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  • भोपाल में 27 क्विंटल मावा जब्त: टोल प्लाजा पर खाद्य सुरक्षा टीम की बड़ी कार्रवाई, मिलावट की आशंका

    भोपाल में 27 क्विंटल मावा जब्त: टोल प्लाजा पर खाद्य सुरक्षा टीम की बड़ी कार्रवाई, मिलावट की आशंका



    भोपाल। भोपाल के खजूरी सड़क स्थित टोल प्लाजा के पास खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को एक वाहन से लगभग 27 क्विंटल मावा जब्त किया। इस कार्रवाई के दौरान विभाग ने मावा के साथ 45 किलो पनीर भी बरामद किया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि मावा और पनीर में मिलावट की आशंका है, इसलिए इसे आगे की जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है। इसकी बाजार कीमत लगभग 6 लाख रुपये आंकी गई है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई होली के त्योहार से पहले की गई है। त्योहार के चलते मिठाई और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग ने होटलों, रेस्टोरेंट और डेयरी संचालकों पर विशेष निगरानी रखी हुई है। विभाग के अमले ने लगातार दुकानों, वाहनों और गोदामों में छापेमारी कर नमूने इकट्ठा किए हैं।

    इस दौरान मावा और पनीर के पांच-पांच नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मिलावट पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।

    अधिकारियों के अनुसार पिछले एक महीने में विभाग की टीम ने भोपाल के विभिन्न इलाकों में नमकीन, मिठाई, पनीर, तेल, मैदा, बेसन सहित अन्य खाद्य पदार्थों के कुल 234 नमूने लिए हैं। इन नमूनों की जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    खाद्य सुरक्षा विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे संदिग्ध या मिलावटयुक्त खाद्य पदार्थों की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। विभाग ने कहा कि त्योहारों के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। मावा और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों में मिलावट होने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    भोपाल में यह कार्रवाई विभाग की सतर्कता और त्योहारों से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति जागरूकता को दर्शाती है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे समय पर मिलावट रोकने के लिए नियमित जांच और वाहन चेकिंग जरूरी है। साथ ही, टोल प्लाजा जैसी संवेदनशील जगहों पर कार्रवाई से अवैध व्यापारियों पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है।

    इस बड़ी बरामदगी के साथ ही विभाग ने चेतावनी दी है कि मिलावट और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का व्यापार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता से आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा के लिए केवल प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पाद ही खरीदें।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्य तिथि पर किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्य तिथि पर किया नमन


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रसेवक और महान समाज सुधारक नानाजी देशमुख की पुण्य तिथि पर उन्हें विनम्र नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारत रत्न से सम्मानित स्वर्गीय नानाजी देशमुख ने देश की प्रगति के लिए ग्रामीण विकास शिक्षा और गरीब कल्याण को आधार बनाया। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंचाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नानाजी देशमुख का कृतित्व उनके विचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण राष्ट्र के नव निर्माण की दिशा में सदैव प्रेरणादायी रहेंगे। उन्होंने ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की परिकल्पना को साकार करने के लिए जो कार्य किए वे आज भी प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते रहेंगे।डॉ. यादव ने ईश्वर से प्रार्थना की कि हम सभी नानाजी देशमुख के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

  • 2 मार्च से प्रदेशभर में बसें थमने को तैयार: सुगम लोक परिवहन सेवा के विरोध में 29 हजार ऑपरेटरों की हड़ताल, होली में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ेंगी

    2 मार्च से प्रदेशभर में बसें थमने को तैयार: सुगम लोक परिवहन सेवा के विरोध में 29 हजार ऑपरेटरों की हड़ताल, होली में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ेंगी


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में 2 मार्च से लगभग 29 हजार बसों के संचालन पर संकट गहरा गया है। मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा की योजना के विरोध में प्रदेश भर के बस ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले हैं। उज्जैन में ही करीब 5 हजार बसें बंद रहने की संभावना है। यह हड़ताल विशेष रूप से होली की छुट्टियों के समय हो रही है, जब बड़ी संख्या में लोग अपने घर जाने के लिए बस सेवा पर निर्भर होते हैं, जिससे यात्रियों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।

    बस संचालकों ने अपनी मांगों के समर्थन में बसों पर हड़ताल के पोस्टर लगाए हैं। मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन ने सरकार को पहले भी कई बार अपनी चिंताएं और विरोध पत्र सौंपे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा लागू होने पर ऑपरेटरों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और कई लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसके अलावा, यदि नई नीति लागू होती है तो बस किराया लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिससे आम यात्रियों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा।

    प्राइम रूट बस संगठन के अध्यक्ष पंडित गोविंद शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार ने 24 दिसंबर को मोटर अधिनियम के तहत नई कंपनी बनाकर बस संचालन की घोषणा की है। नई नीति के अनुसार, जो भी कंपनी टेंडर में अधिक राशि देगी, वही बस सेवा का संचालन करेगी। यह कदम ऑपरेटरों के लिए अनुचित और अस्तित्व संकट का कारण बन सकता है। अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो 2 मार्च से प्रदेश भर में बसों के पहिए थम जाएंगे।

    हालांकि, सरकार का दावा है कि अप्रैल में नई कंपनी के तहत बसों का संचालन शुरू होगा। इसके लिए बसों को अनुबंधित (लीज पर लेने) किया जाएगा और संचालन चरणबद्ध तरीके से होगा। इंदौर संभाग में बस संचालन एआइसीटीएसएल के हाथ में रहेगा, जबकि अन्य संभागों में अलग-अलग सहायक कंपनियां जिम्मेदारी संभालेंगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से यात्रियों को सुरक्षित, अनुशासित और नियमित बस सेवा मिलेगी, और ऑपरेटरों की आय भी मौजूदा व्यवस्था से बेहतर होगी।

    बस ऑपरेटरों और सरकार के बीच यह टकराव यात्रियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञ और यात्री संगठन हड़ताल से पहले वैकल्पिक परिवहन के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। निजी वाहन या ट्रेन के जरिए यात्रा की संभावना बढ़ सकती है। विशेषकर होली के समय यह हड़ताल लाखों यात्रियों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है।

    इस पूरे मामले से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में परिवहन नीति लागू करने से पहले सरकार और ऑपरेटरों के बीच संवाद और समाधान जरूरी है। दोनों पक्षों को साझा समाधान निकालना होगा ताकि यात्रियों की परेशानियां कम से कम हों। हड़ताल से आम जनता पर भारी असर पड़ सकता है, इसलिए प्रशासन को भी यातायात व्यवस्था के वैकल्पिक इंतजाम करने की आवश्यकता है।

    यदि बस ऑपरेटरों की मांगें नहीं मानी गईं तो 2 मार्च से प्रदेशभर में बस संचालन ठप रह सकता है, जिससे होली के समय यात्रा करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। यात्रियों को अपने यात्रा प्लान में बदलाव करने और वैकल्पिक साधनों के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।

  • 1 मार्च से सख्ती: सिम कार्ड के बिना नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram? सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से किया इनकार

    1 मार्च से सख्ती: सिम कार्ड के बिना नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram? सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से किया इनकार

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सिम बाइंडिंग नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। 1 मार्च से लागू होने जा रहे इन नए प्रावधानों के तहत यदि मोबाइल फोन में वह सक्रिय सिम कार्ड मौजूद नहीं है जिससे मैसेजिंग ऐप रजिस्टर है तो WhatsApp Telegram और Signal जैसे ऐप्स का उपयोग सीमित या बंद हो सकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर फ्रॉड फर्जी नंबरों और डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा पहले की नीति के तहत सिम बाइंडिंग नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

    क्या होगा बड़ा बदलाव? नए नियमों के अनुसार:

    जिस सिम से अकाउंट रजिस्टर है उसका मोबाइल में सक्रिय रहना जरूरी होगा। यदि सिम मौजूद नहीं है तो ऐप की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। WhatsApp Web या कंप्यूटर लॉगिन हर 6 घंटे में स्वतः लॉगआउट हो जाएगा। दोबारा उपयोग के लिए QR कोड स्कैन करना होगा। भारत में करोड़ों यूजर्स एक ही नंबर से कई डिवाइस पर WhatsApp चलाते हैं। ऐसे में जिन यूजर्स ने अलग अलग डिवाइस पर अकाउंट एक्टिव कर रखा है या जो बार बार सिम बदलते रहते हैं वे सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं।

    छोटे कारोबारियों पर असर

    विशेषज्ञों का अनुमान है कि 60–80% तक छोटे व्यवसाय जो WhatsApp आधारित संचार और ऑर्डर मैनेजमेंट पर निर्भर हैं उन्हें शुरुआती दिनों में ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर वे बिजनेस जो एक नंबर को कई सिस्टम पर चलाते हैं उन्हें हर कुछ घंटों में दोबारा लॉगिन की प्रक्रिया अपनानी होगी।

    सिर्फ WhatsApp नहीं व्यापक असर

    यह बदलाव केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है। Telegram Signal और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं। यानी यह डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में एक बड़ा नीतिगत परिवर्तन साबित हो सकता है। फिलहाल सरकार अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है। 1 मार्च की डेडलाइन को लेकर टेक कंपनियों और करोड़ों यूजर्स की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नियमों का क्रियान्वयन किस स्तर पर और किस सख्ती से किया जाता है और आम यूजर्स के डिजिटल अनुभव में कितना बदलाव आता है।

  • 3 साल की अनिका के लिए समय से दौड़: 13.5 किलो से पहले लगना है 9 करोड़ का इंजेक्शन, अब भी चाहिए 3.40 करोड़

    3 साल की अनिका के लिए समय से दौड़: 13.5 किलो से पहले लगना है 9 करोड़ का इंजेक्शन, अब भी चाहिए 3.40 करोड़


    इंदौर। तीन साल दो महीने की मासूम अनिका शर्मा इन दिनों जिंदगी की सबसे कठिन जंग लड़ रही है। वह दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप 2 से पीड़ित है। डॉक्टरों ने साफ कहा है कि उसे 9 करोड़ रुपए का विशेष इंजेक्शन 13.5 किलो वजन होने से पहले लगना जरूरी है। फिलहाल उसका वजन 10.5 किलो है। अगर वजन तय सीमा से ऊपर चला गया तो इलाज का यह आखिरी मौका भी हाथ से निकल सकता है।

    अनिका के माता पिता पिछले तीन महीनों से उसका वजन नियंत्रित रखने के लिए सख्त डाइट फॉलो करवा रहे हैं। मां सरिता शर्मा बताती हैं कि बच्ची को रोटी चावल या वजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ नहीं दिए जा रहे। उसे पपीता सीमित फ्रूट जूस चाय बिस्किट और मखाना बादाम अखरोट से बना हलवा दिया जाता है ताकि पेट भी भरे और वजन भी न बढ़े। कई बार अनिका सुबह से शाम तक भूखी रह जाती है क्योंकि वह रोज एक जैसा खाना खाकर परेशान हो चुकी है।

    इलाज के लिए जो इंजेक्शन लगना है वह अमेरिकी कंपनी बनाती है और बेहद महंगा है। दिल्ली स्थित AIIMS से मिले प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार इलाज के दो मापदंड थे पहला दो साल की उम्र से पहले इंजेक्शन लगना चाहिए था जो निकल चुका है; दूसरा 13.5 किलो वजन से पहले इंजेक्शन लगना अनिवार्य है। अब यही अंतिम उम्मीद बची है।

    परिवार नवंबर से क्राउड फंडिंग अभियान चला रहा है। अब तक 5 करोड़ 60 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं लेकिन 3 करोड़ 40 लाख रुपए अभी और चाहिए। अनिका के पिता प्रवीण शर्मा बताते हैं कि इंदौर के अलावा रतलाम बदनावर बड़नगर में कैंप लगाकर सहयोग मांगा गया है और अब खंडवा व उज्जैन में अभियान की तैयारी है। कई लोगों और हस्तियों ने भी वीडियो संदेश जारी कर मदद की अपील की है।

    बीमारी की गंभीरता समझाते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. हेमंत जैन बताते हैं कि एसएमए एक दुर्लभ न्यूरो मस्क्यूलर जेनेटिक बीमारी है जिसमें रीढ़ की हड्डी की मोटर नर्व सेल्स धीरे धीरे नष्ट होने लगती हैं। दिमाग से मांसपेशियों तक सिग्नल नहीं पहुंच पाते जिससे बच्चा शरीर पर नियंत्रण खोने लगता है। समय के साथ बैठना चलना निगलना और सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है।

    डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी की पहचान गर्भावस्था में भी संभव है। समय रहते इलाज मिल जाए तो स्थिति बेहतर हो सकती है लेकिन देरी होने पर नष्ट हुई कोशिकाएं दोबारा जीवित नहीं की जा सकतीं। इंजेक्शन केवल नई कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है।

    अनिका की मां कहती हैं अगर उसका वजन बढ़ गया तो हमारी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। परिवार को अब भी समाज से उम्मीद है कि शेष राशि जुटाकर मासूम की जिंदगी बचाई जा सके।

  • सावधान! बचपन का असामान्य वजन बढ़ा सकता है युवावस्था में बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

    सावधान! बचपन का असामान्य वजन बढ़ा सकता है युवावस्था में बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। हर माता पिता अपने बच्चे की लंबाई और वजन को लेकर चिंतित रहते हैं। अक्सर घरों में बच्चे के दुबलेपन या मोटापे को केवल खान पान और खराब लाइफस्टाइल से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस धारणा को आंशिक रूप से बदल दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों के वजन और बॉडी मास इंडेक्स BMI में होने वाले बदलावों का एक बड़ा हिस्सा उनके जीन्स पर निर्भर करता है।

    ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित द्वारा की गई इस स्टडी में करीब 6 300 बच्चों और वयस्कों के 66 000 से अधिक BMI मापों का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि 10 वर्ष की आयु तक बच्चे का वजन और 18 वर्ष तक उसकी ग्रोथ की रफ्तार भविष्य में होने वाली बीमारियों का संकेत दे सकती है। यदि बचपन में वजन असामान्य रूप से बढ़ता या घटता है तो आगे चलकर डायबिटीज हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

    अध्ययन में यह भी सामने आया कि अलग अलग उम्र में अलग जेनेटिक फैक्टर्स सक्रिय होते हैं। यानी छोटे बच्चों के शारीरिक आकार को प्रभावित करने वाले आनुवंशिक कारक किशोरावस्था में असर डालने वाले कारकों से अलग हो सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि बचपन में हल्का फुल्का मोटापा हमेशा भविष्य में गंभीर मोटापे का संकेत नहीं होता लेकिन लगातार असामान्य ग्रोथ चिंता का विषय हो सकती है।

    शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जीन्स ही जिम्मेदार नहीं हैं। पर्यावरण खान पान शारीरिक गतिविधि और पारिवारिक जीवनशैली भी बच्चे के विकास को प्रभावित करते हैं। यानी जेनेटिक प्रवृत्ति और जीवनशैली मिलकर स्वास्थ्य की दिशा तय करते हैं।

    यह अध्ययन आंशिक रूप से ब्रिटेन की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिस्टल के 90 के दशक के बच्चे स्टडी के डेटा पर भी आधारित है जिसे वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य डेटाबेस माना जाता है। इस लंबे समय तक चले अध्ययन ने बच्चों के विकास और भविष्य के स्वास्थ्य जोखिमों को समझने में अहम भूमिका निभाई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किस उम्र में हस्तक्षेप सबसे अधिक प्रभावी हो सकता है। यदि सही समय पर पोषण व्यायाम और स्वास्थ्य निगरानी की जाए तो भविष्य में मोटापे और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

    इस स्टडी का संदेश स्पष्ट है बच्चों के वजन को लेकर न तो अनावश्यक घबराहट जरूरी है और न ही लापरवाही। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर बचपन से ही बेहतर स्वास्थ्य की नींव रखी जा सकती है।

  • 315 एमवीए ट्रांसफॉर्मर से बदली औद्योगिक तस्वीर, जापानी प्रतिनिधिमंडल ने सराहा प्रोजेक्ट

    315 एमवीए ट्रांसफॉर्मर से बदली औद्योगिक तस्वीर, जापानी प्रतिनिधिमंडल ने सराहा प्रोजेक्ट


    इंदौर। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी जीका के एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी एमपी ट्रांसको की जिका द्वितीय योजना के तहत संचालित बिजली परियोजनाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। दो सदस्यीय दल में मूल्यांकनकर्ता हिसाए ताकाहाशी और जीका के भारत प्रतिनिधि कुणाल गुप्ता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने परियोजनाओं के निर्माण कार्य गुणवत्ता उपयोगिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन की बारीकी से समीक्षा की।

    निरीक्षण के दौरान टीम ने पीथमपुर स्थित 400 केवी सबस्टेशन का दौरा किया जहां जीका की सहायता से 315 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किया गया है। अधिकारियों ने ट्रांसफॉर्मर की तकनीकी विशेषताओं और इसके संचालन से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इसके साथ ही 132 केवी मंगल्या से दक्षिण जोन इंदौर ट्रांसमिशन लाइन का भी मूल्यांकन किया गया। यह लाइन राज्य के पहले 132 केवी जीआईएस सबस्टेशन महालक्ष्मी के लिए लाइन इन लाइन आउट व्यवस्था के तहत विकसित की गई है जिससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    एमपी ट्रांसको के अधिकारियों ने बताया कि नए ट्रांसफॉर्मर और ट्रांसमिशन लाइन के चालू होने से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और स्थिरता में बड़ा सुधार हुआ है। पहले जहां उद्योगों को वोल्टेज में उतार चढ़ाव और अनियमित सप्लाई की समस्या का सामना करना पड़ता था वहीं अब उन्हें चौबीसों घंटे निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली मिल रही है। इससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारु हुई है और लागत में भी कमी आई है।

    मूल्यांकनकर्ता हिसाए ताकाहाशी ने केवल आधिकारिक प्रस्तुतियों तक सीमित न रहते हुए जमीनी हकीकत जानने का निर्णय लिया। उन्होंने पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न इकाइयों में काम कर रहे लोगों और उद्योग संचालकों से सीधे बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल ने बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता विश्वसनीयता और परियोजना के वास्तविक प्रभाव को लेकर फीडबैक लिया ताकि मूल्यांकन व्यावहारिक आधार पर किया जा सके।

    पीथमपुर धार क्षेत्र में चार संयंत्र संचालित करने वाली अग्रणी पैकेजिंग कंपनी एसआरएफ लिमिटेड ने भी अपने अनुभव साझा किए। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि नए पावर ट्रांसफॉर्मर के संचालन के बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह स्थिर हो गई है और उत्पादन में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आ रही है। कंपनी के विधिक प्रमुख ने कहा कि बेहतर बिजली उपलब्धता के कारण अब वे 132 केवी स्तर पर अपना लोड लगभग 15 एमवीए तक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं जिससे दो नई उत्पादन इकाइयों को समर्थन मिल सकेगा।

    इस निरीक्षण ने यह स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित बिजली अवसंरचना परियोजनाएं न केवल तकनीकी रूप से सुदृढ़ हैं बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई गति दे रही हैं। पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति ने निवेश और उत्पादन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है जिससे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को बल मिला है।

  • ग्वालियर में बाबा ने परिवार को डराकर ठगा 30 हजार, बेटे और बुजुर्गों पर मंडराया अनिष्ट का डर

    ग्वालियर में बाबा ने परिवार को डराकर ठगा 30 हजार, बेटे और बुजुर्गों पर मंडराया अनिष्ट का डर


    ग्वालियर । ग्वालियर में एक परिवार बाबा के झांसे में आकर 30 हजार रुपए का शिकार बन गया। राधा विहार कॉलोनी निवासी विवेक शर्मा के घर अचानक दस्तक देने वाला यह बाबा दावा करता था कि उसके परिवार पर अनिष्ट है और उनके बुजुर्गों और बेटे के साथ बड़ा खतरा मंडरा रहा है। बाबा ने घर में प्रवेश करके परिवार को डराना शुरू किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विवेक के परिवार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और उसकी प्रॉपर्टी पर नजरें गड़ाई हुई हैं। बाबा ने आगे कहा कि उनकी दादी बोल रही हैं कि नाती को बचाना है, जिससे पूरे परिवार में भय का माहौल बन गया।

    विवेक शर्मा के अनुसार बाबा ने आंखें बंद करके मंत्र पढ़े और परिवार को सम्मोहित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि रंगपंचमी तक बहुत बुरा होने वाला है और केवल बिना लहसुन-प्याज खाने वाला ही पूजा कर सकता है। परिवार डर और भ्रम की स्थिति में आ गया और बाबा के कहने पर सात दिन की पूजा कराने के लिए प्रतिदिन 4 हजार रुपए देने पड़े। इस तरह पूरे सात दिनों के लिए बाबा ने कुल 30 हजार रुपए ठग लिए। बाबा और उसका साथी पूजा के दौरान बाहर पहरेदारी करते रहे और पूरी घटना के दौरान परिवार भय और दबाव में रहा।

    बाबा ने परिवार को डराने के लिए कई भविष्यवाणियां कीं, खासकर विवेक शर्मा के बेटे और परिवार के बुजुर्गों के बारे में। उन्होंने परिवार को यह भरोसा दिलाया कि केवल उनके बताए नियमों का पालन करने से ही परिवार की रक्षा होगी। बाबा ने परिवार से बार-बार कहा कि अगर पूजा नहीं की गई तो अनिष्ट बढ़ सकता है। विवेक और उनके परिवार ने डर के चलते बाबा की शर्तें मान ली और पूरी राशि बाबा को दे दी।

    घटना दो दिन पहले की बताई जा रही है, और जब परिवार ने देखा कि बाबा की बातें झूठी हैं और उनकी समस्याएं जस की तस हैं, तो उन्होंने हजीरा थाना जाकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी है। हजीरा थाना प्रभारी जितेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि शिकायत के आधार पर बाबा और उसके साथी की तलाश की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। पुलिस ने कहा कि इस तरह के ठगी और डराने के मामलों में जल्द कार्रवाई की जाती है।

    यह मामला ग्वालियर में बढ़ती हुई ठगी और झूठे बाबा के जाल में फंसने की घटनाओं पर भी प्रकाश डालता है। पुलिस लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है और कहा है कि किसी अज्ञात व्यक्ति पर विश्वास करने से पहले उसकी शिनाख्त और मंशा को समझना बेहद जरूरी है। बाबा के जरिए परिवार को डराना और पैसे वसूलना स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी का मामला है। परिवारों को सलाह दी जा रही है कि इस तरह के लोगों के झांसे में आने से बचें और किसी भी अप्राकृतिक धमकी या भविष्यवाणी पर भरोसा न करें।

    इस पूरे मामले में यह स्पष्ट है कि बाबा ने परिवार की भावनाओं का फायदा उठाकर उन्हें डराया और पैसा ठगने का प्रयास किया। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि दोषियों को जल्दी से जल्दी गिरफ्तार किया जा सके और भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके।

  • बड़वानी में यात्री बस अनियंत्रित होकर खेत में गिरी, 16 घायल; हादसा CCTV में कैद

    बड़वानी में यात्री बस अनियंत्रित होकर खेत में गिरी, 16 घायल; हादसा CCTV में कैद


    बड़वानी। खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे पर राजपुर के पास एक यात्री बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में जा गिरी। इस हादसे में लगभग 16 यात्री घायल हो गए जिन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल 9 यात्रियों को जिला अस्पताल बड़वानी रेफर किया गया। हादसा सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया जिससे बस के सड़क से खेत में उतरने की पूरी घटना सामने आ गई।

    जानकारी के अनुसार खरगोन से बड़वानी की ओर जा रही अमन ट्रेवल्स की बस अचानक अनियंत्रित हो गई। प्राथमिक जांच में पता चला कि बस का स्टीयरिंग सिस्टम फेल हो गया था जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। बस सड़क से नीचे खेत में उतर गई और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।

    घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रारंभ किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और सड़क सुरक्षा अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। हादसे के कारण और सुरक्षा उपायों की जांच जारी है। साथ ही यात्रियों और अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए हाईवे पर सुरक्षा दिशा-निर्देश और यातायात नियमों को कड़ाई से लागू करने की बात कही जा रही है।

    स्थानीय लोग और यात्रियों ने बताया कि बस की अचानक अनियंत्रित स्थिति ने कई लोगों को डराया। हादसे का वीडियो सीसीटीवी में कैद होने से यह स्पष्ट हुआ कि तकनीकी खराबी ही मुख्य वजह थी।

    हादसे के बाद प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बसों और अन्य भारी वाहन संचालन में नियमित निरीक्षण और रखरखाव आवश्यक है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए बस मालिकों और परिवहन कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

     खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे पर राजपुर के पास एक यात्री बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में जा गिरी। इस हादसे में लगभग 16 यात्री घायल हो गए जिन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल 9 यात्रियों को जिला अस्पताल बड़वानी रेफर किया गया। हादसा सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया जिससे बस के सड़क से खेत में उतरने की पूरी घटना सामने आ गई।

    जानकारी के अनुसार खरगोन से बड़वानी की ओर जा रही अमन ट्रेवल्स की बस अचानक अनियंत्रित हो गई। प्राथमिक जांच में पता चला कि बस का स्टीयरिंग सिस्टम फेल हो गया था जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। बस सड़क से नीचे खेत में उतर गई और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।

    घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रारंभ किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और सड़क सुरक्षा अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। हादसे के कारण और सुरक्षा उपायों की जांच जारी है। साथ ही यात्रियों और अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए हाईवे पर सुरक्षा दिशा-निर्देश और यातायात नियमों को कड़ाई से लागू करने की बात कही जा रही है।

    स्थानीय लोग और यात्रियों ने बताया कि बस की अचानक अनियंत्रित स्थिति ने कई लोगों को डराया। हादसे का वीडियो सीसीटीवी में कैद होने से यह स्पष्ट हुआ कि तकनीकी खराबी ही मुख्य वजह थी।

    हादसे के बाद प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बसों और अन्य भारी वाहन संचालन में नियमित निरीक्षण और रखरखाव आवश्यक है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए बस मालिकों और परिवहन कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

  • होली खेलने से पहले करें त्वचा की सही तैयारी वरना रंग छोड़ सकते हैं जिद्दी दाग

    होली खेलने से पहले करें त्वचा की सही तैयारी वरना रंग छोड़ सकते हैं जिद्दी दाग


    नई दिल्ली/वाराणसी। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी के अवसर पर शिवनगरी काशी भक्ति और रंगों के अनोखे संगम में डूब जाती है। होली से ठीक चार दिन पहले पड़ने वाला यह पर्व काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को विशेष स्वरूप देता है। मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती को उनके मायके से काशी लेकर आते हैं और इसी उपलक्ष्य में पूरा शहर उत्सव में सराबोर हो उठता है।

    पौराणिक परंपरा के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता गौरा के साथ गौना बारात लेकर काशी पहुंचते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के कारण काशीवासी इस दिन बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का भव्य स्वागत करते हैं। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख मंदिरों तक नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। जहां अन्य स्थानों पर होली की केवल तैयारियां होती हैं वहीं काशी में इस दिन से विधिवत रंगोत्सव की शुरुआत मानी जाती है। भक्त बाबा और माता से अनुमति लेकर गुलाल अबीर और फूलों की वर्षा के साथ होली खेलना आरंभ करते हैं।

    श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में इस अवसर पर विशेष आयोजन होता है। बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का भव्य डोला निकाला जाता है जो संकरी गलियों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देता है। पूरा क्षेत्र रंगों और फूलों से भर जाता है। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र के अनुसार मंदिर परिसर में बेरिकेडिंग की जाएगी और स्पर्श दर्शन की व्यवस्था नहीं रहेगी ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस वर्ष एक विशेष आकर्षण मथुरा ब्रज की रास परंपरा का समावेश भी है। ब्रज के रसिया और रंग खेलने वाले कलाकार काशी पहुंचेंगे और यहां रास रचाएंगे जिससे उत्सव का उल्लास और भी बढ़ जाएगा। यह सांस्कृतिक संगम काशी की आध्यात्मिक गरिमा को नए रंगों से सजा देगा।

    स्थानीय निवासी प्रभुनाथ त्रिपाठी बताते हैं कि काशीवासी देवी देवताओं के साथ मिलकर बाबा और माता के आगमन की खुशी मनाते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। इस दिन भक्त रंग अर्पित कर होली खेलने की अनुमति मांगते हैं और मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती को उनके ससुराल का भ्रमण भी कराते हैं।

    धार्मिक दृष्टि से रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन शिव पार्वती की पूजा करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलने और दांपत्य जीवन में सुख समृद्धि आने की मान्यता है। काशी के छोटे बड़े सभी मंदिरों को सजाया जाता है दीप जलाए जाते हैं और पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से भर उठता है। रंगभरी एकादशी काशी की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है जहां आस्था रंगों से मिलकर अनोखा उत्सव रचती है।