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  • NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ NDA के नए लोकसभा सांसदों की बैठक में इस बार सोशल मीडिया की सक्रियता को खास महत्व दिया गया। बैठक के दौरान सांसदों को उनके पिछले 90 दिनों की सोशल मीडिया गतिविधियों का एक पेज का रिपोर्ट कार्ड सौंपा गया। इसमें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर सांसदों की सक्रियता, पोस्ट की संख्या, लोगों तक पहुंच और प्रतिक्रियाओं से जुड़े आंकड़े शामिल थे। सांसदों से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के साथ अपना संपर्क और मजबूत करने को कहा गया।

    बैठक में प्रधानमंत्री ने NDA के भीतर पुराने और नए सांसदों के बीच समानता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में कोई सांसद 20 साल पुराना हो या 20 दिन पुराना, सभी के लिए बराबर सम्मान है। बैठक में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद NDA के साथ आए कुछ सांसद भी शामिल हुए। इनमें टीएमसी से अलग होकर NCPI में शामिल हुए सांसद और शिवसेना यूबीटी से अलग होकर शिवसेना में आए सांसद भी मौजूद रहे।

    सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड को बैठक की प्रमुख बातों में माना जा रहा है। इसमें सांसदों के पिछले तीन महीनों के डिजिटल प्रदर्शन का आकलन किया गया। रिपोर्ट में एक्स पर सांसद द्वारा की गई पोस्ट की संख्या, उन पोस्ट पर आए इंप्रेशन और कमेंट जैसे आंकड़े दर्ज किए गए। इसी तरह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सांसदों की गतिविधियों और उनकी पहुंच से जुड़े आंकड़े भी रिपोर्ट में शामिल किए गए।

    सांसदों को समझाया गया कि आज के दौर में जनता, खासकर युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसलिए केवल संसद और क्षेत्र में सक्रिय रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नियमित और प्रभावी संवाद जरूरी है। सांसदों को अपनी सोशल मीडिया मौजूदगी को अधिक सक्रिय और जनता से जुड़ा बनाने का सुझाव दिया गया।

    90 दिनों के डेटा को आधार बनाकर तैयार किया गया यह रिपोर्ट कार्ड सांसदों की डिजिटल सक्रियता का तुलनात्मक आकलन करने में भी मदद कर सकता है। पोस्ट की संख्या और इंप्रेशन जैसे आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि सांसद सोशल मीडिया पर कितने सक्रिय हैं और उनकी सामग्री कितने लोगों तक पहुंच रही है। इसके अलावा कमेंट और अन्य प्रतिक्रियाएं जनता की ऑनलाइन भागीदारी का संकेत देती हैं।

    बैठक में सांसदों के स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने और नियमित जांच कराने की सलाह दी। खासतौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के सांसदों को नियमित मेडिकल चेकअप कराने की बात कही गई। योग को लेकर भी उन्होंने सांसदों से सवाल किया और पूछा कि नियमित योग करने वाले कितने सांसद हैं।

    प्रधानमंत्री ने स्थिर सरकार के महत्व का भी उल्लेख किया। बातचीत के दौरान उन्होंने विदेशों में सरकारों के बार-बार बदलने का उदाहरण देते हुए राजनीतिक स्थिरता की जरूरत पर बात की। साथ ही सांसदों को भरोसा दिलाया कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र से जुड़ी कोई समस्या या व्यक्तिगत स्तर पर कोई कठिनाई हो तो वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

    बैठक में पूर्वी भारत के विकास को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में कोलकाता, ओडिशा और भुवनेश्वर का ऐसा कायाकल्प होगा जिसकी अभी कल्पना करना भी मुश्किल है। इस तरह बैठक में डिजिटल सक्रियता, स्वास्थ्य, राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय विकास जैसे कई मुद्दों पर सांसदों को दिशा देने की कोशिश की गई।

  • अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिले सुवेंदु अधिकारी, बोले- छोटा ऑपरेशन हुआ, अब पूरी तरह ठीक हैं अभिनेता

    अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिले सुवेंदु अधिकारी, बोले- छोटा ऑपरेशन हुआ, अब पूरी तरह ठीक हैं अभिनेता

    नई दिल्ली । अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी के नेता मिथुन चक्रवर्ती के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई खबर के बाद उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत में चिंता का माहौल बन गया था। इसी बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के एक निजी अस्पताल पहुंचकर मिथुन चक्रवर्ती से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हाल जाना। मुलाकात के बाद सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती का पिछली रात एक छोटा ऑपरेशन हुआ था। उन्होंने कहा कि अभिनेता ने खुद उन्हें और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद सामिक भट्टाचार्य को ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी थी। हालांकि, मिथुन चक्रवर्ती नहीं चाहते थे कि उनके स्वास्थ्य से जुड़ी यह जानकारी सार्वजनिक की जाए।

    सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक मिथुन चक्रवर्ती अब पूरी तरह ठीक हैं और उनकी हालत सामान्य है। उन्होंने अभिनेता के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। मिथुन चक्रवर्ती के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब सामने आई जानकारी के बाद उन्हें राहत मिली है। बताया गया है कि ऑपरेशन छोटा था और इसके बाद उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। अस्पताल में डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

    मिथुन चक्रवर्ती भारतीय सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने हिंदी और बंगाली फिल्मों में लंबे समय तक अपनी अलग पहचान बनाए रखी है। उन्होंने वर्ष 1976 में मशहूर निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म ‘मृगया’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। पहली ही फिल्म में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्होंने बंगाली और हिंदी सिनेमा में लगातार काम किया और अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई।

    वर्ष 1978 में आई बंगाली फिल्म ‘नदी थेके सागरे’ से उन्हें लोकप्रियता मिली। इसके बाद ‘सुरक्षा’, ‘तराना’, ‘हम पांच’ और ‘हम से बढ़कर कौन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया। हालांकि वर्ष 1982 में रिलीज हुई ‘डिस्को डांसर’ उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। फिल्म की सफलता ने मिथुन को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय बना दिया। उनके डांस और अभिनय की अलग शैली ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।

    इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती ने ‘शौकीन’, ‘अशांति’, ‘कसम पैदा करने वाले की’, ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘गुलामी’, ‘स्वर्ग से सुंदर’, ‘डांस डांस’, ‘प्यार का मंदिर’, ‘स्वामी विवेकानंद’, ‘गुरु’, ‘गोलमाल 3’, ‘हाउसफुल 2’, ‘ओएमजी-ओह माय गॉड!’, ‘किक’, ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ समेत कई फिल्मों में काम किया। अपने लंबे फिल्मी करियर के दौरान उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। फिलहाल उनके छोटे ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य सामान्य बताए जाने से प्रशंसकों को राहत मिली है और सभी उनके जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • SBI Q1 Results: पहली तिमाही में मुनाफा 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121 करोड़ रुपये, एनपीए में भी बड़ी गिरावट दर्ज

    SBI Q1 Results: पहली तिमाही में मुनाफा 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121 करोड़ रुपये, एनपीए में भी बड़ी गिरावट दर्ज

    नई दिल्ली । भारतीय स्टेट बैंक ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121.22 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2026 की समान तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा 19,160.44 करोड़ रुपये रहा था। मुनाफे में वृद्धि के साथ बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया है।

    बैंक की ब्याज से होने वाली आय में भी पहली तिमाही के दौरान अच्छी वृद्धि रही। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में ब्याज आय सालाना आधार पर 8.5 प्रतिशत बढ़कर 1,27,896.46 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आय 1,17,830.28 करोड़ रुपये रही थी।

    ब्याज आय के साथ अन्य आय को जोड़ने पर बैंक की कुल आय भी बढ़ी। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कुल आय 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1,43,819.15 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले इसी अवधि में एसबीआई की कुल आय 1,35,341.56 करोड़ रुपये थी।

    बैंक के खर्च में भी इस दौरान वृद्धि हुई। पहली तिमाही में एसबीआई का कुल खर्च 5.2 प्रतिशत बढ़कर 1,10,289.97 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा 1,04,797.09 करोड़ रुपये था। खर्च बढ़ने के बावजूद बैंक ने अपने मुनाफे में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की।

    एसबीआई की नेटवर्थ में भी तिमाही आधार पर उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के अंत में बैंक की नेटवर्थ 4,95,244.32 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 4,08,108.34 करोड़ रुपये थी। इससे बैंक की पूंजीगत स्थिति में मजबूती का संकेत मिलता है।

    बैंक के प्रदर्शन में सबसे अहम सुधार एनपीए के मोर्चे पर देखने को मिला। एसबीआई का ग्रॉस एनपीए वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के 1.83 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 1.47 प्रतिशत रह गया। यानी खराब ऋणों के अनुपात में स्पष्ट कमी दर्ज की गई।

    इसी तरह बैंक का नेट एनपीए भी घटा है। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 0.47 प्रतिशत रहा नेट एनपीए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घटकर 0.38 प्रतिशत हो गया। ग्रॉस और नेट एनपीए में गिरावट बैंक की ऋण परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार का संकेत देती है।

    एसबीआई के डेट-टू-इक्विटी रेश्यो में भी सुधार दर्ज हुआ। पहली तिमाही में यह अनुपात 0.54 रहा, जबकि वित्त वर्ष 2026 की समान तिमाही में यह 0.65 था। अनुपात में कमी बैंक की वित्तीय संरचना में आए सुधार को दर्शाती है।

    तिमाही नतीजों के बाद शेयर बाजार में भी एसबीआई के शेयर में तेजी देखी गई। दोपहर 2:30 बजे बैंक का शेयर 3.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,119 रुपये पर कारोबार कर रहा था। मजबूत मुनाफे, बढ़ी ब्याज आय और एनपीए में गिरावट ने बैंक के तिमाही प्रदर्शन को मजबूती दी है।

  • कचरे से ऊर्जा तक बड़ा बदलाव, गोबरधन योजना से सीबीजी उत्पादन दस गुना बढ़ाने और आयात निर्भरता घटाने की तैयारी

    कचरे से ऊर्जा तक बड़ा बदलाव, गोबरधन योजना से सीबीजी उत्पादन दस गुना बढ़ाने और आयात निर्भरता घटाने की तैयारी


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार की नई गोबरधन यानी राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार के अनुसार, योजना के जरिए देश में कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जाएगा। इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने का अनुमान है।

    सरकार का कहना है कि योजना अगले दस वर्षों में सीबीजी उत्पादन को करीब दस गुना बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही निजी निवेश को आकर्षित करने, जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल और सर्कुलर बायोइकोनॉमी को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इस क्षेत्र से राष्ट्रीय जीडीपी में 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक के योगदान की उम्मीद जताई गई है।

    योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रोजगार सृजन भी है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे से सीबीजी उत्पादन बढ़ने पर लगभग 1.5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। संयंत्रों के संचालन के अलावा कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, जैविक खाद उत्पादन और कचरा प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ने की संभावना है।

    गोबरधन योजना के तहत तैयार होने वाली स्वदेशी गैस जीवाश्म ईंधन की जगह इस्तेमाल की जा सकेगी। अनुमान है कि इसके जरिए करीब एक करोड़ मीट्रिक टन जीवाश्म ईंधन की खपत को प्रतिस्थापित किया जा सकता है। इससे ऊर्जा आयात पर दबाव कम होने के साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।

    जैविक कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने पर 40 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है। इसके अलावा करीब 250 मिलियन मीट्रिक टन जैविक उर्वरक के उत्पादन का अनुमान है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है।

    सीबीजी उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने गैस खरीद की गारंटी से जुड़ा ढांचा तैयार किया है। सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की प्रशासित कीमत निर्धारित की गई है। परियोजनाओं को क्षमता के आधार पर प्रति टन प्रतिदिन 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता देने का प्रावधान है। एमएसएमई इकाइयों को 85 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी का लाभ भी दिया जाएगा।

    सीबीजी रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समान होती है और इसे मौजूदा गैस वितरण नेटवर्क में बड़े बदलाव के बिना शामिल किया जा सकता है। इससे परिवहन, घरेलू उपयोग, उद्योग और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बढ़ती गैस मांग को घरेलू उत्पादन से पूरा करने में मदद मिल सकती है।

    योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के जरिए सीबीजी मिश्रण बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2027 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2028 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 से 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। ये लक्ष्य परिवहन में सीएनजी और घरेलू उपयोग में पीएनजी श्रेणियों पर लागू होंगे।

    देश में सीबीजी क्षेत्र का मौजूदा आधार भी तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 1,908 सीबीजी और बायो-सीएनजी संयंत्र पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 217 संयंत्र चालू हैं, जबकि 339 निर्माणाधीन हैं। चालू संयंत्र प्रतिदिन करीब 0.4 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली गोबरधन योजना को मंजूरी दी गई है। यह योजना वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य सीबीजी को देश के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा बनाना है। सरकार की योजना कचरे को संसाधन में बदलकर ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, निवेश और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने की है।

  • कानपुर देहात की 360 महिलाएं बना रहीं करीब तीन लाख तिरंगे, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

    कानपुर देहात की 360 महिलाएं बना रहीं करीब तीन लाख तिरंगे, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

    नई दिल्ली । कानपुर देहात में इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सफल बनाने में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े 96 स्वयं सहायता समूहों की करीब 360 महिलाएं दिन-रात मेहनत कर लगभग तीन लाख तिरंगे तैयार करने में जुटी हैं। इन महिलाओं के लिए तिरंगा बनाना केवल देशभक्ति से जुड़ा अभियान नहीं है, बल्कि रोजगार, आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का भी माध्यम बन गया है। खास तौर पर गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को इससे सम्मान के साथ काम करने का अवसर मिला है।

    कानपुर देहात में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर तैयारियां तेज हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को जिले में करीब तीन लाख तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। महिलाएं निर्धारित समय के भीतर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। तैयार किए जा रहे प्रत्येक तिरंगे की लंबाई 30 इंच और चौड़ाई 20 इंच रखी गई है। इसकी निर्धारित कीमत 20 रुपये तय की गई है। तैयार होने के बाद इन तिरंगों का इस्तेमाल जिले के स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सरकारी भवनों पर किया जाएगा।

    महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी ने इस अभियान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ दिया है। उमंग स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष प्रतिमा सिंह के अनुसार, ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उनका कहना है कि आत्मनिर्भर भारत के साथ आत्मनिर्भर महिलाओं का निर्माण भी जरूरी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर का इस्तेमाल कर आय अर्जित कर रही हैं और साथ ही परिवार की जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही हैं।

    इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव उन महिलाओं पर दिखाई दे रहा है, जिनके लिए गांव में रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं। गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम शिक्षित महिलाओं को घर के आसपास काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें काम के जरिए सम्मान और अपनी मेहनत की कमाई हासिल करने का अवसर मिल रहा है।

    कानपुर देहात की महिला स्वयं सहायता समूहों ने इससे पहले भी अपनी क्षमता दिखाई थी। पिछले वर्ष समूहों से जुड़ी महिलाओं ने करीब 200 मीटर लंबा तिरंगा तैयार किया था। उस दौरान तैयार किए गए झंडों पर महिलाओं को लागत निकालने के बाद करीब छह रुपये तक का मुनाफा मिला था। इस बार भी तिरंगे तैयार करने में आने वाली लागत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं वहन करेंगी और बिक्री से होने वाला मुनाफा सीधे समूह की महिलाओं को मिलेगा।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त अशोक कुमार ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से कानपुर देहात की महिलाएं सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज तैयार नहीं कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। तीन लाख तिरंगे तैयार करने का यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के हुनर को पहचान देने के साथ उनके लिए स्थायी आर्थिक अवसरों की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग

    ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में बिजली और गैस की कमी के बीच ऊर्जा संकट लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भारत से सीमा पार पाइपलाइन के जरिए डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति करने की अपील की है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ ईंधन सुरक्षा को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

    बांग्लादेश के पावर, एनर्जी और मिनरल रिसोर्सेज मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ बैठक के बाद ऊर्जा सहयोग को चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश पहले से ही पाइपलाइन के माध्यम से भारत से डीजल आयात करता है और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उसने भारत से इसकी आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है।

    बांग्लादेश इस समय बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन और गैस की उपलब्धता को लेकर दबाव का सामना कर रहा है। ऊर्जा की मांग पूरी करने के लिए डीजल की पर्याप्त आपूर्ति महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में भारत से अतिरिक्त ईंधन मिलने पर बांग्लादेश की घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और बिजली उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार महत्वपूर्ण हुआ है। दोनों देशों के बीच बिजली के आदान-प्रदान के साथ ईंधन आपूर्ति और सीमा पार ऊर्जा संपर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं भी विकसित हुई हैं। इसी सहयोग के तहत भारत से बांग्लादेश तक डीजल पहुंचाने के लिए सीमा पार पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जाता है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया। बांग्लादेश की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत के साथ ऊर्जा संबंध दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हैं। पड़ोसी देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए सहयोग को आगे बढ़ाना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए डीजल आपूर्ति ने बांग्लादेश की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है। अप्रैल की शुरुआत में इस पाइपलाइन के माध्यम से भारत से बांग्लादेश को करीब 5,000 टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच ईंधन आयात पर दबाव बढ़ने की आशंका थी। ऐसे माहौल में पाइपलाइन के जरिए आपूर्ति को बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

    मौजूदा बिजली और गैस संकट के बीच बांग्लादेश की अतिरिक्त डीजल मांग से दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों का महत्व और बढ़ गया है। यदि भारत की ओर से अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है, तो इससे बांग्लादेश को बिजली उत्पादन और परिवहन समेत कई क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    ऊर्जा सहयोग के साथ दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। सीमा पार बिजली और ऊर्जा संपर्क को मजबूत करने से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति देने की संभावना है। बांग्लादेश की ताजा अपील ऐसे समय आई है जब वह अपनी तत्काल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है।

  • झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को आंदोलन का 14वां दिन रहा। बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच अनशन कर रहे छात्र राहुल क्रांति की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड विधानसभा के बाहर और सदन के भीतर भी राजनीतिक माहौल गरम रहा।

    भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। बताया गया कि राज्य में छह छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लंबे समय से प्रदर्शन और अनशन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर बातचीत के लिए कोई आधिकारिक बुलावा नहीं भेजा गया है। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों की मांग है कि मामले की जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की टीम से कराई जाए। इसके अलावा छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना जरूरी है।

    भर्ती परीक्षा विवाद का असर झारखंड विधानसभा में भी दिखाई दिया। विपक्षी विधायकों ने छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और जोरदार विरोध किया। विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग करने लगे। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और पूरे मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

    वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया। सरकार ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखा जा रहा है। साथ ही सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पहले से सामने आए पुरानी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर भी जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दे को गंभीरता से देख रही है।

    फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन समाप्त करने के संकेत नहीं दिए हैं। अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने से आंदोलन का मामला और संवेदनशील हो गया है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से होने वाली किसी औपचारिक बातचीत पर है। वहीं सरकार के सामने भी छात्रों की मांगों और लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच समाधान निकालने की चुनौती है। आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और छात्र आंदोलन दोनों के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • झांसी सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद की आज अंतिम विदाई, प्रयागराज में पिता अतीक की कब्र के पास होंगे दफन

    झांसी सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद की आज अंतिम विदाई, प्रयागराज में पिता अतीक की कब्र के पास होंगे दफन


    नई दिल्ली ।
    झांसी में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद की शुक्रवार को अंतिम विदाई होगी। परिवार की ओर से दफन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अबान अहमद को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    अबान को उसी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा, जहां उनके पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और बड़े भाई असद की कब्रें मौजूद हैं। परिवार ने उनकी कब्र के लिए स्थान पहले से तैयार करा लिया है। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और करीबी लोग मौजूद रहेंगे।

    जानकारी के मुताबिक, जुमे की नमाज के बाद अबान के जनाजे को कब्रिस्तान ले जाया जाएगा। व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए शव को सीधे एंबुलेंस के जरिए कब्रिस्तान पहुंचाने की तैयारी है। वहां धार्मिक रस्में पूरी करने के बाद उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों की कब्रों के पास दफन किया जाएगा।

    अबान की अंतिम विदाई में उनके दोनों बड़े भाई शामिल नहीं हो पाएंगे। उमर और अली फिलहाल अलग-अलग मामलों में जेल में बंद हैं। जेल में होने के कारण उनके जनाजे में पहुंचने की संभावना नहीं है। ऐसे में परिवार के अन्य सदस्य और करीबी लोग ही अंतिम रस्मों में मौजूद रहेंगे।

    अबान अहमद की मौत गुरुवार को झांसी में हुए सड़क हादसे में हुई थी। बताया गया कि जिस कार में वह सवार थे, वह अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई और डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी गंभीर थी कि अबान की जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे की खबर सामने आने के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    अबान की मौत के बाद परिवार के सामने अब उनकी अंतिम विदाई की जिम्मेदारी है। प्रयागराज में होने वाले दफन के लिए कब्रिस्तान में जरूरी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई हैं। परिवार की योजना के अनुसार, जुमे की नमाज के बाद जनाजा निकाला जाएगा और इसके बाद कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उन्हें दफन किया जाएगा।

    अबान को परिवार के अन्य सदस्यों के पास दफन किए जाने के कारण उनकी अंतिम विदाई को लेकर परिजनों और करीबी लोगों की मौजूदगी महत्वपूर्ण रहेगी। हादसे में अचानक हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। शुक्रवार को धार्मिक रस्मों के साथ अबान अहमद को अंतिम विदाई दी जाएगी।

  • यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, 58 सैनिकों की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा गहराया

    यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, 58 सैनिकों की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा गहराया

    नई दिल्ली । यमन और सऊदी अरब में हुए ताजा हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को यमन में सेना के ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। इस हमले में 58 सैनिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल बताए गए हैं। इन हमलों के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। घटना के बाद यमन में सुरक्षा स्थिति और गंभीर हो गई है।

    यमन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। हमले में बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हुए। अधिकारियों ने कहा है कि इस कार्रवाई का जवाब उचित समय पर दिया जाएगा। सैन्य ठिकानों पर हुए हमले ने यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    इसी बीच सऊदी अरब के नजरान शहर में भी हमला हुआ। यहां 11 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों में सऊदी अरब के नागरिकों के साथ यमन, मिस्र और पाकिस्तान के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। घायलों में चार साल का एक बच्चा भी बताया गया है। हमले के बाद कुछ स्थानों पर आग लग गई, जिसके बाद बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान चलाया।

    यमन और सऊदी अरब में लगभग एक ही समय पर सामने आई इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर मिसाइल और ड्रोन के इस्तेमाल से यह आशंका पैदा हुई है कि संघर्ष का दायरा आगे और बढ़ सकता है। यदि इस तरह के हमले जारी रहते हैं तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।

    मध्य पूर्व में तनाव ऐसे समय बढ़ रहा है जब महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जुड़ी हुई है। इन मार्गों पर जहाजों की आवाजाही कम होने की खबरों ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चाओं के बीच क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ने के संकेत दिए जाने के बावजूद क्षेत्र में सैन्य तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। समुद्री मार्गों पर किसी नए शुल्क या सुरक्षा संकट की स्थिति में परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

    इसी दौरान लेबनान में हुए एक धमाके में दो इजराइली सैनिकों की मौत की जानकारी भी सामने आई है। अलग-अलग इलाकों में सामने आ रही ऐसी घटनाएं मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना रही हैं। एक मोर्चे पर तनाव कम होने की उम्मीद के बीच दूसरे क्षेत्र में हिंसा बढ़ने से स्थायी शांति की कोशिशों को चुनौती मिल रही है।

    हूती संगठन यमन का एक सशस्त्र विद्रोही संगठन है, जो लंबे समय से यमन की सरकार और सऊदी समर्थित गठबंधन के खिलाफ संघर्ष करता रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार और सैन्य सहायता उपलब्ध कराता है। इसी वजह से हूती गतिविधियों को ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच व्यापक तनाव से जोड़कर देखा जाता है।

    माना जाता है कि क्षेत्र में किसी एक पक्ष पर सैन्य या राजनीतिक दबाव बढ़ने पर दूसरे मोर्चों पर गतिविधियां तेज हो सकती हैं। ताजा हमलों ने इसी आशंका को फिर मजबूत किया है। यमन और सऊदी अरब में हुए हमलों के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती तनाव को और फैलने से रोकना है। आने वाले दिनों में सैन्य जवाब, समुद्री मार्गों की स्थिति और अमेरिका-ईरान बातचीत का असर पूरे मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर पड़ सकता है।

  • मोहन भागवत बोले- पूरी जानकारी के बिना फैसला ठीक नहीं, प्रियंका गांधी ने जवाब देकर तेज किया सियासी विवाद

    मोहन भागवत बोले- पूरी जानकारी के बिना फैसला ठीक नहीं, प्रियंका गांधी ने जवाब देकर तेज किया सियासी विवाद

    नई दिल्ली । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। युवाओं से संवाद के दौरान भागवत ने उनके विचारों को सुनने के साथ कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने किसी भी मामले में पूरी जानकारी सामने आने से पहले जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कही। इसी दौरान उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताया, जिसके बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भागवत के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को किसी तरह के प्रमाण या मंजूरी की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज हो गई है।

    मोहन भागवत ने युवाओं से बातचीत के दौरान कहा कि किसी भी घटना या विवाद के बारे में फैसला करने से पहले उसके सभी तथ्यों को समझना जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक किसी मामले से जुड़े सभी तथ्य सामने नहीं आ जाते, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि सच्चाई सामने आने तक इंतजार किया जाना चाहिए। भागवत ने यह भी संकेत दिया कि कुछ रिपोर्टों में अन्य लोगों के शामिल होने की बातें सामने आई हैं, लेकिन बिना ठोस प्रमाण किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। उनके इसी रुख को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं।

    प्रियंका गांधी ने भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं को किसी प्रमाण या मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। उनके बयान को कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों और उनकी चिंताओं से जोड़कर देखा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि वास्तव में छात्रों और युवाओं की चिंता है तो संबंधित घटनाओं और उनसे जुड़े सवालों पर स्पष्ट रूप से जवाब सामने आना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि युवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

    कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं और छात्रों की चिंता वास्तविक है तो केंद्र सरकार को संबंधित मामलों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने छात्रों के साथ हुई घटनाओं की जांच की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिन लोगों की भूमिका सामने आती है, उनसे जवाब मांगा जाना चाहिए।

    दरअसल, मोहन भागवत और प्रियंका गांधी के बयानों के बीच मुख्य अंतर किसी भी मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने के तरीके को लेकर दिखाई दे रहा है। भागवत ने जहां पूरी जानकारी और प्रमाण सामने आने तक इंतजार करने पर जोर दिया, वहीं प्रियंका गांधी ने युवाओं के अधिकारों और उनकी आवाज को किसी बाहरी मंजूरी से अलग बताया। दोनों पक्षों की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं के साथ संवाद तथा उनके मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की ओर से और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।