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  • Europe Tour: नीदरलैंड में समकक्ष रॉब-शाही परिवार से मिले PM Modi…. अब जाएंगे स्वीडन

    Europe Tour: नीदरलैंड में समकक्ष रॉब-शाही परिवार से मिले PM Modi…. अब जाएंगे स्वीडन


    एम्स्टर्डम।
    चार यूरोपीय देशों के दौरे (Europe Tour) पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अपनी यात्रा के पहले चरण में नीदरलैंड (Netherlands) में हैं। पीएम मोदी (PM Modi ) ने यहां के राजा विलियम (King William) और रानी मैक्सिमा (Queen Maxima) से मुलाकात के बाद डच प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को भी संबोधित किया। नीदरलैंड के बाद पीएम मोदी स्वीडन जाएंगे, जहां उनके स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

    भारत और नीदरलैंड के बीच रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक सहयोग पर बातचीत
    प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ हुई विस्तृत बातचीत को पीएम मोदी ने सफल करार दिया। उन्होंने एक्स हैंडल पर द्विपक्षीय वार्ता और जेटेन के साथ अलग से हुई चर्चाओं की झलकियों को साझा कर लिखा, ‘कई विषयों पर चर्चा हुई। इनमें से एक विषय रक्षा और सुरक्षा था। मैंने रक्षा उद्योग के लिए जल्द से जल्द एक कार्य योजना तैयार करने की संभावना पर चर्चा की।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नीदरलैंड अंतरिक्ष यात्रा, समुद्री प्रणालियों और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड यात्रा की झलकियों को एक्स पर साझा करते हुए एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘भारत-नीदरलैंड साझेदारी का जीवंत सेतु भारतीय प्रवासी हैं। सूरीनामी हिंदुस्तानी समुदाय के लिए ओसीआई कार्ड की पात्रता को चौथी पीढ़ी से छठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। हमारे निर्णय का नीदरलैंड में प्रवासी समुदाय ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया है!’


    पीएम के नीदरलैंड दौरे के बाद दोनों देशों में क्या बदलेगा?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए। तकनीक, शिक्षा, सेहत और खनिज के अलावा नवाचार को लेकर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। नीदरलैंड दौरे पर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर भी साझेदारी का निर्णय हुआ है। इसके तहत डच कंपनी ASPL और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स आपसी सहयोग बढ़ाएंगी। पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच हुए फैसलों को ठोस और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के विकास और समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।


    पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में काफी प्रगति हुई है: पीएम मोदी

    डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, ‘हम नीदरलैंड को भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक मानते हैं।लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और जिम्मेदार व्यवहार भारत और नीदरलैंड के साझा दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।’

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमें हर क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की गति और कौशल को शामिल करना चाहिए। नवाचार और निवेश का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें इनोवेशन, निवेश, स्थिरता और रक्षा के क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जरूरत है। हमारे साझा दृष्टिकोण के तहत, हम भारत-नीदरलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं।’


    पीएम मोदी उम्र में दोगुने, लेकिन उत्साह युवाओं से कम नहीं

    नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता के समय पीएम मोदी को अपनी ट्रेडमार्क परिधान कुर्ते और पायजामे और हाफ जैकेट के साथ शॉल लिए देखा गया। उनकी उम्र की तुलना में लगभग आधे, 38 साल के जेटेन कोर्ट-पैंट और टाई लगाए दिखे। दोनों की मुताकाल के कई वीडियो सामने आए हैं, इसमें देखा जा सकता है कि पीएम मोदी अपने डच समकक्ष की तुलना में भले ही उम्र में दोगुने बड़े हैं, लेकिन उनका उत्साह युवाओं से कम नहीं है।


    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के 38 वर्षीय समकक्ष से की मुलाकात

    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के शाही परिवार से मुलाकात के बाद 38 वर्षीय डच समकक्ष से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड में अपने समकक्ष रॉब जेटेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। दोनों की मुलाकात का वीडियो भी सामने आया है।


    नीदरलैंड के शाही परिवार से मिले पीएम मोदी, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा

    अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द हेग में नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात की, जहां दोनों देशों के बीच मजबूत होते कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों पर चर्चा हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और जल प्रबंधन जैसे भविष्य के क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर विशेष जोर दिया गया।


    भारतीय राजदूत पीएम मोदी के स्वीडन आगमन पर क्या बोले?

    स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने पीएम मोदी के दौरे पर कहा, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री रविवार को आ रहे हैं। दोनों की मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद रहेंगे। इस औपचारिक चर्चा के बाद शाम को प्रधानमंत्री दो व्यावसायिक कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। वे स्वीडन के चुनिंदा सीईओ के एक समूह के साथ दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा, यूरोपियन राउंडटेबल ऑफ इंडस्ट्रीज का एक कार्यक्रम भी निर्धारित है। ये यूरोप के 60 शीर्ष सीईओ का एक समूह है। प्रधानमंत्री भारत और यूरोप के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीईओ के समूह के साथ भी बातचीत करेंगे।


    पीएम के आगमन पर गोथेनबर्ग में विशेष उत्साह

    उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री स्वीडन में बेहद लोकप्रिय हैं। विशेष रूप से गोथेनबर्ग में बहुत ऊर्जा महसूस हो रही है क्योंकि प्रधानमंत्री पहली बार गोथेनबर्ग आ रहे हैं। भारतीय प्रवासियों का केंद्र होने के अलावा गोथेनबर्ग स्वीडिश उद्योग का केंद्र और नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र भी है। यहां कई विश्वविद्यालय, संस्थान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रतिष्ठान हैं।

    पीएम मोदी स्वीडन दौरे पर वोल्वो के मुख्यालय जा सकते हैं
    यूरोप दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीडन के समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर इस देश का दौरा करेंगे। अपनी विदेश यात्रा के तीसरे चरण में स्वीडन आगमन के बाद पीएम मोदी गोथेनबर्ग में वोल्वो के मुख्यालय भी जा सकते हैं। दोनों देशों के बीच अहम समझौते होने की उम्मीद है। भारतीय प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर वोल्वो ग्रुप के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) जेन्स होल्टिंगर ने कहा, पीएम मोदी की यात्रा हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। यह स्वीडन और भारत के बीच मजबूत संबंधों को दिखाने का भी अवसर है। वोल्वो ग्रुप पिछले 25 वर्षों से भारत में कार्यरत है… भारत में हमारे लगभग 5,000 सहकर्मी हैं, जो विश्व में हमारा दूसरा सबसे बड़ा अनुसंधान केंद्र है।


    मित्रता का एक प्रमुख स्तंभ आर्थिक सहयोग भी है

    पीएम मोदी ने एक अन्य एक्स पोस्ट में लिखा कि भारत और नीदरलैंड के बीच मित्रता का एक प्रमुख स्तंभ आर्थिक सहयोग भी है। उन्होंने कहा, ‘भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अनगिनत अवसर प्रदान करता है। फिनटेक, महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। हमने सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।

  • MP में गर्मी ने दिखाए तेवर, 15 शहरों में तापमान 43 डिग्री के पार, खंडवा सबसे गर्म

    MP में गर्मी ने दिखाए तेवर, 15 शहरों में तापमान 43 डिग्री के पार, खंडवा सबसे गर्म


    भोपाल । मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। प्रदेश के इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे ज्यादा गर्मी की चपेट में हैं। शनिवार को खंडवा और नौगांव में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जबकि प्रदेश के 15 शहरों में पारा 43 डिग्री या उससे ऊपर पहुंच गया। रतलाम में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर रहा। वहीं, राजधानी भोपाल में दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा नजर आया और लोग घरों में रहने को मजबूर दिखे।

    मौसम विभाग के भोपाल केंद्र के अनुसार, रविवार को रतलाम, खरगोन और खंडवा में तीव्र लू चलने की संभावना है। इन इलाकों में तापमान 44 डिग्री के पार जा सकता है। इसके अलावा इंदौर, उज्जैन, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, धार, बुरहानपुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज और सीधी समेत कई जिलों में लू का असर बना रहेगा।

    भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, मंदसौर, देवास, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, शहडोल और कटनी सहित कई जिलों में भी तेज गर्मी पड़ने के आसार हैं। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। विभाग के मुताबिक 17, 18 और 19 मई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी का दौर जारी रह सकता है।

    गौरतलब है कि अप्रैल के आखिरी दिनों से मध्य प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला शुरू हुआ था। 10 मई तक लगातार बारिश का असर देखने को मिला। इस दौरान पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवात और टर्फ सिस्टम सक्रिय रहे। 11 मई को मौसम साफ हुआ, लेकिन 12 से 15 मई के बीच फिर कई इलाकों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई। मई के शुरुआती 16 दिनों में से 13 दिन प्रदेश में मौसम का असर बना रहा। हालांकि, रविवार के लिए मौसम विभाग ने कहीं भी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है।

  • बार-बार थकान महसूस हो रही है? गर्मी में शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत

    बार-बार थकान महसूस हो रही है? गर्मी में शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी के बीच कई लोग लगातार थकान, कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्याओं से परेशान हो रहे हैं। अक्सर इसे मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह केवल गर्मी की वजह नहीं, बल्कि शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।

    डिहाइड्रेशन बन रहा सबसे बड़ा कारण
    गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं। अगर समय पर पानी न पिया जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और लगातार थकान महसूस होने लगती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, नारियल पानी या नींबू पानी लेते रहें।

    खून की कमी यानी एनीमिया भी वजह
    लगातार थकान और कमजोरी का एक बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी यानी एनीमिया भी हो सकता है। खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसमें ऑक्सीजन शरीर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती, जिससे जल्दी थकान, चक्कर आना, चेहरे पर पीलापन और हाथ-पैर ठंडे रहने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    डायबिटीज और थायरॉयड का संकेत भी संभ
    डॉक्टरों के अनुसार अगर थकान के साथ ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। वहीं थायरॉयड की समस्या में शरीर सुस्त रहता है और व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस करता है।

    नींद और तनाव भी बढ़ा रहे समस्या
    लगातार मोबाइल का इस्तेमाल, देर रात तक जागना और 6–7 घंटे से कम नींद लेना भी शरीर की ऊर्जा को कम करता है। इसके साथ तनाव और मानसिक दबाव शरीर को अंदर से कमजोर बना देते हैं, जिससे थकान और बढ़ जाती है।

    गलत खानपान भी बड़ी वजह
    गर्मियों में जंक फूड, ज्यादा तला-भुना खाना और मीठे ड्रिंक्स शरीर को अस्थायी राहत तो देते हैं, लेकिन पोषण नहीं देते। इसके बजाय हल्का, ताजा और पौष्टिक आहार जैसे फल, दही, सलाद और घर का खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।

    कब हो जाएं सतर्क?
    अगर कई दिनों तक लगातार थकान बनी रहे, रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लगे या कमजोरी बढ़ती जाए, तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

  • कैंसर ट्रीटमेंट में नई उम्मीद? भारत में लॉन्च हुई एडवांस थेरेपी

    कैंसर ट्रीटमेंट में नई उम्मीद? भारत में लॉन्च हुई एडवांस थेरेपी


    नई दिल्ली। भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत नई इम्यूनोथेरेपी दवा लॉन्च की गई है, जिसे आम तौर पर “Cancer Shot” कहा जा रहा है। यह दवा खासतौर पर Non-Small Cell Lung Cancer के मरीजों के लिए विकसित की गई है, जो देश में फेफड़ों के कैंसर के सबसे आम प्रकारों में से एक है।

    क्या है यह नई इम्यूनोथेरेपी?
    यह दवा इम्यून सिस्टम को मजबूत करके कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। इसका मुख्य टारगेट PD-L1 प्रोटीन होता है, जो कैंसर सेल्स को शरीर की इम्यून सिस्टम से बचने में मदद करता है। नई दवा (एटेजोलिज़ुमैब आधारित इम्यूनोथेरेपी) इस प्रोटीन को ब्लॉक करके शरीर की T-Cells को दोबारा सक्रिय करती है, जिससे वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर सकें।

    7 मिनट में इलाज कैसे संभव हुआ
    पहले यह दवा IV (इंट्रावेनस) इन्फ्यूजन के जरिए दी जाती थी, जिसमें कई घंटे लगते थे और मरीज को अस्पताल में लंबे समय तक रहना पड़ता था।

    अब नई Subcutaneous (SC) इंजेक्शन तकनीक से:
    दवा सिर्फ 7 मिनट में दी जा सकती है
    जांघ या त्वचा के नीचे इंजेक्शन लगाया जाता है
    अस्पताल में समय काफी कम लगता है
    एक साथ अधिक मरीजों का इलाज संभव हो पाता है
    किन मरीजों को मिलेगा फायदा?

    डॉक्टरों के अनुसार यह इलाज सभी के लिए नहीं है। यह सिर्फ उन्हीं मरीजों को दिया जाता है जिनके कैंसर सेल्स में PD-L1 प्रोटीन का स्तर अधिक होता है। औसतन NSCLC मरीजों में लगभग 50% लोग इस थेरेपी के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं।

    कीमत कितनी है?
    भारत में इस नई इम्यूनोथेरेपी की कीमत काफी अधिक है:
    एक डोज की कीमत: लगभग ₹3.7 लाख
    आमतौर पर जरूरी डोज: 6
    हालांकि, कंपनियों द्वारा पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम और सरकारी हेल्थ स्कीम्स के तहत लागत को कुछ हद तक कम करने की सुविधा दी जा रही है।

    क्या है खास फायदा?
    इलाज का समय कई घंटों से घटकर 7 मिनट हो गया
    अस्पताल पर दबाव कम
    मरीजों को कम असुविधा
    इलाज की प्रक्रिया ज्यादा आसान और तेज
    वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि अधिकतर मरीज पारंपरिक IV इन्फ्यूजन की बजाय इस नई SC तकनीक को अधिक पसंद करते हैं।

    “Cancer Shot” इम्यूनोथेरेपी कैंसर इलाज में तकनीकी बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है। हालांकि इसकी कीमत अभी भी काफी अधिक है, लेकिन यह फेफड़ों के कैंसर के मरीजों के लिए तेज और सुविधाजनक इलाज का विकल्प बनकर सामने आई है।

  • Ravivar Ke Upay: सूर्यदेव की कृपा पाने के आसान और असरदार उपाय

    Ravivar Ke Upay: सूर्यदेव की कृपा पाने के आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में रविवार का दिन Surya Dev को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं और दरिद्रता दूर करने में सहायक होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव शक्ति, आत्मविश्वास और सम्मान के कारक माने जाते हैं। इसलिए रविवार की सुबह कुछ सरल उपाय करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।

    रविवार के 5 चमत्कारी उपाय-


    1. सूर्य नमस्कार करें
    सुबह उठकर सूर्य नमस्कार करने से शरीर स्वस्थ रहता है और सूर्य देव की कृपा मिलती है। इसे ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला उपाय माना जाता है।

    2. सूर्य को अर्घ्य दें
    तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें रोली, लाल फूल और चावल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। साथ ही इस मंत्र का जाप करें:
    ॐ सूर्याय नमः
    ॐ आदित्याय नमः
    ॐ वासुदेवाय नमः

    3. दान करें
    रविवार के दिन गुड़, चावल, तांबा या लाल वस्त्र का दान करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं और आर्थिक बाधाएं कम होती हैं।

    4. लाल रंग का उपयोग करें
    इस दिन लाल वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इससे आत्मबल बढ़ता है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।

    5. दीपक जलाएं
    घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    रविवार के ये सरल उपाय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं, बल्कि इन्हें आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का प्रतीक भी माना जाता है।

  • PCOS का नाम बदला: अब PMOS कहलाएगा, AIIMS डॉक्टर ने बताया कारण

    PCOS का नाम बदला: अब PMOS कहलाएगा, AIIMS डॉक्टर ने बताया कारण


    नई दिल्ली। महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या Polycystic Ovary Syndrome को लेकर मेडिकल जगत में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस स्थिति को “PMOS” नाम से भी जाना जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव इसलिए जरूरी था क्योंकि पुराना नाम केवल ओवरी (अंडाशय) तक सीमित संकेत देता था, जबकि यह बीमारी पूरे शरीर को प्रभावित करती है।

    AIIMS के डॉक्टरों और अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स का कहना है कि PCOS नाम कई बार भ्रम पैदा करता था। कई महिलाओं में अल्ट्रासाउंड में “सिस्ट” दिखाई नहीं देते थे, फिर भी उन्हें यह समस्या होती थी। ऐसे में सही पहचान और इलाज में देरी हो जाती थी।

    PCOS/PMOS क्या है?
    इस स्थिति में महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसके कारण कई लक्षण दिखाई देते हैं जैसे:
    अनियमित पीरियड्स
    चेहरे पर बाल बढ़ना
    मुंहासे और त्वचा संबंधी समस्या
    तेजी से वजन बढ़ना
    गर्भधारण में परेशानी
    डॉक्टरों के अनुसार अल्ट्रासाउंड में जो “सिस्ट” दिखते हैं, वे असल में सिस्ट नहीं होते बल्कि अधूरे विकसित फॉलिकल्स होते हैं।

    नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक “PCOS” शब्द बीमारी की पूरी गंभीरता को नहीं दर्शाता था। यह केवल ओवरी से जुड़ी समस्या जैसा लगता था, जबकि यह एक हार्मोनल, मेटाबॉलिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति है।नए नाम “PMOS” का उद्देश्य यह समझाना है कि यह बीमारी सिर्फ प्रजनन अंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है।

    शरीर पर अस
    इस समस्या के कारण महिलाओं में कई गंभीर जोखिम बढ़ सकते हैं:
    टाइप-2 डायबिटीज
    मोटापा और फैटी लीवर
    हाई ब्लड प्रेशर
    दिल की बीमारियों का खतरा
    बांझपन और गर्भधारण में कठिनाई
    डिप्रेशन और एंग्जायटी
    डॉक्टरों की राय

    विशेषज्ञों का कहना है कि नाम बदलने से इलाज की प्रक्रिया तुरंत नहीं बदलेगी, लेकिन इससे मरीजों को बीमारी को बेहतर समझने में मदद मिलेगी। अब डॉक्टर सिर्फ पीरियड्स ही नहीं, बल्कि ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी अधिक ध्यान देंगे।

    PCOS का नया नाम PMOS मेडिकल समझ को और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य बीमारी को केवल “ओवरी की समस्या” नहीं बल्कि एक पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली स्थिति के रूप में पहचान देना है।

  • भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा? ये जरूरी सावधानियां रखें ध्यान में

    भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा? ये जरूरी सावधानियां रखें ध्यान में


    नई दिल्ली । उत्तराखंड में चल रही बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यह पवित्र यात्रा जितनी आस्था से जुड़ी है, उतनी ही कठिन और जोखिमभरी भी हो सकती है खासकर खराब मौसम में।

    मौसम की जानकारी सबसे जरूरी
    विशेषज्ञों के अनुसार यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का अपडेट लगातार देखते रहना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है धूप के बाद तेज बारिश, ओलावृष्टि या धुंध जैसी स्थिति बन सकती है। यदि किसी क्षेत्र में रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी हो तो वहां यात्रा टालना ही सुरक्षित विकल्प है।

    यात्रा की योजना में रखें लचीलापन
    चार धाम यात्रा के दौरान समय का बहुत सख्त शेड्यूल न रखें। बारिश और भूस्खलन के कारण रास्ते कई घंटों या कभी-कभी पूरे दिन के लिए बंद हो सकते हैं। इसलिए अतिरिक्त 1–2 दिन का समय रखना और होटल बुकिंग में लचीलापन रखना समझदारी मानी जाती है।

    सुबह की यात्रा सबसे सुरक्षित
    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ों में सुबह का समय यात्रा के लिए सबसे बेहतर होता है। शाम होते-होते धुंध और बारिश बढ़ने लगती है, जिससे विजिबिलिटी कम हो जाती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कोशिश करें कि लंबा सफर सुबह जल्दी शुरू कर शाम से पहले पूरा कर लिया जाए।

    जरूरी सामान साथ रखें
    यात्रा के दौरान हल्का लेकिन जरूरी सामान रखना बेहद जरूरी है। इसमें रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, अतिरिक्त मोजे और मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज शामिल होने चाहिए। खासकर केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे ट्रैक बारिश में बेहद फिसलन भरे हो जाते हैं।

    स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान
    बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ठंड, ऊंचाई और बारिश की वजह से सांस लेने में दिक्कत, थकान और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, हार्ट या ब्लड प्रेशर के मरीजों को यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    सावधानी ही सुरक्षा है
    विशेषज्ञ मानते हैं कि चार धाम यात्रा को सफल बनाने के लिए तैयारी और सतर्कता सबसे जरूरी है। सही योजना, मौसम की जानकारी और जरूरी सावधानियों के साथ यह यात्रा न सिर्फ सुरक्षित बल्कि यादगार भी बन सकती है।

  • मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच

    मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच


    नई दिल्ली । भारतीय रसोई में हल्दी सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि सेहत और औषधीय गुणों का अहम हिस्सा मानी जाती है। लेकिन आजकल बाजार में मिलावट वाली हल्दी की समस्या बढ़ती जा रही है, जो लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। ऐसे में हल्दी की शुद्धता जांचना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार हल्दी में चमकदार पीला रंग देने के लिए मेटानिल येलो, लेड क्रोमेट जैसे केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इसके अलावा चॉक पाउडर या घटिया क्वालिटी के कच्चे पदार्थों की मिलावट भी की जाती है, जिससे इसकी शुद्धता पर असर पड़ता है।

    पानी से करें आसान टेस्ट
    घर पर हल्दी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका है वॉटर टेस्ट। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच हल्दी डालकर कुछ देर छोड़ दें। अगर हल्दी नीचे बैठ जाए और पानी हल्का पीला रहे, तो हल्दी को शुद्ध माना जाता है। लेकिन अगर पानी ज्यादा गहरा पीला हो जाए या हल्दी पूरी तरह घुलने लगे, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है।

    हथेली से भी पता चलेगा सच
    एक और आसान तरीका है हथेली टेस्ट। एक चुटकी हल्दी हथेली पर रखकर उसे अंगूठे से 10–20 सेकंड तक रगड़ें। असली हल्दी हल्का पीला दाग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी का रंग अक्सर अलग या फीका होता है।

    मिलावटी हल्दी के नुकसान
    विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी हल्दी के सेवन से पेट दर्द, अपच, मतली और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक इसका सेवन लिवर और पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है।

    खरीदते समय रखें ये सावधानी
    हल्दी खरीदते समय हमेशा भरोसेमंद ब्रांड चुनें और ज्यादा चमकदार पीले रंग पर भरोसा न करें। समय-समय पर घर में इसकी जांच करना भी सुरक्षित माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों की शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि छोटी-सी मिलावट भी लंबे समय में बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।

  • बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग

    बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग


    नई दिल्ली । आजकल कई लोग ऐसी परेशानी से जूझ रहे हैं, जिसमें खाना खाते ही तुरंत वॉशरूम जाने की जरूरत महसूस होने लगती है। बाहर खाना हो, ऑफिस में लंच करना हो या किसी फंक्शन में बैठना—हर बार मन में यही डर बना रहता है कि कहीं अचानक टॉयलेट न जाना पड़ जाए। डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहे तो बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि इस स्थिति को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स (Gastrocolic Reflex) कहा जाता है। यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें खाना पेट में पहुंचते ही आंतें सक्रिय हो जाती हैं। हालांकि अगर यह प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा होने लगे और हर बार दस्त, पेट दर्द या गैस की समस्या पैदा करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    डॉक्टरों के अनुसार, कई बार पेट ठीक से साफ न होने, खराब खानपान, ज्यादा मसालेदार भोजन, तनाव या कमजोर पाचन तंत्र के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। खाना खाते ही पेट में मरोड़, गैस और टॉयलेट जाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा होना आंतों में संक्रमण या पाचन संबंधी बीमारी की तरफ इशारा कर सकता है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो लिवर और आंतों की जांच करवाना जरूरी हो जाता है। समय रहते इलाज न कराने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी, कमजोरी और गंभीर पाचन समस्याएं हो सकती हैं।

    इस परेशानी से जुड़ी कुछ प्रमुख बीमारियां भी सामने आती हैं। इनमें इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) प्रमुख है, जिसमें खाना खाते ही पेट दर्द और गैस बनने लगती है। वहीं कुछ लोगों को दूध या डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है, जिसे लैक्टोज इंटॉलरेंस कहा जाता है। ऐसे लोगों को दूध पीते ही दस्त या पेट खराब होने लगता है। इसके अलावा सीलिएक डिजीज में गेहूं या ग्लूटेन से बनी चीजें खाने पर आंतें प्रभावित होती हैं और बार-बार दस्त की समस्या हो सकती है।

    डॉक्टरों की सलाह है कि अगर खाना खाते ही बार-बार टॉयलेट जाना पड़ रहा है, पेट में लगातार दर्द रहता है, वजन कम हो रहा है या कमजोरी महसूस हो रही है, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। खानपान में सुधार, पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन और तनाव कम करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

  • प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क

    प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क


    नई दिल्ली । गर्भावस्था के दौरान होने वाली जेस्टेशनल डायबिटीज को अक्सर महिलाएं अस्थायी समस्या मानकर भूल जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर डिलीवरी के बाद भी लंबे समय तक शरीर पर बना रह सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी के बाद ब्लड शुगर भले ही सामान्य हो जाए, लेकिन शरीर में हुए हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव भविष्य में थायरॉयड, हार्ट डिजीज और टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मां बनने के बाद ज्यादातर महिलाओं का पूरा ध्यान बच्चे की देखभाल में चला जाता है। ऐसे में लगातार थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कमजोरी, मूड स्विंग्स, डिप्रेशन या ठंड ज्यादा लगने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि यही संकेत थायरॉयड डिसफंक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं।

    डॉक्टरों का कहना है कि जेस्टेशनल डायबिटीज के दौरान शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिसका असर थायरॉयड ग्लैंड पर भी पड़ सकता है। थायरॉयड शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसमें गड़बड़ी होने पर शरीर धीरे-धीरे कई समस्याओं की चपेट में आने लगता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि थायरॉयड की परेशानी अचानक नहीं दिखती, बल्कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। बिना वजह वजन बढ़ना, ड्राई स्किन, ध्यान लगाने में परेशानी, एंग्जायटी, पीरियड्स अनियमित होना और लगातार कमजोरी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई महिलाएं इन्हें पोस्ट-प्रेग्नेंसी बदलाव समझकर अनदेखा कर देती हैं, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हुई हो, उन्हें डिलीवरी के बाद भी नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। खासतौर पर अगर परिवार में डायबिटीज या थायरॉयड की हिस्ट्री हो तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

    डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर ब्लड शुगर व थायरॉयड टेस्ट करवाकर भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। क्योंकि मां की सेहत सिर्फ गर्भावस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका असर लंबे समय तक पूरे शरीर पर दिखाई देता है।