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  • 45 साल तक दाहिना हाथ छिपाए रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई, जानिए क्‍या थी वजह ?

    45 साल तक दाहिना हाथ छिपाए रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई, जानिए क्‍या थी वजह ?


    नई दिल्ली। ईरान की सत्ता पर तीन दशक से अधिक समय तक मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर ने पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिकी और इजरायली हमलों में उनके मारे जाने की सूचना के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और कई देशों में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं। 36 वर्षों तक सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई का राजनीतिक जीवन जितना प्रभावशाली रहा उतना ही विवादों से भी घिरा रहा। लेकिन उनके जीवन का एक ऐसा पहलू भी था जिसने उन्हें 45 साल तक अपना दाहिना हाथ सार्वजनिक रूप से छिपाने पर मजबूर कर दिया।

    1981 का वह धमाका जिसने बदल दी तकदीर

    साल 1981 में जब खामेनेई ईरान के राष्ट्रपति थे और ईरान-इराक युद्ध का दौर चल रहा था तभी उन पर एक जानलेवा हमला हुआ। नमाज के बाद वह लोगों से बातचीत कर रहे थे कि एक व्यक्ति उनकी मेज पर टेप रिकॉर्डर रखकर चला गया। कुछ ही देर बाद उसमें विस्फोट हो गया। इस हमले की जिम्मेदारी फुरकान ग्रुप ने ली और इसे इस्लामिक रिपब्लिक के लिए तोहफा बताया।
    विस्फोट में खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए और कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। इस हमले का सबसे बड़ा असर उनके दाहिने हाथ पर पड़ा जो हमेशा के लिए निष्क्रिय हो गया। उसमें लकवा मार गया। बाद में उन्होंने कहा था कि उन्हें एक हाथ की जरूरत नहीं अगर उनका दिमाग और जुबान काम करते रहें तो वही काफी है। इसके बाद से वह शपथ या सार्वजनिक कार्यक्रमों में बायां हाथ ही उठाते थे।

    खोमैनी की विरासत और सत्ता तक सफर
    1989 में रूहोल्ला खोमैनी की मृत्यु के बाद खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता चुना गया। इससे पहले वह राष्ट्रपति रह चुके थे और क्रांति के शुरुआती दौर से ही सक्रिय थे। 1939 में मशहद में जन्मे खामेनेई ने नजफ और क़ुम के धार्मिक मदरसों में शिक्षा प्राप्त की। किशोरावस्था में ही उन्होंने क्रांतिकारी इस्लामी विचारधारा अपनाई जिसमें नवाब सफावी जैसे धर्मगुरुओं का प्रभाव था।

    1958 में उनकी मुलाकात खोमैनी से हुई और उन्होंने उनकी विचारधारा को अपना लिया। खोमैनीवाद का मूल सिद्धांत विलायत-ए-फकीह था जिसके तहत सर्वोच्च धार्मिक नेता को व्यापक राजनीतिक और धार्मिक अधिकार मिलते हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यही व्यवस्था ईरान की सत्ता संरचना का आधार बनी।

    सत्ता सख्ती और विरोध

    सर्वोच्च नेता बनने के बाद खामेनेई ने घरेलू राजनीति पर मजबूत नियंत्रण स्थापित किया। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर आईआरजीसी के साथ करीबी संबंध बनाए जो समय के साथ देश की सबसे प्रभावशाली ताकतों में से एक बन गई। उनके शासनकाल में आंतरिक विरोध को सख्ती से दबाया गया। हाल के वर्षों में हुए जनआंदोलनों को भी कठोरता से नियंत्रित किया गया जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत की खबरें सामने आईं।

    हालांकि उनकी नियुक्ति भी विवादों से घिरी रही। कुछ धर्मगुरुओं ने सवाल उठाया कि उनके पास ग्रैंड अयातुल्ला का दर्जा नहीं था जो संवैधानिक रूप से जरूरी माना जाता था। बाद में संविधान संशोधन और जनमत संग्रह के जरिए सर्वोच्च नेता बनने की शर्तों में बदलाव किया गया और उन्हें औपचारिक मान्यता दी गई।

    प्रभाव जो दशकों तक कायम रहा

    खामेनेई को अक्सर आधुनिक ईरान का सबसे शक्तिशाली नेता माना गया। भले ही इस्लामी क्रांति के जनक खोमैनी थे लेकिन लंबे समय तक सत्ता में बने रहकर खामेनेई ने राजनीतिक सैन्य और धार्मिक संस्थाओं पर गहरी पकड़ स्थापित की। उनका दाहिना हाथ भले ही निष्क्रिय रहा लेकिन सत्ता पर उनकी पकड़ मजबूत बनी रही। उनकी मृत्यु के बाद अब ईरान एक नए दौर की ओर बढ़ रहा है लेकिन खामेनेई का नाम देश के राजनीतिक इतिहास में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

  • Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?

    Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Israel-Iran War) के बीच भारत (India) समेत दुनिया के तमाम देशों के सामने तेल से जुड़ी समस्याएं खड़ी होने की चिंता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कच्चे तेल (Crude Oil) के प्रमुख आपूर्ति मार्ग के बंद होने से भारत को निकट भविष्य में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना करने की आशंका नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कच्चे तेल का भंडार कम से कम 10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।


    भारत के पास आकस्मिक योजनाएं

    ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की खबरें भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। हालांकि, शीर्ष अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो भारत के पास आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।


    रूस से आयात बढ़ा सकता है भारत

    ईरान के सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निकासी बिंदुओं में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अधिकारियों ने कहा कि कम अवधि के लिए इसके बंद होने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति है। उन्होंने आगे कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है।


    भारत के पास कितना तेल भंडार

    हालांकि, इसका तत्काल प्रभाव तेल की कीमतों पर दिखेगा। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह सात महीने के उच्चस्तर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, ”भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास टैंक और पारगमन में मिलाकर 10 से 15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा, उनके ईंधन टैंक भरे हुए हैं, जो देश की 7-10 दिन की ईंधन जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।” एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से भी तेल खरीद सकता है।

  • साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को… जानिए ग्रहण और सूतक काल की टाइमिंग

    साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को… जानिए ग्रहण और सूतक काल की टाइमिंग


    नई दिल्ली।
    कल 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लगने जा रहा है. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत (India) में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल (Sutak Period) मान्य होगा और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा. मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है और फिर नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है।

    ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. इसका प्रभाव खासतौर पर कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है।

    चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing)
    यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा.


    चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का असर सबसे पहले मन और भावनाओं पर पड़ेगा. इस दौरान व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, चिंता या निर्णय लेने में भ्रम महसूस हो सकता है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है. तो आइए पंडित प्रवीण मिश्र के द्वारा जानते हैं कि चंद्रग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा।


    कर्क राशि (Cancer)

    कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर ग्रहण का प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है. आर्थिक मामलों, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें. परिवार, खासकर माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और वाणी में संयम बनाए रखें.
    उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें और ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.


    सिंह राशि (Leo)

    यह ग्रहण सिंह राशि में ही लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले 15 दिनों तक बड़े फैसले टालें, खर्चों पर नियंत्रण रखें और रिश्तों में संतुलन बनाए रखें.
    उपाय: ग्रहण के बाद स्नान करें, दान करें और भगवान शिव का अभिषेक करें.


    कन्या राशि (Virgo)

    कन्या राशि वालों के लिए यह ग्रहण खर्च और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है. अनावश्यक खर्च से बचें और नकारात्मक सोच से दूरी बनाए रखें. करियर से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करें.
    उपाय: भगवान शिव की पूजा करें, बेलपत्र अर्पित करें और नियमित मंत्र जाप करें.

  • Bihar: सीमांचल में अबैध घुसपैठ, जाली नोट, नशा-तस्करी के खिलाफ चलेगा बड़ा ऑपरेशन…

    Bihar: सीमांचल में अबैध घुसपैठ, जाली नोट, नशा-तस्करी के खिलाफ चलेगा बड़ा ऑपरेशन…


    पटना।
    बिहार (Bihar) के सीमांचल में अवैध घुसपैठ (Illegal Intrusion) के साथ ही भारतीय जाली नोट, मानव व्यापार और नशे के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के तीन दिवसीय दौरे के बाद केन्द्रीय एजेंसियां समेकित रूप से इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने में जुट गयी हैं। अभियान में एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी, एनआईए, ईडी, आईबी सहित स्थानीय प्रशासन और बिहार पुलिस का आपसी सहयोग रहेगा।

    दरअसल, केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि नेपाल से जुड़े बिहार के सीमाई इलाकों में अवैध घुसपैठ के साथ ही जाली भारतीय नोट, मानव व्यापार और नशीली दवाओं की तस्करी का बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है। यह नेटवर्क भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के साथ ही क्षेत्रीय संतुलन भी बिगाड़ रहा है। इसके लिए केन्द्रीय एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश मिला है। सूत्रों के मुताबिक एसएसबी, आईबी, बीएसएफ और आईटीबीपी को इंटेलिजेंस शेयरिंग कर तस्करी रूटों के लाइव मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मिली है।

    एनआईए और ईडी जाली नोट, नारकोटिक्स और मानव व्यापार के नेटवर्कों की बड़े स्तर पर जांच करेंगे। इसमें बिहार पुलिस का भी सहयोग मिलेगा। बैठक के बाद केन्द्रीय एजेंसियां इन नेटवर्क के अहम कड़ियों की पहचान और इसके फंडिंग पैटर्न को समझने में जुटी है।


    मदरसों की फंडिंग और चीनी भाषियों पर नजर

    केन्द्रीय बल और जांच एजेंसियों की सीमाई क्षेत्रों के मदरसों की विदेशी फंडिंग पर भी नजर है। संदिग्ध मदरसों के फंडिंग की जांच कराने का निर्देश है। खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि सीमाई क्षेत्र में चीनी भाषा सीखने-सिखाने वाले कई संस्थान खुल गए हैं। पहले इन संस्थानों को सिर्फ शैक्षिक इकाई के रूप में देखा जाता था, लेकिन, अब चीनी इंफ्लुएंसर्स की पहचान करते हुए उनके बैकग्राउंड को खंगाला जा सकता है। आशंका है कि जासूसी या सॉफ्ट वारफेयर के लिए चीनी भाषा प्रभावित लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक बैठक में सीमा से सटे इलाके में सुनियोजित रूप से कई अवैध बस्तियां बसाये जाने की सूचना मिली है। केन्द्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर अब सीमा क्षेत्र के अंदर 10 किमी तक ऐसी अवैध बस्तियों को हटाया जाएगा। बॉर्डर इलाके में रोहिंग्याओं की बढ़ी हुई सक्रियता को देखते हुए किशनगंज इलाके में सैन्य संगठनों की तैनाती बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है।

  • मार्च में तपने लगा मध्य प्रदेश, खरगोन में पारा 35°C के पार, रंगपंचमी पर बारिश की संभावना

    मार्च में तपने लगा मध्य प्रदेश, खरगोन में पारा 35°C के पार, रंगपंचमी पर बारिश की संभावना


    भोपाल । मार्च ने आते ही तेवर दिखा दिए हैं। महीने के पहले ही दिन प्रदेश में तेज धूप ने तापमान को ऊंचाई पर पहुंचा दिया। निमाड़ क्षेत्र में गर्मी का असर सबसे ज्यादा दिखा, जहां इंदौर संभाग के खरगोन में अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल समेत इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में भी दिनभर तेज धूप के कारण गर्मी महसूस की गई।

    अगले चार दिन और बढ़ेगा पारा

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले चार दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। मार्च की शुरुआत साफ मौसम और तीखी धूप के साथ हुई, जिससे दिन के तापमान में उछाल आया है। पचमढ़ी को छोड़ दें तो प्रदेश के लगभग सभी शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर दर्ज किया गया।

    धार, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, श्योपुर, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, सतना और सिवनी जैसे शहरों में तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। वहीं शनिवार-रविवार की रात भी अपेक्षाकृत गर्म रही। जबलपुर में रात का तापमान 19.3 डिग्री और सतना में 18.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धार, नर्मदापुरम, श्योपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, नरसिंहपुर, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, उमरिया और मलाजखंड में रात का पारा 17 डिग्री से ऊपर रहा।

    रंगपंचमी पर बदल सकता है मौसम

    भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक 4 मार्च को एक नया सिस्टम सक्रिय हो रहा है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में बनने वाले वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर दो दिन बाद मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है। इसके प्रभाव से रंगपंचमी के आसपास या उससे पहले प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।

    हालांकि इस सिस्टम के गुजरने के साथ ही दिन और रात दोनों के तापमान में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रह सकता है। विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि मार्च से मई के बीच प्रदेश में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। गर्मी का असर मार्च से ही दिखने लगेगा, जबकि हीट वेव की तीव्रता अप्रैल और मई में ज्यादा रहने की आशंका है।

    अप्रैल-मई में चरम पर होगी गर्मी

    मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल अप्रैल और मई सबसे ज्यादा तपेंगे। ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी का प्रभाव बना रहेगा। फिलहाल मार्च की शुरुआत ने ही संकेत दे दिए हैं कि इस बार गर्मी सामान्य से ज्यादा तीखी रहने वाली है, और आने वाले दिनों में तापमान का ग्राफ और ऊपर जा सकता है।
  • होली स्पेशल टिप्स: केमिकल रंगों से बचें और स्किन को सुरक्षित रखें

    होली स्पेशल टिप्स: केमिकल रंगों से बचें और स्किन को सुरक्षित रखें


    नई दिल्ली। होली रंगों और खुशियों का त्योहार है लेकिन आजकल बाजार में मिलने वाले रासायनिक Chemical युक्त रंग, गुलाल और पेंट हमारी त्वचा के लिए खतरा बन सकते हैं इससे त्वचा पर खुजली, रैशेज, जलन और रूखापन जैसी समस्याएं होना आम बात है इसलिए अगर आप चाहते हैं कि होली का मज़ा भी बना रहे और आपकी स्किन भी सुरक्षित रहे तो कुछ आसान और प्रभावी उपायों को अपनाना बेहद जरूरी है सबसे पहला कदम है तेल लगाना होली खेलने से कम से कम 20-30 मिनट पहले नारियल तेल, सरसों के तेल या ऑलिव ऑयल से पूरे शरीर पर अच्छी तरह मसाज करें यह तेल स्किन पर एक प्रोटेक्टिव बैरियर का काम करता है जिससे रंग पोर्स में नहीं जा पाते और बाद में उन्हें हटाना आसान हो जाता है

    इसके बाद जरूरी है सनस्क्रीन का इस्तेमाल होली अक्सर बाहर खेली जाती है धूप और रंगों के कॉम्बिनेशन से फोटोटॉक्सिक रिएक्शन हो सकता है जिससे स्किन जल सकती है या टैनिंग हो सकती है इसलिए तेल लगाने के बाद अच्छी मात्रा में वॉटरप्रूफ सनस्क्रीन लगाना न भूलें यह स्किन को सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाता है और रंग खेलने का आनंद बिना नुकसान के मिलता है

    होली पर हल्के और नैचुरल रंगों का चुनाव भी आपकी स्किन को सुरक्षित रखने का एक और तरीका है बाजार में मिलने वाले केमिकल रंगों के बजाय फूलों से बने रंग, हल्दी, चंदन या बेसन के रंग इस्तेमाल करें ये त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते और स्किन को आराम देते हैं इसके अलावा होली के दिन पानी का प्रॉपर इस्तेमाल करें अत्यधिक पानी से बचें और रंग लगाने के बाद तुरंत स्नान करें स्नान के लिए हल्के और माइल्ड साबुन या शॉवर जेल का उपयोग करें ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे

    होली के बाद स्किन की देखभाल करना भी जरूरी है स्नान के बाद मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें यह स्किन को हाइड्रेट रखता है और रंगों के कारण होने वाले नुकसान को कम करता है इसके साथ ही अगर त्वचा पर कोई एलर्जी या जलन महसूस हो तो ठंडे पानी से कमप्रेस करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें

    इस तरह से होली के दिन कुछ सावधानियों और घरेलू उपायों को अपनाकर आप रंगों का मज़ा भी ले सकते हैं और अपनी त्वचा को भी सुरक्षित रख सकते हैं होली सिर्फ एक त्योहार नहीं है यह खुशियों का उत्सव है और इसे सही तरीके से मनाना सबसे महत्वपूर्ण है ताकि त्योहार के बाद कोई परेशानी न हो

  • मौसमी थकान का सच: सर्दियों से वसंत में बदलाव पर शरीर क्यों महसूस करता है कमजोरी

    मौसमी थकान का सच: सर्दियों से वसंत में बदलाव पर शरीर क्यों महसूस करता है कमजोरी


    नई दिल्ली। जैसे ही सर्दियों का मौसम धीरे-धीरे खत्म होता है और वसंत की हल्की गर्मी शुरू होती है, कई लोग सामान्य से अधिक थकान महसूस करने लगते हैं। सुबह और रात में हल्की ठंड होती है और दिन में धूप निकलने से गर्मी लगती है। ऐसे में शरीर में सुस्ती, आलस और ऊर्जा की कमी महसूस होना आम बात हो गई है। इस स्थिति को सीजनल फटीग या मौसमी थकान कहते हैं।

    सीजनल फटीग तब होती है जब मौसम बदलता है और शरीर को नए तापमान और रोशनी के अनुसार एडजस्ट होना मुश्किल लगता है। सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं, जिससे प्राकृतिक प्रकाश कम मिलता है। इससे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन प्रभावित होता है, जो नींद, ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है। जैसे ही वसंत आता है, दिन लंबे और उजाले बढ़ते हैं। शरीर को इस बदलाव के अनुसार अपनी दिनचर्या और ऊर्जा स्तर एडजस्ट करने में समय लगता है, और इसी दौरान अधिक थकान, सुस्ती और मानसिक कमजोरी महसूस हो सकती है।

    सीजनल फटीग से ग्रस्त व्यक्ति को कई बार पर्याप्त नींद के बावजूद थकान बनी रहती है। दिनचर्या प्रभावित हो सकती है और काम या पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। व्यक्ति को मानसिक थकान, सुस्ती, आलस्य, एकाग्रता में कमी और कभी-कभी नींद न आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    इसका मुख्य कारण मौसम में बदलाव के कारण शरीर की ऊर्जा और हार्मोनल प्रतिक्रिया है। सर्दियों में ठंड के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, और वसंत में अचानक गर्मी और रोशनी बढ़ने पर शरीर को फिर से ऊर्जा स्तर संतुलित करने में समय लगता है। इसके अलावा विटामिन डी की कमी भी थकान में योगदान कर सकती है क्योंकि सर्दियों में धूप कम मिलती है।

    सीजनल फटीग से बचने के लिए कुछ उपाय बेहद मददगार साबित होते हैं। रोजाना हल्की एक्सरसाइज या योग करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और प्राकृतिक प्रकाश में समय बिताना भी मदद करता है। नींद पूरी करना, स्ट्रेस कम करना और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    यदि थकान लंबे समय तक बनी रहे, मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो, नींद न आए या सामान्य गतिविधियों में कठिनाई हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कभी-कभी ये लक्षण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं।

    इस प्रकार सर्दियों से वसंत के मौसम में शरीर का एडजस्ट होना और ऊर्जा स्तर में बदलाव सामान्य है, लेकिन समझदारी और सावधानी से आप सीजनल फटीग को कम कर सकते हैं और स्वस्थ दिनचर्या बनाए रख सकते हैं।

  • टी-20 विश्वकप में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की जीत पर मध्य प्रदेश में जश्न, जमकर हुई आतिशबाजी

    टी-20 विश्वकप में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की जीत पर मध्य प्रदेश में जश्न, जमकर हुई आतिशबाजी


    भोपाल।
    टी-20 विश्वकप के सुपर 8 मैच में वेस्ट इंडीज के खिलाफ भारत की शानदार जीत पर मध्य प्रदेश में क्रिकेट प्रेमियों ने जमकर जश्न मनाया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और गुना समेत कई दूसरे शहरों में क्रिकेट फैंस ने बड़ी स्क्रीन पर मैच देखा और भारतीय टीम की जीत का जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर आए। इस दौरान जमकर आतिशबाजी की गई।

    भारतीय क्रिकेट टीम ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेले गए टी-20 विश्व कप में सुपर-8 के आखिरी मुकाबले में वेस्टइंडीज को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन ने नाबाद 97 रन की मैच विनिंग पारी खेली। इस जीत के बाद मध्य प्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और गुना समेत कई शहरों में भारत की जीत का जश्न मनाया। प्रमुख चौराहों पर देर रात तक सड़कों पर उत्सव का माहौल बना रहा।

    क्रिकेट प्रेमी डीजे की धुनों पर थिरकते नजर आए, कई जगह आतिशबाजी की गई। भोपाल के बड़वाले महादेव मंदिर में देशभक्ति गीतों के बीच जीत का उत्सव मनाया गया। क्रिकेट प्रेमी एक-दूसरे को बधाई देते दिखे, तिरंगा लहराया गया और ‘भारत माता की जय’ के नारों से माहौल गूंज उठा। अब सभी की नजरें सेमीफाइनल मुकाबले पर टिकी हैं।

    भारत की जीत का जश्न इंदौर में भी देखने को मिल रहा है। इंदौर में बच्चे भी जश्न मना रहे हैं। हालांकि, इंदौर के राजवाड़ा पर माहौल नॉर्मल है। पिछली बार भारत की जीत के बाद भीड़ को कंट्रोल करना मुश्किल हो गया था। लाइट बंद करके हालात को कंट्रोल किया गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए आज पुलिस यहां किसी को रुकने नहीं दे रही है। युवा भी माहौल देखकर सीधे निकलते जा रहे हैं।

    भोपाल में युवा तिरंगा लेकर सड़कों पर जश्न मनाते नजर आए। भारत माता की जय के नारे लगाते हुए बड़ी स्क्रीन, पटाखे, ढोल-नगाड़े बजाकर डांस कर रहे हैं। देशभक्ति के गाने गाकर और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर जश्न मना रहे हैं। प्रमुख चौराहों पर देर रात तक उत्साह का माहौल नजर आ रहा है। वहीं, उज्जैन के टावर चौक पर क्रिकेट फैंस देर रात तक भारत की जीत का जश्न मना रहे हैं। सड़क पर आतिशबाजी कर रहे हैं।

  • आपसी सौहार्द और प्रेम पूर्वक त्यौहार मनाएं सभी नागिरक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    आपसी सौहार्द और प्रेम पूर्वक त्यौहार मनाएं सभी नागिरक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि त्यौहार सामाजिक सद्भाव का प्रतीक हैं। प्रदेश के सभी नागरिक आपसी सौहार्द और प्रेम पूर्वक त्यौहार मनाएं, इसके लिए मैदानी पुलिस अधिकारी और अमले को अतिरिक्त सजगता, सतर्कता और मुस्तैदी के साथ ड्यूटी निभानी होगी, ताकि कहीं भी, किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार शाम को आगामी सभी त्यौहारों से पहले प्रदेश में शांति और सुव्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुलिस कमिश्नर ऑफिस, भोपाल में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने निर्देश दिए कि त्यौहारों के चलते विशेष निगरानी और ऐहतियात बरती जाए। पुलिस सूचना-तंत्र को और भी अधिक सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्यों का पालन करें, जिससे किसी भी नागरिक को असुविधा न हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से विस्तृत समीक्षा की। इस उच्च स्तरीय बैठक में अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, डीजीपी कैलाश मकवाना, एडीजी इंटेलीजेंस ए. साईं मनोहर सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। प्रदेश के सभी रेंज आईजी, डीआईजी, पुलिस कमिश्नर्स और पुलिस अधीक्षकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़कर अपने-अपने क्षेत्रों की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्राधिकार में कानून-व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखें और इस संबंध में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। नागरिक बिना किसी बाधा के अपने-अपने पर्व आनंदपूर्वक मनाएं। शासन-प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ उनकी सुरक्षा में तत्पर होकर तैनात है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों के समय बेहद सतर्क रहें। हर घटना-दुर्घटना पर बारीक नजर बनाएं रखें। जनता में सुरक्षा का विश्वास कायम करें। समाज के अच्छे और प्रभावशाली लोगों को शांति समिति में लेकर आए। उन्होंने कहा कि सभी एसपी अपने पुलिस कंट्रोल रूम और मॉनिटरिंग सिस्टम को और भी अधिक बेहतर बनाएं। हर हाल में सुव्यवस्था बनी रहे, यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी दिनों में वे प्रदेश के पुलिस थानों और कार्यालयों का औचक निरीक्षण करेंगे। पुलिस थानों के कार्य-व्यवहार और पब्लिक फीडबैक के आधार पर उनकी ग्रेडिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधीक्षकों को अतिरिक्त सजगता और सतर्कता बरतने की हिदायत देते हुए कहा कि कानून- व्यवस्था के संबंध में जो भी कार्रवाई हो, वह पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में परीक्षाएं चल रही हैं। इसलिए सभी परीक्षा केन्द्रों और हॉस्टल्स पर निगरानी रखें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस विभाग को प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह सब पुलिस की समर्पित कार्यवाही और निष्ठा से ही संभव हो सका है। उन्होंने कहा की पुलिस अधिकारी सुनिश्चितकरें कि होलिका दहन गैर विवादित स्थलों पर ही हो। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि त्योहारों के चलते अधिक संख्या में यात्रियों के आवागमन के कारण बस ऑपरेटर्स द्वारा यात्रियों से अधिक किराया वसूल करने की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसी स्थिति पर रोक लगाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि त्यौहारों के दौरान विशेष संवेदनशीलता का परिचय दिया जाना चाहिए। किसी भी जगह किसी भी प्रकार की घटना या दुर्घटना पर पुलिस का क्विक रिस्पांस होना चाहिए। छोटी से छोटी घटना को संज्ञान में लें। शुष्क दिवस के प्रावधान का पूरी कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाये। सभी पुलिस अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में व्यवस्थाओं में और अधिक कसावट लायें। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में सभी मैदानी पुलिस अधिकारियों ने त्यौहारों के मद्देनजर की गई तैयारियों की जानकारी दी। सभी ने कहा कि शांति समिति की बैठकें कर सभी से लगातार बातचीत की जा रही है।

  • मध्य प्रदेश में होली पर तीन मार्च के साथ चार मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश

    मध्य प्रदेश में होली पर तीन मार्च के साथ चार मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में इस वर्ष होली के त्यौहार पर दो दिन अवकाश रहेगा। खग्रास चंद्रग्रहण के कारण रंगों का उत्सव 3 मार्च की बजाय 4 मार्च को मनाया जाएगा। राज्य सरकार ने 3 मार्च के साथ 4 मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा रविवार को जारी आदेश में कहा गया है कि होली के पावन पर्व के उपलक्ष्य में 4 मार्च को भी निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेंट्स एक्ट-1881 के अधीन सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाश घोषित किया गया है। राज्य शासन द्वारा होली के पावन पर्व पर पूर्व में 3 मार्च को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जा चुका है।

    इधर प्रदेश में होली की तैयारियां जोरों पर हैं। प्रदेश के हजारों स्थानों पर सोमवार को होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस बार होली का मुख्य दिन कुछ अलग रहेगा, क्योंकि तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान सूतक काल लागू रहता है और इस अवधि में उत्सव नहीं मनाया जाता है, इसलिए इस साल होली का रंगोत्सव दहन के दूसरे दिन के बजाए चार मार्च बुधवार को तीसरे दिन मनाया जाएगा।

    इस बार होली उत्सव की शुरुआत दो मार्च की रात से होगी, जब पूरे राज्य में होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद रंग उत्सव चार मार्च को मनाया जाएगा। प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी जिलों में होली समारोह को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

    होली का पर्व धार्मिक रीति-रिवाज और खगोलीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मनाया जाता है। जनता को रंगों और खुशियों के साथ-साथ सावधानी और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है। यह बदलाव इस पर्व को सुरक्षित और आनंददायक बनाने के लिए किया गया है।