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  • पिछले 6 माह में बिगड़े भारत से रिश्ते… अमेरिकी ही कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप की नीति का विरोध

    पिछले 6 माह में बिगड़े भारत से रिश्ते… अमेरिकी ही कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप की नीति का विरोध


    वाशिंगटन।
    भारत (India) और अमेरिका (America) के रिश्ते पिछले 6 महीनों से लगातार खराब स्थिति में हैं। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत ने खुले तौर पर अमेरिकी बयानों का विरोध किया, जिसके परिणाम स्वरूप ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने पाकिस्तान (Pakistan) के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाते हुए भारत पर आर्थिक हमला करने की कोशिश की। राष्ट्रपति ट्रंप की इस नीति का अमेरिका में ही कई लोगों ने विरोध किया, यहां तक कि उनके सहयोगियों ने भी भारत को लेकर अपनाई जा रही इस नीति का विरोध ही किया। अब अमेरिकी वैश्विक मामलों के जानकार, लेखक और प्रोफेसर फ्रांसिस फुकुयामा ने ट्रंप की इस नीति को लेकर उन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने अपने निजी व्यवहार के लिए अमेरिका के हितों को दरकिनार कर दिया।

    एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पर बात करते हुए प्रोफेसर ने कहा कि उनकी वैश्विक नीति क्या है इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “ट्रंप की वैश्विक नीति निजी लाभ पर आधारित है। उदाहरण के लिए पिछले 20 से 30 वर्षों में अमेरिका में किसी की भी सरकार रही हो, वह भारत के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश करती रही है। क्योंकि हम दक्षिण एशिया में चीन को काउंटर करना चाहते हैं। लेकिन ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों को केवल इसलिए खराब कर दिया क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए समर्थन नहीं किया था।”

    प्रोफेसर ने कहा, “ट्रंप के इस फैसले से आप पूरी तरह से समझ सकते हैं कि कैसे उन्होंने अपने निजी लाभ के लिए अमेरिकी हितों को अलग रख दिया। ऐसे में अगर कोई यह सोच रहा है कि ट्रंप प्रशासन की कोई वैश्विक नीति होगी, तो वह परेशान ही होगा।”

    आपको बता दें, इस साल जनवरी में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आए थे, तो भारत में लोगों की राय यह थी कि भारत और अमेरिका के रिश्ते सही होंगे। ट्रंप और पीएम मोदी की निजी दोस्ती दोनों देशों के बीच में मजबूत साझेदारी का आधार बनेगी। शुरुआती समय में ऐसा दिखा भी। लेकिन मई के महीने में सबकुछ बदल गया।

    पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप टीम का बयान दोस्ती वाला नहीं था। भारत सरकार के ऐलान करने से पहले ही ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए सीजफायर का ऐलान कर दिया। यह भारत सरकार के लिए असहज करने वाली स्थिति थी। इसके बाद ट्रंप लगातार इस बात को कहते रहे कि भारत और पाकिस्तान के बीच उन्होंने सीजफायर करवाया है, जबकि भारत ने शुरुआत से ही इस बात को कहा कि सीजफायर के लिए पाकिस्तानी डीजीएमओ की तरफ से फोन आया था इसके बाद यह हुआ।

    दोनों देशों के बीच बिगड़ती इस परिस्थिति का पाकिस्तान ने बड़ी अच्छी तरह से फायदा उठाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुले तौर पर इस सीजफायर के लिए ट्रंप को धन्यवाद किया और लगे हाथ उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए समर्थन भी दे दिया। इस पूरे वाकये के बाद भारत और अमेरिका के संबंध लगातार गिरावट की तरफ जाने लगे। अमेरिका ने भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया। ट्रंप और उनकी टीम की तरफ से लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी की जाने लगी। भारत ने भी अपनी स्थिति को साफ किया और ट्रंप या अमेरिका के आगे किसी भी तरीके से झुकने से इनकार कर दिया।

    दरअसल, कश्मीर और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय स्थिति पर भारत की स्थिति दशकों से साफ रही है कि भारत इसमें किसी भी तीसरे देश का दखल नहीं चाहता है। शिमला समझौते के तहत पाकिस्तान भी इस पर राजी है, लेकिन पाकिस्तान हमेशा से ही इस मुद्दे में तीसरे देश को शामिल करने के लिए तैयार रहता है। ऐसे में अगर पीएम मोदी नोबेल के लिए ट्रंप को समर्थन देते तो यह भारत की साख के लिए सही नहीं होता और न ही भारत के स्टैंड के मुताबिक होता।

  • इजरायल ने सोमालिलैंड को दी स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता…अफ्रीकी संघ ने किया विरोध

    इजरायल ने सोमालिलैंड को दी स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता…अफ्रीकी संघ ने किया विरोध


    येरूशलम।
    इजरायल (Israel) ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से सोमालिलैंड (Somaliland) को एक स्वतंत्र देश (Independent Country) के रूप में मान्यता दे दी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने सोमालिया से अलग हुए इस देश को मान्यता देने के का ऐलान करते हुए यहां के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही (President Abdirahman Mohamed Abdullahi) को इजरायल के आधिकारिक दौरे का न्यौता भी दिया। गौरतलब है कि यह देश सोमालिया में चल रहे गृहयुद्ध के बाद अलग हुआ है, यह काफी समय से एक अलग देश के रूप में अपनी सत्ता चला रहा है। वहीं, दूसरी ओर अफ्रीकी संघ ने इजरायल के इस फैसले का विरोध किया है।

    टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट के अनुसार सोमालिया से अलग हुए इस क्षेत्र को 30 साल से अधिक समय के बाद किसी देश ने आधिकारिक तौर पर मान्यता दी है। इस ऐतिहासिक घोषणा पत्र पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायली विदेश मंत्री गिदेओन साआर ने हस्ताक्षर किए, जबकि सोमालिलैंड की तरफ से राष्ट्रपति अब्दुल्लाही ने।

    दोनों ही नेताओं ने इस मान्यता पत्र को ऐतिहासिक पल बताया। नेतन्याहू ने कहा कि इस क्षण से दोनों देशों के बीच में ऐतिहासिक मित्रता की शुरुआत होती है। दोनों देश आर्थिक क्षेत्रों , कृषि और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करेंगे। इजरायल का यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुए अब्राहम अकॉर्ड की भावनाओं के अनुरूप है। इजरालय से मान्यता मिलने के बाद सोमालिलैंड ने कहा है कि वह भी इस समझौते में शामिल होना चाहता है। राष्ट्रपति ने एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत है। उन्होंने कहा, “यह एक ऐतिसाहिक क्षण है। हम इसका गर्मजोशी के साथ स्वागत करते हैं।” सोमालिलैंड की राजधानी हरगेसा में भी लोगों ने इजरायल के इस कदम का स्वागत किया और सड़कों पर आकर जश्न मनाया।


    अफ्रीकी संघ, सोमालिया समेत कई देशों ने जताई आपत्ति

    इजरायल की नेतन्याहू सरकार के इस फैसले की कई देशों ने निंदा की है। सोमालिया ने इसे उसकी संप्रभुता पर जानबूझकर किया गया हमला बताया। सोमालिया के विदेश मंत्री ने कहा कि इस फैसले की वजह से क्षेत्र की शांति कमजोर होगी। वहीं, अफ्रीकी संघ ने कड़े शब्दों में इसकी निंदा करते हुए इस कदम को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सोमालिलैंड नामक क्षेत्र अफ्रीकी महासंघ के सदस्य सोमालिया का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा, “सोमालिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने की कोई भी कोशिश एक खतरनाक मिसाल का काम कर सकती है, जिससे पूरे महाद्वीप की शांति और स्थिरता पर दूरगामी प्रभाव होगा।

    गृहयुद्ध से जूझ रहे सोमालिया के मुख्य सहयोगी तुर्किए ने इजरायल के इस फैसले का विरोध किया है। तुर्किए के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल की यह पहल उसकी विस्तारवादी नीति से मेल खाती है। यह सोमालिया के आंतरिक मामलों में खुला हस्तक्षेप है। तुर्किए सोमालिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


    क्या है सोमालिलैंड की कहानी?

    अफ्रीकी महाद्वीप के हॉर्न पर बसे सोमालिया के अंतर्गत माने जाने वाले सोमालिलैंड को मान्यता देने वाला इजरायल पहला देश बना है। अभी तक इस क्षेत्र को किसी भी देश ने स्वतंत्र देश की मान्यता नहीं दी है। हालांकि, ब्रिटेन इथियोपिया, तुर्किए, यूएई,डेनमार्क, कीनिया और ताइवान जैसे देशों के साथ उसके अनौपचारिक राजनयिक संबंध हैं।

    ऐतिहासिक दृष्टि से 1960 के दशक में सोमालिलैंड को कुछ समय के लिए स्वतंत्रता मिली थी और उस समय इजरायल समेत कुल 35 देशों ने उसे मान्यता दी थी। लेकिन फिर बाद में वह स्वेच्छा से सोमालिया के साथ एकीकृत हो गया था। बाद में जब 1991 में सोमालिया गृहयुद्ध में उलझ गया तो सोमालिलैंड ने फिर से खुद को स्वतंत्र घोषित कर लिया। तब से लेकर अभी तक सोमालिलैंड एक अलग राज्य के रूप में ही काम कर रहा है। इसकी अपनी सरकार, अपनी मुद्रा और सुरक्षा बल है। सोमालिया के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के विपरीत सोमालिलैंड में अपेक्षाकृत शांत और स्थिर शासन देखने को मिलता है।


    क्या हैं इसके मायने?

    इजरायल का यह फैसला एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। विश्लेषकों के अनुसार, सोमालिलैंड की भौगौलिक स्थिति महत्वपूर्ण है। रेड सी के पास इजरायल को साझेदारों की जरूरत है। इन साझेदारों की मदद से वह भविष्य में यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा अब्राहम अकॉर्ड में एक और देश के शामिल होने से इजरायल को भी इसका लाभ होगा। हालांकि, इससे अन्य देश भड़क भी सकते हैं। वहीं,दूसरी ओर सोमालिलैंड पिछले 30 साल से अंतर्राष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इजरायल की तरफ से मिली यह मान्यता उसके लिए एक बड़ी संभावना की तरह है। मान्यता के बिना यह क्षेत्र गंभीर गरीबी से जूझ रहा है। क्योंकि इसे विदेशी लाभ भी लगभग न के बराबर मिलता है।

  • राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के सबसे छोटे नायक सरवन को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से किया सम्मानित

    राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के सबसे छोटे नायक सरवन को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से किया सम्मानित


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के सबसे छोटे नायक पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले सरवन सिंह (Sarwan Singh) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Children’s Award) से सम्मानित किया गया। दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने यह पुरस्कार दिया।

    फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव तारावाली के रहने वाले 10 वर्षीय सरवन सिंह ने मोर्चे पर तैनात जवानों के लिए बिना डरे पानी, चाय और लस्सी पहुंचाई और उनका हौसला बढ़ाया। मई 2025 में जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण थे। दुश्मन देश के ड्रोन लगातार सीमा में घुसपैठ कर रहे थे और हर वक्त खतरा बना हुआ था। ऐसे माहौल में लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे थे, लेकिन उस समय यह छोटा बच्चा अपनी जान की परवाह किए बिना सीमा की अग्रिम चौकियों की ओर निकल पड़ता था। वह रोज अपनी छोटी साइकिल से या पैदल ही भारतीय सेना के जवानों तक ठंडा पानी, बर्फ, दूध, लस्सी, चाय और जरूरी राशन पहुंचाता था। चिलचिलाती धूप, दुश्मन की निगरानी और हमले के खतरे के बीच भी वह पीछे नहीं हटा। यह पुरस्कार उन्हें उनकी अद्वितीय बहादुरी और भारतीय सेना के प्रति निष्ठा के लिए दिया गया।


    अवाॅर्ड मिलने पर बहुत खुश हूं: सरवन

    सम्मान पाने के बाद सरवन ने कहा कि जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो सेना के जवान हमारे गांव आए। मैंने सोचा कि मुझे उनकी सेवा करनी चाहिए। मैं उनके लिए रोज दूध, चाय, छाछ और बर्फ ले जाता था। मुझे पुरस्कार पाकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने कभी इसके बारे में सपने में भी नहीं सोचा था।


    पंजाब के सीएम ने दी बधाई

    पंजाब के सीएम भगवंत मान ने सरवन को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा कि पंजाबियों के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि आज राष्ट्रपति द्वारा हमारे फिरोजपुर के निवासी 10 वर्षीय सरवन सिंह को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हमारे गुरुओं द्वारा दी गई शिक्षाओं पर चलते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरवन सिंह ने घर से चाय-पानी और भोजन लाकर सैनिकों की जो सेवा की, वह काबिल-ए-तारीफ है। बच्चे के देश के प्रति हौसले और जज्बे को सलाम।


    सेना ने उठाया पढ़ाई का सारा खर्च

    सरवन के इस जज्बे को भारतीय सेना भी सलाम कर चुकी है। फिरोजपुर छावनी में एक समारोह के दौरान पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने बच्चे को सम्मानित भी किया था। साथ ही सेना ने उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का जिम्मा उठाया है। सरवन ने पहले कहा था कि वह भी बड़ा होकर सेना में भर्ती होना चाहता है। उसने कहा कि मैं बड़ा होकर फौजी बनना चाहता हूं और देश की सेवा करना चाहता हूं।

  • MP: गुना में 1 जनवरी से पुलिसकर्मियों को बर्थडे और मैरिज एनिवर्सरी पर मिलेगी छुट्टी, SP ने जारी किए नए नियम

    MP: गुना में 1 जनवरी से पुलिसकर्मियों को बर्थडे और मैरिज एनिवर्सरी पर मिलेगी छुट्टी, SP ने जारी किए नए नियम


    गुना।
    लंबी ड्यूटी और काम के बोझ से परेशान पुलिसवालों (Policemen) के लिए अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना जिले (Guna District) के पुलिसकर्मियों के लिए नया साल नई खुशियों की सौगात लेकर आएगा। गुना के पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी (SP Ankit Sony) ने पुलिस बल के लिए नए अवकाश नियम (New Leave Rules) जारी किए हैं। अब पुलिस कर्मियों को अपने, पत्नी और बच्चों के जन्मदिन के साथ-साथ शादी की सालगिरह पर एक दिन का अवकाश मिलेगा। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2026 से लागू होगी।

    बता दें कि, कठिन ड्यूटी और काम के दबाव के चलते पुलिसकर्मी अक्सर परिवार के खास मौकों में शामिल नहीं हो पाते थे। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए एसपी ने यह मानवीय निर्णय लिया है, ताकि जवान परिवार के साथ समय बिता सकें।

    नए आदेश के अनुसार, पुलिसकर्मी अपने जन्मदिन, जीवनसाथी के जन्मदिन, बच्चों के जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर एक दिन का अनिवार्य आकस्मिक अवकाश ले सकेंगे।

    आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी पुलिसकर्मी के परिवार में घनिष्ठ परिजन के निधन की स्थिति में मामले को संवेदनशील मानते हुए बिना किसी कागजी देरी के तुरंत अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। सभी थानों और कार्यालयों को कर्मचारियों की जन्मतिथि और विवाह वर्षगांठ का कैलेंडर बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि छुट्टी स्वीकृति में कोई बाधा न आए।

    एसपी अंकित सोनी के इस फैसले की जिले ही नहीं पूरे पुलिस विभाग में सराहना हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे जवानों का मनोबल बढ़ेगा और पुलिसकर्मियों व उनके परिवारों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

  • Delhi की फिजा फिर हुई जहरीली…. धुंध और कोहरे की मोटी परत छाई, AQI- 353 दर्ज

    Delhi की फिजा फिर हुई जहरीली…. धुंध और कोहरे की मोटी परत छाई, AQI- 353 दर्ज


    नई दिल्ली।
    देश की राजधानी (Capital) में हवा (Air) की गति धीमी होने और तापमान गिरने के कारण शुक्रवार को हवा एक बार फिर से खराब से बेहद खराब श्रेणी (Worst Category) में पहुंच गई। जो शनिवार को भी बेहद खराब श्रेणी (Worst Category) में बरकरार है। आज फिर सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे की मोटी परत से हुई, जिससे चलते विजिबिलिटी (Visibility) बेहद कम हो गई। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, शनिवार सुबह राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 353 दर्ज किया गया है। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है।

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली के अलीपुर में एक्यूआई 377, आनंद विहार में एक्यूआई 410, अशोक विहार में 388, आया नगर में 272, बवाना में 400, बुराड़ी में 342, चांदनी चौक इलाके में 380 एक्यूआई दर्ज किया गया है।

    वहीं, डीटीयू में 402, द्वारका सेक्टर 8 इलाके में 366, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 इलाके में 259, आईटीओ में 379, जहांगीरपुरी में 415, लोधी रोड 270, मुंडका 377, नजफगढ़ में 271, नरेला में 408, पंजाबी बाग में 361, आरकेपुरम 363, रोहिणी 409, सोनिया विहार 370, विवेक विहार 424, वजीरपुर में 397 दर्ज किया गया है।


    क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

    यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है। 101-200 का मतलब वायु प्रदूषण का स्तर मध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब और 301 से 400 के बीच का अर्थ वायु गुणवत्ता की बेहद खराब श्रेणी को दर्शाता है। 401 से 500 की श्रेणी में वायु की गुणवत्ता गंभीर बन जाती है। ऐसी स्थिति में इंसान की सेहत को नुकसान पहुंचता है। पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह जानलेवा है।

  • Rajasthan: चूरू में ट्रेलर और कार के बीच सीधी भिड़ंत…5 लोगों की मौत, तीन घायल

    Rajasthan: चूरू में ट्रेलर और कार के बीच सीधी भिड़ंत…5 लोगों की मौत, तीन घायल


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) राजस्थान के चूरू जिले (Churu District) में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे (Road Accident) ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सांडवा थाना क्षेत्र में ट्रेलर और एक एसयूवी की आमने-सामने टक्कर (collision Trailer and an SUV) में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, हादसा इतना भीषण था कि एसयूवी में सवार चार लोगों की मौके पर ही जान चली गई।

    सांडवा थाना प्रभारी चौथमल ने बताया कि एसयूवी में सवार लोग किसी पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए सांडवा आए थे। काउंसलिंग के बाद सभी लोग वापस लालगढ़ लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया। टक्कर के बाद वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।


    तीन घायलों को बीकानेर रेफर

    मृतकों की पहचान उमेद सिंह (55), प्रह्लाद सिंह (35), दलिप सिंह (25) सभी निवासी लालगढ़, राजू कंवर (40) निवासी श्यामसर (नागौर) और नारायण राम (60) के रूप में हुई है। नारायण राम ने इलाज के दौरान बीकानेर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। हादसे में घायल तीन लोगों को पहले सांडवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बीकानेर रेफर कर दिया गया।

    मामले की जांच जारी
    पुलिस ने बताया कि ट्रेलर चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं। फिलहाल मृतकों के शवों को सांडवा सीएचसी के शवगृह में पोस्टमॉर्टम के लिए रखा गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

  • विजय हजारे ट्रॉफी में बड़ा हादसा रोहित शर्मा का साथी खिलाड़ी अस्पताल में भर्ती; जानें क्या हुआ

    विजय हजारे ट्रॉफी में बड़ा हादसा रोहित शर्मा का साथी खिलाड़ी अस्पताल में भर्ती; जानें क्या हुआ


    नई दिल्ली । मुंबई के प्लेयर अंगक्रिश रघुवंशी विजय हजारे ट्रॉफी में उत्तराखंड के खिलाफ मुकाबले में बुरी तरह चोटिल हो गए. वह अपनी गर्दन भी नहीं मोड़ पा रहे थे स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल्दी ही स्ट्रेचर मैदान पर पहुंचा और उन्हें उसपे बाहर ले जाया गया. अंगक्रिश को जयपुर के अस्पताल में भर्ती किया गया है.
    कैच लेते हुए चोटिल हुए अंगक्रिश रघुवंशी
    मुंबई बनाम उत्तराखंड मैच जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेला जा रहा है जिसका लाइव प्रसारण या लाइव स्ट्रीमिंग नहीं हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक कैच के प्रयास में अंगक्रिश रघुवंशी ने डाइव लगाई इस दौरान उनकी गर्दन में चोट लगी. वह गर्दन नहीं मोड़ पा रहे थे फिर उन्हें स्ट्रेचर की मदद से बाहर ले जाया गया. इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं.
    अंगक्रिश रघुवंशी मुंबई टीम में शामिल हैं उत्तराखंड के खिलाफ उनका बल्ला नहीं चला. ओपन करते हुए उन्होंने 20 गेंदों में 11 रन बनाए थे. रोहित शर्मा भी इसी टीम में शामिल हैं वह आज खाता भी नहीं खोल पाए और अपनी पहली ही गेंद पर कैच आउट हो गए. इसके बाद मुशीर खान 55 और सरफराज खान 55ने अर्धशतकीय पारियां खेलकर टीम को संभाला. अंत में हार्दिक तोमर ने 93 और शम्स मुलानी ने 48 रन की पारी खेलकर टीम को 300 के पार पहुंचाया.

    उत्तराखंड के लिए ओपनर बल्लेबाज युवराज चौधरी ने 96 रनों की अच्छी पारी खेली जगदीशा सुचित ने अर्धशतक 51लगाया लेकिन ये जीत के लिए काफी नहीं रहा. अंगक्रिश रघुवंशी की चोट साधारण नहीं लग रही है संभव है कि उन्हें कई समय के लिए क्रिकेट से दूर रहना होगा. हालांकि आधिकारिक अपडेट के बाद ही उनकी चोट के बारे में स्थिति साफ होगी.

  • रक्त संचार बेहतर कर भरपूर एनर्जी देता है वृश्चिकासन अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ

    रक्त संचार बेहतर कर भरपूर एनर्जी देता है वृश्चिकासन अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ


    नई दिल्ली । व्यस्त दिनचर्या और कार्य का बढ़ता तनाव शरीर के साथ-साथ मन को भी शीघ्र बीमारियों की चपेट में ले लेता है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने का सबसे प्रभावी तरीका है योगासनों को दिनचर्या में शामिल करना। ऐसा ही एक बेहतरीन आसन है वृश्चिकासनजिसे स्कॉर्पियन पोज भी कहा जाता है। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर बिच्छू की आकृति जैसा बन जाता है। इसके अभ्यास से शारीरिक मजबूतीलचीलापन और मानसिक शांति मिलती है।
    मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसारवृश्चिकासन के रोजाना अभ्यास से शरीर को एक-दो नहींकई लाभ मिलते हैं। वृश्चिकासन या स्कॉर्पियन पोज एक इनवर्टेड बैकबेंड आसन हैजिसमें कोहनियों पर संतुलन बनाते हुए पैरों को सिर की ओर झुकाया जाता है। यह आसन कंधोंबाजुओंपीठ और कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। योग एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ता हैजिससे कमर दर्द और पीठ की समस्याओं में राहत मिलती है। साथ हीयह पेट की मांसपेशियों को खींचता हैपाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। वृश्चिकासन एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है।

    यह मस्तिष्क में रक्त संचार सुधारता हैजिससे स्मरण शक्ति और फोकस बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह आसन हृदय के लिए भी लाभकारी हैक्योंकि इनवर्टेड पोजिशन में रक्त प्रवाह संतुलित होता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इस आसन को करने के लिए सबसे पहले मयूरासन की स्थिति में आएं। कोहनियों को कंधों के नीचे रखें और हथेलियों से जमीन को पकड़ें। शरीर को ऊपर उठाते हुए पैरों को सीधा रखें। अब धीरे-धीरे रीढ़ को झुकाते हुए पैरों को सिर की ओर लाएंताकि पैरों की उंगलियां सिर को छूने की कोशिश करें।

    संतुलन बनाए रखें और गहरी सांस लें। शुरुआत में 10-20 सेकंड तक रुकेंफिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। अभ्यास के बाद शवासन या बालासन में विश्राम करें। वृश्चिकासन उन्नत आसन हैइसलिए शुरुआती लोग योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें। एक्सपर्ट बताते हैं कि कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। जैसे हाई ब्लड प्रेशरहृदय रोगचक्कर आने की समस्यागर्भावस्था या पीठ-कमर में चोट वाले लोग इसे न करें। वार्म-अप जरूर करेंजैसे डॉल्फिन पोज या प्लैंक। अगर गर्दन या कंधों में दर्द हो तो न करें। गलत तरीके से करने पर चोट लग सकती है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील


    अयोध्या । बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग का मामला गरमा गया है। इस घटना को लेकर अयोध्या के संत समाज ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। संत समाज का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। सीताराम योग सदन मंदिर के महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने बांग्लादेश में जारी हिंसा को अमानवीय बताया और कहा कि बांग्लादेश के जिहादी लोग हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढकर अपना निशाना बना रहे हैं और ये पूरे हिंदू धर्म पर हमला है।

    उन्होंने कहा कि पहले दीपू चंद्र दास को मारा और आग लगा दीफिर एक और हिंदू शख्स को मारा और एक छोटी बच्ची को भी नहीं छोड़ा। वहां की सरकार जिहादियों की तरह काम करती है और बांग्लादेश को एक इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहती है। उन्होंने आगे पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि इसका असर भारत पर देखने को भी मिलेगा। अब समय आ गया है कि सरकार को बांग्लादेश के बॉर्डर खोल देने चाहिए और वहां फंसे हिंदुओं को बचाना चाहिए। जैसे पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया थावैसे ही बांग्लादेश के कट्टरपंथियों को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन चलाना चाहिए।

    अयोध्याधाम के साकेत भवन मंदिर के सीताराम दास जी महाराज ने भी अपील की है कि केंद्र सरकार सेना और सशस्त्र बल का सहारा लेकर हिंदुओं को बचाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में इंसानियत नहीं बची है और मैं पीएम से निवेदन करता हूं कि राफेलतेजस और ब्रह्मोस क्या कर रहे हैं? अभी तक भारत में बांग्लादेश को मिला लेना चाहिए था और कड़ा सबक सिखाना चाहिए। बता दें कि बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीटा और फिर पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इस घटना के सात दिन बाद एक अन्य हिंदू युवक को भी भीड़ ने मार डाला। 29 साल के अमृत मंडल उर्फ सम्राट को गांव की भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया।

  • बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा

    बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा


    नई दिल्ली । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने 17 सालों के बाद घर वापसी की है। रहमान ने घर लौटने पर मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए देश के लोगों का दिल से शुक्रिया अदा किया। दूसरी ओर बांग्लादेश में हफ्तेभर में लगातार दूसरे अल्पसंख्यक हिंदू की हत्या का मामला सामने आया है। इन मुद्दों को लेकर पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने आईएएनएस से खास बातचीत की।

    पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने कहाकुछ हफ्तों में हिंदू युवक की हत्या की यह दूसरी घटना सामने आई हैजिसमें ज्यादातर सांप्रदायिक नफरत की वजह से हत्या की गई है। इससे कई तरह की चिंताएं पैदा हुई हैं। सबसे पहलेइससे पता चलता है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा पक्की करने के लिए संघर्ष कर रही है।

    उन्होंने आगे कहादूसरा यह बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में गहरी पैठ जमाए हुए ‘इस्लामवाद’ को दिखाता हैजिसमें पार्टियां अपने विरोधियों से ज्यादा मुस्लिम समर्थक और कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैं। तीसराइससे यह सवाल उठता है कि क्या 12 फरवरी के चुनाव के बाद सांप्रदायिक दुश्मनी की यह लहर कम हो जाएगी या अगर ये ताकतें सत्ता में आती हैंतो क्या हालात और बिगड़ सकते हैं।

    तारिक रहमान की वापसी को लेकर महेश सचदेवा ने कहा17 साल के निर्वासन के बादतारिक रहमान बांग्लादेश लौट आए हैं। इस बात का चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता हैक्योंकि 12 फरवरी के चुनाव में बीएनपी को सबसे आगे देखा जा रहा है। उन्होंने सुलह वाली बातें कहीइस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश मुसलमानों और ईसाइयों समेत सभी का है। निर्वासन के दौरान देश के विकास की तारीफ की और अवामी लीग सरकार के सुधारों को भी माना। जानकार बांग्लादेश की मौजूदा उथल-पुथल के बीच भारत और उनके आर्थिक और सामाजिक एजेंडे पर नरम रुख पर नजर रख रहे हैं।

    बता देंढाका नॉर्थ सिटी यूनिट ने पुरबाचल इलाके में जुलाई 36 एक्सप्रेसवे पर बीएनपी ने सफाई अभियान चलाया। इस सड़क का इस्तेमाल तारिक रहमान की रैली के लिए किया गया था। जुलाई 36 एक्सप्रेसवे को 300-फीट रोड के नाम से जाना जाता है। सफाई अभियान के दौरान ढाका नॉर्थ सिटी कॉर्पोरेशन डीएसीसी के वर्करपार्टी कार्यकर्ता और 300 किराए के सफाई कर्मचारी शामिल रहे और कचरे-मलबे को हटाया।

    ढाका नॉर्थ बीएनपी के संयोजक अमीनुल हक ने इस अभियान का नेतृत्व किया। कचरे को जल्दी हटाने के लिए सोलह ट्रक किराए पर लिए गए। इसके अलावाराजधानी के अलग-अलग इलाकों से 300 सफाई कर्मचारी लाए गए। इस बीचडीएनसीसी के सफाई कर्मचारी भी सड़क से कचरा साफ करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।