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  • अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी खुशखबरी, रेलवे में मिलेगा रोजगार और द्वितीय करियर का अवसर

    अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी खुशखबरी, रेलवे में मिलेगा रोजगार और द्वितीय करियर का अवसर


    नई दिल्ली। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों और देश के पहले बैच के अग्निवीरों के लिए खुशखबरी है। सरकार और रेलवे ने मिलकर एक ऐसा सहयोग का ढांचा तैयार किया है जो सैन्य सेवा समाप्त होने के बाद जवानों को नागरिक जीवन में सम्मानजनक और स्थिर रोजगार यानी द्वितीय करियर उपलब्ध कराएगा।

    रेल मंत्रालय ने अपने नीतिगत ढांचे में बदलाव करते हुए पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए विशेष क्षैतिज आरक्षण लागू किया है। इसके तहत लेवल 1 के पदों में पूर्व सैनिकों को 20% और पूर्व अग्निवीरों को 10% कोटा मिलेगा। वहीं लेवल 2 और उससे ऊपर के पदों में पूर्व सैनिकों के लिए 10% और पूर्व अग्निवीरों के लिए 5% पद आरक्षित रहेंगे।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 की रेलवे भर्ती अधिसूचनाओं में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए कुल 14 788 पद आरक्षित किए गए हैं। इनमें 6 485 पद लेवल 1 के हैं और 8 303 पद लेवल 2 या उससे ऊपर के श्रेणी के हैं। यह भर्ती रेलवे भर्ती बोर्ड और रेलवे भर्ती केंद्रों के माध्यम से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं द्वारा की जाएगी।

    रेलवे की यह पहल विशेष रूप से 2026 बैच के अग्निवीरों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें सीधा लाभ मिलेगा। इससे सेना छोड़ने के बाद उनके लिए स्थिर नौकरी का अवसर सुनिश्चित होगा और वे नागरिक जीवन में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं है बल्कि देश के जवानों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत करता है।

    रेलवे की ओर से यह भी कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतियोगी परीक्षा आधारित होगी। आरक्षित पदों के तहत चयनित उम्मीदवारों को न केवल स्थिर रोजगार मिलेगा बल्कि वे रेलवे के विभिन्न विभागों में तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभाल सकेंगे।

    इस निर्णय के बाद अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों में उत्साह का माहौल है। कई युवा जवानों ने कहा कि यह न केवल उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करता है बल्कि सेना में सेवा देने के बाद उन्हें नई दिशा और सम्मान भी प्रदान करता है।

    रेल मंत्रालय और भारतीय सेना की इस साझेदारी का उद्देश्य सैनिकों को सिर्फ सम्मान देना नहीं है बल्कि उन्हें स्थिर और सम्मानजनक जीवनयापन का अवसर देना भी है। इस पहल को देशभर में सेवा के बाद रोजगार की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

  • यूपी में सरकारी कर्मचारियों को होली का तोहफा, CM योगी ने फरवरी का वेतन पहले देने का किया ऐलान

    यूपी में सरकारी कर्मचारियों को होली का तोहफा, CM योगी ने फरवरी का वेतन पहले देने का किया ऐलान


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होली के पावन अवसर को देखते हुए प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों संविदाकर्मियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि फरवरी माह का वेतन और पेंशन होली से पहले यानी 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से भुगतान कर दिया जाए।

    इस आदेश का दायरा केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसमें आउटसोर्सिंग कर्मी संविदाकर्मी और सफाईकर्मी भी शामिल हैं। वित्त विभाग ने इस संबंध में औपचारिक शासनादेश जारी कर दिया है जिसमें साफ कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी के वेतन या पेंशन में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होगी। समय पर वेतन वितरण सुनिश्चित करने के लिए आगामी शनिवार को भी कार्यदिवस घोषित किया गया है। यह कदम प्रदेश सरकार की ओर से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहार से पहले वित्तीय सुरक्षा देने की पहल है।

    जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधे लाभान्वित करेगी। वेतन और पेंशन समय पर मिलने से न केवल कर्मचारियों में उत्साह बढ़ेगा बल्कि होली के त्योहार की तैयारियों में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन की स्थिति में तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम राज्य सरकार की कर्मचारी-केंद्रित नीतियों का हिस्सा है जिसमें सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय स्थिरता और मनोबल बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इससे प्रदेश में सरकारी सेवाओं के सुचारू संचालन को भी बल मिलेगा।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहार के अवसर पर अतिरिक्त सुविधा मिले और वे अपने परिवार के साथ उत्साहपूर्वक होली मना सकें। इस पहल को लेकर कर्मचारियों में प्रसन्नता का माहौल देखा जा रहा है।

  • O Romeo 14वें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर छाया, शाहिद कपूर-विशाल भारद्वाज की फिल्म ने कमाए 61.55 करोड़

    O Romeo 14वें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर छाया, शाहिद कपूर-विशाल भारद्वाज की फिल्म ने कमाए 61.55 करोड़


    नई दिल्ली। शाहिद कपूर और विशाल भारद्वाज की नई फिल्म ‘ओ रोमियो’ ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है। 13 फरवरी को रिलीज हुई इस फिल्म में शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी लीड रोल में हैं और दोनों पहली बार स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से शानदार प्रतिक्रिया मिली है।

    रिलीज के पहले दिन फिल्म ने 8.5 करोड़ रुपये की कमाई से शुरुआत की थी और वीकेंड के दौरान रफ्तार बढ़ती रही। बुधवार और गुरुवार को 1.25 करोड़ की कमाई के साथ 14वें दिन तक फिल्म की कुल कमाई 61.55 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। बॉक्स ऑफिस पर इसे रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी 3’, सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ और शनाया कपूर की ‘तू या मैं’ जैसी फिल्मों का मुकाबला भी मिला।

    फिल्म में नाना पाटेकर, अविनाश मिश्रा, फरीदा जलाल, दिशा पाटनी और तमन्ना भाटिया जैसे कलाकारों ने भी अहम भूमिका निभाई है। यह शाहिद कपूर और विशाल भारद्वाज की चौथी फिल्म है, इससे पहले दोनों ने ‘कमीने’, ‘हैदर’ और ‘रंगून’ में साथ काम किया था। आईएमडीबी रेटिंग 6.4 के साथ फिल्म ने दर्शकों को अपनी कहानी और प्रदर्शन से मंत्रमुग्ध कर दिया है।

    कुल मिलाकर, ‘ओ रोमियो’ ने अपने दमदार कंटेंट, स्टार कास्ट और शानदार बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के साथ 2027 की सबसे चर्चित फिल्मों में अपना नाम दर्ज कर लिया है।

  • रजक समाज ने भोपाल में किया जोरदार प्रदर्शन, एक प्रदेश, एक आरक्षण की मांग

    रजक समाज ने भोपाल में किया जोरदार प्रदर्शन, एक प्रदेश, एक आरक्षण की मांग


    भोपाल में गुरुवार को रजक समाज ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। एक प्रदेश, एक समुदाय, एक आरक्षण का नारा लगाते हुए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास के घेराव के लिए आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद आंदोलनकारी वहीं धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात नहीं होगी और ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा। कुछ नेताओं ने आमरण अनशन की भी घोषणा की। इस मौके पर संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक कैलाश नाहर ने बताया कि वर्तमान में रजक/धोबी जाति को केवल भोपाल, सीहोर और रायसेन जिलों में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में यही जाति पिछड़ा वर्ग में शामिल है।

    कैलाश नाहर ने कहा कि एक ही राज्य में एक ही समुदाय के लिए अलग-अलग आरक्षण व्यवस्था लागू करना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। विवाह के बाद बच्चों की श्रेणी बदल जाना प्रशासनिक और सामाजिक विसंगति पैदा करता है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 14 जुलाई 2006 को मध्यप्रदेश शासन ने रजक/धोबी समाज को पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था, लेकिन आदिम जाति अनुसंधान संस्थान की टिप्पणी के आधार पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

    प्रदेश संयोजक मोनू लक्ष्मण ने कहा कि समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से यह मांग की गई है कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक निर्णय लिया जाए और केंद्र सरकार को पुनः प्रस्ताव भेजकर रजक/धोबी समाज को संपूर्ण मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए।

    प्रदर्शन के दौरान रजक समाज के लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें प्रस्तुत करते रहे और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि आंदोलनकारियों ने यह स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो आंदोलन तेज और व्यापक स्तर पर जारी रहेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश में सामाजिक न्याय और आरक्षण की नीति पर चर्चा को नया आयाम दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में समान जाति के लिए अलग-अलग आरक्षण व्यवस्था सामाजिक असमानता पैदा कर सकती है और इसके समाधान के लिए स्पष्ट सरकारी कदम जरूरी हैं।

    रजक समाज का यह प्रदर्शन राजधानी में सामाजिक न्याय की मांग और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति सजगता को दर्शाता है। आमरण अनशन और ज्ञापन के माध्यम से उनका उद्देश्य सरकार को संवैधानिक और सामाजिक उत्तरदायित्व की याद दिलाना है।

  • मध्य प्रदेश कैलेंडर विवाद: हिरण की तस्वीर पर दिग्विजय सिंह और भाजपा में जुबानी जंग

    मध्य प्रदेश कैलेंडर विवाद: हिरण की तस्वीर पर दिग्विजय सिंह और भाजपा में जुबानी जंग


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कैलेंडर पर छपी एक हिरण की तस्वीर ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि कैलेंडर पर जिस हिरण का चित्र लगाया गया है, वह इम्पाला है, जो केवल अफ्रीका में पाया जाता है और न तो मध्य प्रदेश में मिलता है और न ही पूरे भारत में। दिग्विजय ने पोस्ट में लिखा, मुख्यमंत्री जी, जिस हिरण का चित्र आपने एमपी के कैलेंडर पर लगाया है वह एमपी में ही नहीं बल्कि भारत में भी नहीं पाया जाता। कृपया सोच-समझ कर शासकीय कैलेंडर पर चित्र लगवाया करें। जय सिया राम।”

    पूर्व मुख्यमंत्री के इस पोस्ट के बाद उनके बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भी समर्थन जताया। जयवर्धन ने कहा कि मध्य प्रदेश एक वाइल्डलाइफ स्टेट है, बावजूद इसके कैलेंडर में विदेशी हिरण की तस्वीर छापी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जमीनी स्तर की जानकारी नहीं है और इस कदम से बड़ी त्रुटि हुई है।

    भाजपा की ओर से पलटवार करते हुए प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस नेता बच्चों की पुलिस की तरह व्यवहार कर रहे हैं। सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल विरोध के लिए विरोध कर रही है और नकारात्मक राजनीति में लिप्त है। उन्होंने कहा कि मूल मुद्दों पर ध्यान न देकर ऐसे तुच्छ विवाद उठाना उनकी आदत बन गई है।

    यह विवाद इस बात को उजागर करता है कि सरकारी कैलेंडर और प्रतीकों को लेकर राजनीतिक दल कितनी तेजी से प्रतिक्रियाशील हो जाते हैं। दिग्विजय और जयवर्धन का तर्क है कि राज्य की पहचान और प्राकृतिक विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करना जरूरी है। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि ऐसे मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनाना सही नहीं है।

    मध्य प्रदेश में वाइल्डलाइफ और जैवविविधता के संरक्षण को लेकर यह बहस एक नई दिशा में बढ़ सकती है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है। लेकिन इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक मीडिया पर एक छोटी सी छवि भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सांस्कृतिक प्रतीकों और स्थानीय पहचान को लेकर बढ़ते मतभेद का संकेत है। इस मामले में जनता और मीडिया की नजरें अब इस पर टिकी हुई हैं कि सरकार इस मुद्दे का समाधान कैसे करती है और क्या भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए कदम उठाए जाते हैं।

  • राजामौली का दावा: 'वाराणसी' में बाहुबली से भी ज्यादा भव्य और दमदार सिनेमाई अनुभव

    राजामौली का दावा: 'वाराणसी' में बाहुबली से भी ज्यादा भव्य और दमदार सिनेमाई अनुभव



    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस. एस. राजामौली इन दिनों अपनी मेगा बजट फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। करीब 1300 करोड़ रुपये के बजट में बन रही यह एक्शन-एडवेंचर फिल्म अगले साल रिलीज के लिए तैयार बताई जा रही है। फिल्म में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन लीड रोल में नजर आएंगे। रिलीज से पहले ही यह प्रोजेक्ट देश-विदेश में जबरदस्त चर्चा बटोर रहा है।

    हैदराबाद स्थित अन्नपूर्णा स्टूडियो में हाल ही में शुरू हुई अत्याधुनिक मोशन कैप्चर फैसिलिटी में फिल्म के कई अहम सीक्वेंस शूट किए गए हैं। राजामौली का कहना है कि यह भारत की सबसे उन्नत मो-कैप लैब में से एक है, जहां हाई-प्रिसिजन टेक्नोलॉजी के जरिए बड़े और जटिल दृश्यों को पहले से ज्यादा प्रभावशाली ढंग से फिल्माया जा सकता है।

    इसी दौरान राजामौली ने अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म बाहुबली: द बिगिनिंग का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय भारत में इतनी एडवांस मोशन कैप्चर तकनीक उपलब्ध होती, तो वे ‘बाहुबली’ और ‘ईगा’ जैसी फिल्मों को और भी बेहतर बना सकते थे। उनके मुताबिक भारत में टैलेंट की कभी कमी नहीं रही, लेकिन विश्वस्तरीय तकनीकी ढांचे की कमी के कारण कई बार विज़न को पूरी क्षमता के साथ पर्दे पर उतारना संभव नहीं हो पाता था।

    राजामौली ने बताया कि अब हालात बदल रहे हैं। नई तकनीक की बदौलत भारतीय फिल्मकारों को बड़े विजुअल सीक्वेंस के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ‘वाराणसी’ के कुछ जटिल एक्शन और फैंटेसी दृश्यों में इसी मोशन कैप्चर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसके परिणाम से टीम बेहद संतुष्ट है।

    फिल्म की पहली झलक पेरिस के प्रतिष्ठित सिनेमा हॉल Le Grand Rex में आयोजित एक ट्रेलर फेस्टिवल में दिखाई गई, जहां दर्शकों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी। इससे साफ है कि ‘वाराणसी’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्सुकता बढ़ चुकी है।

    पोस्टर्स में महेश बाबू का ‘रुद्र’, पृथ्वीराज का ‘कुंभ’ और प्रियंका का ‘मंदाकिनी’ अवतार पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो यह फिल्म 7 अप्रैल 2027 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। राजामौली का मानना है कि नई तकनीक और बड़े विज़न का यह संगम भारतीय सिनेमा को एक नए स्तर पर ले जाएगा—और शायद यही वजह है कि वे आज भी मानते हैं, “बाहुबली को मैं और बेहतर बना सकता था।”

  • पॉलिसी सरेंडर करने से पहले रुकिए! वरना डूब सकते हैं हजारों-लाखों रुपए

    पॉलिसी सरेंडर करने से पहले रुकिए! वरना डूब सकते हैं हजारों-लाखों रुपए



    नई दिल्ली। इंश्योरेंस पॉलिसी लेना आसान है, लेकिन बीच में उसे छोड़ना भारी पड़ सकता है। कई लोग आर्थिक दबाव, बदलती प्राथमिकताओं या गलत वित्तीय योजना के कारण पॉलिसी सरेंडर करने का फैसला कर लेते हैं, जबकि इसके दूरगामी नुकसान को पूरी तरह समझ नहीं पाते। पॉलिसी को तय अवधि से पहले बंद करने पर बीमा कंपनी पूरी जमा राशि वापस नहीं करती, बल्कि कटौतियों के बाद जो रकम देती है उसे ‘सरेंडर वैल्यू’ कहा जाता है। शुरुआती वर्षों में यह राशि अक्सर भरे गए कुल प्रीमियम से काफी कम होती है, क्योंकि पहले कुछ सालों में प्रीमियम का बड़ा हिस्सा कमीशन और प्रशासनिक खर्च में चला जाता है।

    सबसे बड़ा झटका यह होता है कि पॉलिसी बंद करते ही जीवन बीमा कवरेज तुरंत समाप्त हो जाता है। यानी किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार को कोई डेथ बेनिफिट नहीं मिलेगा। टर्म इंश्योरेंस के मामले में तो कोई बचत घटक होता ही नहीं, इसलिए उसे बीच में छोड़ने पर कोई पैसा वापस नहीं मिलता। वहीं एंडोमेंट, मनी-बैक या ULIP जैसी योजनाओं में कुछ सरेंडर वैल्यू मिल सकती है, लेकिन भविष्य के बोनस, गारंटीड रिटर्न और मैच्योरिटी लाभ खत्म हो जाते हैं।

    बीमा नियामक Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) ने हाल के वर्षों में कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे पारंपरिक पॉलिसियों में सरेंडर वैल्यू पहले की तुलना में कुछ बेहतर हो सकती है, खासकर यदि कम से कम एक साल का प्रीमियम जमा किया गया हो। फिर भी, यह जरूरी नहीं कि नुकसान पूरी तरह टल जाए।

    पूरी तरह पॉलिसी बंद करने की बजाय ‘पेड-अप’ विकल्प पर विचार किया जा सकता है, जिसमें आगे प्रीमियम देना बंद कर दिया जाता है, लेकिन कम बीमा राशि के साथ पॉलिसी जारी रहती है। इसके अलावा, कंपनियां 15–30 दिन का ग्रेस पीरियड देती हैं और कुछ शर्तों के तहत लैप्स पॉलिसी को दोबारा चालू (रिवाइवल) भी किया जा सकता है।

    इसलिए पॉलिसी सरेंडर करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, परिवार की सुरक्षा, सरेंडर चार्ज, भविष्य के लाभ और वैकल्पिक विकल्पों का संतुलित आकलन करना बेहद जरूरी है। जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में बड़ी आर्थिक और सुरक्षा संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है।

  • चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद

    चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद


    नई दिल्ली । देश के महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि आज 27 फरवरी को बलिदान दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आजाद का बलिदान और त्याग हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।

    पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा मां भारती के अमर सपूत महान क्रांतिकारी वीर हुतात्मा चंद्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके ओजस्वी विचार और तेजस्वी जीवन जन जन को राष्ट्र और समाज की उन्नति एवं सेवा के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे। मातृभूमि का कण कण आपका अनंत काल तक ऋणी रहेगा।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए कहा दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे आजाद ही रहे हैं आजाद ही रहेंगे। मातृभूमि की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उनका त्याग और तेजस्वी व्यक्तित्व युगों युगों तक राष्ट्र सेवा एवं मां भारती के प्रति बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।

    इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद अब प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद और अंग्रेजों के बीच लंबी मुठभेड़ हुई। जब उनकी गोलियों का स्टॉक समाप्त हो गया तो उन्होंने अंतिम गोली खुद को मारकर अपना बलिदान दे दिया। उनके इस अदम्य साहस और देशभक्ति के कारण हर साल इस दिन को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    चंद्रशेखर आजाद का जीवन स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का प्रतीक है। उनके त्याग और साहस ने आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए प्रेरित किया। उनके बलिदान को याद कर देशवासियों में आज भी देशभक्ति की भावना जागृत होती है। नेता और नागरिक समान रूप से उन्हें याद करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देते हैं।

    आजाद की पुण्यतिथि पर सभी नेताओं ने यह संदेश दिया कि मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करना सर्वोच्च बलिदान है। उनका जीवन यह सिखाता है कि स्वतंत्रता और देशभक्ति केवल शब्द नहीं बल्कि कर्म और समर्पण का नाम है। चंद्रशेखर आजाद हमेशा स्मरणीय रहेंगे और उनके बलिदान की कहानी हर दिल में जीवित रहेगी।

  • खेल-खेल में हादसा: घड़ी का सेल निगलने के बाद बच्चे की जान बचाई डॉक्टरों ने

    खेल-खेल में हादसा: घड़ी का सेल निगलने के बाद बच्चे की जान बचाई डॉक्टरों ने


    खंडवा से बुधवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। बुरहानपुर निवासी 10 वर्षीय कृष्णा खेलते समय गलती से अपनी घड़ी का सेल निगल बैठा। छोटे बच्चे की लापरवाही एक बड़ी परेशानी बन गई, जब सेल गले के निचले हिस्से में फंस गया। कृष्णा को तेज दर्द, बेचैनी और सांस लेने में कठिनाई होने लगी, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

    परिवार ने देखते ही बच्चे को जिला अस्पताल सह शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय खंडवा पहुंचाया। वहां के नाक-कान-गला विभाग (ईएनटी) में डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत एक्स-रे जांच कराई। जांच में स्पष्ट हुआ कि घड़ी का सेल आहार नली के निचले हिस्से में फंस गया है और यदि समय पर कार्रवाई न की जाए तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

    विभागाध्यक्ष और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सुनील बाजोलिया ने तुरंत उपचार की कमान संभाली। उन्होंने अपनी टीम के साथ बिना समय गंवाए दूरबीन पद्धति यानी एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से ऑपरेशन शुरू किया। यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और जटिल थी, क्योंकि घड़ी का सेल गले के नाजुक हिस्से में फंसा हुआ था।

    करीब आधे घंटे की लगातार मेहनत और विशेषज्ञता के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की घड़ी का सेल सुरक्षित निकाल लिया। बच्चे की जान इस समय पूरी तरह सुरक्षित बताई जा रही है और वह अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहा है।

    डॉ. बाजोलिया ने बताया कि बच्चों की ऐसी लापरवाही अक्सर गंभीर परिणाम दे सकती है। खेलते समय छोटे सामान निगल जाने की घटनाएं आम हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से बड़ी अनहोनी टली जा सकती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों पर नजर रखें और छोटे-छोटे खतरनाक सामान उनके हाथों से दूर रखें।

    इस घटना ने खंडवा अस्पताल की ईएनटी टीम की विशेषज्ञता और तत्परता को भी उजागर किया। बच्चे की स्थिति को देखते हुए तुरंत एक्स-रे, सही निदान और एंडोस्कोपिक प्रक्रिया ने मुश्किल हालात में भी जान बचाई। परिवार ने डॉक्टरों की सराहना की और कहा कि समय पर इलाज मिलने से बड़े हादसे से बचा जा सका।

    खेलते समय बच्चों की सुरक्षा और सतर्कता पर इस घटना ने एक बार फिर जोर दिया। अस्पताल अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सही कदम उठाने से ऐसी अनहोनी टाली जा सकती है और छोटे-छोटे हादसे बड़े संकट में नहीं बदलते।

  • नौकरी जाने का तनाव, शराब और हादसा: भोपाल में सीढ़ियों से गिरकर युवक की मौत

    नौकरी जाने का तनाव, शराब और हादसा: भोपाल में सीढ़ियों से गिरकर युवक की मौत


    भोपाल । भोपाल के छोला मंदिर इलाके में गुरुवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में 36 वर्षीय मधुर नामदेव की मौत हो गई। वह कैंची छोला फाटक के पास अपने परिवार के साथ रहता था। जानकारी के अनुसार मधुर पूर्व में जिंसी स्थित एक कार शोरूम में ड्राइवर के रूप में कार्यरत था, लेकिन करीब दो महीने पहले उसकी नौकरी छूट गई थी। तब से वह नई नौकरी की तलाश में लगातार शोरूम और अन्य स्थानों पर रिज्यूमे दे रहा था, मगर सफलता नहीं मिल रही थी, जिससे वह मानसिक तनाव में रहने लगा था।

    गुरुवार रात वह शराब के नशे में घर लौटा। बताया जा रहा है कि दूसरी मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियां चढ़ते समय उसका संतुलन बिगड़ा और वह नीचे गिर गया। गिरने से उसके सिर में गंभीर चोट आई। परिजन उसे संभाल पाते, उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी। शुक्रवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हादसा नशे की हालत में पैर फिसलने से हुआ। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। बेरोजगारी, मानसिक तनाव और नशे की बढ़ती आदत ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया, और यह घटना एक बार फिर सामाजिक व व्यक्तिगत दबावों के गंभीर परिणामों की ओर इशारा करती है।