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  • वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक अर्धशतक, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराया

    वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक अर्धशतक, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराया


    हरारे।
    युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की शानदार अर्धशतकीय पारी की बदौलत भारत ने पहले टी-20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए मुकाबले में भारत ने 126 रन का लक्ष्य केवल 13.2 ओवर में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया।

    मैच के सबसे बड़े आकर्षण वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने 15 वर्ष 118 दिन की उम्र में टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अर्धशतक लगाकर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही वह टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने जिब्राल्टर के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 16 वर्ष 56 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी।

    यह जीत श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम की पहली अंतरराष्ट्रीय जीत भी रही। इससे पहले उनकी कप्तानी में भारत को आयरलैंड के खिलाफ 2-0 और इंग्लैंड के खिलाफ 4-0 से हार का सामना करना पड़ा था।

    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए। टीम की ओर से वेस्ली मधेवेरे ने सर्वाधिक 39 रन बनाए, जबकि तदिवानाशे मरुमानी ने नाबाद 27 रन की उपयोगी पारी खेली।

    भारतीय गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन किया। मयंक यादव और प्रिंस यादव ने दो-दो विकेट झटके। मयंक यादव ने मैच की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई और बाद में डियोन मायर्स का विकेट भी अपने नाम किया। शिवम दुबे और रवि बिश्नोई को एक-एक सफलता मिली, जबकि मधेवेरे रन आउट हुए।

    आसान लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। वैभव सूर्यवंशी की रिकॉर्डतोड़ पारी ने टीम की जीत सुनिश्चित करने के साथ भारतीय क्रिकेट को एक नया युवा सितारा भी दे दिया।

  • पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका से और महंगा हुआ कच्चा तेल, बेंट क्रूड 101 डॉलर के पार

    पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका से और महंगा हुआ कच्चा तेल, बेंट क्रूड 101 डॉलर के पार


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग और खाड़ी के देशों से क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाई बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड दो महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया। आज ब्रेंट क्रूड तेजी दिखाते हुए 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ने आज 1.16 डॉलर प्रति बैरल की उछाल के साथ 95.23 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ट्रेडिंग शुरू होने के बाद इसकी कीमत उछल कर 101.01 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले दो महीने के दौरान ब्रेंट क्रूड का ये सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि बाद में इसकी कीमत में मामूली गिरावट भी आई। भारतीय समय के मुताबिक रात 8:30 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 6.59 डॉलर प्रति बैरल यानी 7.01 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.66 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    उल्लेखनीय है कि दो महीने पहले 24 मई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 94.92 डॉलर प्रति बैरल से लेकर 96.30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति होने की उम्मीद की वजह से क्रूड ऑयल की कीमत में गिरावट का रुख बन गया था, जिसकी वजह से एक जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंड क्रड 71.44 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गया था। हालांकि छह जुलाई के बाद इसकी कीमत में एक बार फिर तेजी का रुख बन गया।

    ब्रेंट क्रूड की तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने आज 0.90 डॉलर प्रति बैरल की बढ़त के साथ 87.73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से आज के कारोबार की शुरुआत की। दिन के कारोबार में डब्ल्यूटीआई क्रूड उछल कर 92.15 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसकी कीमत में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। भारतीय समय के मुताबिक शाम 8:30 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.20 डॉलर प्रति बैरल यानी 5.99 प्रतिशत की तेजी के साथ 92.03 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    आपको बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो जाने, सीजफायर खत्म होने और दोनों देशों द्वारा एक दूसरे के ठिकानों पर लगातार हमला करने की वजह से कच्चे तेल की कीमत में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 81 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के ऊपर चला गया था। इसके बाद तीन दिन तक सुस्ती का माहौल बना रहा, लेकिन पिछले पांच ट्रेडिंग सेशन से कच्चे तेल की कीमत में एक बार फिर तेजी का रुख बन गया है, जिसकी वजह से आज इसने पिछले दो महीने के सबसे ऊंचे स्तर को पार कर लिया है।

    जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ रहे तनाव की वजह से एक बार फिर कच्चे तेल की सौ डॉलर के स्तर के ऊपर जा सकती है। कच्चे तेल की कीमत मे होने वाली बढ़ोतरी भारत जैसे कच्चे तेल के आयातक देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जेक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक तेज बनी रही तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट काफी बढ़ सकता है। इसके साथ ही देश का इंपोर्ट बिल भी लक्ष्य से काफी अधिक हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत के कारण फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) भी तेज हो सकता है, जिसके कारण भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकती है।

  • राधाकिशन दमानी ने सुंदरम फाइनेंस में बढ़ाई हिस्सेदारी, पहली तिमाही में खरीदे 2.37% शेयर

    राधाकिशन दमानी ने सुंदरम फाइनेंस में बढ़ाई हिस्सेदारी, पहली तिमाही में खरीदे 2.37% शेयर

    नई दिल्ली। शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक और डीमार्ट के संस्थापक राधाकिशन दमानी तथा उनके परिवार की निवेश कंपनी ब्राइट स्टार इन्वेस्टमेंट्स ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) सुंदरम फाइनेंस में चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान 2.37 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी के नवीनतम शेयरहोल्डिंग पैटर्न से यह जानकारी सामने आई है।

    शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही के अंत तक ब्राइट स्टार इन्वेस्टमेंट्स के पास सुंदरम फाइनेंस के करीब 26.3 लाख शेयर थे, जो कंपनी की कुल 2.37 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। इससे पहले मार्च 2026 और दिसंबर 2025 की शेयरहोल्डिंग सूची में ब्राइट स्टार इन्वेस्टमेंट्स का नाम शामिल नहीं था, जिससे संकेत मिलता है कि उस समय उसकी हिस्सेदारी एक प्रतिशत से कम या शून्य थी।

    उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 तिमाही में भी दमानी की निवेश कंपनी के पास सुंदरम फाइनेंस में 2.37 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई थी।

    गुरुवार को बीएसई पर सुंदरम फाइनेंस का शेयर 4,413.70 रुपये पर बंद हुआ।

    फोर्ब्स के अनुसार, राधाकिशन दमानी की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 16 अरब अमेरिकी डॉलर है। डीमार्ट की मूल कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स में उनकी प्रमुख हिस्सेदारी है। इसके अलावा वे वीएसटी इंडस्ट्रीज, यूनाइटेड ब्रुअरीज और ब्लू डार्ट जैसी कंपनियों में भी निवेशक हैं।

    दो बार जारी कर चुकी है बोनस शेयर

    सुंदरम फाइनेंस अपने निवेशकों को दो बार बोनस शेयर दे चुकी है। कंपनी ने अगस्त 2008 और दिसंबर 2012 में 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी किए थे, यानी प्रत्येक एक शेयर पर एक अतिरिक्त बोनस शेयर दिया गया था।

    कंपनी के शेयरों के प्रदर्शन की बात करें तो पिछले पांच वर्षों में इनमें 71 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, पिछले एक वर्ष में शेयर करीब 15 प्रतिशत कमजोर हुए हैं, जबकि वर्ष 2026 में अब तक इनमें 17 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। सुंदरम फाइनेंस के शेयर का 52 सप्ताह का उच्च स्तर 5,640 रुपये और निचला स्तर 4,000 रुपये रहा है।

  • 77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर डिजिटल टोल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और FASTag एनुअल पास की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार के अनुसार पिछले 11 महीनों में 77 लाख से अधिक FASTag एनुअल पास जारी किए जा चुके हैं। इन पासों के माध्यम से 63 करोड़ से अधिक टोल लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि निजी वाहन चालकों के बीच यह सुविधा तेजी से स्वीकार की जा रही है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और टोल प्लाजा पर भीड़ कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह व्यवस्था अब राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

    सरकार के मुताबिक कार, जीप और वैन श्रेणी के वाहनों द्वारा किए जाने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा केवल FASTag एनुअल पास के माध्यम से हो रहा है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली के तहत वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 98 प्रतिशत टोल शुल्क FASTag के जरिए ही वसूला जा रहा है। इससे टोल भुगतान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनी है।

    FASTag एनुअल पास विशेष रूप से निजी कार, जीप और वैन मालिकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसकी कीमत 3,075 रुपये निर्धारित की गई है। यह पास एक वर्ष तक या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहता है। जो भी सीमा पहले पूरी होती है, उसी के अनुसार इसकी वैधता समाप्त हो जाती है। नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए यह सुविधा समय और प्रक्रिया दोनों के लिहाज से उपयोगी मानी जा रही है।

    सरकार का कहना है कि FASTag नेटवर्क को बहु-स्तरीय डिजिटल सुरक्षा प्रणाली के साथ संचालित किया जा रहा है। इसमें टोल प्रबंधन प्रणाली, अधिग्रहण बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) तथा FASTag जारी करने वाले बैंक आपस में समन्वित रूप से कार्य करते हैं। प्रत्येक टोल लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है और भुगतान होते ही वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर तुरंत सूचना भेजी जाती है। किसी भी प्रकार की शिकायत के समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी विकसित की गई है।

    सरकार भविष्य में टोल संग्रह प्रणाली को और आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक लागू करने की तैयारी चल रही है। इस प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण और RFID तकनीक का उपयोग किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति कम करने की आवश्यकता नहीं होगी। कैमरा और सेंसर वाहन की पहचान कर संबंधित खाते से स्वतः टोल शुल्क काट देंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक लागू होने से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी, यात्रा का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और सड़क परिवहन व्यवस्था अधिक सुचारु बनेगी। साथ ही डिजिटल भुगतान और टोल संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के साथ राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों को अधिक सुविधाजनक और निर्बाध सफर का अनुभव मिलेगा।

  • टीवी इंडस्ट्री में नए विवाद की एंट्री, सान्वी तलवार के आरोपों पर करण कुंद्रा की चुप्पी बरकरार

    टीवी इंडस्ट्री में नए विवाद की एंट्री, सान्वी तलवार के आरोपों पर करण कुंद्रा की चुप्पी बरकरार

    नई दिल्ली । टेलीविजन अभिनेत्री सान्वी तलवार ने अपने पूर्व सह-कलाकार करण कुंद्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए मनोरंजन जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। एक हालिया इंटरव्यू में सान्वी ने दावा किया कि वर्ष 2015 में एक टीवी धारावाहिक की शूटिंग के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दृश्य की तैयारी के दौरान बिना उनकी सहमति के उन्हें किस किया गया, जिसके बाद सेट पर विवाद की स्थिति बन गई।

    सान्वी तलवार के अनुसार, जिस दृश्य की शूटिंग होनी थी, उसके लिए निर्देशक ने अभी शूट शुरू करने का संकेत भी नहीं दिया था। उनका दावा है कि इसी दौरान करण कुंद्रा ने बिना अनुमति उन्हें किस किया। अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके बाद कुछ समय पश्चात कथित रूप से करण कुंद्रा ने भी उन्हें थप्पड़ मारा। सान्वी का कहना है कि इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    अभिनेत्री ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय सेट पर मौजूद अधिकांश लोगों ने उनका खुलकर समर्थन नहीं किया। उनके अनुसार, विवाद के दौरान उन्हें अपशब्द भी कहे गए और वे गिर पड़ीं। सान्वी ने कहा कि बाद में निर्माता एकता कपूर ने उनसे बातचीत की, उनका पक्ष सुना और स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि एकता कपूर ने करण कुंद्रा की ओर से उनसे माफी भी मांगी थी, जिससे काम का माहौल कुछ हद तक सहज हो सका।

    सान्वी ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उस समय उन्हें लगा था कि करण कुंद्रा का व्यवहार सामान्य पेशेवर सीमाओं से अलग है। इसी वजह से उन्होंने एक साझा परिचित के माध्यम से उस समय करण की कथित गर्लफ्रेंड रहीं अनुषा दांडेकर को अपनी चिंता से अवगत कराया। अभिनेत्री का आरोप है कि इसके बाद उनके लिए सेट का माहौल और अधिक असहज हो गया तथा उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

    यह विवाद उस टीवी धारावाहिक से जुड़ा बताया जा रहा है जिसमें करण कुंद्रा और सान्वी तलवार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। उस समय यह शो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा था। हालांकि अभिनेत्री द्वारा लगाए गए आरोप कई वर्ष बाद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं, जिससे एक बार फिर पुराने घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिलहाल करण कुंद्रा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले पर उनका पक्ष आना बाकी है। किसी भी विवाद में सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकलना उचित माना जाता है। मनोरंजन जगत में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी हैं और अब सभी की नजर करण कुंद्रा की संभावित प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • इंडिगो की कमाई बढ़ी लेकिन मुनाफा घाटे में बदला, ईंधन खर्च और छोटी फ्लीट बनी बड़ी वजह

    इंडिगो की कमाई बढ़ी लेकिन मुनाफा घाटे में बदला, ईंधन खर्च और छोटी फ्लीट बनी बड़ी वजह

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन इंडिगो को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में घाटे का सामना करना पड़ा है। कंपनी ने अप्रैल से जून 2026 की अवधि के लिए स्टैंडअलोन आधार पर 382 करोड़ रुपये के शुद्ध घाटे की जानकारी दी है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसे 2,161 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। कंपनी के वित्तीय नतीजों से स्पष्ट है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, ईंधन की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत में तेज वृद्धि ने उसके प्रदर्शन को प्रभावित किया।

    कंसोलिडेटेड आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन दबाव में रहा। इस अवधि में इंडिगो को 238 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज करना पड़ा, जबकि एक वर्ष पहले इसी तिमाही में उसे 2,176 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। हालांकि कंपनी की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली और कुल राजस्व 25,614.1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 21,542.6 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 18.9 प्रतिशत अधिक है।

    राजस्व में वृद्धि के बावजूद कंपनी का कुल खर्च काफी तेजी से बढ़ा। अप्रैल-जून तिमाही में कुल परिचालन व्यय 25,852.5 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 19,231.9 करोड़ रुपये था। यानी कुल खर्च में लगभग 34.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कंपनी के अनुसार इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण विमान ईंधन की कीमतों में तेज उछाल रहा, जिसने परिचालन लागत पर सीधा असर डाला।

    ईंधन खर्च के आंकड़े भी इस दबाव को स्पष्ट करते हैं। पहली तिमाही में इंडिगो का ईंधन पर खर्च बढ़कर 10,832.9 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक वर्ष पहले यही खर्च 5,832.6 करोड़ रुपये था। सालाना आधार पर इसमें लगभग 85.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी की लागत संरचना पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    कंपनी की परिचालन लाभप्रदता में भी गिरावट दर्ज की गई। पहली तिमाही में ईबीआईटीडीएआर 5,738.6 करोड़ रुपये से घटकर 3,832.5 करोड़ रुपये रह गया। इसी अवधि में ईबीआईटीडीएआर मार्जिन भी 28.8 प्रतिशत से घटकर 16.5 प्रतिशत पर आ गया। इससे संकेत मिलता है कि आय बढ़ने के बावजूद बढ़ती लागत ने लाभप्रदता को काफी प्रभावित किया।

    इंडिगो के बेड़े में भी इस दौरान कमी दर्ज की गई। 30 जून 2026 तक कंपनी के पास कुल 432 विमान थे, जबकि 31 मार्च 2026 को यह संख्या 441 थी। यानी तिमाही के दौरान कंपनी का बेड़ा नौ विमानों तक घट गया। कंपनी ने बताया कि डैम्प लीज पर संचालित विमानों की संख्या 20 से घटकर 7 रह जाने के कारण फ्लीट का आकार कम हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन उद्योग पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ईंधन लागत और अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में ईंधन कीमतों की दिशा, अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात की स्थिति और परिचालन लागत पर नियंत्रण कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। फिलहाल इंडिगो की आय में वृद्धि सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन बढ़ते खर्च ने उसकी लाभप्रदता पर दबाव बनाए रखा है।

  • व्रत में कमजोरी से बचना है तो अपनाएं ये पौष्टिक स्नैक्स, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी.

    व्रत में कमजोरी से बचना है तो अपनाएं ये पौष्टिक स्नैक्स, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी.


    नई दिल्ली । सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ संयम और सात्विक जीवनशैली का भी प्रतीक माना जाता है। इस दौरान लंबे समय तक उपवास रखने से शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में संतुलित और पौष्टिक आहार का चयन करना आवश्यक हो जाता है, ताकि दिनभर शरीर सक्रिय रहे और आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति भी होती रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि हल्के, सुपाच्य और पोषण से भरपूर स्नैक्स व्रत के दौरान बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।

    साबूदाना से तैयार टिक्की व्रत के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में शामिल है। उबले आलू के साथ तैयार यह स्नैक लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। इसे कम घी या हल्के तेल में सेंककर दही अथवा व्रत वाली हरी चटनी के साथ खाया जा सकता है। इसी तरह कुट्टू के आटे से बना चीला भी प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें पनीर या उबले आलू का उपयोग करने से इसका पोषण मूल्य और बढ़ जाता है।

    मखाना चिवड़ा भी व्रत के लिए एक हल्का और पौष्टिक विकल्प है। घी में हल्का भुना मखाना, मूंगफली और सेंधा नमक के साथ तैयार यह स्नैक कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। हल्की भूख लगने पर यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ पेट भी भरा हुआ महसूस कराता है। वहीं उबले आलू, सेंधा नमक, काली मिर्च, नींबू का रस और हरा धनिया मिलाकर तैयार आलू चाट स्वाद और पोषण का संतुलित विकल्प माना जाता है।

    सिंघाड़े के आटे से बने पकौड़े भी व्रत के दौरान पसंद किए जाने वाले व्यंजनों में शामिल हैं। इन्हें पनीर या आलू के साथ तैयार कर दही के साथ परोसा जा सकता है। यदि तली हुई चीजों से बचना चाहते हैं तो इन्हें कम तेल में भी बनाया जा सकता है। इसके अलावा दही, केला, सेब और भीगे हुए बादाम से तैयार फ्रूट एंड नट लस्सी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती है।

    शकरकंद से बने चिप्स भी सामान्य तले हुए स्नैक्स की तुलना में अधिक पौष्टिक विकल्प माने जाते हैं। इन्हें घी में हल्का सेंककर या बेक करके तैयार किया जा सकता है। इनमें मौजूद फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं। वहीं राजगिरा और गुड़ से बने लड्डू तुरंत ऊर्जा देने वाले स्नैक्स के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं। इन्हें पहले से तैयार कर पूरे सावन में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि व्रत के दौरान तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। दिनभर पर्याप्त पानी, नारियल पानी या छाछ का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके साथ ही मौसमी फल, दही और सूखे मेवों को भोजन का हिस्सा बनाना लाभकारी माना जाता है। एक बार में अधिक भोजन करने की बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में संतुलित स्नैक्स लेना बेहतर रहता है। सही खानपान अपनाकर सावन सोमवार का व्रत श्रद्धा के साथ-साथ स्वस्थ और ऊर्जावान तरीके से भी पूरा किया जा सकता है।

  • 20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर अभी निर्णय नहीं, सरकार बोली- वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही बढ़ेगा कदम

    20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर अभी निर्णय नहीं, सरकार बोली- वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही बढ़ेगा कदम

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए संसद में स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा कि यदि भविष्य में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार किया जाता है तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा। सरकार का कहना है कि किसी भी नए निर्णय का आधार केवल वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक अनुभव होंगे।

    लोकसभा में लिखित उत्तर के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि ई85 ईंधन केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। ऐसे वाहन विशेष रूप से इस ईंधन के उपयोग के लिए डिजाइन और प्रमाणित किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक करने का निर्णय लिया जा चुका है।

    सरकार ने बताया कि भारत में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है। इस प्रक्रिया में नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों सहित विभिन्न संस्थानों की भागीदारी रही है। व्यापक परीक्षणों और फील्ड वैलिडेशन के बाद ही ई20 ईंधन को लागू किया गया।

    सरकार के अनुसार उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययन और वास्तविक उपयोग के अनुभव बताते हैं कि निर्धारित मानकों के अनुरूप इस्तेमाल किए जाने पर ई20 पेट्रोल सुरक्षित और तकनीकी रूप से उपयुक्त ईंधन है। सरकार ने कहा कि यह निष्कर्ष केवल प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित नहीं है, बल्कि देशभर में इसके व्यावहारिक उपयोग से प्राप्त अनुभवों से भी इसकी पुष्टि हुई है।

    संसद को दी गई जानकारी के अनुसार देश में ई15 से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग साढ़े तीन वर्षों से और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। इस अवधि में करोड़ों दोपहिया वाहन और लाखों पेट्रोल कारें इस ईंधन पर संचालित हुई हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या असामान्य तकनीकी समस्या का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया है। वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 के कारण अतिरिक्त घिसावट या इंजन की आयु कम होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।

    सरकार ने यह भी बताया कि प्रमुख वाहन निर्माताओं के सर्विस डेटा में ई20 उपयोग करने वाले वाहनों में इंजन डैमेज या असामान्य खराबी की दर सामान्य ईंधन वाले वाहनों की तुलना में अधिक नहीं पाई गई। साथ ही कंपनियां ऐसे वाहनों पर सामान्य वारंटी भी जारी रख रही हैं। विभिन्न अनुसंधान संस्थानों द्वारा किए गए परीक्षणों में भी ई20 ईंधन को तकनीकी रूप से अनुकूल पाया गया है।

    माइलेज को लेकर सरकार ने कहा कि ईंधन दक्षता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें वाहन की स्थिति, ड्राइविंग शैली और सड़क की परिस्थितियां शामिल हैं। कुछ पुराने ई10 आधारित वाहनों में माइलेज में सीमित कमी संभव है, लेकिन ई20 ईंधन बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, साफ दहन, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे लाभ भी प्रदान करता है। सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत, कच्चे तेल के आयात में कमी, कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट और किसानों की आय बढ़ाने में भी सकारात्मक योगदान मिला है।

  • 8वें वेतन आयोग में 1.92 फिटमेंट फैक्टर की चर्चा तेज, जानिए कितनी बढ़ सकती है बेसिक सैलरी

    8वें वेतन आयोग में 1.92 फिटमेंट फैक्टर की चर्चा तेज, जानिए कितनी बढ़ सकती है बेसिक सैलरी

    नई दिल्ली । 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच वेतन वृद्धि की संभावनाओं पर चर्चा लगातार तेज हो रही है। सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है, क्योंकि इसी के आधार पर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। फिलहाल 1.92 फिटमेंट फैक्टर को लेकर विभिन्न स्तरों पर अनुमान लगाए जा रहे हैं। हालांकि सरकार या प्रस्तावित वेतन आयोग की ओर से अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    यदि केवल अनुमान के तौर पर 1.92 फिटमेंट फैक्टर को आधार माना जाए तो वर्तमान में 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर 34,560 रुपये हो सकती है। इसी प्रकार अन्य वेतन स्तरों पर भी नई बेसिक सैलरी का अनुमान लगाया जा रहा है। यह गणना केवल संभावित परिदृश्य को समझाने के लिए है और इसे अंतिम वेतन संरचना नहीं माना जा सकता।

    अनुमानित गणना के अनुसार, 25,500 रुपये की मौजूदा बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 48,960 रुपये, 35,400 रुपये की बेसिक लगभग 67,968 रुपये, 44,900 रुपये की बेसिक करीब 86,208 रुपये तथा 56,100 रुपये की बेसिक लगभग 1,07,712 रुपये तक पहुंच सकती है। यह पूरा आकलन केवल 1.92 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर किया गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बेसिक सैलरी में बदलाव देखकर वास्तविक वेतन वृद्धि का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। कर्मचारियों की कुल आय में महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य भत्तों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नया वेतन आयोग लागू होने के बाद इन सभी भत्तों की गणना के नियम भी बदल सकते हैं, जिससे वास्तविक ग्रॉस और इन-हैंड सैलरी प्रभावित होगी।

    फिटमेंट फैक्टर दरअसल एक गुणांक होता है, जिसके माध्यम से वर्तमान बेसिक वेतन को गुणा करके संशोधित बेसिक वेतन निर्धारित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान बेसिक वेतन 35,400 रुपये है और 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो संशोधित बेसिक वेतन लगभग 67,968 रुपये होगा। इसी सिद्धांत के आधार पर सभी वेतन स्तरों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

    वर्तमान समय में केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। इसलिए वेतन वृद्धि का वास्तविक आकलन करते समय मौजूदा बेसिक वेतन के साथ महंगाई भत्ते को भी शामिल करना आवश्यक माना जाता है। उदाहरण के लिए 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 60 प्रतिशत डीए जोड़ने के बाद कुल राशि 28,800 रुपये होती है। यदि संभावित नई बेसिक 34,560 रुपये मानी जाए तो दोनों के बीच का अंतर लगभग 5,760 रुपये रहता है। हालांकि इसे सीधे वास्तविक वेतन वृद्धि नहीं माना जा सकता क्योंकि अन्य भत्तों का पुनर्निर्धारण भी इसमें शामिल होगा।

    गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिसके बाद न्यूनतम बेसिक वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया था। अब कर्मचारियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के फैसले पर टिकी हैं। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नया फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और केंद्रीय कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों की बेसिक, ग्रॉस और इन-हैंड सैलरी में वास्तविक बदलाव कितना आएगा।