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  • ईरान के मिसाइल हमलों पर अमेरिका और खाड़ी देशों का कड़ा रुख, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा

    ईरान के मिसाइल हमलों पर अमेरिका और खाड़ी देशों का कड़ा रुख, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और खाड़ी देशों ने ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीखी आलोचना की है। घटनाक्रम तब तेज हुआ जब इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए। इसके बाद जारी संयुक्त बयान में अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों को “लापरवाही भरा और अस्थिर करने वाला” बताया।

    अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरान द्वारा संप्रभु क्षेत्रों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। बयान के मुताबिक, इन हमलों का असर बहरीन, इराक (जिसमें इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र भी शामिल है), जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई पर पड़ा। देशों ने आरोप लगाया कि हमलों में आम नागरिकों की जान जोखिम में डाली गई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

    ‘खतरनाक बढ़त’ से क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा
    संयुक्त बयान में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई कई देशों की संप्रभुता का उल्लंघन है और यह पूरे इलाके की स्थिरता को खतरे में डालती है। सरकारों ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने उन देशों को भी निशाना बनाया जो सीधे तौर पर किसी सैन्य टकराव में शामिल नहीं थे। इसे गैर-जिम्मेदाराना और उकसावे वाली कार्रवाई करार दिया गया।

    बयान में साफ कहा गया कि आम नागरिकों और तटस्थ देशों को टारगेट करना अस्वीकार्य है। सातों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वे अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एकजुट हैं और आत्मरक्षा के अधिकार को दोहराते हैं।

    एयर डिफेंस सहयोग पर जोर, सुरक्षा रणनीति मजबूत
    क्षेत्र में बढ़ते मिसाइल और ड्रोन खतरों के बीच संयुक्त बयान में एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग की सराहना की गई। देशों ने कहा कि समन्वित प्रयासों के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान को रोका जा सका। अमेरिका की खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब व यूएई के साथ उसकी रक्षा साझेदारी लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा रही है।

    पश्चिमी और खाड़ी देशों का मानना है कि हाल के वर्षों में ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में उल्लेखनीय विस्तार किया है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हुआ है। हालांकि तेहरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है। मौजूदा घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कूटनीतिक प्रयास इस टकराव को कितना थाम पाते हैं या हालात और गंभीर मोड़ लेते हैं।

  • होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

    होलिका दहन पर वामपंथी कलुष


    – कैलाश चन्द्र
    भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रांताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे और कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक उपनिवेशवादियों ने किए हैं। यह हमला तलवारों का नहीं, शब्दों का है। यह आक्रमण सीमाओं का नहीं, स्मृति का है।

    वस्‍तुत: आज जो लोग होली, होलिका दहन और प्रह्लाद की कथा को “ब्राह्मणवाद द्वारा एक दलित नारी को जलाए जाने” की घटना बताकर प्रस्तुत करते हैं, वे न परंपरा जानते हैं और न कथा समझते हैं। वे सिर्फ भारत की सांस्कृतिक संचेतना को उसकी अपनी कहानी से काट देना चाहते हैं।

    होलिका की वास्तविक कथा

    होलिका की कथा जितनी सरल है, उतनी ही गहन भी। कश्यप ऋषि और दिति की पुत्री तथा दिति की संतानों को स्वभाव वैचित्र्य के कारण दैत्य कहा गया है। सम्पूर्ण कथा श्रीमद्भागवत पुराण में बहुत विस्तार से कही गई है। भारतवर्ष में होने वाली अधिकांश भागवत कथाओं में भागवताचार्य अपनी कथा का प्रारम्भ यहीं से करते हैं। इस आधार पर होलिका दैत्यकुल की राजकुमारी व प्रिचिति की पत्नी और स्वरभानु की माता थी। वह एक संपूर्ण दैत्यवंशी, राक्षसी चरित्र है। उसका भाई हिरण्यकश्यप न केवल राजा था बल्कि अत्याचारी, अहंकारी और असुर प्रवृत्ति वाला शासक भी था।

    उसके सामने किसी “शोषित समुदाय” की कथा गढ़ना या उसे “दलित नारी उत्पीड़न” में बदल देना केवल अज्ञान नहीं एक सुनियोजित बौद्धिक छल है, जो भारतीय मिथकीय चेतना को वर्गीय, जातीय और जेंडरवादी चश्मे से दूषित करना चाहता है।

    धर्म और अधर्म का स्पष्ट संदेश

    यहां सत्य सरल है। होलिका किसी “अबला स्त्री” की कथा नहीं है। वह वरदान से सशक्त, छल से प्रेरित और अधर्म की सहायक थी। ब्रह्मा ने उसे अग्नि प्रतिरोध का वरदान दिया था, किन्तु वह वरदान धर्म विरोधी कर्मों के लिए नहीं था। जब वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठती है तो उसका जलना कर्मफल है। यह अन्याय के अंत, अधर्म की पराजय और सत्य की विजय का प्रतीक है।

    यही पुराणों का स्वर है और यही भारतीय संस्कृति की जीवंतता का मूलाधार भी है। पर आज इस कथा को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने वाले “कल्चरल मार्क्सिज्म” के प्रशिक्षित कार्यकर्ता इसे “ब्राह्मणों द्वारा स्त्री दहन” का उदाहरण बताते हैं। ये उनकी चाल पुरानी है। हर परंपरा को उत्पीडन का प्रमाण बनाओ। हर कथा को वर्ग संघर्ष के ढांचे में फिट करो। हर मूल्य को अपराधबोध में बदलो।

    वे राक्षसी को पीड़‍िता बना देते हैं, दैत्यकुल को जाति समूह कह देते हैं और धर्म-अधर्म की अनंत कथा को सत्ता विरोध के रंग में विकृत कर देते हैं। यही मानसिकता श्रीराम को साम्राज्यवादी, श्रीकृष्ण को चालबाज, माता दुर्गा को पीड़ित स्त्री और श्रीगणेश को उपहास का पात्र बना देती है।

    होलिका दहन का सांस्कृतिक अर्थ

    होलिका दहन का अर्थ किसी व्यक्ति, कुल या जाति का दमन नहीं है। यह जीवन की नकारात्मकता के दहन का संदेश है। यह नव वसंत, नवहर्ष, नई शुरुआत और सत्य के धारण एवं संरक्षण का पर्व है। इसमें प्रह्लाद की विजय, भक्ति की शक्ति और अधर्म के अंत का संदेश निहित है। इसे महिला विरोध, समाज विरोध या सत्ता विरोध की कहानी में बदलना हमारी परंपरा का नहीं बल्कि हमारी स्मृति का अपमान है।

    इतिहास के नाम पर फैलाया गया भ्रम

    भारतीय समाज को बांटने के लिए आज एक विचित्र वैचारिक नाटक रचा जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि ‘हिरण्यकश्यप’ शूद्र था, शूद्र तप नहीं कर सकते और गुरुकुल नहीं जा सकते। यह इतिहास नहीं बल्कि वैचारिक क्षुद्रता का प्रमाण है। जिन लोगों ने न शास्त्र पढ़े और न पुराण समझे, वे आज सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी के आधार पर एक संपूर्ण सभ्यता को अपराधी सिद्ध करने में लगे हैं।

    भारतीय चेतना का मूल सत्य

    वास्तविकता यह है कि होलिका और हिरण्यकश्यप भारतीय चेतना में सदियों से अहंकार और अधर्म के प्रतीक रहे हैं। गुरुकुलों की शिक्षा में शस्त्र और शास्त्र का अध्ययन करने के बाद अहंकार के कारण वे अधर्म के मार्ग पर चले और भक्त प्रह्लाद सत्य के प्रतीक बने। जो लोग इस सरल सत्य को भी “सामाजिक न्याय” के चश्मे से विकृत करते हैं, वे न्याय के पक्षधर नहीं बल्कि भारतीय समाज को भीतर से तोड़ने वाले मानसिक उपनिवेशवाद के वाहक हैं।

    स्मृति और परंपरा की पुनर्स्थापना

    आज आवश्यकता किसी प्रतिक्रिया या प्रतिशोध की नहीं है। आवश्यकता है तथ्यों की पुनर्स्थापना की। हमें अपनी चेतना में सांस्कृतिक स्मृति को पुनः प्रखर करना होगा। परंपरा को आधुनिक राजनीतिक सिद्धांतों के ढांचे में कैद करने के स्थान पर उसके कालातीत संदेश को समझना होगा। यह संघर्ष एक कथा का न होकर भारतीय तत्वज्ञान, वांग्मय, दर्शन और वैचारिक संप्रभुता का है। इसलिए यह समझना सभी के लिए समान रूप से आवश्‍यक है कि ‘होलिका’ का जलना किसी स्त्री का दहन नहीं है। यह अत्याचार, असहिष्णुता, अधर्म, अनीति और असत्य के दहन का प्रतीक है। उसका अंत किसी समाज पर अत्याचार का नहीं बल्कि अधर्म की पराजय का उत्सव है।

    आज भारत की सभ्यता इस वैचारिक आक्रमण को पहचान चुकी है। वह जानती है कि हमारी परंपराएं हिंसा की नहीं बल्कि समरसता की उपज हैं। होलिका दहन उसी समरसता का उत्सव है, अहंकार के अंत और सत्य के आरंभ का पर्व। अत: हमेशा ही अपने समय में वर्तमान काल की हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस वैचारिक धुंध में भी स्पष्ट देख सकें और यह कह सकें कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए भारतीयता चाहिए, न कि वह वैचारिक चश्मा जो हर कथा को संघर्ष, हर पात्र को पीड़‍ित और हर पर्व को अपराध में बदल देता है।

    अंत में यही कि होलिका दहन पर कलुष केवल परंपरा का नहीं बल्कि विवेक का अपमान है। इसे समझना और इस भ्रम को तोड़ना आज केवल सांस्कृतिक कर्तव्य नहीं यह हम सभी की राष्ट्रीय आवश्यकता है।

    (लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्‍ठ स्‍तम्‍भकार हैं)

  • हैदराबाद हाउस में हाई-लेवल डिप्लोमैसी: पीएम मोदी और मार्क कार्नी की अहम बैठक

    हैदराबाद हाउस में हाई-लेवल डिप्लोमैसी: पीएम मोदी और मार्क कार्नी की अहम बैठक

    नई दिल्ली के प्रतिष्ठित Hyderabad House में सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना और हाल के वर्षों में आए उतार-चढ़ाव के बाद रिश्तों को मजबूती प्रदान करना रहा।

    एमओयू एक्सचेंज और सीईओ फोरम पर नजर
    बैठक के बाद दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान प्रस्तावित है, जिसके बाद संयुक्त प्रेस बयान जारी किए जाएंगे। दोपहर 1:50 बजे Bharat Mandapam में भारत-कनाडा सीईओ फोरम की शुरुआत होगी, जिसमें दोनों प्रधानमंत्री उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे। शाम छह बजे पीएम कार्नी अपने देश के लिए रवाना होंगे।

    व्यापार से एआई तक-साझेदारी के प्रमुख स्तंभ

    वार्ता में व्यापार और निवेश, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, शिक्षा, शोध एवं नवाचार, और लोगों के बीच संबंध जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए। कार्नी ने नई दिल्ली पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर भारत को “आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी” देश बताते हुए ऊर्जा, टैलेंट, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

    जयशंकर से भी हुई मुलाकात

    इससे पहले पीएम कार्नी ने विदेश मंत्री S. Jaishankar से मुलाकात की। जयशंकर ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए आगे की साझेदारी को लेकर कनाडा की प्रतिबद्धता की सराहना की।

    रिश्तों के सामान्यीकरण की दिशा में अहम कदम
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत-कनाडा संबंध सामान्य होने के अहम मोड़ पर हैं। दोनों देशों ने पहले ही आपसी सम्मान, संवेदनशील मुद्दों की समझ और आर्थिक सहयोग को आधार बनाकर संतुलित व रचनात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।

    हैदराबाद हाउस की यह बैठक केवल औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि साझा दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में बदलने की कोशिश मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सकारात्मक माहौल किस तरह द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाता है।

  • सेमीफाइनल की हैट्रिक: टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरी बार उतरेगी भारतीय टीम

    सेमीफाइनल की हैट्रिक: टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरी बार उतरेगी भारतीय टीम

    नई दिल्ली टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है। रविवार को खेले गए मुकाबले में India national cricket team ने West Indies cricket team को 5 विकेट से हराकर अंतिम चार का टिकट पक्का किया। इसके साथ ही टीम इंडिया छठी बार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंची है और लगातार तीसरी बार यह उपलब्धि हासिल की है।

    सेमीफाइनल में इंग्लैंड से लगातार तीसरी टक्कर
    दिलचस्प बात यह है कि इस बार भी भारत का सामना उसी टीम से है, जिससे पिछले दो टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में भिड़ंत हुई थी-England cricket team। इस तरह टी20 विश्व कप में लगातार तीसरी बार भारत और इंग्लैंड सेमीफाइनल में आमने-सामने होंगे। क्रिकेट इतिहास में यह एक अनोखा संयोग है, जिसने मुकाबले का रोमांच कई गुना बढ़ा दिया है।

    2022: इंग्लैंड की ऐतिहासिक जीत
    ICC Men’s T20 World Cup 2022 के सेमीफाइनल में एडिलेड में भारत और इंग्लैंड की भिड़ंत हुई थी। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने 6 विकेट पर 168 रन बनाए थे। जवाब में जोस बटलर की अगुआई में इंग्लैंड ने 16 ओवर में बिना विकेट गंवाए 170 रन बनाकर 10 विकेट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। बाद में इंग्लैंड ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब अपने नाम किया।

    2024: भारत ने लिया बदला, बना चैंपियन
    ICC Men’s T20 World Cup 2024 के सेमीफाइनल में जॉर्जटाउन में फिर वही कहानी लिखी गई, लेकिन इस बार अंत अलग था। भारत ने 7 विकेट पर 171 रन बनाए और इंग्लैंड को 16.4 ओवर में 103 रन पर समेटकर 68 रन से जीत हासिल की। फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारत ने ट्रॉफी उठाई।

    2026: वानखेड़े में होगा महामुकाबला
    अब 2026 में यह तीसरी भिड़ंत मुंबई के Wankhede Stadium में 5 मार्च को शाम 7 बजे से खेली जाएगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजर इस बात पर है कि क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? पिछली दो बार सेमीफाइनल जीतने वाली टीम ही आगे चलकर चैंपियन बनी थी।

    इस बार भी मुकाबला बराबरी का दिख रहा है-एक तरफ अनुभव और आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम, तो दूसरी ओर बड़े मैचों की विशेषज्ञ इंग्लैंड। सेमीफाइनल का यह संग्राम सिर्फ फाइनल का टिकट नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त की जंग भी होगा।

  • 3 मार्च का पंचांग: पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें कब करें महत्वपूर्ण काम

    3 मार्च का पंचांग: पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें कब करें महत्वपूर्ण काम

    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि बताने का माध्यम नहीं, बल्कि दिन की दिशा तय करने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। 3 मार्च को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि और मंगलवार का संयोग बन रहा है। मंगलवार का दिन आदि शक्ति और श्रीराम भक्त हनुमान को समर्पित होता है, ऐसे में इस दिन पूजा-पाठ और विशेष साधना का महत्व और बढ़ जाता है।

    तिथि, नक्षत्र और योग का पूरा ब्योरा
    3 मार्च को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 44 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन पूर्णिमा का ही मान रहेगा। नक्षत्र मघा सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। सुकर्मा योग सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक और बव करण शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।

    विजय मुहूर्त और अमृत काल का खास महत्व
    इस दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:05 से 5:55 बजे तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:56 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 से 3:16 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त में नए कार्य, महत्वपूर्ण निर्णय या यात्रा प्रारंभ करना विशेष फलदायी माना जाता है।

    गोधूलि मुहूर्त शाम 6:20 से 6:44 बजे तक रहेगा। अमृत काल रात 1:13 से 2:49 बजे तक है, जो मंत्र जप और विशेष पूजा के लिए अत्यंत शुभ है। निशीथ मुहूर्त रात 12:08 से 12:57 बजे तक रहेगा।

    राहुकाल और अन्य अशुभ समय
    शुभ समय के साथ अशुभ काल का ध्यान रखना भी आवश्यक है। राहुकाल दोपहर 3:28 से 4:55 बजे तक रहेगा। इस अवधि में नए और शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। यमगंड सुबह 9:39 से 11:06 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 12:33 से 2:00 बजे तक रहेगा।

    दुर्मुहूर्त सुबह 9:04 से 9:50 बजे तक है। गण्ड मूल सुबह 6:44 से 7:31 बजे तक रहेगा। वर्ज्य काल दोपहर 3:34 से 5:10 बजे तक रहेगा।

    पूर्णिमा और मंगलवार का यह संगम आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। यदि आप किसी नए कार्य की योजना बना रहे हैं या विशेष पूजा-अर्चना करना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखकर शुरुआत करें।

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग, वैश्विक बाजार पर वार-क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार तेजी

    मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग, वैश्विक बाजार पर वार-क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार तेजी

    नई दिल्ली। इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद निवेशकों ने संभावित आपूर्ति संकट का अंदेशा जताया, जिससे तेल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ने लगे।

    ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में जोरदार तेजी
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude के वायदा भाव बढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट 7.60 प्रतिशत चढ़कर 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (डब्ल्यूटीआई) क्रूड के वायदा भाव 7.19 प्रतिशत उछलकर 71.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की आशंका
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने रणनीतिक Strait of Hormuz से गुजरने वाले नौवहन को सीमित करने के संकेत दिए हैं। यह वही मार्ग है, जिससे दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात भी इसी रास्ते से होता है। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है।

    ओपेक का दांव, क्या थमेगी रफ्तार?
    इसी बीच OPEC ने अगले महीने से उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सदस्य देश प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेंगे। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव गहराता है तो यह बढ़ोतरी कीमतों को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

    भारत पर सीधा असर
    विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कीमतों में हर 1 डॉलर की वृद्धि से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है। इससे महंगाई, चालू खाते का घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। अधिक तेल कीमतें परिवहन लागत, समुद्री बीमा और ऊर्जा आधारित उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।

    90 से 100 डॉलर का खतरा
    बाजार जानकारों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है तो ब्रेंट 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है। व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति में यह 100 डॉलर के स्तर को भी पार कर सकता है। फिलहाल बाजार का रुख कंपनियों की तिमाही आय से ज्यादा तेल की चाल पर निर्भर नजर आ रहा है। तनाव कम होने, नेतृत्व पर स्पष्टता आने और समुद्री मार्ग सुरक्षित रहने की ठोस गारंटी मिलने तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

  • सेफ हेवन की ओर भागे निवेशक, युद्ध की आहट से गोल्ड-सिल्वर में जबरदस्त तेजी

    सेफ हेवन की ओर भागे निवेशक, युद्ध की आहट से गोल्ड-सिल्वर में जबरदस्त तेजी

    नई दिल्ली। इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई और उसके बाद जवाबी हमलों की खबरों ने अनिश्चितता को और गहरा कर दिया। इसी माहौल में निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिसका सीधा फायदा सोना और चांदी को मिला। सोमवार को कीमती धातुओं में 3 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई।

    एमसीएक्स पर रिकॉर्ड के करीब भाव
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल वायदा सोना कारोबार के दौरान 3 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 1,67,915 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं मार्च वायदा चांदी भी 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 2,85,978 रुपये प्रति किलोग्राम पर जा पहुंची। खबर लिखे जाने तक सुबह लगभग 10:46 बजे अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 4,612 रुपये यानी 2.85 प्रतिशत बढ़कर 1,66,716 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि मार्च एक्सपायरी चांदी 7,311 रुपये यानी 2.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,82,309 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

    भू-राजनीतिक जोखिम से बाजार में घबराहट
    तेहरान पर हमलों और जवाबी मिसाइल कार्रवाई के बाद व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका ने बाजारों को जोखिम से बचाव की मुद्रा में ला दिया है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में Ali Khamenei को लेकर दावे किए गए, लेकिन ऐसी बड़ी खबरों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होती है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी बढ़ी है, जिससे ऊर्जा बाजार में भी हलचल तेज हुई।

    डॉलर और कच्चा तेल भी चढ़े
    डॉलर इंडेक्स 0.24 प्रतिशत बढ़कर 97.85 पर पहुंच गया, जिससे अन्य मुद्राओं में खरीदारी करने वालों के लिए सोना अपेक्षाकृत महंगा हो गया। इसके बावजूद सुरक्षित निवेश की मांग इतनी मजबूत रही कि कीमतों में तेजी बनी रही। कच्चे तेल में भी 7 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई, क्योंकि बाजार को डर है कि आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों की राय और आगे का अनुमान
    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव और टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता ने सोने की तेजी को मजबूती दी है। 2025 में अब तक सोना करीब 64 प्रतिशत चढ़ चुका है, जिसे केंद्रीय बैंकों की खरीद, ईटीएफ में निवेश और ढीली मौद्रिक नीति की उम्मीदों का सहारा मिला है।

    वैश्विक निवेश बैंक JPMorgan Chase ने 2026 के अंत तक सोना 6,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है, जबकि Bank of America ने 6,000 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना व्यक्त की है। अब निवेशकों की नजर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण पीएमआई और अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों पर है, जो आगे की दिशा तय करेंगे।

  • भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट! जयशंकर ने मार्क कार्नी से मुलाकात कर दिए बड़े संकेत

    भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट! जयशंकर ने मार्क कार्नी से मुलाकात कर दिए बड़े संकेत

    नई दिल्ली। भारत और कनाडा के संबंधों में नई रफ्तार देखने को मिली जब विदेश मंत्री S. Jaishankar ने नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश रिश्तों को सामान्य और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्नी से मिलकर खुशी हुई और आगे की साझेदारी को लेकर उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है।

    मुंबई से दिल्ली तक-पहला आधिकारिक दौरा
    प्रधानमंत्री कार्नी अपनी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी के साथ 27 फरवरी से 2 मार्च तक भारत के पहले आधिकारिक दौरे पर आए हैं। शुक्रवार को मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने कारोबारी जगत से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। भारतीय और कनाडाई सीईओ, उद्योगपतियों, वित्तीय विशेषज्ञों, इनोवेटर्स और एजुकेटर्स से बातचीत कर उन्होंने आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशने की बात कही। मुंबई पहुंचते ही उन्होंने भारत को “दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था” बताया और साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की इच्छा जताई।

    मोदी से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
    नई दिल्ली पहुंचने के बाद कार्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह प्रधानमंत्री Narendra Modi से मिलने आए हैं। दोनों देशों को “आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी” बताते हुए उन्होंने ऊर्जा, टैलेंट, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही। हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच डेलीगेशन-स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, निवेश, जरूरी खनिज, कृषि, शिक्षा, रिसर्च और लोगों के बीच संबंध जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

    पिछली बैठकों की समीक्षा, आगे की राह तय
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता कनानास्किस (जून 2025) और जोहान्सबर्ग (नवंबर 2025) में हुई पिछली मुलाकातों के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। भारत-कनाडा सीईओ फोरम में भी दोनों की मौजूदगी संभावित है, जहां क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर विचार साझा किए जाएंगे।

    यह दौरा ऐसे दौर में हो रहा है जब दोनों देश रिश्तों को संतुलित और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। आपसी संवेदनशीलताओं का सम्मान, मजबूत आर्थिक गतिविधियां और लोगों के बीच गहरे संबंध-इन्हीं आधारों पर नई साझेदारी की नींव रखी जा रही है।

    सकारात्मक संदेश के साथ आगे बढ़ते कदम
    कार्नी ने मुंबई से साझा वीडियो में कहा कि भारत के साथ सहयोग कनाडाई श्रमिकों और व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा। वहीं जयशंकर की प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि भारत भी इस रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    दोनों देशों के बीच यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का संकेत मानी जा रही है-जहां ऊर्जा से लेकर एआई तक, कई क्षेत्रों में सहयोग की नई इबारत लिखी जा सकती है।

  • मध्य पूर्व में जंग का असर भारत पर? गृह मंत्रालय का राज्यों को अलर्ट, विरोध प्रदर्शनों पर खास नजर

    मध्य पूर्व में जंग का असर भारत पर? गृह मंत्रालय का राज्यों को अलर्ट, विरोध प्रदर्शनों पर खास नजर


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र जारी कर ईरान के समर्थन या विरोध में संभावित प्रदर्शनों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकता है, इसलिए कानून-व्यवस्था को हर हाल में प्राथमिकता दी जाए।

    विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश
    गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा है कि यदि किसी राज्य में ईरान के पक्ष या विपक्ष में प्रदर्शन आयोजित होते हैं, तो स्थानीय प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, खुफिया तंत्र की सक्रियता और भीड़ प्रबंधन की ठोस तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी है कि कुछ असामाजिक तत्व प्रदर्शनों की आड़ में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं, जिन्हें समय रहते चिन्हित कर निष्प्रभावी किया जाए।

    सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाने के आदेश
    मंत्रालय ने राज्यों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे भड़काऊ या भ्रामक संदेशों पर सख्त नजर रखने के निर्देश दिए हैं। अफवाहों और उकसावे वाली सामग्री के जरिए तनाव फैलाने की कोशिशों को रोकने के लिए साइबर मॉनिटरिंग बढ़ाने को कहा गया है। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को स्थिति के अनुरूप धारा 144 जैसे एहतियाती कदम उठाने की छूट भी दी गई है।

    हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पर सख्ती
    केंद्र ने दोहराया है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्यों से समन्वय बनाए रखते हुए शांति और सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने पर जोर दिया गया है।

    हालांकि, कुछ सोशल मीडिया दावों में कहा जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के हमले में Ali Khamenei की मौत हो गई है। इस तरह के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Iran के सर्वोच्च नेता के संबंध में ऐसी किसी बड़ी घटना की पुष्टि विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से नहीं हुई है, इसलिए प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की है।

    जम्मू-कश्मीर में एहतियाती कदम
    इधर Jammu and Kashmir के कई इलाकों से विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं। Srinagar में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की गईं और कुछ स्कूलों को भी सुरक्षा कारणों से बंद रखा गया। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और हालात सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव का सीधा असर भारत की कानून-व्यवस्था पर न पड़े, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें चौकन्नी हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां सतर्क मोड में हैं और किसी भी अफवाह या उकसावे से बचने की अपील की जा रही है।

  • IND vs AUS: अनुभव नहीं, जोश पर भरोसा! ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट के लिए दो नए चेहरों को दिया मौका

    IND vs AUS: अनुभव नहीं, जोश पर भरोसा! ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट के लिए दो नए चेहरों को दिया मौका

    नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज के बाद अब नजरें 6 से 9 मार्च तक खेले जाने वाले एकमात्र टेस्ट मैच पर टिक गई हैं। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टेस्ट टीम की घोषणा कर दी है और चयनकर्ताओं ने दो अनकैप्ड खिलाड़ियों को मौका देकर सबको चौंका दिया है। भारत के खिलाफ इस ऐतिहासिक टेस्ट में युवा जोड़ी रेचल ट्रेनमैन और मैटलन ब्राउन को शामिल किया गया है, जिससे साफ है कि मेजबान टीम भविष्य की तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहती है।

    रेचल ट्रेनमैन और मैटलन ब्राउन को सुनहरा मौका

    ऑस्ट्रेलिया ने रेचल ट्रेनमैन और मैटलन ब्राउन को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। दोनों खिलाड़ियों ने पिछले अगस्त में ब्रिस्बेन में इंडिया ए के खिलाफ चार दिवसीय रेड-बॉल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ए का प्रतिनिधित्व किया था। उस प्रदर्शन के आधार पर चयनकर्ताओं ने इन पर भरोसा जताया है। यह अनकैप्ड जोड़ी इस सप्ताह पर्थ में टीम से जुड़ेगी और टीम संयोजन में नई ऊर्जा भरने की उम्मीद है।

    चोटों से जूझ रही ऑस्ट्रेलिया, मजबूती की तलाश

    ऑस्ट्रेलियाई टीम इस समय चोटों से परेशान है। तेज गेंदबाज किम गार्थ पहले ही बाहर हो चुकी हैं, जबकि स्टार ऑलराउंडर एलिस पेरी क्वाड इंजरी से जूझ रही हैं। अगर पेरी समय पर फिट नहीं होतीं तो वह सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर खेल सकती हैं। कप्तान सोफी मोलिनक्स भी पीठ की समस्या के कारण इस टेस्ट से बाहर रहेंगी। ऐसे में रेचल ट्रेनमैन को पेरी के कवर के रूप में टीम में शामिल किया गया है, जिससे संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। मैटलन ब्राउन की बात करें तो 28 वर्षीय इस तेज गेंदबाज को 2021 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह मिली है। उन्होंने इस सीजन में न्यू साउथ वेल्स के लिए 10 मैचों में 16 विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा था।

    कप्तान सोफी मोलिनक्स की गैरमौजूदगी में विकेटकीपर बल्लेबाज एलिसा हीली टीम की कमान संभालेंगी। यह हीली का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा, जिससे मैच और भी भावुक हो गया है। उन्होंने हाल ही में भारत के खिलाफ वनडे में 98 गेंदों पर 158 रन की विस्फोटक पारी खेलकर अपने इरादे साफ कर दिए थे। ऐसे में वह इस टेस्ट को यादगार बनाना चाहेंगी।

    दोनों टीमों की संभावित टक्कर

    ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम में एलिसा हीली (कप्तान), डार्सी ब्राउन, मैटलन ब्राउन, एश्ले गार्डनर, लूसी हैमिल्टन, अलाना किंग, फोएबे लिचफील्ड, बेथ मूनी, ताहलिया मैकग्राथ, एलिस पेरी, एनाबेल सदरलैंड, जॉर्जिया वोल और जॉर्जिया वेयरहैम शामिल हैं।

    वहीं भारतीय टीम की कमान हरमनप्रीत कौर संभालेंगी, जबकि स्मृति मंधाना उपकप्तान होंगी। टीम में शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, ऋचा घोष, दीप्ति शर्मा और रेणुका ठाकुर जैसे अहम खिलाड़ी मौजूद हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह एकमात्र टेस्ट मुकाबला रोमांच, रणनीति और भावनाओं का संगम बनने जा रहा है, जहां युवा जोश और अनुभव की टक्कर देखने को मिलेगी।