औद्योगिक मांग का प्रभाव
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
चांदी की मूल्यवृद्धि
सतर्कता और जोखिम
निवेशकों के लिए सलाह

औद्योगिक मांग का प्रभाव
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
चांदी की मूल्यवृद्धि
सतर्कता और जोखिम
निवेशकों के लिए सलाह

चीन की राष्ट्रीय वेधशाला ने हालात को देखते हुए बीजिंग समेत आसपास के कई इलाकों मेंयेलो अलर्ट जारी किया है। चेतावनी में कहा गया है कि मौसम की मौजूदा परिस्थितियों के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में फंसे हुए हैं जिससे धुंध और स्मॉग की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में ठंडी हवा के साथ स्थिर मौसम और कम हवा की गति प्रदूषण को फैलने से रोकती है जिससे हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ जाती है।गुरुवार सुबह से ही बीजिंग के कई हिस्सों में दृश्यता काफी कम दर्ज की गई। ऊंची इमारतें धुंध में लिपटी नजर आईं और सड़कों पर वाहन धीमी गति से चलते दिखे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों बुजुर्गों और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को घर के अंदर रहने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
राष्ट्रीय वेधशाला के मुताबिक बीजिंग के अलावा हेबेई तियानजिन हेनान अनहुई जियांग्सू हुबेई सिचुआन बेसिन और चोंगकिंग जैसे क्षेत्रों में भी भारी धुंध छाए रहने की संभावना है। इन इलाकों में भी वायु गुणवत्ता के स्तर में गिरावट दर्ज की जा सकती है। प्रशासन ने स्थानीय सरकारों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर आपात कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।गौरतलब है कि एक दशक पहले तक बीजिंग दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता था। भारी उद्योगों कोयले से चलने वाले संयंत्रों और तेजी से बढ़ते वाहनों के कारण यहां की हवा बेहद जहरीली हो गई थी। हालात को सुधारने के लिए चीनी सरकार ने 2016 के बाद से कई सख्त कदम उठाए। भारी प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को या तो बंद किया गया या शहर से बाहर स्थानांतरित किया गया जिस पर अरबों डॉलर खर्च किए गए।
इसके अलावा सर्दियों में कोयले से चलने वाली सार्वजनिक हीटिंग प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक गैस और बिजली आधारित व्यवस्था में बदला गया। अधिकारियों के अनुसार इस बदलाव पर एक अरब डॉलर से अधिक की राशि खर्च हुई और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए। इन उपायों से बीजिंग की वायु गुणवत्ता में बीते वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ था जिससे घनी धुंध की घटनाएं काफी कम हो गई थीं।हालांकि मौजूदा हालात यह दिखाते हैं कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते प्रदूषण फिर से गंभीर रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही उत्सर्जन नियंत्रण में हों लेकिन सर्दियों के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही या प्राकृतिक परिस्थितियां भी हवा को बेहद खराब बना सकती हैं।प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मास्क का इस्तेमाल करें बाहरी गतिविधियों को सीमितरखें और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें। साथ ही स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त नियंत्रण उपाय लागू किए जा सकते हैं।

पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन के सचिव राणा सरवर ने बताया कि फेडरेशन चेयरमैन चौधरी शफाय हुसैन के निर्देश पर 27 दिसंबर को आपात बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उबैदुल्लाह राजपूत समेत उन सभी खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगाजिन्होंने बिना अनुमति इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। सरवर ने साफ शब्दों में कहा कि किसी राष्ट्रीय खिलाड़ी का विदेशी टीम की जर्सी पहनना और उसका झंडा लहराना अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे पाकिस्तान के खेल नियमों और राष्ट्रीय गरिमा का गंभीर उल्लंघन बताया।
सरवर के अनुसारबहरीन गए कुल 16 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन या पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड से कोई एनओसी या पूर्व अनुमति नहीं ली थी। इनमें राष्ट्रीय और नेशनल लेवल के खिलाड़ी शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह कोई आधिकारिक पाकिस्तानी टीम नहीं थीलेकिन पाकिस्तान के नाम और पहचान का इस तरह इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। फेडरेशन अब इन सभी खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रही है।फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि क्लब स्तर पर विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक साथ खेल सकते हैंलेकिन किसी अन्य देश का प्रतिनिधित्व करना और उसका राष्ट्रीय ध्वज लहराना पूरी तरह गलत है। इसके साथ हीफेडरेशन ने स्वघोषित प्रमोटर्स और आयोजकों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की बात कही हैताकि भविष्य में पाकिस्तान के नाम का इस तरह दुरुपयोग न हो।
विवाद बढ़ने के बाद उबैदुल्लाह राजपूत ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट हर साल बहरीन में आयोजित होता है और वह पहले भी इसमें हिस्सा ले चुके हैं। इस बार उनकी पुरानी टीम ने उन्हें नहीं बुलायालेकिन दूसरी टीम के निमंत्रण पर वह खेलने चले गए। राजपूत के मुताबिकउन्हें पहले से जानकारी नहीं थी कि टीमें भारत और पाकिस्तान के नाम से बनाई जाएंगी।राजपूत ने दावा किया कि मैदान में उतरते समय दोस्तों ने उन्हें बताया कि वह भारतीय नाम वाली टीम का हिस्सा हैं। इसके बाद उन्होंने कमेंटेटर से यह अनाउंस भी करवाया कि यह भारत-पाकिस्तान मैच नहींबल्कि एक स्थानीय कप प्रतियोगिता है। उन्होंने कहा कि नारेबाजी और झंडे लहराने की उन्हें कोई उम्मीद नहीं थी।
अपने बयान में राजपूत ने कहायह सिर्फ एक कप थाकोई विश्व कप नहीं। अगर यह आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट होतातो मैं केवल पाकिस्तान के लिए ही खेलता। मैं पाकिस्तानी हूं और मेरा जीवन पाकिस्तान पर कुर्बान है।उन्होंने फेडरेशनकोचप्रशंसकों और शुभचिंतकों से माफी मांगते हुए अपील की कि इस मामले को जरूरत से ज्यादा तूल न दिया जाए।अब सभी की नजरें 27 दिसंबर को होने वाली पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन की बैठक पर टिकी हैंजहां यह तय होगा कि उबैदुल्लाह राजपूत और अन्य खिलाड़ियों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।

ICICI बैंक की नई शुल्क संरचना
क्रेडिट कार्ड पर गेमिंग शुल्क 15 जनवरी 2026 से ICICI बैंक क्रेडिट कार्ड से गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए गए ट्रांजैक्शन्स पर 2% शुल्क लगाएगा।वॉलेट पर शुल्क थर्ड-पार्टी वॉलेट ऐप्स जैसे पेटीएम मोबिक्विक पर ₹5000 से अधिक राशि भेजने पर 1% शुल्क लिया जाएगा।क्रेडिट कार्ड का बिल भुगतान शाखा में जाकर क्रेडिट कार्ड बिल जमा करने पर 150 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा जो पहले 100 रुपये था। फिल्म के ऑफर में बदलाव 1 फरवरी 2026 से इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर फिल्म देखने के मुफ्त ऑफर को बंद कर दिया जाएगा और इसके लिए ₹25000 खर्च करने की शर्त रखी जाएगी।
एयरटेल पेमेंट बैंक
एयरटेल पेमेंट बैंक ने 1 जनवरी 2026 से अपने वॉलेट पर ₹75 प्रति वर्ष का रखरखाव शुल्क एएमसीलगाने का निर्णय लिया है। यदि वॉलेट में शेष राशि नहीं होगी तो यह शुल्क डेबिट कर लिया जाएगा।
वॉलेट ऐप्स पर शुल्क वृद्धि
भारत में वॉलेट सेवाएं 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट से शुरू हुईं लेकिन 2010 में पेटीएम के बाद वॉलेट ऐप्स ने काफी लोकप्रियता हासिल की। शुरुआती दौर में अधिकांश कंपनियां अपनी सेवाएं मुफ्त देती थीं लेकिन 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क और केवाईसी न कराने पर जुर्माना लगाना शुरू किया। अब कई वॉलेट कंपनियां क्रेडिट व डेबिट कार्ड से वॉलेट में पैसा डालने पर 1.5% सर्विस चार्ज लगा रही हैं।
ग्रामीण बैंकों का एकीकरण
इसके अलावा सरकार ने 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एक नया एकीकृत ब्रांड लोगो जारी किया है। यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक NABARDके सहयोग से तैयार किया गया है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और प्रगति को दर्शाता है।
उपभोक्ताओं के लिए चिंता
बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत के साथ उपभोक्ताओं को आने वाले समय में अतिरिक्त शुल्क और सीमित सेवाओं का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं।

1. विज़ुअल्स और तकनीक को मिली सबसे ज़्यादा तारीफ
2. Fire Clan ने खींचा ध्यान
3. Mangkwan Clan से कहानी को मिला नया रंग
4. कहानी पर बंटी राय
5. जेक सली और नेयटिरी का रिश्ता बना भावनात्मक केंद्र
6. विलेन को लेकर उठे सवाल
8. Toruk Makto की एंट्री ने बढ़ाया रोमांच
9. IMAX 3D में देखने की सिफारिश

आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) आने वाले वर्ष में अपनी कई सेवाओं को महंगा करने जा रहा है। 15 जनवरी 2026 से क्रेडिट कार्ड के जरिए गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले ट्रांजैक्शन पर दो फीसदी शुल्क लगेगाा। इसी तरह से अमेजॉन, पेटीएम, मोबिक्विक जैसे थर्ड पार्टी वॉलेट ऐप में पांच हजार से अधिक की धनराशि भेजने पर एक प्रतिशत शुल्क देना होगा।
अगर बैंक शाखा में जाकर कैश में क्रेडिट कार्ड का बिल जमा करते हैं तो 150 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जो अभी तक 100 रुपये था। बैंक द्वारा इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर बुकमाईशो के जरिए दिए जाने वाले फिल्म के मुफ्त लाभ एक फरवरी 2026 से बंद कर दिए जाएंगे। साथ ही, अन्य श्रेणी के कार्ड पर फिल्म ऑफर का लाभ उठाने के लिए खर्च की शर्त निर्धारित की गई है। मुफ्त फिल्म का लाभ उठाने के लिए कम से कम 25 हजार रुपये पिछली तिमाही में खर्च करने होंगे।
रूबिक्स और सैफिरो जैसे क्रेडिट कार्ड पर हर महीने 20 हजार रुपये खर्च करने पर ही रिवॉर्ड पांइंट्स मिलेंगे। जबकि प्लेटिनम और कोरल श्रेणी के कार्ड पर ट्रांसपोर्ट खर्च की सीमा 10 हजार रुपये प्रति महीने तय की गई है।
एयरटेल वॉलेट पर लगाएगा वार्षिक शुल्क
एयरटेल पेमेंट बैंक ने एक जनवरी से वॉलेट पर 75 रुपये प्रति वर्ष (जीएसटी को छोड़कर) का वार्षिक रखरखाव शुल्क (एएमसी) लगाने का फैसला लिया है। एयरटेल की तरफ से कहा गया है कि यदि शुल्क लगाते समय पर्याप्त शेष राशि उपलब्ध नहीं है, तो उपलब्ध शेष राशि डेबिट कर दी जाएगी। ऐसे में शेष राशि अगली बार धनराशि जमा होने पर स्वतः कट कर ली जाएगी।
पहले मुफ्त सेवा, फिर लगाते गए शुल्क
मोबाइल पर डिजिटल मोड में पैसे रखने के लिए भारत में सबसे पहले वर्ष 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट आया लेकिन वॉलेट के क्षेत्र में असली बदलाव वर्ष 2010 से शुरू हुआ जब पेटीएम की शुरुआत हुई। इसके बाद तमाम कंपनियां वॉलेट ऐप के जरिए डिजिटल लेनदेन की सुविधा प्रदान करने के लिए मैदान में आई। शुरुआत में अधिकांश कंपनियों ने अपनी सेवा का मुफ्त रखा, लेकिन अब फरवरी 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क लगाने की शुरुआत की। इसी तरह से अन्य वॉलेट कंपनियों ने केवीईसी के लिए 15 रुपये शुल्क साथ में जीएसटी लगाने का फैसला लिया।
केवाईसी न कराने पर जुर्माना
इसके साथ ही, केवाईसी न कराने वाले ग्राहकों पर पांच रुपये प्रति तिमाही का जुर्माना भी लगाना शुरू किया। इसी तरह से अब क्रेडिट व डेबिट कार्ड के जरिए वॉलेट में पैसा डाले पर 1.5 प्रतिशत सर्विस चार्ज लगाया जाता है। हालांकि कई वॉलेट ऐप ने अभी तक कई चार्ज नहीं लगाए हैं।
सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का एक ही लोगो होगा
राज्य स्तर पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के एकीकरण के बाद सरकार ने अब उनके लिए नया लोगो जारी किया गया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के साथ मिलकर जारी किया गया है। यह देश में काम कर रहे सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एकीकृत ब्रांड पहचान स्थापित करेगा। इस लोगो में एक लौ है जो तीन स्तरों से मिलकर बनी है।
याचिका में यह दावा किया गया था कि 1985 से यह भूमि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और अधिग्रहण के समय उचित मुआवजा पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि महाकाल मंदिर के विस्तार के लिए भूमि का अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य के अंतर्गत नहीं आता और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 25 26 और 300-A का उल्लंघन होता है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में पहले से वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध थे और याचिकाकर्ता केवल मुआवजे की आपत्ति ही उठा सकता था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भूमि अधिग्रहण की वैधता पर विचार नहीं करेगा क्योंकि याचिकाकर्ता भूमि का मालिक नहीं है।
इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी महाकाल लोक फेज-2 परियोजना से जुड़ी मुआवजे को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता न तो भू-स्वामी हैं और न ही टाइटल होल्डर इसलिए वे केवल मुआवजे के संदर्भ में सवाल उठा सकते हैं। इस फैसले से महाकाल लोक फेज-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को कानूनी मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार और सार्वजनिक स्थलों के पुनर्विकास का हिस्सा है जिसे बड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वता प्राप्त है।

पाकिस्तान के अधिकारियों ने इस साल 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को विदेश यात्रा करने से रोक दिया, क्योंकि देश ने मानव तस्करी पर रोक लगाने और संभावित भिखारियों को रोकने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह जानकारी आगा रफीउल्लाह की अध्यक्षता में नेशनल असेंबली की ओवरसीज पाकिस्तानी और मानवाधिकार मामलों की स्थायी समिति की बैठक के दौरान साझा की गई।
फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के डायरेक्टर जनरल, रिफत मुख्तार रजा ने संसदीय पैनल को ब्रीफिंग देते हुए लागू किए गए उपायों का विवरण दिया। उन्होंने कहा, “इस साल अकेले विभिन्न हवाई अड्डों पर कम से कम 51,000 पाकिस्तानियों को उतारा गया।” उन्होंने कहा कि यात्रा करने से रोके गए कई लोग यूरोप और सऊदी अरब जाने की कोशिश कर रहे थे। किंगडम जाने वाले लोग उमराह करने का बहाना बना रहे थे, जबकि यूरोपीय देशों में जाने वालों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं थे।
UAE ने भी इसी आधार पर 6,000 पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया, जबकि अजरबैजान ने लगभग 2,500 भिखारियों को देश से निकाल दिया। समिति को उन पाकिस्तानियों के बारे में भी बताया गया जो अलग-अलग देशों में गए लेकिन कभी वापस नहीं लौटे। रजा ने कहा कि इस साल 24,000 पाकिस्तानी कंबोडिया गए, जिनमें से 12,000 अभी तक वापस नहीं आए हैं, जबकि 4,000 टूरिस्ट वीज़ा पर म्यांमार गए और लगभग 2,500 वापस नहीं आए।
FIA प्रमुख ने कहा कि सख्त नियंत्रण से पाकिस्तान की पासपोर्ट रैंकिंग 118 से 92 हो गई है, यह देखते हुए कि पाकिस्तान पहले अवैध प्रवासन के लिए शीर्ष पांच देशों में से था, लेकिन अब संशोधित नीतियों के कारण उस सूची से बाहर हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि यूरोप में अवैध प्रवासन में कमी आई है, पिछले साल 8,000 पाकिस्तानियों ने अवैध रूप से यात्रा की थी, जबकि इस साल यह संख्या 4,000 थी। FIA DG ने समिति को यह भी बताया कि दुबई और जर्मनी ने आधिकारिक पासपोर्ट के लिए वीज़ा-फ्री कर दिया है, जबकि जनवरी के मध्य तक एक ई-इमिग्रेशन एप्लिकेशन लॉन्च किया जाएगा।

इस मुकाबले की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया की टीम के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी थी। हालांकि, शुरुआत अच्छी नहीं रही थी, लेकिन एलेक्स कैरी ने 106 रनों की पारी खेलकर ऑस्ट्रेलिया की वापसी करा दी। कैरी के अलावा उस्मान ख्वाजा ने भी दमदार 82 रन बनाए, जो स्टीव स्मिथ की जगह खेल रहे थे। स्मिथ मैच से ठीक पहले अनफिट पाए गए थे। ऐसे में ख्वाजा को खेलने का मौका मिला। मिचेल स्टार्क ने भी 54 रनों की पारी खेली, जिससे इंग्लैंड की टीम बैकफुट पर चली गई। 32 रन जोश इंग्लिस ने भी बनाए।
उधर, इंग्लैंड के लिए मैच के दूसरे दिन की सुबह जोफ्रा आर्चर ने फाइव विकेट हॉल प्राप्त किया। वहीं, 2-2 विकेट ब्रायडन कार्स और विल जैक्स को मिले। ऑस्ट्रेलिया को 371 पर आउट करने के बाद इंग्लैंड ने बल्लेबाजी शुरू की। ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड की टीम पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाएगी, लेकिन जैसे ही 37 रन पर पहला विकेट गिरा तो अगले 5 रनों के भीतर दो और विकेट गिर गए। इस तरह इंग्लैंड की टीम पर एशेज सीरीज को गंवाने का खतरा मंडरा रहा है।
सीरीज हार का खतरा
इंग्लैंड की टीम पहले ही दो मैच हार चुकी है और अब अगर एडिलेड में जारी इस मैच को भी हार जाती है तो फिर सीरीज 3-0 से गंवा देगी। सीरीज के दो मुकाबले बाकी रहेंगे, लेकिन उन मैचों के नतीजों का असर सीरीज की हार-जीत पर नहीं पड़ेगा। जरूर स्कोरलाइन में बदलाव हो सकता है, लेकिन एशेज ट्रॉफी मेजबान ऑस्ट्रेलिया के पास ही रहेगी। ऐसे में इसी मैच में इंग्लैंड को दमदार वापसी करते हुए मैच जीतने के बारे में सोचना होगा।

विश्लेषकों ने कहा है कि बढ़ते सैन्य खर्च और घटती आमदनी की वजह से पुतिन की सरकार की कर्ज पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। बुधवार को रूसी सरकार ने करीब बॉन्ड बेचकर करीब 108.9 अरब रूबल का कर्ज लिया। इसके साथ ही 2025 में अब तक कुल कर्ज जारी करने का आंकड़ा 7.9 ट्रिलियन रूबल पहुंच गया है।
रूस के पास नहीं बचे विकल्प
वहीं कर्ज लेने के रूस के पास बॉन्ड बेचने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। देश का रेनिडे रिजर्व यानी आपातकालीन बचत का आधे से ज्यादा हिस्सा खत्म हो चुका है। वहीं बजट घाटा भी बढ़ गया है। इसकी बड़ी वजह सैन्य खर्च में 30 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद तेल और गैस जैसी कमोडिटी से होने वाली कमाई में भी गिरावट आई है।
आने वाले सालों में रूस के सामने कई मुसीबतें हैं। तेल की कीमतें बढ़ने, रूबल के मजबूत होने, आर्थिक ग्रोथ अनुमान से कम रहने और सैन्य खर्च बढ़ने की वजह से रूस की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं और तेल-गैस से कमाई घटी, तो रूस के सामने तीन ही रास्ते होंगे। या तो टैक्स बढ़ाए जाएं, या दूसरे जरूरी खर्चों में कटौती हो, या फिर और ज्यादा कर्ज लिया जाए।