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  • NEET विवाद पर बड़ा फैसला 36 दिन के आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद सरकार ने स्वीकारा इस्तीफा

    NEET विवाद पर बड़ा फैसला 36 दिन के आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद सरकार ने स्वीकारा इस्तीफा


    नई दिल्ली: देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे विवाद और दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। लंबे समय से छात्र संगठन, विपक्षी दल और विभिन्न सामाजिक संगठन परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर उनकी जवाबदेही तय करने और इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सरकार के इस फैसले को आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    पिछले कई सप्ताह से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन सकी थी। आखिरकार सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ने का निर्देश दिया और उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

    इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में उत्साह का माहौल बन गया। छात्रों ने नारेबाजी कर इसे लोकतांत्रिक संघर्ष और एकजुटता की जीत बताया। छात्र नेताओं का कहना है कि यह केवल पहला कदम है और अब सरकार को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक शिक्षा सुधारों के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

    विपक्षी दलों ने भी इस घटनाक्रम को छात्रों और जनता की आवाज की जीत बताया है। विपक्ष का दावा है कि संसद से लेकर सड़क तक लगातार बने जनदबाव और विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। विपक्षी नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने की मांग दोहराई है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। राजनीतिक गलियारों में नए शिक्षा मंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही नए शिक्षा मंत्री की घोषणा कर सकती है और शिक्षा सुधारों के लिए नई कार्ययोजना भी सामने ला सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच देशभर के छात्र और अभिभावक सरकार के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

  • देश की राजनीति में बड़ा झटका NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही का दिया संदेश

    देश की राजनीति में बड़ा झटका NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही का दिया संदेश

    नई दिल्ली: देशभर में NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए काम किया है और किसी भी परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे।

    धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए एक भावुक संदेश भी जारी किया। उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशक से अधिक समय से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका विश्वास हमेशा इस बात पर रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है।

    उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया और अगले वर्ष से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की घोषणा भी की गई।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी भावना के तहत उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपने का निर्णय लिया।

    गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से देशभर में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई राज्यों में परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई जा रही थी।

    हालांकि, इस घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से इस्तीफा स्वीकार किए जाने अथवा नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

    नोट: यह खबर आपके द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। यदि आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने या नए मंत्री की घोषणा होती है, तो उससे संबंधित स्थिति अलग हो सकती है।

  • SVEP से ग्रामीण उद्यमिता को नई उड़ान, 4.32 लाख कारोबारों को मिला सहारा; 86% लाभार्थी वंचित वर्गों से

    SVEP से ग्रामीण उद्यमिता को नई उड़ान, 4.32 लाख कारोबारों को मिला सहारा; 86% लाभार्थी वंचित वर्गों से


    नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार की स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) योजना प्रभावी साबित हो रही है। सरकार ने शनिवार को जानकारी दी कि जून 2026 के अंत तक इस योजना के माध्यम से 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। इससे न केवल हजारों लोगों को स्वरोजगार मिला है, बल्कि उनकी आय और मुनाफे में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    सरकार के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा लाभ समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचा है। करीब 86 प्रतिशत लाभार्थी उद्यमी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं। यह योजना सामाजिक समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है।

    असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां SVEP के तहत सबसे अधिक ग्रामीण उद्यम स्थापित किए गए हैं। इन राज्यों में स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसायों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और संस्थागत सहयोग मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

    SVEP का संचालन स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (SRLM) के माध्यम से किया जाता है। इसके तहत गैर-कृषि आधारित ग्रामीण उद्यमों को व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, मेंटरिंग, वित्तीय सहायता तथा सामुदायिक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। योजना का उद्देश्य गांवों में आत्मनिर्भर उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करना है।

    सरकार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह (SHG), कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP), बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी योजनाओं के साथ समन्वय कर SVEP का दायरा लगातार बढ़ाया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम शुरू करने के लिए वित्त और मार्गदर्शन दोनों उपलब्ध हो रहे हैं।

    योजना के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 तक 942.09 करोड़ रुपए की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की है। यह राशि योजना की शुरुआत के शुरुआती वर्षों में जारी 112.39 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 738 प्रतिशत अधिक है, जो सरकार की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक के लिए 6.50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जबकि प्रति उद्यम औसत निवेश 27,083 रुपए निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि सीमित निवेश के बावजूद यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय स्थापित करने में सफल रहा है।

    SVEP की एक खास विशेषता इसका कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP) मॉडल है। इन संसाधन व्यक्तियों का चयन प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद किया जाता है। इनमें स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाती है और कम से कम 90 प्रतिशत CRP-EP स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों से चुने जाते हैं। साथ ही इस कैडर में महिलाओं की न्यूनतम 60 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

    प्रत्येक CRP-EP लगभग 50 उद्यमों को प्रशिक्षण, व्यवसायिक मार्गदर्शन, बैंक ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग करता है। सरकार का मानना है कि मजबूत सामुदायिक संस्थाओं और स्थानीय नेतृत्व के सहयोग से ग्रामीण उद्यमिता न केवल गरीबी उन्मूलन का प्रभावी माध्यम बन रही है, बल्कि महिलाओं, युवाओं और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

  • 69 हजार 725 करोड़ का मेगा निवेश भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की तैयारी समुद्री अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

    69 हजार 725 करोड़ का मेगा निवेश भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की तैयारी समुद्री अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट


    नई दिल्ली: भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए देश के जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) उद्योग के लिए 69,725 करोड़ रुपए के व्यापक पैकेज को मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी पैकेज का उद्देश्य घरेलू शिपयार्ड की क्षमता बढ़ाना, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना, समुद्री क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

    लोकसभा में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि सरकार भारतीय शिपबिल्डिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत 24,736 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम लागू की जाएगी, जिससे भारतीय शिपयार्ड की लागत वैश्विक शिपयार्ड के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।

    इस पैकेज का सबसे बड़ा हिस्सा 25,000 करोड़ रुपए का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड है। इसमें 20,000 करोड़ रुपए का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड और 5,000 करोड़ रुपए का इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड शामिल किया गया है। इस फंड के जरिए जहाज निर्माण, बंदरगाहों और समुद्री अवसंरचना परियोजनाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    सरकार ने 19,989 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SBDS) को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत नए ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और मौजूदा शिपयार्ड का विस्तार किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य देश की जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाकर प्रति वर्ष 45 लाख ग्रॉस टनेज तक पहुंचाना है।

    यह पहल मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047 के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य भारत को विश्व के प्रमुख जहाज निर्माण केंद्रों में शामिल करना है। सरकार का मानना है कि इससे समुद्री व्यापार, निर्यात और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

    शिपबिल्डिंग उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कई नीतिगत सुधार भी किए हैं। 19 सितंबर 2025 को 10,000 ग्रॉस टनेज (GT) या उससे अधिक क्षमता वाले भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों और भारत में निर्मित 1,500 GT या उससे अधिक क्षमता वाले जहाजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया गया था। इससे इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और वित्तपोषण आसान बनाने में मदद मिलेगी।

    सरकार ने जहाजों की मांग को एकीकृत करने की रणनीति भी तैयार की है। इसके तहत 400 से अधिक नए जहाजों के अधिग्रहण की योजना बनाई गई है, जिससे भारतीय शिपयार्ड को लंबे समय तक ऑर्डर मिलने की स्पष्टता रहेगी और उद्योग में स्थिरता आएगी।

    इसके अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में तीन नए ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। इन क्लस्टरों के जरिए आधुनिक तकनीक, कौशल विकास, रोजगार सृजन और समुद्री उद्योग के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि यह ऐतिहासिक निवेश पैकेज भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा, घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा और देश को भविष्य में एक प्रमुख वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज

    NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज


    भोपाल । NEET पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सबसे बड़ा आंदोलन इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर चल रहा है, जहां 30 जून को सिर्फ 5 छात्रों से शुरू हुआ धरना अब हजारों लोगों का आंदोलन बन चुका है।

    इंदौर में शनिवार को एक छात्रा नीम की पत्तियां लेकर प्रदर्शन में पहुंची। उसने कहा कि जिस तरह नीम बैक्टीरिया खत्म करती है, उसी तरह शिक्षा व्यवस्था में फैली गड़बड़ियों को भी साफ करने की जरूरत है। लगातार बारिश के बावजूद छात्र पिछले 25 दिनों से धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलन स्थल पर पुलिस ड्रोन से निगरानी कर रही है।

    भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भी छात्रों का धरना जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    ग्वालियर में आंदोलन को लेकर समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए, जबकि जबलपुर में “कॉकरोच जनता पार्टी” के विरोध में “लाल हिट जनता पार्टी” ने प्रदर्शन किया। संगठन ने कहा कि छात्रों की मांगें उचित हैं, लेकिन विरोध का तरीका सही नहीं है।

    धार, मऊगंज, नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली, भिंड, टीकमगढ़, शाजापुर, सतना, सीधी, रतलाम, रीवा, बैतूल, उमरिया, बड़वानी और श्योपुर सहित कई जिलों में भी रैलियां, धरने और ज्ञापन सौंपे गए। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई तथा कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

    प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। वहीं, विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है, जिससे यह विरोध अब राज्यव्यापी रूप ले चुका है।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा प्रशासनिक फैसला 20 आईएएस अफसरों का ट्रांसफर 6 जिलों में नए कलेक्टर तैनात

    मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा प्रशासनिक फैसला 20 आईएएस अफसरों का ट्रांसफर 6 जिलों में नए कलेक्टर तैनात


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की नियुक्ति के 24 घंटे के भीतर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 20 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इस व्यापक प्रशासनिक सर्जरी में छह जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं, वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय और कई महत्वपूर्ण विभागों में भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सरकार का यह कदम आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा को प्रशासन अकादमी का महानिदेशक (DG) नियुक्त किया गया है। वहीं इंदौर संभाग के आयुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव बनाया गया है। उनकी जगह भास्कर लक्षकार को नया इंदौर संभागायुक्त नियुक्त किया गया है।

    मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई को जनवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही उन्हें उद्योग एवं एमएसएमई विभाग का प्रभार भी दिया गया है। यह विभाग अब तक प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह के पास था।

    सरकार ने छह जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति की है। अजय कटेसरिया को रतलाम, मिशा सिंह को शहडोल, रत्नाकर झा को अनूपपुर, गुरु प्रसाद को खरगोन, दिव्यांक सिंह को मंदसौर और डॉ. शेर सिंह मीना को आगर मालवा का नया कलेक्टर बनाया गया है। वहीं शहडोल के पूर्व कलेक्टर केदार सिंह को लोक निर्माण विभाग में अपर सचिव के रूप में पदस्थ किया गया है।

    मंदसौर की कलेक्टर अदिति गर्ग को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में ओएसडी सह आयुक्त बनाया गया है, जबकि आगर मालवा की कलेक्टर प्रीति यादव को औद्योगिक विकास निगम, इंदौर का कार्यकारी संचालक नियुक्त किया गया है। खरगोन की कलेक्टर भव्या मित्तल दो वर्ष की अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) पर चली गई हैं, जिसके चलते वहां गुरु प्रसाद को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    रतलाम के नए कलेक्टर अजय कटेसरिया की नियुक्ति विशेष चर्चा में है। सामान्य प्रशासन विभाग में रहते हुए उन्होंने पदोन्नति नियम-2025 तैयार करने और सरकार की प्राथमिकता वाले समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रारूप को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पहली बार उन्हें किसी जिले की कलेक्टरी का दायित्व सौंपा गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के तहत प्रमुख सचिव संदीप यादव को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। अब केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी भी वही करेंगे। नर्मदा घाटी विकास (NVD) विभाग का प्रभार प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार को सौंपा गया है। वहीं मनीष सिंह को ऊर्जा विभाग का अतिरिक्त प्रभार और सचिन सिन्हा को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। राघवेंद्र सिंह को वन विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त करते हुए आनंद विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

    इस फेरबदल का असर महिला कलेक्टरों की संख्या पर भी पड़ा है। एक माह पहले प्रदेश के 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टर कार्यरत थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 15 रह गई है। हालांकि मिशा सिंह की शहडोल में नियुक्ति से आंशिक संतुलन बना है। माना जा रहा है कि यह प्रशासनिक बदलाव सरकार की आगामी विकास योजनाओं और निवेश आधारित परियोजनाओं को गति देने की रणनीति का हिस्सा है।

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव: आज से हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन, दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी; 50 ट्रिप का शेड्यूल लागू

    भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव: आज से हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन, दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी; 50 ट्रिप का शेड्यूल लागू


    भोपाल । भोपाल मेट्रो ने शहर के यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। शनिवार, 25 जुलाई से राजधानी में मेट्रो सेवा और अधिक तेज, सुविधाजनक और आधुनिक हो गई है। अब सुभाषनगर से एम्स स्टेशन के बीच मेट्रो दोनों ट्रैक पर संचालित होगी और पीक ऑवर्स में यात्रियों को हर 15 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी। पहले जहां मेट्रो सिंगल ट्रैक पर चलने के कारण यात्रियों को करीब 75 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब यह अंतर काफी कम हो जाएगा।

    मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MPMRCL) के अनुसार, नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद प्रतिदिन कुल 50 ट्रिप संचालित की जाएंगी। सुभाषनगर स्टेशन से पहली मेट्रो सुबह 9 बजे रवाना होगी। व्यस्त समय में हर 15 मिनट और सामान्य समय में हर 30 मिनट के अंतराल पर ट्रेन उपलब्ध रहेगी। इससे ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    भोपाल मेट्रो की शुरुआत 20 दिसंबर 2025 को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की थी। अगले दिन से आम यात्रियों के लिए सेवा शुरू हुई थी, लेकिन अब तक मेट्रो केवल एक ट्रैक पर संचालित हो रही थी। करीब सात महीने बाद आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के चालू होने से पहली बार दोनों ट्रैक पर नियमित संचालन संभव हो पाया है।

    इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले जून महीने में कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने दो दिन तक निरीक्षण किया था। आवश्यक सुरक्षा परीक्षण पूरे होने और मंजूरी मिलने के बाद शनिवार से नए सिस्टम के अनुसार संचालन शुरू कर दिया गया है।

    यात्रियों को आकर्षित करने के लिए मेट्रो प्रबंधन ने विशेष प्रमोशनल डिस्काउंट भी लागू किया है। रिटर्न जर्नी टिकट पर 5 प्रतिशत तथा ग्रुप टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं, MPMRCL मोबाइल ऐप के जरिए ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर 8 से 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त बोनस राशि दी जाएगी। 200 से 499 रुपए तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, 500 से 999 रुपए पर 10 प्रतिशत, 1000 से 1499 रुपए पर 12 प्रतिशत और 1500 से 2000 रुपए तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस का लाभ मिलेगा।

    यात्रियों की सुविधा के लिए सभी स्टेशन पहली ट्रेन के निर्धारित समय से 15 मिनट पहले खोल दिए जाएंगे, ताकि सुरक्षा जांच और टिकट लेने में किसी तरह की परेशानी न हो। प्रत्येक स्टेशन के निर्धारित प्रवेश द्वार पर मैनुअल टिकटिंग की व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी।

    करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया यह अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक पर आधारित है। यह सिस्टम ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने, दोनों ट्रैक पर संचालन और भविष्य में मेट्रो की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था के बाद भोपाल मेट्रो का संचालन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक हो जाएगा।

  • बरसात का नया दौर शुरू भोपाल इंदौर सहित 35 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी मानसून ने पकड़ी रफ्तार

    बरसात का नया दौर शुरू भोपाल इंदौर सहित 35 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी मानसून ने पकड़ी रफ्तार


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार शनिवार को भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 35 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में बारिश का यही सिलसिला जारी रहेगा। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने के कारण प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम मजबूत बना हुआ है, जिससे कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय है और मानसून ट्रफ मध्य प्रदेश से होकर गुजर रही है। इसके चलते हवा में नमी का स्तर 80 से 95 प्रतिशत तक बना हुआ है, जिससे लगातार बारिश की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा समेत 35 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं रीवा, सतना, मैहर, सागर, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, शहडोल और आसपास के जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    लगातार चार दिनों से हो रही बारिश का असर प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। 20 जुलाई तक जहां प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, वहीं अब यह कमी घटकर 11 प्रतिशत रह गई है। प्रदेश में अब तक औसतन 330.4 मिमी यानी करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो पूरे मानसून के निर्धारित कोटे का लगभग 35 प्रतिशत है।

    बारिश के मामले में देवास जिला सबसे आगे है, जहां अब तक करीब 19.6 इंच वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, सीहोर, राजगढ़, हरदा, बुरहानपुर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड और मंदसौर सहित 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि प्रदेश के 41 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, छोटे नदी-नालों में उफान और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। मैहर में तेज बारिश के दौरान एक पांच वर्षीय बच्चा पानी के तेज बहाव में बहने लगा, जिसे स्थानीय लोगों ने समय रहते सुरक्षित बचा लिया। ऐसे में प्रशासन ने नागरिकों से सावधानी बरतने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

  • MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़

    MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा बटोरी। एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक दिव्यांग युवक ने अपनी बेरोजगारी की कहानी सुनाकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं राजगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सोंधिया के साथ हुई बदसलूकी ने सियासी माहौल गरमा दिया। इसके अलावा दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भावुक हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर भाजपा नेताओं के अलग-अलग बयान भी चर्चा का विषय बने रहे।

    धार जिले के राजगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे भुट्टा बेच रहे एक दिव्यांग युवक ने उन्हें आवाज लगाई। मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाया, युवक से भुट्टा खरीदा, बातचीत की और उसे 500 रुपए भी दिए। बातचीत के दौरान युवक ने बताया कि उसने मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई की है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के कारण उसे भुट्टा बेचने और चाय-पकौड़े की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ रहा है। युवक की यह बात सामने आने के बाद बेरोजगारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे पढ़े-लिखे युवाओं की मौजूदा स्थिति का उदाहरण बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की चर्चा होती रही।

    उधर राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद हो गया। प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप की मौजूदगी में जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस नेता चंदर सिंह सोंधिया को पहले कार्यक्रम में प्रवेश से रोका गया। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम से नाराज होकर उन्होंने मंच के सामने बैठकर विरोध जताया। बाद में जब वह कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद सार्वजनिक मंच पर भावुक हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर भाजपा के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि वर्ष 2018 में उनका भी टिकट कटा था और तब उनकी आंखों में भी आंसू आए थे, लेकिन किसी ने उनकी चिंता नहीं की। उन्होंने पार्टी के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि नए लोगों को अवसर देने के लिए कभी-कभी पुराने नेताओं को पीछे हटना पड़ता है।

    वहीं भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने अलग राय रखते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति का भविष्य कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण रह सकती है। इन बयानों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग सोच मौजूद है।

    इधर प्रशासनिक गलियारों में भी नई चर्चाओं ने जोर पकड़ा। नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर मंत्रालय में हलचल बनी रही। आदेश जारी होने से पहले ही एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मंत्रालय छोड़ने की तैयारी और बाद में उनकी नई पदस्थापना को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

    इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीनी मुद्दों, राजनीतिक टकराव और सत्ता के भीतर की हलचल लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।

  • गरीबी नहीं रोक सकी हौसला, झंडू कुमार ने संघर्ष को ताकत बनाकर भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ पदक

    गरीबी नहीं रोक सकी हौसला, झंडू कुमार ने संघर्ष को ताकत बनाकर भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ पदक


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने केवल ब्रॉन्ज मेडल ही नहीं जीता, बल्कि अपने संघर्ष और जज्बे से करोड़ों लोगों का दिल भी जीत लिया। आर्थिक तंगी, कठिन परिस्थितियों और रोजमर्रा की चुनौतियों से लड़ते हुए उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना कभी उनके गांव के लोगों ने भी नहीं की थी। ई-रिक्शा चलाने और सब्जियां बेचकर जीवनयापन करने वाले झंडू आज देश के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।

    पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। मुकाबले के बाद भावुक झंडू ने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास को दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया। उनका मानना था कि लगातार मेहनत करने वालों को एक दिन सफलता जरूर मिलती है और यही विश्वास उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

    झंडू ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। घर चलाने के लिए कभी ई-रिक्शा चलाना पड़ा तो कभी सब्जियां बेचनी पड़ीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने खेल को नहीं छोड़ा। दिनभर मेहनत करने के बाद भी अभ्यास जारी रखा और हर चुनौती को अपनी ताकत बनाया। उनका कहना है कि कठिनाइयों ने उन्हें कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत बनाया।

    प्रतियोगिता में झंडू ने ग्रुप बी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 130.9 अंक हासिल किए और अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उन्होंने युगांडा और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए पदक की मजबूत दावेदारी पेश की। संयुक्त स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने स्वर्ण पदक और इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक जीता, जबकि झंडू केवल 0.1 अंक के बेहद मामूली अंतर से रजत पदक से चूक गए। इसके बावजूद उनका ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इसी के साथ देश का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदकों का खाता खुला।

    झंडू की सफलता केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह पदक सिर्फ उनका नहीं बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया, उनका हौसला बढ़ाया और उन पर विश्वास बनाए रखा।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि उनके सफर का अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत है। अब उनका लक्ष्य देश के लिए और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतना है। झंडू का मानना है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी बाधा इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

    झंडू कुमार की यह कहानी साबित करती है कि सफलता केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, निरंतर मेहनत और अपने सपनों पर अटूट विश्वास से हासिल होती है। उनका संघर्ष आज देशभर के खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गया है।