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  • सोने पर चीन का बड़ा दांव: लगातार खरीदारी से ग्लोबल मार्केट और डॉलर सिस्टम में बढ़ी हलचल

    सोने पर चीन का बड़ा दांव: लगातार खरीदारी से ग्लोबल मार्केट और डॉलर सिस्टम में बढ़ी हलचल

    नई दिल्ली। चीन की आक्रामक गोल्ड खरीदारी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक खिलाड़ियों में शामिल चीन अब वैश्विक गोल्ड मार्केट में भी मजबूत ताकत बनकर उभर रहा है। चीन का केंद्रीय बैंक लगातार 18वें महीने बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहा है, जिससे ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम और डॉलर आधारित व्यवस्था को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने अप्रैल 2026 में करीब 8 टन सोना खरीदा। इसके बाद चीन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व बढ़कर 7 करोड़ 28 लाख ट्रॉय औंस तक पहुंच गया है। मार्च 2026 के अंत तक इन भंडारों की अनुमानित कीमत लगभग 342.76 अरब डॉलर आंकी गई है।

    जानकारों के अनुसार, चीन की यह रणनीति केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दीर्घकालिक आर्थिक और भू-राजनीतिक सोच जुड़ी हुई है। बीजिंग लगातार अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा सोने में तब्दील कर रहा है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक अनिश्चितताओं ने चीन को अपनी वित्तीय रणनीति बदलने के लिए प्रेरित किया है। चीन के लिए सोना ऐसा सुरक्षित एसेट माना जा रहा है, जिसे किसी भी बाहरी प्रतिबंध के जरिए नियंत्रित या फ्रीज नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि वह इसे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के रूप में देख रहा है।

    इसके अलावा, चीन अपनी मुद्रा युआन को वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश भी कर रहा है। माना जा रहा है कि बड़े गोल्ड रिजर्व चीन की आर्थिक विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में युआन की स्वीकार्यता को मजबूती दे सकते हैं।

    गौरतलब है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद चीन की खरीदारी लगातार जारी है। इससे संकेत मिलता है कि बीजिंग अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चीन फिलहाल बाजार में हलचल मचाने के बजाय धीरे-धीरे मजबूत और सुरक्षित गोल्ड रिजर्व तैयार करने की नीति पर काम कर रहा है। हालांकि, उसकी लगातार बढ़ती मांग का असर अब वैश्विक गोल्ड मार्केट में साफ दिखाई देने लगा है। चीन के साथ आम निवेशकों की बढ़ती खरीदारी भी सोने की कीमतों को मजबूती दे रही है।

  • एमपी में गर्मी का कहर तेज, इंदौर-उज्जैन में लू का ऑरेंज अलर्ट, भोपाल-जबलपुर भी होंगे प्रभावित

    एमपी में गर्मी का कहर तेज, इंदौर-उज्जैन में लू का ऑरेंज अलर्ट, भोपाल-जबलपुर भी होंगे प्रभावित

    भोपाल । मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को मालवा-निमाड़ क्षेत्र समेत इंदौर और उज्जैन संभाग के कई शहर तेज गर्मी और लू की चपेट में रहे। छतरपुर के खजुराहो में सबसे अधिक 45.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक प्रदेश के लगभग आधे हिस्से में हीट वेव का असर बना रहेगा।

    गुरुवार को इंदौर, उज्जैन, धार और रतलाम में तेज लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में दिन के साथ रात का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे वॉर्म नाइट की स्थिति बनेगी। गर्म हवाओं का असर झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, देवास, सीहोर, शाजापुर, आगर-मालवा और राजगढ़ में भी देखने को मिलेगा।

    भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी गुरुवार को तेज गर्मी पड़ने के आसार हैं। शाजापुर, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है।

    बुधवार को प्रदेश के 12 शहरों में तापमान 44 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा, जबकि रतलाम में 45.2 डिग्री और धार में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर में 44.7 डिग्री, गुना में 44.6 डिग्री, श्योपुर और सागर में 44.4 डिग्री, खरगोन और रायसेन में 44.2 डिग्री, खंडवा में 44.1 डिग्री तथा दमोह में 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44.7 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, भोपाल में 43.2 डिग्री, इंदौर में 43.6 डिग्री, ग्वालियर में 42 डिग्री और जबलपुर में 42.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर जारी रहेगा। खासतौर पर इंदौर और उज्जैन संभाग में गर्मी का असर अधिक रहेगा, इसलिए यहां ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में भी लू चलने की चेतावनी दी गई है। 17 मई तक प्रदेश के कई जिलों में हीट वेव का असर बना रह सकता है।

    हालांकि, मई की शुरुआत में प्रदेश में लगातार मौसम बदला हुआ रहा। 30 अप्रैल से शुरू हुआ आंधी-बारिश का सिलसिला 10 मई तक जारी रहा। पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवात और ट्रफ सिस्टम के कारण मई के पहले सप्ताह में कई जिलों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि देखने को मिली। 11 मई को मौसम साफ हुआ, लेकिन 12 और 13 मई को फिर बदलाव देखने को मिला। इस तरह मई के 13 दिनों में से 11 दिन प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश, आंधी या ओलावृष्टि का असर रहा। गुरुवार के लिए फिलहाल बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

  • दूध हुआ और महंगा: अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी बढ़ाई कीमतें, जानिए नया रेट

    दूध हुआ और महंगा: अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी बढ़ाई कीमतें, जानिए नया रेट


    नई दिल्ली। महंगाई का असर एक बार फिर आम जनता की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है। अमूल के बाद अब प्रमुख डेयरी ब्रांड Mother Dairy ने भी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने 14 मई 2026 से पूरे दिल्ली-एनसीआर और अन्य बाजारों में दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला किया है।

    कंपनी के अनुसार, यह निर्णय बढ़ती उत्पादन लागत और किसानों से दूध खरीदने की बढ़ी हुई कीमतों को संतुलित करने के लिए लिया गया है। पिछले एक साल में दूध उत्पादन की लागत में लगभग 6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर कंपनियों के खर्चों पर पड़ा है।

    नई दरों के बाद अब उपभोक्ताओं को फुल क्रीम दूध के लिए 72 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे, जबकि टोंड दूध की कीमत 60 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, गाय के दूध की कीमत भी बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। डबल टोंड दूध 54 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध रहेगा।

    कंपनी ने बताया कि वह अपने कुल रेवेन्यू का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसानों को भुगतान करती है। ऐसे में जब कच्चे दूध की खरीद कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर अंतिम उत्पाद की कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक हो जाता है।

    Mother Dairy का कहना है कि यह मूल्य वृद्धि केवल आंशिक है और उपभोक्ताओं पर बोझ को न्यूनतम रखने की कोशिश की गई है। कंपनी प्रतिदिन दिल्ली-एनसीआर में लाखों लीटर दूध की आपूर्ति करती है, जिससे यह बदलाव बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा।

    गौरतलब है कि इसी समय देश की एक और बड़ी डेयरी कंपनी Amul ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। दोनों प्रमुख ब्रांडों द्वारा एक साथ कीमतें बढ़ाने से बाजार में दूध महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर घरेलू बजट और महंगाई पर पड़ने की संभावना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पशु आहार, ईंधन, पैकेजिंग सामग्री और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत ने डेयरी सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है। यही कारण है कि कंपनियां कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई हैं।

    दूसरी ओर, उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव चिंता का विषय बन गया है क्योंकि दूध रोजमर्रा की जरूरत का अहम हिस्सा है और इसकी कीमत बढ़ने से मासिक खर्च में सीधा इजाफा होता है।

    कुल मिलाकर, Mother Dairy और Amul दोनों के फैसलों ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में डेयरी उत्पादों की कीमतें और महंगी हो सकती हैं।

  • बड़ा कानूनी कदम: रॉबर्ट वाड्रा ने HC का दरवाजा खटखटाया, समन पर उठाए सवाल

    बड़ा कानूनी कदम: रॉबर्ट वाड्रा ने HC का दरवाजा खटखटाया, समन पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में एक बार फिर चर्चित जमीन सौदे से जुड़ा मामला सुर्खियों में है। इस बार मामला Robert Vadra की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका को लेकर है। वाड्रा ने निचली अदालत द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए अदालत से राहत की मांग की है।

    यह पूरा मामला हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में रखा गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस सौदे में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने कम कीमत पर जमीन खरीदकर बाद में भारी मुनाफे में उसे बेचा।

    जानकारी के अनुसार, यह सौदा 2008 में हुआ था, जब कंपनी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से लगभग 3.5 एकड़ जमीन करीब 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। उस समय Robert Vadra इस कंपनी के डायरेक्टर थे।

    इसके बाद 2012 में वही जमीन रियल एस्टेट कंपनी DLF को लगभग 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई। इस लेनदेन को लेकर बाद में गंभीर सवाल उठे और मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया।

    इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 2012 में आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस जमीन के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। उन्होंने इसे भूमि चकबंदी नियमों और प्रक्रियात्मक उल्लंघन से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की थी। इसके बाद यह सौदा विवादों के घेरे में आ गया।

    प्रवर्तन निदेशालय ने बाद में इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाते हुए आरोपपत्र दाखिल किया। ईडी का कहना है कि इस सौदे से जुड़े दस्तावेजों और शुरुआती जांच में पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

    इसी आरोपपत्र के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल को समन जारी किया था और वाड्रा सहित अन्य आरोपियों को 16 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। इसी आदेश को अब Robert Vadra ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

    दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका जस्टिस मनोज जैन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है, जिस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। वाड्रा की तरफ से दलील दी गई है कि निचली अदालत का समन कानूनी प्रक्रिया और तथ्यों के आधार पर सही नहीं है, इसलिए इसे रद्द किया जाए। वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों का दावा है कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है और इसकी गहन जांच जरूरी है।

    फिलहाल अदालत का अगला फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि हाईकोर्ट इस समन को बरकरार रखता है या इसे रोकने का आदेश देता है।

  • RCB का सपना फिर टूटा-16 पॉइंट्स के बाद भी बाहर, जानिए पूरा गणित

    RCB का सपना फिर टूटा-16 पॉइंट्स के बाद भी बाहर, जानिए पूरा गणित


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में डिफेंडिंग चैंपियन Royal Challengers Bengaluru ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 12 में से 8 मुकाबले जीतकर 16 अंक हासिल कर लिए हैं। आमतौर पर माना जाता है कि 16 पॉइंट्स मिलते ही कोई भी टीम प्लेऑफ के लिए लगभग क्वालीफाई कर लेती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है।

    वजह यह है कि इस सीजन में प्लेऑफ की रेस बेहद कड़ी हो गई है और कई टीमें अभी भी बराबरी या उससे ज्यादा अंकों तक पहुंचने की स्थिति में हैं। यही कारण है कि 16 अंक होने के बावजूद भी आरसीबी का टिकट अभी तक पक्का नहीं हुआ है।

    इस समय पॉइंट्स टेबल में स्थिति ऐसी है कि कम से कम 8 टीमें प्लेऑफ की दौड़ में बनी हुई हैं। इनमें से कई टीमें अभी भी 16, 18 और यहां तक कि 20 अंकों तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। यही वजह है कि गणित पूरी तरह खुला हुआ है।

    उदाहरण के तौर पर, गुजरात टाइटंस 16 अंकों तक पहुंच चुकी है और उसके अभी 2 मैच बाकी हैं। इसका मतलब है कि वह अधिकतम 20 अंक तक जा सकती है। इसी तरह सनराइजर्स हैदराबाद और चेन्नई सुपर किंग्स जैसे टीमें 18 अंकों तक पहुंचने की स्थिति में हैं। वहीं पंजाब किंग्स 19 अंकों तक जा सकती है और राजस्थान रॉयल्स भी 18 अंकों तक पहुंचने की क्षमता रखती है।

    इस जटिल स्थिति के कारण Royal Challengers Bengaluru को यह इंतजार करना पड़ रहा है कि अन्य टीमें अपने मैचों में कैसा प्रदर्शन करती हैं। जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि कौन-सी 4 टीमें टॉप पर रहेंगी, तब तक किसी भी टीम का प्लेऑफ में प्रवेश तय नहीं माना जा सकता।

    असल में इस बार की स्थिति पिछले सीजनों से अलग है, क्योंकि यहां कई टीमें 16 से 20 अंकों के बीच फंसी हुई हैं। यही कारण है कि 18 अंक भी सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं और समीकरण अंतिम चरण तक उलझा हुआ है।

    आरसीबी के पास अभी भी 2 मैच बचे हैं और अगर वह दोनों जीतती है तो वह 20 अंकों तक पहुंच सकती है। लेकिन फिर भी उसे अन्य टीमों के परिणामों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

    प्लेऑफ का फाइनल गणित तभी साफ होगा जब लीग चरण पूरी तरह खत्म हो जाएगा और केवल 4 टीमें ही 16+ या 18+ अंकों के साथ शीर्ष पर बचेंगी।

    कुल मिलाकर, इस बार आईपीएल 2026 में प्लेऑफ की दौड़ बेहद रोमांचक और अनिश्चित हो गई है, जहां हर मैच सीधे क्वालीफिकेशन पर असर डाल रहा है।

  • दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप

    दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार हर कुछ वर्षों में एक विशेष महीना आता है, जिसे Adhik Maas या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह महीना सामान्य 12 महीनों से अलग होता है और इसे अतिरिक्त (13वां) महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र महीना 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह का संबंध सीधे भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जब इस अतिरिक्त महीने को कोई नाम नहीं मिल पाया, तब स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर ‘पुरुषोत्तम मास’ बनाया। इसी कारण यह महीना विष्णु भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

    शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस अवधि में किए गए जप, तप, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसे “अक्षय पुण्य” प्राप्त करने वाला समय भी कहा जाता है। इसलिए भक्तजन इस महीने में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास करते हैं।

    हालांकि, जितना यह महीना पुण्यदायी माना गया है, उतना ही इसमें कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए, अन्यथा उसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

    इस महीने में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश या किसी नए कार्य की शुरुआत को शुभ नहीं माना जाता। इसी तरह, नए निर्माण कार्य या बड़े निवेश से भी बचने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा, इस अवधि में शारीरिक और मानसिक पवित्रता का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। ब्रह्मचर्य का पालन और संयमित जीवनशैली अपनाना इस माह का मुख्य नियम माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और नशीले पदार्थों का सेवन इस महीने में वर्जित माना गया है। ऐसा करने से आध्यात्मिक पुण्य कम होने की बात कही जाती है।

    इसी तरह झूठ बोलना, धोखा देना, किसी का धन हड़पना या बुरे कर्म करना इस महीने में कई गुना पाप का कारण बन सकता है। इसलिए इस समय को आत्ममंथन और सुधार का अवसर माना जाता है।

    दान-पुण्य को इस महीने में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है, लेकिन यह भी कहा गया है कि दान का दिखावा नहीं करना चाहिए और न ही अशुद्ध या खराब वस्तुओं का दान करना चाहिए।

    कांसे के बर्तन में भोजन करने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे भी शास्त्रीय नियमों के विरुद्ध माना गया है।

    कुल मिलाकर Adhik Maas को आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का महीना माना गया है, जिसमें सही आचरण व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

  • दिमाग के नकारात्मक विचारों को रोकने का आसान उपाय- बस पढ़ लें ये शक्तिशाली मंत्र

    दिमाग के नकारात्मक विचारों को रोकने का आसान उपाय- बस पढ़ लें ये शक्तिशाली मंत्र


    नई दिल्ली।  आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव, चिंता और नकारात्मक विचार आम समस्या बन चुके हैं। कई बार बिना किसी कारण के मन में डर, असफलता का खौफ या बेचैनी पैदा होने लगती है, जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है। ज्योतिष शास्त्र और आध्यात्मिक मान्यताओं में ऐसे समय में कुछ मंत्रों को बेहद प्रभावी माना गया है, जो मन को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक संतुलन बेहतर होता है और व्यक्ति भीतर से मजबूत महसूस करता है।

    सबसे पहले आता है दुर्गा मंत्र  “ॐ दुं दुर्गायै नमः”। यह मंत्र मां दुर्गा को समर्पित है और इसे नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि इसका जाप करने से मन का डर कम होता है और आसपास की नकारात्मकता भी दूर होती है। यह व्यक्ति के भीतर एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।

    इसके बाद आता है प्रसिद्ध गायत्री मंत्र  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”। यह मंत्र मानसिक शुद्धि और एकाग्रता बढ़ाने के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इसका नियमित जाप करने से मन शांत होता है और सोचने-समझने की क्षमता मजबूत होती है।

    तीसरा मंत्र है हनुमान मंत्र -“ॐ हनु हनुमते नमो नमः”। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए बताया गया है जिन्हें किसी काम से पहले घबराहट या डर महसूस होता है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंत्र आत्मविश्वास बढ़ाता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।

    इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्…” को भी अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। यह भगवान शिव को समर्पित मंत्र है और इसे भय, चिंता और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। श्रद्धा के अनुसार, यह मंत्र जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है।

    अंत में आता है हनुमान चालीसा, जिसका पाठ हिंदू धर्म में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से मन मजबूत होता है और नकारात्मक ऊर्जा पास नहीं आती।

    हालांकि, मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी माना जाता है कि किसी भी प्रकार का मंत्र या ध्यान व्यक्ति को फोकस करने, सांसों को नियंत्रित करने और मानसिक स्थिरता पाने में मदद करता है।

    इस तरह, जब भी मन में बार-बार नकारात्मक विचार आएं, तो कुछ देर रुककर शांत मन से इन मंत्रों का जप या पाठ करने से मानसिक राहत और सुकून महसूस किया जा सकता है।

  • 50 गुना फीस की डिमांड और फिर पलटी बाजी: जब ‘मुगल-ए-आज़म’ के गाने में आया ट्विस्ट

    50 गुना फीस की डिमांड और फिर पलटी बाजी: जब ‘मुगल-ए-आज़म’ के गाने में आया ट्विस्ट


    नई दिल्ली।  भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाने वाली Mughal-e-Azam सिर्फ अपनी कहानी और भव्य सेट्स के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी दिलचस्प कहानियों के लिए भी मशहूर है। इस फिल्म के एक खास गाने को लेकर जो घटनाक्रम हुआ, वह आज भी फिल्म इतिहास में एक प्रेरणादायक किस्सा माना जाता है।

    कहा जाता है कि जब फिल्म में तानसेन की तरह एक शास्त्रीय संगीत आधारित गीत को सलीम और अनारकली पर फिल्माया जाना था, तब सवाल उठा कि इस गाने को आखिर गाएगा कौन। संगीत निर्देशक नौशाद और निर्देशक के. आसिफ ने तय किया कि अगर अतीत में तानसेन ने यह परंपरा निभाई थी, तो आज के दौर में उनकी आत्मा को जीवंत करने के लिए सबसे उपयुक्त आवाज उस्ताद Ustad Bade Ghulam Ali Khan की होगी।

    लेकिन जब टीम उस्ताद साहब के पास पहुंची, तो उन्होंने गाने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने पहले कभी फिल्मी गाना नहीं गाया और न ही आगे गाने का इरादा है। उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

    इसके बाद भी के. आसिफ हार नहीं माने। उन्होंने लगातार उस्ताद साहब को मनाने की कोशिश की। इस बीच उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने एक तरह से मजाक या परीक्षा लेते हुए ऐसी फीस मांगी, जो उस समय के हिसाब से सामान्य गायक की फीस से लगभग 50 गुना ज्यादा थी—यानी करीब 25 हजार रुपये, जबकि उस दौर में गायक 400-500 रुपये लेते थे।

    उम्मीद के विपरीत, के. आसिफ ने इस मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया और कहा कि “आप अनमोल हैं, कीमत की बात ही नहीं है।” यह सुनकर उस्ताद साहब भी हैरान रह गए और धीरे-धीरे सहमत हो गए।

    हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब रिकॉर्डिंग की बात आई, तो उस्ताद साहब ने शर्त रख दी कि वह गाना तभी गाएंगे जब उन्हें पूरा सीन दिखाया जाएगा, जिस पर यह गीत फिल्माया जाना है। उस समय सीन पूरी तरह तैयार भी नहीं था।

    के. आसिफ ने तुरंत व्यवस्था की और Mughal-e-Azam के सलीम और अनारकली वाले रोमांटिक दृश्य को विशेष रूप से शूट करवाया। दिलीप कुमार और मधुबाला के बीच फिल्माए गए इस दृश्य को एडिट कर तुरंत उस्ताद साहब को दिखाया गया।

    सीन देखने के बाद उस्ताद साहब प्रभावित हुए और उन्होंने गाना रिकॉर्ड करने के लिए हामी भर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने इस गाने को तीन बार रिकॉर्ड किया ताकि सबसे बेहतरीन वर्जन चुना जा सके।

    इस पूरी प्रक्रिया ने साबित किया कि Mughal-e-Azam सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस दौर की कलात्मक पराकाष्ठा थी, जिसमें संगीत, अभिनय और निर्देशन तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिला।

    फिल्म के निर्माण में भी भव्यता का कोई मुकाबला नहीं था। देशभर से कारीगर, ज्वेलरी डिजाइनर, टेलर और कलाकार बुलाए गए थे। विशाल युद्ध दृश्यों के लिए हजारों घोड़े, ऊंट और सैनिकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी और भव्य परियोजनाओं में से एक बन गई।

    आज भी जब यह किस्सा दोहराया जाता है, तो यह साफ हो जाता है कि जुनून, सम्मान और कला के प्रति समर्पण ही किसी रचना को अमर बनाता है।

  • ‘ओम शांति ओम’ के ये सीन थे पूरी तरह VFX-मेकिंग देखकर घूम जाएगा दिमाग

    ‘ओम शांति ओम’ के ये सीन थे पूरी तरह VFX-मेकिंग देखकर घूम जाएगा दिमाग

    नई दिल्ली। साल 2007 की ब्लॉकबस्टर फिल्म Om Shanti Om के कुछ बेहद खास सीन्स में ऐसा VFX इस्तेमाल किया गया था, जिसे दर्शक पकड़ ही नहीं पाए। पुराने बॉलीवुड क्लासिक फुटेज को मॉर्फ कर नए सीन में बदलने की यह तकनीक आज भी फिल्ममेकिंग का शानदार उदाहरण मानी जाती है।

    साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म Om Shanti Om न सिर्फ अपने गानों और कहानी के लिए याद की जाती है, बल्कि इसके शानदार VFX और तकनीकी प्रयोगों ने भी दर्शकों को खूब प्रभावित किया था। शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण स्टारर इस फिल्म ने उस समय बॉलीवुड में विजुअल इफेक्ट्स के इस्तेमाल को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया था।

    फिल्म में कई ऐसे सीन थे जो देखने में बेहद साधारण लगे, लेकिन असल में उन्हें तैयार करने में भारी VFX और एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। सबसे चर्चित सीन वह था जिसमें दीपिका पादुकोण पुराने जमाने के दिग्गज कलाकारों जैसे राजेश खन्ना, सुनील दत्त और जीतेंद्र के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आती हैं। दर्शकों को लगा कि यह सब साधारण एडिटिंग है, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा जटिल थी।

    दरअसल, मेकर्स ने पुराने फिल्मों की फिजिकल रील्स को डिजिटल फॉर्मेट में कन्वर्ट किया। इसके बाद उन क्लिप्स को बेहद बारीकी से एडिट कर नए सीन में फिट किया गया। इस प्रक्रिया में पुराने एक्टर्स को उनके ओरिजिनल फुटेज से अलग कर डिजिटल कंपोजिटिंग के जरिए नए सीन में जोड़ा गया, जिसमें दीपिका पादुकोण को पूरी तरह से नए तरीके से प्लेस किया गया था।

    सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुराने फुटेज की लाइटिंग, कैमरा एंगल और मूवमेंट को नए सेट के साथ पूरी तरह मैच किया जाए। यदि जरा भी गड़बड़ी होती, तो सीन नकली लग सकता था। यही वजह थी कि टीम को पुराने क्लिप्स की हर डिटेल कॉस्ट्यूम से लेकर एक्सप्रेशन तक का गहराई से अध्ययन करना पड़ा।

    इसके अलावा एक नया सेट भी तैयार किया गया ताकि बैकग्राउंड और वातावरण पूरी तरह से पुराने दौर जैसा लगे। VFX टीम ने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि दर्शकों को यह महसूस ही न हो कि वे दो अलग-अलग समय की फुटेज को एक साथ देख रहे हैं।

    फिल्म की खासियत यह रही कि इतने जटिल तकनीकी काम के बावजूद यह सब इतना सहज दिखा कि दर्शकों ने इसे नोटिस भी नहीं किया। यही Om Shanti Om की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है कि उसने मनोरंजन के साथ-साथ तकनीकी नवाचार का भी शानदार मिश्रण पेश किया।

    आज के समय में जब VFX फिल्मों का अहम हिस्सा बन चुका है, तब भी इस फिल्म के ये सीन भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर माने जाते हैं।

    ‘ओम शांति ओम’ ने साबित किया कि अगर तकनीक और क्रिएटिविटी सही तरीके से मिल जाए, तो पुरानी और नई दुनिया को एक ही फ्रेम में जोड़ा जा सकता है।

  • जब एक गाना बना इतिहास: 105 बार री-राइट कर बना हिंदी सिनेमा का सबसे महंगा ट्रैक

    जब एक गाना बना इतिहास: 105 बार री-राइट कर बना हिंदी सिनेमा का सबसे महंगा ट्रैक


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बने हैं जिन्होंने समय को पीछे छोड़ दिया, लेकिन फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ का गाना ‘प्यार किया तो डरना क्या’ आज भी अपनी भव्यता और परफेक्शन के लिए याद किया जाता है। इस गाने को सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि एक आर्टवर्क की तरह तैयार किया गया था, जिसमें हर शब्द, हर दृश्य और हर धुन पर बारीकी से काम किया गया।

     105 बार री-राइट: परफेक्शन की ह
    इस गाने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिरिक्स को 105 बार दोबारा लिखा गया।
    मकसद सिर्फ एक था हर शब्द को इतना परफेक्ट बनाना कि उसमें कोई कमी न रह जाए।
    इस गाने को मशहूर शायर शकील बदायूंनी ने लिखा था और इसे स्वर दिया था स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने, जिससे इसकी भावनात्मक गहराई और भी बढ़ गई।

    उस दौर का सबसे महंगा गाना
    जब हिंदी फिल्मों का बजट लाखों में होता था, तब इस एक गाने पर लगभग 15 लाख रुपये खर्च किए गए थे।
    आज के हिसाब से यह रकम करोड़ों में मानी जाती है। इस भारी-भरकम खर्च की वजह थी भव्य सेट, बारीक डिजाइन और परफेक्शन के लिए किया गया अत्यधिक प्रोडक्शन वर्क।

    शीश महल जैसा भव्य से
    इस गाने को फिल्माने के लिए मुंबई के मोहन स्टूडियो में एक शानदार सेट तैयार किया गया था।
    सेट को इस तरह डिजाइन किया गया कि वह असली शीश महल जैसा दिखे।
    बेल्जियम के असली शीशों का इस्तेमाल
    फिरोजाबाद के कारीगरों की महीन कारीगरी
    महीनों तक चली सेट डिजाइनिंग
    इस भव्यता ने गाने को ऐतिहासिक दृश्य बना दिया।

    ‘मुगल-ए-आजम’: एक ड्रीम प्रोजेक्
    साल 1960 में रिलीज हुई फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ उस समय की सबसे महंगी और आइकॉनिक फिल्मों में से एक थी।
    निर्देशक: के. आसिफ
    कुल बजट: लगभग 1.5 करोड़ रुपये (उस समय के अनुसार विशाल राशि)
    IMDb रेटिंग: 8.1
    उपलब्धता: ZEE5 पर
    फिल्म के हर हिस्से में भव्यता और परफेक्शन की झलक मिलती है, लेकिन यह गाना उसका सबसे चमकदार हिस्सा माना जाता है।

    ‘प्यार किया तो डरना क्या’ सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की क्रिएटिविटी, लगन और परफेक्शन का प्रतीक है। 105 बार लिखे गए लिरिक्स, भव्य सेट और लता मंगेशकर की आवाज ने इसे अमर बना दिया। यही वजह है कि आज भी इसे हिंदी सिनेमा का सबसे महंगा और सबसे आइकॉनिक गाना माना जाता है।