आरोप है कि कुछ ही देर बाद कई लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने अमन तोमर पर हमला कर दिया। हमलावरों ने मिलकर युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे वह घायल हो गया।
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डॉग फीडिंग के दौरान युवक पर हमला, इंदौर की घटना CCTV में रिकॉर्ड-पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Indore के द्वारकापुरी इलाके में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां बेसहारा कुत्तों को खाना खिला रहे एक वॉलंटियर अमन तोमर पर आधा दर्जन से अधिक लोगों ने हमला कर दिया। यह पूरी वारदात पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।जानकारी के अनुसार, पीड़ित अमन तोमर लंबे समय से इलाके में आवारा कुत्तों को भोजन कराने का काम कर रहे हैं। घटना उस समय हुई जब उन्होंने एक व्यक्ति को कुत्ते के साथ मारपीट करते हुए देखा और उसे रोकने की कोशिश की। इसी बात पर विवाद बढ़ गया और मामला हिंसक हो गया।
आरोप है कि कुछ ही देर बाद कई लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने अमन तोमर पर हमला कर दिया। हमलावरों ने मिलकर युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे वह घायल हो गया।घटना के बाद स्थानीय पशु प्रेमियों ने पुलिस पर शुरुआती कार्रवाई में लापरवाही का आरोप लगाया और मामला पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचाया। इसके बाद People For Animals की इंदौर इकाई के प्रतिनिधियों सहित अन्य कार्यकर्ता भी शिकायत लेकर पहुंचे और उन्होंने पूरे मामले का सीसीटीवी फुटेज अधिकारियों को सौंपा।शिकायत के बाद पुलिस ने द्वारकापुरी थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। वहीं, इस घटना ने इलाके में पशु सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। -

गोल्ड बना और महंगा, एक तोला खरीदने की लागत पहुंची नए रिकॉर्ड स्तर पर
नई दिल्ली । सोने की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने बाजार को एक बार फिर चौंका दिया है और आम खरीदारों की चिंता को बढ़ा दिया है। हाल ही में आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इस फैसले के बाद शुरुआती कारोबार में ही दामों में लगभग 10 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तेजी देखी गई, जिसने पूरे ज्वैलरी बाजार की दिशा बदल दी।बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब शादी और त्योहारी सीजन की तैयारी जोरों पर है, और ऐसे में Gold की बढ़ती कीमतें आम लोगों के बजट पर सीधा असर डाल रही हैं। निवेशकों के साथ-साथ खुदरा खरीदार भी अब खरीदारी को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं क्योंकि दाम लगातार नए रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रहे हैं।
कीमतों में इस तेजी का असर हर कैरेट के सोने पर देखने को मिल रहा है। 24 कैरेट सोना अब ऐतिहासिक स्तरों के करीब पहुंच चुका है, जबकि 22 कैरेट और 18 कैरेट ज्वैलरी की कीमतों में भी समान रूप से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि केवल निवेश ही नहीं बल्कि आभूषण बाजार भी इस तेजी से प्रभावित हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के पीछे केवल घरेलू नीतिगत बदलाव ही नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मांग में तेजी आई है। इसके अलावा मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव ने भी कीमतों को और ऊपर धकेल दिया है।
सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं पर देखने को मिल रहा है, जहां अब एक तोला सोना खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। भारतीय बाजार में एक तोला लगभग 11.66 ग्राम के बराबर माना जाता है और मौजूदा कीमतों के अनुसार इसका मूल्य करीब 1.90 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इस स्तर पर पहुंचने के बाद कई लोग अपनी खरीदारी योजनाओं को टालने पर मजबूर हो रहे हैं।
बाजार में यह स्थिति केवल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मांग पर भी पड़ सकता है। जैसे-जैसे कीमतें बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे ग्राहकों की खरीद क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है। ज्वैलर्स का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में आभूषणों की बिक्री में गिरावट देखने को मिल सकती है।
हालांकि कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि इतनी तेज बढ़ोतरी के बाद बाजार में स्थिरता या हल्की गिरावट की संभावना भी बनी रहती है, लेकिन फिलहाल का माहौल पूरी तरह तेजी का संकेत दे रहा है। निवेशकों के लिए यह स्थिति अवसर और जोखिम दोनों साथ लेकर आई है।
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पहली बड़ी परीक्षा में सफल हुए थलापति विजय, TVK ने गठबंधन के दम पर हासिल किया बहुमत
नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम यानी TVK ने अपनी पहली बड़ी परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली है। लंबे समय से जिस फ्लोर टेस्ट को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई थी, उसका परिणाम अब सामने आ चुका है और TVK ने 144 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत हासिल कर लिया है।यह पूरा घटनाक्रम राज्य की सत्ता समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 सदस्यीय सदन में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दर्जा हासिल किया था, लेकिन पूर्ण बहुमत से थोड़ी दूरी पर रह गई थी। इसके बाद गठबंधन की राजनीति ने अहम भूमिका निभाई और कई सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार गठन की स्थिति बनी।
फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। सत्ता पक्ष ने अपने समर्थन को मजबूत करते हुए सदन में संख्या बल साबित करने की कोशिश की, वहीं विपक्ष ने सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए। मतदान प्रक्रिया के दौरान कई अहम मोड़ देखने को मिले, जहां कुछ विधायकों के समर्थन ने समीकरण बदल दिए और TVK को स्पष्ट बढ़त मिल गई।
वोटिंग के अंत में TVK को कुल 144 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक था। इस समर्थन में विभिन्न दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसने सरकार की स्थिति को मजबूत किया। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने मतदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया, जिससे राजनीतिक स्थिति और भी दिलचस्प बन गई।
मुख्यमंत्री थलापति विजय ने सदन में अपने संबोधन में सहयोगी दलों का आभार जताया और कहा कि उनकी सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों और प्रशासनिक स्थिरता को बनाए रखना है।
इस परिणाम के साथ थलापति विजय ने राजनीति में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। फिल्मी पर्दे पर सफलता के बाद अब राजनीतिक मंच पर उनकी यह जीत उनके करियर का एक नया अध्याय मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TVK सरकार इस समर्थन को कितनी मजबूती से बनाए रखती है और राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव डालती है।
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चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं
नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज तीन दिवसीय चीन दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई अहम वैश्विक मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी। हालांकि बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान संकट को हल करने के लिए उन्हें शी जिनपिंग की किसी मदद की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान को अब सही रास्ता चुनना होगा, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।चीन दौरे पर हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन
13 से 15 मई तक चलने वाले इस दौरे में ट्रंप के साथ अमेरिका का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी चीन जा रहा है। इसमें उनके परिवार के सदस्य एरिक ट्रंप और लारा ट्रंप के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। डेलिगेशन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी पीट हेगसेथ, और अन्य कूटनीतिक व सुरक्षा सलाहकार जैसे जेमीसन ग्रीर, स्टीफन मिलर, स्टीवन चेउंग, जेम्स ब्लेयर और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।ईरान मुद्दा प्राथमिकता में नहीं
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि चीन में शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत का मुख्य फोकस ईरान मुद्दा नहीं होगा, हालांकि इस पर चर्चा जरूर होगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है और किसी भी समझौते का उद्देश्य अमेरिका और ईरान दोनों देशों के हित में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “हम सिर्फ अच्छी डील करेंगे।”रूस-यूक्रेन युद्ध पर दावा
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध जल्द ही समाप्त होने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चीन दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से वैश्विक राजनीति और खासकर ईरान संकट पर क्या नई दिशा निकलती है। -

केरल का 1000 साल पुराना शिव मंदिर, जहां ‘घी’ आज भी नहीं पिघलता, न खराब होता
नई दिल्ली: केरल के त्रिशूर शहर में स्थित वडक्कुनाथन मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह मंदिर अपनी ऐतिहासिकता, अनोखी वास्तुकला और गहरी धार्मिक आस्थाओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। एक छोटी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर हरियाली और शांत वातावरण से घिरा हुआ है, जहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। हर साल यहां लाखों भक्त और पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रसिद्ध त्रिशूर पूरम उत्सव का केंद्र भी यही मंदिर माना जाता है।भगवान परशुराम से जुड़ी मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। मान्यता है कि केरल भूमि के निर्माण के बाद उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की परंपरा शुरू करवाई थी। इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर 1000 साल से भी अधिक पुराना है, हालांकि समय-समय पर इसका पुनर्निर्माण और मरम्मत भी होती रही है। मंदिर की बनावट पारंपरिक केरल शैली में है, जिसमें लकड़ी की नक्काशी और तांबे की छत इसकी खास पहचान है।सदियों पुरानी परंपरा: शिवलिंग पर घी अर्पण
वडक्कुनाथन मंदिर की सबसे चर्चित मान्यता यहां स्थापित शिवलिंग से जुड़ी है। कहा जाता है कि सदियों से यहां प्रतिदिन घी चढ़ाया जाता है और वह कभी खराब नहीं होता। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लंबे समय तक घी चढ़ाए जाने के बावजूद यह न तो पिघलता है और न ही उसमें कोई दुर्गंध आती है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि केरल की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुबह और शाम की आरती के दौरान यहां का वातावरण मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और भक्तिमय माहौल से गूंज उठता है। त्रिशूर पूरम के दौरान मंदिर परिसर भव्य सजावट और हाथियों की शोभायात्रा से और भी आकर्षक बन जाता है।कैसे पहुंचे
वडक्कुनाथन मंदिर पहुंचने के लिए केरल के त्रिशूर शहर जाना होता है, जहां यह मंदिर शहर के केंद्र में स्थित है। नजदीकी रेलवे स्टेशन त्रिशूर रेलवे स्टेशन है और सबसे निकटतम हवाई अड्डा कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। वहां से टैक्सी और बस की सुविधा आसानी से उपलब्ध है। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहां यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। -

NEET एग्जाम रद्द होने से बवाल, छात्रों की पीड़ा आई सामने-“डिप्रेशन का इलाज करने वाले खुद डिप्रेशन में
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित परीक्षा को कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतों के बाद रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया है। इस फैसले ने देशभर के करीब 22 लाख छात्रों को सीधे प्रभावित किया है।परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है। कई छात्रों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से केवल इसी परीक्षा की तैयारी में जुटे थे, लेकिन बार-बार होने वाले बदलाव और अनिश्चितता ने उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
इस पूरे मामले ने परीक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि जिस परीक्षा के जरिए उनकी योग्यता तय होती है, उसी को आयोजित करने वाली एजेंसी की पारदर्शिता पर बार-बार सवाल उठना चिंता का विषय है।
NEET-UG जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा को लेकर यह स्थिति छात्रों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार बदलते फैसलों और दोबारा परीक्षा के निर्णय से उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल छात्रों के आत्मविश्वास को कमजोर करती हैं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर भी सवाल खड़े करती हैं। अभ्यर्थी अब मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
फिलहाल, दोबारा परीक्षा की नई तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन छात्रों की नजरें अब आगे के आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं।
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CBSE 12वीं परिणाम 2026: रिजल्ट कभी भी जारी हो सकता है, MP के छात्रों में बढ़ी बेचैनी
नई दिल्ली। सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम कभी भी घोषित किया जा सकता है, जिससे देशभर के लाखों छात्रों की धड़कनें बढ़ गई हैं। इस परीक्षा में मध्यप्रदेश से कुल 80,454 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें अकेले भोपाल से 9,399 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे।परीक्षा का आयोजन 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 के बीच देशभर में एक ही शिफ्ट में किया गया था। अब परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम परिणाम की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।
इस साल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) ने मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया है। कॉपियों की जांच से लेकर अंकों के सत्यापन तक सभी काम ऑनलाइन सिस्टम के जरिए किए गए हैं, जिससे परिणाम प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाया गया है।
रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इसे आधिकारिक वेबसाइट के अलावा डिजिलॉकर और उमंग ऐप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी देख सकेंगे। छात्र अपने रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्मतिथि की मदद से लॉगिन कर अपनी मार्कशीट डाउनलोड कर पाएंगे।
बोर्ड ने रिजल्ट से पहले सभी अंकों का अंतिम सत्यापन भी पूरा कर लिया है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे। विभिन्न परीक्षा केंद्रों से प्राप्त डेटा का मिलान कर अंतिम परिणाम तैयार किया गया है।
छात्रों को सलाह दी गई है कि रिजल्ट देखने से पहले अपने सभी जरूरी विवरण तैयार रखें, ताकि लॉगिन के समय किसी तरह की परेशानी न हो।
रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई और करियर की दिशा तय करने का अहम समय होगा। कई छात्र उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाएंगे, तो कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटेंगे।
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भोपाल ट्रेन हादसा: युवक की मौत के बाद हत्या का आरोप, मां बोलीं- बेटे को धक्का देकर पटरी पर गिराया गया
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब रचना नगर अंडरब्रिज के पास रेलवे ट्रैक पर एक युवक का शव मिला। मृतक की पहचान अशोक बामने के रूप में हुई है, जो गौतम नगर जनता क्वार्टर का निवासी था।पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला ट्रेन से कटकर हुई मौत का लग रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। हालांकि, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब मृतक की मां ने पड़ोसी पर गंभीर आरोप लगाए।मृतक की मां कृष्णा बामने का कहना है कि रात में पड़ोसी से किसी लड़की को लेकर विवाद हुआ था। उनका आरोप है कि उसी विवाद के बाद पड़ोसी उनके घर में घुस आया और उनके चार बेटों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की।परिवार का दावा है कि इसके बाद आरोपियों ने अशोक को रेलवे ट्रैक पर ले जाकर ट्रेन के सामने धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, सुबह पुलिस ने सूचना दी तब उन्हें घटना की जानकारी मिली।अशोक अविवाहित था और मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। अचानक हुई इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं हादसा, आत्महत्या और हत्या को ध्यान में रखकर छानबीन की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए गहरा सदमा बन गई है, बल्कि पूरे इलाके में कई सवाल भी छोड़ गई है कि यह वाकई एक हादसा था या इसके पीछे कोई साजिश। -

आजादी की लड़ाई के वो क्रांतिकारी शायर, जिनकी कलम से निकली इंकलाब की गूंज और इश्क की मिठास
नई दिल्ली । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कुछ ऐसे नाम दर्ज हैं, जिन्होंने न केवल संघर्ष की राह चुनी बल्कि अपनी कलम से भी क्रांति की लौ जलाए रखी। उन्हीं में एक महत्वपूर्ण नाम है हसरत मोहानी, जो एक ऐसे शायर थे जिन्होंने इश्क और इंकलाब को एक साथ जिया और अपनी लेखनी से समाज को नई दिशा दी। उनकी शायरी केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं थी, बल्कि उसमें आज़ादी का जुनून और सामाजिक एकता का संदेश भी गहराई से शामिल था।हसरत मोहानी का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के मोहान गांव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम सैयद फजलुल हसन था, लेकिन साहित्यिक दुनिया में उन्होंने ‘हसरत मोहानी’ के नाम से अपनी पहचान बनाई। बचपन से ही उनकी रुचि साहित्य और विचारों की दुनिया में थी, और धीरे-धीरे वे उर्दू शायरी के ऐसे सितारे बन गए, जिनकी आवाज़ सिर्फ दिलों को नहीं छूती थी, बल्कि सोच को भी झकझोर देती थी।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हसरत मोहानी ने न सिर्फ अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया, बल्कि अपने लेखन और विचारों के जरिए लोगों में जागरूकता भी पैदा की। वे उन चुनिंदा क्रांतिकारियों में से थे जिन्होंने “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे शक्तिशाली नारे को जन्म दिया, जो आगे चलकर पूरे स्वतंत्रता संग्राम की पहचान बन गया। उनकी सोच स्पष्ट थी कि आज़ादी सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्वतंत्रता भी है।
वे एक शायर होने के साथ-साथ पत्रकार, राजनीतिक विचारक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने एक पत्रिका के माध्यम से ब्रिटिश नीतियों की आलोचना की और कई बार जेल भी गए। इसके बावजूद उनके विचारों में कभी कमजोरी नहीं आई। वे स्वराज की अवधारणा के समर्थक थे और भारतीयों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाते रहे। वे राजनीतिक मंचों पर भी सक्रिय रहे और एक जनप्रतिनिधि के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई।
हसरत मोहानी की सबसे बड़ी खासियत उनकी सोच थी, जो किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं थी। वे हिंदू-मुस्लिम एकता के मजबूत समर्थक थे और मानते थे कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में छिपी है। उन्होंने विभाजन का विरोध किया और हमेशा एक अखंड और एकजुट भारत की कल्पना को आगे रखा। उनकी यह सोच आज भी सामाजिक सद्भाव की मिसाल के रूप में याद की जाती है।
उनकी शायरी में प्रेम और विद्रोह का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। एक तरफ जहां उनकी गजलों में प्रेम की कोमलता झलकती है, वहीं दूसरी तरफ उनमें क्रांति की आग भी महसूस होती है। उनकी प्रसिद्ध रचनाएं आज भी साहित्य प्रेमियों के बीच गहरी जगह रखती हैं और नई पीढ़ी को भावनात्मक और वैचारिक रूप से प्रेरित करती हैं।
1951 में उनके निधन के साथ एक युग का अंत हो गया, लेकिन उनकी विचारधारा और उनकी शायरी आज भी जीवित है। उनके जाने के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी और कई महान नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। आज भी उनकी याद में साहित्यिक आयोजन किए जाते हैं, जहां उनकी गजलों और विचारों को याद किया जाता है।
हसरत मोहानी सिर्फ एक शायर नहीं थे, बल्कि एक विचारधारा थे, जो आज़ादी, प्रेम और एकता का संदेश देती है। उनकी विरासत आज भी यह सिखाती है कि कलम की ताकत किसी भी हथियार से अधिक प्रभावशाली हो सकती है।
