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  • कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    नई दिल्ली। भारत में खाने की बात हो और प्याज-लहसुन का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही कभी होता हो। हर घर की रसोई से लेकर बड़े-बड़े होटलों तक इन दोनों का इस्तेमाल आम माना जाता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर का कटरा एक ऐसा शहर है, जहां पहुंचते ही खान-पान की पूरी तस्वीर बदल जाती है। यहां न बाजारों में प्याज-लहसुन बिकता दिखाई देता है, न ढाबों और होटलों के खाने में इसका इस्तेमाल होता है और न ही लोग इसे अपने घरों में रखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि कटरा को देश के सबसे अनोखे धार्मिक शहरों में गिना जाता है।

    कटरा माता वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां से माता के दरबार के लिए यात्रा शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा शुरू करने से पहले शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से पूरे शहर में सात्विक भोजन की परंपरा विकसित हुई। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्याज और लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं, जो मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि वर्षों से यहां इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता।

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह परंपरा किसी सरकारी आदेश या कानूनी प्रतिबंध के कारण नहीं चल रही, बल्कि लोगों की आस्था और आपसी सम्मान से कायम है। यहां रहने वाले दूसरे धर्मों के लोग, यहां तक कि मुस्लिम परिवार भी स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए प्याज-लहसुन से दूरी बनाए रखते हैं। यही सामाजिक सौहार्द कटरा को बाकी शहरों से अलग पहचान देता है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बिना प्याज और लहसुन के खाना स्वादिष्ट नहीं हो सकता, लेकिन कटरा इस सोच को बदल देता है। यहां के रसोइए हींग, अदरक, हरी मिर्च और खास मसालों के इस्तेमाल से ऐसा स्वाद तैयार करते हैं कि श्रद्धालु खाने की तारीफ किए बिना नहीं रहते। दाल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी और चटनियों का स्वाद यहां अलग ही अनुभव देता है। कई लोग तो कटरा के सात्विक भोजन को सेहत और स्वाद का बेहतरीन मेल मानते हैं।

    कटरा की यह परंपरा सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और धार्मिक वातावरण का हिस्सा बन चुकी है। दुकानदार भी प्याज-लहसुन का स्टॉक नहीं रखते और यदि कोई पर्यटक इसकी मांग करता है, तो उसे विनम्रता से यहां की परंपरा के बारे में बताया जाता है। यही वजह है कि कटरा आज भी अपनी आध्यात्मिक पहचान और सात्विक जीवनशैली के कारण देश-दुनि

  • ग्लोइंग और साफ त्वचा के लिए Azelaic Acid बना पसंदीदा विकल्प, एक्सपर्ट्स ने बताए इसके फायदे

    ग्लोइंग और साफ त्वचा के लिए Azelaic Acid बना पसंदीदा विकल्प, एक्सपर्ट्स ने बताए इसके फायदे

    नई दिल्ली ।आज के समय में स्किनकेयर केवल सुंदर दिखने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोग अब अपनी त्वचा को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने पर भी ध्यान देने लगे हैं। बाजार में मौजूद कई एक्टिव इंग्रीडिएंट्स के बीच Azelaic Acid तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। त्वचा विशेषज्ञ इसे एक ऐसा तत्व मानते हैं जो चेहरे की कई सामान्य समस्याओं पर एक साथ काम करने की क्षमता रखता है।

    Azelaic Acid खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है जो मुहांसों, चेहरे की लालिमा, असमान स्किन टोन और जिद्दी दाग-धब्बों से परेशान रहते हैं। यह त्वचा को धीरे-धीरे साफ और संतुलित बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह त्वचा पर ज्यादा कठोर प्रभाव डाले बिना असर दिखाता है, इसलिए संवेदनशील त्वचा वाले लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।

    यह एक्टिव त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाने के बजाय अंदर से काम करता है। यह स्किन पोर्स को साफ रखने, बैक्टीरिया को नियंत्रित करने और सूजन को कम करने में मदद करता है। इसी कारण इसे पिंपल्स और उनके निशानों दोनों पर असरदार माना जाता है। कई लोग इसे अपने स्किनकेयर रूटीन का स्थायी हिस्सा बना रहे हैं क्योंकि यह लंबे समय तक त्वचा की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है।

    त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि Azelaic Acid का इस्तेमाल धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए। शुरुआत में कम प्रतिशत वाले प्रोडक्ट्स का उपयोग बेहतर माना जाता है ताकि त्वचा इस एक्टिव के अनुकूल हो सके। शुरुआती दिनों में हल्की झुनझुनी, खुजली या सूखापन महसूस होना सामान्य हो सकता है, लेकिन समय के साथ त्वचा इसकी आदी हो जाती है। यदि जलन अधिक महसूस हो तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है।

    इस एक्टिव की खास बात यह भी है कि इसे अन्य स्किनकेयर तत्वों के साथ संतुलित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग इसे नियासिनमाइड और विटामिन-सी जैसे इंग्रीडिएंट्स के साथ उपयोग करते हैं ताकि त्वचा की चमक और रंगत बेहतर हो सके। हालांकि, किसी भी नए एक्टिव को रूटीन में शामिल करने से पहले अपनी त्वचा की जरूरतों को समझना बेहद जरूरी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आज की जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण और तनाव के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं पहले से ज्यादा बढ़ गई हैं। ऐसे में Azelaic Acid जैसे एक्टिव्स लोगों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह न केवल चेहरे की बनावट को बेहतर बनाने में मदद करता है, बल्कि त्वचा को अधिक संतुलित और स्वस्थ दिखाने में भी योगदान देता है।

    स्किनकेयर में धैर्य को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और Azelaic Acid के साथ भी यही बात लागू होती है। इसके परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। कुछ लोगों को शुरुआती सुधार कुछ हफ्तों में महसूस हो सकता है, जबकि दाग-धब्बों और पिग्मेंटेशन पर असर दिखने में अधिक समय लग सकता है। नियमित और सही इस्तेमाल के साथ यह त्वचा की रंगत और टेक्सचर में स्पष्ट बदलाव ला सकता है।

  • रेस्टोरेंट स्टाइल स्वाद अब घर में, पनीर दो प्याजा की सिंपल रेसिपी से बढ़ाएं खाने का मज़ा..

    रेस्टोरेंट स्टाइल स्वाद अब घर में, पनीर दो प्याजा की सिंपल रेसिपी से बढ़ाएं खाने का मज़ा..


    नई दिल्ली ।
    रसोई में कुछ ऐसी डिशें होती हैं जो साधारण सामग्री से बनकर भी स्वाद में बेहद खास बन जाती हैं और उन्हीं में से एक है पनीर दो प्याजा। यह डिश अपने मसालेदार फ्लेवर, प्याज की खास बनावट और ढाबे जैसे स्वाद के कारण हर घर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती, बल्कि कुछ आसान स्टेप्स को फॉलो करके ही एक बेहतरीन लंच या डिनर तैयार किया जा सकता है।

    इस डिश की असली पहचान इसका नाम है, जिसमें “दो प्याजा” का मतलब है प्याज का दो अलग-अलग रूपों में इस्तेमाल। एक तरफ बारीक कटा प्याज ग्रेवी को गहराई और स्वाद देता है, जबकि दूसरी तरफ बड़े टुकड़ों में कटा प्याज डिश में हल्का क्रंच और ताजगी जोड़ता है। यही संयोजन इसे बाकी पनीर की सब्जियों से अलग बनाता है और इसे खास स्वाद प्रदान करता है।

    पनीर दो प्याजा बनाने की शुरुआत सामग्री की तैयारी से होती है। पनीर को मध्यम आकार के क्यूब्स में काटकर अलग रखा जाता है। प्याज को दो हिस्सों में बांटा जाता है, एक हिस्सा बारीक काटा जाता है और दूसरा बड़े टुकड़ों में रखा जाता है। इसके साथ टमाटर, अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च मिलकर इस डिश की बेस ग्रेवी तैयार करते हैं, जो आगे चलकर मसालों के साथ मिलकर गहरा स्वाद देती है।

    पकाने की प्रक्रिया में सबसे पहले तेल या बटर को गर्म किया जाता है और उसमें बारीक कटे प्याज को सुनहरा होने तक भुना जाता है। इसके बाद अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च डालकर उसकी कच्ची खुशबू खत्म की जाती है। फिर टमाटर मिलाकर तब तक पकाया जाता है जब तक मिश्रण तेल न छोड़ने लगे। इसके बाद हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर मसाले को अच्छे से मिलाया जाता है ताकि ग्रेवी का स्वाद और रंग दोनों निखर जाएं।

    इसके बाद पनीर के टुकड़े धीरे-धीरे डालकर हल्के हाथों से मिलाए जाते हैं ताकि उनका आकार बना रहे और वे मसाले को अच्छी तरह सोख लें। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर इसे कुछ मिनट तक पकने दिया जाता है। इसके बाद बड़े कटे हुए प्याज डाले जाते हैं, जो हल्का पककर भी अपनी क्रंची बनावट बनाए रखते हैं और डिश में एक अलग टेक्सचर जोड़ते हैं।

    अंत में गरम मसाला और हरा धनिया डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों और बढ़ जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में एक साधारण किचन को रेस्टोरेंट जैसे स्वाद में बदल देती है। तैयार पनीर दो प्याजा को गरमा-गरम रोटी, नान या जीरा राइस के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद और भी शानदार हो जाता है।

    इस तरह यह डिश न केवल रोजमर्रा के खाने को खास बनाती है बल्कि किसी भी मौके पर एक बेहतरीन विकल्प के रूप में भी सामने आती है। सरल सामग्री और आसान विधि के कारण यह हर घर की पसंद बनती जा रही है और अपने ढाबे जैसे स्वाद के कारण लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

  • Bengal: चुनाव में करारी हार के बाद TMC में घमासान…. विधायकों ने खोला आलाकमान के खिलाफ मार्चा

    Bengal: चुनाव में करारी हार के बाद TMC में घमासान…. विधायकों ने खोला आलाकमान के खिलाफ मार्चा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal ) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) के हाथों मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरखाने भारी घमासान शुरू हो गया है। इतने सालों तक पार्टी लाइन का सख्ती से पालन करने वाले कई विधायक और दिग्गज नेता अब अपनी ही लीडरशिप के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। पूर्व क्रिकेटर और मंत्री रहे मनोज तिवारी से लेकर सांसद-अभिनेता देव तक ने पार्टी आलाकमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुछ नेताओं ने तो चुनाव में हुई इस हार का सीधा ठीकरा महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के सिर फोड़ दिया है। हार के बाद ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने के फैसले पर भी कई विधायकों ने असहमति जताई है।


    गुटबाजी और ‘लॉबी’ को ठहराया हार का जिम्मेदार

    पार्टी के कई विधायकों ने खुलेआम गुटबाजी को हार की सबसे बड़ी वजह बताया है। मुर्शिदाबाद के हरिहरपारा से टीएमसी विधायक नियामत शेख ने सीधे तौर पर कहा, “पार्टी में सिर्फ लॉबी और गुटबाजी हावी है।” उन्होंने इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। नियामत शेख ने बताया कि उन्होंने बार-बार आलाकमान को मुर्शिदाबाद में बढ़ती गुटबाजी को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आलाकमान पर आरोप लगाया कि जमीनी हकीकत यानी ‘ह्यूमन फैक्टर’ को नजरअंदाज कर सोशल मीडिया और तकनीक पर ज्यादा भरोसा किया गया।

    शेख ने चुनाव से ठीक पहले हुमायूं कबीर को सस्पेंड किए जाने को भी गलत फैसला बताया। हुमायूं कबीर ने बाद में अपनी नई पार्टी (AUJP) बनाई और दो सीटें जीतीं, जिससे मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो गया।


    मुस्लिम वोटों का बंटवारा और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज से टीएमसी विधायक अखरुज्जमां ने भी अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में हार का कारण मुस्लिम वोटों के बंटवारे को माना है। उनका कहना था कि मुसलमानों ने टीएमसी और बीजेपी को छोड़कर बाकी सबको वोट दिया। एक अन्य टीएमसी विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारा मुस्लिम वोट बैंक बिखर गया, जबकि हिंदू वोट पूरी तरह से एकजुट होकर बीजेपी के पक्ष में चला गया। इस विधायक ने चुनावी रणनीतिकार एजेंसी (I-PAC) पर अत्यधिक निर्भर रहने और उन्हें ‘बिचौलिया’ बना देने पर भी भारी नाराजगी जताई।

    ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर अपनों के ही सवाल
    विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। अब इस फैसले पर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं। हावड़ा के बागनान से चार बार के विधायक अरुणभ सेन ने तंज कसते हुए कहा, “ममता बनर्जी एक बड़ा नाम हैं। लेकिन अगर मैं उनकी जगह होता, तो इतनी बड़ी हार के बाद निश्चित तौर पर इस्तीफा दे देता।”

    एक अन्य विधायक ने कहा कि हमें हार स्वीकार करनी चाहिए। हार न मानने की जिद लोगों के बीच पार्टी की छवि को और खराब कर रही है। हालांकि, वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का बचाव करते हुए कहा कि इस्तीफा न देने का फैसला ममता का अकेले का नहीं था, बल्कि यह सभी निर्वाचित विधायकों का सर्वसम्मत फैसला था।


    देव और मनोज तिवारी का सीधा हमला

    सांसद देव की नाराजगी: लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले और विधानसभा चुनाव में प्रचार करने वाले अभिनेता देव ने मीडिया से कहा कि वह ‘घाटल मास्टरप्लान’ को लेकर अब झूठ नहीं बोलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता और अभिषेक बनर्जी ने उन्हें झूठा भरोसा दिया था कि बाढ़ नियंत्रण से जुड़े इस लंबे समय से लटके प्रोजेक्ट को जल्द पूरा किया जाएगा।

    मनोज तिवारी के गंभीर आरोप: चुनाव परिणाम आने के महज दो दिन बाद पूर्व खेल राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने एक फेसबुक लाइव में टीएमसी सरकार को ‘भ्रष्ट’ बताते हुए कहा कि इसे सत्ता से उखाड़ फेंकना ही सही था। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने उन्हें सरकार में पूरी तरह किनारे कर दिया था। तिवारी ने बीजेपी को उसकी इस ‘प्रचंड जीत’ के लिए बधाई भी दी।

    वोटर लिस्ट में गड़बड़ी: मालदा के मालतीपुर से विधायक अब्दुर रहीम बोक्सी और केएमसी के डिप्टी मेयर अतिन घोष ने चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को हार का बड़ा कारण बताया। अतिन घोष ने राज्यभर में चल रही भारी सत्ता विरोधी लहर और धार्मिक ध्रुवीकरण को भी हार की वजह बताया।

    पार्टी के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी को देखते हुए टीएमसी ने अपने 5 प्रवक्ताओं- रिजू दत्ता, कृष्णेंदु चौधरी, कोहिनूर मजूमदार, पापिया घोष और कार्तिक घोष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोहिनूर मजूमदार और कृष्णेंदु चौधरी ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके की आलोचना की थी, जबकि रिजू दत्ता ने चुनाव के बाद हुई हिंसा को रोकने के लिए बीजेपी के उठाए गए कदमों की तारीफ की थी।

  • West Bengal: TMC ने चुना विपक्ष का नेता… दो डिप्टी लीटर का भी ऐलान, जानें किसे सौंपी जिम्मेदारी

    West Bengal: TMC ने चुना विपक्ष का नेता… दो डिप्टी लीटर का भी ऐलान, जानें किसे सौंपी जिम्मेदारी


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) ने चुनाव हारने के बाद नेता विपक्ष (Leader of Opposition) चुन लिया है। शोभनदेव चट्टोपाध्याय (Shobhandev Chattopadhyay.) को यह अहम जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा, असीमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय विपक्ष की डिप्टी लीडर होंगी। वहीं, फिरहाद हकीम मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) होंगे।

    पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक तक राज करने के बाद तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा है। इतिहास में पहली बार राज्य में भाजपा ने बहुमत हासिल किया और 207 विधायकों के साथ सरकार बनाई है। भवानीपुर से ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बने हैं। उनके शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनडीए शासित प्रदेशों के तमाम मुख्यमंत्रियों समेत भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

    चार मई को आए बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के अनुसार, भाजपा को 207, तृणमूल कांग्रेस को 80, कांग्रेस को दो, हुमायूं कबीर की पार्टी को दो, सीपीआईएम और एआईएसएफ को एक-एक सीट मिली है। 2011 से राज्य में ममता बनर्जी की सरकार थी।

    इससे पहले, ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में हालिया विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने के लिए शनिवार को सभी विपक्षी दलों से एक ”संयुक्त मंच” बनाने के वास्ते एकजुट होने की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों से जुड़े सभी छात्र संघों और गैर सरकारी संगठनों से भी भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। बनर्जी ने कहा, ”मैं सभी विपक्षी दलों, जिनमें वामपंथी और धुर-वामपंथी दल शामिल हैं, से भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मंच बनाने के लिए एकजुट होने का आह्वान करती हूं।”

  • MP के वन विभाग ने रचा इतिहास… भोपाल से उड़ा गिद्ध 3000KM का सफर कर पहुंचा उज्बेकिस्तान

    MP के वन विभाग ने रचा इतिहास… भोपाल से उड़ा गिद्ध 3000KM का सफर कर पहुंचा उज्बेकिस्तान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का वन विभाग (Forest Department) अब सिर्फ बाघों (Tigers) के ही नहीं, बल्कि गिद्धों (Vultures) के संरक्षण में भी दुनिया के लिए मिसाल पेश कर रहा है. हाल ही में राज्य के गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र (VCBC) केरवा में इलाज पाकर ठीक हुए दो सिनेरियस गिद्धों (Two Cinereous Vultures) ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर वैज्ञानिक जगत को हैरान कर दिया है.

    दरअसल, दिसंबर 2025 में विदिशा के सिरोंज से एक घायल सिनेरियस गिद्ध को बचाया गया था. भोपााल के वन विहार में और BNHS संचालित VCBC में इलाज के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे 23 फरवरी को हलाली बांध क्षेत्र में आजाद किया।

    WWF-India के सहयोग से इस पर GPS लगाया गया था. डेटा के अनुसार, 10 अप्रैल को इसने उड़ान भरी और राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को पार करते हुए 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया. विदिशा से उज्बेकिस्तान तक गिद्ध का 3000 किमी का सफर देख हर कोई हैरान है।


    पाकिस्तान में फंसी मादा गिद्ध का रेस्क्यू

    एक अन्य मामला शाजापुर के सुसनेर से रेस्क्यू की गई मादा सिनेरियस गिद्ध का है. 25 मार्च को रिहा होने के बाद यह गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गई. 7 अप्रैल को वहां आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण यह उड़ने में असमर्थ हो गई और जमीन पर गिर पड़ी।


    इंटरनेशनल कॉर्डिनेशन

    सिग्नल गायब होने पर WWF-India ने तुरंत WWF-पाकिस्तान से संपर्क किया. पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले से सुरक्षित बरामद कर लिया. फिलहाल वह स्थानीय वल्चर सेंटर में स्वस्थ हो रही है।


    GPS से रीयल-टाइम निगरानी

    अधिकारियों का कहना है कि यह लंबी यात्राएं गिद्धों की अद्भुत दिशा-ज्ञान क्षमता और सहनशक्ति का प्रमाण हैं. माइक्रोचिप और GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस की मदद से वन विभाग इनकी रीयल-टाइम निगरानी कर पा रहा है. इससे पहले साल 2025 में भी एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान तक 4300 किमी की यात्रा कर वापस भारत लौटा था.


    गिद्धों का महत्व

    सिनेरियस गिद्ध एशिया और यूरोप की सबसे बड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक है. ये वन ईकोसिस्टम की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • गर्मी में त्वचा को मिलेगी राहत, खीरे से बना यह फेस मास्क देगा नैचुरल ग्लो..

    गर्मी में त्वचा को मिलेगी राहत, खीरे से बना यह फेस मास्क देगा नैचुरल ग्लो..

    नई दिल्ली ।गर्मी का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। तेज धूप, गर्म हवाएं, पसीना और धूल-मिट्टी मिलकर चेहरे की प्राकृतिक चमक को कम कर देते हैं, जिससे त्वचा बेजान और थकी हुई नजर आने लगती है। ऐसे समय में लोग अक्सर बाजार में मिलने वाले महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हर बार ये जरूरी नहीं कि वे त्वचा पर अच्छा असर दिखाएं। इसी कारण अब प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है, जिनमें खीरे से बना फेस मास्क एक आसान और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।

    खीरे में प्राकृतिक रूप से पानी की मात्रा अधिक होती है, जो त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करने में मदद करता है। यह त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसे ताजगी भी प्रदान करता है। जब इसे दही और शहद के साथ मिलाकर फेस मास्क के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो इसका असर और भी बेहतर हो जाता है। दही त्वचा की सफाई करने और डेड स्किन हटाने में मदद करता है, जबकि शहद त्वचा में नमी बनाए रखता है और उसे मुलायम बनाता है। इन तीनों सामग्रियों का संयोजन त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और चमकदार बनाने में सहायक होता है।

    इस फेस मास्क को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। सबसे पहले एक ताजा खीरा लिया जाता है, जिसे अच्छे से धोकर कद्दूकस कर लिया जाता है। इसके बाद इसमें दही और शहद मिलाकर एक चिकना और संतुलित मिश्रण तैयार किया जाता है। ध्यान रखा जाता है कि मिश्रण न तो ज्यादा पतला हो और न ही ज्यादा गाढ़ा, ताकि इसे चेहरे पर आसानी से लगाया जा सके।

    लगाने से पहले चेहरे को साफ पानी से धोना जरूरी होता है, ताकि त्वचा पर मौजूद गंदगी और तेल हट जाए। इसके बाद तैयार फेस मास्क को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाया जाता है और लगभग 15 से 20 मिनट तक छोड़ दिया जाता है। सूखने के बाद इसे ठंडे पानी से धो दिया जाता है, जिससे त्वचा में तुरंत ताजगी और ठंडक का एहसास होता है। नियमित रूप से सप्ताह में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल करने से त्वचा में धीरे-धीरे निखार देखने को मिलता है।

    खीरे का यह फेस मास्क कई तरह से फायदेमंद माना जाता है। यह त्वचा को ठंडक देता है और धूप से होने वाली टैनिंग को कम करने में मदद करता है। दही त्वचा को साफ और फ्रेश बनाता है, जबकि शहद उसे नमी प्रदान करता है, जिससे त्वचा रूखी नहीं होती। इन सभी तत्वों का संतुलित उपयोग त्वचा को प्राकृतिक रूप से मुलायम, साफ और चमकदार बनाने में सहायक होता है।

    हालांकि, किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले सावधानी रखना जरूरी है। अगर त्वचा संवेदनशील है तो पहले पैच टेस्ट करना बेहतर होता है ताकि किसी भी प्रकार की एलर्जी से बचा जा सके। इसके अलावा आंखों के आसपास इस मास्क का उपयोग नहीं करना चाहिए और हमेशा ताजा सामग्री का ही प्रयोग करना चाहिए ताकि त्वचा को सुरक्षित और सही लाभ मिल सके।

  • MP में 100 साल पहले विलुप्त हुए जंगली भैसों का कुनबा बढ़ा… काजीरंगा से कान्हा आए 4 नए भैंसे

    MP में 100 साल पहले विलुप्त हुए जंगली भैसों का कुनबा बढ़ा… काजीरंगा से कान्हा आए 4 नए भैंसे


    मंडला।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) अब जंगली भैंसों (Wild Buffaloes) को दोबारा बसाने को लेकर एक नया कीर्तिमान रच रहा है. असम के काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park, Assam) से लाए गए 4 और जंगली भैंसों को शुक्रवार को कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve.-KTR) के सुपखर रेंज में विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़े में छोड़ दिया गया।

    मध्यप्रदेश के जंगलों से जंगली भैंस लगभग 100 साल पहले ही विलुप्त हो गए थे. सुपखर क्षेत्र, जहां इन भैंसों को छोड़ा गया है, ऐतिहासिक रूप से इनका प्राकृतिक आवास रहा है. इस पुनर्वास कार्यक्रम का उद्देश्य इस अहम प्रजाति को एक बार फिर मध्यप्रदेश के ईकोसिस्टम का हिस्सा बनाना है।


    72 घंटे का चुनौतीपूर्ण सफर

    इन जंगली भैंसों को काजीरंगा से कान्हा तक लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था. करीब 2220 किमी की लंबी यात्रा को विशेष वाहनों में इस सफर को पूरा करने में 72 घंटे लगे. यात्रा के दौरान दो विशेषज्ञ वन्यजीव पशु चिकित्सकों की टीम ने इन पशुओं के स्वास्थ्य की पल-पल निगरानी की।


    कान्हा में बढ़ा कुनबा

    इससे पहले, 28 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले चरण के तहत चार जंगली भैंसों (1 नर और 3 मादा) को बाड़े में छोड़ा था. अब चार नए सदस्यों के आने के बाद कान्हा में इनकी कुल संख्या 8 हो गई है. अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में और भी भैंसों को यहां लाया जाएगा.

    ईकोसिस्टम के लिए क्यों हैं अहम?
    जंगली भैंस भारतीय वन्यजीव विरासत का गौरव हैं. वन अधिकारियों के अनुसार, वन पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में इनकी भूमिका बेहद अहम है.

    प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समिता राजोरा और अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एल. कृष्णमूर्ति ने इस अभियान को मध्यप्रदेश की वन्यजीव संरक्षण पहलों में एक और मील का पत्थर बताया है। इस अवसर पर KTR के निदेशक रविंद्र मणि त्रिपाठी और उप निदेशकों सहित अन्य सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहे।

  • शुभेंदु मंत्रिमंडल…. सबकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग

    शुभेंदु मंत्रिमंडल…. सबकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग


    कोलकाता।
    सबका साथ, सबका विकास के अपने राजनीतिक नारे को जमीन पर उतारते हुए भाजपा ने मंत्रिमंडल में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर खास जोर दिया है। शुभेंदु अधिकारी (Shuvendu Adhikari) ने मंत्रिमंडल (Cabinet) में ऐसे चेहरों को जगह दी है, जिनकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रही है। इसमें फैशन डिजाइनर (Fashion Designer) से राजनीति में आई महिला नेता हैं,

    आरएसएस (RSS) के प्रचारक रहे संगठनकर्ता हैं। राजवंशी और अनुसूचित जाति समुदाय के चेहरे हैं, तो आदिवासी इलाकों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री (Chief Minister) के साथ शपथ लेने वालों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, अशोक कीर्तनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदिराम टुडू बतौर मंत्री शामिल हैं। हालांकि विभागों का बंटवारा बाद में किया जाएगा, लेकिन शुरुआती तस्वीर से साफ है कि भाजपा ने राजनीतिक अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को प्राथमिकता दी है।


    अग्निमित्रा पॉल: फैशन डिजाइनर से भाजपा की आक्रामक महिला चेहरा

    अग्निमित्रा पॉल उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने राजनीति में आने से पहले अलग क्षेत्र में पहचान बनाई। अग्निमित्रा ने भाजपा में तेजी से अपनी जगह बनाई और प्रदेश उपाध्यक्ष तक पहुंचीं। बॉटनी ऑनर्स में बीएससी, फैशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और एमबीए करने वाली अग्निमित्रा भाजपा के मुखर महिला चेहरों में हैं। कायस्थ समुदाय से आने वाली अग्निमित्रा ने आसनसोल दक्षिण सीट से तृणमूल कांग्रेस के तापस बनर्जी को 40 हजार से अधिक वोटों से हराया।


    दिलीप घोष: आरएसएस प्रचारक से भाजपा के संगठन निर्माता

    दिलीप घोष का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में शुरू हुआ। संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद बंगाल भाजपा की कमान सौंपी गई। 2015 से 2021 तक प्रदेश अध्यक्ष रहते भाजपा को बूथ स्तर तक मजबूत किया और ग्रामीण व आदिवासी इलाकों में पार्टी का विस्तार किया। 2016 में खड़गपुर सदर से विधायक बने। 2019 में मेदिनीपुर से सांसद चुने गए। बंगाल में भाजपा को मुख्य विपक्षी ताकत बनाने का श्रेय काफी हद तक दिलीप घोष को दिया जाता है। 2024 लोकसभा चुनाव में हार के बाद 2026 विधानसभा चुनाव में खड़गपुर सदर से वापसी की।


    निशीथ प्रमाणिक: सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में रहे

    निशीथ प्रमाणिक बंगाल में भाजपा का बड़ा चेहरा हैं। सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में रहे निशीथ राजवंशी समुदाय से आते हैं। पहले तृणमूल कांग्रेस में रहे निशीथ 2019 में भाजपा में शामिल हुए और उसी साल कूचबिहार से सांसद चुने गए। 35 की उम्र में केंद्र के सबसे युवा मंत्रियों में शामिल हुए और गृह राज्य मंत्री तथा युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। 2026 में माथाभांगा सीट से जीत दर्ज की। उत्तर बंगाल में भाजपा के विस्तार में अहम भूमिका रही।


    अशोक कीर्तनिया: सीमावर्ती राजनीति का मजबूत चेहरा

    उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव उत्तर क्षेत्र से आने वाले अशोक कीर्तनिया लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। अनुसूचित जाति बहुल और सीमावर्ती इलाके में भाजपा का संगठन मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उन्होंने लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी पकड़ साबित की है। व्यवसाय और राजनीति से जुड़े अशोक को भाजपा के मजबूत एससी चेहरे के रूप में देखा जाता है।


    क्षुदिराम टुडू: आदिवासी चेहरा

    उत्तर रानीबांध सीट से जीत दर्ज करने वाले क्षुदिराम टुडू को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने जंगलमहल और आदिवासी इलाकों को स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने में सक्रिय रहे टुडू को भाजपा ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में महत्वपूर्ण चेहरा मानती है। शुभेंदु के पहले मंत्रिमंडल में दक्षिण बंगाल, उत्तर बंगाल, जंगलमहल, औद्योगिक क्षेत्र और सीमावर्ती इलाकों सभी को प्रतिनिधित्व दिया गया।

  • शिंदे की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखे PM मोदी….भरे मंच पर पूछा हेलीकॉप्टर हादसे का हाल

    शिंदे की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखे PM मोदी….भरे मंच पर पूछा हेलीकॉप्टर हादसे का हाल


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने महाराष्ट्र (Maharashtra) के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy Chief Minister Eknath Shinde) की सेहत और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। यह तब हुआ जब हाल ही में एकनाथ शिंदे का हेलीकॉप्टर खराब मौसम के कारण बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा था। शनिवार को जब पश्चिम बंगाल (West Bengal) में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अन्य नेताओं से मिल रहे थे, तभी उन्होंने अचानक उनके पास रुककर उनसे इस घटना के बारे में बात की। उन्होंने न सिर्फ उनका हालचाल पूछा बल्कि भविष्य में हवाई यात्रा के दौरान ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह भी दी। इस बातचीत को लेकर वहां मौजूद लोगों में काफी उत्सुकता देखी गई।


    खराब मौसम में फंसा था शिंदे का हेलीकॉप्टर

    दरअसल, गुरुवार को एकनाथ शिंदे का हेलीकॉप्टर उड़ान के दौरान खराब मौसम में फंस गया था। बताया गया कि पायलट को अचानक एक तूफानी सिस्टम आता दिखा, जिसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हेलीकॉप्टर को वापस मोड़ दिया गया। इस दौरान हेलीकॉप्टर रास्ता भी थोड़ा भटक गया था, इसलिए उसे मुंबई के जुहू स्थित पवन हंस में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। हालांकि, राहत की बात यह रही कि शिंदे पूरी तरह सुरक्षित रहे।


    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ दोनों का संवाद

    प्रधानमंत्री मोदी और शिंदे की बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोग इस बातचीत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे। हालांकि बाद में साफ हुआ कि प्रधानमंत्री ने केवल उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।

    इस पूरे घटनाक्रम से यह भी देखने को मिला कि प्रधानमंत्री मोदी अपने सहयोगियों की सुरक्षा और भलाई को लेकर कितने सतर्क रहते हैं और व्यक्तिगत रूप से उनका हालचाल भी लेते हैं। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भी मौजूद थे। वहीं पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।