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  • खेल हमारी संस्कृति का प्रमुख पक्ष, हमने बनाया है खेलों को शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    खेल हमारी संस्कृति का प्रमुख पक्ष, हमने बनाया है खेलों को शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेल हमेशा से हमारी भारतीय संस्कृति का एक अहम अंग रहा है। हमारे व्यक्तित्व के विकास में एक प्रमुख पक्ष के रूप में खेलों में हमारे जीवन को दिशा दी है। हमने खेलों को स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। हमारे खिलाड़ी प्राय: हर खेल में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खिलाड़ियों से आव्हान किया कि वे चाहे जिस किसी भी खेल के खिलाड़ी रहें, अपनी लगन और मेहनत से हमेशा अपना उत्कृष्ट देने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर में एक निजी स्कूल द्वारा आयोजित 7वें नेशनल रैंकिंग पिकलबॉल टूर्नामेंट-2025 को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश राज्य ऑलम्पिक एसोशिएशन के संरक्षक भी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिककाल से हमारी संस्कृति में खेलों का बड़ा योगदान रहा है। कई मामलों में भारतीयों ने अपने दौर से भी आगे बढ़कर विश्व में खेलों में नाम कमाया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के नवनिर्माण में खिलाड़ियों की भी अहम भूमिका है। खिलाड़ियों के योगदान से हम अपनी भावी पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक वातावरण तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल नए खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं, बल्कि खेल अधोसंरचना के विकास को भी नए आयाम मिल रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे तेज गति से औद्योगिक प्रगति करने वाला राज्य बन रहा है। औद्योगिक विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाईयों, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। देश को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश का सर्वाधिक योगदान होगा।

    निजी स्कूल के अध्यक्ष श्री स्वप्निल कोठारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुषार्थ से ही व्यक्तित्व का विकास होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल की रील से बाहर निकलें, मैदान में आकर परिश्रम करें, तभी वे देश के लिए पसीना और रक्त बहाने के योग्य बनेंगे। उन्होंने सभी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्प ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ में सक्रिय रूप से सहभागी बनकर अधिकतम योगदान देने की अपील की।

    कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट, विधायक श्री रमेश मेंदोला, श्री बलवंत, श्री गणेश अग्रवाल, श्री गोपाल अग्रवाल, श्री सुनील सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित थे। कार्यक्रम में विभिन्न खेलों में नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का सम्मान भी किया गया।

  • पेंच टाइगर रिज़र्व से राजस्थान में एक बाघिन का सफल स्थानांतरण

    पेंच टाइगर रिज़र्व से राजस्थान में एक बाघिन का सफल स्थानांतरण


    भोपाल ।
    पेंच टाइगर रिज़र्व, सिवनी मध्यप्रदेश से 3 वर्ष आयु की एक बाघिन का राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व में सफलतापूर्वक स्थानांतरण किया गया है। यह स्थानांतरण भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ।

    स्थानांतरण अभियान विगत एक माह से सुव्यवस्थित योजना एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के तहत संचालित किया जा रहा था। पेंच टाइगर रिज़र्व प्रबंधन द्वारा उपयुक्त बाघिन की पहचान कर उसे उन्नत एआई आधारित कैमरा ट्रैप एवं मोशन सेंसर कैमरों के माध्यम से निरंतर ट्रैक एवं मॉनिटर किया गया। इस उद्देश्य से क्षेत्र में लगभग 50 कैमरे स्थापित किए गए थे।

    अभियान का समन्वय राजस्थान वन विभाग के साथ निकट सहयोग में किया गया। श्री सुगनाराम जाट, मुख्य वन संरक्षक, राजस्थान तथा डॉ. तेजिंदर, पशु चिकित्सक, विगत एक माह से इस अभियान का समन्वय कर रहे थे एवं पिछले 8 दिनों से पेंच टाइगर रिज़र्व में उपस्थित रहकर अभियान की सतत निगरानी कर रहे थे।

    यह स्थानांतरण कार्य फील्ड डायरेक्टर श्री देवप्रसाद जे. के सहयोग एवं उप संचालक श्री रजनीश कुमार सिंह, पेंच टाइगर रिज़र्व के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

    बाघिन का निश्चेतन डॉ. अखिलेश मिश्रा एवं डॉ. प्रशांत द्वारा वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन ट्रस्ट की टीम के साथ तथा डॉ. काजल एवं डॉ. अमोल (वेटरनरी कॉलेज, जबलपुर एवं फील्ड बायोलॉजिस्ट श्री अनिमेष चव्हाण के सहयोग से किया गया।

    पेंच टाइगर रिजर्व से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व स्थानांतरण के दौरान पेंच टाइगर रिज़र्व से मिशन लीडर सहायक संचालक सुश्री गुरलीन कौर (आईएफएस), वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. मिश्रा, पशु चिकित्सक डॉ. प्रशांत देशमुख (वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन ट्रस्ट) तथा रेंज अधिकारी श्री लोकेश कुमार चौधरी, और दोनों प्रदेशों की टीम के साथ एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा बाघिन के सुरक्षित स्थानांतरण हेतु गए, जिससे अंतर-राज्यीय समन्वय एवं संचालन की प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सकी।

    इस अभियान की सफलता में पेंच टाइगर रिज़र्व के कुरई एवं रुखड़ रेंज के मैदानी अमले का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। संबंधित कर्मचारियों द्वारा प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक, दिन में दो बार कैमरा ट्रैप की जांच, नियमित गश्त तथा चिन्हित बाघिन की गतिविधियों के संकेतों की सतत खोज कर अथक प्रयास किए गए।

    यह सफल स्थानांतरण अंतर-राज्यीय समन्वय, भारतीय वायुसेना के सहयोग तथा वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन के माध्यम से बाघ संरक्षण को सुदृढ़ करने और विभिन्न टाइगर लैंडस्केप में आनुवंशिक विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

  • पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी आधुनिक भारत के विकास की आधारशिला : उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन

    पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी आधुनिक भारत के विकास की आधारशिला : उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन


    भोपाल! उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि स्व. श्री अटलजी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार और मिशन थे। उनके कर्म, आदर्श और सुशासन की दृष्टि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक प्रकाश हैं। वे रविवार को इंदौर में आयोजित भारत रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्व. श्री अटल जी का जीवन ऐसे ग्रंथ की भाँति था, जिसका प्रत्येक पृष्ठ नैतिकता, उत्कृष्टता और राष्ट्रधर्म की राह दिखाता है। स्व. श्री अटल जी केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि वे कवि, चिंतक, अद्भुत नेतृत्व गुणों से संपन्न, विनम्र, संवेदनशील और स्वाभिमानी राष्ट्रभक्त थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्व. श्री अटलजी का जीवन विचारों की दृढ़ता, राष्ट्रधर्म और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट समर्पण का अनुपम उदाहरण है। उनका व्यक्तित्व ऐसा था जिसने हर काल और हर युग में भारतीय राजनीति को दिशा दी। उनकी राजनीतिक यात्रा भारतीय लोकतंत्र की प्रेरक गाथा है।

    देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर इंदौर में ‘शून्य से शतक’ कार्यक्रम का गरिमामय रूप से आयोजन किया गया। इस गरिमामय समारोह में देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चार प्रतिष्ठित विद्वानों को ‘अटल अलंकरण’ से अलंकृत किया।

    उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि मां अहिल्या की पावन धरती पर आकर उन्हें विशेष प्रसन्नता है। उन्होंने अटल फाउंडेशन के मंच से स्व. श्री अटल जी के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्व. श्री अटल जी संवाद, समावेशी विकास और मानवीय सुशासन में विश्वास रखते थे। सांसद, कवि और प्रधानमंत्री—हर भूमिका में उन्होंने सार्वजनिक विमर्श को गरिमा दी और सिद्ध किया कि राजनीति सिद्धांतनिष्ठ और करुणामय हो सकती है। उन्होंने अटल सरकार की प्रमुख उपलब्धियों प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, दिल्ली मेट्रो, नए राज्यों का गठन (झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड) तथा पोखरण परमाणु परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने आधुनिक भारत की नींव मजबूत की। उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने कहा कि स्व. श्री अटल जी की विरासत को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं और देश को विकसित भारत–2047 के लक्ष्य की ओर दृढ़ता से अग्रसर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्व. श्री अटल जी भले हमारे बीच शारीरिक रूप से न हों, लेकिन उनके आदर्श सदैव हमारे हृदयों में जीवित रहेंगे और राष्ट्र को दिशा देते रहेंगे।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल का प्रेरक संबोधन

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने अटल जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी के पावन अवसर पर विचार अभिव्यक्त करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व और हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि स्व. श्री अटल जी की जन्म शताब्दी केवल पुण्य स्मरण का प्रसंग नहीं, बल्कि उनके विराट व्यक्तित्व, उच्च आदर्शों और दूरदर्शी नेतृत्व से प्रेरणा प्राप्त करने का पावन क्षण है। उन्होंने स्वयं को भाग्यशाली बताते हुए कहा कि उन्हें स्व. श्री अटल जी के सानिध्य में कार्य करने का अवसर मिला, जहाँ उनके महान आभामंडल में रहकर उन्हें करीब से देखने, समझने और उनसे प्रेरित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि स्व. श्री अटल जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को कुछ शब्दों में समेटना संभव नहीं है, वे एक विराट व्यक्तित्व और एक चलता-फिरता महाकाव्य थे। उनकी वाणी में ओज था, जो जनमानस में ऊर्जा और राष्ट्रभाव का संचार करती थी। वे असंख्य कार्यकर्ताओं के लिए प्रकाश-पुंज थे। उनका जीवन ऐसे ग्रंथ की भाँति था, जिसका प्रत्येक पृष्ठ नैतिकता, उत्कृष्टता और राष्ट्रधर्म की राह दिखाता है। स्व. श्री अटल जी केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि वे कवि, चिंतक, अद्भुत नेतृत्व गुणों से संपन्न, विनम्र, संवेदनशील और स्वाभिमानी राष्ट्रभक्त थे। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने गठबंधन राजनीति के दौर में भी संवाद, समन्वय और समानता के उच्च आदर्श प्रस्तुत किए, जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में मील का पत्थर हैं। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि यदि हम स्व. श्री अटल जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में देश और समाज के लिए योगदान कर सकें, तो वही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

     युगपुरूष थे अटल जी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर इंदौर में अटल फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि अटल जी ऐसे व्यक्तित्व रहे, जिन्होंने जीवन के प्रत्येक क्षण में देश को गौरवान्वित करने के कार्य किये। भारतीय राजनीति में अटल जी एक युगपुरुष के समान रहे हैं। प्रधानमंत्री रहते हुए देश को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाने की उनकी दूरदृष्टि अद्वितीय रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल जी ने भारतमाता और लोकतंत्र को गौरवान्वित किया। पहली बार संयुक्तराष्ट्र संघ में हिंदी में संबोधन देकर देश की इच्छाशक्ति और भाषा तक को नायाब बनाया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. अटल जी ने नेता प्रतिपक्ष की पवित्र भूमिका निभाई। 50 वर्ष तक इस भूमिका में रहे है। आपातकाल में भी बिना संकोच के साहित्य के माध्यम से देश में शुचिता और स्वाभिमान का भाव जागृत करने में भूमिका निभाई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति के शिखर पुरूष, राजनीति के अजातशत्रु और विचारों की दृढ़ता रखते हुए वे भारतीय मर्यादा के प्रतीक बने। भारत रत्न श्री अटल वाजपेयी जी को हमारे बीच के कई लोगों ने देखा भी है। वास्तव में वे एक ऐसा व्यक्तित्व थे, जिसने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में अपनी हर एक जगह महत्ता स्थापित की। प्रारंभ में अटल जी की संघ के एक प्रचारक के रूप में पहचान बनी थी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत माता के चरणों में सतत नमन करने वाले, अपने जीवन को न्यौछावर करने वाले अटल जी ने पत्रकार के रूप में भी पहचान बनाई। जनसंघ के बाद जनता पार्टी और फिर भारतीय जनता पार्टी तक हर दौर में अटल जी की यात्रा अद्वितीय रही है। विशेष रूप से भारतीय लोकतंत्र के लिए लोकसभा में बोलने वाला ऐसा व्यक्तित्व जिसकी दहाड़ से हर प्रधानमंत्री अपने आप अपने कर्तव्य के प्रति सचेत होता था और तारीफ करता था कि हमें गर्व है हमारी संसद में अटल जी जैसा व्यक्तित्व मौजूद है। वास्तव में ऐसे लोगों से दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र गौरवान्वित होता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल जी का लगातार 50 वर्ष तक विपक्षी नेता के रूप में बोलते रहना आज के युग में कई लोगों के लिए आश्चर्य की बात होगी। विशेष रूप से उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के रूप में एक पवित्र पद का धारण किया था। जब-जब देश को आवश्यकता पड़ी चाहे किसी काल में कोई विशेष अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा हो, उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती थी। जब भी वे विदेश गए भारत माता को सदैव गौरवान्वित किया। लोकतंत्र को पूरे आनंद के साथ अनुभव करते हुए पूरे देश को आनंद में डुबाने का काम किया। यह हम लोगों के लिए सीख है। पहली बात संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी का गुलदस्ता देखने को मिला। राष्ट्रभाषा हिन्दी को विश्व स्तर पर गौरवान्वित करने का मौका किसी ने दिया तो वे वाजपेयी जी ही थे। अटल जी का कितना जीवन अलग-अलग प्रकार का है। कोई सोच ही नहीं सकता था। बांग्लादेश की सीमाओं पर लड़ने वाली सेनाओं के मनोबल को बढ़ाने का कार्य भी किया। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री को गौरवान्वित करने के लिए मां जगदम्बा के समान शक्ति की साधना करने के उस भाव को जगाते हुए हमारी सेनाओं और पूरे देश का मनोबल उन्होंने बढ़ाया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपातकाल लागू करना लोकतंत्र का गला घोंटने वाली घटना थी। इस कठिन दौर में भी बगैर संकोच के साथ अटल जी ने श्री आडवाणी के साथ अनेक मंचों यहां तक की अपनी कविताओं के माध्यम से दिए गए सहयोग को यादगार बनाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कई दलों के साथ सरकार बनाना और सरकार को चलाना, आसान नहीं था। यहीं नहीं सरकार चलाने में पवित्रता रखना साधारण बात नहीं थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल जी के मन में सदैव पवित्रता का भाव रहता था। सरकार जाए तो चली जाए, लेकिन मूल्यों से वे कभी भी समझौता नहीं करते थे। उन्होंने सरकार चलाने के साथ परमाणु बनाने के संबंध में जिस प्रकार दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय देकर निर्णय लिया वह भारत को परमाणु शक्ति बनाकर स्वाभिमान के साथ जीने के अधिकार का बहुत बड़ा उदाहरण है। अटल जी ने अनेक धमकियों के बावजूद परमाणु परीक्षण किया। यह अटल जी ही कर सकते थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 25 दिसंबर को जन्म शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर ग्वालियर से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के औद्योगिक निवेशों/विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण स्व. श्री अटल जी को समर्पित किया जाएगा, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि स्व. श्री अटल जी मध्यप्रदेश की धरती से निकले ऐसे महापुरुष हैं, जिनका योगदान विश्व लोकतंत्र को गौरव प्रदान करता है।

    समारोह के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु द्वारा प्रेषित शुभकामना संदेश का वाचन भी कार्यक्रम में किया गया।

    स्व. श्री अटल जी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में पूरे देश में वर्षभर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में वर्ष के समापन से पूर्व इंदौर में ‘शून्य से शतक’ कार्यक्रम का आयोजन कर उनके विचारों, योगदान और व्यक्तित्व का स्मरण किया गया।

    पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सत्यनारायण जटिया ने स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व की जानकारी देते हुए कविता पाठ के माध्यम से स्व अटलजी का स्मरण किया।

    इन विभूतियों को मिला ‘अटल अलंकरण’

    इस अवसर पर श्री सत्यनारायण सत्तन (प्रसिद्ध कवि), श्री सत्यनारायण जटिया (पूर्व केंद्रीय मंत्री), श्री संजय जगदाले (भारतीय क्रिकेट टीम चयन समिति के पूर्व चयनकर्ता) तथा श्री पारंग शुक्ला (सागर) को ‘अटल अलंकरण’ से सम्मानित किया गया। समारोह में स्व. श्री अटल जी के जीवन पर आधारित एक भावपूर्ण लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। साथ ही, अटल जी से जुड़े संस्मरणों पर आधारित पुस्तक सदा अटल महाग्रंथ के तृतीय संस्करण के कवर पेज तथा केलेण्डर का विमोचन भी किया गया। अटल फाउंडेशन की श्रीमती माला तिवारी वाजपेई ने स्वागत भाषण दिया।

    कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, सांसद श्री शंकर लालवानी, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव एवं अटल फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती माला वाजपेयी तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन के मुख्य आतिथ्य में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर डेली कॉलेज, इंदौर में आयोजित ‘शून्य से शतक: एक शताब्दी अटल भारत की’ स्मरणोत्सव समारोह में अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ अभिषेक तिवारी और अन्य परिजन भी उपस्थित थे।

  • दार्जिलिंग में घूमने लायक है ये 6 खूबसूरत जगह…यादगार ट्रिप के लिए जरूर जाएं..

    दार्जिलिंग में घूमने लायक है ये 6 खूबसूरत जगह…यादगार ट्रिप के लिए जरूर जाएं..


    नई दिल्ली / 
    गर्मियों की छुट्टी में अगर आप भी कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको दार्जिलिंग जरूर जाना चाहिए .ये शहर औऱ यहां पर मौजूद एक से बढ़कर एक खूबसूरत स्थल आपके ट्रिप को यादगार बना देंगे
    दार्जिलिंग में घूमने के लिए शानदार जगहें
    आप दार्जिलिंग जाएं तो नाइटेंगल पार्क जरूर जाएं. पर्यटक यहां से कंचनजंगा पर्वतमाला के भव्य दृश्य को देख सकते हैं. यहां पर आकर आप प्रकृति का आनंद आराम से ले सकते हैं.घूम रॉक दार्जिलिंग का सबसे आकर्षक व्यू प्वाइंट है. इस जगह से बालसान घाटी नजर आती है. अगर आप दार्जिलिंग की खूबसूरती को करीब से देखना चाहते हैं तो घूम रॉक जरूर जाइए .बतासिया लूप नहीं घूमा तो फिर दार्जिलिंग में मानो कुछ भी नहीं घुमा. यह एक रेलवे ट्रैक में बड़ी लूप है, जिसमें एक रनिंग टॉय ट्रेन 360 डिग्री पर घूमती है.
    दार्जिलिंग की खूबसूरती देखने का इससे बेहतर तरीका और हो ही नहीं सकता. इस जगह को घूमने का सबसे अच्छा मौका अप्रैल से लेकर जून के महीना के बीच होता है.क्योंकि देश में जब खूब गर्मी पड़ती है तब दार्जिलिंग का तापमान काफी कम होता है.दार्जिलिंग के सबसे खूबसूरत पर्यटक स्थलों में से एक है विक्टोरिया वॉटरफॉल. यहां पर्यटकों को चारों ओर प्रकृति के खूबसूरत नजारे ही नजर आएंगे.
    दार्जिलिंग में टाइगर हिल घूमने की सबसे खूबसूरत जगह है. 8442 फीट की ऊंचाई पर मौजूद ये जगह आपका मन मोह लेगी. बर्फ से ढकी हुई पहाड़ियां पर्यटकों को खूब लुभाती है.वहीं आप यहां से कंचनजंगा का खूबसूरत नजारा देख पाएंगे. यहां आने वाले पर्यटक खासकर यहां का सूर्योदय देखने के लिए सुबह 4 बजे से ही इकट्ठा होते हैं.सेंथल झील दार्जिलिंग की सबसे खूबसूरत स्थलों में से एक है. इस जगह पर लोग पिकनिक मनाने आते हैं. यहां पर शांति और सुकून इस कदर है कि एक बार आने के बाद यहां से आपका जाने का मन ही नहीं करेगा.वहीं रॉक गार्डन भी बहुत ही सुंदर जगह है. ये गार्डन पहाड़ों और चट्टानों को काटकर बनाया गया है, तो अगर आप कभी दार्जिलिंग जाते हैं तो इस जगह पर जरूर जाएं.

  • गुना में भीषण सड़क हादसा जन्मदिन समारोह से लौट रही कार पेड़ से टकराई दो की मौत आठ घायल

    गुना में भीषण सड़क हादसा जन्मदिन समारोह से लौट रही कार पेड़ से टकराई दो की मौत आठ घायल


    गुना । गुना जिले में मंगलवार रात करीब 2 बजे धरनावदा के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ। एक फोर व्हीलर तेज गति से अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे एक पेड़ से टकरा गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि कार में सवार 12 लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई जबकि आठ अन्य घायल हो गए।

    मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति

    मृतकों की पहचान लाल सिंह 37 निवासी उकाबद खुर्द और माया कंजर पत्नी रामदास निवासी बिलौरी चिंता कटारा के रूप में हुई है। वहीं घायल होने वालों में मोहन पुत्र बाबूलाल नरेंद्र लोधा चंचल बाई अरविंद लोधा फूल सिंह रायना बाई नगमा कंजर और रूप सिंह शामिल हैं।हादसा इतना गंभीर था कि वाहन की हालत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी स्थिति का इलाज चल रहा है।

    हादसे के कारण और प्रशासन की कार्रवाई

    प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि कार की गति बहुत तेज थी और संभवत: चालक का संतुलन बिगड़ने के कारण यह दुर्घटना हुई। पुलिस और प्रशासन ने घटना स्थल पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी घायलों का इलाज जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज गति और लापरवाही की वजह से इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हो रही है और सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन को और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा की अहमियत को उजागर करता है और यह बताता है कि सड़क पर चलने के दौरान हमें पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।

  • सतना में मंदाकिनी नदी पर अवैध उत्खनन जल संसाधन विभाग की आड़ में हो रहा है काले कारोबार

    सतना में मंदाकिनी नदी पर अवैध उत्खनन जल संसाधन विभाग की आड़ में हो रहा है काले कारोबार


    सतना । सतना जिले में मंदाकिनी नदी जो कि धार्मिक सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आस्था की प्रतीक मानी जाती है एक बार फिर अवैध उत्खनन के चलते विवादों में आ गई है। मोहकमगढ़ पुल के नीचे भारी मशीनों से नदी का सीना छलनी किया जा रहा था जो एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। खास बात यह है कि यह उत्खनन जल संसाधन विभाग की परियोजना के नाम पर किया जा रहा था।

    सूत्रों के अनुसार जल संसाधन विभाग द्वारा मंदाकिनी नदी में घाट निर्माण के लिए सीमित खनन की अनुमति ली गई थी। लेकिन पीपीएस कंपनी के ठेकेदार ने इस अनुमति का दुरुपयोग करते हुए नदी किनारे से पत्थर और मुरुम का अवैध उत्खनन शुरू कर दिया। आरोप हैं कि यह सब कार्य जल संसाधन विभाग के एसडीओ पुष्पेंद्र खरे के मौखिक निर्देश पर हो रहा था।

    प्रशासन की कार्रवाई और संदिग्ध पहलू

    स्थानीय लोगों द्वारा सूचना मिलने पर चित्रकूट तहसीलदार मौके पर पहुंचे और खनन में लगे पोकलैंड मशीन को जप्त कर लिया। हालांकि ट्रक मौके से गायब हो गए जिससे यह संदेह पैदा हो गया कि मामले में पहले से सूचना थी और यह पूरी घटना किसी संरक्षण के तहत हो रही थी। सबसे हैरान करने वाली बात तब सामने आई जब प्रशासन के अधिकारियों के मौके पर पहुंचते ही संबंधित जिम्मेदारों के मोबाइल फोन बंद हो गए। यह घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि क्या यह पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित और विभागीय मिलीभगत का हिस्सा है?

    इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता और जिम्मेदार अधिकारियों की संलिप्तता के आरोप उभर रहे हैं। यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आस्था और पर्यावरण से जुड़े इस अहम स्थान की अवैध उत्खनन के चलते हानि हो रही है? क्या सरकारी योजनाओं की आड़ में इस तरह के काले कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है?

  • भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की

    भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की


    भोपाल । भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए रेल किराए में वृद्धि का ऐलान किया है जिसका असर भोपाल से देश के प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। यह वृद्धि 2 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से की गई है और इसमें 5 प्रतिशत जीएसटी और राउंड-ऑफ का असर भी देखा जाएगा। इस बदलाव के चलते यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।
    यदि आप भोपाल से नई दिल्ली की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 15 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। मुंबई जाने पर किराए में करीब 18 रुपये की वृद्धि होगी। पुणे के लिए यह वृद्धि लगभग 19 रुपये नागपुर के लिए 8 रुपये और इंदौर तथा जबलपुर के लिए यह वृद्धि लगभग 6-6 रुपये होगी। लखनऊ जाने वाले यात्रियों को करीब 12 रुपये अतिरिक्त देना होगा।

    इस बदलाव से रेल यात्रा के खर्च में थोड़ा सा इजाफा होगा लेकिन यह वृद्धि यात्रा की सुविधाओं और रेलवे के रख-रखाव में हो रहे सुधारों को ध्यान में रखते हुए की गई है। यात्री अब इन बदलावों के साथ यात्रा की योजना बनाते हुए अतिरिक्त खर्च के बारे में सोच सकते हैं।इस नई वृद्धि से जहां एक ओर यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा वहीं दूसरी ओर रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और सुविधाओं के विकास के लिए यह कदम उठाया गया है।

  • नए साल से पहले पूर्व अग्निवीरों के लिए बड़ी सौगात BSF कांस्टेबल भर्ती में 50% कोटा MHA का नोटिफिकेशन जारी

    नए साल से पहले पूर्व अग्निवीरों के लिए बड़ी सौगात BSF कांस्टेबल भर्ती में 50% कोटा MHA का नोटिफिकेशन जारी


    नई दिल्ली । नए साल से पहले पूर्व अग्निवीरों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की गई है। केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल में कांस्टेबल भर्ती के लिए पूर्व अग्निवीरों का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है जो पूर्व अग्निवीरों के लिए खुशखबरी लेकर आया है।

    क्या है यह नया बदलाव

    केंद्र सरकार ने BSF जनरल ड्यूटी कैडर नॉन-गैजेटेड भर्ती नियम 2015 में संशोधन किया है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स एक्ट 1968 की धारा 141 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए MHA ने पूर्व अग्निवीरों के लिए भर्ती में 50% कोटा लागू किया है। यह संशोधन “बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स जनरल ड्यूटी कैडर नॉन-गैजेटेड भर्ती संशोधन नियम 2025 के तहत किया गया है और यह नियम 18 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है।

    पूर्व अग्निवीरों के लिए क्या लाभ होगा

    अब तक पूर्व अग्निवीरों को BSF कांस्टेबल भर्ती में केवल 10% आरक्षण मिलता था लेकिन इस नए निर्णय के बाद उन्हें भर्ती प्रक्रिया में 50% तक का आरक्षण मिलेगा। इसका मतलब है कि पूर्व अग्निवीरों को BSF में कांस्टेबल पदों पर भर्ती होने के अवसरों में आधी जगह दी जाएगी जिससे उन्हें ज्यादा अवसर मिलेंगे और उनकी भर्ती प्रक्रिया को भी तेज किया जाएगा।

    केंद्र सरकार का यह कदम क्यों

    यह कदम पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार की एक बड़ी पहल मानी जा रही है क्योंकि इस फैसले से न केवल उनकी मेहनत और योगदान को सम्मान मिलेगा बल्कि वे सेना के बाद भी अन्य सरकारी नौकरियों में अपने अनुभव और कौशल का लाभ उठा सकेंगे। पूर्व अग्निवीरों को मिली यह राहत उनके भविष्य को बेहतर बनाने में सहायक होगी और उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें एक बेहतर करियर की दिशा मिलेगी।

    पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार का यह कदम एक सकारात्मक बदलाव है जो उनके भविष्य के लिए अहम साबित हो सकता है। BSF के कांस्टेबल पदों पर 50% कोटा के साथ नए साल से पहले ही इस फैसले के लागू होने से उन्हें अपने करियर में नई दिशा मिल सकती है।

  • माइग्रेन से राहत पाने के लिए दवा के बिना करें लाइफस्टाइल में ये बदलाव

    माइग्रेन से राहत पाने के लिए दवा के बिना करें लाइफस्टाइल में ये बदलाव


    नई दिल्ली । माइग्रेन सिरदर्द का एक गंभीर रूप है जो सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित कर सकता है। यह न केवल व्यक्ति की कार्य क्षमता को प्रभावित करता है बल्कि जीवनशैली को भी चुनौतीपूर्ण बना सकता है। माइग्रेन में सिर के एक हिस्से में तेज दर्द मतली उल्टी तेज रोशनी और शोर से परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं। यह आम सिरदर्द से कहीं अधिक होता है और कई बार माइग्रेन के लक्षण सामान्य सिरदर्द से बढ़कर हो सकते हैं। हालांकि माइग्रेन का इलाज दवाओं से किया जाता है लेकिन अगर कुछ लाइफस्टाइल बदलाव किए जाएं तो बिना दवा के भी राहत पाई जा सकती है।

    माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने वाली आदतें  अनहेल्दी डाइट

    कुछ खाने-पीने की चीजें माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं जैसे चॉकलेट कैफीन शराब और कुछ प्रोसेस्ड फूड्स। अगर आप यह महसूस करते हैं कि इन चीजों के सेवन से आपका माइग्रेन बढ़ता है तो इन्हें अपनी डाइट से हटा दें।

    नींद की कमी

    कम नींद या अत्यधिक नींद भी माइग्रेन का कारण बन सकती है। यदि आप नियमित रूप से नींद की कमी महसूस करते हैं तो दिन में कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेना आवश्यक है।

    तनाव

    मानसिक तनाव माइग्रेन के दर्द को और बढ़ा सकता है। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी है। काम के दबाव और तनाव से बचने के लिए ध्यान योग या गहरी सांस लेने की तकनीकें अपनाई जा सकती हैं।

    माइग्रेन से राहत के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव  नियमित व्यायाम 

    हल्का-फुल्का व्यायाम जैसे योग स्विमिंग या चलना माइग्रेन से राहत देने में मदद कर सकता है। व्यायाम से शरीर में एंडोर्फिन  रिलीज होते हैं जो दर्द को कम करने में मदद करते हैं।

    हाइड्रेशन 

    शरीर में पानी की कमी से भी माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। दिनभर में पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। यदि शरीर में पानी की कमी होती है तो सिरदर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    सही खानपान

    सही और पोषण से भरपूर आहार लेना माइग्रेन की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। ताजे फल हरी सब्जियां साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। कैफीन और शराब से बचें।

    नींद का पैटर्न ठीक करें

    एक नियमित सोने का समय बनाएं और रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें। सही समय पर सोना और जागना आपके शरीर को आराम देने के लिए महत्वपूर्ण है।

    तनाव कम करें

    तरीका है तनाव कम करना। ध्यान प्राणायाम गहरी सांस लेने की तकनीकें और हल्की-फुल्की चहलकदमी करने से मानसिक तनाव कम हो सकता है। इसके अलावा आपको जो पसंदीदा एक्टिविटी करें जैसे किताबें पढ़ना या संगीत सुनना वह भी तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।

    कर्मस्थल पर आराम

    लंबे समय तक कंप्यूटर या स्मार्टफोन का उपयोग माइग्रेन का कारण बन सकता है। इसलिए यदि आप लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करते हैं तो आंखों को आराम देने के लिए बीच-बीच में ब्रेक लें। माइग्रेन एक गंभीर समस्या हो सकती है लेकिन अगर आप अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे बदलाव करते हैं तो आप बिना दवा के भी इससे राहत पा सकते हैं। सही खानपान पर्याप्त नींद नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवन के साथ माइग्रेन के दर्द को कम किया जा सकता है। इन सरल उपायों को अपनाकर आप बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं और माइग्रेन को नियंत्रित कर सकते हैं।

  • कोहरे में क्यों कैंसल हो जाती है फ्लाइट, जब आसमान में नहीं होता कोई ट्रैफिक..

    कोहरे में क्यों कैंसल हो जाती है फ्लाइट, जब आसमान में नहीं होता कोई ट्रैफिक..


    नई दिल्ली /राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत में कई राज्यों में कड़ाके की ठंड के साथ घना कोहरा छाया हुआ है. हालात ऐसे हैं कि कई जगह कम विजिबिलिटी के कारण फ्लाइट और ट्रेनों के कैंसल होने की खबरें सामने आ रही है. इस कंडीशन को देखते हुए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री, एयर इंडिया, इंडिगो और दिल्ली एयरपोर्ट ने शुक्रवार के लिए यात्रियों के लिए विशेष ट्रैवल एडवाइजरी भी जारी की थी. इनमें फ्लाइट के लेट होने या कैंसल होने की आशंका जताई गई थी.ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल भी उठने लगा है कि जब आसमान में ट्रैफिक नहीं होता तो कोहरे की वजह से फ्लाइट्स क्यों रोकी जाती है. चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि कोहरे की वजह से फ्लाइट्स क्यों कैंसल की जाती है, जबकि आसमान में कोई ट्रैफिक नहीं होता है.

    कोहरा कैसे प्रभावित करता है फ्लाइट ऑपरेशन?

    दरअसल, फ्लाइट्स भले ही आसमान में उड़ती है, लेकिन उनका संचालन पूरी तरह विजिबिलिटी और एयरपोर्ट के ग्राउंड सिस्टम पर निर्भर करता है. पायलट नक्शा, इंस्ट्रूमेंट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देशों के आधार पर विमान को कंट्रोल करते हैं. वहीं जब घना कोहरा छा जाता है तो एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी तेजी से घट जाती है. वहीं कई मामलों में विजिबिलिटी 600 मीटर से भी कम रह जाती है, जिससे सुरक्षित उड़ान संचालन मुश्किल हो जाता है.

    कोहरे में फ्लाइट की सबसे बड़ी चुनौती

    कई लोग मानते हैं कि कोहरे के दौरान फ्लाइट के लिए सबसे मुश्किल काम टेक ऑफ या लैंडिंग होता है, लेकिन एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कोहरे में सबसे बड़ी चुनौती रनवे पर विमान को टैक्सी करना होता है. टैक्सीइंग के दौरान पायलट को रनवे के संकेत, लाइट्स और दूसरी फ्लाइट की कंडीशन साफ दिखनी जरूरी होती है और जब विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है, तो ग्राउंड मूवमेंट खतरनाक हो सकता हो जाता है. इस वजह से फ्लाइट्स को रोका या डिले किया जाता है. दरअसल जब फ्लाइट्स रनवे पर पहुंचती है तो पायलट को कुछ तय बिंदुओं को देख पाना जरूरी होता है. हर एयरपोर्ट और फ्लाइट के लिए न्यूनतम विजिबिलिटी के अलग-अलग मानक भी तय होते हैं, यह मानक पूरे नहीं होते तो फ्लाइट को टेकऑफ की अनुमति नहीं मिलती.

    लैंडिंग के समय में भी बढ़ जाता है खतरा

    लैंडिंग को पायलट के लिए सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण स्टेप माना जाता है. लैंडिंग के समय फ्लाइट की गति काफी ज्यादा होती है और बहुत सटीक नियंत्रण की जरूरत होती है. नियमों के अनुसार मैन्युअल लैंडिंग के लिए कम से कम 550 मीटर की विजिबिलिटी जरूरी होती है, जब विजिबिलिटी इससे भी कम हो जाती है तो फ्लाइट को होल्ड पर रखा जाता है या फिर डाइवर्ट या कैंसिल कर दिया जाता है. कोहरे में फ्लाइट कैंसिल करने का फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाता है. कम विजिबिलिटी की कंडीशन में एक छोटी सी चूक भी बड़ा हादसा बन सकती है.