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  • झारखंड BJP अध्यक्ष का ऐलान 14 जनवरी को, 13 जनवरी को होगा चुनाव और नामांकन प्रक्रिया

    झारखंड BJP अध्यक्ष का ऐलान 14 जनवरी को, 13 जनवरी को होगा चुनाव और नामांकन प्रक्रिया


    झारखंड । झारखंड भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा 14 जनवरी को की जाएगी। 13 जनवरी को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य के लिए नामांकन प्रक्रिया होगी, और उसके बाद दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। फिर दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। अगर कोई चुनाव की आवश्यकता पड़ी तो 14 जनवरी को दोपहर 2 बजे के बाद प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इस दौरान यदि मतदान की प्रक्रिया होती है, तो उसे भी पूरा किया जाएगा। फिलहाल, बाबूलाल मरांडी झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष हैं, और वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। हालांकि, पार्टी में कई बदलावों की संभावनाएं हैं, और इस बार आदित्य साहू का नाम सबसे आगे चल रहा है। आदित्य साहू अभी झारखंड बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और राज्यसभा के सांसद भी हैं, जिससे उनकी अध्यक्ष बनने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।

    झारखंड में बीजेपी के संगठनात्मक चुनाव

    9 जनवरी को झारखंड बीजेपी के 23 सांगठनिक जिलों के निर्वाचित जिलाध्यक्षों के नाम घोषित कर दिए गए हैं। प्रदेश चुनाव अधिकारी, बीजेपी के महामंत्री और सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा के अनुसार, इन चुनावों की प्रक्रिया प्रदेश स्तर से नियुक्त चुनाव अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की निगरानी में संपन्न कराई गई। खास बात यह है कि इन जिलाध्यक्षों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं, और सामाजिक दृष्टि से चार जिलाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति वर्ग से, एक अनुसूचित जाति वर्ग से, और बाकी पिछड़ा और सामान्य वर्ग के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा आठ जिलाध्यक्ष ऐसे भी हैं जिन्हें दोबारा निर्वाचित किया गया है।

    बीजेपी संगठन चुनाव का महत्व

    झारखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बीजेपी के संगठन चुनाव लंबे समय से लटके हुए थे। इनमें से यूपी और गुजरात को नए अध्यक्ष मिल चुके हैं, और राष्ट्रीय स्तर पर भी नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। अब, झारखंड, कर्नाटका, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बनने का इंतजार है, और 13-14 जनवरी को होने वाली चुनाव प्रक्रिया के बाद इन राज्यों में भी संगठनात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

  • सुशील कुमार ने सागर धनखड़ हत्याकांड में नियमित जमानत की याचिका दायर की, बदल चुकी परिस्थितियों का हवाला

    सुशील कुमार ने सागर धनखड़ हत्याकांड में नियमित जमानत की याचिका दायर की, बदल चुकी परिस्थितियों का हवाला


    नई दिल्ली । पहलवान सुशील कुमार ने सागर धनखड़ हत्याकांड मामले में नियमित जमानत के लिए एक नई याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने बदल चुकी परिस्थितियों का हवाला देते हुए अदालत से जमानत की अपील की है। उनका कहना है कि रोहिणी कोर्ट में मामले के सभी अहम गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, जिससे अब गवाहों पर दबाव डालने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोई आशंका नहीं रही है। सुशील कुमार ने अदालत में अपनी याचिका में दावा किया है कि अभियोजन पक्ष के सभी महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ पूरी हो चुकी है। अब चूंकि मामले में कोई भी नया तथ्य सामने आने की संभावना नहीं है इसलिए नियमित जमानत दी जाए।
    उनके वकील आर.एस. मलिक ने यह भी बताया कि सुशील कुमार का स्वास्थ्य लंबे समय से जेल में रहने के कारण बिगड़ने लगा है और अब न्यायिक हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। कभी सुशील कुमार को 2021 में सागर धनखड़ हत्याकांड में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली के मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में उनका नाम आरोपियों में था। इस मामले में पहलवान सुशील कुमार और उनके साथियों पर आरोप है कि 4-5 मई 2021 की रात सागर धनखड़ को अगवा कर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम के पार्किंग क्षेत्र में ले जाकर उन पर हमला किया था जिससे उनकी मौत हो गई थी।

    इसके बाद, मार्च 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट से सुशील कुमार को नियमित जमानत मिल गई थी, लेकिन 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यह जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले के सभी अहम गवाहों से पूछताछ पूरी नहीं हुई थी इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब तक गवाहों के बयान दर्ज नहीं होते, तब तक आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती। हालांकि कोर्ट ने यह संभावना भी जताई थी कि यदि परिस्थितियां बदलती हैं तो आरोपी फिर से जमानत की याचिका दायर कर सकता है।

    अब, सुशील कुमार की ओर से दाखिल की गई नई याचिका में यह तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं। अब तक 222 गवाहों में से 42 अहम गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं जिसमें घायल पक्ष के सदस्य भी शामिल हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले में अब अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हैं और इस दौरान सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने का कोई कारण नहीं रह गया है। रोहिणी कोर्ट में मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई हो सकती है और अदालत से उम्मीद की जा रही है कि सुशील कुमार को जमानत मिलने की संभावना है खासकर जब उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। अदालत इस याचिका पर अगली सुनवाई के दौरान फैसला ले सकती है।

  • संक्रांति के बाद मध्य प्रदेश में मौसम बदलेगा करवट, उत्तर में मावठे के आसार

    संक्रांति के बाद मध्य प्रदेश में मौसम बदलेगा करवट, उत्तर में मावठे के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में शीतलहर का असर अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड के बीच मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि संक्रांति के बाद मौसम की चाल बदल सकती है। भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 जनवरी से उत्तरी हिमालय क्षेत्र में नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी इलाकों में दो से तीन दिन बाद मावठे की स्थिति बन सकती है।
    इस बीच ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग में तेज सर्दी के साथ मध्यम स्तर का कोहरा छाए रहने की संभावना है। मंगलवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा जिलों में कोहरे का असर दर्ज किया गया। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, खजुराहो, गुना, शिवपुरी, शाजापुर और सीहोर में भी सुबह के समय धुंध देखने को मिली। अधिकतर क्षेत्रों में दृश्यता घटकर 1 से 2 किलोमीटर के बीच रही।

    उत्तरी भारत से आ रही बर्फीली हवाओं के सीधे असर के चलते प्रदेश के उत्तर हिस्सों में ठंड और ज्यादा तीखी हो गई है। ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है, वहीं दतिया और श्योपुर में भी सर्दी का असर बरकरार है। राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैन में रात का पारा लगातार 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया जा रहा है।

    रविवार और सोमवार की रात बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। भोपाल में 9 डिग्री, इंदौर में 9.6 डिग्री, उज्जैन में 9.4 डिग्री और जबलपुर में 9.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। वहीं शहडोल जिले के कल्याणपुर में प्रदेश का सबसे कम न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस रहा। दतिया में 5.4 डिग्री, राजगढ़ और पचमढ़ी में 5.6 डिग्री, मंडला में 5.9 डिग्री और खजुराहो में 6.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे बना हुआ है।

    दिन के तापमान की बात करें तो सोमवार को दतिया सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 21.8 डिग्री, पचमढ़ी में 21.2 डिग्री, नौगांव में 21.6 डिग्री, रीवा में 22.2 डिग्री, खजुराहो और श्योपुर में 22.6 डिग्री तथा मलाजखंड में 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    नए साल की शुरुआत से ही प्रदेश में घना कोहरा और तेज ठंड का दौर जारी है, जिसका सीधा असर रेल सेवाओं पर पड़ रहा है। दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं। इनमें मालवा एक्सप्रेस सबसे अधिक प्रभावित बताई जा रही है। इसके अलावा पंजाब मेल, जनशताब्दी, झेलम और सचखंड एक्सप्रेस सहित करीब एक दर्जन ट्रेनें अपने तय समय से विलंब से पहुंच रही हैं।

  • Delhi Airport Closure: 21–26 जनवरी तक उड़ानें प्रभावित, जानिए क्या है पूरा प्लान

    Delhi Airport Closure: 21–26 जनवरी तक उड़ानें प्रभावित, जानिए क्या है पूरा प्लान

    नई दिल्ली। अगर आप 21 जनवरी से 26 जनवरी के बीच दिल्ली एयरपोर्ट से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो यह जानकारी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. गणतंत्र दिवस परेड, उसकी रिहर्सल और उससे जुड़ी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते दिल्ली का हवाई क्षेत्र (Airspace) इन 6 दिनों तक रोज कुछ घंटों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा. इसका सीधा असर दिल्ली आने-जाने वाली सैकड़ों उड़ानों पर पड़ सकता है.

    सरकार की ओर से NOTAM (Notice to Airmen) जारी कर दिया गया है, जिसमें साफ तौर पर बताया गया है कि तय समय के दौरान न तो कोई विमान दिल्ली में लैंड कर सकेगा और न ही यहां से टेक-ऑफ कर पाएगा. चूंकि दिल्ली एयरपोर्ट देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है, इसलिए इस बंदी का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश-विदेश की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी प्रभावित होंगी.

    कब और कितनी देर के लिए बंद रहेगा दिल्ली एयरस्पेस?

    NOTAM के मुताबिक 21 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक हर दिन सुबह 10:20 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक दिल्ली के ऊपर से सभी तरह की उड़ानों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी जाएगी. इस दौरान कोई भी फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड नहीं करेगी. कोई भी विमान दिल्ली से टेक-ऑफ नहीं कर पाएगा. यह व्यवस्था गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल, अभ्यास और 26 जनवरी के मुख्य समारोह में होने वाले वायुसेना के फ्लाईपास्ट और VVIP मूवमेंट को ध्यान में रखकर की गई है.

    गणतंत्र दिवस पर एयरस्पेस क्यों किया जाता है बंद?

    हर साल गणतंत्र दिवस से पहले और 26 जनवरी को दिल्ली में बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है. इस दौरान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर फ्लाईपास्ट का अभ्यास करते हैं. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी मेहमानों की मौजूदगी रहती है. किसी भी तरह की हवाई चूक से बचने के लिए एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है. इसी वजह से NOTAM जारी कर एयरलाइंस और पायलट्स को पहले से सूचित किया जाता है, ताकि वे अपने उड़ान संचालन की योजना बदल सकें.

    यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?

    दिल्ली एयरपोर्ट से सफर करने वाले यात्रियों को इन दिनों कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. उड़ानों पर संभावित असर देखने को मिल सकता है. कई फ्लाइट्स के डिपार्चर और अराइवल टाइम बदले जा सकते हैं. कुछ उड़ानें रद्द (Cancel) या री-शेड्यूल हो सकती हैं. कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को अतिरिक्त दिक्कत हो सकती है. पहले से चल रहे कोहरे (Fog) के कारण देरी और ज्यादा बढ़ सकती है. एविएशन एनालिटिक्स कंपनी सिरियम (Cirium) के मुताबिक, इस अवधि में 600 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं. दिल्ली एयरपोर्ट से रोज़ लाखों यात्री सफर करते हैं और बड़ी संख्या में इंटरनेशनल कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी यहीं से जुड़ती हैं.

  • महाराष्ट्र निकाय चुनाव में 4 बच्चों की मां का आवेदन स्वीकार, नियमों पर उठे सवाल, अब शरद पवार की पार्टी का क्या होगा?

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव में 4 बच्चों की मां का आवेदन स्वीकार, नियमों पर उठे सवाल, अब शरद पवार की पार्टी का क्या होगा?


    महाराष्ट्र । महाराष्ट्र के नागपुर नगर निगम चुनाव में एक महिला उम्मीदवार का आवेदन स्वीकार कर लिया गया है जो चार बच्चों की मां हैं। यह मामला इसलिए विवादित हो गया है क्योंकि राज्य के नियमों के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार नगर निगम चुनाव में नहीं भाग ले सकते। इस बार दक्षिण-पश्चिम नागपुर के वार्ड 36 से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार पुष्पा मुकेश वाघमारे का नामांकन स्वीकार कर लिया गया, जबकि उनके चार बच्चे हैं।

    नियमों की अनदेखी या प्रशासन की गलती

    महाराष्ट्र में एक कानून के तहत 1995 में लागू किए गए महाराष्ट्र नगर निगम और नगर परिषद नगर पंचायत और औद्योगिक टाउनशिप द्वितीय संशोधन अधिनियम के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार नगर निगम चुनावों में भाग नहीं ले सकते। बावजूद इसके पुष्पा वाघमारे का नामांकन स्वीकार किया गया। महिला उम्मीदवार ने खुद अपने एफिडेविट में अपने चार बच्चों का विवरण दिया था और यह जानकारी स्पष्ट रूप से चुनाव अधिकारियों के पास थी, फिर भी उनका आवेदन मंजूर कर लिया गया।पुष्पा वाघमारे ने इस विवाद पर कहा मुझे नियमों के बारे में जानकारी नहीं थी क्योंकि मैं पहली बार चुनाव लड़ रही हूं। मेरा नामांकन स्वीकार कर लिया गया है और मैं अपनी जिम्मेदारी नहीं उठाऊंगी अगर इसमें कोई गलती हुई है। मैं चुनाव में बनी रहूंगी और मुझे बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

    क्या शरद पवार के लिए यह परेशानी का कारण बनेगा

    यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह विवाद NCP के लिए राजनीतिक परेशानी का कारण बनेगा। शरद पवार की पार्टी के तहत इस तरह के नियमों की अनदेखी ने विरोधियों को मौक़ा दिया है। वैसे भी महाराष्ट्र में भाजपा ने 2017 तक लगातार तीन कार्यकालों तक नागपुर नगर निगम पर अपना नियंत्रण बनाए रखा था और अब देखना यह है कि शरद पवार के नेतृत्व में NCP इस विवाद को कैसे संभालती है।

    पुष्पा वाघमारे का समाज में अच्छा प्रभाव

    पुष्पा वाघमारे को उनके क्षेत्र में एक छोटे से कैटरिंग व्यवसायी के रूप में जाना जाता है और वे एक समाजसेवी भी हैं। स्थानीय महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता है, और उनका दावा है कि उनके क्षेत्र में जल निकासी की समस्या है, जो भारी बारिश के दौरान बाढ़ का कारण बनती है। वे इन समस्याओं को हल करने के लिए चुनाव में उतर रही हैं।

    नागपुर की चुनावी स्थिति और विवाद

    नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह नगर है। 2017 में हुए नगर निगम चुनाव तक भाजपा ने इस नगर निगम पर लगातार तीन कार्यकालों तक अपना नियंत्रण बनाए रखा था। अब जब NCP ने इस सीट पर अपनी उम्मीदवार उतारी है तो यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। हालांकि यह साफ नहीं है कि प्रशासन की लापरवाही से पुष्पा का नामांकन स्वीकार किया गया या इसे जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया लेकिन इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा दिए हैं। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या NCP इस विवाद से बचने के लिए जल्दी से कदम उठाएगी या पार्टी इसे अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाएगी।

  • ईरान में खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने वाले इरफान सोलतानी को फांसी की सजा की तैयारी, कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल

    ईरान में खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने वाले इरफान सोलतानी को फांसी की सजा की तैयारी, कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच एक और खौफनाक खबर सामने आई है। 26 वर्षीय इरफान सोलतानी जिन्होंने खामेनेई के खिलाफ 8 जनवरी को हुए प्रदर्शन में भाग लिया था अब उन्हें फांसी की सजा दिए जाने की तैयारी है। सोलतानी को 14 जनवरी को फांसी दी जा सकती है और उनके मामले को लेकर मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में गहरी चिंता जताई जा रही है।

    इरफान सोलतानी जो तेहरान के पास कराज शहर के फर्दीस इलाके के निवासी हैं, को खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता का अवसर नहीं दिया गया। वे बिना वकील से मिले ही अपनी सजा का सामना करने के लिए मजबूर हो गए हैं। उनका परिवार भी इस मामले से पूरी तरह अज्ञात रखा गया है और उन्हें इस बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई। 11 जनवरी को जब सोलतानी के परिवार को उनकी मौत की सजा के बारे में सूचित किया गया, तब भी उन्हें केवल 10 मिनट की मुलाकात करने की अनुमति दी गई।

    सोलतानी की बहन जो खुद एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं ने कानूनी तरीके से अपने भाई की सजा को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें केस की फाइल तक देखने और अपने भाई का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति नहीं दी गई। यह मामले की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। इसके अलावा लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी मारियो नॉफाल ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ईरान में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सरकार इन विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए डर का माहौल बना रही है।

    तेज ट्रायल और सख्त दंड की प्रक्रिया ईरान में बढ़ते विरोधों को दबाने के लिए अपनाई जा रही है। इजरायल और अमेरिका आधारित न्यूज आउटलेट जफीड के मुताबिक सोलतानी का मामला आने वाली सख्त सजाओं का संकेत हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान सरकार इस तरह के मामलों के माध्यम से आगे के प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रही है। नॉर्वे में पंजीकृत कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ ने भी इस मामले की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की है।

    ईरान में खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला पिछले 16 दिनों से जारी है। इन प्रदर्शनों में अब तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। इस दौरान 10,681 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तेहरान में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हॉस्पिटल के बाहर शवों का ढेर लगा हुआ है, और लोग अपने परिजनों के शवों की तलाश कर रहे हैं। ईरान की सरकार की यह कठोर कार्रवाई और नफरत से भरी नीति विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए उठाए गए कदमों का हिस्सा है, लेकिन इनका परिणाम केवल और अधिक हिंसा और रक्तपात हो सकता है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि ईरान में इस तरह की कार्रवाई केवल सत्ता की तानाशाही को मजबूत करने के लिए की जा रही है।

  • टाइगर श्रॉफ से ब्रेकअप के बाद दिशा पाटनी की रोमांटिक मस्ती, वीडियो में नजर आया नया अंदाज

    टाइगर श्रॉफ से ब्रेकअप के बाद दिशा पाटनी की रोमांटिक मस्ती, वीडियो में नजर आया नया अंदाज

    नई दिल्ली। टाइगर श्रॉफ संग ब्रेकअप के बाद दिशा पाटनी का नाम जिम ट्रेनर अलेक्जेंडर से जुड़ा था, लेकिन दोनों ने हमेशा अपने रिश्ते को दोस्ती करार दिया, लेकिन अब एक्ट्रेस एक नए शख्स के साथ रोमांटिक होती नजर आईं और ये कोई और नहीं बल्कि फेमस सिंहर है। क्या बॉलीवुड में एक नई लव स्टोरी आकार ले रही है? एक्ट्रेस दिशा पटानी, जिनका नाम लंबे समय तक टाइगर श्रॉफ के साथ जुड़ा रहा, एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि दिशा और टाइगर ने कभी अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया, लेकिन 2022 में दोनों के अलग होने की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। अब, कथित ब्रेकअप के करीब चार साल बाद, ऐसा लगता है कि दिशा की जिंदगी में फिर से प्यार ने दस्तक दी है-और इस बार उनका नाम पंजाबी सिंगर तलविंदर के साथ जोड़ा जा रहा है।
    उदयपुर ट्रिप बनी चर्चा का कारण
    हाल ही में दिशा पटानी उदयपुर में नजर आईं, जहां वह कृति सेनन की बहन नूपुर सेनन और सिंगर स्टेबिन बेन की शादी में शामिल होने पहुंची थीं। इस दौरान उन्हें अपनी करीबी दोस्त और एक्ट्रेस मौनी रॉय तथा उनके पति सूरज नांबियार के साथ उदयपुर एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया। लेकिन इन सबके बीच जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वह था दिशा के साथ पंजाबी सिंगर तलविंदर की मौजूदगी।

    मास्क में दिखे तलविंदर
    तलविंदर, जो आमतौर पर पब्लिक में अपना चेहरा नहीं दिखाते, एयरपोर्ट पर भी फेस मास्क पहने नजर आए। यह उनका जाना-पहचाना अंदाज़ है, क्योंकि वह अक्सर परफॉर्मेंस के दौरान फेस पेंट के साथ दिखाई देते हैं और ऑफ-स्टेज अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं। दोनों को एयरपोर्ट टर्मिनल में एक साथ एंट्री करते हुए भी देखा गया, जहां दिशा उन्हें बोर्डिंग पास से जुड़ी औपचारिकताओं में मदद करती नजर आईं।

    CISF चेक के दौरान दिखा चेहरा
    एक दिलचस्प पल तब सामने आया, जब CISF वेरिफिकेशन के दौरान तलविंदर को कुछ समय के लिए अपना चेहरा दिखाना पड़ा। इस छोटी सी झलक ने ही सोशल मीडिया पर अटकलों को और हवा दे दी। लोगों ने कयास लगाने शुरू कर दिए कि क्या वाकई दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।

    मुंबई एयरपोर्ट पर अलग अंदाज
    मुंबई पहुंचने के बाद भी दोनों का व्यवहार चर्चा का विषय बना रहा। तलविंदर को एयरपोर्ट पर दिशा से थोड़ा आगे चलते हुए देखा गया, जिससे ऐसा लगा कि वह एक साथ तस्वीरें खिंचवाने से बचना चाहते हों। बाहर निकलते वक्त उन्होंने मौनी रॉय को गले लगाया, जिससे साफ जाहिर हुआ कि वह दिशा के फ्रेंड सर्कल में भी अच्छी तरह घुले-मिले हुए हैं।

    ऑफिशियल कन्फर्मेशन का इंतजार
    हालांकि अभी तक दिशा पटानी या तलविंदर की ओर से उनके रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे पहले भी दिशा को गोवा में अरशद वारसी के साथ देखा गया था, जहां वह एक मिस्ट्री मैन के साथ कार में बैठी नजर आई थीं। तब भी यह अंदाजा लगाया गया था कि वह शख्स तलविंदर हो सकता है, लेकिन पहचान की पुष्टि नहीं हो पाई थी।

    कौन हैं तलविंदर?
    पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के चर्चित नामों में शुमार तलविंदर ‘गैलन 4’, ‘पल पल’, ‘हसीन’, ‘योर आइज’, ‘तू’, ‘विशेज’ और ‘ख्याल’ जैसे कई हिट गानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ के गाने ‘तेनु ज्यादा मोहब्बत’ को अपनी आवाज दी है। तलविंदर हमेशा अपना चेहरा चिपाकर रखते हैं और मास्क पहने ही नजर आते हैं, वो नहीं चाहते की उनकी पहचान लोगों के सामने आए। दिशा के साथ पहली बार उनका चेहरा लोगों के सामने आया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह चर्चा महज एक संयोग है या वाकई दिशा पटानी की जिंदगी में एक नई शुरुआत होने वाली है। फिलहाल, फैंस को आधिकारिक पुष्टि का बेसब्री से इंतजार है।

  • बीजेपी मुख्यालय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी CPC के नेताओं से मुलाकात, पार्टी-टू-पार्टी संवाद को मजबूत करने पर चर्चा

    बीजेपी मुख्यालय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी CPC के नेताओं से मुलाकात, पार्टी-टू-पार्टी संवाद को मजबूत करने पर चर्चा

    नई दिल्ली । सोमवार को दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया जिसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सुन हैयान के नेतृत्व में चीनी डेलिगेशन ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों राजनीतिक दलों के बीच द्विपक्षीय संवाद को और अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाना था।बीजेपी महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने CPC के साथ पार्टी-टू-पार्टी संवाद को मजबूती देने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। बीजेपी के विदेश संपर्क विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बताया और सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों दलों ने राजनीतिक स्तर पर संचार को प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद को प्रगति मिल सके।

    बैठक में चीन के राजदूत की अहम उपस्थिति

    बीजेपी मुख्यालय में हुई इस बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। उनके साथ चीनी डेलिगेशन ने बैठक में हिस्सा लिया। जू फेइहोंग की उपस्थिति ने इस दौरे को चीन की तरफ से विशेष महत्व देने का संकेत दिया। इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए भविष्य में ऐसे संवादों के निरंतर और नियमित रूप से आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।

    बैठक का उद्देश्य और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का दृष्टिकोण
    चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की उप-मंत्री सुन हैयान ने बैठक के दौरान कहा कि राजनीतिक दलों के बीच संवाद, आपसी समझ और सहयोग महत्वपूर्ण है। CPC और BJP दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि राजनीतिक दलों के बीच मजबूत संवाद द्विपक्षीय संबंधों को नया दिशा दे सकता है और इससे न केवल दोनों देशों के बीच राजनीतिक बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह बैठक उस समय आयोजित की गई है जब भारत और चीन के बीच कई कूटनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। इस तरह के दौरों और संवादों के जरिए दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को बढ़ाया जा सकता है जिससे भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।

    भारत और चीन के संबंधों में नई दिशा

    यह मुलाकात भारत और चीन के रिश्तों के लिए अहम मानी जा रही है, खासकर जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और अन्य कूटनीतिक मुद्दों पर तनाव रहा है। इस संवाद के माध्यम से चीन और भारत दोनों ने दिखाया कि वे द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं और इस दिशा में सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • थलापति विजय की फिल्म 'जन नायकन' पर सियासी और सिने विवाद, रिलीज क्यों टल रही है?

    थलापति विजय की फिल्म 'जन नायकन' पर सियासी और सिने विवाद, रिलीज क्यों टल रही है?

    नई दिल्ली। साउथ के सुपरस्टार एक्टर थलापति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। यह फिल्म 18 दिसंबर 2025 को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को सबमिट की गई थी और इसे 9 जनवरी को रिलीज होना था। लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट में देरी की वजह से इसकी रिलीज टल गई। सेंसर बोर्ड ने फिल्म के कुछ सीन्स और डायलॉग्स पर आपत्ति जताई है। बोर्ड का मानना है कि फिल्म में कुछ ऐसे राजनीतिक कमेंट हैं जो विवाद पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से फिल्म को सर्टिफिकेट मिलने में देरी हुई। लेकिन बात बस इतनी सी नहीं है।

    धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप
    एक कम्प्लेंट में दावा किया गया कि फिल्म धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और फैंस बेसब्री से अपने चहेते एक्टर की आखिरी फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। प्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने बताया कि 22 दिसंबर को सेंसर बोर्ड ने ईमेल भेजा था कि कुछ छोटे बदलावों के बाद फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। मेकर्स ने बताए गए बदलाव कर दिए और फिल्म को दोबारा सबमिट किया, लेकिन फिर भी वक्त पर सर्टिफिकेट नहीं मिला।

    हाई कोर्ट ने दिया सर्टिफिकेट देने का आदेश
    बाद में पता चला कि सेंसर बोर्ड के एक मेंबर ने चेयरपर्सन को शिकायत भेजी थी, जिसके बाद फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया गया। मद्रास हाई कोर्ट ने पहले फिल्म को तुरंत सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया था, लेकिन फिर डिवीजन बेंच ने इस पर रोक लगा दी। विजय ने हाल ही में अपनी पॉलिटिकल पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (Tamilaga Vettri Kazhagam) की शुरुआत की है और ‘जन नायकन’ उनकी राजनीति में एंट्री से पहले की आखिरी फिल्म है। गॉसिप्स की मानें तो पॉलिटिकल वजहों से सेंसर बोर्ड की तरफ से देरी की गई।

    बार-बार रिलीज में देरी से फैंस में आक्रोश
    फिल्म की रिलीज डेट बार-बार टलने के कारण विजय के फैंस काफी नाराज हैं। केरल और तमिलनाडु में कई जगहों पर फैंस ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। हाल ही में विवाद के चलते कई प्री-प्लान्ड कार्यक्रमों (जैसे बाइक रैली और डीजे इवेंट्स) को रद्द करना पड़ा। एच विनोथ द्वारा निर्देशित इस पॉलिटिकल एक्शन थ्रिलर में एक आम आदमी की कहानी है जो समाज और राजनीति में बदलाव लाने के लिए संघर्ष करता है। फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, मामिता बैजू और प्रकाश राज जैसे एक्टर्स हैं।

    सु्प्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, क्या बोला CBFC?
    अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। केवीएन प्रोडक्शंस ने मद्रास हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सीबीएफसी ने भी सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कोई भी फैसला देने से पहले उन्हें भी सुना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अब मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी के लिए तय की है। प्रोड्यूसर ने वीडियो जारी करके फैंस से माफी मांगी है और कहा है कि मामला कोर्ट में है, इसलिए वे सब कुछ नहीं बता सकते।

  • बीएमसी चुनाव प्रचार में नितेश राणे का फिर विवादित बयान, मुस्लिम समाज पर की अपमानजनक टिप्पणी

    बीएमसी चुनाव प्रचार में नितेश राणे का फिर विवादित बयान, मुस्लिम समाज पर की अपमानजनक टिप्पणी


    मुंबई । बीएमसी चुनावों के प्रचार के दौरान महाराष्ट्र के बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे ने एक बार फिर विवादित बयान देकर राजनीति में हलचल मचा दी है। राणे ने मुस्लिम समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे चुनावी माहौल और भी गरमा गया है। राणे ने वसई में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कोई भी हरा सांप हिंदू समाज की तरफ गंदी नजर से देख नहीं सकता। हिंदुओं के त्योहार में कोई मस्ती करने की कोशिश करेगा तो वह वापस शुक्रवार को सरेंडर नहीं कर पाएगा । राणे ने आगे कहा हमें यह गारंटी है कि हम आपके साथ पूरी ताकत से खड़े रहेंगे। इस दौरान उन्होंने आई लव मोहम्मद कहने वालों को पाकिस्तान भेजने की धमकी भी दी और कहा कि शहर का मेयर जय श्रीराम बोलने वाला ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होकर पाकिस्तान में बैठे आई लव मोहम्मद’ वालों को वहां भेजना होगा।

    विवादों में घिरे नितेश राणे

    यह पहली बार नहीं है जब नितेश राणे ने इस तरह का विवादित बयान दिया हो। इससे पहले भी उन्होंने ठाकरे परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। नितेश राणे ने यह कहा था, ठाकरे भाइयों को वोट देने का मतलब पाकिस्तान में बैठे उनके अब्बा को वोट देना है। उन्होंने हिंदू समाज को सुरक्षित रखने की बात की और कहा कि मुंबई का मेयर हिंदू और मराठी” ही होना चाहिए। राणे के इस बयान के बाद से राजनीति में खलबली मच गई है। उनके बयान को विपक्ष ने आक्रामक ढंग से नकारा और इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है। वहीं बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों ने इसे हिंदू समाज की सुरक्षा और हित की बात बताया है।

    राजनीतिक गर्मी बढ़ी

    नितेश राणे के बयान के बाद से बीएमसी चुनावों में राजनीति और भी तीव्र हो गई है। जहां एक ओर बीजेपी और हिंदूवादी दल इसे अपनी चुनावी रणनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे समाज में नफरत फैलाने की कोशिश के रूप में उजागर कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान केवल वोटों के ध्रुवीकरण के लिए दिए जाते हैं, जो चुनावी लाभ के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। राणे के इस बयान पर कई नेताओं ने आलोचना की है, लेकिन बीजेपी के भीतर इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है। हालांकि, राणे पहले भी ऐसे विवादित बयान दे चुके हैं, जिन्हें बीजेपी की ओर से अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।