Blog

  • सिंहस्थ: 2028 के दृष्टिगत मध्य प्रदेश में बढ़ाई जा रही रेल सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ यादव

    सिंहस्थ: 2028 के दृष्टिगत मध्य प्रदेश में बढ़ाई जा रही रेल सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आगामी सिंहस्थ : 2028 के दृष्टिगत राज्य में रेलवे सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर चल रहा है। भोपाल को निशातपुरा के रूप में चौथे रेलवे स्टेशन की सौगात मिली है। इस रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनों के ठहराव (स्टापेज) होगा। निशातपुरा रुकने वाली ट्रेनें शिव और शक्ति की प्रतीक हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम को भोपाल के नव विकसित निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर दो रेल गाड़ियों- डॉ. अंबेडकर नगर-श्रीमाता वैष्णोदेवी कटरा मालवा एक्सप्रेस और वेरावल-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन के निशातपुर स्टेशन पर नए ठहराव (स्टॉपेज) के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मालवा एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। हर विभाग में नए कीर्तिमान गढ़े जा रहे हैं। गत 12 साल में रेलवे का “न भूतो न भविष्यति” विकास हुआ है। भारतीय रेलवे में द्रुत गति से विकास कार्य हो रहे हैं। निशातपुरा स्टेशन के शुभारंभ से अब नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर की ओर जाने वाली रेलगाड़ियों को ट्रैक और इंजन बदलने की जरूरत नहीं होगी।

    अब नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर आने-जाने के लिए बचेगा समय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय रेलवे के माध्यम से उज्जैन सिंहस्थ: 2028 को लेकर लगातार सौगातें मिल रही हैं। सिंहस्थ : 2028 के आयोजन में अनुमानित 40 करोड़ श्रद्धालु मध्य प्रदेश आएंगे। ऐसे में नए रेलवे स्टेशन यात्रियों की भीड़ का दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निशातपुरा क्षेत्र में 14 करोड़ की लागत से विकसित निशातपुरा स्टेशन नागरिकों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा। यहां अनेक नई सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर आने-जाने के लिए समय बचेगा। भोपाल मुख्य स्टेशन जाए बिना डायरेक्ट ट्रेन मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि जब किसी क्षेत्र में रेल लाइन आती है, तो यात्री सुविधाओं के साथ व्यापार, कृषि और माल ढुलाई आदि कार्यों में सुविधा मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव मध्य प्रदेश में रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए पूर्ण सहयोग कर रहे हैं।

    मध्य प्रदेश के लिए भारत सरकार ने रेल बजट में की 24 गुना बढ़ोतरी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे व्यापार-व्यवसाय की सुगमता और रोजगार बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। भारतीय रेल का नेटवर्क इतना बड़ा है, जिसमें कई देशों की कुल आबादी के बराबर लोग हमारी ट्रेनों में सफर कर रहे होते हैं। देश में रेलवे के 70 मंडल मुख्यालय हैं। मध्य प्रदेश में रेलवे ट्रैक का शत प्रतिशत विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है। भारतीय रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक रेल गाड़ियों की शुरुआत की है। अब भोपाल के पास ट्रेनों के आधुनिक कोच तैयार किए जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि देश के साथ ही मध्य प्रदेश बदल रहा है। वर्ष 2009 से 2014 तक मध्य प्रदेश में रेलवे का बजट केवल 632 करोड़ रुपये था, जो अब वर्ष 2026-27 तक 15 हजार 288 करोड़ रुपये हो गया है। भारत सरकार ने प्रदेश के लिए रेल बजट में 24 गुना वृद्धि की है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में रेलवे के 1 लाख 18 हजार करोड़ लागत के नए कार्य जारी हैं। वर्ष 2014 के बाद प्रदेश में 2800 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनों का निर्माण हुआ है, जो डेनमार्क देश की कुल सीमा से भी अधिक है।

    प्रतिदिन बिछाया जा रहा है 34 किलोमीटर रेलवे ट्रेक
    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जहां एक दिन में मात्र 4 किलोमीटर रेलवे ट्रैक तैयार होता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में ट्रैक बिछाने की रफ्तार 34 किलोमीटर प्रतिदिन है। भोपाल में अब रानी कमलापति स्टेशन, भोपाल मेन स्टेशन, संत हिरदाराम स्टेशन और अब निशातपुरा स्टेशन हो गए हैं। मध्य प्रदेश को 13 नए अमृत स्टेशनों की सौगात मिली है। वडोदरा -रतलाम और इटारसी-भोपाल-बीना रूट पर तीसरी और चौथी रेल लाइन के काम चल रहे हैं। पहले कभी मीटर गेज लाइनें हुआ करती थीं, जो धीरे-धीरे ब्रॉडगेज हो गईं और ब्रॉडगेज डबल लाइन हो गईं। अब ट्रिपल और फोर लाइन का विकास हो रहा है।

    ध्य प्रदेश में रेल सुविधाएं बढ़ीं

    पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि पश्चिम मध्य रेलवे अपने यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा प्रदान करने के लिए अधोसंरचना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में रेल मार्गों का विकास, आधुनिक ट्रेनों का संचालन, सेफ्टी और सिक्योरिटी में सुधार रेल यात्रा को नए आयाम प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में मध्य प्रदेश को रेलवे की अनेक सुविधाएं मिली हैं। खजुराहो से वाराणसी वंदेभारत एक्सप्रेस, रीवा-पुणे, डॉ. अंबेडकर नगर-गोंडा के लिए नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। इसी अवधि में बीना-इटारसी और कटनी-बीना की तीसरी लाइन, कटनी अपग्रेड सेपरेटर, इटारसी के अप और डाउन ग्रेड सेपरेटर के साथ ही कटनी-सिंगरौली-रीवा-सतना रेल रूट का दोहरीकरण किया गया है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में फ्लाई ओवर का शुभारंभ किया है, जिसमें मदन महल स्टेशन पर बना केबिल स्टे ब्रिज शामिल है। प्रदेश में 13 अमृत स्टेशनों का जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो चुका है। स्टेशनों पर यात्रियों के लिए एस्केलेटर और एफओबी उपलब्ध कराए रहे हैं। भोपाल स्टेशन के पास बने निशातपुरा स्टेशन पर दो नई ट्रेनों के ठहराव से यात्रियों को भोपाल स्टेशन की भीड़भाड़ से राहत मिलेगी। पश्चिम मध्य रेलवे निशानपुरा स्टेशन को यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    कार्यक्रम में विधायक विष्णु खत्री, महापौर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, भोपाल मंडल रेल प्रबंधक पंकज त्यागी सहित पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों ने रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया और निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर गाड़ियों का ठहराव प्रारंभ होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

  • विकसित भारत के लिए मंत्रालयों में बेहतर तालमेल, स्वदेशी तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी

    विकसित भारत के लिए मंत्रालयों में बेहतर तालमेल, स्वदेशी तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक में विकसित भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक के विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी गलत सूचनाओं का प्रभावी जवाब देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा युवा सोच, गतिशील और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने अपने आवास पर बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों के कामकाज और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी मंत्रालयों और विभागों को टीम भावना के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच बेहतर तालमेल होगा तो योजनाओं का लाभ लोगों तक तेजी और प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

    उन्होंने कहा कि सरकार की हर नीति और फैसला आम नागरिक को ध्यान में रखकर होना चाहिए। लोगों का हित और उनकी अपेक्षाएं ही शासन का आधार होना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना भी जरूरी है। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश की अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और लोगों के हित के लिए जरूरी है। इसके लिए नवाचार, नए ऊर्जा स्रोतों और क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छी व्यवस्था के लिए समय-समय पर सुधार जरूरी हैं। कार्यप्रणाली, कामकाज की संस्कृति और संस्थागत क्षमता में लगातार सुधार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने युवाओं, स्टार्टअप और नवाचार करने वाले उद्यमियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार की बड़ी पहलों के बारे में सही जानकारी लोगों तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि गलत सूचनाओं और अफवाहों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के अनुसार उद्योग जगत के सहयोग से नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा नई सोच के साथ काम करना चाहिए और बदलती चुनौतियों के अनुसार खुद को लगातार तैयार रखना चाहिए।

    बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति, प्राथमिकताओं, नई संभावनाओं और कामकाज में आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे। बैठक में कैबिनेट सचिव, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा हुई। उन्होंने नागरिक-केंद्रित शासन, बेहतर बुनियादी ढांचे, स्वदेशी तकनीक के विकास और युवाओं की अधिक भागीदारी पर जोर देने की बात कही।

  • कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर

    कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के समर्थन में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संगठित नकल और पेपर लीक राष्ट्र के लिए आतंकवाद और नक्सलवाद के समान खतरा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन दोनों खतरों का उन्मूलन कर दिया है और परीक्षा माफिया को भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ जड़ से उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मूल 2024 के कानून को पहले को और मजबूत बनाता है। इसमें सजा को और कठोर किया गया है, जांच को समयबद्ध बनाया गया है तथा उन करोड़ों छात्रों के लिए न्याय की प्रक्रिया को तेज किया गया है।

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “परीक्षा में धांधली, पेपर लीक, यह किसी आतंकवाद और माओवाद से कम खतरनाक नहीं हैं। इसका इलाज भी हम ही करेंगे क्योंकि हर मर्ज की दवा मोदी सरकार के पास है और जब मामला देश के युवाओं और उनके भविष्य का है तो यह सरकार युवाओं की सरकार है और युवाओं के हित में हम हर जरूरी और कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज इस देश के युवा और मोदी सरकार एक प्लेटफार्म पर खड़े हैं और हमारे एक इरादे भी स्पष्ट हैं कि हम एक ऐसा कानून लायेंगें जो टेरोरिज्म के खिलाफ बने के कानून से अधिक कठोर होगा। इसी उदेश्य से हमने 2024 में बने कानून में संशोधन कर इसे और भी मजबूत बनाया है जो इस सदन के सामने पेश किया गया है। यह सरकार केवल समस्या पर चर्चा नहीं करती, बल्कि समाधान की व्यवस्था बनाती है। यह विधेयक अपराधियों, परीक्षा कराने वाली लापरवाह एजेंसी और उनका प्रबंधन , सभी की जवाबदेही सुनिश्चित करता है”

    उन्होंने कहा कि भाजपा और राजग सरकार चिंतन भी करती है और कार्यवाई भी करती है, और कानून भी बनाते हैं। जिन्होंने पूरे पचपन साल साठ सालों तक पूरे ठाठ के साथ इस देश पर राज किया उन्होंने तो कोई कानून नहीं बनाया मगर 2024 में देश को पहला एंटी चीटिंग कानून देने का काम किया और अगर आज उस कानून को और भी कठोर बनाने की मांग उठी तो वह भी एनडीए ने ही किया। आज भारत में कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपलआईटी, एम्स की संख्या में जो इजाफा हुआ है वह मोदी सरकार की देन है। हमने 2020 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू किया जिसका उद्देश्य है भारत को ग्लोबल नॉलेज पावर बनाना तो जो लोग आज युवाओं का सीजनल लीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं वह अपने गिरेबान में झांकें की उन्होंने युवाओं के लिए क्या किया। जिन्होंने गुलशन को उजाड़ा है आज वह गुलशन में बहार लाने की दुहाई देते हैं तो अच्छा नहीं लगता है।”

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “विपक्ष को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि जब उनके शासन में पेपर लीक होते थे, तब न मजबूत केंद्रीय कानून बना, न ऐसी फास्ट ट्रैक व्यवस्था बनी और न ऐसी जवाबदेही की संरचना खड़ी हुई। यूपीए काल में ऐम्स पीजी जैसी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद और अनियमितताएं सामने आईं, किंतु व्यापक राष्ट्रीय एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क नहीं बनाया गया। राज्यों के अनुभव भी हमें चेतावनी देते हैं, राजस्थान में रीट था भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले, हिमाचल प्रदेश में सरकारी परीक्षाएं से जुड़ा संकट, झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल विवाद और कर्नाटक में परीक्षा-पत्र लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं को अनिश्चितता में डाला। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में भर्ती परीक्षाओं की एक लंबी शृंखला रही है, जिसने राज्य की भर्ती व्यवस्था की साख को बुरी तरह प्रभावित किया। देश के अलग-अलग राज्यों, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब अथवा अन्य स्थानों, में किसी भी परीक्षा में अनियमितता हो, उस पर राजनीति नहीं, कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारा मानना है कि दोषी का दल नहीं देखा जाना चाहिए; केवल अपराध देखा जाना चाहिए। मैं विपक्षी दलों से पूछना चाहता हूँ, जब विद्यार्थी चिंतित हों, तब क्या हमारा काम उनकी पीड़ा को राजनीतिक मंच बनाना है, या उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को मजबूत करना है? छात्रों की चिंता को चुनावी नारा बनाना आसान है; उनकी मेहनत को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाना कठिन है, और मोदी सरकार ने कठिन रास्ता चुना है।”

  • भारतीय खिलौनों की दुनिया में बढ़ी धाक, सात साल में 89 फीसदी बढ़ा निर्यात

    भारतीय खिलौनों की दुनिया में बढ़ी धाक, सात साल में 89 फीसदी बढ़ा निर्यात


    नई दिल्ली।
    वैश्विक बाजार में भारतीय खिलौनों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 7 साल में घरेलू विनिर्माण और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के बल पर भारत के खिलौना उद्योग का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। भारत के खिलौना निर्यात में 89.1 फीसदी की भारी बढ़ोत्तरी हुई है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत खिलौने आयात करने वाले देश से उभरकर एक शुद्ध निर्यातक बन चुका है। अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स तथा जर्मनी जैसे विकसित देशों को भारतीय खिलौने निर्यात किए जा रहे हैं।

    ट्रेडस्टैट आंकड़ों के मुताबिक भारत में खिलौनों का आयात 37.5 फीसदी कम हुआ है, जबकि खिलौनों के निर्यात में 89.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से खिलौनों के निर्यात में 89.1 फीसदी का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। विदेशी खिलौनों पर निर्भरता भी कम हुई है और आयात में 37.5 फीसदी की भारी कमी देखने को मिली है।

    मंत्रालय ने बताया कि टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 17वीं टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी प्रदर्शनी का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 4 से 7 जुलाई तक किया। इस प्रदर्शनी में 400 भारतीय खिलौना ब्रांडों, 40 देशों के 100 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और लगभग 30,000 व्यावसायिक आगंतुकों ने भाग लिया। इस प्रदर्शनी ने निर्माताओं को थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, वितरकों, संस्थागत खरीदारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने का मंच प्रदान किया।

  • केंद्र सरकार ने चीनी की स्टॉक लिमिट तय की, नये नियम 1 अगस्त से लागू होंगे

    केंद्र सरकार ने चीनी की स्टॉक लिमिट तय की, नये नियम 1 अगस्त से लागू होंगे


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए बड़ा सख्त कदम उठाया है। सरकार ने बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चीनी कारोबारियों के लिए नई स्टॉक रखने की सीमा लागू किया है। सरकार के नए आदेश के तहत अब कोई भी चीनी डीलर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। ये नियम 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेगा।

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और सरकारी चीनी भंडार को इस नई स्टॉक सीमा से छूट दी गई है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया कि कोई भी चीनी डीलर 30 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक या भंडार न रखे। साथ ही चीनी की कीमतों को काबू में रखने की कोशिशों के तहत चार हजार क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की गई है।

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार सभी चीनी डीलरों को खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हर हफ्ते अपने चीनी स्टॉक की जानकारी देनी होगी और स्टॉक की स्थिति को अपडेट करना होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने राज्यों को भी अधिकार दिया है कि अगर जरूरी हो तो वे केंद्र की ओर से तय सीमा से कम स्टॉक लिमिट लागू कर सकते हैं। इस कदम का मकसद बाजार में चीनी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना, जमाखोरी पर अंकुश लगाना और कीमतों को कंट्रोल रखने में मदद करना है।

  • भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में बदलाव, रयान टेन डोशेट और टी. दिलीप का कार्यकाल समाप्त

    भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में बदलाव, रयान टेन डोशेट और टी. दिलीप का कार्यकाल समाप्त


    नई दिल्ली।
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट और फील्डिंग कोच टी. दिलीप के अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि दोनों कोचों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और जल्द ही उनके स्थान पर नए नियुक्तियों की घोषणा की जाएगी।

    सैकिया ने बताया कि टी. दिलीप का अनुबंध पिछले वर्ष समाप्त हो गया था, लेकिन उन्हें एक वर्ष का विस्तार दिया गया था। वहीं, रयान टेन डोशेट का अनुबंध 10 जून को समाप्त हो गया था। हालांकि, दोनों को भारत-इंग्लैंड सीमित ओवरों की श्रृंखला समाप्त होने तक टीम के साथ बनाए रखा गया, जो 19 जुलाई को खत्म हुई।

    उन्होंने कहा कि अनुबंध समाप्त होने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था। उन्होंने उन अटकलों को भी खारिज किया, जिनमें इस्तीफे या अन्य कारणों की चर्चा की जा रही थी। सैकिया के अनुसार, यह पूरी तरह अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद लिया गया सामान्य प्रशासनिक निर्णय है।

    बीसीसीआई सचिव ने बताया कि बोर्ड नए सहायक और फील्डिंग कोच की नियुक्ति की प्रक्रिया में है तथा एक-दो दिन के भीतर नए नामों की घोषणा की जा सकती है।

    रयान टेन डोशेट ने 2024 टी20 विश्व कप जीत के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यभार संभालने पर भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में शामिल हुए थे। बल्लेबाजी और फील्डिंग विभाग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कार्यकाल में भारत ने 2025 एशिया कप और 2026 आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया।

    हालांकि, इसी अवधि में भारतीय टेस्ट टीम का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। टीम ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी गंवाई और घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड तथा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखलाओं में हार का सामना किया।

    फील्डिंग कोच टी. दिलीप वर्ष 2021 से भारतीय टीम के साथ जुड़े थे। उनके कार्यकाल में भारत ने 2024 टी20 विश्व कप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 टी20 विश्व कप जैसे बड़े खिताब जीते।

  • नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी ने जांच के दौरान जुटाए गए सैकड़ों गवाहों के बयान, दस्तावेज और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की है।’

    सीबीआई के अनुसार, चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। जांच में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पाए गए हैं। फिलहाल सभी 13 आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं।

    एजेंसी ने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद 12 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के लिए 72 अधिकारियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की गई। इसके बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में 92 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

    जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला का खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपितों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञ, कई कथित बिचौलिये तथा दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं।

    चार्जशीट में शामिल आरोपितों के नाम इस प्रकार हैं:

    • मनीषा मंधारे (जीवविज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (रसायन विज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय वाघमारे
    • धनंजय निवृत्ति लोखंडे
    • शुभम मधुकर खैरनार
    • यश यादव
    • मांगीलाल बिवाल
    • विकास बिवाल
    • दिनेश बिवाल
    • डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे
    • शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर (आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के संचालक)
    • तेजस हर्षदकुमार शाह (एपीएमए कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में भौतिकी संकाय एवं मुख्य परिचालन अधिकारी)

    सीबीआई ने जांच के दौरान आरोपितों के कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की है। एजेंसी ने कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिए हैं। मामले की आगे की सुनवाई विशेष अदालत में होगी, जबकि जांच के अन्य पहलुओं पर भी कार्रवाई जारी है।

  • राजस्थान में जन्मे जय मूंदड़ा को आयरलैंड की वनडे टीम में मौका, अफगानिस्तान सीरीज के लिए चयन

    राजस्थान में जन्मे जय मूंदड़ा को आयरलैंड की वनडे टीम में मौका, अफगानिस्तान सीरीज के लिए चयन


    नई दिल्ली।
    राजस्थान में जन्मे भारतीय मूल के क्रिकेटर जय मूंदड़ा को आयरलैंड की वनडे टीम में पहली बार शामिल किया गया है। हाल ही में भारत के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में शानदार गेंदबाजी करने वाले जय को अफगानिस्तान के विरुद्ध आगामी वनडे श्रृंखला के लिए चयनित किया गया है। यदि उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है तो वह आयरलैंड के लिए वनडे खेलने वाले भारतीय मूल के दूसरे क्रिकेटर बन जाएंगे।

    जय मूंदड़ा ने भारत के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करते हुए दो मैचों में पांच विकेट हासिल किए थे। उनके प्रभावी प्रदर्शन की बदौलत आयरलैंड ने भारत के खिलाफ पहली बार किसी टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। इसी प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन्हें वनडे टीम में भी स्थान दिया है।

    राजस्थान में जन्मे जय मूंदड़ा उच्च शिक्षा के लिए आयरलैंड गए थे। वहीं उन्होंने अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाया और घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे।

    आयरलैंड और अफगानिस्तान के बीच पांच मैचों की वनडे श्रृंखला 5 अगस्त से शुरू होगी। पहले तीन मुकाबलों के लिए घोषित 14 सदस्यीय टीम में कप्तान पॉल स्टर्लिंग की भी वापसी हुई है, जो टी-20 विश्व कप 2026 के दौरान लगी चोट से उबर चुके हैं। जय मूंदड़ा के अलावा बेन कैलिट्ज और बायरन मैकडोनो को भी पहली बार आयरलैंड की वनडे टीम में शामिल किया गया है।

    चोटों के कारण आयरलैंड को कई अनुभवी खिलाड़ियों की सेवाएं नहीं मिल सकेंगी। तेज गेंदबाज जोश लिटिल, मैट हॉलैंड, क्रेग यंग, बैरी मैकार्थी, जॉर्डन नील और डेविड डेलानी चयन के लिए उपलब्ध नहीं हैं।

    श्रृंखला के पहले दो मुकाबले 5 और 7 अगस्त को ब्रेडी में खेले जाएंगे, जबकि शेष तीन मैच 10, 12 और 15 अगस्त को स्टॉर्मोंट में आयोजित होंगे। यह श्रृंखला आयरलैंड के नए मुख्य कोच गैरी विल्सन का पहला अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट भी होगी।

    पहले तीन वनडे मैचों के लिए आयरलैंड की टीम:

    पॉल स्टर्लिंग (कप्तान), मार्क अडायर, एंड्रयू बालबर्नी, बेन कैलिट्ज, कर्टिस कैम्फर, केड कारमाइकल, जॉर्ज डॉकरेल, गैविन होए, एंड्रयू मैकब्राइन, लियाम मैकार्थी, बायरन मैकडोनो, जय मूंदड़ा, हैरी टेक्टर और लोर्कन टकर।

  • 16,086 मेगावाट क्षमता और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन के साथ पवन ऊर्जा में गुजरात सबसे आगे, केंद्र ने जारी किए आंकड़े

    16,086 मेगावाट क्षमता और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन के साथ पवन ऊर्जा में गुजरात सबसे आगे, केंद्र ने जारी किए आंकड़े

    नई दिल्ली। देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में गुजरात ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के अनुसार राज्य ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में स्थापित क्षमता और बिजली उत्पादन, दोनों मामलों में देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 30 जून 2026 तक गुजरात में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 16,086 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक है। इस उपलब्धि ने गुजरात को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में और अधिक मजबूत पहचान दिलाई है।

    सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान गुजरात ने पवन ऊर्जा से 33,706 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। यह देश के कुल पवन ऊर्जा उत्पादन का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। भारत की कुल पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता इसी अवधि में 57,443 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि पूरे देश में पवन ऊर्जा से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन दर्ज किया गया। इसमें गुजरात का योगदान सबसे अधिक रहा, जिससे राज्य की ऊर्जा क्षमता और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उसकी मजबूत स्थिति स्पष्ट होती है।

    केंद्र सरकार का कहना है कि वर्ष 2030 तक देश की कुल बिजली आवश्यकता का 50 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी दिशा में गुजरात ने पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के विस्तार के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य में विकसित बुनियादी ढांचा, निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण और प्रभावी नीतियों के कारण स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हुआ है।

    सरकार ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत नई ट्रांसमिशन लाइनें और सबस्टेशन विकसित किए गए हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बिजली ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके अलावा इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम शुल्क में दी गई राहत से निजी निवेश को बढ़ावा मिला है और नई परियोजनाओं की लागत कम करने में मदद मिली है।

    पवन ऊर्जा क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए ‘नेशनल रिपावरिंग एंड लाइफ एक्सटेंशन पॉलिसी फॉर विंड पावर प्रोजेक्ट्स-2023’ लागू की गई है। इसके साथ ही ऑफशोर विंड एनर्जी लीज रूल्स-2023 और ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसी योजनाओं ने समुद्री क्षेत्रों में पवन ऊर्जा विकास के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। इन पहलों का लाभ गुजरात सहित कई राज्यों को मिल रहा है, हालांकि इस क्षेत्र में सबसे तेज प्रगति गुजरात ने दर्ज की है।

    केंद्र सरकार के अनुसार गुजरात ने देश में सबसे पहले पवन ऊर्जा नीति लागू करने वाले राज्यों में शामिल होकर इस क्षेत्र के विकास की मजबूत नींव रखी थी। समय के साथ राज्य ने आधुनिक तकनीक, बेहतर ग्रिड प्रबंधन और निवेश समर्थक नीतियों के माध्यम से अपनी क्षमता में लगातार विस्तार किया। परिणामस्वरूप राज्य में पवन ऊर्जा उत्पादन लगातार बढ़ा है और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिली है।

    सरकार का मानना है कि गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और टिकाऊ विकास को गति देने की दिशा में राज्य की यह उपलब्धि देश के ऊर्जा परिवर्तन अभियान को नई मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले वर्षों में पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार से भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद जताई गई है।

  • ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ और उद्योगों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सुधारों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सुधारों की निगरानी और प्रगति के मूल्यांकन के लिए पीएमरेफ पोर्टल पर नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल भी शुरू किया है।

    सरकार के अनुसार नया मॉड्यूल मंगलवार से कार्य करना शुरू कर चुका है और यह सभी मंत्रालयों एवं विभागों के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल पर विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक उपायों और सुशासन से जुड़ी पहलों का विस्तृत विवरण अपलोड करेंगे। इससे सभी सुधारात्मक प्रयासों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करना आसान होगा।

    केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक मंत्रालय ऐसे सुधारों की पहचान करे जो आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाएं, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाएं तथा उद्योगों के लिए कारोबार करना अधिक सुगम बनाएं। ये सुधार उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की सिफारिशों, अनौपचारिक मंत्रिसमूह (आईजीओएम) के सुझावों अथवा संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वयं तैयार किए गए प्रस्तावों पर आधारित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय स्तर पर नवाचार और सुधारों को बढ़ावा देने से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    नई व्यवस्था के तहत सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपनी सभी सुधार संबंधी पहलों का विवरण पीएमरेफ पोर्टल पर अपलोड करें और समय-समय पर उनकी प्रगति को अपडेट करते रहें। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय को हर सप्ताह शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक अपनी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इससे विभिन्न योजनाओं और सुधारों की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा आवश्यक होने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सुधार प्रक्रिया को एक व्यवस्थित और संस्थागत ढांचे के तहत संचालित करना है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों में लागू किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और सुधार संबंधी पहलों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। साथ ही विभिन्न विभागों के सफल अनुभवों को साझा कर अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने का अवसर मिलेगा।

    पीएमरेफ (प्रधानमंत्री रिफरेंस/रिफॉर्म्स) पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है। यह नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पहलों और प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ अन्य सरकारी निगरानी प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों, निर्णयों और विभिन्न संदर्भों की प्रगति पर भी नजर रखी जाती है। सरकार को उम्मीद है कि नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल प्रशासनिक सुधारों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।