह गई। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने हरिद्वार में अपने प्रदर्शन को सुधारा। लेकिन पार्टी की असल परीक्षा अभी विधानसभा चुनावों में होनी है। इसीलिए भाजपा ने हरिद्वार पर विशेष फोकस शुरू कर दिया है। पिछले दिनों हुई पार्टी कोर ग्रुप की बैठक में हारी हुई सीटों पर फोकस करने का निर्णय लिया गया था।


    अमित शाह की शीर्ष नेताओं संग बैठक

    जिसके लिए सबसे पहले हरिद्वार को चुना गया है। सरकार के चार साल पर आयोजित होने वाले जश्न के कार्यक्रमों की शुरूआत भी इसी रणनीति के तहत हरिद्वार से की जा रही है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात मार्च को हरिद्वार में विशाल जनसभा को संबोधित करने के साथ ही संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे। जिसमें आगामी रणनीति पर मुहर लगाई जाएगी।


    हार के बावजूद कांग्रेस का अच्छा रहा प्रदर्शन

    हरिद्वार में 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा जहां सिर्फ तीन सीटों पर सिमट गई वहीं कांग्रेस ने पांच सीटें जीत ली थी। बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने मंगलौर सीट भी अपने कब्जे में कर ली। इस समय कांग्रेस के पास हरिद्वार जिले की ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, मंगलौर और हरिद्वार ग्रामीण सीटों को मिलाकर कुल छह विधायक हैं। इसके अलावा हरिद्वार में एक सीट बसपा और एक निर्दलीय ने जीती थी।


    हरिद्वार में सिर्फ तीन सीटें जीती थी

    2022 के विधानसभा चुनावों में हरिद्वार में भाजपा सिर्फ तीन सीटों को जीत पाई थी। उनमें हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर और रुड़की हैं। जबकि अन्य सीटों पर कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार जीतकर आए हैं।

  • Iran War: 3 दिन में एक हजार से अधिक फ्लाइट्स हुई रद्द, जानें दिल्ली Airport के हाल?

    Iran War: 3 दिन में एक हजार से अधिक फ्लाइट्स हुई रद्द, जानें दिल्ली Airport के हाल?


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran War) के कारण दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। मंगलवार को परिचालन संबंधी बाधाओं की वजह से 80 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें (International Flights) रद्द करनी पड़ीं जिनमें 36 प्रस्थान और 44 आगमन उड़ानें शामिल थीं। पिछले तीन दिनों में कुल 1,117 उड़ानें प्रभावित हुई हैं। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन डायल ने फंसे हुए यात्रियों की सुविधा के लिए बैठने की अतिरिक्त व्यवस्थाएं अधिक चिकित्सा दल और सफाई टीमें तैनात की हैं ताकि यात्रियों को कम परेशानी हो।

    एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण मंगलवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर कुल 80 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इनमें 36 प्रस्थान और 44 आगमन उड़ानें शामिल हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि एमिरेट्स जैसी कुछ एयरलाइन्स ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी सेवाएं आंशिक रूप से फिर से शुरू कर दी हैं।

    उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24 डॉट कॉम’ पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुबई जा रही एमिरेट्स की उड़ान ईके-513 हवाई क्षेत्र के प्रतिबंधों की वजह से दिल्ली वापस आ गई। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन डायल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि पश्चिम एशिया की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के कारण पश्चिम की ओर जाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी हो रही है या समय-सारिणी में बदलाव किया जा रहा है।

    पिछले 3 दिन में पश्चिम एशिया संकट की वजह से भारतीय एयरलाइनों ने 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं। इसी दौरान एयर इंडिया ने मंगलवार को दुबई से दिल्ली के लिए एक उड़ान भरी जिसमें 149 यात्री शामिल थे। एयरलाइन ने एक्स पर जानकारी दी कि वे उड़ान एआई 916डी से दुबई से आए यात्रियों और चालक दल का स्वागत करते हैं। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के बीच यह किसी भारतीय एयरलाइन की पहली उड़ान है जो आज 149 यात्रियों और चालक दल के आठ सदस्यों के साथ नई दिल्ली पहुंची।

    दुबई में फंसे एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के 143 क्रू सदस्य मंगलवार को एअर इंडिया की विशेष उड़ान एआई918डी से दिल्ली लौट आए। इसके साथ ही दुबई से एमिरेट्स की एक अन्य उड़ान ईके512 भी मंगलवार तड़के दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी जबकि संकट के कारण रद्द हुई उड़ानों के यात्रियों की मदद के लिए डायल ने कई जरूरी कदम उठाए हैं। अधिकारी ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों के लिए बैठने की 400 से अधिक अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं। यही नहीं दो अतिरिक्त मेडिकल टीम भी तैनात की गई हैं।

  • शुगर के मरीज रोज कितनी चीनी खा सकते हैं ज्यादा मिठास बन सकती है गंभीर खतरा

    शुगर के मरीज रोज कितनी चीनी खा सकते हैं ज्यादा मिठास बन सकती है गंभीर खतरा


    नई दिल्ली :भारत में खुशी के हर मौके पर मुंह मीठा कराने की परंपरा रही है। त्योहार हो या कोई शुभ अवसर मिठाइयों के बिना जश्न अधूरा माना जाता है। लेकिन यही मिठास कई लोगों के लिए खतरे की घंटी बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज से जूझ रहे हैं। रिफाइंड शुगर यानी साधारण चीनी का ज्यादा सेवन ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है और लंबे समय में गंभीर जटिलताओं की वजह बन सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी की कोई तय सुरक्षित न्यूनतम मात्रा नहीं है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ अनिल बंसल के मुताबिक डायबिटीज के मरीजों का शरीर ग्लूकोज को प्रभावी तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता। ऐसे में थोड़ी सी अतिरिक्त चीनी भी ब्लड शुगर को असंतुलित कर सकती है। यही कारण है कि अधिकतर विशेषज्ञ शुगर के मरीजों को रिफाइंड शुगर से पूरी तरह दूरी बनाने की सलाह देते हैं।

    हालांकि जिन मरीजों का ब्लड शुगर पूरी तरह नियंत्रित है वे कभी कभी सीमित मात्रा में चीनी ले सकते हैं लेकिन यह भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही होना चाहिए। आम तौर पर दिनभर में एक से दो छोटी चम्मच से अधिक चीनी लेने की सिफारिश नहीं की जाती और कई मामलों में इसे भी टालने की सलाह दी जाती है। क्योंकि शरीर को आवश्यक शुगर फलों दूध और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से मिल जाती है इसलिए अलग से रिफाइंड शुगर लेने की जरूरत नहीं होती।

    अगर डायबिटीज का मरीज जरूरत से ज्यादा चीनी खाता है तो उसका ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। लंबे समय तक हाई शुगर रहने से आंखों पर असर पड़ता है जिससे रेटिनोपैथी का खतरा होता है। किडनी प्रभावित हो सकती है जिससे नेफ्रोपैथी की समस्या पैदा होती है और नसों को नुकसान पहुंच सकता है जिसे न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसके अलावा ज्यादा चीनी शरीर में सूजन बढ़ाती है जिससे घाव भरने में देरी होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    सिर्फ डायबिटीज के मरीज ही नहीं बल्कि सामान्य लोगों को भी चीनी का सेवन सीमित रखना चाहिए। American Heart Association के अनुसार स्वस्थ पुरुषों को प्रतिदिन 36 ग्राम यानी लगभग 9 चम्मच से ज्यादा चीनी नहीं लेनी चाहिए जबकि महिलाओं के लिए यह सीमा 25 ग्राम यानी करीब 6 चम्मच है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इस सीमा में केवल चाय या मिठाई में डाली गई चीनी ही शामिल नहीं है बल्कि फलों दूध और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद छिपी हुई शुगर भी गिनी जाती है।

    अधिक चीनी का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ा सकता है जिससे भविष्य में डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जितनी कम रिफाइंड शुगर का सेवन होगा उतना ही बेहतर ब्लड शुगर कंट्रोल रहेगा और बीमारी का खतरा कम होगा।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि मीठा खाने की इच्छा होने पर प्राकृतिक विकल्प जैसे फल या सीमित मात्रा में ड्राई फ्रूट्स का सेवन किया जा सकता है। संतुलित आहार नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के साथ ही डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है। मिठास जीवन में जरूरी है लेकिन समझदारी से ली गई मिठास ही सेहत के लिए सुरक्षित होती है।

  • ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत

    ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल और गैस पर ही नहीं, बल्कि भारत के कृषि और व्यापार क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग लंबी खिंचती है और खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता है, तो भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ उर्वरक, खाद्य सामग्री और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की सप्लाई में भी समस्या हो सकती है।
    उर्वरक की आपूर्ति हो सकती है प्रभावित
    भारत यूरिया और फॉस्फेट जैसे उर्वरकों के बड़े हिस्से के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। विशेष रूप से डीएपी और यूरिया का करीब 46 प्रतिशत आयात अकेले ओमान से होता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो उर्वरक की कमी के कारण कृषि क्षेत्र पर सीधे असर पड़ेगा और कीमतों में तेजी आएगी।

    सोना और अन्य आयातित उत्पाद महंगे हो सकते हैं
    संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों से भारत में सोने का आयात होता है। शिपिंग लागत बढ़ने से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खजूर और कुछ प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी कुल खजूर का लगभग 80-90 प्रतिशत खाड़ी देशों से आयात करता है, खासकर यूएई और ओमान से। तनाव बढ़ने और समुद्री मार्ग बंद होने की स्थिति में इन उत्पादों की कीमतों में उछाल आ सकता है।

    निर्यात क्षेत्र भी होगा प्रभावित
    भारत के निर्यात पर भी खाड़ी देशों में तनाव का असर पड़ेगा। प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:-

    खाद्यान्न और चावल: सऊदी अरब, ईराक, यूएई और ओमान भारत के बड़े खरीदार हैं। समुद्री मार्ग बंद होने पर शिपमेंट में देरी होगी, नई आपूर्ति रूट लंबा होगा और ढुलाई लागत बढ़ेगी। भारत का लगभग 50 प्रतिशत बासमती निर्यात खाड़ी देशों और ईरान को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 60 लाख टन बासमती निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 50,312 करोड़ रुपये थी।

    मांस और समुद्री उत्पाद: जमी हुई मछली और झींगा जैसी वस्तुएं खाड़ी देशों में बड़ी मांग में हैं। लॉजिस्टिक बाधाओं से निर्यात घट सकता है।

    फार्मास्यूटिकल्स: भारत जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। आपूर्ति बाधित होने पर निर्यात राजस्व प्रभावित होगा और कंपनियों को सामान पहुंचाने में मुश्किलें आएंगी।

    इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स: मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और निर्माण सामग्री की खेप में देरी से विशेषकर एमएसएमई प्रभावित होंगे। जनवरी में खाड़ी देशों को मशीनरी निर्यात में 16 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।

    कपड़ा और परिधान: खाड़ी देशों का बाजार रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल निर्यात के लिए अहम है। भारत का खाड़ी देशों को कुल परिधान निर्यात लगभग 1.79 बिलियन डॉलर का है। शिपिंग लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा घट सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है और हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव जारी रहता है, तो किसानों और निर्यातक दोनों के लिए चुनौतियां गंभीर रूप से बढ़ सकती हैं।

  • अफगान-पाक संघर्ष: तालिबान का दावा- 5 दिन में मारे 150 PAK सैनिक, 40 पोस्ट पर किया कब्जा

    अफगान-पाक संघर्ष: तालिबान का दावा- 5 दिन में मारे 150 PAK सैनिक, 40 पोस्ट पर किया कब्जा


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दुर्गम डूरंड लाइन पर चल रहा तनाव अब खुले सशस्त्र संघर्ष में बदल चुका है। अफगान सीमा बलों के प्रवक्ता अबीदुल्लाह उकाब ने बताया कि बीते पांच दिनों में अफगान-तालिबान डिफेंस फोर्सेज ने पाकिस्तान की सेना को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार इस लड़ाई में अब तक लगभग 150 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, करीब 200 घायल हुए हैं और पाकिस्तान के 40 पोस्ट तालिबान-अफगान लड़ाकों के कब्जे में आ गए हैं।
    अफगान-तालिबान का दावा
    अफगान सीमा बलों के प्रवक्ता अबीदुल्लाह उकाब ने मंगलवार को बताया कि अफगान डिफेंस मिनिस्टर के हवाले से कहा गया है कि तालिबान- अफगान फोर्सेज पाकिस्तान की हरकतों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना की कई पोस्टों को बम के जरिए नष्ट किया गया।

    ड्रोन भी हुए तबाह
    अफगान फोर्स ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान द्वारा भेजे गए कई ड्रोन को नष्ट कर दिया गया। इनमें छोटे इंटेलिजेंस ड्रोन भी शामिल हैं, जो अफगान फोर्सेज की गतिविधियों की जासूसी के लिए भेजे गए थे।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
    अफगान-तालिबान ने कुछ वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें उनके लड़ाके पाकिस्तानी पोस्ट पर कब्जा करते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में अफगान लड़ाके हथियार, वायरलेस सेट और अन्य सैन्य सामग्री लूटते नजर आए। कई पाकिस्तानी सैनिक हाथ उठाकर भागते हुए दिखे, और उनके उपकरण अफगान कब्जे में चले गए। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच प्रचार युद्ध को और बढ़ा रहे हैं।

    पाकिस्तानी पक्ष का जवाब
    अफगान दावों पर पाकिस्तान की सेना या सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगान पक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी कार्रवाई में अफगान तालिबान के सैकड़ों लड़ाके मारे गए हैं और कई ठिकानों पर पाकिस्तान ने कब्जा किया है। वर्तमान में सीमा पर तनाव चरम पर है और अफगान फोर्स अपनी जीत का दावा मजबूत कर रही है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है। इस संघर्ष ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और हजारों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं।

  • 4 मार्च का पंचांग: बुधवार से चैत्र मास की शुरुआत, जानें दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त

    4 मार्च का पंचांग: बुधवार से चैत्र मास की शुरुआत, जानें दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। तिथि, नक्षत्र, योग और वार के आधार पर दिन की शुभ-अशुभ घड़ियां तय की जाती हैं। 4 मार्च, बुधवार से चैत्र मास के कृष्ण पक्ष का प्रारंभ हो रहा है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष माना जा रहा है, क्योंकि नए मास की शुरुआत साधना, संकल्प और पूजा के लिए शुभ मानी जाती है।

    तिथि और नक्षत्र का संयोग
    दृक पंचांग के अनुसार बुधवार को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शाम 4 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ होगी। हालांकि उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन प्रतिपदा का ही मान रहेगा।

    नक्षत्र की बात करें तो पूर्वाफाल्गुनी सुबह 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। योग धृति सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

    सूर्योदय सुबह 6 बजकर 43 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 23 मिनट पर होगा। दिन की कुल अवधि धार्मिक कार्यों के लिए संतुलित मानी जा रही है।

    दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त
    4 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। यह समय ध्यान, जप, साधना और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

    विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। नए कार्य की शुरुआत, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए यह समय अनुकूल है।

    गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक है। यह संध्या पूजन और विशेष अनुष्ठान के लिए शुभ माना जाता है।

    अमृत काल देर रात 12 बजकर 54 मिनट से 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ या कोई मांगलिक कार्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

    अशुभ समय का रखें ध्यान
    पंचांग के अनुसार राहुकाल दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 2 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई नया या शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।

    यमगंड सुबह 8 बजकर 11 मिनट से 9 बजकर 38 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 11 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।

    दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, वर्ज्य दोपहर 3 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 41 मिनट तक प्रभावी रहेगा। साथ ही आडल योग सुबह 7 बजकर 39 मिनट से देर रात 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन अशुभ कालों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यात्रा या अन्य मांगलिक कार्य करने से परहेज करना चाहिए।

    बुधवार का धार्मिक महत्व
    बुधवार का दिन विघ्न विनाशक भगवान गणपति और बुध ग्रह को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से गणेश पूजा करने और हरे वस्त्र या मूंग का दान करने से बुध ग्रह शांत होते हैं और बुद्धि, व्यापार व संचार से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से नए मास की शुरुआत होने के कारण यह दिन आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए भी उत्तम माना गया है।

  • ईरान जंग का असर: कतर ने भारत को LNG सप्लाई में 40% तक कटौती की, ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल

    ईरान जंग का असर: कतर ने भारत को LNG सप्लाई में 40% तक कटौती की, ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव का सीधा असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है। भारत को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देश कतर ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात में 10 से 40 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच संघर्ष तेज हो चुका है और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ गए हैं।
    हमलों के बाद प्लांट बंद, सप्लाई प्रभावित
    ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही दुनिया के सबसे बड़े LNG हब में से एक रास लफ़्फ़ान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए। इन हमलों के बाद कतर को एहतियातन LNG उत्पादन रोकना पड़ा। नतीजतन वैश्विक गैस आपूर्ति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

    भारत कतर से LNG खरीदने वाले सबसे बड़े ग्राहकों में शामिल है। देश हर साल करीब 27 मिलियन टन LNG आयात करता है, जिसमें लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कतर से आता है। इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, CNG वितरण और पाइप्ड कुकिंग गैस नेटवर्क जैसे अहम क्षेत्रों में होता है।

    पेट्रोनेट ने दी सप्लाई रुकने की सूचना
    भारत की प्रमुख गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट LNG लिमिटेड ने गैस मार्केटर्स को सूचित किया है कि कतर ने उत्पादन रोक दिया है। इसके बाद GAIL लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को भी सप्लाई बाधित होने की जानकारी दी गई। बताया जा रहा है कि CNG रिटेलिंग के लिए फ्लो रेट बनाए रखते हुए औद्योगिक इकाइयों को गैस आपूर्ति में कटौती की गई है।

    सूत्रों के अनुसार यह कटौती 10 प्रतिशत से लेकर 40 प्रतिशत तक हो सकती है। पेट्रोनेट का कतर से हर साल 8.5 मिलियन टन LNG खरीदने का दीर्घकालिक अनुबंध है, जबकि कुछ मात्रा स्पॉट मार्केट से भी ली जाती है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़
    तनाव का बड़ा कारण होर्मुज स्ट्रेट है, जिस पर ईरान का नियंत्रण है। यह समुद्री मार्ग भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत LNG आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है। यही मार्ग कतर और UAE से आने वाली गैस के लिए मुख्य ट्रांजिट रूट है। हमलों के बाद इस मार्ग से तेल और LNG शिपमेंट लगभग ठप पड़ गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आ गया है और युद्ध जोखिम बीमा व शिपिंग लागत भी बढ़ गई है।

    स्पॉट मार्केट में कीमतें दोगुनी
    GAIL और IOC कमी की भरपाई के लिए स्पॉट मार्केट से LNG खरीदने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। स्पॉट मार्केट में LNG की कीमत अब 25 अमेरिकी डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुंच गई है, जो दीर्घकालिक अनुबंध दर से लगभग दोगुनी है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो भारत समेत कई आयातक देशों के लिए गैस आपूर्ति और कीमतों का संकट और गहरा सकता है।

  • ‘पहले वार नहीं करते तो वे कर देते’, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान हमलों को ठहराया जरूरी कदम

    ‘पहले वार नहीं करते तो वे कर देते’, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान हमलों को ठहराया जरूरी कदम


    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हालिया अमेरिकी सैन्य हमलों का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि यह कार्रवाई मजबूरी में की गई। उनके मुताबिक खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर आशंका थी कि तेहरान पहले हमला कर सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने पहले कदम नहीं उठाया होता तो स्थिति परमाणु टकराव तक पहुंच सकती थी।

    पश्चिम एशिया में चौथे दिन भी तनाव बरकरार
    पश्चिम एशिया में तनाव लगातार चौथे दिन भी बना हुआ है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल की ओर से किए गए हवाई हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबर है। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइल से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं ने पूरे इलाके की सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    ‘ईरान एक महीने में बना सकता था परमाणु हथियार’
    व्हाइट हाउस में फ्रेडरिक मर्ज के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बातचीत के पक्ष में था, लेकिन उन्हें अचानक हमले की आशंका थी। उनका कहना था, “अगर हमने अभी जो किया, वह नहीं किया होता, तो वे पहले हमला कर देते।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था। उन्होंने ईरानी शासन को ‘खतरनाक और चरमपंथी विचारधारा वाला’ बताते हुए आरोप लगाया कि पिछले 47 वर्षों से वह वैश्विक अस्थिरता को बढ़ावा देता रहा है।

    ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ ‘सबसे खराब समझौता’ किया था, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में समाप्त कर दिया।

    ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर
    ट्रंप ने इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम देते हुए दावा किया कि इस कार्रवाई में ईरान की मिसाइल क्षमता और एयर डिफेंस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार अब ईरान की सैन्य ताकत काफी हद तक कमजोर हो चुकी है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी ईरान के मौजूदा शासन को लेकर अमेरिका के साथ समान चिंता जताई। हालांकि ट्रंप ने कुछ यूरोपीय देशों के रुख पर नाराजगी जाहिर की और स्पेन तथा ब्रिटेन की आलोचना की, जबकि जर्मनी की सराहना की।

    खाड़ी देशों में भी बढ़ी चिंता
    तनाव का असर बहरीन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात तक महसूस किया जा रहा है। ईरान की ओर से इन क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद आम नागरिकों और प्रवासी कामगारों की चिंताएं बढ़ गई हैं। लगातार बढ़ते सैन्य टकराव और तीखे बयानों के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है, और दुनिया की निगाहें अब आने वाले कूटनीतिक और सैन्य कदमों पर टिकी हैं।

  • एमपी में मार्च की शुरुआत से तपिश तेज, 35 से ज्यादा जिलों में पारा 33 डिग्री पार, होली पर रहेगी चटक धूप

    एमपी में मार्च की शुरुआत से तपिश तेज, 35 से ज्यादा जिलों में पारा 33 डिग्री पार, होली पर रहेगी चटक धूप


    भोपाल। मार्च की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। खासतौर पर मालवा-निमाड़ क्षेत्र में तापमान तेजी से चढ़ रहा है। मंगलवार को प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया, जिससे साफ है कि इस बार गर्मी समय से पहले असर दिखा रही है। धार, नर्मदापुरम, खरगोन, खंडवा और रतलाम सबसे ज्यादा गर्म जिलों में शामिल रहे।
    मालवा-निमाड़ में सबसे ज्यादा असर
    मौसम विभाग के अनुसार धार में 35.9 डिग्री, नर्मदापुरम में 35.4 डिग्री, खरगोन में 35.2 डिग्री, खंडवा में 35.1 डिग्री और रतलाम में 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, शाजापुर, गुना, टीकमगढ़, दमोह, सागर, सतना, मंडला, छतरपुर, सिवनी, उमरिया, सीधी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और रायसेन में भी पारा 33 डिग्री या उससे अधिक रहा।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में मार्च के पहले पखवाड़े में ही तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हल्की बारिश के आसार भी बने हुए हैं।

    होली पर खिलेगी तेज धूप
    आज होली के दिन प्रदेशभर में मौसम साफ रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को कहीं भी बादल या बारिश के संकेत नहीं हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में तापमान 35 डिग्री के पार जा सकता है, जिससे त्योहार पर तेज धूप लोगों को गर्मी का अहसास कराएगी।

    रातें भी देने लगी गर्मी का अहसास
    दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी बढ़ने लगा है। सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात जबलपुर, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, नरसिंहपुर, गुना, धार, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन, रतलाम और श्योपुर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। इनमें धार में 18.5 डिग्री, नर्मदापुरम में 18.4 डिग्री और खंडवा में 18 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।

    मार्च में राहत, अप्रैल-मई में चलेगी लू
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मार्च में लू चलने की संभावना नहीं है, लेकिन अप्रैल और मई में 15 से 20 दिन तक हीट वेव का असर देखने को मिल सकता है। अभी मार्च के शुरुआती दिनों में ही तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो आने वाले महीनों में और तीखी हो सकती है।

    6 मार्च से बदलेगा मौसम का मिजाज
    पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हो रहा एक पश्चिमी विक्षोभ 6 मार्च से असर दिखाएगा। इसके प्रभाव से अगले दो से तीन दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम बदल सकता है और हल्की बारिश की संभावना बन सकती है।

    अप्रैल-मई में पड़ेगी सबसे ज्यादा गर्मी
    मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस वर्ष अप्रैल और मई सबसे अधिक गर्म रहेंगे। ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच सकता है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी भीषण गर्मी की चपेट में रहेंगे।

  • ईयरफोन की तेज आवाज छीन रही सुनने की ताकत वर्ल्ड हियरिंग डे पर एम्स की सख्त चेतावनी

    ईयरफोन की तेज आवाज छीन रही सुनने की ताकत वर्ल्ड हियरिंग डे पर एम्स की सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली :तेज आवाज में लंबे समय तक ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल अब युवाओं और किशोरों के लिए गंभीर खतरे की घंटी बनता जा रहा है। 3 मार्च को मनाए जाने वाले वर्ल्ड हियरिंग डे के अवसर पर नई दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences New Delhi के ईएनटी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पर्सनल लिसनिंग डिवाइस का अत्यधिक उपयोग नॉइज इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस का बड़ा कारण बन रहा है।

    एम्स के ईएनटी विभाग की डॉ पूनम सागर के अनुसार कान के अंदर मौजूद बेहद संवेदनशील हेयर सेल्स ध्वनि को पहचानकर उसे दिमाग तक पहुंचाने का काम करती हैं। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक तेज आवाज में गाने सुनता है तो ये कोशिकाएं स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। एक बार इनका नुकसान हो जाए तो सुनने की क्षमता पूरी तरह वापस नहीं आती। यही वजह है कि विशेषज्ञ इस समस्या को लेकर लगातार जागरूकता की अपील कर रहे हैं।

    डॉक्टरों का कहना है कि 120 डेसीबल की तीव्रता पर केवल पांच मिनट तक ईयरफोन सुनना भी कानों के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। वहीं 60 डेसीबल की अपेक्षाकृत कम आवाज पर आठ घंटे लगातार सुनना भी सुरक्षित नहीं माना जाता। दोनों ही स्थितियों में कानों पर दबाव पड़ता है और धीरे धीरे सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

    नॉइज इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस के मामले अब कम उम्र में तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले जहां 50 वर्ष की आयु के बाद सुनने की क्षमता में कमी आम मानी जाती थी वहीं अब 40 की उम्र के बाद ही हियरिंग लॉस के केस सामने आने लगे हैं। इसके पीछे पर्सनल लिसनिंग डिवाइस का बढ़ता चलन एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

    टीनएजर्स में मोबाइल गेमिंग ऑनलाइन क्लास और म्यूजिक स्ट्रीमिंग के कारण ईयरफोन का इस्तेमाल कई घंटों तक होता है। मेट्रो बस या ट्रैफिक जैसे शोरगुल वाले माहौल में लोग बाहरी आवाज दबाने के लिए वॉल्यूम और बढ़ा देते हैं। तेज बाहरी शोर और हाई वॉल्यूम का यह संयोजन कानों के लिए दोहरा खतरा पैदा करता है।

    विशेषज्ञों ने कुछ शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है। यदि कानों में घंटी या सीटी जैसी आवाज सुनाई दे जिसे टिनिटस कहा जाता है बातचीत के दौरान शब्द साफ न सुनाई दें या बार बार सामने वाले से बात दोहराने को कहना पड़े तो यह हियरिंग लॉस के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।

    डॉ पूनम सागर का कहना है कि बचाव संभव है यदि लोग कुछ सरल सावधानियां अपनाएं। डिवाइस को उसकी अधिकतम वॉल्यूम के 60 प्रतिशत से कम पर रखें और लगातार लंबे समय तक इस्तेमाल न करें। लगभग 60 मिनट सुनने के बाद ब्रेक लेना जरूरी है ताकि कानों को आराम मिल सके। शोरगुल वाले माहौल में ईयरफोन के उपयोग से बचना बेहतर है।

    वर्ल्ड हियरिंग डे का उद्देश्य यही है कि लोग अपनी सुनने की सेहत को गंभीरता से लें। सुनने की क्षमता अनमोल है और इसे लापरवाही से खोना आसान लेकिन वापस पाना लगभग असंभव है। सही आदतें अपनाकर और जागरूक रहकर हम अपने कानों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।