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  • KKR पर मंडराया बाहर होने का खतरा, पुजारा बोले- अब हर मैच बनेगा करो या मरो

    KKR पर मंडराया बाहर होने का खतरा, पुजारा बोले- अब हर मैच बनेगा करो या मरो


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रायपुर में खेले गए मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ मिली हार के बाद टीम की प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। भारतीय टीम के अनुभवी बल्लेबाज Cheteshwar Pujara ने भी माना है कि अब केकेआर के लिए टॉप-4 में जगह बनाना बेहद कठिन हो गया है।

    मैच के बाद जियो हॉटस्टार पर बातचीत करते हुए पुजारा ने कहा कि केकेआर के लिए अब हालात काफी मुश्किल हो चुके हैं। उनके मुताबिक टीम के पास अभी भी कुछ मैच बाकी हैं, लेकिन प्लेऑफ की दौड़ में बने रहने के लिए सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि दूसरे परिणामों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अब टीम को अपने सम्मान और बेहतर अंत के लिए खेलना होगा।

    इस हार के साथ केकेआर को सीजन की छठी हार झेलनी पड़ी। टीम 11 मैचों में सिर्फ 9 अंक जुटा सकी है और फिलहाल अंक तालिका में आठवें स्थान पर मौजूद है। ऐसे में बचे हुए तीनों मुकाबले जीतने के बावजूद टीम का प्लेऑफ में पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है।

    मैच की बात करें तो पहले बल्लेबाजी करते हुए केकेआर ने शानदार शुरुआत की। युवा बल्लेबाज Angkrish Raghuvanshi ने 71 रन की बेहतरीन पारी खेली, जबकि Rinku Singh ने नाबाद 49 रन बनाकर टीम को 192 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।

    हालांकि लक्ष्य का पीछा करते हुए आरसीबी की ओर से Virat Kohli ने शानदार शतक जड़ दिया। विराट ने 60 गेंदों पर नाबाद 105 रन की मैच जिताऊ पारी खेली और टीम को 19.1 ओवर में 6 विकेट से जीत दिला दी। उनके अलावा Devdutt Padikkal ने भी 39 रन का अहम योगदान दिया।

    मैच का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट विराट कोहली का छूटा हुआ कैच साबित हुआ। केकेआर के खिलाड़ियों ने विराट को जीवनदान दिया, जिसका उन्होंने पूरा फायदा उठाते हुए मैच को टीम की झोली में डाल दिया।

    केकेआर के हेड कोच Abhishek Nayar ने भी माना कि विराट का कैच छोड़ना टीम को भारी पड़ गया। उनके मुताबिक अगर वह कैच पकड़ लिया जाता तो मुकाबले का नतीजा अलग हो सकता था।

    अब केकेआर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बाकी मैच जीतकर सम्मानजनक विदाई लेने की होगी, जबकि आरसीबी की टीम इस जीत के साथ प्लेऑफ की दौड़ में और मजबूत हो गई है।

  • अंतरराष्ट्रीय मंच पर उथल-पुथल: गुप्त नेटवर्क, ड्रोन हमले और हाई-प्रोफाइल मामलों से दुनिया में नया संकट

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर उथल-पुथल: गुप्त नेटवर्क, ड्रोन हमले और हाई-प्रोफाइल मामलों से दुनिया में नया संकट

    नई दिल्ली ।  दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सामने आ रहे हालिया घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था एक बेहद जटिल दौर से गुजर रही है। एक ओर जहां गुप्त गतिविधियों और जासूसी से जुड़े मामलों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर युद्ध और राजनीतिक आरोपों ने वैश्विक स्थिरता को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

    हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया। जांच के दौरान यह दावा किया गया कि एक बड़े शहर के व्यावसायिक इलाके में एक छिपा हुआ नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था, जो विदेशी सरकार से जुड़े प्रभाव में काम कर रहा था। आरोपों के अनुसार इस नेटवर्क का इस्तेमाल उन लोगों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था जो उस विदेशी देश की नीतियों के खिलाफ थे या लोकतांत्रिक विचार रखते थे। अदालत की सुनवाई में यह भी सामने आया कि इसमें शामिल व्यक्ति विदेशी एजेंट के रूप में कार्य कर रहा था और जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी की गई थी। इस खुलासे ने विदेशी हस्तक्षेप और आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।

    दूसरी ओर यूरोप में चल रहा युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। एक बड़ी राजधानी पर ड्रोन और मिसाइलों से हुए हमलों ने कई इमारतों को नुकसान पहुंचाया और आम नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल दिया। कई इलाकों में आग लगने और इमारतों के ढहने की घटनाओं ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। लगातार हो रहे हमलों के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, जबकि बचाव कार्य तेजी से जारी है। इस संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध का सबसे बड़ा असर हमेशा आम जनता पर ही पड़ता है।

    इसी बीच एक और राजनीतिक मामला सामने आया है, जहां एक देश के पूर्व शीर्ष अधिकारी पर गंभीर आर्थिक अपराध के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि बड़े पैमाने पर धन को अवैध तरीके से स्थानांतरित किया गया और इसे छिपाने के लिए जटिल वित्तीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। अदालत ने इस मामले में गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं, हालांकि आरोपी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

    वहीं एक अन्य देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार से जुड़े आरोपों के कारण राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक पूर्व उच्च अधिकारी पर गंभीर आरोप हैं कि उनके नेतृत्व में चलाए गए अभियानों के दौरान बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ। अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया है, जिससे देश की राजनीति में तनाव बढ़ गया है।

    इन सभी घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि दुनिया इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां सुरक्षा, राजनीति और न्याय व्यवस्था लगातार चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। विभिन्न देशों में सामने आ रहे ऐसे मामलों ने वैश्विक संबंधों में अविश्वास को बढ़ाया है और आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर इसके गहरे प्रभाव पड़ने की संभावना है।

  • BBL में बड़ा बदलाव संभव: सिडनी थंडर के कोच बन सकते हैं एंड्रयू फ्लिंटॉफ

    BBL में बड़ा बदलाव संभव: सिडनी थंडर के कोच बन सकते हैं एंड्रयू फ्लिंटॉफ


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया की मशहूर टी20 लीग बिग बैश लीग (BBL) में इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर Andrew Flintoff को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्लिंटॉफ जल्द ही Sydney Thunder के नए मुख्य कोच बनाए जा सकते हैं। फ्रेंचाइजी उन्हें इस पद के लिए सबसे मजबूत उम्मीदवार मान रही है और आधिकारिक घोषणा भी जल्द हो सकती है।

    अगर ऐसा होता है तो यह फ्लिंटॉफ के कोचिंग करियर का बड़ा कदम होगा, क्योंकि पहली बार वह किसी विदेशी टी20 लीग में हेड कोच की भूमिका निभाते नजर आएंगे।

    फ्लिंटॉफ पिछले कुछ समय से इंग्लैंड क्रिकेट में कोचिंग और मेंटरिंग की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उन्होंने लगभग एक साल तक इंग्लैंड की उभरती टीम England Lions के साथ काम किया है। इसके अलावा वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी लायंस टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रह चुके हैं।

    कोचिंग में उनका अनुभव सिर्फ इंटरनेशनल सेटअप तक सीमित नहीं है। फ्लिंटॉफ ने इंग्लैंड की टी20 लीग ‘द हंड्रेड’ में Northern Superchargers के साथ भी काम किया है। 2024 और 2025 सीजन में उनके नेतृत्व में टीम ने क्रमशः चौथा और तीसरा स्थान हासिल किया था।

    दिलचस्प बात यह है कि फ्लिंटॉफ का बीबीएल से पुराना नाता भी रहा है। उन्होंने 2014-15 सीजन में Brisbane Heat की ओर से खेला था। यही उनके प्रोफेशनल क्रिकेट करियर का आखिरी चरण साबित हुआ। सात मुकाबले खेलने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

    सिडनी थंडर फिलहाल नए मुख्य कोच की तलाश में है। टीम के पूर्व कोच Trevor Bayliss का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। हालांकि उन्होंने 2024-25 सीजन में टीम को फाइनल तक पहुंचाया था, लेकिन लगातार खराब प्रदर्शन के कारण फ्रेंचाइजी बदलाव के मूड में नजर आ रही है।

    48 वर्षीय फ्लिंटॉफ इंग्लैंड क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1998 से 2009 के बीच इंग्लैंड के लिए 79 टेस्ट, 141 वनडे और 7 टी20 मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 3845 रन और 226 विकेट दर्ज हैं, जबकि वनडे में उन्होंने 3394 रन बनाने के साथ 169 विकेट भी लिए। अब देखने वाली बात होगी कि क्या फ्लिंटॉफ की कोचिंग में सिडनी थंडर बीबीएल में नई शुरुआत कर पाती है या नहीं।

  • टी20 वर्ल्ड कप के हीरो IPL 2026 में फ्लॉप! स्टार खिलाड़ियों की खराब फॉर्म बनी चिंता

    टी20 वर्ल्ड कप के हीरो IPL 2026 में फ्लॉप! स्टार खिलाड़ियों की खराब फॉर्म बनी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय टीम को टी20 विश्व कप 2026 का खिताब दिलाने वाले कई स्टार खिलाड़ी आईपीएल 2026 में उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। जिन खिलाड़ियों ने वर्ल्ड कप में अपने दमदार प्रदर्शन से टीम इंडिया को चैंपियन बनाया था, वही खिलाड़ी अब आईपीएल में खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो गेंदबाज विकेट लेने में नाकाम दिख रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी फ्रेंचाइजियों के प्रदर्शन पर भी पड़ा है।

    सबसे ज्यादा चर्चा मुंबई इंडियंस के स्टार बल्लेबाज और भारतीय टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव की हो रही है। वर्ल्ड कप में धमाकेदार बल्लेबाजी करने वाले सूर्या आईपीएल 2026 में अब तक 11 मैचों में सिर्फ 195 रन ही बना सके हैं। उनके बल्ले से पूरे सीजन में केवल एक अर्धशतक निकला है। मुंबई इंडियंस को उनसे जिस विस्फोटक बल्लेबाजी की उम्मीद थी, वह अब तक दिखाई नहीं दी।

    हार्दिक पांड्या का प्रदर्शन भी सवालों के घेरे में है। कप्तान और ऑलराउंडर दोनों भूमिकाओं में हार्दिक संघर्ष करते नजर आए हैं। 8 मुकाबलों में उन्होंने सिर्फ 146 रन बनाए हैं, जबकि गेंदबाजी में केवल 4 विकेट ही हासिल कर सके हैं। उनकी कप्तानी को लेकर भी लगातार आलोचना हो रही है।

    चेन्नई सुपर किंग्स के शिवम दुबे भी इस सीजन प्रभाव छोड़ने में असफल रहे हैं। टी20 वर्ल्ड कप में मैच फिनिशर की भूमिका निभाने वाले दुबे 10 मैचों में सिर्फ 165 रन बना सके हैं। उनके बल्ले से एक भी अर्धशतक नहीं निकला है, जबकि गेंदबाजी में भी वह सिर्फ एक विकेट ले पाए हैं।

    सबसे बड़ा झटका मुंबई इंडियंस को जसप्रीत बुमराह की खराब फॉर्म से लगा है। दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में गिने जाने वाले बुमराह 11 मैचों में सिर्फ 3 विकेट ही ले सके हैं। उनका इकोनॉमी रेट भी 8.51 का रहा है, जो उनके स्तर के हिसाब से काफी खराब माना जा रहा है।

    दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल भी बल्ले और गेंद दोनों से उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। अक्षर ने 12 मैचों में केवल 100 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट भी बेहद साधारण रहा है। हालांकि गेंदबाजी में उन्होंने 10 विकेट जरूर लिए हैं, लेकिन उनकी बल्लेबाजी टीम के लिए चिंता बनी हुई है।

    पंजाब किंग्स के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह विकेट तो निकाल रहे हैं, लेकिन रन रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं। 11 मैचों में 13 विकेट लेने के बावजूद उनका इकोनॉमी 9.92 का रहा है। डेथ ओवरों में उनकी महंगी गेंदबाजी पंजाब के लिए परेशानी बनी हुई है।

    मुंबई इंडियंस के युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा ने एक शतक जरूर लगाया, लेकिन बाकी मुकाबलों में निरंतरता की कमी साफ नजर आई। वहीं दिल्ली कैपिटल्स के स्पिनर कुलदीप यादव भी इस सीजन फीके दिखाई दिए हैं। कुलदीप 11 मैचों में सिर्फ 7 विकेट ले सके हैं और उनका इकोनॉमी 10.66 तक पहुंच गया है।

    इन खिलाड़ियों की खराब फॉर्म ने आईपीएल 2026 का समीकरण पूरी तरह बदल दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि टूर्नामेंट के बाकी मुकाबलों में ये स्टार खिलाड़ी वापसी कर पाते हैं या नहीं।

  • पीएम की अपील के बाद देशभर में बदलाव की लहर: काफिले घटे, कर्मचारी व्यवस्था बदली, सरकारी खर्च पर सख्ती शुरू

    पीएम की अपील के बाद देशभर में बदलाव की लहर: काफिले घटे, कर्मचारी व्यवस्था बदली, सरकारी खर्च पर सख्ती शुरू

    प्रधानमंत्री की पेट्रोल और डीजल की बचत को लेकर की गई हालिया अपील का असर अब देश के कई राज्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। केंद्र से लेकर राज्य सरकारों तक, प्रशासनिक ढांचे में सादगी और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर तेजी से बदलाव किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य न केवल ईंधन की बचत करना है, बल्कि सरकारी खर्च को कम करते हुए आम जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश भी देना है कि देश के नेतृत्व स्तर पर भी संसाधनों के उपयोग में अनुशासन अपनाया जा रहा है।

    त्रिपुरा में इस दिशा में सबसे बड़ा कदम देखने को मिला है, जहां ग्रुप C और D श्रेणी के केवल 50 प्रतिशत सरकारी कर्मचारी ही प्रतिदिन कार्यालय आएंगे, जबकि शेष कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था के तहत कार्य करेंगे। राज्य सरकार ने सभी विभागों को साप्ताहिक रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कार्य प्रभावित न हो और संसाधनों की भी बचत हो सके। इसी तरह आंध्र प्रदेश और गोवा में मुख्यमंत्री स्तर पर भी बड़े बदलाव किए गए हैं, जहां वीआईपी काफिले में वाहनों की संख्या को आधा कर दिया गया है। इससे सरकारी दौरों के दौरान ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

    हरियाणा में मुख्यमंत्री ने स्वयं सप्ताह में एक दिन बिना सरकारी वाहन के चलने का निर्णय लिया है, जबकि पंजाब में हर बुधवार को अधिकारियों के लिए चार पहिया वाहनों के उपयोग पर रोक जैसी व्यवस्था लागू की गई है। ओडिशा में भी मुख्यमंत्री के काफिले को सीमित कर मात्र चार वाहनों तक लाया गया है, जिसमें सुरक्षा वाहनों को प्राथमिकता दी गई है। राजस्थान में भी मुख्यमंत्री के काफिले की गाड़ियों की संख्या को घटाकर पहले के मुकाबले काफी कम कर दिया गया है, जिससे सरकारी यात्रा अधिक सरल और कम खर्चीली हो सके।

    बिहार और मध्य प्रदेश में भी इस अभियान का प्रभाव देखा जा रहा है, जहां मंत्री और अधिकारी या तो इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग कर रहे हैं या फिर सीमित काफिले में यात्रा कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में कई जनप्रतिनिधियों ने व्यक्तिगत रूप से भी सादगी अपनाने की पहल की है, जिससे जनता में एक सकारात्मक संदेश गया है। उत्तर प्रदेश में भी सरकारी बैठकों और यात्राओं को वर्चुअल मोड में स्थानांतरित करने और काफिले को आधा करने जैसे निर्णय लिए गए हैं, जो डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

    दिल्ली में भी मंत्री स्तर पर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ा है, जहां कुछ मंत्री मेट्रो और ई-रिक्शा से कार्यक्रमों में पहुंचे। महाराष्ट्र में भी सरकारी खर्चों में कटौती करते हुए विदेश यात्राओं और आयोजनों को सीमित किया गया है। वहीं गोवा में मुख्यमंत्री के काफिले को पहले के मुकाबले आधा कर दिया गया है, जिससे ईंधन बचत के प्रयासों को और मजबूती मिली है।

    कुल मिलाकर यह बदलाव केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी कार्यशैली में सादगी को प्राथमिकता दी जा रही है। यह पहल आने वाले समय में नीतिगत बदलावों और सार्वजनिक व्यवहार पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है, जिससे देश में एक अधिक संतुलित और टिकाऊ प्रशासनिक संस्कृति विकसित होने की उम्मीद की जा रही है।

  • सागर में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: अनाज रिकॉर्ड दर्ज करने के बदले ली थी रिश्वत

    सागर में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: अनाज रिकॉर्ड दर्ज करने के बदले ली थी रिश्वत


    नई दिल्ली। उज्जैन की जीवनरेखा मानी जाने वाली शिप्रा नदी एक बार फिर अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को लेकर चर्चा में है। करोड़ों रुपए खर्च कर नदी के शुद्धिकरण और सौंदर्यीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर शिप्रा के दोनों किनारों पर ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ की संरक्षित जमीन पर तेजी से अवैध निर्माण खड़े हो रहे हैं। होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, स्कूल और कॉलोनियों के रूप में फैल रहे इन निर्माणों पर अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है।

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को तलब किया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिप्रा नदी के 200 मीटर दायरे में हुए सभी अवैध निर्माणों की जानकारी प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि इन्हें हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने नगर निगम को 15 जून तक विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नदी तट के आसपास बनाए गए होटल, रिसॉर्ट और अन्य निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे शिप्रा में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जिन क्षेत्रों को पर्यावरणीय और धार्मिक दृष्टि से संरक्षित माना गया है, वहां निर्माण गतिविधियां लगातार जारी हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि नदी तट के समीप किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या निर्माण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता बलदीप सिंह गांधी ने कोर्ट को बताया कि नदी किनारे 100 से 200 मीटर की सीमा के भीतर 200 से अधिक अवैध निर्माण मौजूद हैं। इनमें कई ऐसे निर्माण भी हैं, जो बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    कोर्ट ने नगर निगम को निर्देशित किया है कि 15 जून तक सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार कर कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही तब तक इन अवैध निर्माणों में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं होने देने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने नदी निधि विकास योजना से संबंधित रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। माना जा रहा है कि यदि नगर निगम संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर पाया तो हाईकोर्ट और सख्त कदम उठा सकता है। शिप्रा नदी को बचाने और सिंहस्थ क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने को लेकर यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

  • भीषण गर्मी में अस्पताल में हंगामा: 30 मरीजों पर सिर्फ 2 कूलर, परिजन आपस में भिड़े

    भीषण गर्मी में अस्पताल में हंगामा: 30 मरीजों पर सिर्फ 2 कूलर, परिजन आपस में भिड़े


    नई दिल्ली। सागर जिला अस्पताल में भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं के बीच मंगलवार देर रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। महिला मेडिसिन वार्ड क्रमांक-6 में मरीजों के परिजनों के बीच कूलर की हवा में सोने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। रात करीब डेढ़ बजे हुए इस विवाद में दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे और बेल्ट चले, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    घटना का वीडियो बुधवार को सामने आया, जिसमें वार्ड के भीतर लोगों को एक-दूसरे पर हमला करते हुए देखा जा सकता है। मारपीट के दौरान वार्ड में भर्ती मरीज भयभीत हो गए और कई लोग अपने बिस्तरों से उठकर बाहर निकलते नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद कूलर के सामने जगह को लेकर शुरू हुआ था। गर्मी से परेशान परिजन कूलर के पास सोने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान कहासुनी हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

    वार्ड में मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। हंगामे की सूचना मिलते ही अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और ड्यूटी स्टाफ मौके पर पहुंचे। काफी समझाइश के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया गया।

    मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल की खराब व्यवस्थाओं के कारण इस तरह के विवाद पैदा हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिला वार्ड में 30 से अधिक मरीज भर्ती हैं, लेकिन पूरे वार्ड में सिर्फ दो कूलर लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, कई सीलिंग पंखे भी खराब पड़े हैं, जिससे उमस और गर्मी से मरीजों की हालत खराब हो रही है।

    परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। भीषण गर्मी में मरीजों और उनके साथ रहने वाले अटेंडरों को रातभर परेशानी झेलनी पड़ रही है।

    घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि वार्डों में कूलर, पंखे और हवा की पर्याप्त व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • तमिलनाडु राजनीति में बड़ा संकट: AIADMK दो गुटों में बंटी, पलानीस्वामी ने बागियों पर की सख्त कार्रवाई

    तमिलनाडु राजनीति में बड़ा संकट: AIADMK दो गुटों में बंटी, पलानीस्वामी ने बागियों पर की सख्त कार्रवाई


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है, जहां राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी AIADMK गंभीर अंदरूनी संकट से गुजर रही है। हाल ही में हुए फ्लोर टेस्ट के बाद पार्टी में खुलकर बगावत सामने आई है, जिससे न केवल संगठनात्मक ढांचा हिल गया है बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना बन गई है। इस घटनाक्रम ने पार्टी को दो स्पष्ट गुटों में विभाजित कर दिया है, जिसमें एक ओर एडप्पादी के. पलानीस्वामी का नेतृत्व है और दूसरी ओर षणमुगम और वेलुमणि के नेतृत्व में बागी खेमे का गठन हुआ है।

    फ्लोर टेस्ट के दौरान जब 25 AIADMK विधायकों ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK के पक्ष में क्रॉस वोट किया, तो राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सत्ता समीकरण बदलते नजर आए और TVK की स्थिति मजबूत होती दिखाई दी। पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।

    एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सख्त रुख अपनाते हुए षणमुगम और वेलुमणि को उनके पदों से हटा दिया। इसके साथ ही उन्होंने दलबदल विरोधी कानून के तहत संबंधित विधायकों को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पार्टी का दावा है कि बागी विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया है, जबकि दूसरी ओर बागी गुट इसे अवैध और असंवैधानिक बता रहा है।

    षणमुगम गुट ने पलटवार करते हुए कहा है कि पार्टी महासचिव को सीधे व्हिप नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, विधायकों की बैठक में ही नेता और व्हिप का चुनाव किया जाता है, इसलिए वर्तमान व्हिप नियुक्ति कानूनी रूप से मान्य नहीं है। इस विवाद ने पार्टी के भीतर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है, जिससे संकट गहरा गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच चेन्नई में तनाव का माहौल बन गया है। AIADMK मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी संभावित टकराव या हिंसा को रोका जा सके। 2022 में हुई हिंसक झड़पों की यादें अभी भी ताजा हैं, जब पार्टी के दो गुटों के बीच परिसर में तोड़फोड़ और मारपीट जैसी घटनाएं हुई थीं। प्रशासन इस बार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

    पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान ने संगठनात्मक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पलानीस्वामी गुट अब आगे की रणनीति तय करने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की तैयारी में है, वहीं बागी गुट ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे पार्टी मुख्यालय से दूरी बनाए रखेंगे।

    इस राजनीतिक उथल-पुथल का असर केवल AIADMK तक सीमित नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की पूरी राजनीति पर पड़ सकता है। सत्ता समीकरण बदलने की संभावना ने अन्य दलों की रणनीति भी प्रभावित कर दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी इस संकट से उबर पाती है या यह विभाजन स्थायी रूप ले लेता है।

  • स्कूटी से भागते समय दीवार से टकराया युवक, सड़क पर घंटों खून से लथपथ पड़ा रहा

    स्कूटी से भागते समय दीवार से टकराया युवक, सड़क पर घंटों खून से लथपथ पड़ा रहा


    नई दिल्ली। रीवा शहर में बुधवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के उपरहटी स्थित मछरिया गेट इलाके में दो गुटों के बीच मामूली विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। शराब के नशे में शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट और पथराव तक पहुंच गई। देर रात सड़क पर हुए इस हंगामे से पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे। दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई और फिर अचानक लात-घूंसे चलने लगे। कुछ ही देर में लोगों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। सड़क पर काफी देर तक हंगामा चलता रहा और आसपास मौजूद लोग डर के कारण इधर-उधर भागते नजर आए।

    इसी दौरान एक युवक स्कूटी से मौके से भागने की कोशिश कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह तेज रफ्तार में वाहन चला रहा था, तभी उसका संतुलन बिगड़ गया और स्कूटी सीधे सड़क किनारे दीवार से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में गहरी चोट आई और वह सड़क पर खून से लथपथ पड़ा रहा।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत घायल युवक को संभाला और संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार युवक की हालत गंभीर बनी हुई है।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली। रहवासियों का आरोप है कि घटना की सूचना कई बार पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंची। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर पहुंच जाती तो स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं और हिंसा को रोका जा सकता था।

    इलाके के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में लगातार असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। देर रात हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

    फिलहाल पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि मारपीट और पथराव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

  • रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट

    रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट


    नई दिल्ली।  रीवा शहर में बुधवार देर रात एक शादी समारोह उस समय हंगामे में बदल गया, जब दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गई। मामला शहर के व्यस्त इलाके स्थित गायत्री हॉल के सामने का है, जहां बीच सड़क पर दोनों पक्षों के लोगों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। खास बात यह रही कि यह पूरी घटना सिविल लाइन थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई, जिससे इलाके में देर रात अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, घोघर निवासी संतोष सेन और रामरती सेन की बेटी पलक सेन का विवाह समारोह गायत्री हॉल में आयोजित किया गया था। बारात रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र से आई थी। दूल्हा पंकज सेन अपने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचा था। कार्यक्रम के दौरान कुछ युवकों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए मारपीट में बदल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के लोग अचानक सड़क पर आ गए और एक-दूसरे पर हमला करने लगे। काफी देर तक सड़क पर लात-घूंसे चलते रहे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और कई लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सड़क पर हंगामे के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति काफी देर तक तनावपूर्ण बनी रही। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। पुलिस की मौजूदगी के बाद हालात नियंत्रण में आए।

    घटना के दौरान मौजूद कुछ लोगों ने पूरी मारपीट का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दोनों पक्षों के लोग सड़क पर एक-दूसरे से भिड़ते दिखाई दे रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और विवाद की असली वजह जानने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।