Blog

  • सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण

    सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण


    सीधी । सोशल मीडिया के दौर में अगर आवाज बुलंद हो और इरादे मजबूत हों तो बदलाव मुमकिन हैयह साबित कर दिखाया है सीधी जिले की यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर लीला साहू ने। वर्षों से खराब सड़क को लेकर संघर्ष कर रहीं लीला की मांग अब पूरी हो गई है। सड़क निर्माण का काम शुरू होते ही गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है।

    जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम खड्डी से बैगहा टोला तक करीब 10 किलोमीटर का यह सड़क मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में था। खासकर बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते थे कि गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल ले जाना मानो टेढ़ी खीर बन गया था। इसी दुर्दशा को लेकर लीला साहू ने सोशल मीडिया को हथियार बनाया और सड़क की सच्चाई देश-दुनिया के सामने रखी।

    लीला साहू ने सड़क की बदहाली को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जो देखते ही देखते वायरल हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री तक गुहार लगाई वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसदों पर भी नाराजगी जाहिर की थी। उनके वीडियो ने न सिर्फ प्रशासन का ध्यान खींचा बल्कि यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।

    अब जब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है तो लीला साहू ने गांव वालों के साथ खुशी जाहिर करते हुए एक बार फिर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने प्रदेश के मुखिया स्थानीय सांसद और मीडिया का धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि यह जीत अकेले उनकी नहीं बल्कि पूरे गांव की है जिसने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया।

    ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से अब उन्हें शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। बच्चों को स्कूल पहुंचने में आसानी होगी और आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना सरल होगा। गांव में विकास की नई उम्मीद जगी है।

    लीला साहू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब आम नागरिक अपनी बात मजबूती से और सही मंच पर रखता है तो सिस्टम को भी सुनना पड़ता है। सोशल मीडिया की ताकत और जनआवाज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव संभव है।

  • U-19 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल: भारत बनाम अफगानिस्तान की जंग …

    U-19 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल: भारत बनाम अफगानिस्तान की जंग …


    नई दिल्‍ली । आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला आज, 4 फरवरी (बुधवार) को क्रिकेट प्रेमियों को जबरदस्त रोमांच देने के लिए तैयार है, जहां भारत और अफगानिस्तान की अंडर-19 टीमें आमने-सामने होंगी। यह हाई-वोल्टेज मुकाबला जिम्बाब्वे के हरारे स्थित हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। दोनों टीमें इस मैच को जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी।

    शानदार लय में भारतीय अंडर-19 टीम

    भारतीय अंडर-19 टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है और उसे खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। ग्रुप स्टेज में भारत ने अपने सभी मुकाबले जीतकर ग्रुप बी में शीर्ष स्थान हासिल किया। टीम ने अमेरिका, बांग्लादेश और न्यूजीलैंड जैसी टीमों को हराकर अपनी मजबूत तैयारी और संतुलित संयोजन का परिचय दिया।

    इसके बाद सुपर सिक्स चरण में भी भारत का दबदबा साफ नजर आया। अपने पहले मुकाबले में टीम इंडिया ने मेजबान जिम्बाब्वे को 204 रनों के विशाल अंतर से हराकर टूर्नामेंट में अपनी ताकत का ऐलान कर दिया। वहीं, निर्णायक मुकाबले में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम ने संयमित, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत दर्ज की। कप्तान आयुष म्हात्रे की अगुवाई में भारतीय टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलित नजर आ रही है।

    अफगानिस्तान भी किसी से कम नहीं

    दूसरी ओर, अफगानिस्तान अंडर-19 टीम ने भी इस वर्ल्ड कप में सभी को चौंकाया है। टीम ने ग्रुप स्टेज में लगातार तीन मुकाबले जीतकर सुपर सिक्स में प्रवेश किया। हालांकि सुपर सिक्स चरण में श्रीलंका के खिलाफ अफगानिस्तान को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए आयरलैंड को 191 रनों के बड़े अंतर से हराया और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की।

    कप्तान महबूब खान के नेतृत्व में अफगानिस्तान की टीम आत्मविश्वास से लबरेज दिख रही है। उनकी गेंदबाजी आक्रमण ने पूरे टूर्नामेंट में विपक्षी बल्लेबाजों को काफी परेशान किया है, वहीं बल्लेबाजी में भी टीम ने अहम मौकों पर दम दिखाया है। अफगानिस्तान की कोशिश होगी कि वह भारत जैसी मजबूत टीम को हराकर इतिहास रचे और पहली बार अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचे।

    कहां और कैसे देखें मुकाबला लाइव

    भारत बनाम अफगानिस्तान अंडर-19 सेमीफाइनल मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। वहीं, मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट फैंस इस रोमांचक मुकाबले को घर बैठे लाइव देख सकेंगे।

    दोनों टीमों के स्क्वॉड

    भारत (U-19):
    आयुष म्हात्रे (कप्तान), आरएस एम्ब्रिश, कनिष्क चौहान, दीवेंद्रन दीपेश, मोहम्मद एनान, एरोन जॉर्ज, अभिज्ञान कुंडू, किशन कुमार सिंह, विहान मल्होत्रा, उधव मोहन, हेनिल पटेल, खिलन पटेल, हरवंश सिंह, वैभव सूर्यवंशी, वेदांत त्रिवेदी।

    अफगानिस्तान (U-19):
    महबूब खान (कप्तान), खालिद अहमदजई, उस्मान सादात, फैसल खान, उजैरुल्लाह नियाजई, अजीज मिया खिल, नाजीफ अमीरी, खातिर स्टानिकजई, नूरिस्तानी, अब्दुल अजीज, सलाम खान, वाहिद जादरान, जैतुल्लाह शाहीन, रोहुल्लाह अरब, अकील खान ओबैद।

    आपको बतादें कि यह सेमीफाइनल मुकाबला रोमांच, जुनून और युवा प्रतिभाओं की परीक्षा होने वाला है। जहां भारत अपने शानदार रिकॉर्ड और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगा, वहीं अफगानिस्तान उलटफेर कर इतिहास रचने की पूरी कोशिश करेगा। क्रिकेट फैंस को एक बेहद रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है।

  • 50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब

    50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब


    मऊगंज । कहते हैं कानून अंधा होता है लेकिन मऊगंज का राजस्व अमला इस कहावत से भी एक कदम आगे नजर आ रहा है यहां कानून न सिर्फ अंधा बल्कि बहरा भी दिखाई दे रहा है। देवतालाब उप-तहसील के नौडिया गांव में प्रशासन ने जिस तरह भारी पुलिस बल के साथ गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की उसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यह कार्रवाई उस जमीन पर की जा रही है जिस पर लोग पिछले करीब 50 वर्षों से काबिज हैं और जहां सिविल कोर्ट का स्पष्ट स्थगन आदेश स्टे भी लागू है।

    पूरा विवाद 1988 में की गई एक रजिस्ट्री से शुरू होता है। आरोप है कि भगवानदीन पटेल नाम के एक रसूखदार पटवारी ने जमीन की रजिस्ट्री करवाई नामांतरण भी हुआ लेकिन इसके बाद खेल शुरू हुआ। पटवारी के भाई ने अपील दायर कर खरीदारों का नाम रिकॉर्ड से कटवा दिया और जमीन दोबारा अपने नाम दर्ज करा ली। हैरानी की बात यह है कि जिस अपील के आधार पर मालिकाना हक बदला गया उसका कोई रिकॉर्ड आज राजस्व विभाग के पास मौजूद नहीं है।

    यहीं से जमीन की जालसाजी का सिलसिला तेज हो गया। आरोप है कि एक ही जमीन की चार बार रजिस्ट्री की गई। 1988 के बाद वर्षों तक लोग उसी जमीन पर मकान बनाकर रहते रहे फिर 2022 में दोबारा खरीद-फरोख्त हुई। एक ही खसरे की जमीन अलग-अलग लोगों को बेची जाती रही और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा। अब जब विवाद कोर्ट में है और मामला विचाराधीन है तो अचानक प्रशासन को यह जमीन “सरकारी” नजर आने लगी।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सिविल कोर्ट का स्टे ऑर्डर प्रभावशील है तो प्रशासन किस कानून के तहत अतिक्रमण हटाने पहुंचा? क्या मऊगंज का राजस्व अमला खुद को माननीय न्यायालय से ऊपर समझता है? कार्रवाई के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ लोगों ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश क किसी ने हाथ की नस काट ली तो किसी ने खुद को घर में बंद कर लिया।

    विडंबना यह भी है कि जिस जमीन को सरकारी बताया जा रहा है उससे जुड़े पुख्ता दस्तावेज प्रशासन के पास नहीं हैं। न यह स्पष्ट है कि जमीन कब और कैसे सरकारी घोषित हुई। इसके बावजूद कार्रवाई के दौरान जब लोगों ने विरोध किया तो अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भले ही रोक दी गई लेकिन वर्तमान पटवारी ने पीड़ितों पर ही “कानूनी हंटर” चला दिया। नौ लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा और गाली-गलौज जैसी धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया।

    आज नौडिया गांव के लोग अपनी ही जमीन पर खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं। सवाल यह है कि जिसने 27 डिसमिल हिस्से में 40 डिसमिल जमीन बेच दी उस पूर्व पटवारी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ गरीबों के घर गिराना है या उस सिस्टम को दुरुस्त करना भी है जो भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है?

  • ‘हिंदू कार्ड’ या सियासी पाखंड? बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता पर सवाल

    ‘हिंदू कार्ड’ या सियासी पाखंड? बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता पर सवाल


    नई दिल्‍ली । बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों एक गंभीर विरोधाभास से गुजर रही है। एक तरफ देश में हिंदू समुदाय पर हमलों, हिंसा और कथित नरसंहार की खबरें सामने आ रही हैं, तो दूसरी ओर कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी खुद को “समावेशी” और “धर्मनिरपेक्ष” दिखाने की कोशिश कर रही है। इस कोशिश का ताजा उदाहरण खुलना-1 संसदीय सीट से हिंदू प्रकोष्ठ के नेता कृष्ण नंदी को उम्मीदवार बनाए जाने के रूप में सामने आया है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स और खुद पार्टी के संविधान की धाराएं इस कदम को महज एक सियासी दिखावा और ‘हिंदू कार्ड’ करार दे रही हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि जमात-ए-इस्लामी का यह कदम वास्तविक समावेशिता से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अल्पसंख्यकों को गुमराह करने की रणनीति है। पार्टी के संविधान में निहित प्रावधान यह साफ करते हैं कि कोई भी हिंदू या गैर-मुस्लिम कभी भी जमात-ए-इस्लामी का पूर्ण सदस्य नहीं बन सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी समुदाय को संगठन के भीतर बराबरी का अधिकार ही नहीं दिया जा सकता, तो उसे चुनावी उम्मीदवार बनाना कितना ईमानदार कदम कहा जा सकता है।

    संविधान की सख्त शर्तें, गैर-मुस्लिमों को बराबरी नहीं

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी के संविधान की धारा 11 स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी गैर-मुस्लिम केवल “एसोसिएट सदस्य” ही बन सकता है। इसका मतलब यह है कि हिंदू या अन्य गैर-मुस्लिम नेताओं को पार्टी की कोर कमिटी, नीति-निर्माण या अहम फैसलों में कोई भूमिका नहीं मिलेगी। पूर्ण सदस्यता केवल मुसलमानों के लिए आरक्षित है। ऐसे में कृष्ण नंदी जैसे नेताओं को उम्मीदवार बनाना प्रतीकात्मक कदम से ज्यादा कुछ नहीं लगता।

    यही नहीं, पार्टी के संविधान की धारा 7 और 9 में पूर्ण सदस्य बनने के लिए जिन शर्तों का उल्लेख है, वे किसी भी स्वाभिमानी हिंदू या गैर-मुस्लिम के लिए स्वीकार्य नहीं मानी जा सकतीं। इन धाराओं के तहत पार्टी सदस्य को अल्लाह, पैगंबर मोहम्मद और कुरान को एकमात्र आदर्श मानना अनिवार्य है। साथ ही, सदस्य को शरिया कानून के अनुसार जीवन जीने और इस्लामी कर्तव्यों का पालन करने की शपथ लेनी होती है। इसके अलावा, “इस्लाम से भटके हुए लोगों” से दूरी बनाए रखने की शर्त भी संविधान में दर्ज है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी ने वर्ष 2008 में अपने संविधान में कुछ सीमित बदलाव किए थे, लेकिन ये बदलाव भी कथित तौर पर चुनाव आयोग और जनप्रतिनिधित्व आदेश के नियमों से बचने के लिए किए गए थे, ताकि पार्टी का पंजीकरण रद्द न हो। मूल विचारधारा और कट्टर इस्लामी सोच में कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि बिना बुनियादी सुधार के समावेशिता की बात करना महज राजनीतिक अवसरवाद है।

    चुनाव का माहौल और बदली हुई सियासी तस्वीर

    बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है। अब तक बांग्लादेश की राजनीति मुख्य रूप से अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे वह चुनाव नहीं लड़ पा रही है।

    इस राजनीतिक खालीपन का फायदा उठाकर जमात-ए-इस्लामी खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि हिंदू उम्मीदवार उतारना इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी पर लगने वाले कट्टरपंथी और अल्पसंख्यक विरोधी छवि के आरोपों को कमजोर किया जा सके।

    महिलाओं को लेकर भी कट्टर रुख

    जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता की पोल महिलाओं के मुद्दे पर भी खुलती है। पार्टी ने इस चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारा है। पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान का साफ कहना है कि जमात-ए-इस्लामी की कभी कोई महिला प्रमुख नहीं बन सकती। उनके अनुसार, “अल्लाह ने पुरुष और महिलाओं को अलग-अलग बनाया है” और महिलाएं पार्टी का नेतृत्व नहीं कर सकतीं।

    शफीकुर रहमान का एक और बयान काफी विवादित रहा, जिसमें उन्होंने कामकाजी महिलाओं की तुलना वेश्यावृत्ति से कर दी। इस बयान के बाद ढाका समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए और जमात-ए-इस्लामी की सोच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। उल्‍लेखनीय है कि बांग्लादेश में जहां एक ओर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, वहीं जमात-ए-इस्लामी का ‘हिंदू उम्मीदवार’ उतारना वास्तविक बदलाव से ज्यादा राजनीतिक दिखावा प्रतीत होता है। पार्टी का संविधान, उसकी विचारधारा और नेताओं के बयान यह संकेत देते हैं कि बिना ठोस वैचारिक और संरचनात्मक सुधार के यह समावेशिता केवल एक चुनावी रणनीति है, जिसका उद्देश्य सत्ता की दौड़ में अपनी छवि को चमकाना भर है।

  • पश्चिमी विक्षोभ की वापसी से उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड

    पश्चिमी विक्षोभ की वापसी से उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड


    नई दिल्‍ली । हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ के एक बार फिर सक्रिय होने से उत्तर भारत में सर्दी ने जोरदार वापसी कर ली है। पहाड़ों पर चल रही बर्फीली हवाओं का असर अब मैदानी इलाकों में भी साफ नजर आने लगा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में ठिठुरन, गलन और शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है। मौसम विभाग ने आज भी कई राज्यों में बारिश, बर्फबारी और घने कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 3 फरवरी को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और भारी बर्फबारी की संभावना है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत से जुड़े मैदानी इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सिस्टम के चलते अगले कुछ दिनों तक ठंड का असर बना रहेगा।

    IMD ने बताया है कि 5 फरवरी के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आएगा और लोगों को ठंड से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि तब तक नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने खास तौर पर अपील की है कि लोग घर से बाहर निकलते समय मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें और पहाड़ी इलाकों में यात्रा या छुट्टियों की योजना बनाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। ठंड के इस दौर में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की भी सलाह दी गई है।

    दिल्ली-एनसीआर में सर्दी और बारिश का असर

    मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर की सुबह हल्के से मध्यम कोहरे के साथ हुई। ठंडी हवाओं के चलते लोगों को सुबह और देर रात खासा सर्दी का एहसास हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली में अधिकतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। राजधानी में हल्की बारिश के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।हालांकि ठंड के बीच एक राहत की खबर यह है कि दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में कुछ सुधार दर्ज किया गया है। अफ्रीका एवेन्यू इलाके में सुबह 6 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 142 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘मॉडरेट’ श्रेणी में आता है। वहीं दिल्ली के अन्य प्रमुख इलाकों में AQI अभी भी चिंताजनक बना हुआ है। पूसा में AQI 248, शादीपुर में 238, पंजाबी बाग-शिवाजी पार्क में 269, नॉर्थ कैंपस दिल्ली मिल्क स्कीम कॉलोनी में 249 और मुंडका इलाके में 278 दर्ज किया गया।

    पहाड़ों पर माइनस में तापमान

    पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी इलाकों में तापमान तेजी से गिर गया है। जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में तापमान माइनस 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि लद्दाख के द्रास में माइनस 15 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली और आसपास के क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के चलते कई सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है।

    कोहरे और शीतलहर का अलर्ट

    IMD के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और उत्तरी मध्य प्रदेश में आज घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश और बिहार में कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां दृश्यता बेहद कम हो सकती है। राजस्थान के 17 जिलों में कोहरे के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश के करीब 20 जिलों में बारिश की चेतावनी दी गई है।

    बिहार और यूपी में बदलेगा मौसम

    बिहार के पांच जिलों में घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है। राजधानी पटना में हल्के बादल छाए रहेंगे और धुंधली धूप के बीच ठंड का असर बढ़ सकता है। वहीं उत्तर प्रदेश में प्रयागराज, वाराणसी, चित्रकूट, झांसी, आजमगढ़ और बलिया समेत कई जिलों में शीतलहर और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, मथुरा और आगरा में घना कोहरा छाए रहने की आशंका है।

    मध्य प्रदेश और राजस्थान में अलर्ट

    मध्य प्रदेश के जबलपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, सिवनी, डिंडोरी और पांढुर्ना जिलों में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राजस्थान में धौलपुर, जयपुर, अजमेर, अलवर, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर और बूंदी में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। चित्तौड़गढ़, चूरू और दौसा में आंधी-तूफान की भी चेतावनी दी गई है।कुल मिलाकर, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। आने वाले कुछ दिनों तक ठंड, कोहरा, बारिश और बर्फबारी लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम विभाग की सलाह मानते हुए सतर्क रहना और आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है।

  • अमेरिकी फैसले से निर्यात प्रतिस्पर्धा में नई ताकत, एशियाई देशों से आगे निकला भारत

    अमेरिकी फैसले से निर्यात प्रतिस्पर्धा में नई ताकत, एशियाई देशों से आगे निकला भारत


    नई दिल्‍ली । अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के बाद भारत की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा में स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होती नजर आ रही है। इस फैसले को भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक और रणनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि नए टैरिफ ढांचे में भारत अब कई प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में कम शुल्क वाली श्रेणी में आ गया है। इससे न केवल भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बढ़त मिलेगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका भी और सशक्त होगी।

    वर्तमान अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था पर नजर डालें तो भारत पर अब 18 प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा, जबकि इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत तथा चीन पर सबसे अधिक 34 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। इस तुलना से साफ है कि भारत अब अपने प्रमुख एशियाई प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। खासतौर पर चीन जैसे बड़े निर्यातक देश पर अधिक टैरिफ होने से भारत के लिए अमेरिका जैसे बड़े बाजार में अवसरों के नए द्वार खुल सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैरिफ कटौती का सीधा लाभ भारत के टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा। ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे निर्यात बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। यह फैसला भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को भी नई गति दे सकता है।

    व्हाइट हाउस ने इस फैसले के पीछे की अहम वजह भी स्पष्ट की। उसके अनुसार, भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताने के बाद रूसी तेल से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह हटा लिया गया है। यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई फोन बातचीत के बाद लिया गया। इससे पहले अमेरिका ने रूस से जुड़े ऊर्जा व्यापार को लेकर भारत पर अतिरिक्त दबाव बनाया था, जिसे अब नई समझ के तहत समाप्त कर दिया गया है।

    व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद समाप्त करने के समझौते के तहत 25 प्रतिशत का अतिरिक्त रूसी तेल-संबंधित टैरिफ हटाया जा रहा है। इस फैसले के बाद कुल अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ 25 प्रतिशत से घटकर सीधे 18 प्रतिशत पर आ गया है। इसे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस समझौते की पुष्टि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए की। उन्होंने लिखा कि नए समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ट्रंप ने इसे ऊर्जा सहयोग और भू-राजनीतिक लक्ष्यों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि यह फैसला दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देगा।

    ट्रंप के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत में व्यापार, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से, साथ ही संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह कदम अमेरिका की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत वह अपनी व्यापार नीति को ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक उद्देश्यों से जोड़ रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले पर संतोष जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि यह जानकर खुशी हुई कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर अब 18 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा। उन्होंने कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र साथ मिलकर काम करते हैं, तो इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलता है और सहयोग के नए अवसर सामने आते हैं।वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ सीधे तौर पर उसकी रूसी तेल खरीद से जुड़ा था। अब नई दिल्ली की ओर से दी गई प्रतिबद्धता के बाद इसे पूरी तरह हटा लिया गया है। यह फैसला इस बात का संकेत है कि अमेरिका व्यापारिक फैसलों को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और भू-राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है।

    गौरतलब है कि अमेरिकी टैरिफ में यह कटौती भारत के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे न केवल भारत की निर्यात क्षमता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में उसकी विश्वसनीयता और रणनीतिक अहमियत भी मजबूत होगी। आने वाले समय में इसका असर निवेश, रोजगार और भारत-अमेरिका संबंधों की गहराई पर भी साफ तौर पर दिखाई देने की उम्मीद है।

  • रोहित शेट्टी के घर फायरिंग केस में बड़े खुलासे: लॉरेंस बिश्नोई गैंग की साजिश, स्कूटर से रेकी और ट्रेन से फरारी

    रोहित शेट्टी के घर फायरिंग केस में बड़े खुलासे: लॉरेंस बिश्नोई गैंग की साजिश, स्कूटर से रेकी और ट्रेन से फरारी

    नई दिल्‍ली । मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म निर्देशक और निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना ने न केवल फिल्म इंडस्ट्री, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को भी हिला कर रख दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच को अब तक कई चौंकाने वाले और अहम खुलासे हाथ लगे हैं। जांच में सामने आया है कि यह हमला अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना और तैयारी के साथ अंजाम दिया गया था, जिसके तार कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हुए हैं।

    पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने फायरिंग से पहले कई दिनों तक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर और आसपास के इलाके की बारीकी से रेकी की थी। खास बात यह है कि रेकी के लिए जिस स्कूटर का इस्तेमाल किया गया, उसी स्कूटर का उपयोग फायरिंग के बाद मौके से फरार होने के लिए भी किया गया। इससे साफ है कि अपराधियों ने हर कदम पहले से सोच-समझकर उठाया था।

    घटना वाले दिन एक अज्ञात शूटर ने रोहित शेट्टी के घर के बाहर पहुंचकर पांच राउंड फायरिंग की। फायरिंग के बाद वह बिना समय गंवाए स्कूटर पर सवार होकर फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक, शूटर सीधे विले पार्ले रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां उसने स्कूटर छोड़ दिया और ट्रेन के जरिए मुंबई से बाहर निकल गया। इस तरह उसने अपने पीछे बहुत कम सुराग छोड़े, हालांकि तकनीकी जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी से पूरी साजिश धीरे-धीरे सामने आ रही है।

    क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अपराध में इस्तेमाल किया गया स्कूटर पुणे से खरीदा गया था। स्कूटर 30 हजार रुपये में लिया गया था और यह मूल रूप से आनंद मारोटे के नाम पर रजिस्टर्ड था। रिकॉर्ड के अनुसार, मारोटे ने यह स्कूटर 6 अगस्त 2009 को खरीदा था। घटना से करीब 12 दिन पहले मारोटे ने यह स्कूटर गिरफ्तार आरोपी आदित्य गायकवाड़ को बेच दिया था। स्कूटर खरीदने के लिए पैसे कथित मास्टरमाइंड शुभम लोनकर ने उपलब्ध कराए थे।

    पुलिस के मुताबिक, पूरी साजिश के तहत समर्थ पोमाजी के निर्देश पर सिद्धार्थ येनपुरे और स्वप्नील सकट स्कूटर को सड़क मार्ग से पुणे से लोनावला लाने वाले थे, ताकि इसे आगे शूटर को सौंपा जा सके। हालांकि किसी कारणवश शूटर लोनावला नहीं पहुंच सका। इसके बाद आरोपियों ने योजना में बदलाव करते हुए घटना से लगभग 10 दिन पहले स्कूटर को सीधे मुंबई पहुंचा दिया और अज्ञात शूटर के हवाले कर दिया। इस काम के बदले उन्हें अतिरिक्त पैसे भी दिए गए।जांच में यह बात भी सामने आई है कि मुंबई में स्कूटर पहुंचाने वाले आरोपियों को यह जानकारी थी कि वे किसी आपराधिक साजिश का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया था कि निशाना रोहित शेट्टी का घर होगा। इससे यह संकेत मिलता है कि मास्टरमाइंड ने जानबूझकर पूरी जानकारी सीमित लोगों तक ही रखी थी, ताकि पकड़े जाने की स्थिति में पूरी साजिश उजागर न हो सके।

    क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस मामले में समर्थ पोमाजी की भूमिका बेहद अहम रही है। उसने मुख्य शूटर की सक्रिय रूप से मदद की। शुभम लोनकर के निर्देश पर समर्थ ने आदित्य गायकवाड़ की मदद से स्कूटर का इंतजाम कराया और फायरिंग की पूरी योजना को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच में यह भी सामने आया है कि समर्थ लगातार शुभम लोनकर के संपर्क में था और दोनों के बीच सिग्नल ऐप के जरिए नियमित बातचीत होती थी। इसी सुरक्षित मैसेजिंग ऐप के माध्यम से शुभम समर्थ को निर्देश देता था और पूरी योजना को नियंत्रित कर रहा था।

    अब तक पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों आदित्य गायकवाड़, सिद्धार्थ येनपुरे, समर्थ पोमाजी और स्वप्नील सकट को गिरफ्तार कर लिया है। इनसे पूछताछ के आधार पर पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। फिलहाल क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले के कथित मास्टरमाइंड शुभम लोनकर की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।रोहित शेट्टी के घर पर हुई इस फायरिंग की घटना ने एक बार फिर संगठित अपराध और फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस साजिश की परतें खुलती जा रही हैं, और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

  • अमेरिका-भारत व्यापार संबंध: ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत

    अमेरिका-भारत व्यापार संबंध: ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत


    नई दिल्‍ली । अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक अहम और सकारात्मक मोड़ देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का बड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय को भारत में न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों की मजबूती के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

    इस फैसले का भारत सरकार ने खुले दिल से स्वागत किया है। केंद्रीय रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के सहयोगी हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों की ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं और यही कारण है कि मिलकर काम करने से शांति, विकास और नवाचार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

    अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के पास मिलकर ऐसी अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने की अपार क्षमता है, जिनसे न केवल दोनों देशों को बल्कि पूरे विश्व को लाभ मिल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यापार केवल आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, साझेदारी और साझा भविष्य की नींव भी रखता है। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित और विकसित हो रहा व्यापार समझौता इसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएगा।

    केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी होगा। इससे भारत और अमेरिका के नागरिकों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और तकनीकी क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है। टैरिफ में कटौती से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई टेलीफोन बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके उन्हें अत्यंत खुशी हुई और यह जानकर विशेष संतोष मिला कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने इस निर्णय के लिए भारत की 140 करोड़ जनता की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो उसका सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचता है। इससे न केवल व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ते हैं, बल्कि पारस्परिक सहयोग के नए आयाम भी खुलते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कदम भारत-अमेरिका साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के संदर्भ में भी राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका इन क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है और भारत शांति के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों का पूरा समर्थन करता है। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर काम करने और भारत-अमेरिका संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

    गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण फैसले से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर विस्तृत बातचीत हुई थी। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों देशों के नेता आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए निरंतर संपर्क में हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती का यह फैसला भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई गति देगा। इससे न केवल व्यापारिक रिश्ते बेहतर होंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग की भावना भी और गहरी होगी। कुल मिलाकर, यह कदम भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग का एक मजबूत संकेत है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

  • नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..

    नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..


    नई दिल्ली। कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में शामिल है। हालांकि मेडिकल साइंस में लगातार प्रगति हो रही है, लेकिन समय पर पहचान न होने के कारण यह बीमारी लाखों लोगों की जान ले लेती है। भारत में कैंसर के अधिकांश मामलों का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चलता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही समय पर जरूरी हेल्थ चेकअप कराए जाएं, तो कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है।

    GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 14.1 लाख नए कैंसर मामले सामने आए, जबकि लगभग 9.2 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह लेट डायग्नोसिस है। शुरुआती स्टेज में कैंसर अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ता रहता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

    लेट डायग्नोसिस क्यों है खतरनाक
    जब कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच जाता है, तब यह शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका होता है। इस स्थिति में इलाज न केवल महंगा होता है बल्कि सफल होने की संभावना भी कम हो जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान को कैंसर से लड़ाई का सबसे मजबूत हथियार मानते हैं।

    एक्सपर्ट द्वारा बताए गए 6 जरूरी हेल्थ चेकअप
    ब्लड टेस्ट
    सामान्य ब्लड जांच से शरीर में असामान्य बदलाव, संक्रमण या ट्यूमर मार्कर के संकेत मिल सकते हैं। यह शुरुआती चेतावनी का काम करता है।

    मैमोग्राफी
    महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी जाती है।

    पैप स्मीयर टेस्ट
    यह सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान में सहायक होता है। समय पर जांच से इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है।

    अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन
    पेट, लिवर, किडनी और अन्य अंगों में होने वाले ट्यूमर की पहचान के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होती है।

    कोलोनोस्कोपी
    यह जांच आंतों और कोलन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने में मदद करती है, खासकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए।

    ओरल स्क्रीनिंग
    तंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वालों के लिए मुंह और गले की नियमित जांच बेहद जरूरी होती है, जिससे ओरल कैंसर की समय रहते पहचान हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का डर पालने की बजाय जागरूकता और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। संतुलित आहार, व्यायाम और समय-समय पर मेडिकल चेकअप से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।समय रहते पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है बल्कि जीवन को भी बचा सकती है।

  • जरूरत की खबर: क्या आपकी सेहत के लिए सही है फ्रोजन मटर? जानें इसे खरीदने के 6 गोल्डन रूल्स और सही इस्तेमाल का तरीका

    जरूरत की खबर: क्या आपकी सेहत के लिए सही है फ्रोजन मटर? जानें इसे खरीदने के 6 गोल्डन रूल्स और सही इस्तेमाल का तरीका


    नई दिल्ली। सर्दियों के खत्म होते ही ताजी मटर बाजार से गायब होने लगती है, ऐसे में फ्रोजन मटर ही एकमात्र विकल्प बचती है। ‘रेडी-टू-यूज’ होने के कारण यह न केवल समय बचाती है, बल्कि छीलने के झंझट से भी मुक्ति दिलाती है। लेकिन क्या यह उतनी ही पौष्टिक है जितनी ताजी मटर? एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सही तरीके से चुनी और इस्तेमाल की जाए, तो फ्रोजन मटर ताजी मटर का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।

    फ्रोजन मटर: ताजी मटर से कितनी अलग?
    अक्सर लोग इसे ‘प्रोसेस्ड फूड’ मानकर घबराते हैं, लेकिन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि फ्रोजन मटर को ‘ब्लांचिंग’ प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसमें मटर को पहले उबलते पानी में डाला जाता है और फिर तुरंत ठंडा कर फ्रीज किया जाता है। यह प्रक्रिया मटर के प्राकृतिक रंग, स्वाद और पोषक तत्वों को ‘लॉक’ कर देती है। कई मामलों में, फ्रोजन मटर उन ताजी मटर से बेहतर हो सकती है जो कई दिनों तक ट्रांसपोर्टेशन या धूप में रखी रहती हैं।

    खरीदते समय बरतें ये 6 सावधानियां
    बाजार से फ्रोजन मटर का पैकेट उठाते समय इन बातों का खास ख्याल रखें:पैकेट को हिलाकर देखें: मटर के दाने अलग-अलग महसूस होने चाहिए। यदि वे एक बड़े बर्फ के गोले की तरह जमे हुए हैं, तो इसका मतलब है कि पैकेट को पहले पिघलाया गया और फिर दोबारा फ्रीज किया गया है । ऐसे पैकेट न खरीदें। बर्फ की परत: अगर पैकेट के अंदर बहुत अधिक बर्फ जमी है, तो यह नमी और खराब स्टोरेज की निशानी है।

    एक्सपायरी डेट: हमेशा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट चेक करें। फ्रोजन मटर आमतौर पर 6-12 महीने तक अच्छी रहती है। पैकेट की बनावट: पैकेट कहीं से फटा या ढीला नहीं होना चाहिए। सीलबंद पैकेट ही लें। रंग: दानों का रंग गहरा हरा होना चाहिए। यदि रंग हल्का पीला या सफेद पड़ रहा हो, तो मटर पुरानी हो सकती है। पिक-अप टाइम: ग्रोसरी शॉपिंग के दौरान फ्रोजन मटर सबसे अंत में उठाएं ताकि वह घर पहुँचने तक ज्यादा न पिघले।

    इस्तेमाल करने का सही तरीका

    डायरेक्ट कुकिंग न करें: फ्रोजन मटर को फ्रीजर से निकालकर सीधे गरम तेल या तड़के में न डालें।गुनगुना पानी: इस्तेमाल से 5-10 मिनट पहले मटर को सामान्य या गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। इससे इसकी बर्फ पिघल जाएगी और यह अपनी प्राकृतिक कोमलता में आ जाएगी। ओवरकुकिंग से बचें: चूंकि फ्रोजन मटर पहले से ही ‘ब्लांच’ होती है, इसलिए इसे ताजी मटर की तुलना में बहुत कम पकाने की जरूरत होती है। ज्यादा पकाने से इसके विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स नष्ट हो सकते हैं।