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  • मुरैना महिला एसआई को हाईकोर्ट से झटका, एडवोकेट सुसाइड केस में अग्रिम जमानत खारिज

    मुरैना महिला एसआई को हाईकोर्ट से झटका, एडवोकेट सुसाइड केस में अग्रिम जमानत खारिज


    ग्वालियर। हाईकोर्ट ने मुरैना की महिला सब इंस्पेक्टर प्रीति जादौन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामला एडवोकेट मृत्युंजय सिंह चौहान की आत्महत्या से जुड़ा है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में केवल निजी तनाव नहीं बल्कि धमकी और पद के दुरुपयोग के गंभीर संकेत मिलते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी एक सेवारत पुलिस अधिकारी है और उससे कानून के पालन की अपेक्षा अधिक रहती है।

    हाईकोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि घटना के कुछ ही दिनों बाद मृतक द्वारा आत्महत्या करना अभियोजन पक्ष के तर्क को मजबूत करता है। कोर्ट ने यह भी देखा कि गवाहों को प्रभावित करने और कथित घटनास्थल से हथियार की बरामदगी न होने के कारण हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।मामला मुरैना के सिविल लाइन थाने में पदस्थ एसआई प्रीति जादौन और उनके मंगेतर ग्वालियर निवासी एडवोकेट मृत्युंजय सिंह चौहान से जुड़ा है। 14-15 दिसंबर 2025 की रात मृत्युंजय ने गोला का मंदिर थाना क्षेत्र स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी 15 दिसंबर को सामने आई थी।

    पुलिस जांच में सामने आया कि 12 दिसंबर को मृतक मुरैना पुलिस लाइन स्थित प्रीति जादौन के सरकारी क्वार्टर पहुंचे थे। वहां मृतक ने एक आवेदन लिखा जिसे जांच एजेंसियां अघोषित सुसाइड नोट मान रही हैं। आवेदन में आरोप था कि महिला एसआई और क्वार्टर में मौजूद आरक्षक अराफात खान ने उनके साथ मारपीट की। मृतक ने इस घटना की शिकायत सिविल लाइन और सिटी कोतवाली थाने में दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उल्टे महिला एसआई के प्रभाव के चलते उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई।

    हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामला निजी संबंधों में तनाव का है और मृतक ने जबरन सरकारी आवास में प्रवेश किया। हालांकि शासकीय अधिवक्ता ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन, ऑडियो वीडियो साक्ष्य और मृतक की मां के बयान को आधार बनाकर आरोपों की पुष्टि की। कोर्ट ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

    इस बीच, ग्वालियर पुलिस द्वारा की गई दबिश के दौरान एसआई प्रीति जादौन और आरक्षक अराफात खान अपने आवास से अनुपस्थित पाए गए। पुलिस की तलाश जारी है और मामला न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • 400 करोड़ का आधुनिक डुमना एयरपोर्ट, लेकिन जबलपुर में उड़ानों की कमी बनी चुनौती..

    400 करोड़ का आधुनिक डुमना एयरपोर्ट, लेकिन जबलपुर में उड़ानों की कमी बनी चुनौती..


    जबलपुर :डुमना एयरपोर्ट का विस्तार और आधुनिकीकरण पर केंद्र सरकार ने करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं उम्मीद जताई गई थी कि इससे जबलपुर को देश के बड़े शहरों से सीधी और नियमित हवाई कनेक्टिविटी मिलेगी लेकिन हालात इसके उलट हैं अत्याधुनिक टर्मिनल और लंबा रनवे होने के बावजूद उड़ानों की संख्या अपेक्षाकृत कम बनी हुई है

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में विस्तारित एयरपोर्ट का लोकार्पण किया था और यात्रियों ने इससे नई उम्मीदें लगाईं लेकिन आज भी कई अहम रूट्स पर फ्लाइट न होने के कारण लोग ट्रेन या सड़क मार्ग पर निर्भर हैं इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों में नाराजगी बढ़ रही है

    क्षमता बढ़ी है लेकिन कनेक्टिविटी अभी भी कम है विस्तार से पहले डुमना एयरपोर्ट का रनवे लगभग 1998 मीटर लंबा था जिसे अब बढ़ाकर 2750 मीटर कर दिया गया है टर्मिनल की क्षमता भी 150 यात्रियों से बढ़ाकर 800 यात्रियों तक पहुंचाई गई है अब एयरबस ए-320 जैसे बड़े विमान उतर सकते हैं इसके बावजूद उड़ानों की संख्या में अपेक्षित इजाफा नहीं हुआ

    दूसरे शहरों से तुलना में जबलपुर पिछड़ गया है इंदौर से जहां 20 से ज्यादा शहरों के लिए 40-50 उड़ानें संचालित हो रही हैं वहीं भोपाल से भी दर्जनों फ्लाइट्स उपलब्ध हैं लेकिन संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद जबलपुर में सीमित उड़ानें यात्रियों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हैंभोपाल और प्रयागराज के लिए सीधी उड़ानों की चर्चाएं पिछले वर्ष से जारी हैं और इन रूट्स पर मांग काफी अधिक है लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ इससे व्यापारियों छात्रों और धार्मिक यात्रियों को नुकसान हो रहा है

    एयरपोर्ट विस्तार से पहले दिल्ली मुंबई हैदराबाद इंदौर बेंगलुरु और पुणे के लिए रोजाना चार से आठ विमानों की आवाजाही थी लेकिन अब उड़ानों की संख्या छह से बढ़कर केवल सात तक ही सीमित है फिलहाल जबलपुर से दिल्ली मुंबई हैदराबाद इंदौर बेंगलुरु बिलासपुर और जगदलपुर के लिए फ्लाइट्स संचालित हो रही हैंएयरपोर्ट डायरेक्टर राजीव रत्न पांडे का कहना है कि एयरपोर्ट में अतिरिक्त उड़ानों को संभालने की पूरी क्षमता है लेकिन नए रूट शुरू करने के लिए शासन स्तर पर निर्णय लेना जरूरी है यात्रियों की बढ़ती उम्मीदों और एयरपोर्ट की क्षमताओं के बीच यह संतुलन अभी तक नहीं बन पाया है

  • पूरे देश में हो रहा पंडितों का अपमान; ब्राह्मणों के सम्मान में, मायावती मैदान में, केंद्र सरकार से यह मांग

    पूरे देश में हो रहा पंडितों का अपमान; ब्राह्मणों के सम्मान में, मायावती मैदान में, केंद्र सरकार से यह मांग


    नई दिल्ली। वेब सीरीज घूसखोर पंडत पर अब सियासत भी गरमाने लगी है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सीरीज भी इस विवाद में कूद गई हैं। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज के अपमान से जोड़ते हुए फिल्मकारों पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सोची-समझी रणनीति के तहत फिल्मों में ‘पंडित’ को ‘घुसपैठिया’ बताकर पूरे समाज का अनादर किया जा रहा है। इसे लेकर मायावती ने एक्स पर पोस्ट लिखा है।
    केंद्र सरकार से तत्काल इस पर रोक लगाने की मांग की है।मायावती ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि अब फिल्मों में भी ब्राह्मण समाज को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा फिल्मों में ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है, उससे समूचे ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष व्याप्त है। हमारी पार्टी इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है।
    घुसपैठिया शब्द पर जताई कड़ी आपत्ति
    मायावती के बयान में सबसे अहम बिंदु ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल रहा। दरअसल, विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि इस वेब सीरीज में ब्राह्मण पात्रों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है और उन्हें व्यवस्था को नुकसान पहुxचाने वाले ‘घुसपैठियों’ की तरह पेश किया गया है। मायावती ने इसे ‘जातिसूचक’ करार देते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसी फिल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    वेब सीरीज में क्या दिखाया गया है?
    यह वेब सीरीज मुख्य रूप से सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर प्रहार करने का दावा करती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी, जो ब्राह्मण समुदाय से संबंध रखता है और ‘पंडत’ उपनाम का उपयोग करता है, अपने पद का दुरुपयोग कर लोगों से काम के बदले अवैध वसूली करता है। सीरीज में सिस्टम की खामियों और एक व्यक्ति के लालच को कहानी का आधार बनाया गया है। आरोप है कि इसमें कुछ ऐसे दृश्य और संवाद भी शामिल किए गए हैं जो सरकारी दफ्तरों में होने वाले ‘लेनदेन’ के काले खेल को दर्शाते हैं।

    विवाद और आपत्ति के मुख्य कारण

    वेब सीरीज को लेकर मुख्य रूप से ‘सनातन रक्षक दल’ और अन्य ब्राह्मण संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनकी मुख्य आपत्ति इसके नाम को लेकर ही है। विरोध करने वालों का कहना है कि सीरीज का नाम घूसखोर पंडत रखना सीधे तौर पर एक पूरी जाति और समुदाय को अपमानित करने की कोशिश है। उनका तर्क है कि पंडत शब्द ज्ञान और सम्मान का प्रतीक है, उसके साथ ‘घूसखोर’ विशेषण जोड़ना समाज में गलत संदेश फैलाता है।

    आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार किसी भी जाति का व्यक्ति कर सकता है, लेकिन जानबूझकर एक विशिष्ट जाति (ब्राह्मण) को भ्रष्ट के रूप में पेश करना एक एजेंडा का हिस्सा लगता है। सीरीज के पोस्टर और ट्रेलर में कुछ ऐसे दृश्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं जहां पात्र को धार्मिक वेशभूषा या प्रतीकों के साथ गलत काम करते दिखाया गया है। विरोधियों का कहना है कि यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है।

  • मणिपुर के डिप्टी सीएम पर क्यों हो गया बवाल, कुकी समुदाय ने किया विधायकों का बहिष्कार

    मणिपुर के डिप्टी सीएम पर क्यों हो गया बवाल, कुकी समुदाय ने किया विधायकों का बहिष्कार


    नई दिल्ली। मणिपुर में नई सरकार बनते ही चुराचांदपुर में एक बार फिर हिंसा भड़क गई। जानकारी के मुताबिक तुइबोंग इलाके में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और नई सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोगों ने आग जलाकर प्रदर्शन किए। भीड़ को नियंत्रण करे के प्रयास में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों में झड़प हो गई। इसके बाद पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी गई है।

    उपमुख्यमंत्री का हो रहा था विरोध

    यह झड़प समुदाय के एक विधायक नेमचा किपगेन के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल होने के विरोध में हुई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी तुइबोंग बाजार के पास जमा हुए और टायर जलाकर किपगेन के खिलाफ नारे लगाए। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति तब और बिगड़ गई जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया। वहां तैनात कर्मियों की तुलना में भीड़ की संख्या अधिक थी और उन्होंने पथराव किया जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा।

    उन्होंने बताया कि इस घटना में दो लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और हालात को काबू में करने के लिए अतिरिक्त बलों को भेजा गया है।” कांगपोकपी के रहने वाले किपगेन के बुधवार शाम को उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से जिले में तनाव व्याप्त है।

    कुकी समुदाय ने कर दी बहिष्कार की घोषणा

    मणिपुर सरकार में तीन कुकी-जो विधायकों के शामिल होने के बाद एक संगठन ने उन पर समुदाय के साथ विश्वासघात करने और मेइती समुदाय के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाते हुए उनके सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की। कई समूहों ने कुकी बहुल चूड़ाचांदपुर जिले में शुक्रवार को ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान भी किया। मणिपुर में मई 2023 में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसके चलते पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।

    कुकी-जो समुदाय के नेताओं द्वारा समुदाय के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की मांग के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने यह पदभार भाजपा नेता एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के लगभग एक वर्ष बाद संभाला। कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट की विधायक एल. दिखो ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। विधानसभा में कुकी-जो समुदाय के कुल 10 विधायक हैं, जिनमें से सात भाजपा से हैं।

    हमार जनजाति के विधायक एन. सनाते, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उस दल का हिस्सा थे, जिन्होंने इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर राज्य में सरकार गठन का दावा पेश किया। इस दल में कुकी-जो जनजाति के एक अन्य विधायक, एल. एम. खौते भी शामिल थे। हमारे लोग कुकी-जो समुदाय का हिस्सा हैं।

    कुकी जो परिषद (केजेडसी) ने गुरुवार को एक बयान में मणिपुर सरकार के गठन में कुछ कुकी-जो विधायकों की भागीदारी की कड़ी और स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए कहा कि यह 13 जनवरी 2026 के लुंगथू प्रस्ताव का घोर उल्लंघन है।प्रस्ताव के अनुसार, कुकी-जो समुदाय के सदस्य सरकार गठन में तभी भाग लेंगे जब केंद्र और राज्य के अधिकारियों से लिखित आश्वासन प्राप्त होगा कि एक विधायिका के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में एक अलग प्रशासन होगा।

    इसमें कहा गया है कि सरकार में शामिल होकर, इन कुकी विधायकों ने प्रभावी रूप से खुद को मेइती लोगों के साथ जोड़ लिया है और उन्होंने अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात किया है। संगठन ने बयान में कहा, ”केजेडसी मणिपुर सरकार के गठन में भाग लेने वाले सभी कुकी-जो विधायकों की निंदा करता है और कुकी-जो के सभी क्षेत्रों में उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की घोषणा करता है।”

    संगठन ने कुकी-जो लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी सामाजिक, पारंपरिक या सार्वजनिक मामले में उनके साथ सहयोग या संबंध न रखें। संगठन ने कहा कि यह बहिष्कार तब तक लागू रहेगा जब तक वे कुकी-जो लोगों के सामूहिक रुख के अनुरूप स्वयं को स्थापित नहीं कर लेते। कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों ने भी समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है।

    बुधवार रात कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और सड़क पर बांस रखकर नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का विरोध किया। कुकी लिबरेशन आर्मी (लेटखोलुन) ने एक बयान में कहा कि वह एक “स्पष्ट और अंतिम चेतावनी” जारी कर रही है। संगठन ने कहा कि कोई भी कुकी-जो प्रतिनिधि, जो सरकार के गठन में भाग लेने का फैसला करता है, उसे समुदाय के लोगों के साथ विश्वासघात करने वाला माना जाएगा।

    बयान में कहा, ”ऐसे किसी भी कदम के चलते अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उन कुकी-जो विधायकों पर ही होगी।” मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है, जिसकी शुरुआत पहाड़ी जिलों में निकाली गई एक आदिवासी एकजुटता रैली के बाद हुई थी। यह रैली बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में निकाली गई थी। हिंसा में अब तक कुकी और मेइती समुदायों के सदस्यों तथा सुरक्षा कर्मियों सहित कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है, तथा हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

  • ओटीटी फिल्म ''घूसखोर पंडत'' विवादों में घिरी, एनएचआरसी का आइबी मिनिस्ट्री को नोटिस

    ओटीटी फिल्म ''घूसखोर पंडत'' विवादों में घिरी, एनएचआरसी का आइबी मिनिस्ट्री को नोटिस


    नई दिल्ली। ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली आगामी फिल्म ”घूसखोर पंडत” के नाम को लेकर मिली शिकायत के मद्देनजर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एनएचआरसी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है।नेटफ्लिक्स की क्राइम थ्रिलर घूसखोर पंडत की कहानी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है। जेम्स ऑफ बॉलीवुड के संस्थापक संजीव नेवार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि फिल्म में जातिवादी और भेदभावपूर्ण सामग्री है।
    नेटफ्लिक्स की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।तीन फरवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दायर शिकायत के अनुसार, यह नाम सीधे तौर पर एक विशेष जाति को भ्रष्टाचार और अनैतिक व्यवहार से जोड़ता है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फिल्म का शीर्षक जातिगत तनावों के प्रति पहले से ही संवेदनशील समाज में सामाजिक शत्रुता को बढ़ावा दे सकता है।
    फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर देख भड़के उज्जैन के ब्राह्मण
    इंटरनेट माध्यम पर अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर जारी होने के बाद उज्जैन के ब्राह्मण आग बबूला हो गए हैं। ब्राह्मणों ने फिल्म के टाइटल का जमकर विरोध किया है। उनका कहना है कि देश में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को अपमानित करने का प्रचलन बढ़ रहा है। अगर शीर्षक नहीं बदला गया तो, फिल्म बनाने वालों के मुंह पर कालिख पोतेंगे।

    उज्जैन के तीर्थ पुरोहित पं. अमर डब्बावाला ने भी फिल्म का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि फिल्म के माध्यम से पंडितों को अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है। सेंसर बोर्ड को समाज में वैमनस्यता पैदा करने वाली फिल्मों पर रोक लगाना चाहिए।फिल्म घूसखोर पंडत प्रसारित होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। जयपुर और दिल्ली के बाद अब उज्जैन में भी इसके शीर्षक को लेकर विवाद छिड़ गया है।

    फिल्म के नाम में ही पुजारी, पुरोहित व ब्राह्मणों का अपमान है

    अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक पं. महेश पुजारी ने फिल्म के शीर्षक को ब्राह्मणों का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि देश में सवर्ण समाज को अपमानित किया जा रहा है। इस फिल्म के नाम में ही पुजारी, पुरोहित व ब्राह्मणों का अपमान है। हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। फिल्म के निर्माता अगर हमारे सामने आएंगे तो मुंह पर कालिख पोती जाएगी।
  • Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? भूल से भी न करें ये गलतियां, वरना रूठ सकते हैं महादेव!

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? भूल से भी न करें ये गलतियां, वरना रूठ सकते हैं महादेव!


    नई दिल्ली । Mahashivratri 2026 Date: भगवान शिव की आराधना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन भक्त उपवास रखकर शिवलिंग का विधि-विधान से अभिषेक और पूजा करते हैं. कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई शिव पूजा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन भगवान शिव को क्या चढ़ाना शुभ माना जाता है और किन चीजों को चढ़ाने से बचना चाहिए.
    महादेव को क्या अर्पित करें?
    शिवजी को सादगी प्रिय है. यदि आप पूरी श्रद्धा से ये चीजें अर्पित करते हैं, तो आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं.बेलपत्र: महादेव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है. ध्यान रखें कि बेलपत्र कटा-फटा न हो और उसमें तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी हों.धतूरा और भांग: ये चीजें शिवजी को नकारात्मकता दूर करने के प्रतीक के रूप में चढ़ाई जाती हैं.कच्चा दूध और गंगाजल: शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए शुद्ध कच्चा दूध और गंगाजल सबसे उत्तम माना जाता है.चंदन: शिवजी को सफेद चंदन का तिलक लगाएं. इससे मन को शांति मिलती है
    अक्षत (चावल): पूजा में साबुत चावल का प्रयोग करें. टूटे हुए चावल खंडित कभी न चढ़ाएं भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें !केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था.तुलसी दल: भगवान शिव ने जालंधर असुर का वध किया था, जिसकी पत्नी वृंदा (तुलसी) थी. इसलिए तुलसी शिव पूजा में नहीं चढ़ाई जाती.सिंदूर या कुमकुम: महादेव वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए लगाती हैं.शंख से जल: शिवजी ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, इसलिए उनकी पूजा में शंख वर्जित माना जाता है.
    पूजा के दौरान न करें ये गलतियां
    कभी भी खंडित शिवलिंग की पूजा न करें. हालांकि, नर्मदेश्वर शिवलिंग को अपवाद माना जाता है. जल चढ़ाने के लिए तांबे का पात्र श्रेष्ठ है, लेकिन तांबे के बर्तन में दूध डालकर अभिषेक नहीं करना चाहिए. दूध के लिए चांदी या स्टील के बर्तन का प्रयोग करें. शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. हमेशा आधी परिक्रमा करें और जहां से जल बाहर निकलता है (जलाधारी), उसे कभी न लांघें.

    महाशिवरात्रि व्रत का धार्मिक महत्व
    हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है. यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन शिवभक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत और पूजा करते हैं. महाशिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
    मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यह व्रत आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार,जो भक्त सच्चे मन से महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अविवाहित लोगों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और विवाहित लोगों के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.
  • जनकपुरी में बाइक सवार गहरे गड्ढे में गिरा, मौत, दिल्ली सरकार ने जांच के आदेश दिए..

    जनकपुरी में बाइक सवार गहरे गड्ढे में गिरा, मौत, दिल्ली सरकार ने जांच के आदेश दिए..


    नई दिल्ली । दिल्ली के जनकपुरी इलाके में गुरुवार रात एक बाइक सवार युवक गहरे गड्ढे में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। युवक पालम से जनकपुरी की ओर आ रहा था तभी सड़क पर बने गड्ढे में गिरा। घटना के बाद इलाके में लोगों में आक्रोश फैल गया।

    स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि गड्ढा काफी समय से खुला हुआ था और इसे दिल्ली जल बोर्ड ने खोदा था। लोगों का कहना है कि नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया और लापरवाही जारी रही। युवक पालम से जनकपुरी की तरफ आ रहा था और वह सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे में गिर गया। बताया जा रहा है कि युवक गंभीर रूप से घायल होने के कारण पूरी रात वहीं फंसा रहा जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

    दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया:
    दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि घटना की गंभीर जांच की जाएगी। इसके लिए एक कमेटी गठित की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी प्रकार की लापरवाही या कमी पाई जाती है तो ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

    AAP का आरोप:
    दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि एक मासूम बाइक सवार गहरे गड्ढे में गिरकर रातभर फंसा रहा और उसकी मौत हो गई लेकिन दिल्ली की बीजेपी सरकार ने इससे कोई सबक नहीं लिया। वे रोज झूठ बोलते हैं।

    पिछला मामला:
    हाल ही में नोएडा के सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की सड़क पर गहरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। इस मामले में प्रशासन की लापरवाही सामने आई थी। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटा दिया और एक जूनियर इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।

  • कवि प्रदीप : शब्दों से राष्ट्रभावना जगाने वाले अमर गीतकार (शरद जोशी, रतलाम)

    कवि प्रदीप : शब्दों से राष्ट्रभावना जगाने वाले अमर गीतकार (शरद जोशी, रतलाम)


    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म संगीत और हिंदी काव्य जगत में कवि प्रदीप का नाम अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता है। वे उन विरले रचनाकारों में से थे, जिनके शब्द केवल गीत नहीं बने, बल्कि राष्ट्र की आत्मा की आवाज़ बने।

    6 फ़रवरी 1915 को मध्यप्रदेश के उज्जैन ज़िले के बड़नगर में जन्मे कवि प्रदीप का वास्तविक नाम रामचंद्र नारायण द्विवेदी था। बचपन से ही उनमें काव्य प्रतिभा के स्पष्ट संकेत दिखाई देने लगे थे। उनकी साहित्यिक क्षमता से प्रभावित होकर महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उन्हें प्रदीप उपनाम दिया-जो आगे चलकर उनकी स्थायी पहचान बना।

    कवि प्रदीप के जीवन का एक महत्वपूर्ण और अपेक्षाकृत कम चर्चित पक्ष रतलाम से जुड़ा है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रतलाम में उनके ननिहाल में हुई। यहाँ वे अपने नाना कामदार रामलाल जी जोशी के सान्निध्य में रहे, प्रदीप जी रिश्ते में लेखक के ताऊ थे।
    रतलाम की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना ने उनके विचारों को गहराई प्रदान की।

    बड़नगर के विद्यालय में अध्ययन के दौरान वे उस समय के मेधावी विद्यार्थियों में गिने जाते थे। उल्लेखनीय है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी उसी विद्यालय में उनके सहपाठी रहे-जो इस शैक्षणिक परिवेश की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।

    कवि प्रदीप ने हिंदी सिनेमा को केवल गीत नहीं दिए, बल्कि जनभावनाओं को स्वर दिया। उन्होंने लगभग 85 से अधिक फिल्मों के लिए 1800 से ज्यादा गीत लिखे और कई गीत स्वयं भी गाए। उनकी रचनाएँ मनोरंजन से आगे बढ़कर समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति चेतना जगाने का कार्य करती रहीं।

    जागृति’ नास्तिक किस्मत जय संतोषी’ माँ हरिश्चंद्र तारामती पैगाम संबंध जैसी फिल्मों में उनके गीतों ने भक्ति, नैतिकता और सामाजिक जागरण को नई ऊँचाइयाँ दीं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लिखे गए
    चल चल रे नौजवान और दूर हटो ऐ दुनिया वालों, हिंदुस्तान हमारा है देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान  जैसे गीतों ने देशवासियों के हृदय में राष्ट्रप्रेम की ज्वाला प्रज्ज्वलित की।

    1962 के भारत-चीन युद्ध के पश्चात रचित ऐ मेरे वतन के लोगों भारतीय इतिहास का अमर गीत बन गया। जब इस गीत को लता मंगेशकर ने स्वर दिया, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी भावुक होकर आँसू नहीं रोक सके। यह गीत आज भी शहीदों के बलिदान का जीवंत स्मारक है।

    कवि प्रदीप समाज की पीड़ा और नैतिक पतन के भी संवेदनशील कवि थे।
    देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान जैसा गीत समाज के आत्ममंथन का सशक्त दस्तावेज़ है। उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता थी-सरल शब्दों में गहन भावों की अभिव्यक्ति।

    उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें अनेक सम्मानों से नवाज़ा गया, जिनमें भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्रमुख है11 दिसंबर 1998 को वे इस दुनिया से विदा हो गए, किंतु उनके गीत आज भी जीवित हैं। हर राष्ट्रीय पर्व, सांस्कृतिक आयोजन और भावनात्मक अवसर पर उनके शब्द गूंजते हैं।

    कवि प्रदीप की सांस्कृतिक विरासत आज भी उनके परिवार के माध्यम से जीवंत है। उनके दो बेटियां थी सरगम और मितुल परिवार में अब अकेली रह गई पुत्री मितुल प्रदीप मुंबई के विले पार्ले क्षेत्र में तूलिका आर्ट्स सेंटर के माध्यम से फाइन आर्ट्स की कक्षाएँ संचालित कर रही हैं। वे चित्रकला के माध्यम से नई पीढ़ी को कला, संवेदना और सृजनशीलता का संस्कार दे रही हैं-यह उनके पिता की सांस्कृतिक चेतना की ही निरंतरता है।कवि प्रदीप केवल एक गीतकार नहीं थे, बल्कि वे राष्ट्रभावना, भक्ति और सामाजिक चेतना के अमर स्वर थे। उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी।

  • UP Panchayat Election 2026: यूपी पंचायत चुनाव लेकर बड़ी खबर आई सामने, अब राज्य आयोग ने जारी किया ये खास आदेश

    UP Panchayat Election 2026: यूपी पंचायत चुनाव लेकर बड़ी खबर आई सामने, अब राज्य आयोग ने जारी किया ये खास आदेश


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं. जिसके तहत जिला निर्वाचन अधिकारियो को सूचनाओं में विसंगतियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं. चुनाव आयोग के आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं.  राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इस संबंध में सभी जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत एवं नगरीय निकाय को जानकारी दे दी है. जिसमें पंचायती राज द्वारा उपलब्ध कराए गए सदस्य ग्राम पंचायत एवं सदस्य क्षेत्र पंचायत के आंकड़ों में अंतर मिला है. इसलिए आयोग ने इसे पोर्टल पर ठीक करने का निर्देश दिया है.

    चुनाव आयोग ने दिए निर्देश

    जिला निर्वाचन अधिकारी के ये कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. जिसमें ग्राम पंचायत, सदस्य क्षेत्र पंचायत विवरण का मिलान करने को कहा गया है. आयोग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सदस्य ग्राम पंचायत, प्रधान ग्राम पंचायत, सदस्य क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के परिसीमन के बाद सूचना उपलब्ध कराई गई है.  आयोग ने निदेशक को निर्देश दिए हैं कि पंचायती राज द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना से आयोग के पोर्टल पर जनपदों द्वारा फ़ीड की गई सदस्य ग्राम पंचायत एवं सदस्य क्षेत्र पंचायत की सूचना में भिन्नता पाई गई है. इसलिए इस सूचना का ग्राम पंचायत की सूचना को मिलान करते हुए आयोग के पोर्टल पर शुद्ध किया जाए.

    ग्राम पंचायत डाटा में मिली अशुद्धता
    चुनाव आयोग ने साफ़ कहा कि डाटा की शुद्धता निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुचारू संचालन के लिए जरूरी है. इसलिए जल्द से जल्द ये सूचनाओं के विवरण का सत्यापन कर पोर्टल पर सही विवरण दर्ज कराया जाए. बता दें उत्तर प्रदेश में जल्द ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने जा रहे हैं, जिसे लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है. कयास लग रहे है कि इस साल अप्रैल-मई में ये चुनाव कराए जा सकते हैं, चुनाव की ये पूरी प्रक्रिया दो महीने में पूरी हो जाएगी.

  • Punjab: जालंधर में AAP नेता लक्की ओबेरॉय की गोली मार कर हत्या, गुरुद्वारे के बाहर निकलते समय हुआ हमला

    Punjab: जालंधर में AAP नेता लक्की ओबेरॉय की गोली मार कर हत्या, गुरुद्वारे के बाहर निकलते समय हुआ हमला


    नई दिल्ली ।पंजाब के जालंधर में आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता लक्की ओबेरॉय की 6 फरवरी की सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई. यह सनसनीखेज वारदात मॉडल टाउन इलाके में स्थित एक गुरुद्वारे के बाहर उस समय हुईजब लक्की ओबेरॉय अरदास के बाद बाहर निकलकर अपनी कार में बैठने वाले थे. तभी पहले से घात लगाए बैठे 2 अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गयाजहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अचानक हुई इस फायरिंग से इलाके में अफरा-तफरी मच गई. गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे. घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मोटरसाइकिल पर सवार होकर मौके से फरार हो गए.
    पुलिल कर रही है जांच
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी गई है. रुद्वारे और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही हैताकि हमलावरों की पहचान की जा सके कि कौन लोग थे और लक्की को क्यों निशाना बनाया गया. इस हत्या के बाद पुलिस अपनी जांच का दायरा कई पहलुओं तक बढ़ा रही है. पुरानी रंजिश से लेकर किसी बदमाश गैंग द्वारा वारदात को अंजाम देने या जिम्मेदारी लेने के एंगल तकहर संभावित कारण की गहन जांच की जा रही है.

    आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बची- कांग्रेस

    पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने राज्य में कानून-व्यवस्था की विफलता के लिए आम आदमी पार्टीसरकार को जिम्मेदार ठहराया है. हत्या की खबर सामने आते ही बाजवा ने एक्स पर पोस्ट कर कहाजालंधर के एक गुरुद्वारे के बाहर आप नेता लकी ओबेरॉय की दिनदहाड़े हुई चौंकाने वाली हत्या ने इस भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है. अगर सत्ताधारी दल के नेता ही सुरक्षित नहीं हैंतो आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बची है? उन्होंने आगे सवाल कियापंजाब आज भयगिरोह हिंसा और प्रशासनिक गतिरोध की चपेट में हैजबकि AAP सरकार जनसंपर्क और बहानेबाजी में व्यस्त है. मुख्यमंत्री भगवंत मान को जवाब देना होगाइस पूर्ण व्यवस्था के पतन के लिए कौन जिम्मेदार है?