जांच में क्या सामने आया
क्यों गंभीर माना गया मामला
मंत्रालय का रुख

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क्यों गंभीर माना गया मामला
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पिता का छलका दर्द: ‘कोरोना काल से शुरू हुई थी लत

भोपाल के बैरागढ़ के संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने बैग चेकिंग के दौरान दो बैगों में कुल 311 कछुए पकड़े। आरोपी अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि ढाई हजार रुपए की लालच में वह कछुओं को देवास और इंदौर भेजने के लिए ले जा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को जानकारी दी गई। तुरंत स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग का स्टाफ मौके पर पहुंचा और आरोपी को हिरासत में लिया। आरपीएफ की पूछताछ में यह सामने आया कि रविंद्र कश्यप नामक व्यक्ति ने ढाई हजार रुपए की लालच देकर आरोपी से कछुए तस्करी कराई।
फिलहाल आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 पंजीबद्ध किया गया है। STF मामले की जांच में जुटी है और आरोपी से विस्तार से पूछताछ की जा रही है। आज उसे माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।यह मामला वन्यजीव तस्करी और रेलवे सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है

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क्या है पूरा मामला?
सीरेगांव के सरपंच महेंद्र कुशवाहा का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी पंचायत में विकास कार्य कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों और अन्य विकास परियोजनाओं में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। सरपंच का कहना है कि उन्होंने ग्राम स्तर की समस्याओं के निराकरण के लिए कई बार जनपद पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दर्जनों बार लिखित आवेदन दिए, जनसुनवाई में अपनी बात रखी, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘आश्वासन’ का झुनझुना थमा दिया गया।
सरपंच का दर्द यह है कि एक चुना हुआ जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र की जनता की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
वीडियो संदेश और ‘अंतिम फैसला’
पंचायत भवन में खुद को कैद करने के बाद सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने एक वीडियो जारी किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सरपंच काफी भावुक और व्यथित नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले दो साल से प्रशासन से निवेदन कर रहा हूं कि मुझे काम करने दिया जाए और विकास कार्यों में सहयोग किया जाए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पिछले मंगलवार की जनसुनवाई में भी मैंने गुहार लगाई थी, पर मुझे सिर्फ प्रताड़ना मिली।”
सरपंच ने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि यह उनका ‘अंतिम फैसला’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हुआ, तो वे पंचायत भवन के भीतर ही खुद को आग लगा लेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।
प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
जैसे ही सरपंच के कैद होने और आत्मदाह की चेतावनी की खबर फैली, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का चरम कदम उठाना जिले की कानून-व्यवस्था और छवि के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और तहसील स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सरपंच को समझाने-बुझाने का दौर शुरू हुआ।यह घटना केवल एक सरपंच की नाराजगी भर नहीं है, बल्कि यह उस नौकरशाही की तस्वीर पेश करती है जहाँ एक जनप्रतिनिधि को अपनी आवाज सुनाने के लिए मौत को गले लगाने जैसी धमकी देनी पड़ती है। सीरेगांव की जनता अब इस उम्मीद में है कि शासन उनकी पंचायत की समस्याओं पर ध्यान देगा और सरपंच को न्याय मिलेगा, ताकि गांव में विकास के पहिये फिर से घूम सकें। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन सरपंच को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों में जुटा है।

कैसे हुई मुलाकात?

राष्ट्रीय महासचिव ने राज्यों की इकाई और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर यह निर्देश दिए हैं। इस गाइडलाइन को एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बैठक में तय किया गया था। इसके साथ ही 15 दिन के भीतर जिलों की कार्यकारिणी बनाने का निर्देश भी दिया गया।
मध्य प्रदेश में लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी की परंपरा रही है ताकि अलग-अलग गुटों को संतुलित किया जा सके। लेकिन नई गाइडलाइन आने के बाद कई जिलों में असमंजस्य की स्थिति पैदा हो गई है। 30 जनवरी को मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी की थी, जिसमें गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए।
छिंदवाड़ा जिला कार्यकारिणी में 240 सदस्य बनाए गए हैं जबकि सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी हैं। छोटे जिले मऊगंज में 40 पदाधिकारी हैं। वहीं भोपाल शहर की सूची में 106 और ग्रामीण क्षेत्र की सूची में 85 सदस्य बनाए गए हैं। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद यह लंबी सूची राष्ट्रीय संगठन के निर्देशों के खिलाफ मानी जा रही है और अब कांग्रेस में असमंजस्य की स्थिति बन गई है।सभी जिलों में जल्द ही नए निर्देश के मुताबिक कार्यकारिणी तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई है और संगठन स्तर पर इस पर निगरानी रखी जा रही है।

मामला तब शुरू हुआ जब राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी शादी के बाद हनीमून के लिए शिलॉन्ग, मेघालय गए थे। वहां राजा की लाश मिली थी। इस हत्याकांड में राजा की पत्नी सोनम ही मास्टरमाइंड निकली। शिलॉन्ग पुलिस ने सोनम के अलावा राज कुशवाह आकाश राजपूत आनंद और विशाल को भी गिरफ्तार किया था।
सोनम रघुवंशी हत्या के बाद इंदौर आई थी और एक किराए के फ्लैट में रुकी थी। उस फ्लैट की बिल्डिंग का मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर था और चौकीदार बलवीर अहिरवार कार्यरत थे। शुरुआती जांच में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और आरोप लगाया कि उन्होंने हत्या के बाद कुछ सबूत मिटाने की कोशिश की थी।
लेकिन कोर्ट में पेश की गई दूसरी चार्जशीट और विस्तृत जांच के बाद साफ हुआ कि बिल्डिंग मालिक और चौकीदार का हत्याकांड से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इस फैसले के बाद दोनों को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।राजा रघुवंशी मर्डर केस अब भी सुर्खियों में है क्योंकि इस मामले में प्रमुख आरोपी सोनम रघुवंशी पर केस चल रहा है। इस मामले की जांच और कोर्ट की कार्रवाई पूरे देश की निगाहों में है।