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  • भारत ने महिला T-20I में तीसरी बार किया क्लीन स्वीप…कप्तान ने कहा- बहुत अच्छा रहा साल 2025

    भारत ने महिला T-20I में तीसरी बार किया क्लीन स्वीप…कप्तान ने कहा- बहुत अच्छा रहा साल 2025


    नई दिल्ली।
    हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) की अगुवाई वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम (Indian women’s cricket team) ने श्रीलंका (Sri Lanka) का पांच मैचों की घरेलू टी20 सीरीज (India Women vs Sri Lanka Women) में क्लीन स्वीप किया। भारत ने तिरुवनंतपुरम में 175/7 का स्कोर बनाने के बाद श्रीलंका से आखिरी मैच 15 रनों से जीता। हरमनप्रीत ने 43 गेंदों में 9 चौकों और एक छक्के की मदद से 68 रनों की पारी खेली। वह प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गईं। महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 जीतने के बाद हरमन ब्रिगेड की यह पहली सीरीज थी। भारतीय कप्तान ने वनडे से टी20 मोड में शिफ्ट करने की सच्चाई से मुंह नहीं फेरा। भारत ने महिला टी20 इंटरनेशनल में तीसरी बार 5-0 से सीरीज अपने नाम की है। भारत ने इससे पहले 2019 में वेस्टइंडीज और 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ ऐसा किया था। वहीं, श्रीलंका टीम ने चार बार पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली और पहली बार 5-0 से हार झेली।


    ‘साल 2025 हमारे लिए बहुत अच्छा रहा’

    श्रीलंका का सूपड़ा साफ करने के बाद हरमनप्रीत ने कहा, ”2025 हमारे लिए वाकई बहुत अच्छा रहा। हमें कड़ी मेहनत का परिणाम मिला। मुझे लगता है कि अब इन अच्छी आदतों को दोहराते रहना है। इस साल हमने जैसा किया, वैसा ही जीतते रहना है।” जब हरमनप्रीत से पूछा गया कि क्या वनडे वर्ल्ड कप जीतने के बाद सोच में बदलाव करना आसान था तो उन्होंने कहा, ”हम सबने एकसाथ काफी टी20 क्रिकेट खेला है और सभी को खुद पर विश्वास था कि हम यह कर सकते हैं। हर कोई बहुत सकारात्मक था और सच में खुश थे कि एकजुटता के साथ खेले। हम अपने लिए स्टैंडर्ड सेट करना चाहते थे। आगे बढ़ते हुए हम इस सीरीज को देख सकते हैं, सोच सकते हैं कि हमने क्या किया और हम भविष्य में क्या कर सकते हैं।”


    ‘टी20 मोड में शिफ्ट करना आसान नहीं था’

    36 वर्षीय भारतीय कप्तान ने एक बैटर और लीडर के तौर पर अपने बारे में कहा, ”बतौर बल्लेबाज यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं टीम की बैटिंग लाइनअप को मजबूती दूं। मैं हमेशा टीम की जरूरत के मुताबिक योगदान देना चाहती हूं। बतौर कप्तान जिस तरह से हमने यह सीरीज खेली, उससे मैं वाकई में खुश हूं। वनडे क्रिकेट के बाद टी20 मोड में शिफ्ट करना आसान नहीं था, लेकिन सभी बहुत पॉजिटिव थे। वर्ल्ड कप के बाद यह सीरीज खेलने के लिए हर कोई उत्साहित था। चीजें जिस तरह से रही, उससे काफी खुश हूं। हमने जद्दोजहद की और अपना शत प्रतिशत दिया।”


    ‘उम्मीद है कि जिस तरह से वनडे क्रिकेट…’

    अगले सात महीनों में बहुत सारा टी20 क्रिकेट खेला जाना है। हरमनप्रीत ने कहा, ”बिल्कुल। यह सीरीज हमारे लिए बहुत अहम थी। इसलिए हम चाहते थे कि सभी उपलब्ध रहें ताकि बाद में हम देख सकें कि चीजें हमारे लिए कैसी चल रही हैं। अब महिला प्रीमियर ली (WPL) होगा। सभी फिर से टी20 मोड में होंगे। उम्मीद है कि हम सभी अपना बेस्ट क्रिकेट खेलेंगे और लुत्फ उठाएंगे। अगले छह महीने हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। हम बस कड़ी मेहनत करते रहना चाहते हैं। उम्मीद है कि जिस तरह से वनडे क्रिकेट में चीजें हमारे लिए अच्छी रहीं, उसी तरह टी20 में भी चीजें अच्छी रहेंगी।”

  • CM योगी की नई नीति ने बदली UP की तस्वीर… रोजगार बढ़े…. कमाई में भी इजाफा

    CM योगी की नई नीति ने बदली UP की तस्वीर… रोजगार बढ़े…. कमाई में भी इजाफा


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) द्वारा लागू की गई नई आबकारी नीति (New excise policy) ने राज्य के राजस्व, सुरक्षा और औद्योगिक निवेश की तस्वीर बदल दी है। साल 2025 आबकारी विभाग के लिए संरचनात्मक सुधारों और तकनीकी बदलावों का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और ‘ई-गवर्नेंस’ के समन्वय ने इस क्षेत्र में पारदर्शिता के साथ-साथ रिकॉर्ड तोड़ कमाई सुनिश्चित की है।

    नई आबकारी नीति के तहत विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को ‘टेक्नोलॉजी ड्रिवेन’ बनाया गया है। अब शराब की दुकानों का आवंटन पूरी तरह से ई-लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई है। इसके अलावा, लेबल की मंजूरी, एमआरपी का निर्धारण और निर्यात परमिट जैसी सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है।

    निगरानी को सख्त करने के लिए उत्पादन इकाइयों और डिस्टिलरीज में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही, शराब ले जाने वाले टैंकरों में डिजिटल लॉक और जीपीएस (GPS) अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि रास्ते में मिलावट या चोरी की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।


    राजस्व में 15% से ज्यादा की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

    योगी सरकार की नीतियों का सीधा असर सरकारी खजाने पर दिख रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 तक राज्य को कुल 35,144.11 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त हुआ है। यह पिछले वर्ष (2024-25) की इसी अवधि के मुकाबले 15.59 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने पिछले साल की तुलना में केवल आठ महीनों में 4,741.77 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय दर्ज की है।


    एथेनॉल उत्पादन में यूपी बना नंबर-1

    उत्तर प्रदेश अब देश के एक बड़े एथेनॉल हब के रूप में उभरा है। इस साल राज्य में एथेनॉल का उत्पादन 182 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसमें से 105.25 करोड़ लीटर एथेनॉल की खपत राज्य के भीतर हुई, जबकि 40.96 करोड़ लीटर अन्य राज्यों को निर्यात किया गया। इससे न केवल उद्योगों को मजबूती मिली है, बल्कि गन्ना किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है।


    अवैध शराब के खिलाफ एक्शन

    अवैध शराब के कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने इस साल व्यापक अभियान चलाया। प्रदेश भर में कुल 79,990 मामले दर्ज किए गए और लगभग 20.86 लाख लीटर अवैध शराब जब्त की गई। इस कार्रवाई के तहत 15,085 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 2,755 को जेल भेजा गया। जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘यूपी एक्साइज सिटीजन ऐप’ और टोल-फ्री नंबर (14405) भी जारी किया गया है।


    निवेश और रोजगार के नए अवसर

    ‘इन्वेस्ट यूपी’ के माध्यम से आबकारी क्षेत्र में अब तक 35,378 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों वाले 140 एमओयू (MoU) साइन किए गए हैं। वर्तमान में 35 परियोजनाएं धरातल पर काम कर रही हैं, जिनमें 4,045 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है। इन परियोजनाओं ने सीधे तौर पर 5,000 से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन (एक ट्रिलियन डॉलर) बनाने के लक्ष्य में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

  • कोर्ट Procedures में बड़े बदलाव की तैयारी… इमरजेंसी में आधी रात को भी SC जा सकेंगे फरियादी

    कोर्ट Procedures में बड़े बदलाव की तैयारी… इमरजेंसी में आधी रात को भी SC जा सकेंगे फरियादी


    नई दिल्ली।
    CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत (Chief Justice of India Surya Kant) ने अदालतों की कार्य प्रणाली (Court Procedures) में बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी की है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा है कि मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए कोई भी व्यक्ति आधी रात को भी अदालतों का दरवाजा खटखटा सकेगा। साथ ही शीर्ष न्यायालय (Supreme Court) ने काम में तेजी लाने के लिए SOP जारी की है, जिसमें वकीलों की दलील और लिखित निवेदन प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है।

    सीजेआई सूर्य कांत ने कहा, ‘मेरी कोशिश है कि शीर्ष न्यायालय और उच्च न्यायालयों को जनता की अदालत बनाया जा सके, ताकि लीगल इमरजेंसी के समय वह किसी भी समय अदालत का दरवाजा खटखटा सके।’ उन्होंने कहा, ‘संवैधानिक अदालतें अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की तरह काम करेंगी। लीगल इमरजेंसी के समय कोई भी नागरिक मामले को सुलझाने और व्यक्ति के अधिकारों और आजादी की सुरक्षा के लिए आधी रात को भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।’


    SOP में क्या है

    सीजेआई समेत सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों ने सोमवार को एक परिपत्र जारी किया है। इसमें मौखिक दलीलें प्रस्तुत करने की समयसीमा का पालन करने के लिए एसओपी तय की गई है। तत्काल प्रभाव से लागू इस एसओपी में कहा गया है, ‘वरिष्ठ अधिवक्ता, दलील रखने वाले वकील और रिकॉर्ड पर मौजूद अधिवक्ता, नोटिस के बाद और नियमित सुनवाई वाले सभी मामलों में मौखिक बहस करने की समय-सीमा सुनवाई शुरू होने से कम से कम एक दिन पहले प्रस्तुत करेंगे। यह समय-सीमा न्यायालय को ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ (एओआर) को पहले से उपलब्ध कराए गए उपस्थिति पर्ची जमा करने के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी।’

    इसमें कहा गया है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं सहित बहस करने वाले वकील, अपने एओआर या पीठ द्वारा नामित नोडल वकील (यदि कोई हो) के माध्यम से, सुनवाई की तारीख से कम से कम तीन दिन पहले दूसरे पक्ष को एक प्रति देने के बाद संक्षिप्त नोट या लिखित प्रस्तुति दाखिल करेंगे। यह पांच पृष्ठ से अधिक का नहीं होगा।

  • Happy New Year 2026: अपनों को भेजें बेस्ट मैसेज, शायरी और शुभकामनाएं

    Happy New Year 2026: अपनों को भेजें बेस्ट मैसेज, शायरी और शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । : हर साल की तरह इस बार भी नया साल 2026 New Year 2026 अपने साथ नई खुशियां नई उम्मीदें और नए सपने लेकर आया है। साल 2025 ने सभी के लिए मिश्रित अनुभव दिए-किसी के लिए यादगार तो किसी के लिए चुनौतीपूर्ण। अब 2026 की शुरुआत के साथ लोग पुरानी गलतियों और निराशाओं को पीछे छोड़कर नए उत्साह और उमंग के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

    पहले लोग ग्रिटिंग कार्ड Greeting Cards के जरिए अपने दोस्तों और परिवार को नए साल की मुबारकबाद देते थे। लेकिन डिजिटल युग में अब लोग व्हाट्सअप फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपने अपनों को Happy New Year 2026 Wishes भेजते हैं। मैसेज शायरी या स्टेटस के जरिए ये शुभकामनाएं सीधे दिल को छू जाती हैं।इस नए साल पर लोगों की प्राथमिकता यही रहती है कि वे अपने चाहने वालों को खुशियों हंसी मस्ती और कामयाबी से भरे संदेश भेजें। उदाहरण के तौर पर नए साल के कुछ बेस्ट मैसेज इस प्रकार हैं:

    हंसी मस्ती और कामयाबी से भरा हो आपका नया साल आप हंस्ते-मुस्कुराते रहें हर हाल। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!फूल खिलते रहें जीवन की राह में खुशी चमकती रहे आपकी निगाह में। हर कदम पर मिले कामयाबी आपको हर नया दिन दे नई उम्मीदें। नया साल मुबारक हो।जिंदगी के हर मोड़ पर सफलता मिले हर सपना हकीकत बने दोस्ती का ये रिश्ता यूं ही महकता रहे। नया साल खुशियों से भरा रहे।हंसी मस्ती और साथ कभी कम न हो नया साल आ रहा है इसमें कोई गम न हो। नया साल बहुत-बहुत मुबारक हो।कल की गलतियों को भूल जाइए आज से एक नई कहानी शुरू कीजिए। 2026 की किताब के पन्ने अभी खाली हैं अपनी मेहनत से इसे शानदार बनाएं। नया साल खुशियों और सफलता से भरा हो।

    नया साल सिर्फ तारीख बदलने का मौका नहीं है बल्कि यह नई उम्मीदों सकारात्मक सोच और नए अवसरों का प्रतीक भी है। दोस्तों परिवार और करीबियों के साथ बिताए गए पल साझा की गई खुशियां और दी गई शुभकामनाएं इस दिन को और खास बना देती हैं।इसके अलावा नया साल प्रेरणा और आत्म-सुधार का भी संदेश लेकर आता है। यह समय है कि हम अपने पुराने अनुभवों से सीख लें और नए साल में बेहतर और सफल बनने का प्रयास करें। चाहे वह व्यक्तिगत जीवन हो या पेशेवर क्षेत्र 2026 हर किसी के लिए नई ऊर्जा और नए अवसर लाएगा।

    इस मौके पर लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मैसेज और शायरी शेयर करके अपने प्यार और अपनापन जताते हैं। सोशल मीडिया पर HappyNewYear2026 NewYearWishes NY2026 और NewYearShayari जैसे ट्रेंडिंग हैशटैग्स के साथ संदेश भेजना अब नया रिवाज बन गया है।तो इस नए साल 2026 पर अपनों को भेजें खास मैसेज शायरी और शुभकामनाएं ताकि हर दिल में खुशियों की रोशनी फैल सके।

  • गलत इस्तेमाल से एंटीबायोटिक दवाओं पर खतरा बढ़ा: एम्स निदेशक का चेतावनी संदेश, AMR बना सामान्य संक्रमणों के लिए जानलेवा

    गलत इस्तेमाल से एंटीबायोटिक दवाओं पर खतरा बढ़ा: एम्स निदेशक का चेतावनी संदेश, AMR बना सामान्य संक्रमणों के लिए जानलेवा


    नई दिल्ली। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों से लेकर कई सामान्य रोगी सही इलाज के बावजूद ठीक नहीं हो पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण एंटीबायोटिक दवाओं का घटता प्रभाव माना जा रहा है। यह स्थिति एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के रूप में जानी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस मुद्दे को उठाया था, वहीं सोमवार को एम्स भोपाल में इस विषय पर विशेष चर्चा हुई।

    एम्स के निदेशक डॉ. माधवानंद कर ने बताया कि AMR पूरी दुनिया में चिकित्सा क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेना, गलत खुराक, अधूरा कोर्स और जरूरत से ज्यादा शक्तिशाली दवाओं का इस्तेमाल इस संकट को और बढ़ा रहे हैं। यदि एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सामान्य बीमारियां जैसे निमोनिया और मूत्र मार्ग संक्रमण भी जानलेवा हो सकती हैं।

    एम्स की रिसर्च में पता चला है कि यूरीन इन्फेक्शन, फेफड़े और खून के संक्रमण में इस्तेमाल होने वाली दवाएं तेजी से बेअसर हो रही हैं। 3,330 मरीजों पर किए गए अध्ययन में सिप्रोफ्लॉक्सासिन दवा अब ई.कोलाई बैक्टीरिया पर केवल 39% असर दिखा रही है। वहीं, मेरोपेनम दवा, जो केलबसीला न्यूमोनिया के इलाज में उपयोग होती थी, अब सिर्फ 52% मामलों में प्रभावी रही।

    डॉ. कर ने चेताया कि अगर AMR पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आम संक्रमण भी जानलेवा बन सकते हैं। एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस वह स्थिति है, जब बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं,

    जिससे पहले असरदार दवाएं अब रोग को ठीक नहीं कर पा रही हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण निमोनिया, मूत्र मार्ग संक्रमण, त्वचा और पेट के कई रोगों का इलाज पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है। मरीजों को महंगी और अधिक साइड इफेक्ट वाली दवाओं पर निर्भर होना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण है आम लोगों की गलत आदतें, जैसे डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना, अधूरी खुराक लेना, जल्दी दवा बंद कर देना और हाई-एंड एंटीबायोटिक का जरूरत से ज्यादा उपयोग।

    एम्स भोपाल ने रोकथाम के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें सुव्यवस्थित एंटीबायोटिक नीति, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस अवेयरनेस वीक शामिल हैं। डॉ. कर के अनुसार, डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ आम नागरिकों की जागरूकता भी AMR से लड़ाई में बेहद अहम है।

    एम्स निदेशक ने अंतिम चेतावनी दी कि एंटीबायोटिक दवाएं मानव सभ्यता की सबसे बड़ी चिकित्सा उपलब्धियों में से एक हैं। अगर इनका गलत इस्तेमाल जारी रहा, तो आने वाली पीढ़ियां इन जीवनरक्षक दवाओं के लाभ से वंचित रह जाएंगी। इसलिए जिम्मेदारी और सतर्कता आज ही जरूरी है।

  • मलाइका अरोड़ा का खुलासा: तलाक पर कोई पछतावा नहीं, प्यार और शादी में अब भी भरोसा

    मलाइका अरोड़ा का खुलासा: तलाक पर कोई पछतावा नहीं, प्यार और शादी में अब भी भरोसा

    नई दिल्ली। बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा ने अपने निजी जीवन और तलाक को लेकर खुलकर बातचीत की। साल 1997 में अरबाज खान से शादी करने वाली मलाइका ने 20 साल बाद तलाक लिया। तलाक के बाद उन्हें सोशल मीडिया और अपने करीबी लोगों से काफी आलोचना झेलनी पड़ी।एक इंटरव्यू में मलाइका ने बताया कि पब्लिक और अपनों के विरोध के बावजूद उन्होंने अपने फैसलों पर अडिग रहते हुए तलाक लिया और अब उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है।
    मलाइका ने कहा कि उस समय उन्हें नहीं पता था कि आगे क्या होगा, लेकिन उन्होंने अपने जीवन में खुश रहने को प्राथमिकता दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शादी के कॉन्सेप्ट में विश्वास करती हैं, लेकिन यह उनके लिए हमेशा अनिवार्य नहीं था। तलाक के बाद उन्होंने कई रिश्तों में समय बिताया, लेकिन अब भी उन्हें प्यार और रिश्तों में खुशी पाना पसंद है। मलाइका ने कहा कि वे प्यार पाने और बांटने में यकीन रखती हैं और अगर सही समय पर प्यार उनके दरवाजे पर आएगा तो वे उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

    यह इंटरव्यू मलाइका की सशक्त और आत्मनिर्भर छवि को दर्शाता है, जहां उन्होंने अपने फैसलों के प्रति ईमानदारी और अपनी खुशी को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। उनके शब्दों से यह भी जाहिर होता है कि तलाक ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्होंने प्यार और जीवन के प्रति अपनी सोच को और मजबूत किया है।

  • रिटायरमेंट के बाद पुलिस वर्दी: सम्मान या अनुशासन की कसौटी?

    रिटायरमेंट के बाद पुलिस वर्दी: सम्मान या अनुशासन की कसौटी?



    नई दिल्ली। सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी आमतौर पर पूरी यूनिफॉर्म नहीं पहन सकते, क्योंकि वर्दी सक्रिय सेवा का प्रतीक है। केवल विशेष अवसरों जैसे पुलिस स्मृति दिवस, वीरता पुरस्कार वितरण या औपचारिक राज्य स्तर के समारोह में विभाग की अनुमति मिलने पर सीमित समय के लिए पहनना वैध होता है। इसके अलावा, मेडल, बैज और रैंक चिन्ह को नागरिक पोशाक पर प्रदर्शित करना पूरी तरह कानूनी और स्वीकार्य है।
    यह नियम पुलिस सेवा की गरिमा, अनुशासन और पहचान बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।

    पुलिस की वर्दी केवल सक्रिय सेवा का प्रतीक होती है और रिटायरमेंट के बाद इसे पहनना आमतौर पर नियमों के खिलाफ माना जाता है। भारत में पुलिस अधिनियम 1861 और इसके बाद के संशोधन स्पष्ट करते हैं कि वर्दी का इस्तेमाल केवल तैनात अधिकारियों के लिए वैध है। रिटायर होने के बाद बिना अनुमति वर्दी पहनना कानूनी उल्लंघन और फोर्स की पहचान का अनुचित उपयोग माना जाता है।

    हालांकि, कुछ विशेष अवसरों पर जैसे पुलिस स्मृति दिवस, वीरता पुरस्कार वितरण, राज्य स्तरीय कार्यक्रम या औपचारिक समारोह में विभाग की अनुमति मिलने पर सीमित समय के लिए वर्दी पहनने की छूट होती है। इसके अलावा, सेवानिवृत्त अधिकारी अपने मेडल, बैज और रैंक चिन्ह को नागरिक पोशाक या औपचारिक ड्रेस पर प्रदर्शित कर सकते हैं। पूरी यूनिफॉर्म पहनने की अनुमति केवल राष्ट्रपति पदक या विशेष सम्मान प्राप्त वरिष्ठ अधिकारियों को ही सीमित अवसरों पर मिलती है।

    सामाजिक दृष्टि से भी मतभेद हैं।

    कुछ लोग मानते हैं कि वर्दी पुलिसकर्मी की आजीवन पहचान है और इसे विशेष अवसरों पर पहनने की आजादी होनी चाहिए, जबकि अन्य मानते हैं कि यह केवल सक्रिय सेवा का प्रतीक है और इसे रिटायरमेंट के बाद पहनना अनुशासन के खिलाफ है। नियमों के अनुसार, वर्दी पहनने का अधिकार केवल सम्मान और समारोह तक सीमित है, जबकि मेडल और बैज को नागरिक पोशाक पर प्रदर्शित करना पूरी तरह वैध हैयह नियम पुलिस सेवा के अनुशासन और पहचान की गरिमा बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
  • साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन

    साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन


    नई दिल्ली: साल 2025 का अंतिम मंगलवार 30 दिसंबर को पड़ रहा है और इस दिन सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह योग देर रात लगभग 1 बजे तक प्रभावी रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में सिद्धि योग को शुभ कार्यों की शुरुआत, मंत्र जाप और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। इसी कारण मंगलवार और सिद्धि योग के मेल को लेकर श्रद्धालुओं और ज्योतिष से जुड़े लोगों के बीच खास चर्चा देखने को मिल रही है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से होता है, जिसे साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास और कर्म का प्रतीक माना जाता है। जब इसी दिन सिद्धि योग का निर्माण होता है, तो इसे प्रयासों को सफलता की ओर ले जाने वाला संयोग कहा जाता है। यही वजह है कि इस दिन किए गए धार्मिक और आध्यात्मिक उपायों को जीवन के विभिन्न पहलुओं-जैसे करियर, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक संतुलन और संतान सुख-से जोड़कर देखा जाता है।धार्मिक परंपराओं में मंगलवार को भगवान हनुमान और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। कई ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि इस दिन विष्णु मंत्रों का जप, पूजा-अर्चना और दान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। विशेष रूप से संतान से जुड़े विषयों को लेकर किए जाने वाले उपायों की चर्चा अधिक रहती है, जिनमें पूजा-पाठ, दान और प्रतीकात्मक धार्मिक अनुष्ठान शामिल हैं।

    आस्था रखने वाले लोगों का यह भी मानना है कि साल के अंतिम मंगलवार को किए गए उपायों का प्रभाव आने वाले वर्ष तक बना रह सकता है। इसी विश्वास के चलते लोग 2026 को बेहतर और शुभ बनाने की कामना के साथ इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई परिवारों में यह परंपरा भी है कि मंगलवार को जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या दान दिया जाए, ताकि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे।हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ऐसे उपाय आस्था और परंपरा से जुड़े विषय हैं। इन्हें किसी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या व्यावहारिक समाधान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। समाज के एक वर्ग का मानना है कि पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं, जिससे वह अपने लक्ष्य के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है।

    सिद्धि योग और मंगलवार के संयोग को लेकर धार्मिक स्थलों और मंदिरों में विशेष चहल-पहल देखने को मिल सकती है। कई स्थानों पर सुंदरकांड पाठ, विष्णु सहस्रनाम और सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन को लेकर सामान्य इंतजाम किए जाते हैं।कुल मिलाकर, साल के अंतिम मंगलवार और सिद्धि योग का यह संयोग आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। लोग इसे आत्मविश्वास बढ़ाने, मानसिक शांति पाने और नए वर्ष के लिए सकारात्मक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।

  • कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा

    कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा



    खंडवा। खंडवा जिले को जल संरक्षण के नाम पर मिले राष्ट्रपति पुरस्कार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जहां एक चर्चित अखबार के पड़ताल के बाद भोपाल से सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच दल मंगलवार को खंडवा पहुंचा और मौके पर जाकर तथाकथित जल संरचनाओं का ‘रियलिटी चेक’ किया। जांच के दौरान जो सामने आया, उसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी।

    जांच दल चर्चित अखबार के रिपोर्ट के आधार परहरसूद जनपद समेत कई गांवों में पहुंचा।

    कहीं कागजों में तालाब मिले, तो जमीन पर सिर्फ मिट्टी का ढेर। कहीं 6 फीट गहरे सोख्ता गड्ढों का दावा था, लेकिन हकीकत में 1 फीट से भी कम गहराई निकली। टीम ने किसानों और ग्रामीणों से बात की, खुद गड्ढे खुदवाकर देखे और कई जगह देखकर चौंक गई।

    डोटखेड़ा गांव में खेत के बीच कागजों में तालाब दिखाया गया था, लेकिन मौके पर कोई जल संरचना नहीं मिली। सिर्फ मिट्टी फैलाकर तालाब का रूप देने की कोशिश की गई थी।

    पलानी माल गांव में ग्रामीणों ने खुद अधिकारियों को उन जगहों पर ले जाकर दिखाया, जहां सरकारी रिकॉर्ड और जमीन की सच्चाई बिल्कुल अलग थी। आंगनवाड़ी भवन में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अधूरा मिला, पाइप ही गायब था। आरोग्य केंद्र में सोख्ता गड्ढा नाममात्र का निकला, जिसे बारिश में ओवरफ्लो के बाद तोड़ दिया गया था।

    सबसे चौंकाने वाला मामला शाहपुरा माल गांव में सामने आया, जहां जांच दल के आने की सूचना मिलते ही पंचायत सचिव ने सुबह-सुबह जेसीबी से नया गड्ढा खुदवा दिया।

    जबकि रिकॉर्ड में उसका भुगतान पहले ही हो चुका था। तय साइज 10×10 फीट था, लेकिन मौके पर सिर्फ 1 फीट गहरा गड्ढा मिला, वो भी खेत के ऐसे कोने में जहां उसका कोई मतलब नहीं था।

    पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 11 नवंबर को केंद्र सरकार ने खंडवा जिले को जल संरक्षण के लिए नेशनल वाटर अवॉर्ड और 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। प्रशासन ने 1.29 लाख जल संरचनाओं के निर्माण का दावा किया था। लेकिन जांच में सामने आया कि कई तालाब, डक वैल और स्टॉप डैम सिर्फ कागजों में थे। कुछ तस्वीरें तो एआई द्वारा जनरेटेड पाई गईं। कहीं 150 सोख्ता गड्ढे दिखाए गए, तो जमीन पर 1–2 फीट के गड्ढे या सिर्फ पाइप नजर आए। कहीं 11 तालाबों का दावा था, लेकिन एक भी मौजूद नहीं था।

    अखबार के खुलासे के बाद अब भोपाल की टीम इन फर्जीवाड़ों की आधिकारिक तस्दीक कर रही है।

    साफ है कि खंडवा को मिला यह पुरस्कार जल संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि कागजी आंकड़ों और झूठे दावों पर खड़ा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सरकारी भ्रम साबित हो रहा है।

    खंडवा के नारायण नगर इलाके में सामने आया मामला जल संरक्षण के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े की एक और बानगी बन गया है।

    यहां रहने वाली शिक्षिका संध्या राजपूत को उच्च अधिकारियों की ओर से निर्देश दिया गया था कि वह अपने घर पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

    जांच में सामने आया कि संध्या राजपूत के घर पर कोई वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद नहीं था। इसके बजाय उनके घर से कुछ मकान दूर स्थित एक अन्य घर की छत से लगी पाइप को ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताकर पेश कर दिया गया। यह पाइप दरअसल छत का पानी सीधे नाली में पहुंचाने के लिए लगाई गई थी, जिसका जल संरक्षण या रिचार्ज से कोई लेना-देना नहीं था।

    इसके बावजूद उसी मकान की फोटो खींचकर प्रशासन को सौंप दी गई और कागजों में इसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रूप में दर्ज कर दिया गया। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे जमीनी हकीकत को दरकिनार कर सिर्फ फोटो और फाइलों के सहारे योजनाओं की सफलता दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में जल संरक्षण का कोई काम नहीं हुआ।

  • बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की कड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। मैमनसिंह जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वही इलाका है, जहां कुछ दिन पहले ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था।
    लगातार हो रही हत्याओं से पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

    ताजा मामले में बांग्लादेश के ग्रामीण अर्धसैनिक बल अंसार के सदस्य बजेंद्र बिस्वास की जान चली गई। सोमवार, 29 दिसंबर की शाम करीब 6:45 बजे भालुका उपजिला क्षेत्र स्थित लबीब ग्रुप की गारमेंट फैक्ट्री सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड में यह घटना हुई। बजेंद्र बिस्वास वहां सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे और फैक्ट्री परिसर में बने अंसार बैरक में अपने साथियों के साथ रहते थे।

    पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बातचीत के दौरान बजेंद्र के साथी नोमान मियां ने कथित तौर पर मजाक में सरकारी शॉटगन उनकी ओर तान दी। कुछ ही पलों बाद अचानक गोली चल गई, जो बजेंद्र की बाईं जांघ में जा लगी। गंभीर रूप से घायल बजेंद्र को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    घटना के बाद पुलिस ने आरोपी नोमान मियां को हिरासत में ले लिया और वारदात में इस्तेमाल की गई शॉटगन जब्त कर ली है। संबंधित थाने के प्रभारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

    गौर करने वाली बात यह है कि बीते दो हफ्तों में यह इसी इलाके में हिंदू समुदाय से जुड़ी तीसरी हत्या है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या और अब बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर मौत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से भालुका और आसपास के क्षेत्रों में तनाव गहराता जा रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दावे कर रहा है।