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  • पेट्रोल-डीजल के दाम में नहीं हुआ कोई बदलाव, 7 मई को भी ईंधन कीमतें स्थिर

    पेट्रोल-डीजल के दाम में नहीं हुआ कोई बदलाव, 7 मई को भी ईंधन कीमतें स्थिर

    नई दिल्ली। देशभर में 7 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं देखा गया। लगातार कई दिनों से ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर इसका असर तुरंत दिखाई नहीं दे रहा है।

    भारत में ईंधन की कीमतें रोजाना आधार पर तय की जाती हैं, लेकिन हाल के समय में इनमें स्थिरता बनी हुई है। इसका मुख्य कारण वैश्विक बाजार में संतुलन और घरेलू टैक्स संरचना का स्थिर रहना माना जा रहा है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों के आधार पर रेट तय करती हैं, लेकिन फिलहाल बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं।

    राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले की तरह ही बनी हुई हैं। वहीं मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बनी हुई हैं। डीजल की कीमतें अधिकतर शहरों में अभी भी 100 रुपये के नीचे हैं।

    महानगरों में ईंधन की कीमतों में अंतर टैक्स और परिवहन लागत की वजह से देखने को मिलता है। कुछ शहरों में पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि छोटे शहरों में यह दरें थोड़ी कम बनी हुई हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव कम देखने को मिले हैं। टैक्स में बदलाव के बाद से कीमतें एक सीमित दायरे में स्थिर बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।

    ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और लॉजिस्टिक्स लागत शामिल हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी बदलाव का असर धीरे-धीरे घरेलू कीमतों पर पड़ता है।

  • कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा मंथन, 8वें वेतन आयोग में 10 साल की बजाय 5 साल रिव्यू की मांग तेज

    कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा मंथन, 8वें वेतन आयोग में 10 साल की बजाय 5 साल रिव्यू की मांग तेज

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है। इसी बीच कर्मचारी यूनियनों ने एक अहम मांग उठाई है कि वेतन आयोग की समीक्षा हर 10 साल की बजाय हर 5 साल में की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा समय में जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, उसके मुकाबले वेतन में होने वाली बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं रह जाती।

    यूनियनों का मानना है कि लंबे अंतराल में वेतन संरचना असंतुलित हो जाती है। निचले स्तर के कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों के वेतन के बीच अंतर समय के साथ और ज्यादा बढ़ता जाता है, जिससे असमानता की स्थिति बनती है। इसका सीधा असर आम कर्मचारियों की जीवनशैली और उनकी क्रय शक्ति पर पड़ता है।

    कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब वेतन में बढ़ोतरी होती है, तो वह प्रतिशत के आधार पर तय होती है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिलता। कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम फायदा होता है, जबकि अधिक वेतन पाने वालों को उसी अनुपात में अधिक लाभ मिल जाता है।

    यूनियनों का सुझाव है कि अगर वेतन आयोग की समीक्षा छोटे अंतराल पर की जाए, तो महंगाई और वेतन के बीच संतुलन बनाए रखना आसान हो सकता है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में स्थिरता आएगी और उनकी वास्तविक आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

    इस बीच वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की चर्चाओं के लिए बैठकों का दौर भी जारी है। इन बैठकों में कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसमें वेतन, पेंशन और भत्तों जैसे विषय शामिल हैं।

    फिलहाल 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की उम्मीदें और मांगें दोनों बढ़ गई हैं। आने वाले समय में इस पर क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा

    चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा



    नई दिल्ली। चीन एक बार फिर पाकिस्तान के जरिए भारत के खिलाफ अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन पाकिस्तान को अपना अत्याधुनिक जे-35एई स्टील्थ फाइटर जेट देने की तैयारी कर रहा है, जिसे अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II का मुकाबला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह फाइटर जेट भारत के एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर S-400 Triumf के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी हलचल
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें Noor Khan Airbase का नाम भी शामिल रहा। भारतीय लड़ाकू विमानों और ब्रह्मोस मिसाइलों की क्षमता ने पाकिस्तान और चीन दोनों को सतर्क कर दिया।

    क्या है चीन का जे-35एई?
    शेनयांग जे-35 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बच निकलने में सक्षम माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान 40 जे-35 खरीद सकता है। चीन इसे वैश्विक बाजार में अमेरिकी एफ-35 के विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील्थ तकनीक की वजह से यह विमान दुश्मन के वायु रक्षा सिस्टम के बेहद करीब पहुंचकर हमला कर सकता है। यही कारण है कि इसे भारत के एस-400 सिस्टम के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

    परमाणु सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान को जे-35 मिलता है तो वह लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में ज्यादा सक्षम हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक चीन पाकिस्तान को सैटेलाइट और निगरानी सहायता भी दे रहा है, जिससे भारतीय वायु रक्षा की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है।

    हालांकि भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है। भारतीय सेना पहले से दसाल्ट राफेल, एस-400 और ब्रह्मोस जैसी आधुनिक प्रणालियों से लैस है और नए वायु रक्षा सिस्टम पर भी तेजी से काम चल रहा है।

    एशिया में बढ़ सकती है सैन्य प्रतिस्पर्धा
    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा पाकिस्तान को अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान देने से दक्षिण एशिया में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • निफ्टी में कंसोलिडेशन जारी, ऑटो-एनर्जी स्टॉक्स में तेजी से बाजार में दिखी खरीदारी की दिलचस्पी

    निफ्टी में कंसोलिडेशन जारी, ऑटो-एनर्जी स्टॉक्स में तेजी से बाजार में दिखी खरीदारी की दिलचस्पी


    नई दिल्ली।
    शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, जहां प्रमुख इंडेक्स में शुरुआती बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 ने दिन की शुरुआत 24400 के स्तर के आसपास की और कुछ समय के लिए इस स्तर को पार भी किया। वहीं सेंसेक्स भी तेजी के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में अच्छी बढ़त दर्ज की।

    हालांकि बाजार में शुरुआती तेजी के बाद निफ्टी एक सीमित दायरे में फंसता नजर आया और ऊपरी स्तर पर कंसोलिडेशन का माहौल बन गया। इंडेक्स लगातार 24300 से 24400 के बीच ट्रेड करता दिखा, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार फिलहाल अगली बड़ी चाल के लिए रुककर स्थिति का आकलन कर रहा है।

    इस बीच सेक्टर वाइज मूवमेंट काफी दिलचस्प रहा। ऑटो सेक्टर में निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई है और लार्जकैप ऑटो कंपनियों में खरीदारी देखने को मिल रही है। कई प्रमुख ऑटो स्टॉक्स में हल्की से मध्यम तेजी दर्ज की गई, जिससे यह सेक्टर बाजार में मजबूती का केंद्र बना रहा।

    मेटल सेक्टर में भी खरीदारी का रुझान देखने को मिला। कुछ प्रमुख मेटल कंपनियों के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक इस सेक्टर में रिकवरी की उम्मीद के साथ एंट्री कर रहे हैं। इसके अलावा एनर्जी सेक्टर में भी धीरे-धीरे निवेश बढ़ता हुआ दिखाई दिया।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय निवेशक उन सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं जहां हाल ही में रिकवरी के संकेत मिले हैं या जहां स्टॉक्स ने निचले स्तर से वापसी दिखाई है। यही वजह है कि ऑटो, मेटल और एनर्जी जैसे सेक्टर फोकस में बने हुए हैं।

    तकनीकी स्तर पर निफ्टी ने पहले जिस स्तर को रेजिस्टेंस माना जा रहा था, उसे पार करने की कोशिश की है, लेकिन अब वह स्तर सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है। फिलहाल 24300 से 24250 का क्षेत्र बाजार के लिए मजबूत खरीदारी का दायरा माना जा रहा है।

    अगर बाजार इस जोन में आता है, तो वहां से फिर से खरीदारी देखने की संभावना बनी रहती है, जिससे निफ्टी एक बार फिर ऊपरी स्तरों की ओर बढ़ सकता है। कुल मिलाकर बाजार फिलहाल संतुलन की स्थिति में है, जहां न तो तेज गिरावट दिख रही है और न ही मजबूत ब्रेकआउट, बल्कि निवेशक अगले बड़े ट्रेंड का इंतजार कर रहे हैं।

  • चीन की टेंशन बढ़ाएगा अमेरिका का ‘लिथियम खजाना’, पहाड़ों के नीचे मिला इतना बड़ा भंडार कि 300 साल नहीं पड़ेगी आयात की जरूरत

    चीन की टेंशन बढ़ाएगा अमेरिका का ‘लिथियम खजाना’, पहाड़ों के नीचे मिला इतना बड़ा भंडार कि 300 साल नहीं पड़ेगी आयात की जरूरत



    नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका में वैज्ञानिकों ने लिथियम का एक विशाल भंडार खोजा है, जिसे ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भंडार इतना बड़ा है कि अमेरिका करीब 300 साल तक लिथियम आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। इस खोज को चीन के रेयर अर्थ और बैटरी मटेरियल बाजार में दबदबे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

    अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार यह विशाल लिथियम भंडार अपलाचियन पर्वत के नीचे मौजूद है। यह मुख्य रूप से North Carolina, South Carolina, Maine और New Hampshire में फैला हुआ है। वैज्ञानिकों ने इलाके में लिथियम से समृद्ध 18 अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान की है।

    65 अरब डॉलर का ‘सफेद सोना’
    रिपोर्ट के मुताबिक इस भंडार में करीब 2.5 करोड़ मीट्रिक टन लिथियम मौजूद हो सकता है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 65 अरब डॉलर आंकी गई है। माना जा रहा है कि यह खोज अमेरिका को बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में फिर से मजबूत बना सकती है।

    क्यों इतना अहम है लिथियम?
    लिथियम को आधुनिक दौर का “सफेद सोना” कहा जाता है। इसका इस्तेमाल:

    इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में

    स्मार्टफोन और लैपटॉप में

    ऊर्जा भंडारण सिस्टम में

    एयरोस्पेस और डिफेंस उपकरणों में

    सबसे ज्यादा होता है। दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ने के साथ लिथियम की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है।

    चीन का दबदबा पड़ सकता है कमजोर
    फिलहाल China रेयर अर्थ और लिथियम रिफाइनिंग सेक्टर में सबसे ताकतवर देश माना जाता है। वहीं Australia दुनिया में सबसे ज्यादा लिथियम सप्लाई करता है। ऐसे में अमेरिका की यह खोज वैश्विक सप्लाई चेन का समीकरण बदल सकती है।

    जापान ने भी खोजा समुद्र के नीचे खजाना
    इधर Japan ने भी समुद्र की गहराई में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का विशाल भंडार खोजने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि यह भंडार टोक्यो से करीब 2000 किलोमीटर दूर समुद्री इलाके में मौजूद है। अनुमान है कि वहां 160 लाख टन से ज्यादा रेयर अर्थ संसाधन हो सकते हैं, जो चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।

  • सरकारी हिस्सेदारी बिक्री के बाद बना रिटर्न का इतिहास, 1 लाख बना 14 करोड़, कंपनी ने दिया 1400 गुना फायदा

    सरकारी हिस्सेदारी बिक्री के बाद बना रिटर्न का इतिहास, 1 लाख बना 14 करोड़, कंपनी ने दिया 1400 गुना फायदा


    नई दिल्ली।
    पिछले कुछ दशकों में शेयर बाजार ने कई ऐसे उदाहरण दिए हैं, जिन्होंने निवेशकों की सोच पूरी तरह बदल दी है। ऐसी ही एक कंपनी है जिसने लंबे समय में निवेशकों को असाधारण रिटर्न देकर मल्टीबैगर बनने की पहचान हासिल की है। समय के साथ इस कंपनी का प्रदर्शन इतना मजबूत रहा कि शुरुआती निवेशकों की पूंजी कई गुना बढ़कर करोड़ों में बदल गई।

    साल 2002 के आसपास अगर किसी निवेशक ने इस कंपनी में सिर्फ 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज वह राशि बढ़कर करीब 14 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी होती। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि सही कंपनी और लंबे समय तक निवेश कितना बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

    इस कंपनी की कहानी एक बड़े बदलाव से शुरू होती है, जब सरकार ने अपनी हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची थी। इसके बाद कंपनी के संचालन और रणनीति में कई अहम बदलाव हुए, जिसने इसके विकास की रफ्तार को तेज कर दिया। धीरे-धीरे कंपनी ने अपने कारोबार को मजबूत किया और बाजार में अपनी पकड़ बनानी शुरू की।

    पिछले 24 वर्षों में इस कंपनी ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है और निवेशकों को लगभग 1400 गुना तक का रिटर्न दिया है। समय के साथ इसकी सालाना ग्रोथ भी स्थिर और प्रभावशाली बनी रही, जिससे यह बाजार में एक भरोसेमंद स्टॉक के रूप में उभरी।

    कंपनी का कारोबार भी समय के साथ काफी विस्तृत हुआ है। जहां पहले यह सीमित क्षेत्र में काम करती थी, वहीं अब यह कई नए सेगमेंट्स में तेजी से आगे बढ़ रही है। खासकर मेटल और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में इसका फोकस लगातार बढ़ रहा है, जिससे भविष्य की संभावनाएं और मजबूत हो रही हैं।

    इसके अलावा कंपनी ने सिल्वर जैसे अहम मेटल के उत्पादन में भी बड़ा विस्तार किया है। यह धातु अब सिर्फ एक कीमती संसाधन नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कंपनी की अहमियत और भी बढ़ गई है।

    मजबूत उत्पादन क्षमता, कम लागत में संचालन और लगातार बढ़ते प्रॉफिट ने इस कंपनी को निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना दिया है। लंबे समय में इसका प्रदर्शन यह दिखाता है कि धैर्य और सही निवेश रणनीति से बाजार में बड़ा वेल्थ क्रिएशन संभव है।

  • पाम ऑयल संकट से हिल सकता है FMCG सेक्टर, साबुन-शैंपू की कीमतों पर बढ़ा दबाव..

    पाम ऑयल संकट से हिल सकता है FMCG सेक्टर, साबुन-शैंपू की कीमतों पर बढ़ा दबाव..

    नई दिल्ली। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले साबुन, शैंपू और अन्य FMCG उत्पादों की कीमतों पर आने वाले समय में असर देखने को मिल सकता है। वजह है पाम ऑयल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में आई दिक्कतें, जो अब भारतीय बाजार तक पहुंच चुकी हैं। यह वही कच्चा माल है जिसका इस्तेमाल न सिर्फ खाने के तेल में बल्कि साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, बिस्किट और कई पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

    भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का आयात इंडोनेशिया और मलेशिया से करता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर सप्लाई में बाधा, बायोडीजल की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक तनाव के कारण इसकी कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है जो बड़े पैमाने पर FMCG उत्पाद बनाती हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाने से बच सकती हैं, लेकिन इसका असर प्रोडक्ट के साइज या पैकेजिंग पर दिख सकता है। यानी साबुन का साइज छोटा हो सकता है या शैंपू की मात्रा पहले से कम हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से बोझ बढ़ेगा।

    HUL और गोदरेज जैसी बड़ी FMCG कंपनियों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि इनका प्रोडक्शन काफी हद तक पाम ऑयल पर निर्भर करता है। कच्चे माल की बढ़ती लागत से इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बन सकता है, जिससे उनकी मुनाफे की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    पाम ऑयल का इस्तेमाल सिर्फ खाने के तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दैनिक उपयोग के कई उत्पादों का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमतों में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव सीधे आम उपभोक्ता की जेब पर असर डालता है।

    फिलहाल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और रणनीति के तहत धीरे-धीरे बदलाव करने की योजना बना सकती हैं ताकि अचानक कीमत बढ़ाने से बचा जा सके। लेकिन अगर पाम ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर बाजार में साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।

  • यूपी में योगी सरकार का बड़ा संदेश: बिना सिफारिश मिल रही नौकरी, 9 लाख से ज्यादा नियुक्तियों का दावा

    यूपी में योगी सरकार का बड़ा संदेश: बिना सिफारिश मिल रही नौकरी, 9 लाख से ज्यादा नियुक्तियों का दावा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर राज्य की भर्ती प्रक्रिया और युवाओं को मिलने वाले रोजगार को लेकर सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया। लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिनमें 202 प्रोफेसर, रीडर, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स (आयुष विभाग), 272 अनुदेशक (व्यावसायिक शिक्षा विभाग) और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के 7 कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों की मौजूदगी रही।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में नौकरी पाने के लिए किसी सिफारिश या अनैतिक दबाव की जरूरत नहीं पड़ती है और पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगते थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने चयन आयोगों को जवाबदेही के साथ काम करने की व्यवस्था दी है, जिससे निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित हो रही है।

    सीएम योगी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य में 9 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में लगातार नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और यह चौथा बड़ा कार्यक्रम है, जिसमें हजारों युवाओं को अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिले, जिससे प्रदेश की विकास गति और तेज हो।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब पिछड़े राज्य की छवि से बाहर निकलकर एक मजबूत अर्थव्यवस्था और निवेश का केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है, उद्योगों की संख्या बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि हुई है। सीएम योगी ने कहा कि अब यूपी को कोई बीमारू राज्य नहीं कहता, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बन रहा है।

    कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने भी इस मौके पर सरकार की नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते थे, लेकिन अब पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में 14 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया और 7.5 लाख से अधिक को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने स्किल डेवलपमेंट योजनाओं और नए तकनीकी ट्रेड्स के विस्तार का भी उल्लेख किया।

    कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित अभ्यर्थियों से ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने की अपील की और कहा कि उनकी मेहनत ही प्रदेश के विकास की असली ताकत बनेगी।

  • यूपी में मौसम का कहर: आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से जनजीवन प्रभावित, कई जिलों में अलर्ट

    यूपी में मौसम का कहर: आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से जनजीवन प्रभावित, कई जिलों में अलर्ट


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और पिछले एक हफ्ते से कई जिलों में आंधी-बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का सिलसिला जारी है। गुरुवार को बांदा, बिजनौर, शाहजहांपुर, कानपुर देहात और महोबा में तेज बारिश के साथ कई जगह ओले गिरे, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। महोबा में करीब आधे घंटे की बारिश के दौरान ओले गिरने से फसलों को नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है, वहीं बिजनौर में सड़क किनारे लगा एक CCTV टावर तेज हवा में गिर गया, जिससे इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।

    बारिश और फिसलन की वजह से कई जगहों पर सड़क हादसे भी सामने आए हैं। बाराबंकी में हाईवे पर फिसलन के चलते दो डबल डेकर बसें, एक डीसीएम और कई वाहन आपस में टकरा गए, जिसमें एक यात्री की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। वहीं, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, अयोध्या, गाजियाबाद समेत 15 से ज्यादा जिलों में भी तड़के बारिश दर्ज की गई है।

    इसी बीच मौसम के खराब हालात का असर हवाई यातायात पर भी देखने को मिला। दिल्ली से पटना जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E-6497 को लैंडिंग से पहले टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा, जिससे विमान हवा में डगमगाने लगा और यात्रियों में दहशत फैल गई। स्थिति को देखते हुए फ्लाइट को लखनऊ डायवर्ट किया गया, जहां सुरक्षित लैंडिंग हुई। विमान को केंद्रीय मंत्री और पायलट राजीव प्रताप रूडी उड़ा रहे थे, जिन्होंने उतरने के बाद यात्रियों से कहा कि अब आप सुरक्षित हैं।

    मौसम विभाग ने आज 44 जिलों में आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिसमें 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी भरी हवाओं के टकराव के कारण यह मौसमी बदलाव देखने को मिल रहा है। विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा, जिसके बाद धीरे-धीरे तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

    बाराबंकी में लखनऊ, अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे बारिश के दौरान बड़ा सड़क हादसा हो गया। दारापुर स्थित कलिका ढाबा के पास फिसलन भरी सड़क पर दो डबल डेकर बसें, एक डीसीएम और कई अन्य वाहन आपस में टकरा गए। सभी वाहन अयोध्या की ओर जा रहे थे, तभी अचानक हुए इस हादसे से हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और लंबा जाम लग गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बारिश के चलते सड़क बेहद फिसलन भरी हो गई थी और आगे चल रही डीसीएम के अचानक ब्रेक लगाने से पीछे आ रहे वाहन एक के बाद एक टकराते चले गए। इस हादसे में बस सवार बस्ती निवासी विनोद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आशीष, आजाद, संजय और अजमेर अली गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है, वहीं पुलिस ने मौके पर पहुंचकर यातायात सामान्य कराने और जांच शुरू कर दी है।

  • बंगाल हत्या कांड पर गरमाई सियासत, AAP ने अमित शाह से पूछा—कहां गई केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था?

    बंगाल हत्या कांड पर गरमाई सियासत, AAP ने अमित शाह से पूछा—कहां गई केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था?

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है। इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और केंद्र सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने इस हत्या की निंदा करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था और केंद्रीय सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता बताया है।

    AAP की ओर से कहा गया है कि जब राज्य में पहले से ही भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, तो इसके बावजूद इस तरह की हत्या होना कई सवाल खड़े करता है। पार्टी ने पूछा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा बलों के बावजूद यह गोलीबारी कैसे हुई और जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

    <blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”hi” dir=”ltr”>कहाँ है बंगाल में वो 2.5 लाख केंद्रीय बल, जिसे इसीलिए तैनात किया गया था ताकि कोई घटना न हो? क्या इस गोलीकांड की ज़िम्मेदारी गृह मंत्री लेंगे, जो वहाँ पूरे राज्य की कमान संभाले हुए हैं?<br><br>अगर भाजपा बंगाल के सबसे बड़े नेता के करीबी को भी गोली से नहीं बचा पाई, तो आम जनता को क्या… <a href=”https://t.co/iX0lFDM0vR”>https://t.co/iX0lFDM0vR</a></p>&mdash; Priyanka Kakkar (@PKakkar_) <a href=”https://twitter.com/PKakkar_/status/2052092247286710542?ref_src=twsrc%5Etfw”>May 6, 2026</a></blockquote> <script async src=”https://platform.twitter.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>
    इस मामले को लेकर AAP प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए सवाल उठाया है कि क्या गृह मंत्री इस घटना की जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी बड़े राजनीतिक नेता के करीबी को ही सुरक्षा नहीं मिल पा रही है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा। पार्टी ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए देश की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई है।

    यह घटना उस समय हुई जब चंद्रनाथ रथ अपनी कार से यात्रा कर रहे थे और अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। गोलीबारी में उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। पुलिस ने इसे सुनियोजित हमला मानते हुए जांच शुरू कर दी है और कई एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है।

    हत्या के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अलग-अलग राजनीतिक दल इस घटना को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। कुछ इसे कानून व्यवस्था की विफलता बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा मान रहे हैं। इस बीच इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार जांच में जुटी है।

    AAP ने अपने बयान में यह भी कहा है कि अगर देश में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह घटना अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है।