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  • रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट

    रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट


    नई दिल्ली।  रीवा शहर में बुधवार देर रात एक शादी समारोह उस समय हंगामे में बदल गया, जब दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गई। मामला शहर के व्यस्त इलाके स्थित गायत्री हॉल के सामने का है, जहां बीच सड़क पर दोनों पक्षों के लोगों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। खास बात यह रही कि यह पूरी घटना सिविल लाइन थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई, जिससे इलाके में देर रात अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, घोघर निवासी संतोष सेन और रामरती सेन की बेटी पलक सेन का विवाह समारोह गायत्री हॉल में आयोजित किया गया था। बारात रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र से आई थी। दूल्हा पंकज सेन अपने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचा था। कार्यक्रम के दौरान कुछ युवकों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए मारपीट में बदल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के लोग अचानक सड़क पर आ गए और एक-दूसरे पर हमला करने लगे। काफी देर तक सड़क पर लात-घूंसे चलते रहे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और कई लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सड़क पर हंगामे के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति काफी देर तक तनावपूर्ण बनी रही। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। पुलिस की मौजूदगी के बाद हालात नियंत्रण में आए।

    घटना के दौरान मौजूद कुछ लोगों ने पूरी मारपीट का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दोनों पक्षों के लोग सड़क पर एक-दूसरे से भिड़ते दिखाई दे रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और विवाद की असली वजह जानने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • कोर्ट में सक्रिय दिखीं ममता बनर्जी, चुनावी हिंसा मामले में पेश की पैरवी, बाहर विरोध और नारेबाजी ने खींचा ध्यान

    कोर्ट में सक्रिय दिखीं ममता बनर्जी, चुनावी हिंसा मामले में पेश की पैरवी, बाहर विरोध और नारेबाजी ने खींचा ध्यान

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर अदालत और सियासी हलकों के केंद्र में आ गई है, जब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के लिए काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं। यह मामला राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद सामने आए कथित चुनावी हिंसा से जुड़ा था, जिसकी सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत के समक्ष अपनी बात रखी और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई।

    सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने राज्य में चुनाव परिणामों के बाद हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई जगहों पर हिंसा, आगजनी और अन्य आपराधिक गतिविधियों की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मामलों में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे पीड़ित पक्षों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने अदालत से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

    ममता बनर्जी के साथ उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगी भी मौजूद रहे, और पूरे कोर्ट परिसर में उनकी मौजूदगी ने मीडिया और वकीलों का ध्यान खींच लिया। सुनवाई के दौरान उनका व्यवहार पूरी तरह औपचारिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप रहा, जहां उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया कि वे पहले भी वकालत से जुड़ी रही हैं और कानून की समझ रखती हैं।

    हालांकि सुनवाई समाप्त होने के बाद जैसे ही वह कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, माहौल अचानक बदल गया। परिसर के गलियारों में मौजूद कुछ लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और नारेबाजी शुरू हो गई। इस दौरान राजनीतिक नारे लगाए गए, जिससे वातावरण कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित किया और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब राज्य में चुनावी हिंसा को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पहले से ही तेज हैं। विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक ओर जहां कुछ याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया है कि चुनाव परिणामों के बाद हिंसा के चलते कई लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि शिकायतों की संख्या को लेकर तथ्य अलग हैं और कई मामलों में सही कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

    इस मामले की पृष्ठभूमि में यह भी सामने आता है कि ममता बनर्जी का कानूनी क्षेत्र से पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद कानून की पढ़ाई की थी और कुछ समय तक अदालत में वकालत भी की थी, जिसके बाद उन्होंने पूरी तरह राजनीति में प्रवेश किया।

    राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तरों पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। अदालत में रखी गई दलीलों के साथ-साथ बाहर हुई घटनाओं ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आने वाले समय में इस मामले की सुनवाई और उससे जुड़े तथ्य राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी असर डाल सकते हैं।

  • महाकाल मंदिर में 5 लाख का ब्रेसलेट गायब, CCTV से खुला राज और 1.5 घंटे में रिकवरी

    महाकाल मंदिर में 5 लाख का ब्रेसलेट गायब, CCTV से खुला राज और 1.5 घंटे में रिकवरी


    नई दिल्ली। उज्जैन जिला अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ओपीडी व्यवस्था, उपस्थिति रजिस्टर और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक निर्धारित समय पर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई।

    निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ विभागों में डॉक्टर सुबह 9 बजे से निर्धारित ड्यूटी समय पर मौजूद नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने और सभी संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सीईओ श्रेयांश कुमट ने यह भी दोहराया कि शासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी समय का पालन नहीं कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों को चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।

    निरीक्षण के दौरान सीईओ ने केवल उपस्थिति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की स्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और सुधार के निर्देश दिए।

    अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया कि अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

    इस कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और अब सभी चिकित्सकों को उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सख्त पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • सीईओ की सख्ती: ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर, वेतन कटौती का फैसला

    सीईओ की सख्ती: ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर, वेतन कटौती का फैसला


    नई दिल्ली। उज्जैन जिला अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ओपीडी व्यवस्था, उपस्थिति रजिस्टर और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक निर्धारित समय पर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई।

    निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ विभागों में डॉक्टर सुबह 9 बजे से निर्धारित ड्यूटी समय पर मौजूद नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने और सभी संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सीईओ श्रेयांश कुमट ने यह भी दोहराया कि शासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी समय का पालन नहीं कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों को चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।

    निरीक्षण के दौरान सीईओ ने केवल उपस्थिति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की स्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और सुधार के निर्देश दिए।

    अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया कि अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

    इस कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और अब सभी चिकित्सकों को उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सख्त पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर

    उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर


    नई दिल्ली। उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के किनारे लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, रेस्टोरेंट और कॉलोनियों के रूप में 200 से अधिक अवैध निर्माण खड़े होने का मामला अब न्यायालय की निगरानी में है।

    इस पूरे मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह नदी किनारे 100 से 200 मीटर के दायरे में हुए सभी अतिक्रमणों की विस्तृत सूची तैयार करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि अब तक इन अवैध निर्माणों पर क्या कार्रवाई की गई है और उन्हें हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

    कोर्ट ने नगर निगम को यह रिपोर्ट 15 जून तक हर हाल में पेश करने का आदेश दिया है। इसी तारीख को मामले की अगली सुनवाई भी निर्धारित की गई है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि तब तक किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि इन क्षेत्रों में जारी नहीं रहनी चाहिए।

    यह याचिका वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर नियमों को दरकिनार करते हुए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं। इनमें होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और आवासीय कॉलोनियां तक शामिल हैं। इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे शिप्रा का जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि नदी के किनारे व्यावसायिक निर्माण न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अनुचित है। कोर्ट ने भी टिप्पणी की कि नदी तट पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या स्थायी निर्माण को अनुमति नहीं दी जा सकती।

    पूर्व सुनवाई में 5 मई को भी कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए थे कि सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि नदी किनारे कोई अवैध गतिविधि संचालित न हो। इसके साथ ही नदी निधि विकास योजना से जुड़ी रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए थे।

    अब सभी की नजरें 15 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट यह तय करेगी कि अवैध निर्माणों पर प्रशासन ने कितनी गंभीरता से कदम उठाए हैं।

  • लोकतंत्र को मजबूत करने की बड़ी पहल: देशभर में घर-घर पहुंचकर वोटर डेटा अपडेट, SIR का तीसरा चरण शुरू

    लोकतंत्र को मजबूत करने की बड़ी पहल: देशभर में घर-घर पहुंचकर वोटर डेटा अपडेट, SIR का तीसरा चरण शुरू

    नई दिल्ली । लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव मानी जाने वाली मतदाता सूची को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने के लिए देशभर में एक बड़ा और संगठित अभियान फिर से शुरू हो गया है। इस अभियान का तीसरा चरण अब उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच चुका है, जहां करोड़ों नागरिकों के रिकॉर्ड की जांच और अपडेट किया जाएगा। उद्देश्य साफ है कि हर योग्य नागरिक का नाम सूची में शामिल रहे और किसी भी तरह की गलती, दोहराव या अपात्र प्रविष्टि को पूरी तरह हटाया जा सके।

    इस बार अभियान का दायरा बेहद व्यापक है, क्योंकि इसमें 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए हैं। इन क्षेत्रों में टीमों को घर-घर भेजकर मतदाताओं की जानकारी का मिलान किया जा रहा है। यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक विस्तृत सत्यापन व्यवस्था है, जिसमें हर व्यक्ति के विवरण को मौजूदा रिकॉर्ड से मिलाकर देखा जाता है। कई स्थानों पर नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है, ताकि युवा नागरिकों को उनके अधिकार से वंचित न रहना पड़े।

    इस अभियान के दौरान लाखों अधिकारियों और सहयोगी एजेंटों की तैनाती की गई है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। वे फॉर्म भरवाने, जानकारी जांचने और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर डेटा अपडेट करने का काम कर रहे हैं। जिन लोगों का नाम सूची में नहीं है, उन्हें नए सिरे से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जबकि जिनके नाम गलत तरीके से दर्ज हैं या दो जगह मौजूद हैं, उन्हें हटाने या संशोधित करने का कार्य किया जा रहा है।

    दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची की घोषणा की समयसीमा भी तय की गई है, जिससे चुनावी तैयारियों को एक स्पष्ट दिशा मिलेगी। वहीं कुछ पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में मौसम और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए कार्यक्रम को बाद में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह अभियान परिस्थितियों के अनुसार लचीले ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।

    यह पूरी कवायद सिर्फ डेटा सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से है। पिछले कई वर्षों में जनसंख्या का स्थानांतरण, शहरीकरण और कई तकनीकी कारणों से मतदाता सूची में कई तरह की विसंगतियां देखने को मिली हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए यह घर-घर सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है, ताकि हर वोट की सटीक पहचान सुनिश्चित हो सके।

    इस प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका। हर व्यक्ति को अपने दस्तावेजों के साथ जानकारी का मिलान करना होता है, ताकि रिकॉर्ड पूरी तरह सही रहे। यह कदम न केवल चुनावी प्रणाली को मजबूत करता है, बल्कि लोगों के मतदान अधिकार को भी अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाता है।

    तीसरे चरण के साथ यह साफ हो गया है कि देश एक बड़े स्तर पर अपने मतदाता रिकॉर्ड को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में चुनावी व्यवस्था और अधिक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद बन सके।

  • हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें

    हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले पर सुनवाई होने जा रही है, जिस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है, जो 2018 के एक चुनावी भाषण पर आधारित है।

    यह मामला झाबुआ में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक का जिक्र करते हुए मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े लोगों का नाम लिया था। इसी बयान को लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने एमपी-एमएलए विशेष अदालत भोपाल में मानहानि का परिवाद दायर किया था।

    बाद में विशेष अदालत ने इस मामले में राहुल गांधी को समन जारी किया, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने Jabalpur हाईकोर्ट का रुख किया। राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में समन और पूरे परिवाद को निरस्त करने की मांग की गई है।

    पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की गई थीं। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि यह परिवाद तथ्यात्मक रूप से कमजोर है और इसमें लगाए गए आरोप ठोस सबूतों पर आधारित नहीं हैं।

    वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि 2018 में कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने झाबुआ की चुनावी सभा में अपने भाषण के दौरान पनामा पेपर्स लीक का उल्लेख करते हुए कथित रूप से गलत जानकारी दी थी, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ कार्रवाई का उदाहरण देते हुए मध्यप्रदेश में भी ऐसी कार्रवाई न होने की बात कही थी, जिससे शिकायतकर्ता पक्ष को आपत्ति है।

    हालांकि, बाद में राहुल गांधी ने यह स्वीकार किया था कि बयान के दौरान उनसे नाम को लेकर भ्रम हो गया था और उनका आशय किसी अन्य व्यक्ति से था।

    Jabalpur हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पहले भी हो चुकी है, जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। पिछली सुनवाई में समय मांगने पर अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया था।

    आज की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि संभावना जताई जा रही है कि यह अंतिम चरण हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो कोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकता है कि ट्रायल जारी रहेगा या नहीं। फिलहाल इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर नजर बनी हुई है।

  • जबलपुर में खौफनाक वारदात: गले और चेहरे पर चाकू मारकर युवक की हत्या

    जबलपुर में खौफनाक वारदात: गले और चेहरे पर चाकू मारकर युवक की हत्या


    नई दिल्ली।  मध्यप्रदेश के Jabalpur में एक बार फिर देर रात हुई हिंसक वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी है। गोहलपुर थाना क्षेत्र में 20 वर्षीय युवक की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। यह घटना बुधवार देर रात की बताई जा रही है, जिसमें पुरानी रंजिश को मुख्य वजह माना जा रहा है।

    मृतक की पहचान समता कॉलोनी निवासी भावेश वीरानी के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, भावेश अपने घर के पास देर रात घूम रहा था, तभी बाइक पर सवार होकर तीन युवक वहां पहुंचे। आरोपियों की पहचान अरुण, आयुष और शिव के रूप में हुई है।

    बताया जा रहा है कि आरोपियों ने पहुंचते ही भावेश को घेर लिया और पुराने विवाद को लेकर बहस शुरू कर दी। कुछ ही मिनटों में यह बहस हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि तीनों हमलावरों ने युवक पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए, जिसमें गले और हाथ पर गंभीर चोटें आईं।

    हमले के बाद भावेश मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी तुरंत वहां से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

    Jabalpur के गोहलपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल युवक को तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। हालांकि अत्यधिक खून बह जाने के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    परिजनों का कहना है कि करीब छह महीने पहले भावेश का आरोपियों से विवाद हुआ था, जिसके बाद से दोनों पक्षों में तनाव चल रहा था। उसी रंजिश का बदला लेने के लिए इस हत्या को अंजाम दिया गया।

    घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ नामजद हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। लगातार हो रही चाकूबाजी की घटनाओं ने शहर की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मामूली विवाद बना खूनी संघर्ष: ग्वालियर में सूजे से वार, पुलिस ने दर्ज किया केस

    मामूली विवाद बना खूनी संघर्ष: ग्वालियर में सूजे से वार, पुलिस ने दर्ज किया केस


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में नशे के दौरान हुआ एक विवाद गंभीर हिंसा में बदल गया। थाटीपुर थाना क्षेत्र में दो पक्षों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट हुई, जिसमें एक युवक पर बर्फ फोड़ने वाले सूजे से हमला कर दिया गया और वह घायल हो गया।

    घटना बुधवार शाम की बताई जा रही है और यह विवेकानंद चौराहे के पास हुई। जानकारी के अनुसार, थाटीपुर निवासी बाबा वाल्मीकि और दिव्यांशु हमाल तथा कुमारपुर निवासी गोलू भदौरिया एक साथ द्वारकाधीश मंदिर के पास बैठकर शराब पी रहे थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर उनके बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    शुरुआत में विवाद केवल गाली-गलौज तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह झगड़े में बदल गया। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर गोलू भदौरिया के साथ मारपीट शुरू कर दी और उसे जमीन पर पटक दिया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।

    बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान पास में रखा बर्फ फोड़ने वाला सूजा (आइस पिक) उठा लिया गया और उसी से गोलू पर हमला किया गया। इस हमले में वह घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आरोपी वहां से फरार हो गए।

    घायल युवक किसी तरह थाटीपुर थाने पहुंचा और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    थाटीपुर थाना प्रभारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि घटना शराब पीने के दौरान हुए विवाद का परिणाम थी। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    Gwalior में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि नशे में छोटी सी कहासुनी भी गंभीर अपराध में बदल सकती है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश कर रही है और घायल का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है।

  • SAF आरक्षक पर दुष्कर्म का आरोप: सगाई के बाद संबंध बनाकर शादी से इनकार का मामला

    SAF आरक्षक पर दुष्कर्म का आरोप: सगाई के बाद संबंध बनाकर शादी से इनकार का मामला


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने एसएएफ (स्पेशल आर्म्ड फोर्स) के एक आरक्षक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से इनकार करने का आरोप लगाया है। मामला माधौगंज थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह एमए अंतिम वर्ष की छात्रा है। उसके अनुसार 15 फरवरी को हिंदू रीति-रिवाज से उसका रोका हुआ था और 20 मार्च को परिवार की सहमति से उसकी सगाई अंकित ओझा नाम के युवक से हुई थी, जो एसएएफ सेकेंड बटालियन में आरक्षक के पद पर पदस्थ है और तिलक नगर स्थित सरकारी आवास में रहता है।

    युवती का आरोप है कि सगाई के बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ गई और वे एक-दूसरे के साथ समय बिताने लगे। इसी दौरान 5 मई को दोनों की शादी तय की गई थी। शिकायत के अनुसार 3 मार्च को आरोपी ने तिलक नगर स्थित सरकारी आवास पर पहली बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद 9 मार्च और 18 मार्च को भी ऐसे संबंध बने, जिसमें आरोपी ने यह भरोसा दिलाया कि शादी निश्चित है, इसलिए इसमें कोई समस्या नहीं है।

    पीड़िता का कहना है कि जब परिवार ने शादी की रस्मों को आगे बढ़ाने के लिए लगन की बात की, तो आरोपी ने अचानक शादी से इनकार कर दिया। काफी समझाने और बातचीत के बावजूद आरोपी अपने फैसले पर अड़ा रहा और शादी करने से साफ मना कर दिया।

    इसके बाद पीड़िता ने माधौगंज थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

    माधौगंज थाना प्रभारी दिव्या तिवारी ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    Gwalior में सामने आया यह मामला एक बार फिर रिश्तों में भरोसे और कानूनी जटिलताओं को लेकर चर्चा में आ गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।