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  • महाराणा प्रताप सेना का दावा… अजमेर शरीफ दरगाह पहले था शिव मंदिर, कोर्ट से ASI सर्वे की मांग

    महाराणा प्रताप सेना का दावा… अजमेर शरीफ दरगाह पहले था शिव मंदिर, कोर्ट से ASI सर्वे की मांग


    अजमेर।
    अजमेर जिला अदालत (Ajmer District Court) में एक याचिका दायर कर दावा किया गया है कि अजमेर शरीफ दरगाह (Ajmer Sharif Dargah) मूल रूप से एक शिव मंदिर (Shiva Temple) है। महाराणा प्रताप सेना (Maharana Pratap Army) के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार द्वारा दाखिल इस याचिका में एएसआई सर्वेक्षण (ASI survey) की मांग की गई है। उनका कहना है कि मंदिर को बदलकर दरगाह बनाया गया था जिसे लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले भी हिंदू सेना ऐसी मांग कर चुकी है।


    महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष ने डाली अर्जी

    अजमेर की अदालत में महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने एक अर्जी दी है। अपनी याचिका में राजवर्धन सिंह ने दावा किया कि अजमेर दरगाह पहले एक शिव मंदिर था जिसे बाद में दरगाह बना दिया गया। उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर काफी समय से कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले राष्ट्रपति को भी एक प्रार्थना पत्र दिया गया था जिसे आगे की कार्रवाई के लिए राजस्थान के मुख्य सचिव को भेज दिया गया है।


    विष्णु गुप्ता भी कर चुके हैं ऐसा ही दावा

    वकील एपी सिंह ने कहा कि यह जगह भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर था। यह प्राचीन कालीन स्थल है। याचिका अजमेर की जिला अदालत में पेश की गई है। साल 2024 में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी ऐसी ही एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह एक मंदिर के ऊपर बनी है। उन्होंने ने भी अदालत से दरगाह को हिंदू मंदिर घोषित करने की मांग की थी।


    पवित्र मुस्लिम स्थलों में शुमार

    बता दें कि अजमेर शरीफ दरगाह को भारत के पवित्र मुस्लिम धर्म स्थलों में गिना जाता है। यह अजमेर का एक मशहूर ऐतिहासिक स्थान है। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती फारस से 1192 ईस्वी में अजमेर आए थे और 1236 ईस्वी में अपनी मृत्यु तक यहीं रहे। मुगल बादशाह हुमायूं ने उनकी याद में इस दरगाह का निर्माण करवाया था। यहां उनकी मजार मौजूद है। अपने शासन के दौरान मुगल सम्राट अकबर भी हर साल अजमेर की यात्रा पर आता था।

  • मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…

    मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…


    मुंबई।
    हाल के दिनों में भारत (India) में घुसपैठियों (Intruders) का मुद्दा काफी गर्म है। असम (Assam ) से लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) और अन्य सीमावर्ती राज्यों में यही चर्चा में है। एसआईआर (ASI) के जरिए वोटर लिस्ट (Voter list) में सुधार करके घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद चल रही है। इस बीच मुंबई से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक मुंबई में बड़ी संख्या में मुसलमान (Muslim) बांग्लादेश और म्यांमार (Bangladesh and Myanmar) से अवैध रूप से लोग आकर बसे हुए हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन लोगों ने यहां आने के बाद वोटर कार्ड और आधार कार्ड जैसे वैध भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए हैं। जिस प्रक्रिया के जरिए इन अवैध प्रवासियों को मुंबई में बसाया जा रहा है, उसे ‘मलवानी पैटर्न’ कहा जाता है।


    कुल 61 इलाके

    रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई में कुल ऐसे 61 इलाके चिह्नित किए गए हैं, जहां पर अवैध प्रवासी मिले हैं। इस रिपोर्ट के कुल कुल सात हजार से अधिक लोगों से इंटरव्यू किए गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरव्यू में यह सामने आया कि इसमें से 3014 लोगों ने बिना वीजा-पासपोर्ट के ही भारत में एंट्री की। इसमें भी 96 फीसदी लोग मुसलमान हैं जो बांग्लादेश और म्यांमार से भारत में आए हुए हैं। इस रिसर्च को अंजाम देने वाले एक प्रोफेसर ने बताया कि गरीब लोग बांग्लादेश छोड़ देते हैं। वह भारत में आते हैं और यहां आकर जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं। यहां पर वो वोटर बन जाते हैं और नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट डालने लगते हैं। ‘ग्रे रेलिजियस नेटवर्क’ के चलते इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है।


    एजेंटों की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अवैध प्रवासियों के पास नकली दस्तावेज आता कहां से है। इसमें बताया गया है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में एजेंट्स हैं। यह लोग सात हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक में सभी पहचान पत्र मुहैया करा देते हैं। रिसर्च में शामिल प्रोफेसर ने बताया कि अवैध रूप से भारत आने वाला स्थानीय एजेंट से मिलता है। इसके बाद एजेंट एक तय कीमत पर उन्हें वोटर कार्ड से लेकर आधार और पैन कार्ड तक मुहैया कराता है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम पिछले 12-13 साल से काम कर रहा है। इससे अवैध प्रवासियों के लिए भारत में बसना आसान हो जाता है। एक बार वोटर कार्ड मिल जाने के बाद इनके लिए चीजें काफी आसान हो जाता है।


    स्थानीय नेताओं की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया कि मुंबई में छह विधानसभा क्षेत्रों, एक लोकसभा सीट और 56 म्यूनिसिपल वार्डों में इन अवैध वोटरों का असर है। इसके मुताबिक जितने लोगों का सर्वे किया गया, उनमें से 73 फीसदी लोगों के पास वोटर कार्ड मौजूद था। अवैध प्रवासियों को बसाने के लिए किसी दलदली इलाके में एक अवैध बस्ती बसाई जाती है। इसके बाद बिना डोम के मस्जिद बनाई जाती है। स्थानीय प्रभावशाली नेता इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं। इसके बाद नकली दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। फिर स्थानीय वोटर लिस्ट में बदलाव कर दिया जाता है। फिर उनके फंडिंग का इंतजाम किया जाता है।

  • भारत-जर्मनी के बीच शुरू होगी वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा…. दोनों देशों ने किए 19 समझौते

    भारत-जर्मनी के बीच शुरू होगी वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा…. दोनों देशों ने किए 19 समझौते


    अहमदाबाद।
    जर्मनी (Germany) ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए अपने एयरपोर्ट (Indian Passport holders) से वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा (Visa-free Transit facility) शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। इसकी घोषणा सोमवार को भारत-जर्मनी संयुक्त बयान में की गई। इस नई सुविधा से भारतीय यात्रियों को जर्मन एयरपोर्ट से गुजरने के लिए अलग से ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय यात्रा अधिक सुगम और तेज हो जाएगी। जर्मनी के इस फैसले से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि भारत और जर्मनी के बीच आपसी संबंध और पर्यटन को भी नई मजबूती मिलेगी।


    19 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और जर्मनी ने सोमवार को डिफेंस, ट्रेड, जरूरी मिनरल्स और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का वादा किया। नेताओं के बीच वार्ता के बाद दोनों देशों ने कुल 19 समझौतों पर साइन किए। इसमें डिफेंस इंडस्ट्रियल सहयोग के लिए एक रोडमैप और हायर एजुकेशन सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर समझौता भी शामिल है।


    डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में बड़ा समझौता

    भारत और जर्मनी ने डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में अपने आपसी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। भारत और जर्मनी ने सीमा पार ई-कॉमर्स और समयबद्ध अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिहाज से डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य सीमा पार होने वाले ई-कॉमर्स व्यापार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान की समय पर आपूर्ति को बेहतर बनाना है। समझौता आपसी व्यापार को और अधिक सरल और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।


    बढ़ेगा निर्यात, लॉजिस्टिक सिस्टम को मिलेगी मजबूती

    बयान में बताया गया है कि इस सहयोग से निर्यात बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा जिससे भारतीय लॉजिस्टिक सिस्टम को मजबूती मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होने से भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर अपने कारोबार को बढ़ाने और नई पहचान बनाने में काफी मदद मिलेगी। यह कदम भारतीय व्यवसायों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।


    व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

    समझौते के जरिए भारत और जर्मनी मिलकर एक प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सेवा शुरू करेंगे। इस सेवा के तहत इंडिया पोस्ट के विशाल नेटवर्क और जर्मनी के डॉयचे पोस्ट-डीएचएल ग्रुप के वैश्विक एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वैश्विक लॉजिस्टिक ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे भारत से विदेश भेजे जाने वाले सामान की डिलीवरी अब पहले से ज्यादा तेज और भरोसेमंद होगी। साथ ही ग्राहकों के लिए सामान भेजने से लेकर मिलने तक की पूरी निगरानी करना भी काफी आसान हो जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।


    रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास प्रशिक्षण और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने पर सहमति जताई है। व्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार के 50 अरब डॉलर के पार पहुंचने पर खुशी जाहिर की। इसके साथ ही दोनों देशों ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने का समर्थन किया है ताकि आर्थिक रिश्तों को और मजबूती दी जा सके।


    सेमीकंडक्टर, खनिज और इनोवेशन पर भी सहयोग

    दोनों देशों ने बातचीत में टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और इनोवेशन के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने रिन्यूएबल इनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लाइमेट ऐक्शन में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत में फ्री और नियम आधारित नेवीगेशन व्यवस्था का समर्थन किया। साथ ही वैश्विक शांति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर समान विचार व्यक्त किए।


    वीजा-मुक्त ट्रांजिट सुविधा की घोषणा

    दोनों देशों ने अपने नागरिकों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की। जर्मनी की ओर से भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा की घोषणा की गई। वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा का मतलब है कि दूसरे देश जाते समय जर्मन एयरपोर्ट से गुजरने वाले भारतीय यात्रियों को अलग से ट्रांजिट वीजा के लिए आवेदन नहीं करना होगा। इस कदम से भारतीय नागरिकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय यात्रा आसान हो जाएगी। इससे दोनों देशों के नागरिकों के आपसी संबंध मजबूत होंगे। पीएम मोदी ने इस फैसले का स्वागत किया है।

  • MP: बच्चे चीनी मांझे से पतंग उड़ाते पकड़े गए तो माता-पिता होंगे जिम्मेदार, HC के सख्त निर्देश

    MP: बच्चे चीनी मांझे से पतंग उड़ाते पकड़े गए तो माता-पिता होंगे जिम्मेदार, HC के सख्त निर्देश

    भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने चीनी मांझे (Chinese kite string) पर लगे प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि यदि कोई बच्चा इस घातक डोर से पतंग उड़ाते पकड़ा गया तो उसके माता-पिता (Parents) को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। साथ ही चीनी मांझे की बिक्री या उपयोग करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) (लापरवाहीपूर्ण कृत्य के कारण होने वाली मृत्यु) के तहत कार्रवाई होगी।


    बेचने वालों पर भी चलेगा लापरवाही से मौत का केस

    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने आदेश दिया है कि लोगों को जागरूक किया जाए कि चीनी मांझे को बेचने या इस्तेमाल करने पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) के तहत मामला दर्ज हो सकता है। यह धारा लापरवाही के कारण होने वाली मृत्यु से संबंधित है। अदालत ने पिछले साल 11 दिसंबर को चीनी मांझे से होने वाली मौतों और हादसों पर चिंता जताते हुए खुद जनहित याचिका के तौर पर संज्ञान लिया।


    सरकार ने कहा- चलाएंगे अभियान

    मध्य प्रदेश सरकार ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की अदालत को बताया कि चीनी मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। चीनी मांझे से होने वाले हादसों को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। चीनी मांझे के इस्तेमाल और बिक्री को हतोत्साहित करने के लिए अखबारों और टीवी चैनलों के माध्यम से एक बड़ा जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।


    अभिभावक को भी ठहराया जा सकता है जिम्मेदार

    अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जागरूकता अभियान में यह साफ बताया जाए कि चीनी मांझे की बिक्री या इस्तेमाल करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) के तहत केस चलेगा। यदि कोई नाबालिग बच्चा इस खतरनाक मांझे से पतंग उड़ाता पाया गया तो इसके लिए उसके माता-पिता या अभिभावक को भी कानूनन जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।


    आसपास के जिलों में भी किया जाएगा लागू

    इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि प्रशासन जल्द निर्देशों का पालन करते हुए जरूरी आदेश जारी करेगा। अदालत को यह भी भरोसा दिया गया कि निर्देशों को इंदौर आसपास के जिलों में भी लागू किया जाएगा। बता दें कि पिछले डेढ़ महीने में इंदौर में चीनी मांझे से गला कटने के कारण दो लोगों की जान जा चुकी है। प्रशासन ने चीनी मांझे पर पूरी तरह रोक लगा रखी है फिर भी कई लोग चोरी से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

  • MP: सौगातें लेकर आएगा कृषक कल्याण वर्ष…. हर किसान के पास होगा सोलर पंप

    MP: सौगातें लेकर आएगा कृषक कल्याण वर्ष…. हर किसान के पास होगा सोलर पंप


    भोपाल।
    कृषक कल्याण वर्ष (Farmers’ Welfare Year) किसानों के लिए कई सौगातें लेकर आएगा. सौर ऊर्जा (Solar energy) से संचालित सिंचाई पंपों से न केवल किसान दिन में ही खेतों में सिंचाई कर पाएंगे अपितु इससे बचने वाली बिजली से प्रदेश ऊर्जा में सरप्लस हो जाएगा. हर किसान के पास सोलर पंप होगा.किसान सौर ऊर्जा से खेती करेंगे।

    प्रदेश में 52 हजार किसानों के खेत में सोलर पंप स्थापित करने की योजना प्रारंभ की गई है। सोलर पंप स्थापित हो जाने से अब प्रदेश का किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनेगा। अब प्रदेश के किसान सूरज से खेती करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) की इस अभिनव पहल के तहत 34 हजार 600 इकाइयों को लेटर ऑफ अवार्ड जारी कर 33 हजार कार्यदेश जारी किए जा चुके हैं। किसान के खेत में सोलर पम्प स्थापित होने से अब उन्हें विद्युत प्रदाय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। सोलर पम्प से उत्पादित अतिरिक्त ऊर्जा को किसान सरकार को बेच कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा लगातार किसानों को सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए विभिन्न योजनाओं में लाभ प्रदान कर सक्षम बनाया जा रहा है।


    प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे

    किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. विभिन्न सिंचाई परियोजना और सिंचाई की आधुनिकतम तकनीकी के प्रयोग से सिंचाई का रकबा अधिक से अधिक बढ़ाने का प्रयास रहेगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है प्रदेश में सिंचाई क्षमता को आगामी वर्षों में 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना.

    प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी। पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि है. महाराष्ट्र राज्य के साथ क्रियान्वित होने वाली मेगा तापी भूजल भरण परियोजना विश्व की अनूठी परियोजना है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।

    राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे। राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन भी गया।

    भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर भी कार्य किया जा रहा है. राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

    सिंहस्थ- 2028 में दुनिया भर से उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं को शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान कराने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं. सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन निर्माणाधीन है, जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य भी किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।

  • ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज

    ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज


    भोपाल । भोपाल ट्रेन देरी से चलने पर यात्री जल्दबाजी में टिकट कैंसिल करने की गलती न करें क्योंकि ऐसा करने से उन्हें न तो पूरा रिफंड मिलेगा और न ही मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा स्वीकार होगा। भोपाल के एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने यह स्पष्ट किया कि यदि यात्री ट्रेन के लेट होने के कारण बिना रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए टिकट कैंसिल कर देते हैं तो वे मुआवजे से हाथ धो सकते हैं। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए एक अहम संदेश है जो ट्रेन के समय से लेट होने पर बिना सही प्रक्रिया का पालन किए जल्दबाजी में टिकट कैंसिल कर देते हैं।

    क्या है पूरा मामला

    भोपाल के एक निवासी ने सितंबर 2023 में भोपाल से नई दिल्ली जाने के लिए आंध्रप्रदेश एक्सप्रेस में AC-2 श्रेणी का टिकट बुक किया था। ट्रेन निर्धारित समय से करीब तीन घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंची। इस देरी के कारण यात्री की आगे की यात्रा भी प्रभावित हुई, क्योंकि उसे नई दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का कनेक्शन छूट गया। इस स्थिति में यात्री ने दोनों यात्रा टिकट कैंसिल करवा दिए। लेकिन, जब उसे पूरा रिफंड नहीं मिला तो उसने रेलवे पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि सिर्फ ट्रेन की देरी के आधार पर टिकट कैंसिल करना और रिफंड की मांग करना सही नहीं है। यदि यात्री ने रेलवे द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है, तो उसे पूरा रिफंड और मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा नहीं मिल सकता।

    उपभोक्ता आयोग का फैसला

    उपभोक्ता आयोग ने यह कहा कि जब भी ट्रेन की देरी हो, तो यात्री को पहले रेलवे द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाओं और विकल्पों का लाभ उठाना चाहिए, जैसे कि मुआवजे के लिए आवेदन करना या ट्रेनों का अन्य विकल्प तलाशना। सिर्फ टिकट कैंसिल करके और बिना प्रक्रिया का पालन किए मुआवजे का दावा करना गलत है और यह न केवल यात्रियों के लिए बल्कि रेलवे के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। यह फैसला यात्रियों को यह सिखाता है कि ट्रेन लेट होने पर घबराहट में कोई जल्दबाजी का कदम न उठाएं और सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का नुकसान न हो।

  • पदोन्नति नियम 2025 के दो प्रावधानों को असंवैधानिक करार देने की मांग, हाई कोर्ट में याचिका दायर

    पदोन्नति नियम 2025 के दो प्रावधानों को असंवैधानिक करार देने की मांग, हाई कोर्ट में याचिका दायर


    जबलपुर। मध्य प्रदेश शासन के पदोन्नति नियम 2025 के तहत कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक करार देने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में यह दावा किया गया है कि इन नियमों का पालन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है। यह मामला अब हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए रखा गया है और कोर्ट ने 13 जनवरी को मामले की सुनवाई निर्धारित की है।

    याचिकाकर्ता सिवनी निवासी ज्वाइंट डायरेक्टर सुरेश कुमरे हैं, जो मध्य प्रदेश शासन के पदोन्नति नियम 2025 के दो महत्वपूर्ण प्रावधानों को चुनौती दे रहे हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार इन नियमों में उल्लेखित कुछ बातें आरक्षित वर्ग और अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों के लिए भेदभावपूर्ण हैं और इससे संविधान की मूल भावना का उल्लंघन हो रहा है। विशेष रूप से पदोन्नति के संबंध में नियम 11 में कहा गया है कि पहले आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों की सूची बनाई जाएगी, उसके बाद अनारक्षित वर्ग की सूची बनेगी। इसके कारण, अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी यदि मेरिट में बेहतर हैं, तो भी वे आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों से पीछे रह सकते हैं और उन्हें पदोन्नति का मौका नहीं मिल सकता।

    इस नियम को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ बताया गया है, जिनमें यह साफ किया गया था कि पदोन्नति के लिए आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को प्राथमिकता देना एक सीमा तक ही उचित है, और यदि अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी मेरिट में बेहतर हैं तो उन्हें पदोन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नियम अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों के साथ अन्यायपूर्ण भेदभाव करता है और इसे संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार के तहत असंवैधानिक करार दिया जाना चाहिए।
    इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करेंगे।

    हाई कोर्ट ने इस मामले को पहले से लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया है जिससे यह मामला एक व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाएगा।सुरेश कुमरे ने कहा कि यदि यह नियम लागू होता है तो यह न केवल उन कर्मचारियों के लिए अन्यायपूर्ण होगा बल्कि यह सरकारी प्रशासन में भी असंतुलन पैदा कर सकता है। इसलिए वे इस नियम को चुनौती देने के लिए कोर्ट पहुंचे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी कर्मचारियों को समान अवसर मिले और कोई भी वर्ग अपने मेरिट के आधार पर पदोन्नति से वंचित न रहे। हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 13 जनवरी को तय की गई है और अब सबकी निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं।

  • बॉक्स ऑफिस दिन 4: गिरावट के बावजूद ‘द राजा साब’ का ‘धुरंधर’ पर भारी पड़ना

    बॉक्स ऑफिस दिन 4: गिरावट के बावजूद ‘द राजा साब’ का ‘धुरंधर’ पर भारी पड़ना

    नई दिल्ली। प्रभास स्टारर फिल्म ‘द राजा साब’ ने बॉक्स ऑफिस पर रिलीज के साथ ही जबरदस्त शुरुआत की थी। पहले दिन 53.75 करोड़ रुपये की कमाई ने साफ संकेत दे दिए थे कि यह फिल्म बड़े रिकॉर्ड बना सकती है। प्रभास की फैन फॉलोइंग और फिल्म का हॉरर-कॉमेडी जॉनर दर्शकों को आकर्षित करता दिखा। हालांकि, शुरुआती जोश ज्यादा दिनों तक बरकरार नहीं रह सका। दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिलने के बाद दूसरे दिन से ही कमाई में गिरावट शुरू हो गई।
    पहले सोमवार को आई भारी गिरावट
    फिल्म का चौथा दिन यानी पहला सोमवार ‘द राजा साब’ के लिए सबसे कमजोर साबित हुआ। सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ने सोमवार को महज 5.4 करोड़ रुपये की कमाई की। यह गिरावट साफ तौर पर दर्शाती है कि वीकेंड के बाद फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकाम रही। इसके साथ ही भारत में फिल्म का कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 113.4 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
    दिन-वार कलेक्शन पर एक नजर
    फिल्म की कमाई के आंकड़े इसके उतार-चढ़ाव की कहानी खुद बयां करते हैं।

    दिन 0 (गुरुवार): 9.15 करोड़ रुपये

    दिन 1 (शुक्रवार): 53.75 करोड़ रुपये

    दिन 2 (शनिवार): 26 करोड़ रुपये

    दिन 3 (रविवार): 19.1 करोड़ रुपये

    दिन 4 (सोमवार): 5.4 करोड़ रुपये

    इन आंकड़ों से साफ है कि ओपनिंग वीकेंड के बाद फिल्म की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है।

    ऑक्यूपेंसी भी रही औसत
    मारुति के निर्देशन में बनी इस हॉरर-कॉमेडी को सोमवार, 12 जनवरी 2026 को तेलुगु भाषी क्षेत्रों में कुल 24.64 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी मिली। यह आंकड़ा किसी बड़े स्टार वाली फिल्म के लिहाज से औसत माना जा रहा है। कम ऑक्यूपेंसी भी फिल्म की कमजोर पकड़ की ओर इशारा करती है।
    ‘धुरंधर’ से फिर भी बेहतर
    हालांकि ‘द राजा साब’ की कमाई में गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद फिल्म ने आदित्य धर की ‘धुरंधर’ को पीछे छोड़ दिया है। रिलीज के 39वें दिन ‘धुरंधर’ ने जहां 2.25 करोड़ रुपये कमाए, वहीं ‘द राजा साब’ ने अपने चौथे दिन इससे दोगुनी से ज्यादा कमाई कर ली। यह तुलना बताती है कि गिरावट के बावजूद फिल्म पूरी तरह रेस से बाहर नहीं हुई है।
    फिल्म और सीक्वल की तैयारी
    ‘द राजा साब’ एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म है, जिसमें प्रभास के साथ मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार अहम भूमिकाओं में नजर आ रही हैं। संजय दत्त, बोमन ईरानी, जरीना वहाब, योगी बाबू और ब्रह्मानंदम जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्म 9 जनवरी 2026 को रिलीज हुई थी। मेकर्स ने इसके सीक्वल ‘द राजा साब 2: सर्कस 1935’ का एलान भी कर दिया है, हालांकि इसकी रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है।
  • ऑस्ट्रेलिया को करारा झटका: एलिसा हीली ने T20 वर्ल्ड कप से पहले लिया संन्यास

    ऑस्ट्रेलिया को करारा झटका: एलिसा हीली ने T20 वर्ल्ड कप से पहले लिया संन्यास

    नई दिल्ली। वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप से पहले ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। टीम की अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज और कप्तान एलिसा हीली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। उनके इस फैसले से न सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की टीम की रणनीतियों पर असर पड़ेगा, बल्कि महिला क्रिकेट जगत में भी एक सुनहरे अध्याय का अंत हो जाएगा।

    भारत के खिलाफ आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला

    35 वर्षीय एलिसा हीली ने साफ किया है कि भारत के खिलाफ होने वाली आगामी सीरीज उनके करियर की आखिरी अंतरराष्ट्रीय सीरीज होगी। उन्होंने यह खुलासा 12 जनवरी को ‘विलो टॉक’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान किया। हीली ने कहा कि उन्होंने मार्च 2026 के बाद क्रिकेट से दूर जाने का मन बना लिया है। उनका मानना है कि अब वह शुरुआती जैसी प्रतिस्पर्धी ऊर्जा महसूस नहीं कर पा रही हैं, जिसने कभी उन्हें इस खेल से जोड़े रखा।

    2023 में संभाली थी कप्तानी

    एलिसा हीली को साल 2023 में मेग लैनिंग के संन्यास के बाद ऑस्ट्रेलिया की फुल-टाइम कप्तान बनाया गया था। हालांकि भारत के खिलाफ होने वाली टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में वह हिस्सा नहीं लेंगी। चयनकर्ताओं का मानना है कि इससे टीम को टी20 वर्ल्ड कप से पहले नए संयोजन और भविष्य के कप्तान को परखने का मौका मिलेगा। हीली वनडे सीरीज खेलेंगी और इसके बाद पर्थ में 6 से 9 मार्च के बीच खेले जाने वाले डे-नाइट टेस्ट मैच के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहेंगी। यह उनके करियर का 11वां टेस्ट मैच होगा।

    शानदार रहा एलिसा हीली का करियर

    एलिसा हीली ने फरवरी 2010 में महज 19 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। अपने 16 साल से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने महिला क्रिकेट में कई कीर्तिमान स्थापित किए।
    हीली ने 123 वनडे मैचों में 3,563 से अधिक रन बनाए, जबकि 162 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 3,054 रन उनके नाम दर्ज हैं। टी20 क्रिकेट में उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 148 रन रहा, जो किसी भी फुल मेंबर टीम की महिला खिलाड़ी द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है।

    खिताबों से भरा रहा सफर

    एलिसा हीली ऑस्ट्रेलिया की सबसे सफल खिलाड़ियों में शुमार रही हैं। वह 2010, 2012, 2014, 2018, 2020 और 2023 में महिला टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहीं। वहीं वनडे वर्ल्ड कप में उन्होंने 2013 और 2022 में खिताब अपने नाम किया। अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर हीली को 2018 और 2019 में आईसीसी टी20आई क्रिकेटर ऑफ द ईयर का सम्मान भी मिला।

    ऑस्ट्रेलिया के लिए नई चुनौती

    एलिसा हीली के संन्यास के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम एक नए दौर में प्रवेश करेगी। टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम को नया कप्तान और नया संतुलन तलाशना होगा। क्रिकेट फैंस के लिए यह पल भावुक है, क्योंकि एलिसा हीली सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट की पहचान बन चुकी थीं।

  • भगवान श्रीकृष्ण का 16,108 रानियों से विवाह: नारी अस्मिता और समाज के लिए एक अद्भुत लीला

    भगवान श्रीकृष्ण का 16,108 रानियों से विवाह: नारी अस्मिता और समाज के लिए एक अद्भुत लीला


    नई दिल्ली । भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अनेक रहस्यों और शिक्षाओं से भरा हुआ है। उनकी प्रत्येक घटना गहरे आध्यात्मिक और नैतिक संदेश देती है। इनमें से एक प्रमुख घटना उनके द्वारा 16,108 रानियों से विवाह करने की है, जिसे अक्सर लोग एक सामान्य विवाह कथा मान लेते हैं, लेकिन इसका वास्तविक अर्थ और उद्देश्य कहीं अधिक गहरा है। श्रीकृष्ण ने जिन 16,108 रानियों से विवाह किया, वह केवल एक व्यक्तिगत या भौतिक लीलाओं का हिस्सा नहीं था। इसके पीछे एक गहरा संदेश है, जो नारी अस्मिता, समाज में समानता, और न्याय की रक्षा से जुड़ा है। इस घटना का प्रमुख उद्देश्य इन 16,100 कन्याओं को नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त कराना था, जिनकी मुक्ति के लिए श्रीकृष्ण ने युद्ध किया और उन्हें सम्मान प्रदान किया।

    8 प्रमुख रानियाँ और उनके प्रतीक

    श्रीकृष्ण की 8 प्रमुख रानियों को ‘अष्टभार्या’ कहा जाता है। ये रानियाँ विभिन्न गुणों और शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती थीं रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी देवी का स्वरूप जो समृद्धि और वैभव की प्रतीक थीं। सत्यभामा एक महान योद्धा और पराक्रमी जिनका जन्म सत्राजित के घर हुआ था। जाम्बवती जाम्बवंत की पुत्री, जो बल और साहस का प्रतीक थीं। कालिंदी सूर्यपुत्री, यमुना की देवी, जो जल तत्व और जीवन के प्रवाह का प्रतीक थीं। मित्रबिन्दा जो मित्रता और सौहार्द की प्रतीक थीं। सत्या सत्य और धर्म की आस्था रखने वाली। भद्रा जो शांति और संतुलन की प्रतीक थीं। लक्ष्मणा जो विवेक और आदर्श का पालन करने वाली थीं।

    16,100 रानियों का उद्धार

    इसके अलावा, श्रीकृष्ण ने 16,100 कन्याओं से विवाह किया जिनका अपहरण असुर राजा नरकासुर ने किया था। नरकासुर एक अत्याचारी और दुराचारी राजा था, जिसने इन कन्याओं को बंदी बना लिया था और उन्हें अपमानित किया था। श्रीकृष्ण ने इस असुर का वध किया और इन कन्याओं को नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त कराकर उनका सम्मान बढ़ाया। जब इन कन्याओं ने श्रीकृष्ण से आशीर्वाद मांगा, तो उन्होंने उन्हें अपनी पतिव्रता रानियों की तरह सम्मान दिया। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने न केवल इन कन्याओं को सामाजिक सम्मान प्रदान किया बल्कि यह भी प्रमाणित किया कि एक सशक्त और स्वतंत्र नारी को सम्मान मिलना चाहिए और उसकी अस्मिता का हनन किसी भी परिस्थिति में नहीं होना चाहिए।

    आध्यात्मिक संदेश

    श्रीकृष्ण की यह लीला सामाजिक न्याय और समानता का प्रतीक मानी जाती है। उनका विवाह इन 16,100 रानियों से यह दिखाता है कि वह हर एक व्यक्ति की अस्मिता और सम्मान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध थे। यह संदेश हमें बताता है कि समाज में सभी व्यक्तियों को बराबरी का दर्जा और सम्मान मिलना चाहिए चाहे वह पुरुष हो या महिला। श्रीकृष्ण का जीवन हमें यह भी सिखाता है कि सच्चे प्रेम और त्याग की कोई सीमा नहीं होती। उनका यह विवाह केवल एक पौराणिक घटना नहीं बल्कि एक गहरी सामाजिक और आध्यात्मिक शिक्षा का प्रतीक है।