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  • बागपत में नम आंखों से अंतिम विदाई, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार

    बागपत में नम आंखों से अंतिम विदाई, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बुधवार को त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सुबह उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। श्मशान घाट पर पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और इसके बाद उनके बेटे अभिषेक ने मुखाग्नि देकर पिता को अंतिम विदाई दी।

    मंगलवार देर रात जब अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास बड़ौत पहुंचा, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। उनकी मां बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर बिलख पड़ीं। उन्होंने गाल सहलाकर आखिरी बार बेटे को दुलार किया और बार-बार “मेरे बच्चे” कहकर रोती रहीं। पत्नी कल्पना भी पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। बेटे अभिषेक ने मां को संभालने की कोशिश की, लेकिन खुद भी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और पिता के शव से लिपटकर रो पड़े।

    अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर त्रिपुरा से एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली लाया गया था। वहां से सड़क मार्ग से बागपत के बड़ौत स्थित उनके घर पहुंचाया गया। अंतिम यात्रा में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग शामिल हुए।

    इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री असीम अरुण ने भी परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अनुराग धनखड़ एक समर्पित और कुशल पुलिस अधिकारी थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मृत्यु के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष वेदपाल सहित कई स्थानीय लोगों ने भी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उनका कहना है कि इतने वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इसका निष्पक्ष और विस्तृत खुलासा होना चाहिए।

    गौरतलब है कि अनुराग धनखड़ का शव 20 जुलाई को त्रिपुरा पुलिस मुख्यालय में मिला था। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया है, हालांकि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही उनकी मौत के कारणों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

  • इंग्लैंड दौरे के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट, अनुष्का संग प्रेमानंद महाराज के दर्शन

    इंग्लैंड दौरे के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट, अनुष्का संग प्रेमानंद महाराज के दर्शन


    उत्तर प्रदेश । भारतीय क्रिकेट स्टार Virat Kohli और अभिनेत्री Anushka Sharma बुधवार तड़के वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने Premanand Maharaj के नए आश्रम यमुना विहार कुंज में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। दोनों सुबह करीब चार बजे आश्रम पहुंचे और सादगी के साथ नंगे पैर भीतर गए। लगातार बारिश के कारण रास्ते में कीचड़ था, ऐसे में विराट पूरे रास्ते अनुष्का का हाथ थामे चलते दिखाई दिए।

    आश्रम पहुंचने पर प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने दोनों का स्वागत किया। विराट और अनुष्का करीब एक घंटे तक आश्रम में रहे। बाहर निकलते समय विराट के माथे पर चंदन का तिलक था और उनके हाथ में प्रसाद भी दिखाई दिया। इसके बाद दोनों कार से लगभग 15 किलोमीटर दूर महाराज के गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम पहुंचे और वहां भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    आश्रम के बाहर दोनों को देखने के लिए श्रद्धालुओं और प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। विराट और अनुष्का ने चेहरे पर मास्क पहन रखा था तथा हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। सुरक्षा व्यवस्था के चलते किसी को उनके पास जाने की अनुमति नहीं दी गई।

    यह पहली बार नहीं है जब यह दंपती वृंदावन पहुंचा हो। दोनों अब तक आठ बार प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर चुके हैं। इस वर्ष यह उनकी चौथी यात्रा है। इससे पहले आईपीएल जीतने के बाद 2 जून को भी दोनों आश्रम पहुंचे थे, जहां उन्होंने करीब दो घंटे तक समय बिताया था।

    विराट कोहली हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने के बाद भारत लौटे हैं। तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने 144 रन बनाए, जिसमें निर्णायक मुकाबले में 74 रन की महत्वपूर्ण पारी भी शामिल रही। क्रिकेट व्यस्तताओं के बीच उनकी यह आध्यात्मिक यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत

    उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले दस दिनों से जारी बारिश के कारण प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेत, सड़कें और निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते दिखाई दिए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

    सोनभद्र जिले में घाघरा नदी के तेज बहाव ने जिला जेल को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बहा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। वहीं गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और चेतावनी स्तर के पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जिले की सभी बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 10 फीट ऊपर आ चुकी है। अस्सी घाट से नमो घाट तक करीब 50 छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    मौसम का असर राजधानी लखनऊ, नोएडा, कानपुर, आगरा और अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

    बारिश के बीच हादसों का सिलसिला भी जारी है। उन्नाव में तेज हवा के दौरान चलती बाइक पर अचानक पेड़ गिर गया, जिससे युवक की गर्दन टूट गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लगातार खराब मौसम के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को भी रेखांकित करती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में व्यापक बारिश हुई। अब मानसूनी ट्रफ दक्षिण की ओर खिसक रही है, जिससे अगले एक-दो दिनों में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होकर प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू कर सकता है।

  • ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

    ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं के बीच स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से ई10 मानक के अनुसार तैयार किए गए कुछ पुराने वाहनों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन को नुकसान पहुंचने या वाहन के बड़े पैमाने पर खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सरकार का कहना है कि इस विषय पर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों से मेल नहीं खाते और उपलब्ध तकनीकी जानकारी इसके विपरीत संकेत देती है।

    सरकार के अनुसार ई10 मानक के अनुरूप तैयार किए गए पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता में सामान्यतः लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है। हालांकि यह गिरावट सीमित मानी गई है और इसे वाहन की समग्र कार्यक्षमता पर गंभीर प्रभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इस बदलाव को केवल एथेनॉल मिश्रण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि माइलेज कई अन्य तकनीकी और परिचालन संबंधी कारणों से भी प्रभावित होता है।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन का वास्तविक माइलेज चालक की ड्राइविंग शैली, वाहन के नियमित रखरखाव, टायरों में सही हवा, व्हील अलाइनमेंट, इंजन की स्थिति और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसी अनेक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि किसी वाहन की ईंधन दक्षता में बदलाव दिखाई देता है तो उसके पीछे केवल ई20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने यह भी बताया कि ई20 पेट्रोल के कई तकनीकी लाभ हैं। इसमें पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक ऑक्टेन रेटिंग मिलती है, जिससे इंजन में बेहतर एंटी-नॉक प्रदर्शन प्राप्त होता है। इसके साथ ही ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है, जिससे इंजन का संचालन अधिक स्मूथ रहता है और एक्सीलरेशन भी बेहतर महसूस हो सकता है। सरकार का मानना है कि इन विशेषताओं के कारण आधुनिक वाहनों के लिए ई20 मिश्रित ईंधन एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहा है।

    हाल के दिनों में ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इंजन खराब होने तथा वाहनों को नुकसान पहुंचने जैसे कई दावे सामने आए थे। इन आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने दोहराया कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि ई20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन का इंजन व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ हो। सरकार का कहना है कि उपलब्ध तकनीकी परीक्षण और अनुभव ऐसे दावों की पुष्टि नहीं करते।

    इसी क्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी हाल ही में ई20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि यदि किसी वाहन को इस ईंधन से वास्तविक नुकसान हुआ हो तो उसका प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ई20 को लेकर कई भ्रामक दावे फैलाए जा रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना और पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करना है।

    सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी कारण ई20 पेट्रोल को लेकर वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी परीक्षणों के आधार पर लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो और उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

  • बिजली कारोबार में अदाणी पावर की शानदार छलांग, पहली तिमाही में रिकॉर्ड मुनाफा, बढ़ी बिक्री और विस्तार योजनाओं से भविष्य को मिली नई रफ्तार

    बिजली कारोबार में अदाणी पावर की शानदार छलांग, पहली तिमाही में रिकॉर्ड मुनाफा, बढ़ी बिक्री और विस्तार योजनाओं से भविष्य को मिली नई रफ्तार

    नई दिल्ली । अदाणी समूह की प्रमुख ऊर्जा कंपनी अदाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए कारोबार के कई प्रमुख मानकों पर नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 47.2 प्रतिशत बढ़कर 4,867 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 3,305 करोड़ रुपये था। कंपनी के अनुसार परिचालन क्षमता में सुधार, वित्तीय लागत पर प्रभावी नियंत्रण और लगातार जारी पूंजीगत निवेश के कारण यह उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकी।

    पहली तिमाही के दौरान कंपनी के कुल समेकित राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी का राजस्व 26.6 प्रतिशत बढ़कर 17,936 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 14,167 करोड़ रुपये था। प्रबंधन का कहना है कि बिजली की बिक्री में बढ़ोतरी और बेहतर औसत टैरिफ के कारण आय में यह मजबूत वृद्धि देखने को मिली। देश में बिजली की लगातार बढ़ती मांग ने भी कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती प्रदान की।

    अदाणी पावर ने परिचालन लाभ के मोर्चे पर भी नया इतिहास रचा है। कंपनी का समेकित निरंतर ईबीआईटीडीए 21.6 प्रतिशत बढ़कर 6,983 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो अब तक का सबसे अधिक तिमाही ईबीआईटीडीए है। ईंधन लागत में वृद्धि के बावजूद प्रभावी लागत प्रबंधन, उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग और परिचालन दक्षता के कारण कंपनी यह उपलब्धि हासिल करने में सफल रही।

    बिजली उत्पादन और बिक्री के क्षेत्र में भी कंपनी ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। पहली तिमाही में बिजली बिक्री 16.9 प्रतिशत बढ़कर 28.8 बिलियन यूनिट हो गई, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 24.6 बिलियन यूनिट थी। कंपनी का कहना है कि उत्पादन क्षमता में विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों से लगातार बढ़ती मांग ने बिक्री को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    पावर परचेज एग्रीमेंट के तहत बिजली की बिक्री में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। इस श्रेणी में बिक्री 30.3 प्रतिशत बढ़कर 24.5 बिलियन यूनिट तक पहुंच गई। वहीं प्रति यूनिट औसत टैरिफ 8.5 प्रतिशत बढ़कर 5.95 रुपये हो गया। मर्चेंट और शॉर्ट-टर्म बाजार में भी कंपनी को बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ, जहां औसत प्राप्ति 13.1 प्रतिशत बढ़कर 7.04 रुपये प्रति यूनिट रही। मजबूत बाजार मांग और अनुकूल व्यावसायिक परिस्थितियों का लाभ कंपनी को मिला।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस. बी. ख्यालिया ने कहा कि अदाणी पावर ने एक बार फिर अपनी लागत-कुशल उत्पादन क्षमता और परिचालन उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि कंपनी 45 गीगावाट उत्पादन क्षमता के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और विभिन्न नई परियोजनाओं पर निर्धारित समयसीमा के भीतर काम जारी है। उनका कहना है कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता का लगातार विस्तार कर रही है।

    कारोबार विस्तार की रणनीति के तहत कंपनी ने कई महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का अधिग्रहण भी किया है। कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के अंतर्गत स्वीकृत योजना के अनुसार कंपनी ने 180 मेगावाट क्षमता वाले चुर्क थर्मल पावर प्लांट के साथ जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड और प्रयागराज पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड में हिस्सेदारी हासिल की है। इसके अलावा कंपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय जलविद्युत परियोजनाओं में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है तथा भविष्य में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में संभावित अवसरों पर भी नजर बनाए हुए है। कंपनी का मानना है कि इन विस्तार योजनाओं से आने वाले वर्षों में उसकी उत्पादन क्षमता और बाजार में प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत होगी।

  • संसद की मर्यादा पर जेपी नड्डा का विपक्ष पर निशाना, कहा- लोकतांत्रिक परंपराओं का हो रहा उल्लंघन, चर्चा से नहीं भाग रही सरकार

    संसद की मर्यादा पर जेपी नड्डा का विपक्ष पर निशाना, कहा- लोकतांत्रिक परंपराओं का हो रहा उल्लंघन, चर्चा से नहीं भाग रही सरकार

    नई दिल्ली । राज्यसभा में बुधवार को विपक्ष के हंगामे और नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर जारी गतिरोध के बीच नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक संवाद का सर्वोच्च मंच है, लेकिन जिस तरह से सदन की कार्यवाही बाधित की जा रही है, उससे संसदीय मर्यादाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने दोहराया कि सरकार हर महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

    सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक सहित सभी संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराने में उसे कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि सरकार पारदर्शी तरीके से काम करने में विश्वास रखती है और हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन का सुचारु रूप से चलना भी आवश्यक है।

    इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से हंगामे के बजाय चर्चा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार मानसून सत्र की शुरुआत से ही इस विषय पर चर्चा के पक्ष में रही है। चर्चा किस नियम और प्रक्रिया के तहत होगी, इस पर सभी दलों के साथ सहमति बनाई जा सकती है, लेकिन पहले सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलनी चाहिए।

    सरकार का कहना है कि युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से सरकार अपनी ओर से उठाए गए कदमों और निर्णयों की जानकारी सदन के माध्यम से देश के सामने रखना चाहती है। इसके लिए सभी दलों का सहयोग आवश्यक बताया गया।

    जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सार्थक चर्चा से बचने का प्रयास कर रहा है और लगातार नारेबाजी के माध्यम से सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में बहस, तर्क और संवाद लोकतंत्र की मूल भावना हैं। यदि चर्चा की बजाय व्यवधान को प्राथमिकता दी जाएगी तो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर प्रभावी विमर्श संभव नहीं हो पाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। किसी भी विषय पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान संसदीय प्रक्रिया और संवाद के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए। उनका मानना था कि जनता की अपेक्षा भी यही है कि संसद में मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो और समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

    संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। विपक्ष इस मामले पर तत्काल चर्चा और सरकार से जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह सभी नियमों और संसदीय प्रक्रियाओं के तहत विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

    फिलहाल दोनों पक्षों के बीच चर्चा की प्रक्रिया और सदन की कार्यवाही को लेकर गतिरोध बना हुआ है। हालांकि सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह संवाद और बहस के माध्यम से सभी मुद्दों पर अपनी बात रखने तथा विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

    टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चतुर लेग स्पिनरों में शामिल युजवेंद्र चहल का सफर संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। आज बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में फंसाने वाले चहल कभी शतरंज की बिसात पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखते थे। आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें खेल बदलने पर मजबूर किया, लेकिन क्रिकेट में उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम भारतीय टीम के सफल स्पिनरों में शामिल हो गया।

    23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद जिले में जन्मे युजवेंद्र चहल बचपन से ही शतरंज के प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। उन्होंने अंडर-12 राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम की और जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

    हालांकि शतरंज में आगे बढ़ने के लिए लगातार आर्थिक सहयोग की जरूरत थी। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें इस खेल को छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में चहल खेतों में अभ्यास करते थे। उनकी इच्छा तेज गेंदबाज बनने की थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने लेग स्पिन गेंदबाजी अपनाई और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

    घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर चहल को वर्ष 2016 में भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे और इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

    चहल ने 1 फरवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए टी20 मुकाबले में इतिहास रच दिया। उन्होंने चार ओवर में केवल 25 रन देकर छह विकेट झटके और टी20 इंटरनेशनल में भारत की ओर से एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। उनका यह प्रदर्शन आज भी भारतीय टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में चहल ने भारत के लिए 72 वनडे मैचों में 121 विकेट और 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 96 विकेट हासिल किए हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विविधता और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में शामिल करती है।

    शतरंज की बिसात से क्रिकेट के मैदान तक का युजवेंद्र चहल का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने जयडेन लेनोक्स, दिग्गज स्पिनरों को पछाड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि

    'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने जयडेन लेनोक्स, दिग्गज स्पिनरों को पछाड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज में न्यूजीलैंड के युवा स्पिनर जयडेन लेनोक्स ने अपनी शानदार गेंदबाजी से सभी का ध्यान खींच लिया। हालांकि सीरीज का अंतिम मुकाबला न्यूजीलैंड हार गया, लेकिन टीम ने 3-2 से सीरीज अपने नाम की। इस सफलता में लेनोक्स की अहम भूमिका रही, जिन्होंने पूरी सीरीज में 14 विकेट लेकर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार अपने नाम किया।

    लेनोक्स की फिरकी के सामने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज पूरी श्रृंखला में संघर्ष करते नजर आए। पांच मुकाबलों में 14 विकेट लेने के साथ उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। वह अब एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने वाले स्पिनरों की सूची में पूर्व दिग्गज गेंदबाज अनिल कुंबले, शेन वॉर्न और शाहिद अफरीदी से आगे निकल गए हैं। इन तीनों महान स्पिनरों ने अपने-अपने करियर में किसी एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में 13-13 विकेट लिए थे, जबकि लेनोक्स ने 14 विकेट लेकर यह आंकड़ा पार कर दिया।

    इस प्रदर्शन के साथ लेनोक्स ने श्रीलंका के स्पिनर अकिला धनंजय की भी बराबरी कर ली है। धनंजय ने वर्ष 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में 14 विकेट हासिल किए थे। अब दोनों संयुक्त रूप से इस सूची में बराबरी पर हैं।

    एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड भारत के पूर्व लेग स्पिनर अमित मिश्रा के नाम दर्ज है, जिन्होंने एक श्रृंखला में 18 विकेट झटके थे। इस सूची में दूसरे स्थान पर भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव हैं, जिन्होंने एक वनडे सीरीज में 17 विकेट लेने का कारनामा किया था।

    सीरीज के पांचवें और अंतिम मुकाबले में भी लेनोक्स ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने 9 ओवर में केवल 35 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए और न्यूजीलैंड को मुकाबले में बनाए रखा। हालांकि वेस्टइंडीज ने शिमरॉन हेटमायर की नाबाद 69 रन और शेरफेन रदरफोर्ड की 61 रन की बेहतरीन पारियों की बदौलत 269 रन का लक्ष्य 47.3 ओवर में हासिल कर लिया।

    लेनोक्स के लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि न्यूजीलैंड को सीमित ओवरों के क्रिकेट में एक भरोसेमंद स्पिनर मिल गया है। उनकी नियंत्रण भरी गेंदबाजी और विकेट निकालने की क्षमता भविष्य में टीम के लिए बड़ी ताकत साबित हो सकती है।

  • सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत घरेलू सर्राफा बाजार के लिए तेज़ी भरी रही। सोने और चांदी की कीमतों में एक दिन के भीतर उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कीमती धातुओं के बाजार में फिर से हलचल बढ़ गई है। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम ₹1,43,404 तक पहुंच गई, जबकि चांदी का भाव बढ़कर ₹2,23,000 प्रति किलोग्राम हो गया। कीमतों में आई इस तेजी का असर देश के प्रमुख शहरों के खुदरा बाजारों में भी देखने को मिला, जहां सोना पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बिक रहा है।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने में ₹1,150 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी की कीमत ₹3,159 प्रति किलोग्राम बढ़ने के बाद नए स्तर पर पहुंच गई। विभिन्न शुद्धता वाले सोने के दामों में भी समान रूप से तेजी देखने को मिली। 22 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट सोने की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज होने से आभूषण बाजार और निवेशकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,44,370 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में इसकी कीमत ₹1,44,220 रही। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में सोना ₹1,44,270 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। अलग-अलग शहरों में कीमतों का यह अंतर स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और व्यावसायिक लागत पर निर्भर करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में सोने की कीमतें एक समान नहीं होतीं। इसका पहला कारण परिवहन और सुरक्षा से जुड़ी लागत है। सोने को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने में आने वाला खर्च अंतिम बिक्री मूल्य को प्रभावित करता है। इसके अलावा स्थानीय मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों में बदलाव का प्रमुख कारण माना जाता है। जिन क्षेत्रों में सोने की खरीद अधिक होती है, वहां बाजार की स्थिति के अनुसार दरों में अंतर देखने को मिल सकता है।

    स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन भी अपने-अपने क्षेत्रों की बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दैनिक दरें निर्धारित करते हैं। इसके साथ ही ज्वेलर्स द्वारा पहले खरीदे गए स्टॉक की लागत भी बिक्री मूल्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि पुराना स्टॉक अधिक कीमत पर खरीदा गया है तो उसका प्रभाव खुदरा बाजार की कीमतों पर भी दिखाई देता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना खरीदते समय केवल कीमत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। ग्राहकों को हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो की हॉलमार्क प्रमाणित ज्वेलरी ही खरीदनी चाहिए ताकि शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही खरीदारी से पहले विभिन्न आधिकारिक बाजार दरों का मिलान करना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में स्पष्ट अंतर होता है।

    बुलियन बाजार में आई इस नई तेजी ने निवेशकों और आभूषण खरीदारों दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। आगामी दिनों में वैश्विक बाजार के रुझान, घरेलू मांग और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों और ग्राहकों को खरीदारी से पहले ताजा दरों की जानकारी लेकर ही निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं।