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  • दिल्ली–मेरठ की दूरी हुई छोटी: नमो भारत ने बदली तस्वीर, अब 40 मिनट में पहुंचिए बेगमपुल!

    दिल्ली–मेरठ की दूरी हुई छोटी: नमो भारत ने बदली तस्वीर, अब 40 मिनट में पहुंचिए बेगमपुल!


    नई दिल्ली। दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा अब और तेज और आसान होने वाली है। 22 फरवरी से सराय काले खां से बेगमपुल तक नई दिल्ली-मेरठ नमो भारत ट्रेन सेवा शुरू होने जा रही है। करीब 70 किलोमीटर की दूरी अब महज 40 मिनट में पूरी की जा सकेगी, जिससे रोजाना दिल्ली और मेरठ के बीच आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    पहले सड़क मार्ग से यह दूरी तय करने में ढाई से तीन घंटे लगते थे, लेकिन अब यह समय मात्र एक तिहाई रह जाएगा। नौकरी, पढ़ाई या मेडिकल विजिट के लिए दिल्ली आने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 फरवरी को इस कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के बाद सराय काले खां से मोदीपुरम तक पूरा दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर जनता के लिए खुल जाएगा। इस प्रोजेक्ट को विकसित करने वाली नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने बेगमपुल तक सफल ट्रायल रन भी पूरा कर लिया है। ट्रायल में ट्रेन ने 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ते हुए लगभग 39 मिनट में दूरी तय की।

    कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 80 किलोमीटर है, जिसे अब 55 मिनट में कवर किया जा सकेगा। 2019 में इसकी नींव रखी गई थी और अब यह पूरी तरह तैयार है।

    दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का लगभग 55 किलोमीटर हिस्सा पहले से चालू है। न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ तक ट्रेनें पहले ही दौड़ रही हैं। अब सराय काले खां से न्यू अशोक नगर तक लगभग पांच किलोमीटर और मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक लगभग 21 किलोमीटर का सेक्शन भी संचालन के लिए तैयार हो गया है। इससे पूरी लाइन एक साथ जुड़ जाएगी और सराय काले खां से बेगमपुल तक सीधा सफर संभव होगा।

    नई हाई-स्पीड ट्रेन सेवा के साथ दिल्ली आने वाले यात्रियों को पहले की तुलना में काफी कम समय लगेगा। रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को हर दिन घंटों की बचत होगी।

    सबसे बड़ा सवाल अब किराए को लेकर है। सराय काले खां से बेगमपुल तक का टिकट कितना होगा, इसके बारे में अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। किराया तय करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। माना जा रहा है कि दूरी और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किराया तय किया जाएगा। चूंकि यह हाई-स्पीड और आधुनिक रैपिड रेल सेवा है, इसलिए किराया पारंपरिक ट्रेनों से अलग हो सकता है। फिलहाल यात्रियों को टिकट की कीमत जानने के लिए आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।

    दिल्ली-मेरठ नमो भारत ट्रेन न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि दिल्ली और मेरठ के बीच कनेक्टिविटी में भी नई गति लाएगी। यह उन यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी, जो रोजाना काम, पढ़ाई या मेडिकल अपॉइंटमेंट्स के लिए राजधानी और मेरठ के बीच सफर करते हैं।

  • छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू, 20 मार्च तक चलेगा

    छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू, 20 मार्च तक चलेगा


    रायपुर । रायपुर से जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ विधानसभा का प्रथम सत्र यानी बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होगा और 20 मार्च 2026 तक चलेगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शनिवार को अपने निवास कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा के दौरान सत्र की रूपरेखा की जानकारी साझा की।

    उन्होंने बताया कि इस सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं जिनमें वित्तीय मामलों और शासकीय कार्यों के साथ-साथ महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी संपादित किए जाएंगे। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सदन में वित्तीय बजट और राज्य के विकासात्मक योजनाओं पर विशेष चर्चा होगी। इसके अलावा सत्र में कानून-निर्माण और विधायी प्रस्तावों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि सदन के प्रत्येक दिन की कार्यवाही सुव्यवस्थित रूप से संपन्न होगी और सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दौरान पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखना मुख्य लक्ष्य रहेगा ताकि राज्य के विकास और जनता के हितों के लिए जरूरी निर्णय समय पर लिए जा सकें।

    सत्र की तैयारियों का जायजा लेने के लिए विधानसभा सचिवालय ने भी सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर लिया है। अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि सभी सदस्य सक्रिय भागीदारी करेंगे और सत्र के दौरान सभी प्रस्तावों पर प्रभावी चर्चा होगी।

    छत्तीसगढ़ विधानसभा का यह बजट सत्र राज्य की आगामी वित्तीय योजनाओं नीतियों और कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। राज्य सरकार के लिए यह सत्र नीति निर्माण और विकास कार्यों की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

  • लखनऊ में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    लखनऊ में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    नई दिल्ली । लखनऊ में शनिवार 21 फरवरी को परिवर्तन चौक पर सवर्ण मोर्चा के सदस्यों ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सवर्ण समाज के कार्यकर्ता पहले शांतिपूर्वक धरने पर बैठे और नारेबाजी कर अपने विरोध की आवाज बुलंद की। उन्होंने शंखनाद करते हुए प्रशासन से मांग की कि यूजीसी के हालिया नियम सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ हैं और इन्हें तुरंत वापस लिया जाए।

    प्रदर्शन में शामिल हुए कई कार्यकर्ता बदलाव की मांग कर रहे थे और उनका कहना था कि नए नियम उनके रोजगार और सामाजिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। इसी दौरान हाल ही में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री भी प्रदर्शन में पहुंचे। उनके आने के बाद प्रदर्शनकारियों ने परिवर्तन चौक से मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने पहले से लगाए गए बैरिकेडिंग के जरिए उन्हें रोक दिया।

    कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए इको गार्डन भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई।

    सवर्ण मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल परिवर्तन चौक पर भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    इस प्रदर्शन के दौरान शहर में कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल देखने को मिला लेकिन पुलिस की सतर्कता और नियंत्रण के कारण स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है। प्रदर्शन में सवर्ण समाज की भारी उपस्थिति ने इस आंदोलन को और मजबूती दी है। प्रशासन ने भी पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए रखी।

  • स्वास्थ्य सेवा में एआई की नई छलांग: एम्स भोपाल में शुरू हुई डिजिटल नेविगेशन सुविधा, रोजाना 12 हजार मरीजों का सफर होगा आसान।

    स्वास्थ्य सेवा में एआई की नई छलांग: एम्स भोपाल में शुरू हुई डिजिटल नेविगेशन सुविधा, रोजाना 12 हजार मरीजों का सफर होगा आसान।


    मध्य प्रदेश की राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान AIIMS भोपाल ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अक्सर बड़े अस्पतालों के विशाल परिसर और एक जैसी इमारतों के बीच मरीज और उनके परिजन विभाग ढूँढ़ते हुए भटक जाते हैं, लेकिन अब एम्स भोपाल में इस समस्या का अंत होने जा रहा है। संस्थान ने देश की पहली ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI आधारित नेविगेशन प्रणाली’ शुरू की है। इस स्मार्ट तकनीक की मदद से अब रोजाना अस्पताल आने वाले 10 से 12 हजार लोगों को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए किसी से रास्ता पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    यह आधुनिक प्रणाली बिल्कुल वैसे ही काम करेगी जैसे हम अनजान शहरों में ‘गूगल मैप्स’ का उपयोग करते हैं। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख चौराहों पर विशेष क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। जैसे ही कोई मरीज या परिजन अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करेगा उसकी स्क्रीन पर पूरे अस्पताल का इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। यह तकनीक आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम और एक स्थानीय स्टार्टअप के सहयोग से तैयार की गई है, जो वेब और मोबाइल एप दोनों स्वरूपों में उपलब्ध होगी।

    अस्पताल प्रशासन ने इस सिस्टम को बेहद सटीक बनाने के लिए इमारतों के बाहर जीपीएस और भवनों के अंदर ‘रिले उपकरणों’ का उपयोग किया है। चूंकि इमारतों के भीतर जीपीएस सिग्नल कमजोर हो जाते हैं, इसलिए हर 15 मीटर पर विशेष सेंसर लगाए गए हैं जो मोबाइल को बिल्कुल सटीक दिशा संकेत देंगे। यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल एक महीने के परीक्षण पर है, जिसकी सफलता के बाद इसे पूरे परिसर में स्थायी रूप से लागू कर दिया जाएगा। इस पहल से न केवल मरीजों का कीमती समय बचेगा, बल्कि भ्रम की स्थिति खत्म होने से अस्पताल के स्टाफ पर से भी मार्गदर्शन का अतिरिक्त बोझ कम होगा।

  • गोविंदपुरा और नरेला में सबसे अधिक नाम हटाए गए, डिजिटल और फील्ड सत्यापन से सूची अपडेट

    गोविंदपुरा और नरेला में सबसे अधिक नाम हटाए गए, डिजिटल और फील्ड सत्यापन से सूची अपडेट


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी में मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण के बाद बड़ा बदलाव सामने आया है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR प्रक्रिया पूरी होने पर भोपाल की मतदाता सूची से 3 लाख 80 हजार से अधिक नाम हटाए गए हैं संशोधित आंकड़ों के अनुसार शहर में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 17 लाख 45 हजार 453 रह गई है अंतिम मतदाता सूची शनिवार को जारी की जाएगी

    डोर-टू-डोर सत्यापन और दावे-आपत्तियों के बाद किया गया संशोधन
    प्रशासन के मुताबिक यह कार्रवाई डोर-टू-डोर सर्वे, दावे-आपत्तियों की सुनवाई और दस्तावेज सत्यापन के बाद की गई पूरी प्रक्रिया लगभग चार महीने तक चली प्रारूप सूची 23 दिसंबर को प्रकाशित की गई थी जिसके बाद बूथ स्तर पर फॉर्म 6, 7 और 8 के माध्यम से आवेदन लिए गए

    गोविंदपुरा और नरेला में सबसे अधिक नाम हटाए गए
    सबसे अधिक संशोधन गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में हुआ जहां मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से 81 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटे इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की नरेला विधानसभा में 70 हजार से अधिक नाम सूची से बाहर हुए प्रशासन का कहना है कि ये बदलाव सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट की प्रक्रिया का हिस्सा हैं

    कलेक्टर की अध्यक्षता में अंतिम सूची की मंजूरी

    कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में अंतिम सूची को मंजूरी देने के लिए स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की जाएगी अधिकारियों ने बताया कि ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में रखे गए मतदाताओं को नोटिस जारी कर 50 दिनों के भीतर दस्तावेज जांच की गई और 14 फरवरी तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी

    उम्र आधारित और अन्य आंकड़े
    संशोधित सूची में 100 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के करीब 125 मतदाता दर्ज किए गए साथ ही थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 166 से घटकर 72 रह गई विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार बैरसिया में सबसे कम 8,889 मतदाता कम हुए जबकि भोपाल मध्य, दक्षिण-पश्चिम और हुजूर में भी बड़ी संख्या में नाम हटे

    विशेषज्ञों की राय और महत्व
    चुनाव प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया निर्वाचन सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है प्रशासन का कहना है कि डिजिटल सत्यापन और फील्ड सर्वे के संयोजन से मतदाता डेटा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है

  • MP में 4 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट: भोपाल और जबलपुर में सुबह हल्की बारिश, रीवा समेत 5 जिलों में भी आसार

    MP में 4 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट: भोपाल और जबलपुर में सुबह हल्की बारिश, रीवा समेत 5 जिलों में भी आसार


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है और अगले चार दिन प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। शुक्रवार को साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन की एक्टिविटी के चलते प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। शनिवार को बादल छाए हुए हैं और नए मौसम सिस्टम की वजह से 23 और 24 फरवरी को मौसम फिर बदलने की संभावना है। ये सिस्टम प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी जिलों में अधिक असर दिखा सकते हैं।

    पिछले तीन दिन से प्रदेश में आंधी-बारिश का मौसम बना हुआ है। कुछ जिलों में ओलों की बूंदें भी गिरी हैं। शुक्रवार को भोपाल रतलाम मंदसौर शाजापुर धार इंदौर रायसेन उज्जैन सागर छतरपुर समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश दर्ज की गई।

    मौसम के इस तेवर से कुछ जिलों में तेज आंधी और झोंकों के चलते फसलों को नुकसान पहुंचा है। खासकर रतलाम शाजापुर और उज्जैन में गेहूं की फसलें आड़ी हो गई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आगामी तीन दिनों में प्रदेश के लगभग 25 जिलों में आंधी-बारिश के कारण फसलों को और नुकसान हो सकता है।

    किसानों की फसलों पर असर के चलते सरकार ने भी सर्वे अभियान शुरू कर दिया है। राजस्व अमला प्रभावित क्षेत्रों में जाकर फसल नुकसान का आंकलन कर रहा है और संभावित राहत कार्यों की तैयारी में जुट गया है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दो दिन ऐसा रहेगा:

    22 फरवरी: इस दिन किसी विशेष बारिश का अलर्ट नहीं है लेकिन बादल छाए रह सकते हैं।
    23 फरवरी: दक्षिणी हिस्सों में नए सिस्टम के प्रभाव से बारिश होने की संभावना है।
    24 फरवरी: दक्षिण-पूर्वी जिलों में तेज बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है।

    भोपाल और जबलपुर में सुबह हल्की बारिश दर्ज की गई है। रीवा सतना अनूपपुर शहडोल और उमरिया सहित पांच जिलों में भी मौसम के बिगड़ने के आसार हैं। विशेषज्ञ लोगों से सतर्क रहने और घर से अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं।

    सरकारी विभाग ने किसानों और ग्रामीणों से कहा है कि वे मौसम के हालात पर नजर रखें और फसलों और पशुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं। तेज आंधी और बारिश के चलते सड़क मार्ग और बिजली नेटवर्क प्रभावित हो सकते हैं इसलिए लोग सतर्क रहें।

    मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले चार दिनों में आंधी-बारिश का दौर राज्य में कई जगह प्रभावित रहेगा। विशेषकर दक्षिण-पूर्वी जिलों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

  • रतलाम ऑनलाइन फ्रॉड: सेना का फर्जी अधिकारी बताकर महिला से ठगी, एडवांस किराए का झांसा देकर उड़ाए 93,888 रुपये।

    रतलाम ऑनलाइन फ्रॉड: सेना का फर्जी अधिकारी बताकर महिला से ठगी, एडवांस किराए का झांसा देकर उड़ाए 93,888 रुपये।


    रतलाम /मध्य प्रदेश के रतलाम में ऑनलाइन ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। यहाँ साइबर अपराधियों ने देशभक्ति और सेना के प्रति लोगों के सम्मान का फायदा उठाते हुए एक महिला को अपना शिकार बनाया। स्टेशन रोड थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपना मकान किराये पर देने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन दिया था, लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह विज्ञापन उनके लिए मुसीबत बन जाएगा। 5 नवंबर को उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताया। आरोपी ने बड़ी चालाकी से महिला को झांसा दिया कि उसकी पोस्टिंग रतलाम में होने वाली है और उसे जल्द से जल्द एक अच्छे किराये के मकान की जरूरत है।

    ठग ने बातचीत के दौरान महिला का विश्वास जीतने के लिए मकान का किराया 9 हजार रुपये तय किया और बिना किसी आना-कानी के दो महीने का एडवांस किराया देने पर भी सहमति जता दी। जब भरोसा पूरी तरह कायम हो गया, तो शातिर ठग ने भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के बहाने महिला से उनके बैंक खाते का विवरण मांग लिया। जैसे ही महिला ने अपना बैंक अकाउंट नंबर साझा किया, उनके मोबाइल पर धड़ाधड़ मैसेज आने शुरू हो गए। आरोपी ने एक के बाद एक तीन किस्तों में महिला के खाते से कुल 93,888 रुपये पार कर दिए। पहली बार में 27 हजार, फिर 26,999 और अंत में 39,889 रुपये कटते ही महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई।

    ठगी का अहसास होते ही पीड़िता ने बिना देर किए साइबर सेल और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री व मोबाइल नंबर के आधार पर उसकी तलाश शुरू कर दी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों “आर्मी ऑफिसर” बनकर ठगी करना अपराधियों का एक प्रचलित तरीका बन गया है, क्योंकि लोग सेना के नाम पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक विवरण, ओटीपी या पिन साझा न करें, चाहे वह खुद को किसी भी बड़े पद का अधिकारी क्यों न बताए।

  • यूजीसी मानकों के पालन और पारदर्शिता पर बहस, राज्य सरकार को समय मिला..

    यूजीसी मानकों के पालन और पारदर्शिता पर बहस, राज्य सरकार को समय मिला..


    जबलपुर । रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है यह आदेश शुक्रवार को न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है

    याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए गए
    याचिका एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर की गई है याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने तर्क दिया कि कुलगुरु की नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हुई याचिका में कहा गया कि पीएचडी उपाधि के बाद न्यूनतम दस वर्ष का शैक्षणिक अनुभव अनिवार्य होता है जबकि इस मानदंड का पालन नहीं किया गया

    यूजीसी मानकों और चयन प्रक्रिया पर बहस
    सुनवाई के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं और चयन प्रक्रिया के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है याचिका में तर्क दिया गया कि यदि प्राध्यापक पद पर मूल नियुक्ति ही नियमों के विरुद्ध रही हो तो कुलगुरु पद पर की गई नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है

    राज्य सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय
    राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने न्यायालय में पक्ष रखा और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया न्यायालय ने आदेश में कहा कि प्रतिवादियों को 7 अप्रैल 2025 को नोटिस तामील किया जा चुका है लेकिन अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं हुआ इसे देखते हुए चार सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया

    सार्वजनिक हित और विशेषज्ञों की राय
    मामला उच्च शिक्षा प्रशासन और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा होने के कारण इसे सार्वजनिक हित से महत्वपूर्ण माना जा रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय का अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासनिक नियुक्तियों के मानकों और जवाबदेही के दायरे को स्पष्ट कर सकता है

    आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें
    फिलहाल सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है जहां राज्य सरकार का जवाब और न्यायालय की टिप्पणी मामले की दिशा तय कर सकती है यह विवाद न केवल आरडीवीवी बल्कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक नियुक्तियों के लिए भी उदाहरण बन सकता है

  • भाग्यश्री की फिल्मी यात्रा: शर्तों पर किया डेब्यू, करियर की ऊंचाई के बाद क्यों आई गिरावट?

    भाग्यश्री की फिल्मी यात्रा: शर्तों पर किया डेब्यू, करियर की ऊंचाई के बाद क्यों आई गिरावट?


    नई दिल्ली। 1969 – 90 के दशक की सबसे प्यारी और मशहूर अभिनेत्री भाग्यश्री आज 55 साल की हो गई हैं। उनका जन्म बॉलीवुड के एक नए युग का हिस्सा बनने के लिए हुआ था, लेकिन उनके करियर की कहानी कुछ और ही रही। “मैंने प्यार किया” (1989) के साथ सलमान खान के साथ शानदार डेब्यू करने वाली भाग्यश्री ने फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले कई शर्तें रखी थीं।

    सुपरहिट शुरुआत, लेकिन फिर क्यों हुआ करियर रुकावट का शिकार?
    भाग्यश्री ने अपनी पहली फिल्म में सलमान से ज्यादा फीस हासिल की थी—1 लाख रुपये, जबकि सलमान को 30 हजार रुपये। लेकिन इसके बाद भी उनके करियर में उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया। “त्यागी” (1992), “पायल” (1992) और “घर आया मेरा परदेसी” (1993) जैसी फिल्में फ्लॉप रही। बाद में उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी हाथ आजमाया, लेकिन वहां भी सफलता की राह नहीं मिल पाई।

    भाग्यश्री की शर्तें: फिल्म में किसिंग सीन नहीं, चूड़ीदार पहनेंगी
    भाग्यश्री के फिल्मी करियर की शुरुआत शर्तों के साथ हुई थी। उन्होंने सलमान खान के साथ “मैंने प्यार किया” के लिए एक शर्त रखी थी कि वे फिल्म में किसिंग सीन नहीं करेंगी। इसके अलावा, उनके पिता ने केवल चूड़ीदार पहनने की इजाजत दी थी, और भाग्यश्री ने अपनी फिल्मों में इसी को प्राथमिकता दी।

    रिश्ते और शादी: 19 साल की उम्र में लिया बड़ा कदम
    फिल्मी करियर में असफलता के बाद, भाग्यश्री ने अपने व्यक्तिगत जीवन पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने 19 साल की उम्र में अपने बचपन के दोस्त हिमालय दासानी से शादी कर ली। इस शादी से उनके परिवार वाले नाखुश थे, लेकिन सलमान खान और करीबी दोस्तों के समर्थन से उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जाकर इस रिश्ते को मंजूरी दी।

    शादी के बाद आई मुश्किलें, लेकिन फिर सुलह
    शादी के बाद भाग्यश्री और हिमालय के रिश्ते में दरार आ गई थी। दोनों करीब डेढ़ साल तक अलग रहे, लेकिन बाद में उन्होंने एक-दूसरे को समझा और फिर से रिश्ते को मजबूत किया। अब, उनके दो बच्चे बेटा अभिमन्यु और बेटी अवंतिका हैं।

    अफेयर की अफवाहें: सलमान के साथ जोड़ी की चर्चा
    भाग्यश्री और सलमान खान के अफेयर की खबरें भी लगातार मीडिया में तैरती रही थीं, खासकर बेटे के जन्म के बाद। हालांकि, भाग्यश्री और सलमान ने इन अफवाहों पर कभी खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की।

    भाग्यश्री का करियर एक सिखाने वाली कहानी हैजहां सुपरहिट डेब्यू के बाद भी उनकी फिल्मों का करियर नहीं चल सका, लेकिन निजी जिंदगी में उन्होंने अपने फैसले खुद लिए। शर्तों पर काम करने, परिवार के लिए अपने सपनों को छोड़ने और एक सशक्त महिला बनने का उनका सफर एक प्रेरणा है।

  • यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मायावती और BJP ने देश की गरिमा पर सवाल उठाया

    यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मायावती और BJP ने देश की गरिमा पर सवाल उठाया



    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान उस समय सियासी भूचाल आ गया जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल के भीतर अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया। यह समिट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करने के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल थे।

    क्या हुआ था?
    प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, 8‑10 प्रदर्शनकारी अचानक मुख्य सभागार के समीप पहुंच गए, टी‑शर्ट उतारकर नारेबाजी करने लगे और कथित तौर पर भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विरोध जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारे लगाए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और कार्यक्रम बाधित हुए बिना आगे बढ़ाया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को कुछ ही मिनटों में नियंत्रित कर लिया गया और किसी प्रतिनिधि को शारीरिक नुकसान नहीं हुआ।

    मायावती की कड़ी प्रतिक्रिया
    घटना के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया मंच X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस प्रदर्शन को “अत्यंत अशोभनीय और निंदनीय” बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का व्यवहार देश की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
    मायावती ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति सभ्य और मर्यादित तरीके से होनी चाहिए।

    BJP का हमला
    सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को लेकर कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह का प्रदर्शन भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
    BJP का कहना है कि जब दुनिया AI और तकनीकी प्रगति में भारत की भूमिका की सराहना कर रही है, तब ऐसे विरोध देश को बदनाम करने वाले हैं।

    कांग्रेस का पक्ष
    वहीं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से कहा गया कि युवा कार्यकर्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अपनी आवाज उठाई। पार्टी नेताओं ने सरकार से असहमति को देशविरोधी बताने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है।

    सियासी असर और आगे की राह
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावी माहौल में और गर्मी ला सकता है।

    सत्तापक्ष इसे “राष्ट्रीय गरिमा” का मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेर सकता है।

    विपक्ष इसे “लोकतांत्रिक अधिकार” और “नीतिगत असहमति” का मामला बताकर राजनीतिक बहस को नई दिशा दे सकता है।

    दिल्ली AI समिट में हुआ यह प्रदर्शन केवल कुछ मिनटों की घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक प्रतीक बन गया है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तकनीकी छवि, तो दूसरी ओर घरेलू राजनीति का टकराव—दोनों के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना रखता है।