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  • खेतों में ड्रोन तकनीक उपयोग, 2500 एकड़ में स्प्रे कर फसलों का किया उपचार

    खेतों में ड्रोन तकनीक उपयोग, 2500 एकड़ में स्प्रे कर फसलों का किया उपचार

    राजगढ़। कलेक्टर डॉ. गिरीशकुमार मिश्रा के निर्देशन में परंपरागत खेती के तौर-तरीकों को पीछे छोड़ते हुए राजगढ़ जिले के किसानों ने आधुनिक कृषि की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। अंकुरण फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी मऊ ने जिले में पहली बार ड्रोन तकनीक का उपयोग कर 2500 एकड़ भूमि पर फसलों का उपचार (स्प्रे) कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

    कंपनी के संचालक श्याम राजपूत ने बताया कि कृषि ड्रोन का उपयोग केवल एक नवाचार नही, बल्कि किसानों की बड़ी समस्याओं का समाधान है। इससे समय की बचत के साथ पूरी फसल में एक समान दवा का छिड़काव होता है, जिससे बर्बादी रुकती है। घने क्षेत्रों में भी स्प्रे संभव है,जहां हस्तचालित पंप के साथ जाना मुश्किल था। छिड़काव के दौरान किसानों को जहरीले जीवों और कीटनाशकों के सीधे शारीरिक संपर्क से होने वाले खतरों से सुरक्षा मिली है।

    कंपनी के तकनीकी ऑपरेटर नीरज राजपूत ने बताया कि रबी सीजन में टीम ने 3 अत्याधुनिक ड्रोन्स की मदद से सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों को कवर किया है, जिसमें 2500 एकड़ का यह सफर तो महज एक शुरुआत है, हमारा लक्ष्य अगले साल दस हजार एकड़ तक पहुंचना है।वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सारंगपुर राजेश राजपूत ने बताया कि कृषि ड्रोन तकनीक का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन उत्साहजनक है। खेतों में ड्रोन से फसलों पर छिड़काव के काफी सकारात्मक और प्रभावी परिणाम देखने को मिल रहे है। इससे न केवल कीटनाशकों का सटीक उपयोग सुनिश्चित हो रहा है, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है।

    उपसंचालक कृषि सचिन जैन का कहना है कि राजगढ़ जिले में ड्रोन तकनीक के माध्यम से किया जा रहा यह नवाचार कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति ला रहा है। तकनीक के इस समावेश से निश्चित ही हमारे जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे है।शासन की मंशा के अनुरूप यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।

  • इटारसी में कार नहर में गिरी, 3 की मौत: युवक फंसे रहे कार में, विंडो तोड़ते रहे, देखते ही देखते डूब गए

    इटारसी में कार नहर में गिरी, 3 की मौत: युवक फंसे रहे कार में, विंडो तोड़ते रहे, देखते ही देखते डूब गए


    इटारसी/पथरोटा मार्ग शुक्रवार देर रात एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पथरोटा की बड़ी नहर की रेलिंग तोड़ते हुए गहरे पानी में गिर गई कार में सवार तीन युवक मौके पर ही मृत पाए गए। मृतकों की पहचान रैसलपुर निवासी 30 वर्षीय लकी पटेल पिता भवानी शंकर पटेल जो कार चला रहा था, 26 वर्षीय शिवम तिवारी पिता महेश तिवारी निवासी खीर पानी और 19 वर्षीय अभय उर्फ अभि चौहान पिता राकेश चौहान, जय प्रकाश नगर, पुरानी इटारसी के रूप में हुई।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इटारसी की ओर से आ रही ग्रे रंग की कार अचानक पुल की रेलिंग तोड़ती हुई सीधे नहर में समा गई। एसडीआरएफ प्लाटून कमांडर अमृता दीक्षित ने बताया कि कार सवार युवक विंडो खोलने और कांच तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, साथ ही चिल्ला भी रहे थे, लेकिन कार के लॉक होने की वजह से वे गहरे पानी में डूब गए।

    हादसा देख स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। एक स्थानीय युवक ने नहर में कूदकर जान की परवाह किए बिना बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण सफल नहीं हो सका। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और करीब ढाई घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कार को नहर से बाहर निकाला गया। कार के दरवाजे खोलते ही तीनों युवक मृत पाए गए।

    एसडीआरएफ ने बताया कि कार में युवक संघर्ष करते रहे, कांच तोड़ने के निशान मिले, लेकिन वे बाहर नहीं निकल सके। परिजनों के अनुसार तीनों सिवनी मालवा गए थे और लौटते समय यह हादसा हुआ। मृतक शिवम तिवारी के पिता महेश ने बताया कि सुबह करीब छह बजे हादसे की सूचना मिली थी। अभय चौहान के पिता राकेश ने बताया कि रात में बेटे से फोन पर बात हुई थी, अभय ने कहा था कि कार से लौट रहा है और मां से खाने को लेकर बात की थी। अभय परिवार का इकलौता बेटा था।

    लकी पटेल की मां वैष्णो देवी यात्रा पर हैं। लकी के पिता पहले ही देहांत हो चुके हैं और बड़े भाई की कुछ साल पहले नर्मदा में डूबने से मौत हो गई थी। लकी के घर में दो बहनें हैं, एक शादीशुदा और दूसरी अविवाहित शुभांगी।हादसे ने इटारसी और आसपास के इलाकों में मातम मचा दिया है। ग्रामीणों और परिवारवालों में गहरी शोक की लहर है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच में लगी है और सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर रही है। का हिस्सा बन गए हैं

  • पीएम मोदी ने बजट चर्चा में दिग्विजय सिंह के भाषण पर साधा चुटकी भरा तंज कहा– क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे?

    पीएम मोदी ने बजट चर्चा में दिग्विजय सिंह के भाषण पर साधा चुटकी भरा तंज कहा– क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे?


    भोपाल :संसद में बजट पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्विजय सिंह के भाषण पर चुटकी ली और मुस्कुराते हुए कहा कि क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे प्रधानमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि मैं कल एक माननीय सदस्य को सुन रहा था जो अपने आप को राजा कहलाने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन वही आर्थिक असमानता की चर्चा कर रहे थे मोदी ने सवालिया अंदाज में कहा बताइए जो खुद को राजा माने और आर्थिक असमानता की बात करे क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे दिग्विजय सिंह ने अपने भाषण में सामाजिक सौहार्द और समरसता बिगड़ने के साथ आर्थिक असमानता बढ़ने की चिंता जताई थी

    संसद में विपक्ष के लगभग हर सांसद ने सरकार को घेरने की कोशिश की लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के जवाब ने ‘राजा साहब’ को सीधे तंज की जद में ला दिया

    इसी बीच लाड़ली बहनों पर विवादित बयान देने वाले मंत्री करण सिंह वर्मा ने सफाई दी और कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा उन्होंने केवल लाड़ली बहनों को भोजन पर आमंत्रित किया था उन्होंने अपने बयान पर खेद भी जताया विपक्ष ने इसकी कड़ी निंदा की वहीं इस तरह के बयान भाजपा सरकार के लिए किरकिरी का सबब बन सकते हैं इससे पहले भी मंत्री विजय शाह को लाड़ली बहनों के बयान को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा था

    सियासी हलचल श्योपुर में तब और तेज हुई जब भाजपा पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय के घर चोरी की घटना सामने आई चोरों ने एसी का पंखा ही चोरी कर लिया कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने इस घटना को लेकर खुशी जाहिर की और कहा ऐसे चोर को पुरस्कार मिलना चाहिए उन्होंने तंज कसा कि जब सत्ताधारी दल के नेता के घर में सुरक्षा नहीं है तो आम आदमी की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है

    भोपाल में मीडिया के सवालों से बचते हुए मंत्री विजय शाह सीधे कार में बैठे और शीशा चढ़ाकर रवाना हो गए उनका कर्नल सोफिया पर दिया गया विवादित बयान 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए तय है मंत्री की चुप्पी सियासी गलियारों में चर्चाओं को और बढ़ा रही है लोग कह रहे हैं इसे ही कहते हैं दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक कर पीता है वहीं कुछ का कहना है कहीं पार्टी ने मंत्री की जुबान पर ताला तो नहीं लगा दिया

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि संसद की बहस और सियासी बयानबाज़ियों ने एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा दी है पीएम के तंज से लेकर मंत्री के बयान और मीडिया से बचने की कवायद तक ये सब राजनीतिक हलचल

  • 9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला

    9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला


    भोपाल! श्रम विभाग ने 9 फरवरी को ‘बंधक श्रम उन्मूलन दिवस’ पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा।

    पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियान

    बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी ‘बंधक श्रम उन्मूलन दिवस’ से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष ‘वेदा पहल’ की शुरुआत की है।

    कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदु

    पहला: बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।

    दूसरा: बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा।

    तीसरा: नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।

    चौथा: राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी।

    श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

  • MP के 11 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे, कटनी सबसे ठंडा, नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस से मावठे की संभावना

    MP के 11 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे, कटनी सबसे ठंडा, नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस से मावठे की संभावना


    भोपाल। फरवरी में ठंड ने मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में फिर से दस्तक दी है। बीती रात ग्वालियर खजुराहो सहित 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया गया। कटनी शहडोल और छतरपुर इस ठंड की सूची में सबसे आगे हैं। शुक्रवार को तेज सर्द हवाओं ने ठंड का असर बढ़ाया, और शनिवार को भी सर्दी का असर जारी रहेगा।

    मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से प्रदेश में हाल के दिनों में ओले और बारिश का दौर चला। घना कोहरा भी प्रभावित रहा। सिस्टम कमजोर होने के बाद पिछले दो दिनों से ठंड और बढ़ गई है। सबसे ठंडा शहर कटनी रहा जहां करौंदी में तापमान 5.6 डिग्री तक गिरा। शहडोल छतरपुर और खजुराहो भी बेहद ठंडे रहे जबकि रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़ और उमरिया में 8 डिग्री न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव और पचमढ़ी में 8.6 डिग्री सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री और मंडला तथा सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रहा।

    पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, यहां न्यूनतम 8.7 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 10.2 डिग्री, इंदौर में 10.9 डिग्री, जबलपुर में 11.6 डिग्री और उज्जैन में 12.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। शुक्रवार को तेज सर्द हवाओं ने ठंड और बढ़ा दी और शनिवार को भी सर्दी का असर जारी रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के चलते हाल के दिनों में प्रदेश में ओले और बारिश हुई थी साथ ही घना कोहरा भी रहा। सिस्टम कमजोर होने के बाद पिछले दो दिनों से ठंड बढ़ी है। 8 फरवरी को हल्का कोहरा रहेगा, बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन ठंड का असर बढ़ेगा। 9 फरवरी को कई जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा रहेगा बारिश की संभावना नहीं है।

    पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिससे जल्द ही प्रदेश में मौसम प्रभावित होगा। 10 फरवरी से मावठा गिरने का अनुमान है, यानी अगले चार दिन प्रदेश में बारिश या ओले नहीं पड़ने की संभावना है। उज्जैन में सुबह का तापमान 13 डिग्री था और हल्की ठंड महसूस हुई। धूप निकलने के साथ ही दिन का अधिकतम तापमान 29 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। ग्वालियर में रातें अभी भी ठंडी हैं, जबकि दिन में धूप के कारण गर्मी का एहसास होता है। इंदौर में शनिवार सुबह ठंड का असर साफ नजर आया, हल्का कोहरा और ठंडी हवाओं ने ठंड बढ़ा दी। ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग के जिलों में सुबह हल्का से मध्यम कोहरा देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार धूप निकलने के बाद ठंड से कुछ राहत मिलेगी।

  • बांग्लादेश चुनाव में भारत और अल्पसंख्यक सबसे बड़े मुद्दे, मैनिफेस्टो में क्या कह रहीं प्रमुख पार्टियां?

    बांग्लादेश चुनाव में भारत और अल्पसंख्यक सबसे बड़े मुद्दे, मैनिफेस्टो में क्या कह रहीं प्रमुख पार्टियां?

    NP) और जमात-ए-इस्लामी के मैनिफेस्टो में भारत और हिंदू समुदाय को लेकर अपनाए गए रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

    भारत को लेकर पार्टियों की सोच

    17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान ने BNP की कमान संभालते ही “बांग्लादेश फर्स्ट” को अपना मूल मंत्र बताया है। पार्टी का घोषणापत्र भी इसी नीति के इर्द-गिर्द घूमता है। तारिक रहमान का कहना है कि बांग्लादेश न तो किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा और न ही अपने मामलों में दखल स्वीकार करेगा। उनका चर्चित नारा— “न दिल्ली, न पिंडी, पहले बांग्लादेश”—भारत के लिए खास मायने रखता है।

    यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब यूनुस सरकार के दौरान बांग्लादेश की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों को लेकर सवाल उठे थे। माना जा रहा है कि तारिक रहमान इस दिशा में अलग संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।

    दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने अपने घोषणापत्र में भारत के साथ शांतिपूर्ण, मित्रवत और सहयोगी संबंधों की वकालत की है। चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के दस्तावेज़ में पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं है। हालांकि जमात ने मुस्लिम देशों को प्राथमिकता देने की बात कही है और अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान व कनाडा जैसे पश्चिमी देशों से भी रिश्ते मजबूत करने का संकेत दिया है।

    हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर क्या वादे?

    हिंदुओं की सुरक्षा इस चुनाव का एक अहम मुद्दा बन चुकी है। BNP ने अपने घोषणापत्र में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की जान, संपत्ति और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू करने का वादा किया है। इसके अलावा सभी धर्मों के धार्मिक नेताओं के लिए भत्ते और कल्याणकारी योजनाओं की भी बात कही गई है।

    वहीं जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट और ठोस वादा नहीं किया है। पार्टी ने केवल धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने की बात अपने मैनिफेस्टो में शामिल की है।

    कुल मिलाकर, इस चुनाव में भारत से रिश्ते और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा ऐसे मुद्दे हैं, जो बांग्लादेश की आने वाली राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
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  • शाही मंडप नहीं, अपना आशियाना बना यादगार; शादी के खर्च से खरीदा घर, कपल की हर तरफ तारीफ

    शाही मंडप नहीं, अपना आशियाना बना यादगार; शादी के खर्च से खरीदा घर, कपल की हर तरफ तारीफ

    नई दिल्ली। आज के दौर में शादियों को भव्य बनाने की होड़ किसी से छिपी नहीं है। डेस्टिनेशन वेडिंग, लाखों का सजावटी मंडप, डिजाइनर कपड़े और सैकड़ों मेहमानों की दावत—इन सब पर लोग अपनी जमा-पूंजी तक खर्च कर देते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा कपल चर्चा में है, जिसने इस चलन से हटकर मिसाल पेश की है।

    इस जोड़े ने एक दिन के शोर-शराबे और दिखावे पर लाखों रुपये खर्च करने की बजाय उसी रकम से अपना घर खरीदने का फैसला किया। यही नहीं, दोनों ने अपने नए घर में ही बेहद सादगी से शादी रचाई, जो अब लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।

    नए घर में लिए सात फेरे

    वायरल हो रहे वीडियो में दिखाया गया है कि कपल ने अपने नए घर के लिविंग रूम को ही मंडप बना लिया। परिवार के चुनिंदा सदस्य और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में रस्में निभाई गईं। वीडियो में दूल्हे के भाई ने बताया कि महंगी शादी की बजाय घर में निवेश करने का फैसला सोच-समझकर लिया गया था।

    यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस फैसले की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर सराहना

    यूजर्स इस शादी को “समझदारी भरा कदम” बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि दिखावे के लिए कर्ज में डूबने से बेहतर है भविष्य की मजबूती पर ध्यान देना। कुछ यूजर्स ने लिखा कि समाज की परवाह किए बिना ऐसा फैसला लेना वाकई काबिले-तारीफ है। वहीं, कई लोग इसे आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

    इस कपल ने साबित कर दिया कि शादी की यादें खर्च से नहीं, फैसलों की समझदारी से खास बनती हैं।

  • वैभव सूर्यवंशी पर भारी पड़ा BCCI का नियम: 14 साल की उम्र में ही खत्म हुआ अंडर-19 वर्ल्ड कप का सफर

    वैभव सूर्यवंशी पर भारी पड़ा BCCI का नियम: 14 साल की उम्र में ही खत्म हुआ अंडर-19 वर्ल्ड कप का सफर


    नई दिल्ली ।अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की तूफानी पारी खेलकर भारत को छठा खिताब दिलाने वाले वैभव सूर्यवंशी आज हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी की जुबान पर हैं। पूरे टूर्नामेंट में 439 रन और रिकॉर्ड 30 छक्के जड़ने वाले वैभव की उम्र अभी सिर्फ 14 साल है। कायदे से देखा जाए तो 27 मार्च को 15 साल के होने जा रहे वैभव 2028 और उसके बाद के भी अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने की उम्र रखते हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI का एक नियम उनके इस मौके को छीन चुका है।

    बीसीसीआई का वो सख्त नियम क्या है? दरअसल, बीसीसीआई ने साल 2016 में जूनियर क्रिकेट के ढांचे में एक बड़ा बदलाव किया था। इस नियम के तहत कोई भी भारतीय खिलाड़ी अपने करियर में केवल एक ही बार अंडर-19 वर्ल्ड कप में हिस्सा ले सकता है। बोर्ड का मानना है कि ऐसा करने से नए खिलाड़ियों को मौका मिलता है और टैलेंट पूल का दायरा बढ़ता है। यदि किसी खिलाड़ी को एक से ज्यादा बार मौका दिया जाए, तो वह नए टैलेंट का रास्ता रोकता है। यही कारण है कि वैभव सूर्यवंशी अब भविष्य में दोबारा कभी भी भारत की अंडर-19 विश्व कप टीम की जर्सी नहीं पहन पाएंगे।

    इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं ये नाम 2016 से पहले नियम अलग थे। उस समय कई खिलाड़ियों ने अपनी उम्र के आधार पर एक से अधिक बार इस टूर्नामेंट में भाग लिया था। भारतीय टीम के मौजूदा सितारे रवींद्र जडेजा, सरफराज खान, आवेश खान, विजय जोल और रिकी भुई ऐसे नाम हैं जिन्होंने एक से ज्यादा बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला है। सरफराज खान ने तो दो वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर काफी सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन वैभव अब इस फेहरिस्त में शामिल नहीं हो सकेंगे।

    आगे क्या है वैभव का रास्ता? भले ही वैभव अब अंडर-19 वर्ल्ड कप न खेल पाएं, लेकिन उनकी इस उम्र में ऐसी परिपक्व बल्लेबाजी ने उनके लिए टीम इंडिया के सीनियर स्क्वॉड के दरवाजे खोल दिए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीसीसीआई अब उन्हें सीधे घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) और इंडिया-ए के दौरों पर भेजकर सीनियर टीम के लिए तैयार करेगा। वैभव ने जो तबाही 14 साल की उम्र में मचाई है, उसने साबित कर दिया है कि वह ‘लंबी रेस के घोड़े’ हैं और अब उनका लक्ष्य सीधे नीली जर्सी पहनकर सीनियर वर्ल्ड कप में तिरंगा लहराना होगा।

  • विक्रांत मैसी की अनोखी पेरेंटिंग: बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट पर नहीं लिखा कोई धर्म, बोले- 'यह मेरा अधिकार'

    विक्रांत मैसी की अनोखी पेरेंटिंग: बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट पर नहीं लिखा कोई धर्म, बोले- 'यह मेरा अधिकार'


    नई दिल्ली । फिल्म ’12वीं फेल’ के जरिए हर घर में अपनी पहचान बनाने वाले विक्रांत मैसी इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ और पेरेंटिंग स्टाइल को लेकर सुर्खियों में हैं। विक्रांत और उनकी पत्नी शीतल ठाकुर के घर पिछले साल 7 फरवरी 2024 को बेटे ‘वरदान’ का जन्म हुआ था। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में विक्रांत ने साझा किया कि उन्होंने अपने बेटे के कानूनी दस्तावेजों में धर्म की पहचान को अनिवार्य नहीं बनाया है।

    मल्टीकल्चरल परिवार और कड़वे अनुभव टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में विक्रांत ने बताया कि वह एक ऐसे परिवार से आते हैं जहाँ विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का संगम है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में धार्मिक तनाव और उसके नकारात्मक पहलुओं को बहुत करीब से देखा है। शायद यही वजह है कि वह अपने बेटे को बचपन से ही किसी खास धार्मिक लेबल में बांधना नहीं चाहते थे। विक्रांत ने स्पष्ट किया कि उनके इस फैसले का उद्देश्य अपने बेटे को उन तनावों से बचाना है जो अक्सर धर्म के नाम पर समाज में पैदा होते हैं।

    भारत सरकार के नियमों का हवाला विक्रांत ने अपने फैसले का बचाव करते हुए भारतीय कानून और सिस्टम की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हमें यह विकल्प देती है कि हम आधिकारिक दस्तावेजों में धर्म का उल्लेख करना चाहते हैं या नहीं। उन्होंने इसकी तुलना उस नियम से की जिसके तहत अब सिंगल महिलाओं को पासपोर्ट पर पति का नाम देना अनिवार्य नहीं है। विक्रांत के मुताबिक सरकार द्वारा दी गई इस आजादी का इस्तेमाल करना उनका अधिकार है और उन्होंने वही किया जो उन्हें अपने बच्चे के भविष्य के लिए सही लगा।

    बेटे को दी चुनने की आजादी एक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि वह चाहते हैं कि वरदान जब बड़ा हो जाए और दुनिया को समझने लगे तो वह खुद तय करे कि उसे किस विचारधारा या धर्म का पालन करना है। विक्रांत और शीतल की यह सोच आधुनिक भारत की एक नई तस्वीर पेश करती है जहाँ माता-पिता बच्चों पर अपनी पहचान थोपने के बजाय उन्हें स्वतंत्र व्यक्तित्व बनाने की ओर अग्रसर हैं। विक्रांत की इस सादगी और प्रगतिशील सोच की सराहना उनके चाहने वाले जमकर कर रहे हैं।

  • जापान में 'पुष्पा' का फायर: टॉप 10 में बनाई जगह, लेकिन नंबर 1 की बादशाहत अब भी बरकरार

    जापान में 'पुष्पा' का फायर: टॉप 10 में बनाई जगह, लेकिन नंबर 1 की बादशाहत अब भी बरकरार


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सीमाओं को लांघते हुए ‘आइकन स्टार’ अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा 2’ ने जापान के बॉक्स ऑफिस पर अपनी धमक दर्ज कराई है। 16 जनवरी को जापान में ‘पुष्पा कुनरिन’ शीर्षक के साथ रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआती धीमी रफ्तार के बाद अब अपनी गति पकड़ ली है। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का पहला भाग जापान के सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हुआ था, बावजूद इसके दूसरे पार्ट को जापानी दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

    धूम 3 को पछाड़ा, अब ‘रोबोट’ पर नजर व्यापार विश्लेषक वेबसाइट सैक्निक के आंकड़ों के अनुसार, पुष्पा 2 ने अपनी रिलीज के महज 14 दिनों में ₹6.06 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। इस कमाई के साथ ही इसने आमिर खान की फिल्म ‘धूम 3’ (₹6.03 करोड़) को पीछे छोड़ते हुए टॉप 10 की लिस्ट में 10वां स्थान हासिल किया है। अब पुष्पा 2 का अगला लक्ष्य रजनीकांत की फिल्म ‘एंथिरन’ (रोबोट) का रिकॉर्ड तोड़ना है, जिसने वहां ₹6.33 करोड़ का कारोबार किया था। फिल्म को टोक्यो और ओसाका जैसे प्रमुख शहरों में बेहतरीन ‘वर्ड ऑफ माउथ’ का फायदा मिल रहा है।

    RRR का सिंहासन है सबसे ऊपर जापान में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता की बात करें तो ‘RRR’ अब भी निर्विवाद रूप से पहले नंबर पर बनी हुई है। एसएस राजामौली की इस मास्टरपीस ने जापान में ₹139.79 करोड़ (¥2.42 बिलियन) की ऐतिहासिक कमाई की थी, जो किसी भी अन्य भारतीय फिल्म के लिए एक सपना जैसा है। दूसरे नंबर पर सुपरस्टार रजनीकांत की ‘मुत्थु’ है, जिसने दो दशकों तक अपनी बादशाहत बनाए रखी थी।

    जापान की टॉप 5 भारतीय फिल्में (कलेक्शन के आधार पर): | रैंक | फिल्म | कमाई लगभग | | :— | :— | :— | | 1 | RRR | ₹139.79 करोड़ | | 2 | मुत्थु | ₹23.39 करोड़ | | 3 | बाहुबली 2 | ₹17.61 करोड़ | | 4 | 3 इडियट्स | ₹9.81 करोड़ | | 5 | इंग्लिश विंग्लिश | ₹9.24 करोड़ |

    अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना ने जापान जाकर इस फिल्म का जमकर प्रचार किया था, जिसका असर अब आंकड़ों में दिख रहा है। हालांकि ‘RRR’ तक पहुंचना मुश्किल लग रहा है, लेकिन ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘पुष्पा 2’ जापान में अपनी लंबी पारी खेल सकती है और जल्द ही 7वें या 8वें पायदान तक पहुंच सकती है।