विराट कोहली की याद
खिलाड़ियों को मिले थे मौके लेकिन फेल
स्ट्राइक रेट से ज्यादा जिम्मेदारी जरूरी

विराट कोहली की याद
खिलाड़ियों को मिले थे मौके लेकिन फेल

12 राज्यों में हल्की बारिश के आसार
पंजाब में कोहरा
मौसम विभाग ने कहा है कि पंजाब के कुछ इलाकों में सुबह कोहरा देखा जाएगा। इसके अलावा तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। पंजाब और हरियाणा में फिलहाल बारिश की सभावना नहीं है। पश्चिम बंगाल के कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है।
दिल्ली का मौसम
राजधानी दिल्ली में सोमवार को सामान्य से अधिक गर्मी रही और प्रमुख मौसम केंद्रों पर बारिश की कोई सूचना नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। आईएमडी के अनुसार, सफदरजंग मौसम केंद्र में अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य तापमान से पांच डिग्री अधिक है, जबकि न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रिज क्षेत्र 31 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा, इसके बाद आयानगर 30.4 डिग्री सेल्सियस और लोदी रोड 30.1 डिग्री सेल्सियस रहा। पालम में अधिकतम तापमान अपेक्षाकृत कम 28.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कश्मीर में रिकॉर्ड तोड़ रही गर्मी
कश्मीर घाटी में गर्मियों का मौसम आने से पहले ही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के हालात पैदा हो गए हैं। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों में घाटी में और तापमान बढ़ने का अनुमान जताया है। विभाग ने अपने परामर्श में कहा है कि अगले पांच दिनों में घाटी में ज्यादातर जगहों पर अधिकतम और न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि इस महीने के अंत तक घाटी में बड़े पैमाने पर बर्फबारी के आसार नहीं हैं और 23 से 26 फरवरी तक घाटी में मौसम सूखा रहने की संभावना है, जबकि 27 तथा 28 फरवरी को कुछ जगहों पर हल्की बर्फबारी या बारिश हो सकती है।
राजस्थान में बारिश
राजस्थान में बीते चौबीस घंटे में कहीं कहीं हल्की बारिश हुई। मौसम केंद्र जयपुर ने यह जानकारी दी। मौसम केंद्र के अनुसार, सोमवार सुबह तक बीते 24 घंटों के दौरान राज्य में कहीं-कहीं पर हल्की बारिश हुई। सर्वाधिक 5.0 मिलीमीटर बारिश चोमू में दर्ज की गई। इसके अलावा टोंक के वनस्थली में बूंदाबांदी हुई। इस दौरान अधिकतम तापमान बाड़मेर में 34.6 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान अलवर में 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम में आए बदलाव के कारण सोमवार सुबह राजधानी जयपुर और आसपास के कई इलाकों में बादल छाए रहेंगे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विशेषज्ञों ने इस हालात पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि अगर उत्पादन नहीं बढ़ा तो आयात पर निर्भरता और बढ़ेगी। पंजाब पल्सेज इंपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और ग्रेन मार्केट के चेयरमैन राणा मुहम्मद तैय्यब ने बताया कि 1998 से पहले पाकिस्तान दाल का प्रमुख निर्यातक देश था। लेकिन परवेज मुशर्रफ के दौर में लगाए गए निर्यात बैन के बाद किसानों का उत्साह कम हो गया, क्योंकि दाल कम मुनाफे वाली फसल बन गई। जानकारों के मुताबिक देश में हर साल करीब 16.2 लाख टन दाल की खपत होती है, जिसमें से लगभग 10.7 लाख टन आयात की जाती है। यानी पाकिस्तान को देश में खपत होने वाली करीब 80 प्रतिशत दाल आयात करनी पड़ती है।
बारिश ने भी तरसाया
तैय्यब ने जलवायु परिवर्तन के असर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि थल जैसे वर्षा आधारित इलाकों में समय पर बारिश हो जाए तो पैदावार 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, लेकिन बारिश कम होने पर भारी नुकसान होता है और किसान अगले सीजन में दाल बोने से हिचकते हैं।
जानकारों ने जताई चिंता
ये मुद्दे विश्व दाल दिवस के मौके पर आयूब एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के पल्सेज रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित एक सेमिनार में उठाए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान की सालाना जरूरत करीब 15 लाख टन है, लेकिन लोकल उत्पादन इसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पा रहा है। इसी कारण हर साल करीब 10 लाख टन दाल आयात करनी पड़ती है।
AARI के पल्सेज सेक्शन के चीफ साइंटिस्ट खालिद हुसैन ने कहा कि दाल मानव पोषण और मिट्टी की उर्वरता दोनों के लिए जरूरी है। लेकिन सीमित मुनाफा और निर्यात बैन के कारण किसान इसकी खेती से बच रहे हैं। दाल उत्पादन बढ़ाने के मकसद से एक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है, लेकिन उसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

दरअसल, 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA ) के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ अवैध हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन शक्तियों के नाम पर राष्ट्रपति कांग्रेस के कराधान अधिकार, यानी टैरिफ लगाने की शक्ति का उपयोग नहीं कर सकते। फैसले के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लंबी पोस्ट लिखकर अदालत को हास्यास्पद, मूर्खतापूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभाजनकारी बताया।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने लिखा कि वे लाइसेंस व्यवस्था का इस्तेमाल विदेशी देशों, खासकर उन देशों के खिलाफ ‘कड़े’ कदम उठाने के लिए कर सकते हैं, जो उनके अनुसार दशकों से अमेरिका का शोषण करते रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अदालत के फैसले से उनकी शक्तियां कैसे बढ़ गईं। उन्होंने यह भी कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का जिक्र छोटे अक्षरों में करेंगे, जो उनके अनुसार ‘पूर्ण अनादर’ का संकेत है।
उनकी पोस्ट में लाइसेंस और शुल्क को लेकर भ्रम की स्थिति भी दिखी। अदालत ने कहा था कि राष्ट्रपति आर्थिक आपातकाल में व्यापारिक लाइसेंस जारी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें टैरिफ के रूप में शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। ट्रंप ने शिकायत की कि वे देशों से लाइसेंस लेने को तो कह सकते हैं, लेकिन उनसे लाइसेंस शुल्क नहीं वसूल सकते, जबकि हर कोई लाइसेंस पर शुल्क लेता है।
इस दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि अदालत ने अन्य कई टैरिफ को मंजूरी दी है, जिन्हें वे पहले से अधिक प्रभावी तरीके से लागू कर सकते हैं। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए केवल तीन न्यायाधीशों ( ब्रेट कावानॉ, क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलिटो ) की सराहना की, जिन्होंने असहमति जताई थी।
जन्मजात नागरिकता पर भी हमला
अदालत पर हमला करते हुए ट्रंप ने जन्मजात नागरिकता के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि 14वां संशोधन ‘गुलामों के बच्चों’ के लिए नहीं लिखा गया था। जबकि संविधान का यही संशोधन कहता है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति, जो अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन है, नागरिक माना जाएगा।
पिछले वर्ष ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर अवैध प्रवासियों या अस्थायी वीजा पर रहने वालों के बच्चों को जन्मजात नागरिकता से बाहर करने की कोशिश की थी। उनका तर्क था कि गृहयुद्ध के बाद जो संशोधन लाया गया, उसका उद्देश्य केवल मुक्त गुलामों के बच्चों को नागरिकता देना था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन समेत कुछ देश गर्भवती महिलाओं को अमेरिका भेजकर इस प्रावधान का ‘दुरुपयोग’ करते हैं।
टैरिफ बढ़ाने की घोषणा
शनिवार को अदालत द्वारा टैरिफ को 10 प्रतिशत तक सीमित करने के फैसले के बाद ट्रंप ने घोषणा की कि वे इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह कानूनी और अनुमत है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में उनका प्रशासन नए और कानूनी रूप से वैध टैरिफ लागू करेगा, ताकि ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ की प्रक्रिया जारी रखी जा सकें।

वित्त मंत्री ने क्या कहा
बजट में सीतारमण ने भारत के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करने और इसे देश के विकास लक्ष्यों के अनुरूप ढालने के लिए उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंक बेहतर तरीके से पूंजीकृत हैं और वे अगले चार-पांच साल तक ऋण वृद्धि को संभाल सकते हैं।
बैंकों को दिए ये आदेश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा बीमा सहित वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को कहा कि उन्हें (बैंकों को) अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा, ” बैंकों को अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए…। मैंने हमेशा से इस बात पर आपत्ति जतायी है कि आप उस बीमा को बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जिसकी आवश्यकता ही नहीं है और यह मामला आरबीआई और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के बीच फंसा रहा।”
आरबीआई ने ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद की बिक्री पर दिशानिर्देशों का मसौदा 11 फरवरी को जारी किया था। इसमें कहा गया है कि यदि किसी ग्राहक को गलत तरीके से उत्पाद या सेवा दी जाती है, तो बैंक को ग्राहक द्वारा चुकाई गई पूरी राशि लौटानी होगी और स्वीकृत नीति के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इस पर चार मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं।
आरबीआई ने कहा कि गलत तरीके से बिक्री पर कड़े नियम एक जुलाई से लागू होंगे। सीतारमण ने कहा, ”मुझे खुशी है कि आरबीआई यह स्पष्ट मार्गदर्शन दे रहा है कि गलत तरीके से बिक्री क्यों बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संदेश, बैंकों तक जाना चाहिए कि आप गलत बिक्री नहीं कर सकते। यह शब्द ‘गलत बिक्री’, किसी को ठेस पहुंचाने के बजाय, शब्दकोश में एक और शब्द बनकर रह गया है।”

कई मामलों में ग्राहकों के पास पहले से बीमा पॉलिसी होती है, लेकिन उसके बावजूद बैंक उन पर नई बीमा पॉलिसी लेने का दबाव बनाते हैं। खासकर होम लोन लेते समय ग्राहकों से अतिरिक्त बीमा लेने को कहा जाता है, जबकि संपत्ति पहले से ही गिरवी होती है। ऐसे में नियामक की जिम्मेदारी स्पष्ट न होने के कारण ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि बैंकों को ग्राहकों की जरूरत समझने, जमा बढ़ाने और जिम्मेदारी के साथ ऋण देने पर ध्यान देना चाहिए।
बैंकों को अधिक मानवीय होने की जरूरत
वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली को अधिक मानवीय और ग्राहक-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। मौजूदा समय में बैंकों ने ग्राहकों के साथ संबंध मजबूत करने और उनकी वित्तीय जरूरतों को समझने की मूल कार्य दूरी बना ली है, जिससे ग्राहकों में असंतोष बढ़ा है। बैंक अपने कम लागत वाले जमा यानी (करंट अकाउंट–सेविंग अकाउंट) को मजबूत करने पर जोर दें और ग्राहक केंद्रित सेवाएं विकसित करें।
कहां और कैसे करें शिकायत
गलत जानकारी देकर उत्पाद बेचने पर आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा, बीमा के लिए इरडा, बैंकिंग के लिए आरबीआई (सीएमएस पोर्टल), या ऑनलाइन माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। समस्या का समाधान न होने पर उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।
शिकायत करने के प्रमुख मंच
– राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन : टोल-फ्री नंबर 1915 या 1800-11-4000 पर कॉल करें।
– ई-दाखिल पोर्टल: ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए।
– बीमा मिस-सेलिंग: बीमा कंपनी की शिकायत निवारण सेल में, फिर बीमा लोकपाल या इरडा की वेबसाइट (155255 पर कॉल)।
– बैंकिंग मिस-सेलिंग: आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास।
– फ्री-लुक पीरियड (आमतौर पर 15-30 दिन) के भीतर शिकायत करने पर पॉलिसी रद्द कर रिफंड पाना आसान होता है।

यह दौरा कनाडा-भारत संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों के बाद संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “बेतुका” करार दिया था। इस विवाद के चलते अक्टूबर 2024 में भारत ने अपने उच्चायुक्त सहित कई राजनयिकों को वापस बुला लिया था और कनाडा ने भी समान संख्या में भारतीय राजनयिकों को निष्कासित किया था। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, अप्रैल 2025 में हुए कनाडाई संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी की जीत ने संबंध सुधार की प्रक्रिया शुरू की। कार्नी ने मार्च 2025 में प्रधानमंत्री पद संभाला था और उसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्तों की नियुक्ति की, जिससे तनाव कम हुआ और बातचीत का रास्ता खुला।
किन मुद्दों पर होगी बातचीत
कार्नी की यह यात्रा न केवल संबंधों को पटरी पर लाने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बीच कनाडा को अमेरिका पर निर्भरता कम करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नए साझेदारों के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाने की रणनीति का हिस्सा भी है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली चर्चाओं में व्यापार समझौते, रक्षा समझौते, एआई और प्रौद्योगिकी सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र (जैसे क्रिटिकल मिनरल्स और क्लीन एनर्जी) तथा रक्षा साझेदारी पर फोकस रहने की उम्मीद है। कार्नी प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों से भी मिलेंगे, जिससे निवेश और संयुक्त उद्यमों के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यह दौरा दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह निज्जर विवाद के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली भारत यात्रा है। इससे उम्मीद है कि पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर दोनों राष्ट्र भविष्योन्मुखी सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

पटनायक ने चेन्नई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या 6.41 करोड़ थी। उन्होंने बताया कि नयी सूची में 18-19 आयु वर्ग के 7.40 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया है जबकि विभिन्न श्रेणियों के तहत कुल 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। पटनायक ने कहा कि निरंतर अद्यतन करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी।
SC के आदेश के अनुसार लिस्ट जारी
संशोधन प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग के 30 जनवरी के उस निर्देश का भी पालन किया गया, जो उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जारी किया गया था। इस निर्देश में यह अनिवार्य किया गया था कि ‘तार्किक विसंगतियों’ की श्रेणी में हटाए गए नामों को हटाने के कारणों के साथ सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। ये सूचियाँ ग्राम पंचायत कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, तालुकों, उप-मंडल कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित की गईं। प्रभावित व्यक्तियों को आपत्ति दर्ज करने या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया था। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलेक्टरों) ने अपने-अपने जिलों में अंतिम मतदाता सूची जारी की।
लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया
इस बीच, विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण के दौरान नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया है। पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में, कुछ दिन पहले प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, कुल मतदाताओं की संख्या 9,44,211 है। वहीं शोलिंगनल्लूर में कुल 5,36,991 मतदाता हैं जिनमें से 2,62,621 पुरुष मतदाता, 2,74,254 महिला मतदाता और 116 तृतीय लिंग मतदाता हैं।

तरीका 1: मिस्ड कॉल से PF बैलेंस चेक करें
EPFO कर्मचारियों को मिस्ड कॉल सेवा भी देता है। अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दें। कॉल अपने आप कट जाएगी। कुछ सेकंड बाद आपको SMS के जरिए PF बैलेंस की जानकारी मिल जाएगी। ध्यान रखने वाली बातें: आपका मोबाइल नंबर EPF अकाउंट से लिंक होना चाहिए। KYC जैसे आधार, PAN या बैंक डिटेल्स अपडेट होना जरूरी है।
तरीका 2: SMS से PF बैलेंस जानें
आप SMS के जरिए भी PF बैलेंस चेक कर सकते हैं। अपने रजिस्टर्ड मोबाइल से SMS भेजें: EPFOHO ENG इसे 7738299899 पर भेज दें। यहां ENG भाषा के लिए है। अगर आप हिंदी में जानकारी चाहते हैं तो HIN लिख सकते हैं। कुछ देर बाद आपके फोन पर PF बैलेंस का मैसेज आ जाएगा।
तरीका 3: EPFO पोर्टल के जरिए
आप Employees’ Provident Fund Organisation की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जाकर जानकारी ले सकते हैं। EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। For Employees सेक्शन में जाएं। Know Your Claim Status या Member Passbook ऑप्शन चुनें। यहां आप अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या अन्य डिटेल्स के जरिए जानकारी ले सकते हैं। हालांकि इस तरीके में कई बार UAN की जरूरत पड़ती है, लेकिन अगर आपका मोबाइल नंबर लिंक है तो कुछ जानकारी बिना UAN के भी मिल सकती है।
तरीका 4: UMANG ऐप से जानकारी
सरकार का UMANG ऐप भी PF से जुड़ी सेवाएं देता है। Google Play Store या App Store से UMANG ऐप डाउनलोड करें। मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। EPFO सेवाएं चुनें। वहां से बैलेंस या पासबुक देखें। अगर आपका मोबाइल नंबर लिंक है तो यहां से भी जानकारी मिल सकती है।
ये बातें जरूर रखें ध्यान
आपका मोबाइल नंबर EPF खाते से जुड़ा होना चाहिए। KYC अपडेट होना जरूरी है। गलत नंबर से कॉल या SMS करने पर जानकारी नहीं मिलेगी। अगर मोबाइल नंबर बदला है तो पहले उसे अपडेट करवाएं।

लो प्रेशर और ट्रफ का असर
दिन में धूप, शाम को बदला मौसम
तापमान में उतार-चढ़ाव