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  • कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई

    कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के उत्पीड़न के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद समाज कार्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को मंजूरी दे दी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गए, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के मामले में एक प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

    विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान महिला और पुरुष शोधार्थियों द्वारा डॉ. मोहम्मद नईम के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित जांच रिपोर्ट परिषद के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके अलावा शिक्षक आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामले की रिपोर्ट पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    कार्य परिषद ने उपलब्ध तथ्यों और जांच समिति की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद मामले को गंभीर मानते हुए डॉ. नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकृति प्रदान की। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान में सुरक्षित, पारदर्शी और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या उत्पीड़न के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    बैठक में विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से संबंधित एक अन्य जांच रिपोर्ट भी रखी गई। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी पुष्पा गौतम के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी एक वर्ष की वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। परिषद ने माना कि संस्थान की गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।

    कार्य परिषद की बैठक में आगामी दीक्षांत समारोह से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। परिषद ने 13 अगस्त को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में प्रसिद्ध चित्रकार दिनेश सोनी को मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए कुलाधिपति के पास भेजा जाएगा।

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट के आधार पर लिए गए हैं। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने बताया कि कार्य परिषद के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में डॉ. मोहम्मद नईम के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकार किया गया। वहीं प्रशासनिक अधिकारी के मामले में भी जांच रिपोर्ट के आधार पर वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया।

    विश्वविद्यालय का कहना है कि संस्थान में छात्रों और शोधार्थियों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने संकेत दिया कि भविष्य में भी किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय को विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन, जवाबदेही और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत, खैराड़ा-मानिकपुर डबल लाइन परियोजना का उच्च अधिकारियों ने लिया जायजा

    बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत, खैराड़ा-मानिकपुर डबल लाइन परियोजना का उच्च अधिकारियों ने लिया जायजा

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में रेलवे आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित खैराड़ा-मानिकपुर रेलवे दोहरीकरण परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करने के लिए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कार्य पूरे करने तथा गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    निरीक्षण दल में झांसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुरुद्ध कुमार, मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त प्रंजीव सक्सेना, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अजीत यादव तथा प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता संजीत कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न हिस्सों का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की।

    संयुक्त निरीक्षण के दौरान टीम ने खैराड़ा से मानिकपुर रेलखंड के अंतर्गत आने वाले खुरहंड, अतर्रा और बदौसा रेलवे स्टेशनों का दौरा किया। यहां रेलवे भवनों, प्लेटफॉर्मों, नई रेल लाइनों और अन्य निर्माणाधीन संरचनाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा आवश्यक सुधार संबंधी सुझाव दिए।

    निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि परियोजना से जुड़े प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किए जाएं और सभी गतिविधियां तय समयसीमा के भीतर पूरी हों। उन्होंने कहा कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य ही परियोजना की सफलता का आधार होगा।

    रेलवे अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दोहरीकरण कार्य पूरा होने के बाद इस रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन पहले की तुलना में अधिक सुचारु और तेज होगा। वर्तमान में एकल लाइन होने के कारण कई स्थानों पर ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है, जिससे परिचालन प्रभावित होता है। दोहरीकरण के बाद ऐसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

    इस परियोजना के पूरा होने से यात्रियों के साथ-साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी गति मिलेगी। रेल यातायात की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था में सुधार होगा और परिचालन अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बन सकेगा। इसके अलावा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को भी बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलने की संभावना है।

    रेलवे प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के परिवहन ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा, जबकि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति प्राप्त होगी। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि निर्धारित समय में परियोजना पूरी होने के बाद यह रेलखंड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत उपलब्धि साबित होगा।

  • ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की पहल तेज, हंस आजीविका परियोजना में 10 गांव शामिल, स्वरोजगार को मिलेगा नया विस्तार

    ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की पहल तेज, हंस आजीविका परियोजना में 10 गांव शामिल, स्वरोजगार को मिलेगा नया विस्तार

    नई दिल्ली ।  ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से द हंस फाउंडेशन की ओर से संचालित हंस आजीविका परियोजना के तहत चित्रकूट विकासखंड की 10 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विकासखंड पहाड़ी परिसर में एक दिवसीय समन्वय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए अवसरों से जोड़ना, स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाना तथा ग्राम स्तर पर रोजगार और आय के स्थायी स्रोत विकसित करने के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रेरित किया गया।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीडीओ संजय कुमार पांडेय और सहायक विकास अधिकारी पंचायत भूपेंद्र द्विवेदी ने ग्रामीण विकास में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। अधिकारियों ने महिलाओं से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने और स्वरोजगार गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

    द हंस फाउंडेशन के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर संतोष कुमार मिश्रा ने संस्था की विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि संगठन स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से विकासखंड पहाड़ी की 10 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है, जहां स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, आय के नए साधन विकसित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

    परियोजना के लिए चयनित ग्राम पंचायतों में चौरा, देवल, कुचारम, बकटा बुजुर्ग, नांदी, तौरा, इटौरा, बाबूपुर, छछेरिहा बुजुर्ग और बुढ़ा सेमरवारा शामिल हैं। इन गांवों में महिलाओं को समूह आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञ श्रीकांत ने महिलाओं को पशुपालन और जैविक खेती के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट जैसी तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत कम की जा सकती है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। साथ ही बकरी पालन और केंचुआ पालन जैसी गतिविधियों को ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बताते हुए इनसे जुड़े अनुदान और तकनीकी सहयोग की जानकारी भी साझा की गई।

    कार्यक्रम में ब्लॉक समन्वयक आशाराम, फील्ड कोऑर्डिनेटर निलेश्वरी तथा विषय विशेषज्ञ सरोज कुमार ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं, स्वयं सहायता समूहों के गठन, प्रशिक्षण, आजीविका संवर्धन और सरकारी योजनाओं के समन्वय पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में बड़ी संख्या में महिला समूहों की सदस्य, ग्राम प्रधान और ग्रामीण उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर परियोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और उम्मीद जताई कि यह पहल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी विकसित करेगी।

  • चित्रकूट में पीएम स्वनिधि योजना की समीक्षा, एडीएम ने बैंकों और निकायों को लक्ष्य पूरा करने के दिए सख्त निर्देश

    चित्रकूट में पीएम स्वनिधि योजना की समीक्षा, एडीएम ने बैंकों और निकायों को लक्ष्य पूरा करने के दिए सख्त निर्देश

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडरों तक इसका लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चित्रकूट में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए कि वे समन्वय बनाकर पात्र वेंडरों की पहचान करें तथा विशेष शिविर लगाकर उन्हें शीघ्र ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करें। प्रशासन का उद्देश्य योजना के निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करना और छोटे कारोबारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

    जिला प्रशासन के निर्देश पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता एडीएम न्यायिक एवं परियोजना निदेशक डूडा अरुण कुमार ने की। बैठक में सभी नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों, विभिन्न बैंक शाखाओं के प्रबंधकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान पीएम स्वनिधि योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए लंबित मामलों का भी आकलन किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

    बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि नगर निकाय अपने सीमा विस्तारित क्षेत्रों के साथ-साथ सब्जी और फल मंडियों में विशेष कैंप आयोजित करें। इन शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र स्ट्रीट वेंडरों की पहचान कर उनका ऑनलाइन आवेदन कराया जाए, ताकि प्रथम चरण के ऋण का लाभ जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जा सके। प्रशासन का मानना है कि मौके पर ही आवेदन प्रक्रिया पूरी होने से लाभार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और योजना का दायरा तेजी से बढ़ेगा।

    बैंक शाखा प्रबंधकों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नगर निकायों की ओर से भेजे गए ऑनलाइन आवेदनों का शीघ्र परीक्षण कर समय पर ऋण स्वीकृत किया जाए। इसके साथ ही स्वीकृत मामलों में जल्द ऋण वितरण सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बैंक और नगर निकायों के बीच बेहतर समन्वय से योजना के लक्ष्य आसानी से पूरे किए जा सकते हैं।

    बैठक के दौरान योजना की वर्तमान प्रगति पर भी चर्चा हुई और उन क्षेत्रों की पहचान की गई, जहां अभी अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं हो पाए हैं। अधिकारियों ने ऐसे इलाकों में विशेष अभियान चलाने तथा पात्र लाभार्थियों को योजना की जानकारी देकर उन्हें आवेदन के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। इसके अलावा आवेदन प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं के त्वरित समाधान के भी निर्देश दिए गए।

    प्रशासन ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए स्वरोजगार को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से बिना किसी बड़ी औपचारिकता के कार्यशील पूंजी के रूप में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे छोटे कारोबारी अपने व्यवसाय का विस्तार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को आगे के चरणों में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने की सुविधा भी मिलती है।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी संबंधित विभाग नियमित रूप से योजना की प्रगति की निगरानी करेंगे और लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों से अपेक्षा जताई कि वे संयुक्त प्रयासों के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र स्ट्रीट वेंडरों को योजना से जोड़ते हुए उन्हें समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएं, ताकि उनका रोजगार मजबूत हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सके।

  • चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की शोध टीम ने रचा नया इतिहास, एआई आधारित पर्सनलाइज्ड लर्निंग डिवाइस को मिला सरकारी पंजीकरण

    चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की शोध टीम ने रचा नया इतिहास, एआई आधारित पर्सनलाइज्ड लर्निंग डिवाइस को मिला सरकारी पंजीकरण

    नई दिल्ली । महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय ने शिक्षा और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एक अभिनव शैक्षणिक उपकरण के डिज़ाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पंजीकरण प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि को देश में डिजिटल और व्यक्तिगत शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय की शोध क्षमता और नवाचार आधारित कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

    विश्वविद्यालय के शोधकर्ता डॉ. देव रस पाण्डेय और उनकी टीम द्वारा विकसित इस तकनीकी डिज़ाइन का नाम “एआई-इनहांस्ड एजुकेशनल डिवाइस फॉर पर्सनलाइज्ड लर्निंग” रखा गया है। यह उपकरण विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, अध्ययन की गति, रुचि और व्यक्तिगत आवश्यकताओं का कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से विश्लेषण करता है। इसके आधार पर यह प्रत्येक छात्र के लिए उपयुक्त अध्ययन सामग्री और सीखने का मार्ग तैयार करने में सक्षम है, जिससे शिक्षा अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बन सकती है।

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया है। कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार नवाचार आधारित अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नई तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार यह उपलब्धि शोध संस्कृति को मजबूत करने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को भी नई गति देगी।

    डॉ. देव रस पाण्डेय ने बताया कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण आधार बनने जा रही है। उनका कहना है कि यह तकनीक स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षा, अनुकूली शिक्षण प्रणाली और व्यक्तिगत अध्ययन मॉडल को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। यह उपकरण विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का निरंतर विश्लेषण कर उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में सक्षम होगा, जिससे सीखने की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ेगी।

    डॉ. पाण्डेय लंबे समय से कंप्यूटर साइंस और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान कर रहे हैं। उन्होंने क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल लाइब्रेरी, ऑपरेटिंग सिस्टम आधारित वर्चुअलाइजेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, साइबर सुरक्षा, वाहन डेटा संरक्षण, डीप लर्निंग, ऑटोनॉमस रोबोटिक्स, हेल्थकेयर डेटा गुणवत्ता सुधार तथा एआई आधारित तकनीकों जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शोध कार्य किए हैं। उनके अनुसंधान का उद्देश्य आधुनिक तकनीक को समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए अधिक उपयोगी बनाना रहा है।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पंजीकृत डिज़ाइन भविष्य की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण तथा तकनीक-सक्षम शिक्षा पहुंचाने में इस प्रकार की एआई आधारित प्रणालियां उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं। इससे विद्यार्थियों को उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार सीखने का अवसर मिलेगा और शिक्षा अधिक समावेशी एवं प्रभावी बन सकेगी।

    विश्वविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि पर डॉ. देव रस पाण्डेय और उनकी शोध टीम को बधाई दी है। संस्थान ने विश्वास व्यक्त किया है कि यह नवाचार भारत की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, तकनीक-संचालित और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। साथ ही यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी उत्कृष्टता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी मजबूत आधार प्रदान करती है।

  • लिस्टिंग के दूसरे ही दिन दबाव में आया SBI Funds Management का शेयर, 600 रुपये से नीचे फिसलने से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    लिस्टिंग के दूसरे ही दिन दबाव में आया SBI Funds Management का शेयर, 600 रुपये से नीचे फिसलने से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के दूसरे ही कारोबारी दिन एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में मजबूत स्तर पर खुलने के बावजूद पूरे सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा और अंततः शेयर 600 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। इस गिरावट ने बाजार सहभागियों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, क्योंकि कंपनी ने एक दिन पहले ही प्रीमियम पर बाजार में प्रवेश किया था।

    कारोबार की शुरुआत में शेयर सकारात्मक स्तर पर खुला, लेकिन दिन बढ़ने के साथ इसमें लगातार कमजोरी देखने को मिली। सत्र के दौरान शेयर निचले स्तर तक पहुंच गया और अंत में लगभग उसी दायरे में बंद हुआ, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार बंद होने तक निवेशकों की ओर से बिकवाली का दबाव बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नई सूचीबद्ध कंपनियों में शुरुआती दिनों में मुनाफावसूली के कारण इस तरह की अस्थिरता सामान्य मानी जाती है।

    कंपनी के शेयरों ने सूचीबद्ध होने के पहले दिन निर्गम मूल्य के मुकाबले प्रीमियम के साथ शुरुआत की थी। सकारात्मक लिस्टिंग के बाद निवेशकों में उत्साह देखा गया, लेकिन दूसरे दिन कुछ निवेशकों ने मुनाफा वसूलना उचित समझा, जिसका असर शेयर की कीमत पर दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी नई सूचीबद्ध कंपनी के शेयर में शुरुआती कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान मांग और आपूर्ति के आधार पर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    इस बीच कंपनी के प्रमोटर भारतीय स्टेट बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कम करने की कोई योजना नहीं है। बैंक का कहना है कि सार्वजनिक निर्गम का उद्देश्य केवल कंपनी की विकास यात्रा में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना था, न कि अपनी हिस्सेदारी में कमी करना। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि प्रमोटर कंपनी लंबे समय तक अपने निवेश और रणनीतिक भागीदारी को बनाए रखने के पक्ष में है।

    बैंक प्रबंधन ने यह भी कहा कि कंपनी की सूचीबद्धता उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। उनका मानना है कि सार्वजनिक बाजार में आने से कंपनी की पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि होगी। इसके साथ ही मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस और पेशेवर प्रबंधन के आधार पर भविष्य में कंपनी के विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं।

    प्रबंधन के अनुसार कंपनी ने सूचीबद्ध होने से पहले ही कॉरपोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों को अपनाया था। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी साझेदार के साथ लंबे समय से चल रहा सहयोग कंपनी की कार्यप्रणाली और संचालन व्यवस्था को और मजबूत बनाता है। यही कारण है कि कंपनी भविष्य में अपने कारोबार के विस्तार और निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सूचीबद्ध कंपनी के प्रदर्शन का आकलन केवल शुरुआती एक-दो कारोबारी सत्रों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। लंबी अवधि में कंपनी की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन की रणनीति, उद्योग की संभावनाएं और समग्र बाजार परिस्थितियां शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की बजाय कंपनी के मूलभूत पक्षों और दीर्घकालिक विकास क्षमता पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

  • अन्ना आंदोलन से निकले नेताओं की बदली सियासी तस्वीर, सत्ता, संघर्ष और सामाजिक सक्रियता ने तय किए नए रास्ते

    अन्ना आंदोलन से निकले नेताओं की बदली सियासी तस्वीर, सत्ता, संघर्ष और सामाजिक सक्रियता ने तय किए नए रास्ते


    नई दिल्ली ।
    वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ अन्ना हजारे का जन आंदोलन देश के सबसे बड़े जनआंदोलनों में गिना जाता है। दिल्ली के रामलीला मैदान से उठी इस मुहिम ने तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दी और जनलोकपाल की मांग को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया। इस आंदोलन से कई ऐसे चेहरे उभरे जिन्होंने आगे चलकर भारतीय राजनीति, सामाजिक आंदोलनों और सार्वजनिक जीवन में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। करीब 15 वर्ष बाद इन प्रमुख चेहरों की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा पूरी तरह अलग दिशाओं में दिखाई देती है।

    अन्ना हजारे आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता रहे और उन्होंने आंदोलन समाप्त होने के बाद सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। उन्होंने महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि लौटकर ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और लोकायुक्त जैसे मुद्दों पर अपनी सक्रियता जारी रखी। समय-समय पर उन्होंने राज्य सरकारों से लोकायुक्त कानून लागू करने सहित विभिन्न जनहित विषयों पर आवाज भी उठाई, लेकिन चुनावी राजनीति में प्रवेश नहीं किया।

    अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन के बाद राजनीतिक विकल्प तैयार करने का निर्णय लिया और आम आदमी पार्टी की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया और कई वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे। हाल के विधानसभा चुनावों में सत्ता परिवर्तन के बाद वे विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।

    मनीष सिसोदिया भी आंदोलन से निकलकर आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। उन्होंने दिल्ली सरकार में शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों को लेकर काम किया, लेकिन बाद के वर्षों में विभिन्न कानूनी मामलों के कारण चर्चा में रहे। न्यायिक प्रक्रिया के बीच उनकी राजनीतिक सक्रियता भी लगातार बनी हुई है।

    किरण बेदी ने आंदोलन के बाद भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और बाद में पुडुचेरी की उपराज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी निभाई। प्रशासनिक अनुभव के आधार पर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका जारी रखी। वर्तमान समय में वे सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर अपनी राय रखती रहती हैं।

    कुमार विश्वास आंदोलन के दौरान अपने प्रभावशाली भाषणों और कविताओं के कारण चर्चित हुए। उन्होंने आम आदमी पार्टी की स्थापना में भी भूमिका निभाई, लेकिन बाद में मतभेदों के चलते अलग हो गए। वर्तमान में वे साहित्य, कवि सम्मेलनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय हैं तथा समय-समय पर समसामयिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं।

    योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने भी आंदोलन के बाद अलग राह चुनी। दोनों ने आम आदमी पार्टी से अलग होने के बाद सामाजिक आंदोलनों, लोकतांत्रिक सुधारों, किसानों के मुद्दों और न्यायिक पारदर्शिता जैसे विषयों पर काम जारी रखा। दोनों सार्वजनिक अभियानों और जनहित से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

    योग गुरु बाबा रामदेव ने आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का समर्थन किया था। बाद के वर्षों में उन्होंने योग, आयुर्वेद, स्वदेशी उत्पादों और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया। वे समय-समय पर राष्ट्रीय और आर्थिक मुद्दों पर भी अपनी राय व्यक्त करते रहे हैं।

    वरिष्ठ विधिवेत्ता शांति भूषण आंदोलन के कानूनी सलाहकारों में शामिल थे और जनलोकपाल विधेयक के प्रारूप तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनका निधन हो चुका है, लेकिन आंदोलन में उनके योगदान को आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं मेधा पाटकर ने आंदोलन के बाद भी सामाजिक संघर्षों, विस्थापितों, किसानों और आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रियता जारी रखी।

    अन्ना आंदोलन से जुड़े इन प्रमुख चेहरों की यात्रा यह दर्शाती है कि एक साझा उद्देश्य से शुरू हुआ जन आंदोलन समय के साथ कई अलग-अलग दिशाओं में विकसित हो सकता है। किसी ने सत्ता की राजनीति का रास्ता चुना, किसी ने सामाजिक आंदोलनों को प्राथमिकता दी, जबकि कुछ सार्वजनिक जीवन में अलग भूमिकाओं के साथ सक्रिय बने रहे। यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र में जन आंदोलनों के दीर्घकालिक प्रभाव और उनके विविध परिणामों की भी झलक प्रस्तुत करता है।

  • नेतन्याहू की गिरफ्तारी पर ममदानी का यू-टर्न, कानूनी अधिकार न होने की बात स्वीकार, फिर भी ICC वारंट लागू करने की उठाई मांग

    नेतन्याहू की गिरफ्तारी पर ममदानी का यू-टर्न, कानूनी अधिकार न होने की बात स्वीकार, फिर भी ICC वारंट लागू करने की उठाई मांग

    नई दिल्ली । न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर अपने पहले के चुनावी रुख में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कहा है कि उनके प्रशासन के पास नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कई बार दावा किया था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब कानूनी समीक्षा के बाद उन्होंने स्पष्ट किया है कि स्थानीय प्रशासन के अधिकार सीमित हैं और इस प्रकार की कार्रवाई उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।

    ममदानी ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उनके प्रशासन ने लागू कानूनों का विस्तृत अध्ययन किया और यह जांचने का प्रयास किया कि क्या न्यूयॉर्क शहर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) द्वारा जारी किसी गिरफ्तारी वारंट को स्वयं लागू कर सकता है। समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला कि नगर प्रशासन के पास ऐसा करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय में अंतिम अधिकार संघीय सरकार के पास है।

    हालांकि कानूनी सीमाओं को स्वीकार करने के बावजूद ममदानी ने अपने राजनीतिक रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई। उन्होंने दोहराया कि उनकी राय में बेंजामिन नेतन्याहू पर लगे आरोप गंभीर हैं और यदि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका की संघीय सरकार से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रियाओं के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाए और संबंधित वारंट के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए।

    ममदानी ने यह भी कहा कि जब सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए नेतन्याहू के न्यूयॉर्क आने की संभावना हो, तब संघीय प्रशासन को आवश्यक कानूनी विकल्पों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने अमेरिका से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के साथ सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की। हालांकि अमेरिका वर्तमान में आईसीसी का सदस्य नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर कानूनी और कूटनीतिक जटिलताएं बनी हुई हैं।

    इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा के दौरान किसी प्रकार की गिरफ्तारी नहीं होगी। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अमेरिकी भूमि पर रहते हुए इजरायली प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनके इस बयान के बाद ममदानी की नई टिप्पणी को राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ममदानी ने यह भी दोहराया कि वह नेतन्याहू की नीतियों के आलोचक बने हुए हैं और उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आईसीसी ने आरोप तय किए हैं तो न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि न्यूयॉर्क ऐसे किसी व्यक्ति का स्वागत नहीं करता जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा हो।

    दूसरी ओर, नेतन्याहू के कार्यालय ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की वैधता पर सवाल उठाए हैं। इजरायल की ओर से कहा गया कि आईसीसी का इजरायली नागरिकों या अमेरिकी नागरिकों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और उसके निर्णयों को स्वीकार नहीं किया जाता। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय न्याय, राष्ट्रीय संप्रभुता और स्थानीय प्रशासन के अधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का दिया हवाला

    छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का दिया हवाला

    नई दिल्ली । लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा को लेकर सदन में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान केवल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को बोलने का अवसर दिया गया, जबकि अन्य विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद सदन में कुछ समय के लिए तीखी बहस देखने को मिली।

    अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार यह पूरे देश के युवाओं का विषय है और सभी राजनीतिक दलों को इस पर अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस और भाजपा को बोलने का मौका दिया गया तो अन्य विपक्षी दलों को क्यों नहीं सुना गया। उन्होंने इसे संसदीय प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत से जुड़ा मुद्दा बताया।

    सपा प्रमुख ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और उनकी आवाज दबाने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना गया तो विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से उनके समर्थन में सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

    अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार को सदन के भीतर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए। उनके अनुसार यदि संसद में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता और सरकार खुलकर जवाब देती तो विपक्ष को अलग से विरोध प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल छात्रों की समस्याओं को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से रखना है।

    इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों ने चर्चा की इच्छा जताई है और सरकार भी इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय नियमों के तहत व्यवस्थित तरीके से ही चर्चा कराई जा सकती है और सदन की कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों के आपसी मतभेदों का समाधान अध्यक्ष के स्तर पर नहीं किया जा सकता।

    सदन में जारी बहस के बीच कुछ समय के लिए हंगामे जैसी स्थिति भी बनी। इसके बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। संसदीय कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। सरकार की ओर से यह दोहराया गया कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष ने मांग की कि चर्चा सभी दलों की भागीदारी के साथ कराई जाए।

    संसद के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान भी अखिलेश यादव ने अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संसद के भीतर छात्रों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करती तो विपक्ष को अलग से प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने युवाओं और छात्रों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि इन मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाधान खोजा जाना चाहिए।

    लोकसभा में हुई इस बहस के बाद छात्रों के मुद्दे, संसदीय प्रक्रिया और विपक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में मानसून सत्र के दौरान इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस होने की संभावना बनी हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं।

  • NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग

    NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NEET परीक्षा विवाद पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने आरोपों और मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है लेकिन सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रही है। राहुल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का मुक्की की और उन्हें घसीटा गया जिससे उनके मुंह से खून निकल आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनके कान में सरकार बदलने की बात कही।

    राहुल गांधी ने कहा कि NEET पेपर लीक का असर केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र और उनके परिवार इससे प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप था कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं लेकिन किसी भी बड़े मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी दिखाए और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे थे तब उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है न कि उन्हें दबाना।

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार NEET परीक्षा की तैयारी पर लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है। उनके अनुसार लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक आर्थिक और मानसिक संघर्ष करते हैं लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने उसे कमजोर किया है।

    इस दौरान राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। दूसरी मांग छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। तीसरी मांग प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे जवाबदेही तय करनी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष छात्रों की हर लोकतांत्रिक मांग के साथ खड़ा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा खत्म हो गया तो देश की प्रतिभा और विकास दोनों प्रभावित होंगे। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

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    Rahul Gandhi, NEET Paper Leak, Dharmendra Pradhan, Student Protest, Indian Politics