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  • बेकिंग सोडा और नींबू से मिनटों में साफ करें गैस स्टोव, जले निशान होंगे आसानी से दूर..

    बेकिंग सोडा और नींबू से मिनटों में साफ करें गैस स्टोव, जले निशान होंगे आसानी से दूर..

    नई दिल्ली । रसोई में चाय या दूध बनाते समय कई बार थोड़ी सी लापरवाही के कारण बर्तन से दूध या चाय उबलकर गैस स्टोव पर गिर जाती है। गर्म सतह पर गिरते ही यह जलकर चिपक जाती है और कुछ ही देर में जिद्दी दाग का रूप ले लेती है। सामान्य साबुन और पानी से कई बार ये निशान पूरी तरह साफ नहीं होते, जिससे गैस स्टोव की चमक भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इन दागों को बिना अधिक मेहनत और बिना सतह को नुकसान पहुंचाए साफ किया जा सकता है।

    गैस स्टोव की सफाई शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्टोव पूरी तरह ठंडा हो चुका हो। गर्म सतह पर सफाई करने से दुर्घटना की संभावना रहती है और सफाई भी प्रभावी नहीं होती। स्टोव ठंडा होने के बाद जले हुए हिस्से पर थोड़ा पानी छिड़कें और उस पर बेकिंग सोडा डाल दें। कुछ मिनट तक इसे ऐसे ही छोड़ने के बाद मुलायम स्पंज से हल्के हाथों से रगड़ें। इससे जमी हुई परत ढीली होने लगती है और दाग आसानी से हटने लगते हैं।

    यदि दूध या चाय का दाग काफी पुराना और जिद्दी हो गया है तो बेकिंग सोडा का गाढ़ा पेस्ट अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इसके लिए बेकिंग सोडा में थोड़ा गर्म पानी या नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे दाग वाले हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद मुलायम ब्रश या स्पंज से धीरे-धीरे सफाई करें। इस प्रक्रिया से जली हुई परत नरम हो जाती है और बिना ज्यादा दबाव लगाए हटाई जा सकती है।

    अक्सर दूध या चाय बर्नर के आसपास और छोटे-छोटे कोनों में भी जम जाती है, जहां सामान्य स्पंज आसानी से नहीं पहुंच पाता। ऐसी जगहों की सफाई के लिए पुराने टूथब्रश का उपयोग किया जा सकता है। टूथब्रश के मुलायम ब्रिसल्स संकरी जगहों तक पहुंचकर जमा गंदगी को धीरे-धीरे हटाने में मदद करते हैं। सफाई करते समय ध्यान रखें कि गैस का बर्नर पूरी तरह बंद हो और उसमें अतिरिक्त पानी न जाए।

    हल्के दागों के लिए नींबू और बेकिंग सोडा का मिश्रण भी उपयोगी माना जाता है। बेकिंग सोडा छिड़कने के बाद उस पर नींबू का रस डालने से हल्की रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जो जमी हुई गंदगी को ढीला करने में सहायता करती है। कुछ मिनट बाद मुलायम कपड़े या स्पंज से पोंछने पर सतह साफ दिखाई देने लगती है। यदि गैस स्टोव ग्लास टॉप का है तो पहले इस उपाय को किसी छोटे हिस्से पर आजमाना बेहतर रहेगा।

    यदि घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी दाग पूरी तरह साफ न हों, तो गैस स्टोव या कुकटॉप के लिए बने विशेष क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी क्लीनर का उपयोग करने से पहले उसके निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग सतहों के लिए अलग प्रकार के उत्पाद बनाए जाते हैं। गलत क्लीनर या कठोर स्क्रबर का उपयोग करने से स्टोव की सतह खराब हो सकती है।

    सफाई के दौरान चाकू, ब्लेड या किसी नुकीली वस्तु से दाग खुरचने से बचना चाहिए। इससे स्टेनलेस स्टील या ग्लास टॉप पर स्थायी खरोंच पड़ सकती है। सबसे अच्छा तरीका यही है कि दूध या चाय गिरने के बाद गैस ठंडी होते ही तुरंत सफाई कर दी जाए। समय पर सफाई करने से दाग जिद्दी नहीं बनते और गैस स्टोव लंबे समय तक साफ, चमकदार और सुरक्षित बना रहता है।

  • कैबिनेट: मप्र के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2 हजार 480 करोड़ स्वीकृति

    कैबिनेट: मप्र के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2 हजार 480 करोड़ स्वीकृति


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और जनकल्याण को गति देने के लिए लगभग 2 हजार 480 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई। बैठक में खेल गतिविधियों, सिंचाई, महिला सशक्तिकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और किसान कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई।

    प्रमुख निर्णयों में अक्टूबर 2026 में भोपाल में ‘महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी’ के भव्य आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई, जिससे राज्य की खेल अवसंरचना और पर्यटन को वैश्विक पहचान मिलेगी। कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए रिहन्द एवं मल्हारगढ़ सिंचाई परियोजनाओं और किसानों को समर्थन मूल्य पर बोनस भुगतान योजना की निरंतरता को मंजूरी मिली। प्रदेश को तकनीकी रूप से अग्रणी बनाने के उद्देश्य से आईआईएसईआर (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और आईटी पार्कों के विकास के लिए 857 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इन निर्णय में आई टी पार्क की स्थापना के वर्ष 2031 तक संचालन की निरंतरता की स्वीकृति महत्वपूर्ण है ,इसके तहत करीब 8000 युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण के लिए 198 करोड़ रुपये, कर्मचारी कल्याण एवं पेंशन योजनाओं के लिए 982 करोड़ रुपये और ग्वालियर में विद्युत सुरक्षा के निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय और नारायणगढ़ में 9 नए न्यायिक पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

    महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के भोपाल में आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने माह अक्टूबर 2026 में महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के भोपाल के बरखेड़ा नाथू में स्थित अन्तर्राष्ट्रीय स्पोटर्स कॉम्पलेक्स में आयोजन के लिए संभावित व्यय राशि 18 करोड़ 74 लाख रूपये के व्यय की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है।

    हॉकी इण्डिया को अन्तर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ द्वारा देश में हॉकी खेल का संचालन, प्रोत्साहन और अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए अधिकृत किया गया है। प्रतियोगिता वर्ष 2010 से निरन्तर 2 वर्ष के अन्तराल में आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता को आयोजित करने का मुख्य उद्‌द्देश्य एशियाई महिला हॉकी टीमों की प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना है। महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 में एशिया की प्रमुख 6 महिला टीमों (भारत, चीन, जापान, मलेशिया, साउथ कोरिया, एवं थाईलैण्ड) के लगभग 200 खिलाडी व सपोर्ट स्टॉफ के सम्मिलित होने की संभावना है।

    यह अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता हॉकी इण्डिया और खेल और युवा कल्याण विभाग ‌द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जायेगी। अनुबंध अनुसार हॉकी इण्डिया को खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा ‘पेजेंटिंग पार्टनर’ राईटस के लिए 11 करोड़ रूपये दिये जाएंगे। अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए विभाग दवारा 7 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय किया जायेगा। इस प्रकार आयोजन पर लगभग 18 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय होना संभावित है।

    भोपाल के बरखेड़ा नाथू में अन्तर्राष्ट्रीय स्पोटर्स कॉम्पलेक्स को नवीन एवं आधुनिक तकनीकों के अनुरूप अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए तैयार किया गया है। एशिया स्तर की अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आयोजन से वैश्विक स्तर पर मध्यप्रदेश में निर्मित खेल अधोसरंचना का प्रचार प्रसार होगा। इससे प्रदेश के हॉकी खिलाड़ियों के मनोबल में वृ‌द्धि होगी और एशिया के प्रमुख देशों से सम्मिलित हुई टीमों के खिलाड़ियों के भोपाल आगमन से प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 111 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने सिंगरौली की रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना को सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 111 करोड़ 4 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना का मुख्य उद्देश्य गोविन्द वल्लभ पंत सागर रिजर्वायर (रिहन्द नदी पर स्थित) से संचित जल का उद्वहन कर सिंगरौली, माड़ा, वैढन और जावद तहसील के 119 गांवों में 38,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए जल प्रदान करना है।

    मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 184 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मंदसौर की मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 184 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना लिफ्ट सिंचाई परियोजना है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदसौर जिले की 46,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है।

    ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना सहित विभिन्न योजनाओं के लिए 857 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने आईसर में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए 85 करोड़ 51 लाख रूपये सहित विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 857 करोड़ 21 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।

    आई टी पार्क स्थापना की निरंतरता को मंजूरी: 8000 को मिलेगा रोजगार

    प्रदेश में आईटी पार्क की स्थापना’ संबंधी योजना के लिए 595 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना अंतर्गत प्रदेश में इन्दौर, भोपाल, जबलपुर एवं ग्वालियर में आई.टी. पार्को की स्थापना की गयी है। आई.टी. पार्क एवं आई.टी. टावर्स की स्थापना से प्रदेश में आधुनिक तकनीकी अधोसंरचना का विकास होगा जिससे देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित कर निवेश एवं औ‌द्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। परिणामस्वरुप प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे तथा 8000 से अधिक स्थानीय युवाओं को कौशल आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उल्लेखनीय है कि अब तक लगभग 22000 युवाओ को रोजगार प्राप्त हो चुका है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के अंतर्गत संपादित एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से आई.टी. एवं ई.एस.डी.एम. क्षेत्र का विस्तार होगा जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ होगी। डिजिटल एवं तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी तथा मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते तकनीकी एवं निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित होगा।

    मंत्रि-परिषद ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की स्थापना के लिए कुल लागत 85 करोड़ 51 लाख रूपये में से 17 करोड़ 90 लाख रूपये को आगामी तीन वर्षों तक प्रदाय किए जाने की स्वीकृति दी है। यह एक उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में कार्य करेगा, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन प्रौ‌द्योगिकी, UAV डिजाइन एवं निर्माण, स्वायत्त प्रणालियों तथा उन्नत अनुप्रयोगों पर अनुसंधान एवं नवाचार को बढावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त केंद्र में स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC), प्रोटोटाइप विकास एवं परीक्षण जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएंगी, जिससे राज्य में ड्रोन प्रौ‌द्योगिकी का एक समग्र एवं आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सकेगा।

    ‘नई तकनीक के लिए एम.पी.एस.ई.डी.सी. एवं अन्य संस्थाओं को सहायता’ योजना के लिए 110 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य शासन एवं उसके विभिन्न विभागों को नवीनतम सूचना प्रौ‌द्योगिकी एवं डिजिटल समाधान उपलब्ध कराकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना एवं नागरिकों को त्वरित, सरल और सुरक्षित ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करना है। इसमें AI/ML आधारित बिजनेस इंटेलिजेंस, व्हाट्‌सऐप चैटवॉट, ड्रोन सेवाएं, एसएमएस गेटवे, MP CODE, ई-साइन, राज्य ई-मेल नीति, लो-कोड/नो-कोड प्लेटफॉर्म और सिक्योरिटी ऑडिट लैब जैसी प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं।

    ‘मध्यप्रदेश स्टेट स्पाटियल डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर (एम.पी. एस एस डी आई)’ योजना के लिए 40 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। योजना के उद्देश्य राज्य में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक का उपयोग कर एकीकृत स्थानिक डाटा (Spatial Data) का निर्माण, संधारण एवं अद्‌यतन करते हुए विभिन्न विभागों, एजेसियों तथा योजनाओं को अद्‌यतन, विश्वसनीय एवं सुगम जीआइएस आधारित सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इससे आपदा प्रबंधन, जल आपूर्ति, भूमि प्रबंधन, शहरी विकास एवं सड़क मरम्मत जैसे क्षेत्रों में रियल टाइम मॉनिटरिंग और निर्णय क्षमता में वृद्धि हुई है।

    इसी तरह ‘क्लाउड सेवाओं का प्रदाय व प्रबंधन’ के लिए 26 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य डिजिटल मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने और शासन की सभी सेवाओं में डिजिटल परिवर्तन (डिटिटल ट्रांसफार्मेशन) को गति देना है। इस योजना के अंतर्गत, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPSEDC) ‌द्वारा तैयार क्लाउड अंगीकरण रूपरेखा (Cloud Adoption Framework) के आधार पर सभी शासकीय एवं अर्ध-शासकीय विभागों को सुरक्षित, लचीली, स्केलेवल एवं किफायती क्लाउड सेवाएं प्रदान की जा रही है। इसके माध्यम से शासन को अपने आईटी संसाधनों के निर्माण और रखरखाव पर भारी पूंजीगत निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। आवश्यकतानुसार कम्प्यूटिंग संसाधन, स्टोरेज, नेटवर्किंग तथा सॉफ्टवेयर सेवाएँ क्लाउड प्लेटफॉर्म से प्राप्त कर सकते है।

    ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय की स्थापना की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय और 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। सृजन संबंधी कार्यवाही के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया है। उल्लेखनीय है कि सभी बड़े राजस्व संभागों (सागर, शहडोल, नर्मदापुरम को छोडकर) में विद्युत निरीक्षकालय के वृत्त कार्यालय स्थापित है। वर्तमान में ग्वालियर एवं चंबल संभाग के विद्युत सुरक्षा और राजस्व संग्रहण संबंधी कार्य भोपाल मुख्यालय से संपादित होते हैं। ग्वालियर में नवीन वृत्त कार्यालय प्रारंभ करने से विशेषत: मुरैना के बामौर और भिंड के मालनपुर औ‌द्योगिक क्षेत्र को लाभ प्राप्त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त भविष्य में मुरैना में 600 मेगावाट का बैटरी स्टोरेज सोलर पॉवर प्लांट स्थापित किया जाना है जिसके लिए भी ग्वालियर में नवीन वृत्त कार्यालय स्थापित किया जाना आवश्यक है।

    नारायणगढ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मंदसौर के नारायणगढ़ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का एक नवीन पद सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। इससे वहां नियमित रूप से न्यायालय का संचालन हो सकेगा जिससे स्थानीय अधिवक्ताओं और लोगों की मांग के साथ प्रकरणों का निराकरण किया जा सकेगा और आम जन को सुलभ व त्वरित न्याय मिल सकेगा।

    प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालन के लिए 129 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी की गतिविधियों से संबंधित योजनाओं के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 129 करोड़ 12 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति राशि से अकादमी के स्थापना एवं कार्यालयीन व्यय, मिशन कर्मयोगी, विभागीय परिसंपतियों का संधारण एवं प्रशासन अकादमी परिसर में प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए भौतिक सुविधाओं का निर्माण संबंधित कार्य किए जायेंगे।

    संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास के लिए 198 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मिशन शक्ति- उपयोजना सामर्थ्य अंतर्गत संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास योजना के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर क्रियान्वयन के लिए 198 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

    संकल्प -हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन योजना का उद्देश्य जिला स्तर पर एक ऐसी इकाई के रूप में कार्य करना है जो महिलाओं को उनके कल्याण और सशक्तिकरण के लिए योजनाओं और नीतियों के बारे में जागरूकता के साथ-साथ पहुंच प्रदान करें। यह योजना पूर्व से सभी 52 जिलों में संचालित है और अब इसे 3 नवगठित जिलों में संचालित किया जायेगा।

    शक्ति सदन का उद्देश्य महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण बनाना तथा अवैध व्यापार, संकट में फंसी महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से उबार कर एक नई शुरुआत करवाना है। वर्तमान में प्रदेश में 14 शक्ति सदन अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से संचालित है। भारत सरकार द्वारा 5 नये शक्ति सदन स्वीकृत किये गये हैं।

    शहरी/ग्रामीण कामकाजी महिलाओं को सुविधाजनक व सुरक्षित आवास प्रदान करने के लिए सखी निवास योजना को लागू किया गया है। पूर्व में इस योजना का नाम महिला विश्रामालय था। सखी निवास में सभी वर्ग की कामकाजी महिलाओं को प्रवेश दिया जाता है। सखी निवास में महिला कर्मचारियों के छोटे बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर संचालन का भी प्रावधान है। प्रदेश में 3 शासकीय सखी निवास संचालित है।

    कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा योजनाओं के लिए 982 करोड़ रूपये की स्वीकृति


    मंत्रि-परिषद ने वित्त विभाग के अंतर्गत कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा की योजनाओं के 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 982 करोड़ 49 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार संचालनालय पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा की योजनाओं, पेंशन तथा कर्मचारी कल्याण संचालनालय, जिला पेंशन कार्यालय, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण, पेंशनर कल्याण कोष, शासकीय सेवक परिवार कल्याण निधि पर ब्याज, शासकीय कर्मचारी समूह बीमा योजना, शासकीय कर्मचारी सह समूह बीमा योजना को संचालित किया जायेगा।

    समर्थन मूल्य पर उपार्जन पर किसानों को बोनस भुगतान योजना की निरंतरता की स्वीकृति
    मंत्रि-परिषद ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अंतर्गत 500 करोड़ से अधिक की योजना अंतर्गत समर्थन मूल्य पर किसानों को उपार्जन पर बोनस भुगतान के 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक में निरंतर संचालन की स्वीकृति दी है।

    मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम 2011 में संशोधन की स्वीकृति


    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम, 2011 में संशोधन की स्वीकृति दी है। भारत सरकार द्वारा जनविश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 में किए गए संशोधनों को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने, Compliance Reduction and Deregulation के अंतर्गत की गई अनुशंसाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन शुल्क के पुनरीक्षण के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया है।
  • मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

    मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

    भोपाल । मध्यप्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसानों ने भोपाल की ओर कूच कर दिया। मंगलवार को राजधानी की सीमा पर मंडीदीप स्थित कलियासोत नदी के पुल के पास पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई थी लेकिन बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने उसे हटाते हुए भोपाल में प्रवेश कर लिया। इसके बाद किसानों का विशाल पैदल मार्च राजधानी की ओर बढ़ता गया और पूरे इलाके में जय जवान जय किसान के नारों से माहौल गूंज उठा।

    आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि वे केवल प्रदर्शन करने नहीं बल्कि अपनी मांगों को पूरा करवाने के इरादे से आए हैं। उनका लक्ष्य मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है और जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी के तहत किसान अपने साथ सात दिन का राशन पानी और जरूरी सामान भी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली में पहले से तैयार भोजन और दाल बाटी जैसी खाद्य सामग्री भी साथ लाए हैं ताकि आंदोलन के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार को कई बार ज्ञापन और बातचीत के माध्यम से किसानों की समस्याओं से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। किसानों का आरोप है कि मूंग की सरकारी खरीदी सीमित होने के कारण उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके अलावा खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों और अव्यवस्था के चलते समय पर खाद नहीं मिल रही जिससे खेती प्रभावित हो रही है।

    भोपाल सीमा पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसानों को राजधानी में प्रवेश से रोका जा सके लेकिन किसानों के भारी दबाव के आगे बैरिकेडिंग टिक नहीं सकी। किसानों के प्रवेश के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है तथा राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    आंदोलन में शामिल किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कह रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक फसल या एक जिले का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

    अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता तो राजधानी में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां भी प्रभावित होने की संभावना है।

  • लालच ने मिटा दिया भाईचारे का रिश्ता जमीन विवाद में बड़े भाई की हत्या 12 साल बाद पिता पुत्र को मिली उम्रकैद

    लालच ने मिटा दिया भाईचारे का रिश्ता जमीन विवाद में बड़े भाई की हत्या 12 साल बाद पिता पुत्र को मिली उम्रकैद


    इंदौर । इंदौर की जिला अदालत ने 12 वर्ष पुराने चर्चित हत्या मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पिता और पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में रिश्तों की अहमियत पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ा भाई पिता के समान होता है लेकिन इस मामले में आरोपियों ने जमीन के लालच में अपने ही सगे भाई की हत्या कर दी। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने एक पल के लिए भी यह नहीं सोचा कि जिस व्यक्ति की जान ली जा रही है वह उनका अपना भाई है। इस अपराध ने रिश्तों की सभी मर्यादाओं को तार तार कर दिया।

    अदालत ने आरोपी प्रदीप राठौड़ और उसके पिता ओमप्रकाश राठौड़ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120 बी के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर प्रत्येक अपराध के लिए 500 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले का तीसरा आरोपी रविशंकर अब भी फरार है जिसकी तलाश जारी है।

    यह मामला 27 जून 2014 का है जब लसूड़िया क्षेत्र में जमीन विवाद के चलते बड़े भाई अतुल राठौड़ की हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश परिवार के भीतर ही रची गई थी और जमीन के विवाद ने रिश्तों को इस हद तक तोड़ दिया कि पिता और छोटे भाई ने मिलकर बड़े भाई की जान ले ली।

    फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता और आरोपी के पक्ष में मौजूद परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दंड हमेशा अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता इसलिए इसमें मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता। अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ पहले किसी भी प्रकार का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और घटना के बाद भी उनके खिलाफ किसी अन्य गंभीर आपराधिक गतिविधि का उल्लेख नहीं मिला। इन परिस्थितियों के साथ उनकी सामाजिक आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आजीवन कारावास को उपयुक्त सजा माना।

    सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हत्या सुनियोजित थी और इसका मुख्य कारण जमीन का विवाद था।

    यह फैसला केवल एक हत्या के मामले में सजा का आदेश नहीं बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि संपत्ति और लालच के कारण यदि कोई व्यक्ति अपने ही रिश्तों का खून करता है तो कानून उसे किसी भी कीमत पर बख्शता नहीं है। परिवार विश्वास और भाईचारे जैसे रिश्ते समाज की सबसे मजबूत नींव माने जाते हैं और जब इन्हीं रिश्तों को लालच की भेंट चढ़ा दिया जाता है तो उसका परिणाम कठोर कानूनी दंड के रूप में सामने आता है। अदालत की टिप्पणी भी यही याद दिलाती है कि रिश्तों का मूल्य किसी भी संपत्ति से कहीं अधिक बड़ा होता है।

  • गरीबी नहीं तोड़ सकी हौसला ड्राइवरी कर पढ़ाई करने वाला छात्र बना आंदोलन की पहचान 26 दिन तक छात्रों के हक के लिए डटा रहा

    गरीबी नहीं तोड़ सकी हौसला ड्राइवरी कर पढ़ाई करने वाला छात्र बना आंदोलन की पहचान 26 दिन तक छात्रों के हक के लिए डटा रहा


    इंदौर । सपने पूरे करने के लिए संघर्ष करना हर युवा की मजबूरी होती है लेकिन कुछ लोग अपने सपनों के साथ दूसरों के भविष्य की लड़ाई भी लड़ते हैं। बड़वानी जिले के छोटे से गांव लिंबई के रहने वाले अरुण बड़ोले ऐसी ही मिसाल बनकर सामने आए हैं। आर्थिक तंगी परिवार की जिम्मेदारियां और पढ़ाई के दबाव के बावजूद उन्होंने अपने लिए नहीं बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य के लिए आवाज उठाई। इंदौर में नीट पेपर लीक के विरोध में चले आंदोलन के दौरान अरुण 26 दिनों तक छात्रों के संघर्ष का चेहरा बने रहे और लगातार धरने पर डटे रहे।

    अरुण का परिवार आज भी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। उनकी मां प्रेमबाई खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करती हैं जबकि पिता मांगीलाल की आंखों की रोशनी पिछले दो वर्षों से काफी कमजोर हो चुकी है जिससे वे पहले की तरह काम नहीं कर पाते। परिवार में तीन बहनें हैं और घर की जिम्मेदारियां भी कम नहीं हैं। इन सबके बीच अरुण पिछले छह वर्षों से इंदौर में किराए के कमरे में रहकर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं।

    अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए अरुण ड्राइवरी का काम भी करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जब देशभर में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे तब अरुण ने तय किया कि वे भी इस लड़ाई का हिस्सा बनेंगे।

    30 जून को इंदौर में आंदोलन की शुरुआत हुई। शुरुआत आसान नहीं थी। पहले दस से बारह दिनों तक उनके साथ केवल चार पांच साथी ही मौजूद रहे। कई बार धरना स्थल लगभग खाली नजर आता था लेकिन अरुण और उनके साथियों का हौसला नहीं टूटा। उन्होंने लगातार छात्रों से संवाद किया लोगों को आंदोलन का उद्देश्य समझाया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते रहे। धीरे धीरे छात्रों सामाजिक संगठनों और शहर के नागरिकों का समर्थन बढ़ने लगा और आंदोलन मजबूत होता गया।

    अरुण का कहना है कि वे स्वयं एक छात्र हैं और यदि वे अपने जैसे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए आवाज नहीं उठाते तो खुद को कभी माफ नहीं कर पाते। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता हर छात्र का अधिकार है और इसके लिए संघर्ष करना जरूरी है। उनका मानना है कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची शिक्षा की पहचान है।

    26 दिनों तक लगातार चले इस आंदोलन ने अरुण को छात्रों के बीच एक नई पहचान दिलाई। हालांकि आंदोलन समाप्त हो चुका है लेकिन उनका संकल्प अब भी कायम है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में किसी भी परीक्षा या शिक्षा व्यवस्था में छात्रों के साथ अन्याय होगा तो वे फिर मैदान में उतरेंगे और विद्यार्थियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे।

    अरुण बड़ोले की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते। आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि इरादे मजबूत हों तो एक साधारण छात्र भी हजारों लोगों की उम्मीद और आवाज बन सकता है। उनका संघर्ष केवल एक आंदोलन की कहानी नहीं बल्कि जिम्मेदारी साहस और बदलाव की सोच का प्रेरक उदाहरण है।

  • एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले एनडीए बैठक में शामिल हुए नए सहयोगी सांसद, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई रणनीतिक चर्चा

    एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले एनडीए बैठक में शामिल हुए नए सहयोगी सांसद, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई रणनीतिक चर्चा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित की गई। संसद भवन परिसर स्थित लाइब्रेरी भवन में हुई इस बैठक की खास बात यह रही कि पहली बार एनसीपीआई के सांसद भी इसमें शामिल हुए। ये सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे और बाद में अपनी नई राजनीतिक भूमिका के तहत एनडीए का समर्थन कर चुके हैं।

    बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सांसद मौजूद रहे। संसदीय रणनीति और आगामी विधायी कार्यों को लेकर हुई इस बैठक में गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने और संसद में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।

    बैठक में शामिल होने के बाद एनसीपीआई सांसद सायोनी घोष ने इसे सकारात्मक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुई चर्चा से कई महत्वपूर्ण विषयों को समझने का अवसर मिला। उनके अनुसार बैठक में मुक्त व्यापार समझौतों सहित विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे सांसदों को व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।

    सायोनी घोष के साथ एनसीपीआई की अन्य सांसद काकोली घोष और शताब्दी रॉय भी पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुईं। तीनों सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थीं। एनसीपीआई में शामिल होने के बाद उन्होंने एनडीए के प्रति अपना समर्थन दोहराया और गठबंधन की संसदीय गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की शुरुआत की।

    बैठक के दौरान सरकार ने सांसदों से ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ के समर्थन की भी अपील की। यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

    प्रस्तावित संशोधनों के तहत परीक्षा में अनियमितताओं के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की सजा, भारी आर्थिक दंड, अवैध गतिविधियों से जुड़ी संपत्ति जब्त करने तथा मामलों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन उपायों से संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

    यह बैठक ऐसे समय आयोजित हुई, जब संसद के भीतर एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा की तैयारी चल रही है और दूसरी ओर विपक्ष जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन तथा प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में एनडीए की यह बैठक संसदीय समन्वय और रणनीतिक तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    ‘मंगल मिलन’ बैठक एनडीए संसदीय दल की नियमित रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका उद्देश्य सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, संसद में विभिन्न विषयों पर प्रभावी चर्चा सुनिश्चित करना और फ्लोर मैनेजमेंट को मजबूत बनाना है। साथ ही यह मंच गठबंधन के सभी घटक दलों को अपनी भूमिका स्पष्ट करने, जिम्मेदारियों का समन्वय करने और संसद के भीतर साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

  • गोरखपुर में कारोबारी के 10 वर्षीय पोते की अपहरण के बाद हत्या, पड़ोसी शिक्षक के घर के बेसमेंट से मिला शव

    गोरखपुर में कारोबारी के 10 वर्षीय पोते की अपहरण के बाद हत्या, पड़ोसी शिक्षक के घर के बेसमेंट से मिला शव


    गोरखपुर। जिले के खजनी कस्बे में एक ज्वैलरी कारोबारी के 10 वर्षीय पोते की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। बच्चे का शव मंगलवार को उसके घर से करीब 20 मीटर दूर रहने वाले पड़ोसी के मकान के बेसमेंट से बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि वैभव वर्मा सोमवार शाम से लापता था। वह स्कूल से घर लौटने के बाद साइकिल लेकर बाहर खेलने गया था। करीब आधे घंटे बाद परिवार को सूचना मिली कि उसकी साइकिल घर के पीछे लावारिस हालत में खड़ी है। मौके पर पहुंचने पर कुछ दूरी पर बच्चे की एक चप्पल भी मिली, जिसके बाद परिजनों को अपहरण की आशंका हुई और पुलिस को सूचना दी गई।

    CCTV से खुला मामला
    सूचना मिलते ही पुलिस, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंची। आसपास के CCTV फुटेज खंगालने पर वैभव एक पड़ोसी व्यक्ति के साथ जाता दिखाई दिया। परिवार ने उसकी पहचान सर्वेश भट्ट के रूप में की, जो पेशे से कंप्यूटर शिक्षक बताया जा रहा है। पुलिस ने सर्वेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में उसने बच्चे को अपने साथ ले जाने और बाद में उसकी हत्या करने की बात स्वीकार कर ली।

    बेसमेंट से बोरे में मिला शव
    आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने उसके घर के बेसमेंट की तलाशी ली। वहां अनाज की बोरियों के बीच एक बोरे में बच्चे का शव बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने वारदात उस समय की, जब उसके परिवार के सदस्य मकान की ऊपरी मंजिल पर मौजूद थे। इसके बाद उसने शव को छिपाकर बाद में ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी।

    कैसे गायब हुआ वैभव
    वैभव इलाके के प्रतिष्ठित ज्वैलरी कारोबारी लक्ष्मी नारायण वर्मा का पोता था और नवल्स एकेडमी में चौथी कक्षा का छात्र था। सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे वह स्कूल से घर लौटा, यूनिफॉर्म बदली और साइकिल लेकर बाहर निकल गया। दादी ने उसे खाना खाने के लिए कहा था, लेकिन उसने थोड़ी देर में लौटने की बात कही थी।

    डॉग स्क्वॉड और तलाश अभियान
    पुलिस ने पांच टीमें बनाकर तलाश शुरू की। बच्चे की स्कूल ड्रेस खोजी कुत्ते को सूंघाई गई, जिसके बाद वह चप्पल मिलने वाली जगह से करीब एक किलोमीटर दूर तक गया। इसी दौरान CCTV फुटेज से जांच को अहम सुराग मिला।

    परिवार और स्थानीय लोगों में आक्रोश
    घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया और आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस ने आरोपी के परिवार के सदस्यों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है और उसके घर के बाहर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।

    मां का हाल ही में हुआ था निधन
    वैभव के पिता हनुमान वर्मा ने बताया कि लगभग डेढ़ महीने पहले उसकी मां श्वेता वर्मा का बीमारी के कारण निधन हो गया था। इसके बाद वैभव अधिकतर समय अपने पिता के साथ ही रहता था। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज देखने के बाद उन्हें अपहरण की आशंका हुई और बाद में संदेह पड़ोसी सर्वेश पर गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और हत्या के कारणों की विस्तृत जांच जारी है।

  • महिलाएं रहें सतर्क पीरियड्स जैसा दर्द भी हो सकता है हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं

    महिलाएं रहें सतर्क पीरियड्स जैसा दर्द भी हो सकता है हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं


    नई दिल्ली। हार्ट अटैक को अक्सर सीने में तेज दर्द और बाएं हाथ में झनझनाहट से जोड़कर देखा जाता है लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों से अलग भी हो सकते हैं। कई मामलों में हार्ट अटैक से पहले महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में ऐसा दर्द महसूस होता है जो बिल्कुल पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन जैसा लगता है। यही कारण है कि कई महिलाएं इसे सामान्य मासिक धर्म का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देती हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान शरीर हमेशा एक जैसे संकेत नहीं देता। कुछ महिलाओं को पेट में भारीपन कमर में दर्द मतली थकान सांस फूलना ठंडा पसीना और कमजोरी जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं। कई बार पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द इतना सामान्य लगता है कि मरीज उसे गैस बदहजमी या पीरियड्स की समस्या मान लेता है जबकि वास्तव में यह हृदय से जुड़ी गंभीर परेशानी का संकेत हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यदि समय रहते उपचार न मिले तो हृदय की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर के किसी भी असामान्य दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए विशेष रूप से तब जब उसके साथ सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक थकान चक्कर या सीने में दबाव जैसा महसूस हो।

    महिलाओं में हार्ट अटैक के कई लक्षण पुरुषों की तुलना में अलग हो सकते हैं। इनमें गर्दन कंधे पीठ या जबड़े में दर्द अत्यधिक पसीना उल्टी जैसा महसूस होना अचानक कमजोरी बेचैनी और बिना किसी कारण सांस फूलना शामिल है। यदि पीरियड्स जैसा दर्द सामान्य समय से अलग महसूस हो रहा हो या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च रक्तचाप मधुमेह मोटापा धूम्रपान तनाव अनियमित जीवनशैली और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसके अलावा रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हृदय रोग का खतरा और बढ़ जाता है क्योंकि इस समय शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी माना जाता है।

    हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव पर नियंत्रण और धूम्रपान तथा शराब से दूरी बनाए रखना सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच भी करानी चाहिए। यदि परिवार में पहले से हृदय रोग का इतिहास है तो अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

    ध्यान रखें कि हर पेट दर्द या पीरियड्स जैसा दर्द हार्ट अटैक का संकेत नहीं होता लेकिन यदि यह दर्द असामान्य हो और उसके साथ सांस लेने में तकलीफ सीने में दबाव ठंडा पसीना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर उपचार ही हार्ट अटैक से होने वाले गंभीर नुकसान और जान के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

  • दूसरे जन्मदिन के 24 घंटे बाद बुझ गई मासूम की जिंदगी रसोई हादसे ने छीन ली परिवार की मुस्कान मां भी गंभीर रूप से झुलसी

    दूसरे जन्मदिन के 24 घंटे बाद बुझ गई मासूम की जिंदगी रसोई हादसे ने छीन ली परिवार की मुस्कान मां भी गंभीर रूप से झुलसी


    नई दिल्ली । इंदौर जिले के देपालपुर क्षेत्र के ग्राम कुनगारा में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। जिस घर में एक दिन पहले दो साल की मासूम सृष्टि का जन्मदिन हंसी खुशी और उत्साह के साथ मनाया गया था वहीं अगले ही दिन उसकी मौत ने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं। रसोई में खाना बनाते समय मां की साड़ी में अचानक आग लग गई और पास में खेल रही मासूम भी उसकी चपेट में आ गई। गंभीर रूप से झुलसी बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मां का उपचार अभी भी जारी है।

    जानकारी के अनुसार सृष्टि की मां काजल सुबह रसोई में खाना बना रही थीं। उसी दौरान किसी कारण उनकी साड़ी में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि पास में खेल रही दो वर्षीय सृष्टि भी उसकी चपेट में आ गई। काजल मूक बधिर हैं इसलिए वह मदद के लिए आवाज नहीं लगा सकीं। उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल से खेत पर काम कर रहे परिजन को वीडियो कॉल कर घटना की जानकारी दी।

    परिजन तत्काल मौके पर पहुंचे और मां बेटी दोनों को गंभीर हालत में इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण उसकी मौत हो गई। काजल करीब 50 प्रतिशत तक झुलस गई हैं और उनका इलाज जारी है।

    परिवार के लोगों ने बताया कि हादसे से कुछ समय पहले ही काजल की अपनी मां से फोन पर बात हुई थी। उस समय सृष्टि उनकी गोद में बैठी हुई थी। हादसा होने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपनी मां को ही वीडियो कॉल किया क्योंकि उनका नंबर फोन में आसानी से उपलब्ध था। इसके बाद अन्य परिजनों को सूचना दी गई और सभी लोग तुरंत मौके पर पहुंचे।

    मृत बच्ची के मामा मनीष ने बताया कि सृष्टि अपने माता पिता की इकलौती संतान थी। उसके पिता किसान हैं और पूरा परिवार बच्ची के दूसरे जन्मदिन की खुशियां मना रहा था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि अगले ही दिन ऐसा दर्दनाक हादसा हो जाएगा। पूरे परिवार का रो रोकर बुरा हाल है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे की वजह गैस पाइप में लगी आग बताई जा रही है जिसकी लपटें मां की साड़ी तक पहुंच गईं। पुलिस ने मामले में शून्य पर मर्ग कायम कर केस देपालपुर पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है ताकि हादसे के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

    यह घटना एक बार फिर रसोई में सुरक्षा बरतने की आवश्यकता की याद दिलाती है। खाना बनाते समय ढीले कपड़े पहनने से बचना गैस पाइप और चूल्हे की नियमित जांच करना तथा छोटे बच्चों को रसोई से सुरक्षित दूरी पर रखना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी कई बार ऐसे दर्दनाक हादसों को टाल सकती है। लेकिन इस परिवार के लिए अब यह सीख बहुत देर से आई क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही ने उनकी मासूम बेटी की जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली।

  • UP: नोएडा-मेरठ समेत 15 शहरों में तेज बारिश, कई इलाकों में बनी जलभराव की स्थिति

    UP: नोएडा-मेरठ समेत 15 शहरों में तेज बारिश, कई इलाकों में बनी जलभराव की स्थिति


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार सुबह से नोएडा, मेरठ, सहारनपुर, गोंडा समेत 15 शहरों में रुक-रुक कर तेज बारिश हो रही है। लगातार बरसात के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है और जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    सहारनपुर में तड़के करीब चार बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने महज दो घंटे में शहर की सड़कों को जलमग्न कर दिया। कई स्थानों पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया। डीएम कार्यालय परिसर में घुटनों तक पानी जमा हो गया, जबकि ऑफिसर्स कॉलोनी में भी जलभराव हो गया। इस कॉलोनी में जिला जज, कमिश्नर और नगर आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी आवास हैं। शहर की अधिकांश कॉलोनियां तालाब जैसी नजर आईं।

    नोएडा में भी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। कई सड़कों पर कमर तक पानी भर गया, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। जगह-जगह महिलाएं स्कूली बच्चों को कंधों पर बैठाकर सड़क पार कराती दिखाई दीं, जबकि कई दोपहिया वाहन पानी में आधे डूब गए।

    मेरठ में विकास प्राधिकरण के कार्यालय परिसर में पानी घुस गया। कैंप कार्यालय के बाहर जलभराव होने से महापौर को कुछ समय तक कार्यालय के भीतर ही रुकना पड़ा। वहीं रायबरेली में बारिश के बाद खेत में करीब दो फीट गहरा गड्ढा बन गया। ग्रामीणों ने जांच की तो वहां सुरंग जैसी संरचना दिखाई दी, जिसके बाद सूचना मिलने पर एएसआई की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई।

    मौसम विभाग (IMD) ने आज प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 7 जिलों में अत्यधिक भारी और 53 जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के कारण गंगा, यमुना, घाघरा और सरयू नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है।

    लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से करीब 120 बीघा गन्ने की फसल नदी में समा गई है। वहीं बलिया में सरयू नदी का पानी कई गांवों तक पहुंच गया है।

    लखनऊ स्थित मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसूनी ट्रफ एक बार फिर उत्तर प्रदेश की ओर सक्रिय हो रही है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र भी मजबूत हो रहा है। इसके प्रभाव से प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में 30 जुलाई तक हल्की से मध्यम तथा कई स्थानों पर भारी बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की है।