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  • 17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल

    17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल

    नई दिल्ली । देश में एलपीजी आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब रेलवे की खानपान सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। स्थिति को देखते हुए भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। गैस आधारित कुकिंग पर निर्भरता कम करते हुए अब ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर बड़े स्तर पर बिजली से संचालित इंडक्शन कुकिंग सिस्टम को अपनाया जा रहा है।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण भोजन तैयार करने की पारंपरिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में यात्रियों को मिलने वाली कैटरिंग सेवाओं में किसी प्रकार की रुकावट न आए, इसके लिए वैकल्पिक कुकिंग मॉडल लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत खाना गैस की बजाय इंडक्शन स्टोव और अन्य विद्युत उपकरणों की मदद से तैयार किया जा रहा है।

    भारतीय रेलवे प्रतिदिन लाखों यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराता है। देशभर में संचालित बड़ी संख्या में ट्रेनों में खानपान सेवाएं दी जाती हैं और प्रतिदिन लगभग 17 लाख यात्रियों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। इतने बड़े स्तर की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए निरंतर ईंधन आपूर्ति आवश्यक होती है। एलपीजी संकट के बीच रेलवे ने समय रहते वैकल्पिक उपायों को लागू कर परिचालन पर असर पड़ने से बचाने की कोशिश की है।

    रेलवे प्रशासन ने बताया कि एलएचबी पैंट्री कारों में पहले से मौजूद आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं और बेहतर विद्युत प्रणाली को देखते हुए वहां इंडक्शन आधारित खाना पकाने की अनुमति दी गई है। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रमुख ट्रेनों में उपयोग किए जाने वाले एलएचबी कोच इस तकनीक के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं। इसके कारण चलती ट्रेनों में भी सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से भोजन तैयार किया जा सकेगा।

    केवल ट्रेनों तक ही नहीं, बल्कि प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी बिजली आधारित कुकिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न स्टेशन परिसरों में स्थापित फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार केंद्रों को इंडक्शन कुकर तथा माइक्रोवेव जैसे उपकरणों का अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे भोजन उत्पादन क्षमता बनाए रखने के साथ-साथ गैस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

    रेलवे से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में रेलवे की बड़ी भोजन उत्पादन प्रणाली स्थायी रूप से इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल की ओर बढ़ सकती है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, आने वाले समय में लगभग 60 प्रतिशत भोजन तैयारी बिजली आधारित तकनीक पर स्थानांतरित की जा सकती है। इससे ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण होगा और ईंधन आपूर्ति संबंधी जोखिम भी कम होंगे।

    रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था के लिए देशभर में संचालित क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य भोजन उत्पादन केंद्रों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता पड़ती है। वर्तमान परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने के कारण रेलवे ने प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के साथ समन्वय भी मजबूत किया है ताकि आवश्यक गैस सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इंडक्शन आधारित कुकिंग न केवल आपूर्ति संकट के समय उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है, बल्कि यह ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और परिचालन स्थिरता के लिहाज से भी लाभकारी है। रेलवे द्वारा उठाया गया यह कदम भविष्य की चुनौतियों के बीच सार्वजनिक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • गर्मी में सेहत और स्वाद का डबल डोज: घर पर बनाएं ठंडी-ठंडी खरबूजे की खीर

    गर्मी में सेहत और स्वाद का डबल डोज: घर पर बनाएं ठंडी-ठंडी खरबूजे की खीर


    नई दिल्ली । देशभर में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। ऐसे मौसम में हर कोई ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश में रहता है जो शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करें। इन्हीं विकल्पों में एक खास और स्वादिष्ट व्यंजन है ‘खरबूजे की खीर’, जो गर्मियों में स्वाद और स्वास्थ्य का अनोखा संगम मानी जाती है।

    खरबूजा गर्मियों का एक लोकप्रिय मौसमी फल है, जिसे उसके मीठे स्वाद और ठंडक देने वाले गुणों के लिए पसंद किया जाता है। जब इस फल को दूध और चावल के साथ मिलाकर खीर के रूप में तैयार किया जाता है, तो यह एक बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक डेजर्ट बन जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करती है।

    आयुर्वेद में खरबूजे को शीतल प्रकृति का फल माना गया है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करता है। अत्यधिक पसीना आने के कारण शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों की भरपाई करने में खरबूजा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि गर्मियों में इसका सेवन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

    खरबूजा कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम और फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। विटामिन ए आंखों की रोशनी और त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, जबकि विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। पोटेशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है और फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, खरबूजा कम कैलोरी वाला फल है, इसलिए यह वजन नियंत्रित रखने वालों के लिए भी अच्छा विकल्प माना जाता है। इसका सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम हो सकती है। हालांकि, मधुमेह से पीड़ित लोगों को इसका सेवन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

    अगर बात करें खरबूजे की खीर की, तो इसे घर पर बेहद आसानी से तैयार किया जा सकता है। सबसे पहले दूध को अच्छी तरह उबालकर उसमें धुले हुए चावल डालें और धीमी आंच पर पकाएं। जब चावल पूरी तरह नरम हो जाएं और मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब इसमें कंडेंस्ड मिल्क या स्वादानुसार चीनी मिलाएं। इसके बाद खीर को थोड़ा ठंडा होने दें और फिर इसमें पके हुए खरबूजे का गूदा मिलाएं। ध्यान रखें कि बहुत गर्म खीर में खरबूजा न डालें, इससे स्वाद प्रभावित हो सकता है।

    तैयार खीर को कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रख दें। परोसते समय इसे केसर, बादाम, पिस्ता या अन्य सूखे मेवों से सजाया जा सकता है। ठंडी-ठंडी खरबूजे की खीर गर्मी के मौसम में एक बेहतरीन डेजर्ट साबित होती है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है।

    गर्मियों में यदि आप कुछ ऐसा खाना चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शरीर को ठंडक और पोषण भी दे, तो खरबूजे की खीर आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकती है। यह पारंपरिक मिठाई का एक नया और हेल्दी रूप है, जो मौसम के अनुरूप शरीर को राहत पहुंचाने का काम करती है।

  • महिला टी20 वर्ल्ड कप में इन बल्लेबाजों का रहा दबदबा: टॉप-5 रन स्कोरर्स में कोई भारतीय नहीं, हरमनप्रीत टॉप-10 में

    महिला टी20 वर्ल्ड कप में इन बल्लेबाजों का रहा दबदबा: टॉप-5 रन स्कोरर्स में कोई भारतीय नहीं, हरमनप्रीत टॉप-10 में


    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 का आगाज 12 जून से होने जा रहा है और क्रिकेट प्रेमियों की नजरें एक बार फिर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों पर टिकी हैं। इंग्लैंड में आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का फाइनल 5 जुलाई को खेला जाएगा। टी20 क्रिकेट के तेजी से बदलते स्वरूप में बल्लेबाजों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाजों की सूची भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड न्यूजीलैंड की दिग्गज बल्लेबाज Suzie Bates के नाम दर्ज है। उन्होंने 2009 से 2024 के बीच खेले गए 42 मैचों की 42 पारियों में 1,216 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 8 अर्धशतक निकले। बेट्स लंबे समय से न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी की रीढ़ रही हैं और आगामी विश्व कप में उनके पास इस रिकॉर्ड को और मजबूत करने का मौका होगा। खास बात यह है कि यह टूर्नामेंट उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी विश्व कप भी माना जा रहा है।

    दूसरे स्थान पर इंग्लैंड की पूर्व स्टार बल्लेबाज Sarah Taylor हैं। उन्होंने 35 मैचों में 1,014 रन बनाकर महिला टी20 विश्व कप इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई। विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और निरंतरता ने इंग्लैंड को कई अहम जीत दिलाई।

    ऑस्ट्रेलिया की विस्फोटक ओपनर Alyssa Healy तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 39 पारियों में 1,008 रन बनाए हैं। बड़े मैचों में दबाव झेलने और तेज शुरुआत देने की उनकी क्षमता ने उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में शामिल किया है।

    चौथे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया की पूर्व कप्तान Meg Lanning हैं। उन्होंने 32 पारियों में 992 रन बनाए, जिसमें एक शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं। लैनिंग की कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों ने ऑस्ट्रेलिया को महिला क्रिकेट की सबसे सफल टीमों में शामिल करने में बड़ी भूमिका निभाई।

    पांचवें स्थान पर न्यूजीलैंड की अनुभवी ऑलराउंडर Sophie Devine हैं। उन्होंने 37 पारियों में 785 रन बनाकर इस सूची में अपनी जगह बनाई है। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और मैच जिताऊ प्रदर्शन के लिए डिवाइन दुनिया भर में जानी जाती हैं।

    भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो टॉप-10 में केवल कप्तान हरमनप्रीत कौर का नाम शामिल है। हरमनप्रीत ने 39 मैचों में 726 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं। वह इस समय दसवें स्थान पर हैं। आगामी विश्व कप में यदि उनका बल्ला चला, तो उनके पास शीर्ष पांच बल्लेबाजों की सूची में जगह बनाने का सुनहरा अवसर होगा।

    महिला टी20 विश्व कप 2026 के साथ क्रिकेट प्रशंसकों को न केवल नई चैंपियन टीम देखने का मौका मिलेगा, बल्कि यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या मौजूदा खिलाड़ी इन ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स को चुनौती दे पाती हैं या नहीं। भारतीय फैंस को खास उम्मीद हरमनप्रीत कौर से होगी, जो अपने अनुभव और विस्फोटक बल्लेबाजी से नया इतिहास रच सकती हैं।

  • बैंक नहीं बताएंगे ये ट्रिक्स! होम लोन की लागत कम करने के 7 असरदार उपाय..

    बैंक नहीं बताएंगे ये ट्रिक्स! होम लोन की लागत कम करने के 7 असरदार उपाय..


    नई दिल्ली ।
      अपना घर खरीदना हर व्यक्ति का सपना होता है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली ईएमआई और भारी ब्याज इस सपने की लागत बढ़ा देते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार कुछ स्मार्ट कदम उठाकर होम लोन की कुल लागत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    1. मजबूत रखें क्रेडिट स्कोर
    होम लोन की ब्याज दर तय करने में क्रेडिट स्कोर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है, तो बैंक आमतौर पर बेहतर ब्याज दर की पेशकश करते हैं। इससे पूरे लोन काल में बड़ी बचत हो सकती है।

    2. कम अवधि वाला लोन चुनें
    लंबी अवधि के लोन में मासिक ईएमआई कम होती है, लेकिन कुल ब्याज भुगतान काफी बढ़ जाता है। यदि आपकी आय अनुमति देती है, तो कम अवधि का लोन चुनना अधिक फायदेमंद हो सकता है।

    3. समय-समय पर प्रीपेमेंट करें
    बोनस, इंसेंटिव या अन्य बचत मिलने पर लोन का आंशिक भुगतान (प्रीपेमेंट) करने से मूलधन तेजी से घटता है। इससे भविष्य में लगने वाला ब्याज कम हो जाता है और लोन जल्दी समाप्त होता है।

    4. हर साल बढ़ाएं EMI
    आय बढ़ने के साथ यदि ईएमआई में 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाए, तो लोन की अवधि कई साल कम हो सकती है। इससे कुल ब्याज भुगतान में भी बड़ी कमी आती है।

    5. बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प देखें
    यदि किसी दूसरे बैंक या वित्तीय संस्था में कम ब्याज दर उपलब्ध है, तो होम लोन बैलेंस ट्रांसफर पर विचार किया जा सकता है। हालांकि ट्रांसफर शुल्क और अन्य लागतों का आकलन पहले कर लेना चाहिए।

    6. अधिक डाउन पेमेंट करें
    घर खरीदते समय जितना अधिक डाउन पेमेंट करेंगे, उतनी कम राशि उधार लेनी पड़ेगी। इससे ब्याज का बोझ स्वतः कम हो जाएगा।

    7. ब्याज दर रीसेट की जानकारी रखें
    फ्लोटिंग रेट होम लोन लेने वालों को समय-समय पर अपने बैंक से ब्याज दर की समीक्षा करानी चाहिए। बाजार में दरें घटने पर बैंक रीसेट सुविधा के जरिए लोन की ब्याज दर कम कर सकते हैं।

    ध्यान देने वाली बात:
    होम लोन में सबसे अधिक बचत का असर आमतौर पर शुरुआती वर्षों में प्रीपेमेंट और ईएमआई बढ़ाने से होता है, क्योंकि उस समय आपकी किश्त का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में जाता है। सही योजना बनाकर लाखों रुपये की बचत संभव है और लोन कई वर्ष पहले खत्म किया जा सकता है।

  • हादसे ने छीना एक हाथ, हौसले ने दिलाए तीन पैरालंपिक पदक: देवेंद्र झाझरिया की प्रेरक कहानी

    हादसे ने छीना एक हाथ, हौसले ने दिलाए तीन पैरालंपिक पदक: देवेंद्र झाझरिया की प्रेरक कहानी


    नई दिल्ली । भारत के खेल इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल अपनी उपलब्धियों के लिए नहीं बल्कि अपने संघर्ष और जज्बे के लिए भी हमेशा याद किए जाते हैं। देवेंद्र झाझरिया ऐसा ही एक नाम है, जिन्होंने जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया। एक दर्दनाक हादसे में बचपन में अपना बायां हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और दुनिया को दिखा दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

    राजस्थान के चुरू जिले में 10 जून 1981 को जन्मे देवेंद्र झाझरिया का बचपन सामान्य बच्चों की तरह बीत रहा था। लेकिन महज आठ साल की उम्र में एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। एक दिन पेड़ पर चढ़ते समय उनका संपर्क हाई वोल्टेज बिजली के तार से हो गया। गंभीर रूप से झुलसने के बाद डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनका बायां हाथ काटना पड़ा। इस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, लेकिन उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी।

    हादसे के बाद देवेंद्र को सामाजिक उपेक्षा और मानसिक संघर्ष का भी सामना करना पड़ा। साथी बच्चों के बीच खुद को अलग महसूस करने वाले देवेंद्र ने धीरे-धीरे खेलों की ओर रुख किया। स्कूल स्तर पर भाला फेंक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए उनकी प्रतिभा सामने आने लगी। वर्ष 1997 में एक पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान कोच रिपुदमन सिंह की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने देवेंद्र को इस खेल को गंभीरता से अपनाने की सलाह दी और यहीं से एक महान खिलाड़ी के सफर की शुरुआत हुई।

    सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में देवेंद्र ने 2004 एथेंस पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया। उन्होंने एफ-46 भाला फेंक स्पर्धा में 62.15 मीटर का विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक नया अध्याय साबित हुई।

    इसके बाद कई वर्षों तक उनकी स्पर्धा पैरालंपिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रही, लेकिन उन्होंने अभ्यास और मेहनत जारी रखी। 2016 रियो पैरालंपिक में उन्होंने 63.97 मीटर का थ्रो कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही वे पैरालंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।

    देवेंद्र के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब पिता की गंभीर बीमारी ने उन्हें खेल छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन उनके पिता ने ही उन्हें हार न मानने और देश के लिए खेलने की प्रेरणा दी। पिता की इसी सीख ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। वर्ष 2020 पैरालंपिक में उन्होंने 64.35 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे पैरालंपिक में तीन पदक जीतने वाले भारत के पहले व्यक्तिगत एथलीट बने।

    देवेंद्र झाझरिया ने केवल पैरालंपिक ही नहीं, बल्कि एशियन पैरा गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में भी भारत का गौरव बढ़ाया। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और पद्म भूषण जैसे देश के सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

    देवेंद्र झाझरिया की कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो सफलता जरूर मिलती है। उनका जीवन आज लाखों युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • नेमार की फिटनेस पर बड़ा अपडेट, रिकवरी की राह पर ब्राज़ील स्टार

    नेमार की फिटनेस पर बड़ा अपडेट, रिकवरी की राह पर ब्राज़ील स्टार


    नई दिल्ली । ब्राजीलियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (CBF) ने नेमार की फिटनेस को लेकर ताजा मेडिकल अपडेट जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, नेमार के दाहिने पैर में ग्रेड-टू पिंडली की चोट है, जिसके इलाज के लिए उनका MRI स्कैन किया गया। CBF के अनुसार उनकी रिकवरी प्रक्रिया सही दिशा में है और वह एक विशेष मेडिकल प्लान के तहत लगातार इलाज करा रहे हैं। हालांकि, संगठन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे कब तक मैदान पर वापसी कर पाएंगे।

    शुरुआती मैचों से बाहर रहने की आशंका
    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नेमार वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती मुकाबलों में उपलब्ध नहीं हो सकते। माना जा रहा है कि वह कम से कम दूसरे ग्रुप मैच तक टीम से बाहर रह सकते हैं। ब्राजील अपने अभियान की शुरुआत मोरक्को के खिलाफ करेगा, इसके बाद हैती और स्कॉटलैंड के खिलाफ मुकाबले होंगे। ऐसे में शुरुआती चरण में टीम को अपने सबसे बड़े स्टार की कमी खल सकती है।

    ब्राजील के लिए सबसे बड़ा सवाल
    नेमार ब्राजील के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने अब तक 128 इंटरनेशनल मैचों में 79 गोल किए हैं। लंबे समय से चोटों से जूझ रहे नेमार अक्टूबर 2023 के बाद से राष्ट्रीय टीम के लिए नहीं खेले हैं। हाल ही में क्लब फुटबॉल के दौरान लगी चोट ने उनकी वापसी को और भी अनिश्चित बना दिया है। इसी कारण ब्राजील टीम मैनेजमेंट उनकी फिटनेस को लेकर बेहद सतर्क है।

    वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील की उम्मीदें
    ब्राजील अगले वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड 23वीं बार हिस्सा लेने जा रहा है और वह अब तक एकमात्र टीम है जिसने हर संस्करण में भाग लिया है। ऐसे में टीम से उम्मीदें हमेशा की तरह ऊंची हैं। हालांकि, नेमार की फिटनेस टीम की रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। अगर वह पूरी तरह फिट नहीं होते, तो ब्राजील को अपनी आक्रमण रणनीति में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।

    करियर के अंतिम वर्ल्ड कप की संभावना
    34 वर्षीय नेमार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 उनके करियर का आखिरी बड़ा टूर्नामेंट हो सकता है। ऐसे में यह टूर्नामेंट उनके लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

    CBF के अपडेट ने ब्राजील को राहत जरूर दी है, लेकिन नेमार की पूर्ण फिटनेस और समय पर वापसी अब भी अनिश्चित बनी हुई है। वर्ल्ड कप से पहले उनकी स्थिति टीम के प्रदर्शन और रणनीति दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

  • भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को मिलेगा सहारा, सन फार्मा की मेगा डील में SBI की एंट्री के संकेत

    भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को मिलेगा सहारा, सन फार्मा की मेगा डील में SBI की एंट्री के संकेत

    नई दिल्ली । भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहण सौदों में शामिल एक महत्वपूर्ण डील में देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक अहम भूमिका निभा सकता है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अमेरिकी हेल्थकेयर कंपनी के अधिग्रहण के लिए सन फार्मा को करीब 1 अरब डॉलर तक की फंडिंग उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है। यदि बैंक के निदेशक मंडल से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण बाजार दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है।

    यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर अधिग्रहण और विस्तार योजनाओं पर काम कर रही हैं। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की अग्रणी कंपनी सन फार्मा ने अप्रैल में अमेरिका स्थित हेल्थकेयर कंपनी ऑर्गेनॉन एंड कंपनी के अधिग्रहण की घोषणा की थी। लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का यह सौदा भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए सबसे बड़े अधिग्रहणों में गिना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, SBI की ओर से प्रस्तावित 1 अरब डॉलर की फंडिंग फिलहाल बैंक के बोर्ड के समक्ष विचाराधीन है। अंतिम निर्णय बोर्ड की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो SBI उन प्रमुख वित्तीय संस्थानों में शामिल हो जाएगा जो इस बहु-अरब डॉलर सौदे के लिए ऋण उपलब्ध करा रहे हैं।

    इस डील की विशेषता केवल इसका आकार नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की बदलती भूमिका भी दिखाई देती है। लंबे समय तक भारतीय बैंकों की विदेशी अधिग्रहण सौदों में भागीदारी सीमित रही थी। इसके पीछे नियामकीय प्रतिबंध और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी चिंताएं प्रमुख कारण थीं। परिणामस्वरूप भारतीय कंपनियां ऐसे बड़े सौदों के लिए प्रायः विदेशी बैंकों, निवेश फंडों और पूंजी बाजारों पर निर्भर रहती थीं।

    हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में नियमों में किए गए बदलावों के बाद परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं। केंद्रीय बैंक ने घरेलू बैंकों को कॉरपोरेट अधिग्रहणों के लिए वित्तपोषण की अनुमति दी है। इसके बाद भारतीय बैंक बड़े अंतरराष्ट्रीय सौदों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को अतिरिक्त वित्तीय समर्थन प्रदान कर सकता है।

    प्रस्तावित फंडिंग व्यवस्था में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंक पहले से शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें वैश्विक वित्तीय क्षेत्र की प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं, जो इस अधिग्रहण के लिए ऋण संरचना तैयार कर रही हैं। ऐसे में SBI की संभावित भागीदारी न केवल इस डील की वित्तीय मजबूती बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की वैश्विक उपस्थिति को भी मजबूत करेगी।

    हाल के वर्षों में भारतीय कंपनियों ने तकनीक, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में कई बड़े विदेशी अधिग्रहण किए हैं। इन सौदों का उद्देश्य नए बाजारों तक पहुंच, उन्नत तकनीक हासिल करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करना रहा है। अब घरेलू बैंकों की बढ़ती भागीदारी से ऐसी डील्स के लिए वित्त जुटाना और अधिक आसान हो सकता है।

    इस दिशा में SBI पहले ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर काम कर रहा है। बैंक ने जापान के प्रमुख वित्तीय समूह MUFG के साथ सहयोग बढ़ाने की पहल की है, जिसका उद्देश्य विलय और अधिग्रहण से जुड़े अवसरों का आकलन करना है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय बैंक अब केवल पारंपरिक ऋणदाता की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वैश्विक कॉरपोरेट वित्तपोषण के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो भविष्य में भारतीय कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय विस्तार अभियानों में घरेलू बैंकों की भागीदारी और बढ़ सकती है। साथ ही यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ते आत्मविश्वास का भी संकेत माना जाएगा।

  • ब्रिस्बेन हीट और क्वींसलैंड कोचिंग से अलग हुए जोहान बोथा, क्रिकेट जगत में हलचल

    ब्रिस्बेन हीट और क्वींसलैंड कोचिंग से अलग हुए जोहान बोथा, क्रिकेट जगत में हलचल


    नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान जोहान बोथा ने क्वींसलैंड और ब्रिस्बेन हीट के हेड कोच पद से समय से पहले इस्तीफा दे दिया है। उनका कॉन्ट्रैक्ट अभी एक सीजन और बचा था, लेकिन उन्होंने दोनों जिम्मेदारियां छोड़ने का फैसला किया।

    क्वींसलैंड क्रिकेट ने उनके इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि बोर्ड ने इसे स्वीकार कर लिया है और अब टीमों के नए कोचिंग सेटअप पर काम शुरू होगा। यह फैसला ऑस्ट्रेलियाई घरेलू क्रिकेट में चल रहे बड़े कोचिंग बदलावों के बीच आया है।

    दो साल का सफर और मिला-जुला प्रदर्शन
    बोथा ने 2024-25 सीजन से क्वींसलैंड और ब्रिस्बेन हीट की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल में क्वींसलैंड टीम ने कुछ अच्छे संकेत दिए और शेफील्ड शील्ड फाइनल तक भी पहुंची, लेकिन खिताब नहीं जीत सकी। वनडे कप और शील्ड में टीम का प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा और वह लगातार शीर्ष स्थान पर नहीं पहुंच सकी। वहीं बिग बैश लीग में ब्रिस्बेन हीट का प्रदर्शन भी अस्थिर रहा, जिससे टीम लगातार ट्रॉफी से दूर रही।

    बोर्ड का बयान और भविष्य की दिशा
    क्वींसलैंड क्रिकेट के CEO ने बयान में कहा कि भले ही टीम ने सभी लक्ष्य हासिल नहीं किए, लेकिन बोथा ने युवा खिलाड़ियों के विकास में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने हाई परफॉर्मेंस सिस्टम को मजबूत करने में योगदान दिया। बोर्ड ने उनके काम की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

    अब कौन लेगा जिम्मेदारी?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्वींसलैंड क्रिकेट अब नए हेड कोच की तलाश में है और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन का नाम संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में है।

    जोहान बोथा का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब क्वींसलैंड और ब्रिस्बेन हीट दोनों टीमें स्थिरता और बेहतर प्रदर्शन की तलाश में हैं। अब देखना होगा कि नया कोचिंग सेटअप टीम को किस दिशा में ले जाता है।

  • पश्चिम एशिया तनाव के बावजूद भारत पर भरोसा बरकरार, फिच ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.4% जीडीपी वृद्धि अनुमान कायम रखा 2.

    पश्चिम एशिया तनाव के बावजूद भारत पर भरोसा बरकरार, फिच ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.4% जीडीपी वृद्धि अनुमान कायम रखा 2.

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। एजेंसी का मानना है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती और घरेलू मांग देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाती रहेगी।

    फिच की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और तेल कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव का असर दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बना हुआ है। एजेंसी का कहना है कि घरेलू खपत, निवेश गतिविधियां और आर्थिक सुधारों का प्रभाव विकास दर को सहारा देता रहेगा।

    रिपोर्ट में घरेलू मांग को भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बताया गया है। उपभोक्ता खर्च और निवेश गतिविधियों में निरंतर वृद्धि से आर्थिक गति बनी रहने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके अलावा आयात में वास्तविक कमी के कारण शुद्ध बाहरी मांग का भी विकास दर में सकारात्मक योगदान रहने का अनुमान जताया गया है।

    फिच का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का प्रभाव स्थायी नहीं रहेगा। एजेंसी के अनुसार, यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ सकती है। इसी आधार पर अगले वित्त वर्ष के लिए 6.7 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसके बाद आर्थिक विकास दर के धीरे-धीरे संतुलित स्तर पर लौटने की संभावना जताई गई है।

    रिपोर्ट में तेल कीमतों को प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया गया है। फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन के अनुसार, ऊर्जा कीमतों में वृद्धि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा सकती है। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ते निवेश और डिजिटल सेवाओं पर बढ़ता खर्च कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सहारा प्रदान कर रहा है। भारत जैसे देशों को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।

    महंगाई के मोर्चे पर एजेंसी ने सतर्क दृष्टिकोण अपनाया है। फिच का अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति आने वाले महीनों में बढ़ सकती है। वर्ष 2026 के अंत तक महंगाई दर 5.3 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके पीछे ऊर्जा लागत में वृद्धि और सांख्यिकीय आधार प्रभाव को प्रमुख कारण माना गया है।

    रिपोर्ट में मौसम संबंधी जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है। सामान्य से कम मानसून या अत्यधिक गर्मी जैसी परिस्थितियां खाद्य उत्पादन और आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे महंगाई दर पर अतिरिक्त असर पड़ने की आशंका रहेगी।

    भारतीय मुद्रा को लेकर एजेंसी का दृष्टिकोण अपेक्षाकृत स्थिर है। फिच का मानना है कि वर्ष के शेष समय में रुपये में बड़े स्तर पर गिरावट की संभावना नहीं है। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों के कारण सीमित उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन व्यापक अस्थिरता की आशंका फिलहाल कम दिखाई देती है।

    गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने भी हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.6 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान व्यक्त किया है। केंद्रीय बैंक ने भी वैश्विक आपूर्ति शृंखला में संभावित व्यवधान, वित्तीय बाजारों की अस्थिरता और मौसम संबंधी चुनौतियों को प्रमुख जोखिम बताया है। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू बाजार, बढ़ता निवेश, डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे पर निरंतर खर्च भारत की आर्थिक वृद्धि को आने वाले वर्षों में भी समर्थन देते रहेंगे। वैश्विक चुनौतियों के बीच फिच का ताजा अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थिरता पर अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है।

  • 'यह जगह घर की तरह', विराट कोहली ने आरसीबी के लगातार 2 बार चैंपियन बनने पर लिखा भावुक संदेश

    'यह जगह घर की तरह', विराट कोहली ने आरसीबी के लगातार 2 बार चैंपियन बनने पर लिखा भावुक संदेश


    नई दिल्ली । रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की लगातार दूसरी आईपीएल खिताबी जीत के बाद स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने टीम के सफर, संघर्ष और भावनात्मक जुड़ाव को “घर” जैसा बताया।

    कोहली का भावुक पोस्ट
    कोहली ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सीजन की शुरुआत भरोसे के साथ हुई थी और अंत लगातार दो खिताबों के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि इस टीम ने हर भावनात्मक उतार-चढ़ाव को साथ झेला और मुश्किल हालात में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। कोहली के मुताबिक, “यह जगह घर की तरह है”-जो उनकी टीम के साथ गहरे जुड़ाव को दिखाता है।

    लगातार दूसरी बार RCB चैंपियन
    Royal Challengers Bengaluru ने आईपीएल 2025 और 2026 में लगातार दो खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। 18 साल के लंबे इंतजार के बाद पहली बार खिताब जीतने के बाद टीम ने अगले ही सीजन में ट्रॉफी डिफेंड कर ली।

    फाइनल मुकाबले का हाल
    आईपीएल 2026 का फाइनल नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया, जहां RCB ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। विपक्षी टीम को 155 रन पर रोकने के बाद RCB ने 161 रन बनाकर 5 विकेट से मैच जीत लिया। इस फाइनल में कोहली ने अहम भूमिका निभाई और 42 गेंदों पर 75 रन की मैच जिताऊ पारी खेली। उनकी इस पारी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया।

    पूरे सीजन में कोहली का प्रदर्शन
    पूरे सीजन में कोहली का फॉर्म शानदार रहा। उन्होंने 16 मैचों में 675 रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 5 अर्धशतक शामिल रहे। उनकी लगातार रन बनाने की क्षमता टीम की सफलता की सबसे बड़ी वजहों में से एक रही।

    कप्तानी और टीम का योगदान
    कप्तान रजत पाटीदार की रणनीति और गेंदबाजों के संतुलित प्रदर्शन ने भी टीम को मजबूती दी। गेंदबाजी ने फाइनल में खास भूमिका निभाई और विपक्ष को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोका।