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बॉलीवुड की होली स्पेशल हिट्स, ‘रंग बरसे’ से लेकर ‘होली के दिन’ तक, आज भी हैं एवरग्रीन
नई दिल्ली: होली का त्योहार बस आने ही वाला है और हर तरफ उत्सव का माहौल है। रंग, गुलाल और मिठाईयों के बीच बॉलीवुड के एवरग्रीन होली गाने इस त्योहार को और भी खास बना देते हैं। ये गाने सिर्फ संगीत नहीं बल्कि यादों का हिस्सा बन गए हैं और दशकों से दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। आज हम बात करेंगे ऐसे 5 गानों की, जो हर होली को जश्न में बदल देते हैं।सबसे पहले आते हैं नरगिस दत्त और राजकुमार पर फिल्माए गए गीत ‘होली आई रे’ की। 1950 में रिलीज हुए इस गाने को शकील बदायूनी ने लिखा था। यह गाना बॉलीवुड के इतिहास में होली के सबसे बेहतरीन और कालजयी गीतों में से एक माना जाता है। आज भी जब यह गाना बजता है, त्योहार की खुशियाँ दोगुनी हो जाती हैं।
1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ का गाना ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ भी हर होली पर सुना और गाया जाता है। हेमा मालिनी और धर्मेंद्र पर फिल्माया गया यह गाना आनंद बक्शी के लिखे शब्दों और मस्त धुन के कारण हमेशा लोकप्रिय रहा। यह गाना इस त्योहार की मस्ती और उमंग का सबसे बेहतरीन प्रतीक बन चुका है।
बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में ‘सिलसिला’ का गाना ‘रंग बरसे’ कभी पीछे नहीं रहता। अमिताभ बच्चन और रेखा पर फिल्माया गया यह गीत त्रिकोणीय प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि में बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गाने के बोल हरिवंश राय बच्चन ने लिखे थे और आज भी यह गाना होली पार्टीज़ और उत्सवों में सबका फेवरेट बना हुआ है।
1990 के दशक की यादों में बसे जूही चावला और शाहरुख खान के फिल्म ‘डर’ का गाना ‘अंग से अंग लगाना’ भी होली की धूम में अपना खास स्थान रखता है। इस गीत को आनंद बक्शी ने लिखा और विनोद राठौड़, अल्का याग्निक और सुदेश भोसले ने अपनी आवाज दी। शाहरुख का नेगेटिव रोल और जूही के साथ उनकी केमिस्ट्री इसे आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाती है।
और अंत में, अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गाना ‘होली खेले रघुबीरा’ हमेशा होली के रंगों में चार चाँद लगा देता है। इसकी धुन और गीतकार की कला इसे हर होली पार्टी में बजाने योग्य बनाती है।
ये पांच गाने सिर्फ संगीत का आनंद नहीं देते, बल्कि हर बार होली का जश्न और उत्साह दोगुना कर देते हैं। चाहे यह पुरानी फिल्में हों या आधुनिक पार्टीज़, इन गानों की धुन और बोल हर उम्र के लोगों के लिए होली के त्योहार को और रंगीन बना देते हैं। इस होली, इन गानों को सुनकर आप भी अपने घर और दोस्तों के साथ त्योहार का मजा दोगुना कर सकते हैं।
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ग्वालियर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: डबरा में 1 करोड़ की सरकारी जमीन अतिक्रमण से मुक्त
ग्वालियर । ग्वालियर जिले में सरकारी जमीनों पर कब्जा हटाने की मुहिम तेज हो गई है। इसी क्रम में रविवार को जिला प्रशासन ने डबरा के ग्राम सहराई में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग एक करोड़ रुपए मूल्य की शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। कार्रवाई कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर की गई। राजस्व विभाग की टीम ने ग्राम सहराई में खसरा नंबर 127 और 320 पर स्थित कुल 1.07 हेक्टेयर जमीन को कब्जे से मुक्त कराया।जानकारी के अनुसार कुछ किसानों ने इस सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था और जेसीबी मशीन की मदद से मेड़ बनाकर सीमांकन कर लिया था। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी से बनाई गई मेड़ को हटवाया और जमीन को पुनः शासकीय नियंत्रण में लिया। कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस बल तैनात रहा। डबरा नगर पालिका का अमला भी मौके पर मौजूद रहा।अतिक्रमण हटाने के बाद मुक्त कराई गई भूमि को विधिवत रूप से डबरा नगर पालिका को सौंप दिया गया। प्रशासन के अनुसार इस जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य करीब एक करोड़ रुपए है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार की मंशा के अनुरूप जिलेभर में शासकीय भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -

संजय कपूर की वसीयत विवाद में नया मोड़, करिश्मा कपूर के बच्चों और मां रानी कपूर को कोर्ट से राहत
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता करिश्मा कपूर के बच्चों और दिवंगत व्यवसायी संजय कपूर की मां रानी कपूर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। यह राहत उस विवादित वसीयत से जुड़ी है, जिसमें संजय कपूर की कथित संपत्ति लगभग 30,000 करोड़ रुपये बताई गई है। परिवार में लंबे समय से इस वसीयत की प्रामाणिकता को लेकर विवाद जारी था और अब कोर्ट ने इसके फॉरेंसिक जांच की अनुमति दे दी है।कोर्ट के आदेश के अनुसार, यह जांच 10 मार्च को होगी और एक्सपर्ट्स वसीयत की बारीकी से जांच करेंगे। वसीयत फिलहाल कोर्ट की सुरक्षित कस्टडी में सीलबंद लिफाफे में रखी गई है। जांच के दौरान किसी को भी इसकी फोटो या कॉपी लेने की अनुमति नहीं होगी।
यह विवाद उस वसीयत को लेकर है, जिसमें कथित रूप से संजय कपूर की संपत्ति उनकी पत्नी प्रिया कपूर और उनके बच्चे के नाम कर दी गई थी। करिश्मा कपूर के दोनों बच्चों और संजय की मां रानी कपूर ने इस दावे को चुनौती दी थी और अदालत से फॉरेंसिक जांच की मांग की थी, ताकि यह साबित किया जा सके कि वसीयत असली है या नहीं।
संजय कपूर की विधवा प्रिया कपूर ने इस जांच का विरोध किया था। उनके वकीलों का कहना था कि अभी इस तरह की जांच की जरूरत नहीं है। लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि जांच के दौरान प्रिया के वकील मौजूद रह सकते हैं, लेकिन दस्तावेज की कोई भी फोटो या कॉपी ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
जॉइंट रजिस्ट्रार गगनदीप जिंदल ने 26 फरवरी को आदेश दिया कि करिश्मा और रानी कपूर अपने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स के साथ 10 मार्च दोपहर 3 बजे इस मूल वसीयत की जांच कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान सभी पक्षों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो सके।
इस फैसले के साथ ही करिश्मा कपूर के बच्चों और रानी कपूर को कानूनी लड़ाई में बड़ा फायदा मिला है। यह कदम इस विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें 10 मार्च पर टिकी हैं, जब एक्सपर्ट्स वसीयत का बारीकी से विश्लेषण करेंगे और इसका असली रूप सामने आएगा।
इस मामले ने बॉलीवुड और कारोबार जगत में खूब चर्चा बटोरी है, क्योंकि 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति और परिवार के बीच लंबा विवाद इसे बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल बना देता है। कोर्ट द्वारा फॉरेंसिक जांच की अनुमति मिलने के बाद अब यह स्पष्ट होने की संभावना है कि वसीयत वास्तविक है या इसमें किसी तरह की अनियमितता है।
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वडोदरा-खातीपुरा और बांद्रा टर्मिनस-गोरखपुर के लिए होली स्पेशल ट्रेनें शुरू, यात्रियों के लिए राहत
नई दिल्ली । होली के रंग और उल्लास के बीच भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और बढ़ती भीड़ को देखते हुए वडोदरा-खातीपुरा और बांद्रा टर्मिनस-गोरखपुर मार्ग पर स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने का फैसला किया है। मंडल रेलवे की ओर से इस अवसर पर विशेष ट्रेनें चलाकर यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान किया जाएगा।वडोदरा से खातीपुरा के लिए 09103 वडोदरा-खातीपुरा स्पेशल ट्रेन प्रत्येक रविवार रात 9.35 बजे वडोदरा से प्रस्थान करेगी। यह ट्रेन दाहोद, रतलाम, मंदसौर, नीमच और चित्तौड़गढ़ होते हुए अगले दिन दोपहर 2.10 बजे खातीपुरा पहुंचेगी। इसके विपरीत, 09104 खातीपुरा-वडोदरा स्पेशल ट्रेन सोमवार रात 8.55 बजे खातीपुरा से रवाना होकर चित्तौड़गढ़, नीमच, मंदसौर, रतलाम और दाहोद स्टेशनों से होते हुए मंगलवार सुबह 11.30 बजे वडोदरा पहुंचेगी। वडोदरा-खातीपुरा स्पेशल ट्रेन 1 मार्च से 29 मार्च तक और खातीपुरा-वडोदरा ट्रेन 2 मार्च से 30 मार्च तक चलेगी।
इन ट्रेनों में सेकंड एसी, थर्ड एसी, थर्ड एसी (इकोनॉमी), स्लीपर क्लास और द्वितीय श्रेणी के सामान्य कोच उपलब्ध होंगे। ट्रेन रूट में गोधरा, दाहोद, रतलाम, मंदसौर, नीमच, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बिजयनगर, नसीराबाद, अजमेर, किशनगढ़ और जयपुर सहित कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकती है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक कनेक्टिविटी मिलेगी।
साथ ही, बांद्रा टर्मिनस से गोरखपुर के लिए 09019 स्पेशल ट्रेन 1 मार्च को सुबह 8.35 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, शुजालपुर और सीहोर जैसे स्टेशनों से होते हुए सोमवार रात 8.40 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। वहीं, गोरखपुर से बांद्रा टर्मिनस के लिए 09020 गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल ट्रेन 2 मार्च को सुबह 11.35 बजे गोरखपुर से चलकर सीहोर, शुजालपुर, मक्सी, उज्जैन, नागदा, रतलाम और दाहोद होते हुए बुधवार सुबह 9.45 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी।
इन स्पेशल ट्रेनों का रूट भी व्यापक है। दोनों दिशाओं में बोरीवली, पालघर, दहानू रोड, वापी, वलसाड, नवसारी, उधना, सयान, भरूच, वडोदरा, गोधरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, शुजालपुर, सीहोर, संत हिरदाराम नगर, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, बाराबंकी, गोंडा, मनकापुर, बस्ती और खलीलाबाद सहित कई महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल हैं।
रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि यह स्पेशल ट्रेनें होली के दौरान बढ़ी हुई भीड़ और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चलाई जा रही हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि टिकट पहले से बुक कर लें, ताकि यात्रा सुविधाजनक और आरामदायक हो। इन ट्रेनों के संचालन से होली पर्व में यात्रा करने वाले लोगों को लंबी दूरी तय करने में समय और सुविधा दोनों का लाभ मिलेगा।
यह कदम न केवल यात्रियों के लिए राहत प्रदान करेगा, बल्कि रेलवे ट्रैफिक को भी संतुलित बनाए रखने में मदद करेगा। यात्रियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे सुरक्षित और आरामदायक तरीके से होली की यात्रा का आनंद ले सकें।
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होली से पहले उज्जैन पुलिस का एक्शन मोड: गुंडा बदमाशों को थाने बुलाकर चेतावनी, हुड़दंग किया तो होगी सख्त कार्रवाई
नई दिल्ली। होली और रंगपंचमी को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए उज्जैन पुलिस ने जिलेभर में विशेष अभियान चलाया है। पुलिस ने गुंडा सूची में दर्ज बदमाशों, निगरानी अपराधियों और आदतन उपद्रवियों को थानों में तलब कर कड़ी चेतावनी दी है कि त्योहार के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर जिले के सभी थाना क्षेत्रों में एक साथ यह कार्रवाई की गई। त्योहारों के दौरान शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सक्रिय असामाजिक तत्वों की काउंसलिंग की गई और उन्हें भविष्य में किसी भी आपराधिक गतिविधि से दूर रहने की हिदायत दी गई।
स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि कोई भी व्यक्ति होली या रंगपंचमी के दौरान मारपीट, जबरन रंग डालना, महिला उत्पीड़न, धार्मिक भावनाएं भड़काने, अवैध शराब या नशीले पदार्थों की बिक्री अथवा सेवन, या किसी भी प्रकार की शांति भंग की गतिविधि में शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अभियान के तहत संबंधित आरोपियों से प्रतिबंधात्मक धाराओं में बांड भरवाए गए हैं। साथ ही उनके डोजियर अपडेट किए गए, जिनमें आपराधिक रिकॉर्ड, वर्तमान गतिविधियों और संभावित जोखिम का विवरण दर्ज किया गया। थानों में बुलाए गए लोगों को शांति और सौहार्द बनाए रखने की शपथ भी दिलाई गई।
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि होली को लेकर पिछले 15 दिनों से लगातार बैठकें की जा रही हैं। सभी आयोजनकर्ताओं से समन्वय स्थापित किया गया है और प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। होलिका दहन और अन्य आयोजनों में कोई अव्यवस्था न हो, इसके लिए आयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं और बच्चे भी सुरक्षित माहौल में त्योहार मना सकें, यह पुलिस की प्राथमिकता है। हर थाने में उपद्रवी तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ बाउंडओवर की कार्रवाई की गई है। जिलेभर में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, ताकि होली और रंगपंचमी सौहार्द और भाईचारे के साथ संपन्न हो सकें।
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मिलावटी खोया से होली पर खतरा: घर पर पहचानें शुद्ध खोया
नई दिल्ली । होली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ गई है। इसी बीच मिलावटखोर मिलावटी खोया बेचकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने 12,800 किलो खोया बिक्री पर रोक दिया और 760 क्विंटल से अधिक खोया नष्ट कराया। ये कोई अलग मामला नहीं है, देशभर से मिलावटी खोया मिलने और उसकी बिक्री पर कार्रवाई की खबरें लगातार आ रही हैं।मिलावटी खोया दिखने में असली जैसा लगता है, लेकिन इसके सेवन से पेट दर्द, अपच, गैस, दस्त, फूड पॉइजनिंग, लिवर और किडनी की समस्या और हार्ट हेल्थ पर नकारात्मक असर हो सकता है। अगर इसमें डिटर्जेंट या यूरिया जैसी हानिकारक चीजें मिली हों, तो यह केमिकल टॉक्सिसिटी का कारण बन सकती है।
डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली के अनुसार मिलावटी खोया अक्सर स्टार्च, मैदा, सिंथेटिक दूध, रिफाइंड तेल या वनस्पति घी, यहां तक कि साबुन या डिटर्जेंट जैसे हानिकारक पदार्थ मिलाकर बनाया जाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, हार्ट डिजीज का खतरा होता है और पाचन तंत्र प्रभावित होता है।
घर पर असली और नकली खोया पहचानना आसान है। FSSAI के अनुसार असली खोया मुलायम, दानेदार और हल्का गुलाबी रंग का होता है, जबकि मिलावटी खोया चिपचिपा, बहुत चिकना या रासायनिक गंध वाला हो सकता है।
अगर आप घर पर खोया बनाना चाहते हैं तो प्रक्रिया सरल है। दूध को कड़ाही में उबालें, मीडियम आंच पर लगातार चलाएं और किनारों पर जमने वाली मलाई को वापस मिलाएं। जैसे-जैसे पानी सूखता है, दूध गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा हो जाएगा। जब मिश्रण पूरी तरह गाढ़ा होकर एक जगह इकट्ठा हो जाए, तो गैस बंद करें। ठंडा होने पर खोया और सख्त और दानेदार हो जाएगा। इसे एयरटाइट डिब्बे में फ्रिज में 4-5 दिन या फ्रीजर में महीने भर रखा जा सकता है।
अगर किसी दुकान पर मिलावटी खोया मिलने का शक हो तो पहले दुकानदार से बात करें। संतोषजनक जवाब न मिले तो FSSAI के टोल-फ्री नंबर 1800112100 पर शिकायत दर्ज करें। स्थानीय पुलिस और जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग को भी सूचना दी जा सकती है। शिकायत के लिए सैंपल और रसीद सुरक्षित रखें।
मिलावटी फूड बेचने वालों पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 के तहत कार्रवाई होती है। इसमें भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द, दुकान सील और गंभीर मामलों में जेल की सजा शामिल हो सकती है। फूड सेफ्टी ऑफिसर जांच के बाद सैंपल लैब में भेजते हैं और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हैं। होली पर मिठाइयों का मज़ा लेते हुए मिलावटी खोया से बचना बेहद जरूरी है। घर पर शुद्ध खोया बनाएं और सुरक्षित मिठाइयों का आनंद लें।
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महाकाल में अब हर आरती सशुल्क! 250 रुपए पास पर मचा बवाल, भक्त बोले- आस्था पर क्यों लगा ‘टिकट’?
उज्जैन । उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए शुल्क लागू किए जाने के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब श्रद्धालु इन आरतियों में शामिल तभी हो सकेंगे, जब उनके पास निर्धारित पास होगा। मंदिर समिति ने यह व्यवस्था भस्म आरती की तर्ज पर शुरू की है। समिति का अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 6 लाख रुपए की अतिरिक्त आय होगी, यानी हर महीने करीब 1.80 करोड़ और सालाना लगभग 22 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।मंदिर प्रशासन का तर्क है कि इस कदम से भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। आरती की बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है, जिसे पारदर्शिता की दिशा में कदम बताया जा रहा है। हालांकि जिन श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं है या तकनीकी दिक्कतें आती हैं, उनके लिए केवल एक हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है।
दूसरी ओर, कई श्रद्धालुओं ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि भस्म आरती पहले से सशुल्क है, लेकिन संध्या और शयन आरती में भी शुल्क लागू करना आस्था पर आर्थिक बोझ डालना है। कुछ भक्तों का आरोप है कि 250 रुपए देने वालों को बेहतर स्थान मिलता है, जबकि अन्य श्रद्धालुओं को सीमित या चलित दर्शन तक ही सीमित कर दिया जाता है। इसे वे “आस्था में भेदभाव” बता रहे हैं।
महाकाल से जुड़े भक्त मंडलों का कहना है कि वर्षों से नियमित रूप से आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को अचानक शुल्क व्यवस्था के कारण असुविधा हो रही है। उनका तर्क है कि मंदिर में सभी भक्त समान हैं और आर्थिक आधार पर भेद नहीं होना चाहिए।
मंदिर के कुछ पुजारियों ने भी कहा है कि शुल्क लागू करने से पहले उनसे औपचारिक परामर्श नहीं लिया गया। उनका सुझाव है कि यदि शुल्क व्यवस्था लागू की गई है, तो कम से कम 25 प्रतिशत स्थान ऐसे श्रद्धालुओं के लिए ऑफलाइन आरक्षित किए जाएं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते।
राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले पर मतभेद सामने आए हैं। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब मंदिर की आय दान और अन्य स्रोतों से पहले ही पर्याप्त है, तो अतिरिक्त शुल्क की आवश्यकता क्यों पड़ी। वहीं महापौर ने कहा कि वे मंदिर समिति के पदेन सदस्य हैं, लेकिन इस निर्णय पर उनसे औपचारिक सहमति या चर्चा नहीं की गई।
फिलहाल मंदिर प्रशासन अपने निर्णय पर कायम है और इसे व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम बता रहा है। दूसरी ओर, श्रद्धालुओं और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के चलते यह मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है। अब देखना होगा कि विरोध के बाद मंदिर समिति इस व्यवस्था में कोई बदलाव करती है या नहीं।


