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  • ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त

    ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त


    नई दिल्ली।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने पंजाब (Punjab) में PACL से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय एजेंसी ने गुरुवार को PACL और अन्य के मामले में चल रही जांच के सिलसिले में पंजाब के लुधियाना (Ludhiana, Punjab) में स्थित 3436.56 करोड़ रुपये की 169 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। ईडी ने कहा कि उसकी जांच में पता चला है कि “लाखों निवेशकों से जुटाए गए फंड का एक हिस्सा PACL के नाम पर इन 169 अचल संपत्तियों को खरीदने में इस्तेमाल किया गया था, जिनकी मौजूदा कीमत 3436.56 करोड़ रुपये है।”

    प्रवर्तन निदेशालय के दिल्ली जोनल ऑफिस ने इन संपत्तियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जब्त किया है। यह कार्रवाई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा PACL लिमिटेड, PGF लिमिटेड, दिवंगत निर्मल सिंह भंगू और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 120-B और 420 के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर की गई जांच के बाद की गई है।


    क्या है पूरा मामला?

    बता दें कि यह मामला PACL द्वारा बड़े पैमाने पर चलाई गई धोखाधड़ी वाली पोंजी स्कीम और सामूहिक निवेश योजनाओं से संबंधित है। इन योजनाओं के जरिए PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों ने धोखे से भोले-भाले निवेशकों से लगभग 48,000 करोड़ रुपये जुटाए और उसका गबन कर लिया। ईडी ने इस मामले में अब तक 5,602 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिसमें देश बार में स्थित पर्ल ग्रुप की घरेलू संपत्तियां और विदेशी संपत्तियां दोनों शामिल हैं। इसके अलावा, इस मामले में अब तक एक अभियोजन शिकायत और दो पूरक अभियोजन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं।

  • MP में खून की दलाली का पर्दाफाश एसडीएम ने फिल्मी अंदाज में पुलिस के साथ किया स्टिंग ऑपरेशन 3 दलाल रंगे हाथ पकड़े गए

    MP में खून की दलाली का पर्दाफाश एसडीएम ने फिल्मी अंदाज में पुलिस के साथ किया स्टिंग ऑपरेशन 3 दलाल रंगे हाथ पकड़े गए


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना में खून की दलाली का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां अस्पताल के बाहर खून बेचने वाले दलालों का एक बड़ा नेटवर्क चल रहा था। प्रशासन ने इस अवैध धंधे का पर्दाफाश करने के लिए एक फिल्मी अंदाज में स्टिंग ऑपरेशन किया और तीन दलालों को रंगे हाथ पकड़ लिया।

    सतना जिला अस्पताल के बाहर खून के सौदागरों का यह नेटवर्क सक्रिय था जो मरीजों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें 5000 रुपये में खून बेच रहे थे। गुरुवार को एसडीएम राहुल सिलाड़िया और कोतवाली टीआई रावेंद्र द्विवेदी ने इस काले कारोबार को उजागर करने के लिए सुनियोजित तरीके से स्टिंग ऑपरेशन किया।

    एसडीएम ने इस ऑपरेशन के लिए 500 200 और 100 के नोटों से 4500 रुपये की गड्डी तैयार की और उनके सीरियल नंबर पहले से दर्ज कर लिए। फिर एक व्यक्ति को नकली ग्राहक बनाकर दलालों के पास भेजा गया। जैसे ही ग्राहक ने दलाल को पैसे दिए और दलाल ने कहा कि डोनर आ रहा है पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई की और दलालों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान वही चिन्हित नोट बरामद हुए जिन्हें पहले से नोट किया गया था जिससे उनके खून की दलाली में शामिल होने की पुष्टि हो गई।

    जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के सामने स्थित चाय की दुकानों और फल के ठेले पर ये दलाल अक्सर बैठे रहते थे। वे मरीजों के परेशान परिजनों से संपर्क करते थे और उन्हें खून दिलाने के नाम पर मोटी रकम लेते थे। पुलिस ने इस ऑपरेशन में तीन दलालों रजनीश साहू करसरामोहम्मद कैफ कामता टोलाऔर अनिल गुप्ता टिकुरिया टोला को गिरफ्तार किया।

    एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने इस कार्रवाई के बारे में बताया कि उन्हें ब्लड की दलाली की सूचना मिली थी और उसी आधार पर उन्होंने योजना बनाई। जब एक दलाल ने 4500 रुपये में खून उपलब्ध कराने का वादा किया तो पुलिस ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया और उसके पास से वही नोट बरामद किए गए जो पहले चिन्हित किए गए थे।

    इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि इस रैकेट के चलने में अस्पताल के भीतर से भी मदद मिल रही हो सकती है। अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़ा कोई कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है और पुलिस इस संभावना पर भी गहन जांच कर रही है।यह कार्रवाई एक सख्त संदेश देती है कि प्रशासन अब ऐसे अवैध कारोबारों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी कार्रवाई करेगा।

  • एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग छापा… इस मामले में दी दबिश

    एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग छापा… इस मामले में दी दबिश


    मुम्बई।
    बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी (Bollywood actress Shilpa Shetty) के मुंबई वाले घर पर इनकम टैक्स अधिकारियों (Income Tax Officials) ने रेड (Raid) मारी है। ये मामला उनकी बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी कंपनी (Bastian Hospitality Company) से जुड़ा है। वह इस कंपनी की को-ओनर हैं। इस कंपनी के मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और गोवा में ‘बेस्टियन’ नाम से क्लब्स और रेस्टोरेंट्स हैं। आयकर विभाग को संदेह है कि होटल व्यवसाय में निवेश, आय और टैक्स भुगतान को लेकर गड़बड़ियां। ऐसे में वह बैस्टियन रेस्टोरेंट (Bastian) से संबंधित वित्तीय लेन-देन और कथित टैक्स अनियमितताओं की जांच कर रहे हैं।


    इन जगहों पर मारे छापे

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयकर विभाग, कंपनी के आउटलेट और इसके प्रमोटरों के घर पर रेड मार रही है। ये छापेमारी बुधवार को शुरू हुई थी और अब जांच शिल्पा शेट्टी के घर तक पहुंच गई है।


    शिल्पा शेट्टी के साथ ये हैं को-ओनर

    बस्टियन पब की शुरुआत बिजनेसमैन रंजीत बिंद्रा की कंपनी बस्टियन हॉस्पिटैलिटी ने की थी। शिल्पा शेट्टी ने साल 2019 में इस वेंचर में 50% की हिस्सेदारी खरीदी और इसकी को-ओनर बन गईं।


    आरोपों पर शिल्पा का बयान

    शिल्पा शेट्टी ने आयकर विभाग की रेड से पहले इन आरोपों से इनकार किया था और इन्हें बेबुनियाद था। उन्होंने कहा था, “जांच में पूरा सहयोग करने के बाद, हमें पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा और हमें अपने देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। हम मीडिया से सम्मानपूर्वक आग्रह करते हैं कि इस मामले में संयम बरतें क्योंकि मामला अभी कोर्ट में है।”

  • MP: सतना में हो रहा था खून का काला कारोबार, SDM ने फिल्मी अंदाज में स्टिंग कर 3 को दबोचा

    MP: सतना में हो रहा था खून का काला कारोबार, SDM ने फिल्मी अंदाज में स्टिंग कर 3 को दबोचा


    सतना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिला अस्पताल (Satna District Hospital) की साख तार-तार हो चुकी है। एक तरफ अस्पताल के भीतर दिल्ली और भोपाल की टीमें थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों (Thalassemia Children) को HIV संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले की फाइलें खंगाल रही हैं, तो दूसरी तरफ अस्पताल के गेट पर ही खून के सौदागर इंसानी मजबूरी का फायदा उठाकर 5000 रुपए में खून बेच रहे हैं। गुरुवार को प्रशासन ने इस ‘काले खेल’ का पर्दाफाश करने के लिए बिल्कुल फिल्मी अंदाज में जाल बिछाया। एसडीएम सिटी राहुल सिलाड़िया (SDM City Rahul Siladia) और कोतवाली टीआई रावेंद्र द्विवेदी (TI Ravindra Dwivedi) ने एक सुनियोजित स्टिंग ऑपरेशन कर खून की दलाली करने वाले 3 लोगों को रंगे हाथों दबोच लिया।


    नोटों के नंबर नोट किए, वीडियो बनाया और भेजा ‘नकली ग्राहक’

    दलालों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एसडीएम ने पुख्ता सबूत तैयार किए थे। इसके लिए उन्होंने 500, 200 और 100 के नोटों से 4500 रुपए की एक गड्डी तैयार की और इन सभी नोटों के सीरियल नंबर पहले से एक रजिस्टर में दर्ज कर लिए। सबूत के तौर पर नोटों का टाइम स्टैम्प वाला एक वीडियो भी बनाया गया, फिर एक व्यक्ति को ‘नकली ग्राहक’ बनाकर खून खरीदने भेजा गया।

    ग्राहक के रूप में पहुंचे शख्स ने जैसे ही दलाल को पैसे दिए और दलाल ने उससे कहा कि डोनर आ रहा है, वैसे ही इशारा मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम ने धावा बोल दिया। दलाल की जेब की तलाशी लेने पर वही चिन्हित नोट बरामद हुए, जिनका नंबर प्रशासन ने पहले से नोट कर रखा था।


    ऐसे चल रहा था नेटवर्क

    इस कार्रवाई ने अस्पताल परिसर के बाहर चल रहे खून के अवैध धंधे की पोल खोल दी है। जांच में सामने आया कि अस्पताल के ठीक सामने मौजूद चाय की टपरियों और फलों के ठेलों पर ये दलाल बैठे रहते थे। मरीज के परेशान परिजनों को देखते ही ये उन्हें घेर लेते थे और ब्लड दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस ने मौके से तीन दलालों को गिरफ्तार किया है, इसमें रजनीश साहू (निवासी करसरा), मोहम्मद कैफ (निवासी कामता टोला), अनिल गुप्ता (निवासी टिकुरिया टोला) शामिल हैं।


    एसडीएम ने किया पर्दाफाश

    इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने बताया कि हमें ब्लड की दलाली की सूचना मिली थी। इस पर हमने योजना बनाकर कुछ नोटों को चिन्हित किया और उनका वीडियो रिकॉर्ड कर एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर भेज दिया। अस्पताल के सामने खड़े फल के ठेले पर मिले एक दलाल ने बदले में 4500 रुपए की मांग की। जैसे ही दलाल ने पैसे लिए, हमने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से वही चिन्हित नोट बरामद हुए हैं। इससे साफ है कि दुकानों की आड़ में खून का अवैध कारोबार चल रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।


    अंदर से कौन कर रहा है मदद?

    सूत्रों के मुताबिक अस्पताल के भीतर की मिलीभगत के बिना यह रैकेट चलना नामुमकिन है। बड़ा सवाल यह है कि दलाल बाहर पैसा ले रहा है, तो अंदर से ब्लड या डोनर कौन मैनेज कर रहा है? क्या ब्लड बैंक का कोई कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा है? फिलहाल पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ करते हुए इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रही है।

  • MP: उज्जैन में महाकाल मंदिर विस्तार को चुनौती वाली तकिया मस्जिद की याचिका SC ने की खारिज

    MP: उज्जैन में महाकाल मंदिर विस्तार को चुनौती वाली तकिया मस्जिद की याचिका SC ने की खारिज


    उज्जैन।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उज्जैन (Ujjain) में महाकाल मंदिर परिसर (Mahakal Temple complex) के विस्तार (महाकाल लोक फेज-2) के लिए तकिया मस्जिद (Takiya Mosque) की जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता जमीन का मालिक नहीं, बल्कि केवल एक उपासक (भक्त) है, इसलिए उसे अधिग्रहण को चुनौती देने का कानूनी अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला मोहम्मद तैय्यब बनाम शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग मामले में सुनाया।


    अदालत ने क्या कहा

    सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि याचिका में अधिग्रहण की अधिसूचनाओं को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि आपत्ति केवल मुआवजा तक सीमित है। ऐसे मामलों में कानून के तहत वैकल्पिक वैधानिक उपाय मौजूद हैं। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हूज़ेफ़ा अहमदी, जो याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए, से कहा- “मूल प्रश्न वही है। अधिग्रहण को चुनौती नहीं दी गई है, केवल अवॉर्ड को।” अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता भूमि का स्वामी नहीं, केवल उपासक है, इसलिए अधिग्रहण की वैधता पर सवाल उठाने का उसे अधिकार नहीं है।


    याचिकाकर्ता की दलीलें

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन अनिवार्य है, जिसे नहीं कराया गया। इसके अलावा कहा गया कि हाई कोर्ट ने यह मानकर फैसला दिया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही पुष्टि हो चुकी है, जबकि ऐसा नहीं था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ।


    पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं

    गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट तकिया मस्जिद के ध्वस्तीकरण को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका भी खारिज कर चुका है। उस मामले में अदालत ने राज्य सरकार के इस रुख को स्वीकार किया था कि जमीन अधिग्रहित हो चुकी है और मुआवजा भी दिया जा चुका है, जबकि किसी भी आपत्ति के लिए 2013 कानून के तहत वैधानिक रास्ते उपलब्ध हैं।

    हाई कोर्ट का फैसला
    इससे पहले 11 जनवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी महाकाल लोक फेज-2 परियोजना से जुड़ी जमीन के मुआवजे को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता न तो रिकॉर्डेड भू-स्वामी हैं और न ही टाइटल-होल्डर, इसलिए वे अधिग्रहण को नहीं, बल्कि केवल मुआवजे को लेकर धारा 64 के तहत संदर्भ मांग सकते हैं।


    याचिका में क्या कहा गया था

    याचिका में दावा किया गया था कि अधिग्रहित जमीन 1985 से मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दर्ज वक्फ संपत्ति है और 11 जनवरी 2025 को मस्जिद को गिरा दिया गया। साथ ही यह तर्क दिया गया कि महाकाल मंदिर परिसर के लिए पार्किंग और अन्य सुविधाओं के विस्तार हेतु भूमि लेना सार्वजनिक उद्देश्य की परिभाषा में नहीं आता और इससे संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-A का उल्लंघन होता है। इसके अलावा वक्फ अधिनियम की धारा 91 के उल्लंघन और आपात शक्तियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया था।

    अब आगे क्या?

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ महाकाल लोक फेज-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को अंतिम कानूनी मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर और उससे जुड़े सार्वजनिक स्थलों के बड़े पुनर्विकास का हिस्सा है। याचिका अधिवक्ता वैभव चौधरी के माध्यम से दाखिल की गई थी।

  • हादसे में एयरबैग न खुलने पर टोयोटा पर 61 लाख का जुर्माना CG राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला

    हादसे में एयरबैग न खुलने पर टोयोटा पर 61 लाख का जुर्माना CG राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला


    रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर कंपनी पर 61 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश उस समय आया जब एक गंभीर सड़क दुर्घटना में कंपनी की इनोवा कार के एयरबैग न खुलने की वजह से चालक को गंभीर चोटें आईं। आयोग ने इस मामले को विनिर्माण दोष और सेवा में कमी की श्रेणी में माना है क्योंकि एयरबैग की कार्यशीलता एक सुरक्षा मानक है जो कार दुर्घटनाओं में जीवन को बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

    यह मामला 23 अप्रैल 2023 का है। कोरबा निवासी व्यापारी अमित अग्रवाल और उनके भाई सुमित अग्रवाल रायपुर से कोरबा लौट रहे थे जब तरदा गांव के पास सामने से आ रहे वाहन से बचने के प्रयास में उनकी इनोवा कार अनियंत्रित हो गई और पेड़ से टकरा गई। हादसा बेहद गंभीर था और इस दौरान कार का कोई भी एयरबैग नहीं खुला जिससे चालक अमित अग्रवाल को गंभीर चोटें आईं।

    अमित अग्रवाल ने इलाज के दौरान कुल 36.83 लाख रुपये खर्च किए क्योंकि उन्हें रायपुर और हैदराबाद में इलाज कराना पड़ा। इसके बाद सुमित अग्रवाल ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग कोरबा में शिकायत दायर की। शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि कार में एयरबैग की तकनीकी खराबी के कारण गंभीर दुर्घटना के दौरान चालक को बचाया नहीं जा सका।

    जब कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ तो जिला उपभोक्ता आयोग ने एकपक्षीय निर्णय लेते हुए टोयोटा को नया वाहन या उसके बराबर राशि देने का आदेश दिया। इसके अलावा उन्होंने चिकित्सा खर्च की भरपाई भी करने के निर्देश दिए।

    टोयोटा ने इस फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की जिसमें उन्होंने बीमा भुगतान और विशेषज्ञ रिपोर्ट के अभाव जैसे तर्क प्रस्तुत किए। हालांकि राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए जिला आयोग के फैसले को सही ठहराया। आयोग ने कहा कि वाहन के एयरबैग का न खुलना एक गंभीर लापरवाही और खराब निर्माण का उदाहरण है जो उपभोक्ता के जीवन को खतरे में डालता है।

    यह मामला उपभोक्ता सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि कार निर्माता कंपनियों को अपनी सुरक्षा प्रणालियों की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को सुनिश्चित करना चाहिए। अगर कोई उपभोक्ता सुरक्षा मानक में कमी की वजह से नुकसान उठाता है तो कंपनी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उपभोक्ता को उचित मुआवजा देना चाहिए। यह फैसला उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करता है और यह संदेश देता है कि कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना चाहिए।

  • पांच राज्यों के HC को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश

    पांच राज्यों के HC को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने गुरुवार को हुई बैठक में विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts) में रिक्त होने वाले मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) के पदों को भरने के लिए पांच न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की है। ये रिक्तियां रिटायरि और ट्रांसफर के चलते उत्पन्न हो रही हैं। कॉलेजियम की सिफारिशों को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलना अभी शेष है। कॉलेजियम के निर्णय के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता को उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। यह पद वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद रिक्त होगा।

    इसके अलावा, बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस रेवती पी. मोहिते डेरे को मेघालय हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश मेघालय हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित ट्रांसफर के मद्देनजर की गई है।

    कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट के ही एक अन्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक को झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की है। झारखंड हाईकोर्ट में यह पद 8 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के रिटायर होने से रिक्त होगा।

    केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक को सिक्किम हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। वहीं, उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

    इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीस जस्टिस सौमेन सेन को केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। यह ट्रांसफर केरल हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद प्रभावी होगा।

  • भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए

    भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए


    भिंड । भिंड जिले के अटेर में वन विभाग ने चंबल नदी के किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत की है। इस सफारी के जरिए पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थलों की सैर कर सकेंगे। सफारी का ट्रैक करीब 10 किमी लंबा है और इसमें अटेर किला चामुंडा देवी मंदिर और वन्य जीवों को दिखाया जा रहा है। इस सफारी के लिए पर्यटकों को 200 रुपये और 500 रुपये के टिकट मिल रहे हैं और यह सफारी सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी।

    वन विभाग ने सफारी के संचालन के लिए एक विस्तृत योजना बनाई है। पर्यटक अटेर स्थित वन विभाग कार्यालय से आफलाइन टिकट प्राप्त कर सकते हैं। चंबल क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और यह इको-टूरिज्म गतिविधियां क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संरक्षण में योगदान करेंगी। इस पहल के तहत वन विभाग स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन के अवसर भी पैदा कर रहा है जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

    वन विभाग की रेंजर कृतिका शुक्ला ने बताया कि सफारी में स्थानीय व्यंजन पेश करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके जरिए स्थानीय समुदाय को आर्थिक लाभ मिलेगा। वर्तमान में 11 ऊंटों का उपयोग सफारी में किया जा रहा है और जैसे-जैसे सफारी की लोकप्रियता बढ़ेगी इस में और भी ऊंटों को शामिल किया जाएगा।

    सुरक्षा और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वन विभाग ने सफारी के मार्ग को विशेष रूप से तैयार किया है। सफारी में आने वाले पर्यटकों को चंबल क्षेत्र के इतिहास और वन्य जीवन के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा विभाग उत्तराखंड के ऋषिकेश की तर्ज पर यहां कैंपिंग की सुविधा भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इससे पर्यटकों को एक अलग अनुभव मिलेगा जो स्थानीय पर्यटन को और आकर्षक बना देगा।

    यह सफारी क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और कारीगरी को भी प्रदर्शित करने का एक अवसर है। इसे वन्य जीवों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है जो आने वाले समय में स्थानीय वन्य जीवन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा।

  • विधानसभा सत्र के कारण लखनऊ में ट्रैफिक डायवर्जन, 24 दिसंबर तक कई प्रमुख रास्ते रहेंगे बंद

    विधानसभा सत्र के कारण लखनऊ में ट्रैफिक डायवर्जन, 24 दिसंबर तक कई प्रमुख रास्ते रहेंगे बंद


    नई दिल्ली।लखनऊ /उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के मद्देनज़र राजधानी लखनऊ में यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं। शुक्रवार 19 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र को लेकर शहर के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया है जो 24 दिसंबर तक प्रभावी रहेगा। ट्रैफिक पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले बदले हुए रूट की जानकारी जरूर लें ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके। डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित ने जानकारी दी कि विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों विधान परिषद सदस्यों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की आवाजाही के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सत्र के चलते विधानसभा भवन और उसके आसपास के इलाकों में वाहनों की आवाजाही सीमित रहेगी।

    ट्रैफिक पुलिस के अनुसार बंदरियाबाग चौराहे से राजभवन डीएसओ चौराहा हजरतगंज चौराहा जीपीओ मोड़ और विधानसभा की ओर जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इन मार्गों की ओर जाने वाले वाहन अब लालबत्ती चौराहा कैंट रोड गोल्फ क्लब चौराहा और 1090 चौराहे के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।इसी तरह डीएसओ चौराहे से हजरतगंज जीपीओ पार्क और विधानसभा की ओर जाने वाले रास्तों को भी बंद रखा जाएगा। इस रूट पर चलने वाले वाहनों को पार्क रोड और मेफेयर तिराहे से होकर जाने की सलाह दी गई है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इन वैकल्पिक मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि यातायात सुचारु रूप से चलता रहे।

    इसके अलावा रॉयल होटल चौराहे से विधानसभा के सामने होकर हजरतगंज चौराहे की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह से बंद रहेगा। इस रास्ते से गुजरने वाले वाहनों को कैसरबाग चौराहा परिवर्तन चौक सुभाष चौराहा चिरैया झील या बर्लिंगटन चौराहा सदर ओवरब्रिज और कैंट रोड के जरिए डायवर्ट किया जाएगा।विधानसभा सत्र का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ेगा। रोडवेज और सिटी बसों के कई रूट में बदलाव किया गया है। संकल्प वाटिका पुल के नीचे स्थित तिराहे से महानगर की ओर से आने वाली बसें अब सिकंदरबाग हजरतगंज और विधानसभा मार्ग से नहीं गुजरेंगी। इन बसों को बैकुंठ धाम 1090 गांधी सेतु बंदरियाबाग लालबत्ती चौराहा और कैंट के रास्ते संचालित किया जाएगा।

    गौरतलब है कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से 24 दिसंबर तक प्रस्तावित है। हालांकि 20 और 21 दिसंबर को अवकाश रहेगा लेकिन इसके बावजूद 22 23 और 24 दिसंबर को भी ट्रैफिक डायवर्जन की यही व्यवस्था लागू रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से समय से निकलने ट्रैफिक नियमों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर नजदीकी ट्रैफिक कर्मियों से सहायता लेने की अपील की है

  • डेंगू–चिकनगुनिया से जूझ रहे युजवेंद्र चहल, फिटनेस बिगड़ने के कारण क्रिकेट से कुछ हफ्तों का ब्रेक

    डेंगू–चिकनगुनिया से जूझ रहे युजवेंद्र चहल, फिटनेस बिगड़ने के कारण क्रिकेट से कुछ हफ्तों का ब्रेक


    नई दिल्ली/भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल इन दिनों क्रिकेट मैदान से दूर हैं। इसकी वजह उननई दिल्लीकी खराब सेहत है। चहल डेंगू और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिसके चलते उनकी फिटनेस पर गहरा असर पड़ा है और उन्हें डॉक्टरों ने पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। इस बीमारी के कारण उन्हें घरेलू क्रिकेट के अहम मुकाबलों से भी बाहर रहना पड़ा है।युजवेंद्र चहल को आखिरी बार नवंबर महीने में हरियाणा की ओर से सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के ग्रुप मैच में खेलते हुए देखा गया था। इसके बाद से ही वह टीम से लगातार बाहर चल रहे थे, जिससे उनके फैंस के बीच उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे थे। अब खुद चहल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात की पुष्टि कर दी है कि वह डेंगू और चिकनगुनिया से प्रभावित रहे हैं और इसी वजह से क्रिकेट से ब्रेक लेना पड़ा। 
    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला हरियाणा के लिए बेहद अहम था, लेकिन इस निर्णायक मैच में भी चहल अपनी टीम का हिस्सा नहीं बन सके। फाइनल से पहले उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी सेहत को लेकर अपडेट साझा किया। चहल ने लिखा कि वह टीम के साथ मैदान पर उतरना चाहते थे, लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया। उन्होंने हरियाणा टीम को फाइनल के लिए शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि वह जल्द पूरी तरह फिट होकर वापसी करेंगे।

    डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से उबरने में आमतौर पर समय लगता है और इसका सीधा असर खिलाड़ी की फिटनेस और स्टैमिना पर पड़ता है। ऐसे में चहल की वापसी को लेकर कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि अब उनकी नजरें विजय हजारे ट्रॉफी पर होंगी, जिसकी शुरुआत 24 दिसंबर से हो रही है। हालांकि, इसमें उनका खेलना पूरी तरह उनकी फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।गौरतलब है कि युजवेंद्र चहल पिछले काफी समय से भारतीय सीनियर टीम से भी बाहर चल रहे हैं। अगस्त 2023 के बाद से उन्होंने भारत के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला है। टी20 वर्ल्ड कप के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिला, हालांकि इसके बावजूद घरेलू क्रिकेट और विदेशी लीगों में उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा है।

    बीमारी से पहले चहल इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलते हुए नजर आए थे। उन्होंने नॉर्थम्पटनशायर की ओर से वनडे कप और काउंटी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी किफायती रही, जबकि रेड बॉल क्रिकेट में उन्होंने तीन मैचों में 12 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की थी। उनके इस प्रदर्शन ने यह दिखाया था कि वह अभी भी लंबे फॉर्मेट में प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।फिलहाल, चहल का पूरा फोकस अपनी सेहत पर है। फैंस और क्रिकेट जगत को उम्मीद है कि वह जल्द ही इन बीमारियों से पूरी तरह उबरकर मैदान पर वापसी करेंगे और एक बार फिर अपनी लेग स्पिन से बल्लेबाजों को परेशान करते नजर आएंगे।