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  • T20 वर्ल्ड कप 2026: बांग्लादेश ने भारतीय मूल ICC अधिकारी को वीजा न देकर विवाद खड़ा किया

    T20 वर्ल्ड कप 2026: बांग्लादेश ने भारतीय मूल ICC अधिकारी को वीजा न देकर विवाद खड़ा किया


    नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की तरफ से उठाए जा रहे कदम लगातार विवादों का कारण बन रहे हैं। ताजा विवाद तब सामने आया जब बांग्लादेश ने भारतीय मूल के एक वरिष्ठ ICC अधिकारी को वीजा देने से इनकार कर दिया। यह कदम क्रिकेट जगत में बेहद असहज और शर्मनाक माना जा रहा है और ICC तथा बांग्लादेश के बीच तनाव और बढ़ गया है।

    बांग्लादेश की ओर से यह मांग की जा रही है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उसके भारत में होने वाले चार ग्रुप मैचों को श्रीलंका में शिफ्ट किया जाए।

    भारत और श्रीलंका इस टूर्नामेंट के सह-मेजबान हैं, लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने में समय कम होने के कारण शेड्यूल में बदलाव करना मुश्किल माना जा रहा है।

    ICC ने इस मसले को सुलझाने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को बांग्लादेश भेजा था। इनमें से एक भारतीय मूल का अधिकारी भी था। लेकिन बांग्लादेश सरकार ने उसे वीजा देने में देरी की और अंततः वीजा नहीं दिया। नतीजतन ICC का प्रतिनिधिमंडल अधूरा रह गया और केवल एंटी करप्शन यूनिट एवं सिक्योरिटी प्रमुख एंड्रयू एफग्रेव ही ढाका पहुंच सके।

    ICC अधिकारियों का यह दौरा मुख्य रूप से सुरक्षा चिंताओं को दूर करने और BCB को आश्वस्त करने के लिए था कि भारत में बांग्लादेशी टीम को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। ICC का मानना है कि भारत में सभी टीमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरे में ICC अधिकारी BCB के साथ-साथ बांग्लादेश के युवा और खेल मंत्रालय के पदाधिकारियों से भी चर्चा कर रहे थे।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश के चार मैच भारत में तय हैं

    कोलकाता के ईडन गार्डन्स में तीन और मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक। हाल में बांग्लादेश में हिंदू युवकों की हत्या के विरोध में भारत में विरोध-प्रदर्शन और कुछ विवादित घटनाओं के बाद BCB ने भारत में मैचों को कराने पर असमर्थता जताई और शिफ्ट करने की मांग उठाई।

    अब ICC के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह टूर्नामेंट की निष्पक्षता, सुरक्षा और शेड्यूल को बनाए रखते हुए इस विवाद को कैसे सुलझाता है। अगर यह विवाद समय रहते नहीं सुलझा तो T20 वर्ल्ड कप 2026 की छवि और आयोजन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

  • बसंत पंचमी से होली का उत्सव: ऋतु और धर्म का अद्भुत संगम.

    बसंत पंचमी से होली का उत्सव: ऋतु और धर्म का अद्भुत संगम.


    नई दिल्ली। मकर संक्रांति के बाद जैसे-जैसे बसंत पंचमी का पर्व करीब आता है देशभर में उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जिस दिन विद्या कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। लेकिन इसके साथ ही एक और रंगीन पर्व होली की तैयारी भी शुरू हो जाती है। सवाल यह है कि जब होली फाल्गुन मास में मनाई जाती है तो बसंत पंचमी पर इसकी तैयारी क्यों शुरू हो जाती है? इसका उत्तर ऋतु और धार्मिक विश्वासों में छिपा है।

    बसंत पंचमी का आगमन बसंत ऋतु के साथ होता है। बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस समय प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में दिखाई देती है। पेड़ों पर फूल खिलते हैं सरसों के खेत पीले रंग से लहलहा उठते हैं और वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि बसंत पंचमी को प्रकृति का उत्सव और नई खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन न केवल देवी सरस्वती की पूजा होती है बल्कि यह समय प्रकृति की सौंदर्य और रंगों का जश्न मनाने का भी है।

    धार्मिक दृष्टि से भी बसंत पंचमी और होली का संबंध गहरा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार बसंत ऋतु का आगमन ही होली के उत्सव का संकेत देता है। उत्तर भारत के विशेषकर ब्रज क्षेत्र में बसंत पंचमी से ही फाग गीत गाए जाने लगते हैं और होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। यह उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है जिसमें हर दिन मंदिरों और घरों में रंगों और गुलाल के साथ भगवान की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी से होली तक का यह समय प्रकृति के 12 रंगों और नई ऊर्जा का उत्सव माना जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार बसंत पंचमी और होली के बीच का यह समय प्रेम उल्लास और आनंद का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि में रंग भरने और प्रेम बनाए रखने के लिए कामदेव और रति ने भगवान शिव की तपस्या को भंग किया था। इसी घटना के बाद से बसंत पंचमी से लेकर होली तक का समय प्रेम और उत्साह के लिए पवित्र माना गया। इस अवधि में प्रकृति प्रेम और उल्लास सभी मिलकर मनुष्य और समाज में एक नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

    इस प्रकार बसंत पंचमी न केवल ज्ञान और विद्या का पर्व है बल्कि यह होली के रंगीन उत्सव की शुरुआत का संकेत भी देता है। ऋतु और धर्म का यह अद्भुत संगम समाज में उत्साह प्रेम और रंगों का संदेश फैलाता है।

  • मुनमुन दत्ता, ने प्यार और ब्रेकअप पर खोले दिल के राज, बोलीं ‘मैं तुरंत किसी से रिश्ता खत्म नहीं करती’

    मुनमुन दत्ता, ने प्यार और ब्रेकअप पर खोले दिल के राज, बोलीं ‘मैं तुरंत किसी से रिश्ता खत्म नहीं करती’

    नई दिल्ली । टीवी जगत की मशहूर अभिनेत्री मुनमुन दत्ता जिन्हें लोकप्रिय कॉमेडी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा में बबीता अय्यर के किरदार से घर-घर में पहचान मिली हाल ही में अपने निजी जीवन को लेकर खुलकर सामने आई हैं। मुनमुन हाल ही में यूट्यूबर और पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में नजर आईं जहां उन्होंने करियर के साथ-साथ प्यार रिश्तों और ब्रेकअप जैसे संवेदनशील विषयों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। पॉडकास्ट के दौरान मुनमुन दत्ता ने कहा कि प्यार को लेकर लोगों की सोच अक्सर एकतरफा होती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रिश्तों में प्यार खत्म होना केवल लड़कों के साथ नहीं बल्कि लड़कियों के साथ भी हो सकता है। मुनमुन ने स्वीकार किया कि उनके जीवन में भी ऐसे मौके आए हैं जब उन्हें महसूस हुआ कि शायद अब रिश्ते में पहले जैसी भावना नहीं रही।

    ब्रेकअप को लेकर अपनी सोच साझा करते हुए उन्होंने कहा मैं तुरंत किसी के साथ ब्रेकअप नहीं कर सकती। मैं हमेशा रिश्ते को बचाने की कोशिश करती हूं। मैं बहुत कुछ देती हूं भावनाएं समय और समझ। लेकिन एक वक्त ऐसा आता है जब मुझे लगता है कि अब पाने का समय है। जब लगातार देने वाला ही बनकर रह जाओ और बदले में कुछ न मिले तो वह बहुत बुरा लगता है। मुनमुन ने आगे कहा कि जब किसी रिश्ते में देने और पाने का संतुलन बिगड़ जाता है तो धीरे-धीरे नीरसता आने लगती है। यही नीरसता रिश्ते को कमजोर कर देती है और इंसान को यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या वाकई यह रिश्ता आगे चल पाएगा। उनका मानना है कि प्यार हमेशा स्थायी नहीं होता और इसे स्वीकार करना भी जिंदगी का एक हिस्सा है।

    अगर मुनमुन दत्ता के करियर की बात करें तो उन्होंने साल 2004 में टीवी शो हम सब बाराती से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह मुंबई एक्सप्रेस 2005 और हॉलीडे 2006 जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं। हालांकि उन्हें असली पहचान तारक मेहता का उल्टा चश्मा से ही मिली जिसने उन्हें टीवी की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। पॉडकास्ट में मुनमुन की यह ईमानदार बातचीत सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। फैंस उनकी साफगोई और रिश्तों को लेकर परिपक्व सोच की तारीफ कर रहे हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन: एक महीने में हटे 50 लाख अकाउंट, कितना कारगर रहा फैसला?

    ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन: एक महीने में हटे 50 लाख अकाउंट, कितना कारगर रहा फैसला?


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले को लागू हुए अब एक महीने से अधिक समय बीत चुका है और इसके शुरुआती नतीजे सामने आने लगे हैं। सवाल यह है कि क्या यह सख्त कदम वास्तव में असरदार साबित हो रहा है?

    यूरो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक कानून लागू होने के पहले ही महीने में सोशल मीडिया कंपनियों ने करीब 50 लाख नाबालिग अकाउंट हटा दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट रेगुलेटर ने बताया कि 10 दिसंबर से लागू हुए इस कानून के तहत 16 साल से कम उम्र के करीब 4.7 मिलियन अकाउंट विभिन्न प्लेटफॉर्म्स से डिलीट किए गए हैं। इसे डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया की ई-सेफ्टी कमिश्नर ने इस संबंध में गुरुवार को आधिकारिक डेटा जारी किया। उन्होंने बताया कि यह आंकड़े इस बात का शुरुआती संकेत हैं कि बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब नियमों को गंभीरता से लागू कर रहे हैं और नाबालिगों को प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं।ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने इन शुरुआती नतीजों पर संतोष जताते हुए कहा “मैं इन आंकड़ों से बहुत खुश हूं। यह साफ है कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर दी गई रेगुलेटरी गाइडेंस और प्लेटफॉर्म्स के साथ बेहतर समन्वय अब सकारात्मक नतीजे देने लगा है।” उन्होंने इसे कम्प्लायंस पर पहला सरकारी डेटा बताया।

    हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ 16 साल से कम उम्र के अकाउंट अभी भी सक्रिय हैं। उनका कहना था कि जैसे समाज में अन्य सुरक्षा कानूनों के साथ होता है वैसे ही इस कानून की सफलता केवल पूर्ण रोक से नहीं बल्कि नुकसान को कम करने और सामाजिक व्यवहार को बदलने से आंकी जाएगी। उन्होंने माना कि कुछ बच्चे सोशल मीडिया पर बने रहने के लिए “क्रिएटिव तरीके” अपना सकते हैं लेकिन कानून का उद्देश्य एक सुरक्षित डिजिटल संस्कृति तैयार करना है।इन नियमों का उल्लंघन करने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यही कारण है कि टेक कंपनियां अब उम्र सत्यापन और अकाउंट मॉनिटरिंग को लेकर ज्यादा सख्त रवैया अपना रही हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के इस कदम पर अब दुनिया के कई देश नजर बनाए हुए हैं। डेनमार्क समेत अन्य नॉर्डिक देशों ने भी इसी तरह के कानून पर काम शुरू कर दिया है। नॉर्डिक देशों के समूह ने नवंबर में घोषणा की थी कि वे 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस ब्लॉक करने को लेकर एक समझौते पर पहुंचे हैं जिसे 2026 के मध्य तक कानून का रूप दिया जा सकता है।डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह प्रयोग भविष्य में अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता का मूल्यांकन लंबे समय में ही संभव होगा जब यह देखा जाएगा कि इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल व्यवहार में कितना सकारात्मक बदलाव आता है।

  • सेब पर छिड़क लें बस एक चुटकी सेंधा नमक, स्वाद के साथ सेहत के फायदे हो जाएंगे दोगुने, जानिए दादी-नानी का आजमाया नुस्खा

    सेब पर छिड़क लें बस एक चुटकी सेंधा नमक, स्वाद के साथ सेहत के फायदे हो जाएंगे दोगुने, जानिए दादी-नानी का आजमाया नुस्खा


    नई दिल्ली । एक सेब रोज खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ यह कहावत लगभग हर किसी ने सुनी है। सेब को सेहत का खजाना माना जाता है, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर सेब को सही तरीके से खाया जाए, तो इसके फायदे और भी बढ़ सकते हैं। दादी-नानी के जमाने से चला आ रहा एक सरल घरेलू नुस्खा आज फिर चर्चा में है सेब के स्लाइस पर एक चुटकी सेंधा नमक छिड़क कर खाना। यह न केवल स्वाद को बढ़ाता है, बल्कि शरीर पर इसके पोषक तत्वों का असर भी दोगुना कर देता है। न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, सेब और सेंधा नमक का संयोजन शरीर के लिए पावरहाउस से कम नहीं है। सेब में मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है। जब इसे नमक के साथ खाया जाता है, तो शरीर इसे तेजी से अवशोषित करता है। यही वजह है कि यह नुस्खा दोपहर की थकान, कमजोरी या वर्कआउट से पहले इंस्टेंट एनर्जी देने में बेहद कारगर माना जाता है।

    सेंधा नमक या हिमालयन पिंक सॉल्ट में सोडियम के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य ट्रेस मिनरल्स भी होते हैं। ये तत्व शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में, अधिक पसीना आने या भारी शारीरिक मेहनत के दौरान यह मिश्रण मांसपेशियों में ऐंठन और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी यह नुस्खा बेहद लाभकारी है। सेब फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है। वहीं सेंधा नमक पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है। दोनों मिलकर पेट फूलने, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं और गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।

    एसिडिटी से परेशान लोगों के लिए भी सेब और सेंधा नमक का यह संयोजन फायदेमंद माना जाता है। सेंधा नमक की क्षारीय प्रकृति सेब के कुछ एसिडिक तत्वों को संतुलित कर देती है, जिससे पेट में जलन और खट्टी डकार जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। अक्सर लोगों को यह महसूस होता है कि नमक लगाने से सेब और भी मीठा लगने लगता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। नमक जीभ पर मौजूद कड़वाहट महसूस करने वाले रिसेप्टर्स को दबा देता है, जिससे सेब की प्राकृतिक मिठास और अधिक उभर कर सामने आती है।

    सेवन के सही तरीके की बात करें, तो हमेशा साधारण रिफाइंड नमक की जगह सेंधा नमक या गुलाबी नमक का ही उपयोग करें। नमक की मात्रा सिर्फ एक चुटकी तक सीमित रखें, क्योंकि अधिक नमक से ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सेब को अच्छी तरह धोकर ताजे स्लाइस में काटें और तुरंत सेवन करें। यह आसान घरेलू नुस्खा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है। खासतौर पर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों के लिए यह एक बेहतरीन प्री-वर्कआउट स्नैक साबित हो सकता है। हालांकि, किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में इसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

  • देश की जेन-जी को भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी

    देश की जेन-जी को भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी


    नई दिल्ली। मालदा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मालदा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस सपने को साकार करने में पूर्वी भारत की भूमिका सबसे अहम है और अब यह क्षेत्र तेजी से विकास की राजनीति को अपना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक पूर्वी भारत को नफरत भ्रम और तुष्टिकरण की राजनीति में उलझाकर रखा गया जिससे यहां विकास की रफ्तार धीमी रही। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और जनता विकास सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है। पीएम मोदी ने दावा किया कि देश की जेन-जी भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रही है क्योंकि युवा वर्ग को अवसर रोजगार और स्थायी भविष्य चाहिए।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार बनी है त्रिपुरा कई वर्षों से भाजपा पर भरोसा जता रहा है और असम में लगातार पार्टी को मजबूत जनसमर्थन मिल रहा है। हाल ही में बिहार में भी भाजपा-एनडीए की सरकार बनी है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में भी सुशासन की बारी है।

    पीएम मोदी ने दावा किया कि जहां-जहां वर्षों तक भाजपा को लेकर गलत जानकारी फैलाई गई वहां भी अब लोग सच्चाई समझ रहे हैं और पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार बंगाल की जनता भी भाजपा को विजयी बनाएगी।प्रधानमंत्री ने हालिया शहरी निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है। खासतौर पर मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगमबीएमसी में पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर कभी भाजपा की जीत को असंभव माना जाता था वहां भी अब अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भाजपा का मेयर बनना देश की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत है।

    विपक्ष पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के हर गरीब परिवार को पक्का घर मिले और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार केंद्र से भेजे गए गरीबों के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं होने दे रही है।आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल देश का एकमात्र राज्य है जहां यह योजना लागू नहीं की गई है। इससे गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है और इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।

    प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत देशभर में लाखों परिवारों ने अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल शून्य किया है और इसके लिए केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के लाखों परिवार भी इसका लाभ उठाएं लेकिन राज्य सरकार इस दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है।मालदा और पश्चिम बंगाल के विकास को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जाएंगे। उन्होंने मालदा की ‘मैंगो इकोनॉमी’ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा किया।

    जूट किसानों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले जूट का समर्थन मूल्य करीब 2400 रुपये था जो अब बढ़कर साढ़े 5500 रुपये से अधिक हो गया है। पहले दस वर्षों में जूट किसानों को केवल 400 करोड़ रुपये मिले थे जबकि पिछले 11 वर्षों में यह राशि बढ़कर 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। पीएम मोदी ने कहा कि यह बदलाव भाजपा की किसान-हितैषी नीतियों का प्रमाण है।

  • वास्तु टिप्स : घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये 4 प्रकार की मूर्तियां, वरना रुक सकती है तरक्की और बढ़ सकता है गृह-क्लेश

    वास्तु टिप्स : घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये 4 प्रकार की मूर्तियां, वरना रुक सकती है तरक्की और बढ़ सकता है गृह-क्लेश


    नई दिल्ली । घर के मंदिर के लिए वास्तु टिप्स । हिंदू धर्म में घर का मंदिर सबसे पवित्र, शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से पूरे घर में शुभ ऊर्जा का संचार होता है और परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि अनजाने में पूजा स्थल पर कुछ गलत प्रकार की मूर्तियां या तस्वीरें रख दी जाएं, तो यही मंदिर वास्तु दोष का कारण भी बन सकता है। ऐसे दोष न केवल आर्थिक परेशानियां बढ़ाते हैं, बल्कि पारिवारिक कलह, मानसिक तनाव और निर्णय क्षमता में कमी का कारण भी बन सकते हैं।

    ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, घर के मंदिर में कुछ विशेष प्रकार की मूर्तियां रखना अशुभ माना गया है। सबसे पहले बात करते हैं खंडित या टूटी हुई मूर्तियों की। यदि किसी मूर्ति का हाथ, पैर, मुख या अन्य कोई हिस्सा टूटा हुआ है, या उस पर से रंग उतर चुका है, तो ऐसी मूर्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि खंडित प्रतिमाओं से सकारात्मक फल नहीं मिलता, बल्कि घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। ऐसी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या पीपल के वृक्ष के नीचे रख देना उचित माना गया है। दूसरी महत्वपूर्ण बात भगवान के रौद्र या उग्र स्वरूप से जुड़ी है। घर के मंदिर में हमेशा देवी-देवताओं के शांत, सौम्य और आशीर्वाद देने वाले स्वरूप की ही मूर्तियां या तस्वीरें रखनी चाहिए। भगवान शिव का तांडव स्वरूप, कालभैरव या अत्यधिक क्रोधित मुद्रा वाली प्रतिमाएं घर में मानसिक अशांति, भय और तनाव का कारण बन सकती हैं। वास्तु के अनुसार, सौम्य स्वरूप की प्रतिमाएं घर में शांति, प्रेम और सामंजस्य बनाए रखती हैं।

    तीसरा वास्तु दोष तब उत्पन्न होता है जब एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां या तस्वीरें एक ही स्थान पर रख दी जाती हैं। वास्तु शास्त्र कहता है कि एक ही भगवान की दो या उससे अधिक प्रतिमाएं रखने से ऊर्जा का टकराव होता है। इसका प्रभाव घर के मुखिया और परिवार के सदस्यों की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है और अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है। चौथी महत्वपूर्ण गलती मूर्तियों को आमने-सामने रखना है। कई बार जगह की कमी या सजावट के कारण लोग देवी-देवताओं की मूर्तियों को एक-दूसरे के सामने रख देते हैं। वास्तु जानकारों के अनुसार, ऐसा करने से घर के सदस्यों के बीच मतभेद, विवाद और कलह की स्थिति बन सकती है। मूर्तियों की स्थापना इस प्रकार होनी चाहिए कि सभी एक ही दिशा में शांत भाव से विराजमान हों।

    इसके साथ ही मंदिर की नियमित साफ-सफाई और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। मूर्तियों पर धूल जमना, पुराने सूखे फूल, मुरझाई माला या जले हुए दीपक का अवशेष रखना वास्तु दोष को बढ़ाता है। यदि घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, तो उनकी नियमित सेवा, भोग और श्रृंगार करना विशेष रूप से आवश्यक माना गया है। कुल मिलाकर, घर का मंदिर केवल सजावट का स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा और ऊर्जा का केंद्र होता है। किसी भी शुभ तिथि या शनिवार के दिन अपने मंदिर का निरीक्षण कर वास्तु के अनुसार आवश्यक सुधार करें, ताकि आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता के मार्ग सदैव खुले रहें।

  • वडोदरा की चूक, अब नया मौका: कोहली के निशाने पर सहवाग और पोंटिंग का रिकॉर्ड

    वडोदरा की चूक, अब नया मौका: कोहली के निशाने पर सहवाग और पोंटिंग का रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों टीमें एक-एक मुकाबला जीतकर 1-1 की बराबरी पर हैं और रविवार को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में होने वाला तीसरा वनडे सीरीज का फैसला करेगा। इस अहम मुकाबले में भारतीय टीम के सीनियर बल्लेबाज विराट कोहली पर सभी की निगाहें टिकी होंगी, जिनसे एक बड़ी और यादगार पारी की उम्मीद की जा रही है।

    होल्कर स्टेडियम में विराट का साधारण रिकॉर्ड

    हालांकि इंदौर का यह मैदान विराट कोहली के लिए अब तक ज्यादा अनुकूल नहीं रहा है। कोहली ने होल्कर स्टेडियम में अब तक चार वनडे मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने महज 99 रन बनाए हैं। उनका औसत 33 का रहा है और इस मैदान पर उनका सर्वाधिक स्कोर सिर्फ 36 रन है। ऐसे में रविवार को विराट के पास इस रिकॉर्ड को बेहतर करने और आलोचकों को जवाब देने का सुनहरा मौका होगा। इंदौर के दर्शक भी चाहते हैं कि विराट इस मैदान पर एक ऐसी पारी खेलें, जिसे वे लंबे समय तक याद रख सकें, क्योंकि यह तय नहीं है कि भविष्य में वे यहां बतौर खिलाड़ी कब दोबारा खेलते नजर आएंगे।

    शानदार फॉर्म में हैं कोहली

    रिकॉर्ड भले ही इंदौर में विराट के पक्ष में न हों, लेकिन मौजूदा फॉर्म भारतीय टीम के लिए राहत की खबर है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में खेली गई वनडे सीरीज में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे विराट ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में भी 93 रन की शानदार पारी खेलकर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि दूसरे वनडे में वे सिर्फ 23 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन उनकी लय और आत्मविश्वास बरकरार है।

    सहवाग-पोंटिंग को पीछे छोड़ने का मौका

    तीसरे वनडे में विराट कोहली के पास एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम करने का अवसर होगा। विराट, वीरेंद्र सहवाग और रिकी पोंटिंग—तीनों ने ही न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट में 6-6 शतक लगाए हैं। अगर विराट रविवार को शतक लगाने में सफल रहते हैं, तो वे कीवी टीम के खिलाफ वनडे में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे। पहले वनडे में यह मौका उनसे चूक गया था, लेकिन निर्णायक मुकाबले में वे इसे भुनाना चाहेंगे।

    रोहित शर्मा से भी बड़ी पारी की उम्मीद

    विराट के साथ-साथ रोहित शर्मा पर भी सबकी नजरें होंगी। रोहित ने पिछले दोनों मैचों में अच्छी शुरुआत की, लेकिन उसे बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। निर्णायक मुकाबले में कप्तान से एक विस्फोटक और मैच जिताऊ पारी की उम्मीद की जा रही है, जिससे भारत सीरीज अपने नाम कर सके।

  • US टैरिफ से तमिलनाडु के उद्योग बेहाल: कोयंबटूर–तिरुपुर में रोजगार और निर्यात को बड़ा झटका

    US टैरिफ से तमिलनाडु के उद्योग बेहाल: कोयंबटूर–तिरुपुर में रोजगार और निर्यात को बड़ा झटका

    नई दिल्ली। कभी भारत के प्रमुख औद्योगिक और निर्यात केंद्रों में गिने जाने वाले तमिलनाडु के कोयंबटूर और तिरुपुर इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद यहां के कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं, काम के घंटे घटाए जा रहे हैं और लाखों कामगारों की रोजी-रोटी संकट में पड़ गई है।

    50% टैरिफ ने बदले हालात

    उद्योग जगत के अनुसार, अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद से ही कोयंबटूर और तिरुपुर के उद्योगों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। ये दोनों शहर मिलकर तमिलनाडु समेत कई राज्यों के लाखों लोगों को रोजगार देते थे, लेकिन अब हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

    दो से तीन लाख नौकरियां जा चुकीं

    उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक कपड़ा और इंजीनियरिंग सेक्टर में दो लाख से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं। यदि कास्टिंग, पंप, औद्योगिक वाल्व और अन्य सहायक उद्योगों को भी शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा तीन लाख से अधिक हो सकता है। कई छोटी और मझोली इकाइयां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जबकि कई फैक्ट्रियां सीमित क्षमता पर काम कर रही हैं।

    अमेरिका को निर्यात में भारी गिरावट

    एक निजी मिल में परिधान निर्यात और व्यापार विकास के उपाध्यक्ष धनबालन के अनुसार, पहले कोयंबटूर और तिरुपुर से अमेरिका को हर साल करीब 1.7 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात होता था। लेकिन अब यह आंकड़ा लगभग एक अरब डॉलर घट चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 50 प्रतिशत टैरिफ जारी रहा, तो अगले एक साल में अमेरिका को कपड़ा निर्यात लगभग पूरी तरह बंद हो सकता है।

    डीडीपी कीमत ने बढ़ाई मुश्किल

    उद्योग जगत का कहना है कि समस्या सिर्फ 50 प्रतिशत टैरिफ तक सीमित नहीं है। इसके साथ अन्य शुल्क भी जोड़े जाते हैं, जिससे डिलीवर ड्यूटी पेड (DDP) कीमत काफी बढ़ जाती है। नतीजतन, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद बेहद महंगे हो जाते हैं। वहीं चीन और बांग्लादेश जैसे देश करीब 30 प्रतिशत कम लागत में अपने उत्पाद बेच रहे हैं, जिससे भारतीय सामान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है।

    500% टैरिफ की आशंका से बढ़ी चिंता

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब खबरें सामने आईं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर विचार कर सकते हैं। इस पर धनबालन ने कहा कि जब 50 प्रतिशत टैरिफ ही उद्योगों को तोड़ रहा है, तो 500 प्रतिशत टैरिफ की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अगर ऐसा हुआ, तो निर्यात और रोजगार दोनों पर विनाशकारी असर पड़ेगा।

    नए बाजारों की तलाश की मांग

    अमेरिकी बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निर्यातक अब भारत सरकार और उद्योग संगठनों से नए बाजारों पर फोकस करने की मांग कर रहे हैं। उद्योग जगत का सुझाव है कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन को प्राथमिक बाजार बनाया जाए। उनका कहना है कि उद्योगों के अस्तित्व के लिए अब बाजारों में विविधता लाना बेहद जरूरी हो गया है।

    कामगारों का भविष्य अधर में

    वैश्विक व्यापार में बढ़ते तनाव और अमेरिकी टैरिफ नीति के चलते कोयंबटूर और तिरुपुर के लाखों कामगारों का भविष्य इस समय गंभीर संकट में नजर आ रहा है। अगर जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहराने की आशंका है।

  • मौनी अमावस्या 2026: 18 जनवरी को रवि मौनी अमावस्या, जानिए स्नान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    मौनी अमावस्या 2026: 18 जनवरी को रवि मौनी अमावस्या, जानिए स्नान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । मौनी अमावस्या 2026। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, लेकिन माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या को सभी अमावस्याओं में सर्वाधिक पुण्यदायी कहा गया है। इसे माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन स्नान, दान, पूजा, पितृ तर्पण और मौन व्रत करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म व्यक्ति के मन को शुद्ध करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं।

    इस वर्ष मौनी अमावस्या पर एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है। अमावस्या तिथि 18 जनवरी को मध्य रात्रि 12:03 बजे से प्रारंभ होकर 19 जनवरी को मध्य रात्रि 1:21 बजे तक रहेगी। चूंकि यह अमावस्या रविवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे “रवि मौनी अमावस्या” कहा जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रवि मौनी अमावस्या का संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    मौनी अमावस्या का विशेष संबंध पवित्र स्नान से है। माघ मास में गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, शिप्रा जैसी नदियों में स्नान का अत्यधिक महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान हजारों यज्ञों के बराबर फल देता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक सबसे उत्तम माना गया है। जो लोग किसी कारणवश नदी स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

    मौनी अमावस्या पितृ तर्पण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण दिन मानी जाती है। इस दिन पूर्वजों की शांति के लिए जल अर्पण, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया तर्पण पितृ दोष को शांत करता है और परिवार में सुख-शांति लाता है। स्नान और तर्पण के बाद सूर्य देव की पूजा का भी विशेष महत्व है। तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य को अर्घ्य देना, उसमें लाल फूल और अक्षत अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ होता है, आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु पूरे दिन मौन रखते हैं या बहुत कम बोलते हैं। मान्यता है कि मौन रहने से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। इस दिन जप, ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। कुल मिलाकर, मौनी अमावस्या 2026 न केवल स्नान और दान का पर्व है, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक जागरण का भी महत्वपूर्ण अवसर है।