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  • माइग्रेन का दर्द बढ़ा सकती हैं रोजमर्रा की ये पांच गलतियां, समय रहते आदतों में बदलाव से मिल सकती है राहत

    माइग्रेन का दर्द बढ़ा सकती हैं रोजमर्रा की ये पांच गलतियां, समय रहते आदतों में बदलाव से मिल सकती है राहत


    नई दिल्ली ।
    भागदौड़ भरी जीवनशैली में सिरदर्द की समस्या आम हो गई है, लेकिन बार बार होने वाला तेज सिरदर्द हमेशा सामान्य नहीं माना जा सकता। कुछ लोगों में सिरदर्द के साथ रोशनी और तेज आवाज से परेशानी, जी मिचलाना, कमजोरी या असहजता जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति को माइग्रेन से जोड़ा जाता है। यह केवल सिर में दर्द की समस्या नहीं है, बल्कि तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक जटिल स्थिति है।

    माइग्रेन से परेशान लोगों में दर्द की तीव्रता और इसके कारण अलग अलग हो सकते हैं। हालांकि, रोजमर्रा की कुछ आदतें कई लोगों में इसके लक्षणों को बढ़ाने का काम कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने और व्यक्तिगत ट्रिगर को पहचानने से माइग्रेन की परेशानी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    शरीर में पानी की कमी माइग्रेन के दौरान परेशानी बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हो सकती है। पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं मिलने पर थकान, चक्कर और सिर में भारीपन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। इसलिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है। पानी के अलावा नारियल पानी, सूप और पानी से भरपूर फल भी शरीर में तरल पदार्थ की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं।

    नींद की अनदेखी करना भी माइग्रेन से परेशान लोगों के लिए समस्या बढ़ा सकता है। कम सोना या रोज अलग अलग समय पर सोने की आदत शरीर की प्राकृतिक दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सोने और जागने का समय नियमित रखना बेहतर माना जाता है। वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर सात से नौ घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है, हालांकि जरूरत व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकती है।

    चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन का असर भी हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। सीमित मात्रा में कैफीन कुछ लोगों को अलग तरह से प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका अधिक सेवन कुछ लोगों में माइग्रेन को बढ़ा सकता है। इसी तरह शराब भी कई लोगों के लिए सिरदर्द का ट्रिगर बन सकती है। यदि किसी विशेष पेय के सेवन के बाद बार बार माइग्रेन शुरू होता है, तो उस व्यक्तिगत ट्रिगर से बचना उपयोगी हो सकता है।

    लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी की स्क्रीन देखते रहना भी कुछ लोगों में सिरदर्द की परेशानी बढ़ा सकता है। खासकर माइग्रेन के दौरान तेज रोशनी और स्क्रीन की चमक असहजता बढ़ा सकती है। ऐसे में स्क्रीन की चमक कम रखना, बीच बीच में आंखों को आराम देना और जरूरत पड़ने पर शांत तथा कम रोशनी वाले वातावरण में रहना मददगार हो सकता है।

    खाने के समय में लगातार बदलाव और लंबे समय तक खाली पेट रहना भी कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए भोजन को बहुत देर तक टालने के बजाय नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन करना बेहतर है। आहार में फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व शामिल किए जा सकते हैं।

    बहुत अधिक तला हुआ भोजन, अत्यधिक मसालेदार चीजें या कोई ऐसा खाद्य पदार्थ जिससे व्यक्ति को बार बार परेशानी होती है, उससे दूरी रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, सभी लोगों के लिए माइग्रेन के ट्रिगर समान नहीं होते। इसलिए किस भोजन या आदत के बाद समस्या बढ़ती है, इसका ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

    माइग्रेन को नियंत्रित करने के लिए केवल किसी एक आदत में बदलाव पर्याप्त नहीं हो सकता। नियमित नींद, पर्याप्त पानी, समय पर भोजन, संतुलित जीवनशैली और व्यक्तिगत ट्रिगर की पहचान मिलकर बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। यदि सिरदर्द बार बार हो रहा हो, बहुत तेज हो या उसके साथ असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

  • UP: श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा का आज शंखनाद, साध्वी ऋतंभरा समेत 12 संतों को पुलिस का रेड कार्ड नोटिस

    UP: श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा का आज शंखनाद, साध्वी ऋतंभरा समेत 12 संतों को पुलिस का रेड कार्ड नोटिस


    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा की घोषणा का रविवार को मथुरा में शंखनाद होगा। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में हवन-यज्ञ और शिला पूजन के साथ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसे लेकर देशभर से साधु-संतों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। 13 अखाड़ों के संतों और विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों को कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है।

    कार्यक्रम में एक हजार से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए साध्वी ऋतंभरा, कथावाचक देवकीनंदन महाराज और महंत फूलडोल बिहारीदास महाराज समेत 12 साधु-संतों को रेड कार्ड नोटिस जारी किया है।

    आश्रम से बाहर नहीं निकलेगी कारसेवा
    चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 4 जुलाई को अयोध्या में हुए श्रीराम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर समर्थन मांगा था।

    स्वामी सच्चिदानंद ने पहले कहा था कि 9 अगस्त को कारसेवा की विधिवत घोषणा की जाएगी। शुरुआत में यह संभावना जताई जा रही थी कि कार्यक्रम के बाद कारसेवक आश्रम से बाहर निकलेंगे, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि रविवार को सभी कार्यक्रम आश्रम परिसर में ही होंगे। उन्होंने बताया कि साधु-संत आश्रम में ही आगे की रणनीति पर मंथन करेंगे और कारसेवा की अगली दिशा को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

    बंसीपहाड़पुर से पहुंची गुलाबी पत्थरों की पहली खेप
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से भरतपुर के बंसीपहाड़पुर से गुलाबी पत्थर मंगाए जा रहे हैं। करीब 50 हजार घन फीट पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इनमें से 350 घन फीट पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार देर रात चित्रगुप्त पीठ पहुंच चुकी है।

    इन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण में भी किया गया है। कारसेवा के शंखनाद के बाद इन पत्थरों पर नक्काशी का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए ओडिशा से 20 कारीगरों को बुलाया गया है। कारीगर पत्थरों पर ब्रज संस्कृति और राधा-कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े चित्र उकेरेंगे। उनके पहुंचते ही नक्काशी का काम शुरू होने की तैयारी है।

    12 संतों को नोटिस, सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र
    स्वामी सच्चिदानंद के मुताबिक कारसेवा के ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन की ओर से उन्हें और अन्य संतों को रेड कार्ड नोटिस दिए जा रहे हैं। इनमें साध्वी ऋतंभरा, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, महंत फूलडोल बिहारीदास महाराज, श्रीचरणदास महाराज, सौरभ गौड़, सीतारामदास महाराज, संत अभिषेक ब्रह्मचारी, मोहिनी बिहारी शरण महाराज और महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज समेत 12 संत शामिल हैं।

    नोटिस में पुलिस ने धार्मिक भावनाओं की आड़ में समाज को उत्तेजित करने और कारसेवा के नाम पर सोशल मीडिया पर वीडियो या पोस्टर साझा किए जाने का हवाला दिया है। प्रशासन ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान और आसपास ऐसी गतिविधियों से बचने को कहा है, जिनसे सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उल्लंघन की स्थिति में वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

    पत्थरों की दूसरी खेप फिलहाल रोकी गई
    स्वामी सच्चिदानंद ने बताया कि गुलाबी पत्थरों की दूसरी खेप फिलहाल रोक दी गई है। रविवार के कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिला पूजन और कारसेवा के शंखनाद पर जोर रहेगा। इसके बाद आश्रम में मौजूद साधु-संत आपस में विचार-विमर्श करेंगे और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए प्रस्तावित कारसेवा की आगे की दिशा तय करेंगे।

  • बारिश में आलू-प्याज के पराठे से हैं बोर, तो बनाएं क्रिस्पी चीज़ कॉर्न पराठा, स्वाद ऐसा कि बार-बार खाने का करेगा मन

    बारिश में आलू-प्याज के पराठे से हैं बोर, तो बनाएं क्रिस्पी चीज़ कॉर्न पराठा, स्वाद ऐसा कि बार-बार खाने का करेगा मन

    नई दिल्ली । बारिश के मौसम में गरमा-गरम और कुछ अलग खाने का मन अक्सर करता है। अगर रोजाना आलू, प्याज या गोभी के पराठे खाकर आप भी बोर हो चुके हैं, तो इस मॉनसून चीज़ कॉर्न पराठा जरूर ट्राई कर सकते हैं। स्वीट कॉर्न, चीज़ और मसालों से तैयार यह पराठा स्वाद में बेहद लाजवाब होता है। बाहर से कुरकुरा और अंदर से चीज़ी होने की वजह से यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आ सकता है। इसे सुबह के नाश्ते के अलावा शाम की चाय के साथ भी परोसा जा सकता है।

    चीज़ कॉर्न पराठा बनाने के लिए सबसे पहले इसकी फिलिंग तैयार करनी होगी। इसके लिए करीब एक कप उबले हुए स्वीट कॉर्न लें। इसमें एक कप कद्दूकस किया हुआ चीज़, बारीक कटा हरा धनिया, दो बारीक कटी या कुटी हुई लहसुन की कलियां और स्वाद के अनुसार हरी मिर्च डालें। इसके बाद इसमें चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर, थोड़ी काली मिर्च और ऑरेगैनो मिलाएं। नमक डालते समय थोड़ी सावधानी रखें, क्योंकि चीज़ में पहले से नमक मौजूद हो सकता है। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर एक तरफ रख दें।

    अब पराठे के लिए आटा तैयार करें। गेहूं के आटे में थोड़ा नमक और एक चम्मच तेल डालकर मिलाएं। धीरे-धीरे पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें। आटे को कुछ देर ढककर रखने से यह अच्छी तरह सेट हो जाएगा और पराठा बेलने में आसानी होगी। इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें।

    एक लोई लेकर उसे थोड़ा बेलें और बीच में तैयार चीज़ कॉर्न की फिलिंग रखें। अब आटे के किनारों को चारों तरफ से उठाकर फिलिंग को अच्छी तरह बंद कर दें। भरी हुई लोई को हल्के हाथों से बेलकर पराठे का आकार दें। पराठा बेलते समय ज्यादा दबाव न डालें, वरना चीज़ और कॉर्न की फिलिंग बाहर निकल सकती है।

    अब तवे को अच्छी तरह गर्म करें और उस पर पराठा डाल दें। इसे मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सेंकें। जब पराठा हल्का सुनहरा होने लगे, तब ऊपर से थोड़ा घी या तेल लगाकर दोनों तरफ से कुरकुरा होने तक पकाएं। मध्यम आंच पर पकाने से पराठा अंदर तक अच्छी तरह सिकेगा और बाहर से भी क्रिस्पी बनेगा।

    गरमा-गरम चीज़ कॉर्न पराठे को हरी चटनी, दही या टोमैटो सॉस के साथ परोसा जा सकता है। बारिश के मौसम में एक कप गर्म चाय के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। पराठा बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कॉर्न की फिलिंग में अतिरिक्त पानी न हो। गीली फिलिंग होने पर पराठा बेलना मुश्किल हो सकता है और वह तवे पर फट भी सकता है। इसके अलावा चीज़ की मात्रा संतुलित रखें और पराठे को तेज आंच के बजाय मध्यम आंच पर पकाएं।

    मॉनसून में खाद्य सामग्री की ताजगी पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है। स्वीट कॉर्न, चीज़ और अन्य सामग्री ताजा होनी चाहिए। अगर आप रोज के पारंपरिक पराठों से कुछ अलग और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो चीज़ कॉर्न पराठा एक आसान विकल्प है। इसकी मसालेदार कॉर्न फिलिंग और पिघला हुआ चीज़ इसे खास स्वाद देते हैं।

  • सऊदी-पाक-तुर्की की डिफेंस डील में बड़ा ट्विस्ट, ईरान पर तुर्की ने साफ किया अपना रुख

    सऊदी-पाक-तुर्की की डिफेंस डील में बड़ा ट्विस्ट, ईरान पर तुर्की ने साफ किया अपना रुख


    नई दिल्ली। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हाल में हुए रक्षा समझौते को लेकर तस्वीर अब कुछ बदलती नजर आ रही है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता ईरान या किसी अन्य खास देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है। उनके बयान के बाद इस डिफेंस डील के उद्देश्य और आपसी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।

    शुक्रवार को सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते को लेकर यह बात सामने आई थी कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में इसे तीनों पर हमला माना जाएगा।

    ‘इस्लामिक NATO’ के नाम से हो रही चर्चा
    यह समझौता तेल संपन्न सऊदी अरब, परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना वाले तुर्की को एक सुरक्षा ढांचे में लाता है। तुर्की का रक्षा उद्योग तेजी से विकसित हुआ है और उसके ड्रोन भी दुनियाभर में चर्चा में रहे हैं। इसी वजह से तीनों सुन्नी बहुल देशों के इस गठजोड़ की तुलना NATO से की जा रही है और इसे कई जगह ‘इस्लामिक NATO’ कहा जा रहा है। माना जा रहा था कि क्षेत्र में ईरान से जुड़े सुरक्षा तनाव के बीच यह समझौता सऊदी अरब के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।

    तुर्की ने कहा- किसी खास देश को दुश्मन नहीं माना
    अब तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु एजेंसी को दिए इंटरव्यू में इस समझौते को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि तीनों देश किसी विशेष राष्ट्र को तब तक अपना दुश्मन नहीं मानते, जब तक वह उनके खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई न करे। फिदान के मुताबिक, समझौते में किसी साझा खतरे को लेकर किसी खास देश का नाम निर्धारित नहीं किया गया है। उनका कहना था कि जो देश तुर्की पर हमला नहीं करता, उसे तुर्की अपना निशाना नहीं मानता।

    NATO के अनुच्छेद 5 से कैसे अलग है व्यवस्था?
    फिदान ने समझौते में आपसी रक्षा से जुड़ी व्यवस्था को तकनीकी तौर पर NATO के अनुच्छेद 5 के समान बताया। NATO के अनुच्छेद 5 के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने को सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है। हालांकि, तुर्की के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस नए समझौते में सैन्य मदद अपने आप सक्रिय नहीं होगी। यदि किसी सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे औपचारिक तौर पर अन्य दो देशों से सहायता मांगनी होगी। इसके बाद खतरे की स्थिति और उसके स्तर के आधार पर सहायता का स्वरूप तय किया जा सकता है। इसमें खुफिया जानकारी साझा करना, लॉजिस्टिक सहायता देना या जरूरत पड़ने पर सैन्य टुकड़ियां भेजना शामिल हो सकता है।

    दूसरे देशों को भी जोड़ने की तैयारी
    फिदान ने यह भी बताया कि कुछ अन्य देशों ने इस समझौते का हिस्सा बनने में रुचि दिखाई है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उम्मीद जताई कि मिस्र अगले चरण में इस व्यवस्था से जुड़ सकता है।

    समझौते के तहत तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री तथा उनके सैन्य प्रमुख नियमित रूप से समिति की बैठक करेंगे। इसके अलावा तीनों देशों के बीच समन्वय के लिए एक सचिवालय स्थापित किया जाएगा, जिसका मुख्यालय सऊदी अरब में होगा। इस तरह मक्का में हुआ यह रक्षा समझौता भले ही तीन देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन तुर्की के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि इसका लक्ष्य किसी एक देश, खासकर ईरान के खिलाफ मोर्चा बनाना नहीं है।

  • 9 अगस्त को कामिका एकादशी, अनाज से लेकर दीपदान तक इन चीजों का दान करने से मिलते हैं शुभ फल

    9 अगस्त को कामिका एकादशी, अनाज से लेकर दीपदान तक इन चीजों का दान करने से मिलते हैं शुभ फल


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही एकादशी तिथि पर जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी बताई गई है। मान्यता है कि श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के संयोग बनते हैं।

    कामिका एकादशी का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है। दान को भी इस दिन की धार्मिक साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। हालांकि दान हमेशा अपनी क्षमता और जरूरतमंद व्यक्ति की आवश्यकता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। कामिका एकादशी पर किन वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है, इसे लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

    कामिका एकादशी पर छाता दान करना भी शुभ माना जाता है। श्रावण मास में बारिश का मौसम रहता है और ऐसे में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को छाता उपलब्ध कराना उपयोगी दान माना जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन छाता दान करने से सकारात्मकता और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। खासतौर पर जरूरतमंद लोगों की सहायता को इस अवसर पर महत्वपूर्ण माना गया है।

    एकादशी के अवसर पर अन्न दान को भी विशेष महत्व दिया जाता है। कामिका एकादशी पर सात प्रकार के अनाज का दान करने की परंपरा बताई गई है। इसमें गेहूं, बाजरा और जौ सहित अन्य अनाज शामिल किए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अन्न दान को महत्वपूर्ण दान माना गया है। कहा जाता है कि जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज उपलब्ध कराने से घर में अन्न और धन की कमी नहीं रहती। इस तरह का दान समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद का माध्यम भी बन सकता है।

    कामिका एकादशी पर मौसमी फलों का दान भी किया जा सकता है। अपनी क्षमता के अनुसार केला, सेब, नाशपाती और अनार जैसे फल जरूरतमंदों को दिए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में फल दान को शुभ माना गया है और इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहने की कामना की जाती है। किसी जरूरतमंद की सहायता करने से सेवा और परोपकार की भावना को भी बढ़ावा मिलता है।

    इसके अलावा कामिका एकादशी पर दीपदान का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दिन और रात में दीपदान करने की परंपरा भी बताई गई है। मान्यता है कि दीपदान से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। कामिका एकादशी पर किए जाने वाले इन धार्मिक कार्यों का उद्देश्य केवल शुभ फल की कामना करना ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, सेवा और परोपकार की भावना को मजबूत करना भी है।

  • सुबह सूर्यदेव को जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है? जानिए लोटे से लेकर मंत्र तक के जरूरी नियम

    सुबह सूर्यदेव को जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है? जानिए लोटे से लेकर मंत्र तक के जरूरी नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है और नियमित रूप से उनकी पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि सुबह के समय सूर्यदेव को श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल सम्मान प्रतिष्ठा पिता स्वास्थ्य और नेतृत्व क्षमता का कारक माना गया है। यही कारण है कि सूर्यदेव की उपासना को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि सूर्य को जल चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है ताकि पूजा विधि पूर्ण और व्यवस्थित तरीके से की जा सके।

    सूर्यदेव को जल चढ़ाने के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। कोशिश करनी चाहिए कि सूर्योदय के आसपास स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाएं। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिए। जल चढ़ाने के लिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। तांबे का लोटा उपलब्ध न हो तो स्वच्छ पात्र का प्रयोग किया जा सकता है लेकिन पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाला पात्र साफ होना चाहिए।

    सूर्यदेव को जल अर्पित करते समय लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर धीरे धीरे जल छोड़ना चाहिए। इस दौरान सूर्य की ओर सीधे देखने के बजाय जल की धार के बीच से सूर्यदेव के दर्शन करना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। जल चढ़ाते समय मन को शांत रखना चाहिए और किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पूजा में श्रद्धा और एकाग्रता को महत्वपूर्ण माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यदेव को जल में लाल फूल अक्षत या रोली मिलाकर भी अर्पित किया जा सकता है। हालांकि जल में ऐसी कोई सामग्री नहीं डालनी चाहिए जिससे पर्यावरण या आसपास की जगह को नुकसान पहुंचे। पूजा के दौरान आदित्य देव का ध्यान करते हुए सूर्य मंत्र का जाप किया जा सकता है। ॐ सूर्याय नमः या ॐ आदित्याय नमः जैसे सरल मंत्रों का जाप श्रद्धा के साथ किया जा सकता है।

    सूर्यदेव को जल चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना और जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रार्थना करनी चाहिए। मान्यता है कि नियमित सूर्य उपासना व्यक्ति में अनुशासन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा दे सकती है। इसके साथ ही सुबह की प्राकृतिक रोशनी में कुछ समय बिताना दिनचर्या के लिए भी उपयोगी माना जाता है।

    सूर्यदेव को जल चढ़ाते समय कुछ सावधानियां भी रखनी चाहिए। बिना स्नान किए पूजा करने से बचना चाहिए और गंदे या अस्वच्छ पात्र से जल अर्पित नहीं करना चाहिए। जल चढ़ाते समय मन में नकारात्मक विचार रखने के बजाय शांत और सकारात्मक भाव बनाए रखना चाहिए। पूजा को केवल किसी लाभ की इच्छा से करने के बजाय श्रद्धा और आस्था के साथ करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार का दिन विशेष माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव को जल अर्पित करने के साथ जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। हालांकि किसी विशेष ग्रह दोष या स्वास्थ्य समस्या के लिए किए जाने वाले उपायों को अपनाने से पहले योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ या चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहता है।

    इस तरह सूर्यदेव को जल चढ़ाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई नहीं है बल्कि यह सुबह जल्दी उठने स्नान करने प्रार्थना करने और दिन की शुरुआत सकारात्मक भाव से करने की एक अनुशासित दिनचर्या भी बन सकती है। श्रद्धा स्वच्छता और सही विधि के साथ की गई सूर्य उपासना मन में शांति और सकारात्मकता का भाव पैदा कर सकती है।

  • दिल्ली में बारिश से बढ़ा यमुना का जलस्तर, असम में बाढ़ से 98 मौतें, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

    दिल्ली में बारिश से बढ़ा यमुना का जलस्तर, असम में बाढ़ से 98 मौतें, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय है। रविवार को दिल्ली समेत उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिणी राज्यों के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना है। राजधानी में पिछले आठ दिनों से बारिश का दौर जारी है, जिसके चलते यमुना नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, असम में बाढ़ के कारण अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश और केरल में भी बारिश से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

    कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तरी ओडिशा के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह सिस्टम 8 अगस्त को विकसित हुआ और अब पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

    रविवार को छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा असम, मेघालय, बिहार, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, केरल, तटीय कर्नाटक, लक्षद्वीप, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भी बारिश हो सकती है।

    दिल्ली में हल्की बारिश, यमुना का जलस्तर बढ़ा
    राजधानी दिल्ली में लगातार बारिश के चलते यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार को दिल्ली में हल्की बारिश का अनुमान है। हरियाणा और पंजाब में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। लगातार हो रही बारिश के कारण राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है।

    ओडिशा-छत्तीसगढ़ में ऑरेंज अलर्ट
    IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी ओडिशा के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा में भारी बारिश की संभावना है। इसे देखते हुए ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    हिमालयी राज्यों में भी अगले दिनों बारिश
    जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमालयी इलाकों में अगले छह से सात दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। दक्षिण भारत में भी मानसून सक्रिय रहेगा। रविवार को तटीय कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप और माहे में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में पूर्वी, मध्य, उत्तरी और दक्षिणी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है।

  • आसमान से शतरंज की बिसात जैसा दिखता है बार्सिलोना, 45 डिग्री कटे कोनों ने बनाया शहर को खास

    आसमान से शतरंज की बिसात जैसा दिखता है बार्सिलोना, 45 डिग्री कटे कोनों ने बनाया शहर को खास


    नई दिल्ली। दुनिया में कई शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए मशहूर हैं, लेकिन स्पेन का बार्सिलोना अपनी अनोखी शहरी बनावट के कारण आसमान से ही अलग नजर आता है। ऊपर से देखने पर यहां की सड़कें और इमारतें किसी विशाल चेसबोर्ड या कंप्यूटर चिप की तरह दिखाई देती हैं। शहर के अधिकांश ब्लॉक एक जैसे आकार के हैं और उनकी सड़कों का पैटर्न बेहद व्यवस्थित है। खास बात यह है कि इन ब्लॉकों के कोने 90 डिग्री के बजाय 45 डिग्री पर काटे गए हैं।

    इसी डिजाइन को ऑक्टोगोनल ब्लॉक कहा जाता है। इस अनोखी शहरी योजना का श्रेय इंजीनियर इल्डेफॉन्स सेर्डा को जाता है, जिन्होंने 1850 के दशक में इसका खाका तैयार किया था। उस दौर में कारों का इस्तेमाल भी शुरू नहीं हुआ था, लेकिन सेर्डा ने भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजना बनाई, जिसमें चौराहों पर पर्याप्त खुली जगह और वाहनों के लिए बेहतर दृश्यता मिल सके।

    ट्रैफिक के साथ हवा और रोशनी का भी रखा ध्यान
    45 डिग्री पर कटे कोनों ने चौराहों को अपेक्षाकृत खुला बनाया। इससे हवा के आवागमन में मदद मिली और वाहनों को मोड़ने के लिए बेहतर विजिबिलिटी मिली। यही डिजाइन आज बार्सिलोना की पहचान बन चुका है।

    हालांकि, 19वीं सदी के मध्य में बार्सिलोना की तस्वीर बिल्कुल अलग थी। शहर मध्यकालीन दीवारों के भीतर सीमित था और आबादी का घनत्व बेहद ज्यादा था। संकरी गलियों में धूप और हवा तक ठीक से नहीं पहुंचती थी। गंदगी, प्रदूषण और हैजा जैसी महामारियों ने हालात बेहद खराब कर दिए थे। उस समय आम लोगों की औसत उम्र घटकर करीब 30 से 35 साल रह गई थी।

    इसी स्थिति को देखते हुए शहर की पुरानी दीवारों को गिराने का फैसला लिया गया और नए बार्सिलोना की योजना बनाने की जिम्मेदारी इल्डेफॉन्स सेर्डा को मिली।

    हर वर्ग के लिए हवा, धूप और हरियाली का सपना
    सेर्डा केवल इंजीनियर नहीं, बल्कि समाजवादी विचारक भी थे। उनका मानना था कि शहर में रहने वाले अमीर और गरीब सभी लोगों को ताजी हवा, धूप और हरियाली का समान अधिकार मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने शहर को समान आकार के ब्लॉक्स में बांटने की योजना बनाई।

    उनकी मूल योजना में हर ब्लॉक की केवल दो या तीन दिशाओं में इमारतें बनाने और बीच के हिस्से को सार्वजनिक बगीचे या पार्क के तौर पर खाली रखने का प्रस्ताव था। उनका उद्देश्य था कि घर की खिड़की खोलने पर लोगों को कंक्रीट के बजाय हरियाली दिखाई दे। हालांकि, बाद के वर्षों में व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ इन आंतरिक हिस्सों में भी निर्माण होने लगा।

    सेर्डा ने दिया ढांचा, गौडी ने भरी कलात्मक जान
    बार्सिलोना की पहचान सिर्फ इसकी सड़कों और ब्लॉक्स से नहीं बनी। शहर की वास्तुकला को विशिष्ट बनाने में महान आर्किटेक्ट एंतोनी गौडी की भी बड़ी भूमिका रही। सेर्डा ने शहर को व्यवस्थित और गणितीय स्वरूप दिया, जबकि गौडी ने उसमें कला और प्रकृति का रंग भर दिया।

    गौडी कैटलन मॉडर्निज्म के प्रमुख वास्तुकार थे। वे प्रकृति से बेहद प्रभावित थे और उनकी इमारतों में इसका प्रभाव साफ दिखाई देता है। कासा बात्लो की छत ड्रैगन की रीढ़ जैसी नजर आती है, जबकि कासा मिला की बालकनियां समुद्र की लहरों का आभास देती हैं।

    वहीं, शहर के केंद्र में मौजूद सग्रादा फैमिलिया अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसके अंदर के स्तंभ पेड़ों जैसी आकृति देते हैं, जिससे प्रकृति और आध्यात्म का अनोखा मेल दिखाई देता है।

    आज भी पुराने प्लान से तलाश रहा आधुनिक समाधान
    आज बार्सिलोना की आबादी करीब 16.5 लाख है, जबकि पूरे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में 55 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। हर साल एक करोड़ से अधिक पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इतनी बड़ी आबादी और पर्यटकों के बीच प्रदूषण और ट्रैफिक शहर के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

    इन समस्याओं से निपटने के लिए बार्सिलोना प्रशासन सेर्डा की मूल सोच को आधुनिक रूप देकर ‘सुपरब्लॉक्स’ की अवधारणा पर काम कर रहा है। इसमें कई ब्लॉक्स को मिलाकर एक बड़ा सुपरब्लॉक बनाया जाता है और अंदरूनी हिस्सों में वाहनों की आवाजाही सीमित की जाती है।

    गाड़ियों को मुख्य रूप से सुपरब्लॉक की बाहरी सड़कों तक सीमित रखा जाता है, जबकि अंदर पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और बच्चों के लिए जगह विकसित की जा रही है। पार्क और कम्युनिटी सेंटर भी बढ़ाए जा रहे हैं। इस मॉडल से शहर में NO2 प्रदूषण का स्तर 25 प्रतिशत तक कम होने का दावा किया गया है।

    पुरानी विरासत के साथ आधुनिकता का मेल
    बार्सिलोना की खासियत यह भी है कि यहां पुराना और नया साथ-साथ दिखाई देता है। ऐतिहासिक गॉथिक क्वार्टर की 14वीं सदी की संकरी गलियों को संरक्षित रखा गया है, वहीं आधुनिक वित्तीय क्षेत्र में टॉरे ग्लोरीज जैसी बुलेट के आकार की कांच की गगनचुंबी इमारतें शहर के आधुनिक स्वरूप को दर्शाती हैं।

    बार्सिलोना की शहरी योजना और वास्तुकला यह संदेश देती है कि शहर केवल इमारतों और सड़कों का समूह नहीं होता। उसकी डिजाइन में इंसानी जीवन, खुली हवा, रोशनी, हरियाली और मानसिक सुकून को भी जगह मिलनी चाहिए। शायद यही वजह है कि बार्सिलोना को जमीन से देखने पर जितना खूबसूरत अनुभव होता है, आसमान से देखने पर उसकी ज्यामितीय बनावट उतनी ही हैरान करती है।

  • 10 अगस्त को सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत, जानें शिवलिंग पर किन चीजों से अभिषेक करना माना जाता है शुभ

    10 अगस्त को सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत, जानें शिवलिंग पर किन चीजों से अभिषेक करना माना जाता है शुभ

    नई दिल्ली । सावन का दूसरा सोमवार इस बार 10 अगस्त को पड़ रहा है और इसी दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि होने से प्रदोष व्रत का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, जबकि प्रदोष काल में शिव पूजा का अपना महत्व बताया गया है। ऐसे में दोनों अवसरों के एक साथ आने से शिवभक्तों के लिए यह दिन खास माना जा रहा है।

    मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन व्रत रखने और भगवान शिव का विधिपूर्वक पूजन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता की अनुभूति हो सकती है। इस दिन शिवलिंग पर अलग-अलग सामग्री से अभिषेक करने की परंपरा भी रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ विशेष सामग्रियों को अलग-अलग ग्रहों से जोड़ा जाता है और उनके माध्यम से ग्रहों की अनुकूलता की कामना की जाती है।

    सबसे सरल और व्यापक रूप से प्रचलित उपाय शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करना है। पूजा के दौरान स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक परंपरा में जलाभिषेक को शांति और शिव आराधना का सहज माध्यम माना गया है।

    चंद्रमा से संबंधित मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन की कामना के लिए दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने की परंपरा भी बताई जाती है। सावन सोमवार पर शुद्ध दूध अर्पित करते समय भक्त भगवान शिव से मन की स्थिरता और जीवन में सौम्यता बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं। यह पूरी तरह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित उपाय है।

    गुरु और शुक्र की अनुकूलता की कामना के लिए शहद से अभिषेक करने का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं में शहद को मधुरता और शुभता से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इसे वाणी में मधुरता, संबंधों में सौहार्द और पारिवारिक जीवन में सुख की कामना के साथ भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।

    शनि तथा राहु-केतु से जुड़ी बाधाओं की शांति की कामना के लिए काले तिल से अभिषेक करने की परंपरा भी बताई जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में काले तिल का संबंध शनि से माना गया है। हालांकि किसी भी ग्रह की स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर उपाय अलग हो सकते हैं।

    सावन में गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक भी धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। इसे सुख, समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति की धार्मिक भावना से जोड़ा जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस अभिषेक को पूजा का हिस्सा बना सकते हैं।

    10 अगस्त को प्रदोष काल में पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप, बिल्वपत्र अर्पित करना और दीपदान करना भी शिव आराधना का हिस्सा बनाया जा सकता है। सुबह जलाभिषेक और शाम को प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा का पालन किया जा सकता है।

    हालांकि नवग्रह शांति के लिए एक ही उपाय हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। ज्योतिषीय दृष्टि से किसी विशेष ग्रह से जुड़ी परेशानी के लिए जन्मकुंडली में ग्रह की स्थिति, भाव, राशि, दशा और गोचर को देखकर उपाय तय करने की बात कही जाती है। इसलिए धार्मिक उपायों को श्रद्धा और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार अपनाना अधिक उचित माना जाता है।

  • Aaj Ka Rashifal 9 August 2026: कामिका एकादशी पर इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के योग

    Aaj Ka Rashifal 9 August 2026: कामिका एकादशी पर इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के योग


    नई दिल्ली। रविवार 9 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का संयोग बन रहा है। सुबह एकादशी तिथि के बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी। मृगशिरा नक्षत्र दोपहर तक प्रभावी रहेगा और इसके बाद आर्द्रा नक्षत्र का प्रभाव देखने को मिलेगा। चंद्रमा मिथुन राशि में रहेंगे। रविवार होने के कारण सूर्य देव की उपासना के साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन कई राशियों को नौकरी कारोबार और आर्थिक मामलों में लाभ के अवसर मिल सकते हैं जबकि कुछ राशियों को खर्च और स्वास्थ्य के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन मेहनत का सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता रंग लाएगी लेकिन किसी व्यक्ति पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचना होगा। परिवार में किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है इसलिए शांत रहकर बातचीत करें। खर्च बढ़ने से बजट प्रभावित हो सकता है। सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना शुभ रहेगा।

    वृषभ राशि वालों को कामकाज में कुछ अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। जल्दबाजी के बजाय धैर्य से परिस्थितियों को समझना आपके लिए बेहतर रहेगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई में अधिक मेहनत करनी होगी। खानपान को लेकर लापरवाही न करें। भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    मिथुन राशि के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। करियर में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ेंगे। कारोबारियों को अनावश्यक खर्च से बचना चाहिए। आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सावधानी जरूरी होगी। परिवार और सामाजिक जीवन में संतुलन बनाए रखें। जरूरतमंद व्यक्ति को हरी सब्जियां या फल दान करना शुभ रहेगा।

    कर्क राशि वालों के लिए रविवार का दिन खास साबित हो सकता है। पुराने निवेश से लाभ मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है। संपत्ति या कानूनी मामलों में भी राहत मिलने की संभावना है। जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर रहेंगे। कामिका एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों को काम की व्यस्तता के बीच अपने फैसलों में संतुलन बनाए रखना होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मेहनत का लाभ मिल सकता है। परिवार या रिश्तेदारों की ओर से कोई उपहार मिल सकता है। हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ लाभकारी माना जाता है।

    कन्या राशि वालों के लिए काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन स्थितियों में जल्द सुधार के संकेत हैं। कारोबार में सहयोग की कमी महसूस हो सकती है। पारिवारिक जीवन अनुकूल रहेगा और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। मानसिक शांति के लिए आराम और ध्यान पर ध्यान दें। भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना शुभ रहेगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए दिन आर्थिक रूप से अच्छा रह सकता है। वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की सराहना कर सकते हैं और कारोबार में नई योजनाएं लाभ दे सकती हैं। दोस्तों के साथ घूमने का कार्यक्रम बन सकता है। सुख सुविधाओं पर खर्च होने की संभावना है। गाय को रोटी और गुड़ खिलाना शुभ माना जाता है।

    वृश्चिक राशि वालों को रविवार को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। निजी और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। किसी भी मामले में जल्द प्रतिक्रिया देने से बचें। स्वास्थ्य और दिनचर्या पर ध्यान दें। संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ मानसिक मजबूती दे सकता है।

    धनु राशि के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत रहने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को जिम्मेदारियों का अच्छा परिणाम मिल सकता है। परिवार से जुड़ी किसी चिंता का समाधान बातचीत के जरिए हो सकता है। मन की उलझनों को दूर करने के लिए धैर्य रखें। मंदिर में पीले फल या चने की दाल का दान करना शुभ रहेगा।

    मकर राशि वालों को कार्यक्षेत्र में विरोधियों से सतर्क रहने की जरूरत होगी। गुस्से में कोई फैसला लेने से बचें और बजट देखकर ही खर्च करें। पारिवारिक शांति बनाए रखने का प्रयास करें। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

    कुंभ राशि के जातकों को नए प्रोजेक्ट या प्रस्ताव मिल सकते हैं। टीमवर्क से कार्यक्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल होंगे। निजी जीवन की उलझनों को धैर्य से सुलझाने की कोशिश करें। खानपान पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। पीपल के पेड़ में जल अर्पित करना शुभ रहेगा।

    मीन राशि के लिए रविवार सफलता के नए अवसर लेकर आ सकता है। करियर और कारोबार में विस्तार के संकेत हैं। निवेश से लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। जीवनसाथी का सहयोग आपकी परेशानियां कम करेगा। हालांकि स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना शुभ रहेगा।