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  • बांदा में सामुदायिक भवन और मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प, करोड़ों की परियोजनाएं शुरू

    बांदा में सामुदायिक भवन और मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प, करोड़ों की परियोजनाएं शुरू


    उत्तरप्रदेश । बांदा जिले में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। रविवार को सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी और नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती मालती गुप्ता बासू ने विभिन्न जनहितकारी योजनाओं का भूमि पूजन एवं शिलान्यास कर क्षेत्रवासियों को विकास की नई सौगात दी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, वहीं धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नया आयाम मिलेगा।

    कार्यक्रम की शुरुआत विकासखंड महुआ की ग्राम पंचायत अनथुवा से हुई, जहां लगभग 41 लाख रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक सामुदायिक भवन (बारात घर) का विधिवत भूमि पूजन किया गया। यह भवन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनेगा। अब ग्रामीणों को शादी-विवाह, बैठक, सामाजिक कार्यक्रम और अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उन्हें निजी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

    इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने नगर पालिका परिषद क्षेत्र के मोहल्ला खुटला स्थित कालका देवी मंदिर परिसर के समग्र विकास कार्य का शिलान्यास किया। लगभग 1.72 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर का व्यापक कायाकल्प किया जाएगा। योजना में तालाब का सुंदरीकरण, आकर्षक कला मंच का निर्माण, आधुनिक शौचालय, श्रद्धालुओं के लिए गेस्ट हाउस तथा भव्य मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण शामिल है। इस परियोजना के पूरा होने से मंदिर परिसर न केवल अधिक सुंदर और व्यवस्थित बनेगा, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    इस अवसर पर सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में समान रूप से विकास कार्यों को गति देना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सुविधाओं का विस्तार तथा नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी परियोजनाएं गुणवत्ता और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी कराई जाएंगी ताकि आम जनता को जल्द से जल्द इनका लाभ मिल सके।

    नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती मालती गुप्ता बासू ने कहा कि नगर के धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों का विकास नगर पालिका की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर की सुंदरता बढ़ेगी, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने सभी नागरिकों से विकास कार्यों में सहयोग करने और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण का भी आह्वान किया।

    भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, नगर पालिका के सभासदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी रही। लोगों ने इन परियोजनाओं का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इनके पूरा होने से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और बांदा में आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का भी विस्तार होगा।

  • भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स स्वास्थ्य बैठक शुरू, 21 देशों के प्रतिनिधि पारंपरिक चिकित्सा और एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली पर करेंगे मंथन

    भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स स्वास्थ्य बैठक शुरू, 21 देशों के प्रतिनिधि पारंपरिक चिकित्सा और एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली पर करेंगे मंथन


    नई दिल्ली । 
    चंडीगढ़ में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) पर केंद्रित चार दिवसीय ब्रिक्स बैठक का मंगलवार से शुभारंभ हो गया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में 21 देशों के स्वास्थ्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और चिकित्सा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

    सम्मेलन के दौरान पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान, नियामकीय ढांचे, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की जा रही है। भारत का प्रयास है कि सदस्य देशों के अनुभवों और विशेषज्ञता का लाभ साझा मंच पर उपलब्ध हो, जिससे पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में अधिक प्रभावी स्थान मिल सके।

    बैठक में भाग ले रहे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रतिनिधियों का मानना है कि वैज्ञानिक शोध, प्रमाण आधारित चिकित्सा और प्रभावी नियामकीय व्यवस्था के माध्यम से पारंपरिक उपचार पद्धतियों को अधिक विश्वसनीय और व्यापक बनाया जा सकता है। साथ ही इन प्रणालियों को जनस्वास्थ्य सेवाओं का पूरक बनाकर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

    सम्मेलन के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि विभिन्न देशों में पारंपरिक चिकित्सा की अपनी समृद्ध विरासत और विशिष्ट उपचार पद्धतियां मौजूद हैं। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य पारंपरिक उपचार प्रणालियों के अनुभवों को साझा करने से सदस्य देशों को एक-दूसरे से सीखने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी आवश्यक बताया।

    भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा के लिए एक स्थायी कार्य समूह के गठन का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर सदस्य देशों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई और इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। माना जा रहा है कि यह कार्य समूह भविष्य में शोध, नीति निर्माण, प्रशिक्षण और सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    बैठक के पहले दिन पारंपरिक चिकित्सा में क्षमता निर्माण और अनुसंधान पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग, नई तकनीकों के उपयोग और स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

    चंडीगढ़ में आयोजित यह सम्मेलन भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदस्य देशों के बीच अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाता है, तो इससे वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा की स्वीकार्यता और उपयोग दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सम्मेलन के आगामी सत्रों में स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और सहयोगी पहलों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

  • '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'… प्रो. डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के सम्मान में सजा यादगार समारोह

    '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'… प्रो. डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के सम्मान में सजा यादगार समारोह


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश के बांदा शहर में शिक्षा, साहित्य और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनीकुमार शुक्ल की सेवानिवृत्ति पर आयोजित अभिनंदन समारोह भावनाओं, सम्मान और प्रेरणा का अनूठा संगम बन गया। तिंदवारी रोड स्थित होटल रॉयल ऑर्बिट में “46 वर्षों बाद : अंत नहीं आरंभ” शीर्षक से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, सैन्य अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक हस्तियों ने भाग लेकर डॉ. शुक्ल की गौरवपूर्ण सेवाओं को नमन किया।

    डॉ. शुक्ल के सुपुत्र इंजीनियर आशुतोष शुक्ल द्वारा आयोजित इस समारोह में उनके जीवन के विभिन्न आयामों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति किसी कर्मयोगी के जीवन का अंत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत होती है। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के प्रति डॉ. शुक्ल का समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना उपाध्याय रहे। प्रोफेसर उपाध्याय ने अपने संबोधन में डॉ. शुक्ल की साहित्यिक प्रतिभा, भाषा पर असाधारण पकड़, संपादन कौशल और शिक्षण शैली की सराहना करते हुए उन्हें एक आदर्श शिक्षक, अनुशासित व्यक्तित्व और संवेदनशील साहित्यकार बताया।

    समारोह की अध्यक्षता बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जगन्नाथ पाठक ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. शुक्ल ने अपने ज्ञान, अनुभव और सामाजिक दृष्टि से शिक्षा जगत को समृद्ध किया है। महाराष्ट्र के अमलनेर से आए प्रोफेसर डॉ. सुरेश माहेश्वरी ने उनके साथ बिताए साहित्यिक और शैक्षणिक अनुभव साझा करते हुए उनके रचनात्मक व्यक्तित्व की सराहना की।

    कार्यक्रम का सबसे भावुक और आकर्षक क्षण वह रहा जब डॉ. शुक्ल के 46 वर्षों के जीवन और कार्यों पर आधारित लगभग 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। उनके अभिन्न मित्र और सेवानिवृत्त इंजीनियर अरुणकुमार तिवारी द्वारा तैयार इस वृत्तचित्र में भारतीय वायुसेना से लेकर उच्च शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र तक की उनकी प्रेरणादायक यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। डॉक्यूमेंट्री के दौरान कई अतिथि भावुक भी नजर आए।

    समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और साहित्यकार मधुसूदन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। मंच संचालन अरुणकुमार तिवारी और मनोज कुमार ‘मृदुल’ ने प्रभावी ढंग से किया। वक्ताओं ने बताया कि डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल ने मात्र 17 वर्ष की आयु में भारतीय वायुसेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का दायित्व निभाया। लगभग 17 वर्ष 7 माह तक सैन्य सेवा देने के बाद उन्होंने शिक्षा और साहित्य को अपना जीवन समर्पित कर दिया और हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया।

    समारोह में भारतीय वायुसेना के उनके पूर्व साथी, शिक्षाविद, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार और विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। अंत में आयोजक इंजीनियर आशुतोष शुक्ल और आकांक्षा दीक्षित ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। प्रीतिभोज के साथ संपन्न हुआ यह समारोह केवल एक विदाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसे कर्मयोगी के सम्मान का उत्सव बन गया, जिसने अपने 46 वर्षों के सफर से समाज, शिक्षा और साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • पेपर लीक के विरोध में शिवपुरी के छात्र लामबंद, आंदोलन की अनुमति के लिए कलेक्टर को दिया ज्ञापन

    पेपर लीक के विरोध में शिवपुरी के छात्र लामबंद, आंदोलन की अनुमति के लिए कलेक्टर को दिया ज्ञापन


    शिवपुरी । पेपर लीक की लगातार सामने आ रही घटनाओं के विरोध में अब शिवपुरी के छात्र-छात्राओं ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को लेकर छात्राओं ने जिला प्रशासन से शांतिपूर्ण धरना और रैली की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग रहा है और अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ सरकार की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

    मंगलवार को छात्रा सोम्या और श्रुति जैन ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से प्रेरित होकर शिवपुरी के छात्र भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए अपने जिले में शांतिपूर्ण आंदोलन आयोजित करने का निर्णय लिया है।

    छात्राओं ने 21 से 24 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक शहर के पोलो ग्राउंड और माधव चौक पर धरना देने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही शहर में शांतिपूर्ण रैली निकालने का भी प्रस्ताव रखा गया है। उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह संविधान के दायरे में रहेगा और किसी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

    आवेदन में छात्राओं ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का प्रयोग है। प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा, जिसमें परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    छात्राओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं का मनोबल पेपर लीक जैसी घटनाओं से टूट रहा है। इससे न केवल ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं का भरोसा पूरी परीक्षा व्यवस्था से उठ सकता है।

    फिलहाल छात्र-छात्राएं जिला प्रशासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यदि अनुमति मिलती है तो शिवपुरी में आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में युवा सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। यह आंदोलन केवल पेपर लीक के विरोध तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और जवाबदेह व्यवस्था की मांग को भी प्रमुखता से उठाएगा। अब निगाहें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं कि वह इस शांतिपूर्ण आंदोलन को अनुमति देता है या नहीं।

  • श्रद्धालुओं की आस्था पर वार, शिवपुरी के मंदिर से दो दानपात्र चोरी; पुलिस जांच में जुटी

    श्रद्धालुओं की आस्था पर वार, शिवपुरी के मंदिर से दो दानपात्र चोरी; पुलिस जांच में जुटी


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के करैरा स्थित प्रसिद्ध बगीचा सरकार हनुमान मंदिर में चोरों ने आस्था पर हाथ डालते हुए सीता रसोई को निशाना बनाया। मंगलवार तड़के अज्ञात बदमाश रसोई का ताला तोड़कर अंदर घुसे और वहां रखे दो दानपात्र चोरी कर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद मंदिर समिति में हड़कंप मच गया। मामले की सूचना करैरा थाना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मंदिर परिसर में संचालित सीता रसोई का संचालन अन्नपूर्णा सेवा समिति द्वारा किया जाता है। समिति के सदस्य सुमित तिवारी ने बताया कि यहां प्रत्येक मंगलवार विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें करीब चार से पांच हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन 40 से 50 जरूरतमंद, गरीब और असहाय लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार दानपात्र में राशि डालकर इस सेवा कार्य में सहयोग करते हैं।

    मंगलवार सुबह जब समिति के सदस्य भंडारे की तैयारी के लिए सीता रसोई पहुंचे, तो मुख्य दरवाजे का ताला टूटा हुआ मिला। अंदर प्रवेश करने पर देखा कि कमरे में रखे दो बड़े बक्सों के ताले भी तोड़े गए थे और उनमें रखे दोनों दानपात्र गायब थे। घटना देखकर समिति के सदस्यों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

    समिति के अनुसार, चोरी हुए दानपात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा गुप्त रूप से दान की गई पांच हजार रुपए से अधिक की नकदी होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक राशि का पता जांच और रिकॉर्ड के आधार पर लगाया जाएगा। समिति के सदस्यों का कहना है कि यह केवल चोरी की घटना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और सेवा कार्य पर भी चोट है।

    सूचना मिलते ही करैरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ अन्य साक्ष्य भी जुटाने शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।

    मंदिर समिति ने प्रशासन से मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालुओं की आस्था सुरक्षित बनी रहे।
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  • मध्य प्रदेश विधानसभा में 7,765.77 करोड़ का पहला अनुपूरक बजट पेश, कल होगी चर्चा

    मध्य प्रदेश विधानसभा में 7,765.77 करोड़ का पहला अनुपूरक बजट पेश, कल होगी चर्चा


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत किया। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 7,765.77 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। इस पर बुधवार, 22 जुलाई को विधानसभा में विस्तृत चर्चा होगी।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बजट पर चर्चा के लिए समय निर्धारित किया। प्रस्तुत बजट में 907.59 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 6,858.18 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें सिंचाई परियोजनाओं, सड़क निर्माण, कृषि, पुलिस आधुनिकीकरण, परिवहन, शिक्षा और पर्यटन सहित कई क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है।

    नर्मदा घाटी विकास विभाग को सबसे बड़ा आवंटन
    अनुपूरक बजट में नर्मदा घाटी विकास विभाग को सबसे अधिक 3,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह राशि विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण कार्यों पर खर्च की जाएगी। वहीं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के तहत उपार्जन संस्थाओं को ऋण उपलब्ध कराने के लिए 2,220.62 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    सड़क और बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर
    लोक निर्माण विभाग को केंद्रीय सड़क निधि, ग्रामीण एवं जिला सड़कों के निर्माण और उन्नयन, भूमि अधिग्रहण मुआवजा, बड़े पुलों के निर्माण, सड़क सुदृढ़ीकरण तथा बीओटी परियोजनाओं के भुगतान के लिए 1,300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा राजस्व विभाग को राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि में अंतरित राशि के रूप में 397.54 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

    किसानों के लिए भी विशेष प्रावधान
    किसानों को राहत देने के उद्देश्य से किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के तहत भावांतर/फ्लैट रेट योजना के लिए 313.18 करोड़ रुपये तथा कपास उत्पादन मिशन के लिए 39.51 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    परिवहन और ई-बस सेवा को बढ़ावा
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के लिए 101 करोड़ रुपये तथा पीएम ई-बस सेवा योजना के लिए परिवहन विभाग को 28.26 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से इसी योजना के लिए 21.41 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान भी किया गया है।

    पुलिस, शिक्षा और पर्यटन को भी अतिरिक्त राशि
    गृह विभाग के तहत अंतर प्रचालित आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) के लिए 98.83 करोड़ रुपये और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 58.52 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

    शिक्षा क्षेत्र में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की लैपटॉप वितरण योजना के लिए 58.07 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।

    इसके अलावा पर्यटन नीति के क्रियान्वयन के लिए 30 करोड़ रुपये, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के लिए 25 करोड़ रुपये, जल संसाधन विभाग में डिक्रीधन भुगतान हेतु 10 करोड़ रुपये तथा घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजातियों की छात्रावास और छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए 6.02 करोड़ रुपये का प्रावधान भी इस अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है।

  • E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    नई दिल्ली । पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद भारत सरकार अब इथेनॉल के उपयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है। सरकार का फोकस अब केवल वाहन ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इथेनॉल को घरेलू रसोई ईंधन, एथेनॉल एटीएम, विमानन क्षेत्र के टिकाऊ ईंधन और निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही इथेनॉल उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और किसानों के लिए नए बाजार तैयार करना है।

    पिछले कुछ वर्षों में भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और गन्ना तथा अनाज उत्पादक किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। इस नीति के चलते देशभर में चीनी मिलों और अनाज आधारित डिस्टिलरी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश भी हुआ है।

    हालांकि इस सफलता के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसके लगभग 24 अरब लीटर वार्षिक स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके मुकाबले E20 कार्यक्रम के लिए सालाना लगभग 11 अरब लीटर इथेनॉल की आवश्यकता है। वहीं पेय पदार्थ, दवा और रासायनिक उद्योगों की संयुक्त मांग भी कुल उत्पादन क्षमता से काफी कम है। ऐसे में बड़ी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त क्षमता के बेहतर उपयोग के लिए सरकार नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है।

    इसी दिशा में इथेनॉल को घरेलू कुकिंग फ्यूल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। प्रस्तावित एथेनॉल एटीएम मॉडल के तहत उपभोक्ता विशेष कंटेनर में इथेनॉल भरवा सकेंगे और उसे विशेष रूप से तैयार किए गए स्टोव में इस्तेमाल कर सकेंगे। यदि यह मॉडल सफल होता है तो रसोई गैस पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकता है।

    सरकार की योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। भारत इथेनॉल के निर्यात की संभावनाओं पर भी सक्रियता से काम कर रहा है। ऐसे देशों की पहचान की जा रही है जहां इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य तो निर्धारित हैं, लेकिन उत्पादन क्षमता सीमित है। इससे भारतीय उत्पादकों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकते हैं और अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर उपयोग संभव होगा।

    विमानन क्षेत्र भी सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सतत विमानन ईंधन यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के उपयोग को बढ़ाने के लिए चरणबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। इस दिशा में इथेनॉल आधारित तकनीक से जेट ईंधन तैयार करने की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। यदि ये परियोजनाएं सफल रहती हैं तो देश में स्वच्छ विमानन ईंधन के उत्पादन को नई गति मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी समर्थन मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल के उपयोग का दायरा बढ़ने से केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कृषि, उद्योग और निर्यात को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। सरकार की नई रणनीति का उद्देश्य अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को आर्थिक अवसर में बदलना और भारत को वैश्विक बायोफ्यूल क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाना है।

  • सरकारी स्कूल में नहीं मिला एक भी छात्र, मिड-डे मील भी बंद; निरीक्षण में लापरवाही पर शिक्षकों को फटकार

    सरकारी स्कूल में नहीं मिला एक भी छात्र, मिड-डे मील भी बंद; निरीक्षण में लापरवाही पर शिक्षकों को फटकार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर बैराड़ तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने मंगलवार को पोहरी विकासखंड के सड़ और ककरई गांव के शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़ प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक मिली। यहां रिकॉर्ड में 33 छात्र दर्ज थे, लेकिन स्कूल में एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों के लिए बनने वाला मध्यान्ह भोजन भी तैयार नहीं किया गया था।

    निरीक्षण के समय विद्यालय में केवल एक शिक्षक मौजूद थे। छात्रों की शून्य उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही देखकर तहसीलदार ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित शिक्षक को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए।

    दरअसल, जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने हाल ही में सभी एसडीएम और तहसीलदारों को ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसी अभियान के तहत मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने सड़ और ककरई गांव के स्कूलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य शिक्षा और पोषण योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।

    सड़ प्राथमिक विद्यालय में मिली अव्यवस्थाओं के बाद तहसीलदार ककरई गांव पहुंचे, जहां प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। यहां चार शिक्षक उपस्थित मिले, लेकिन छात्रों की संख्या अपेक्षा से काफी कम थी। कम उपस्थिति को लेकर तहसीलदार ने शिक्षकों से जवाब-तलब किया और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने तथा अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश दिए।

    तहसीलदार ने शिक्षकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण पहुंचाना है। यदि विद्यालयों में छात्र ही नहीं आएंगे तो शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में लगातार सामने आ रही कम उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी योजनाओं के सही क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि नियमित निरीक्षण से न केवल व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की उपस्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

  • टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के कारोबारी माहौल और बदलते वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर बनी हुई है। इसी क्रम में बाजार विशेषज्ञों ने कई चर्चित शेयरों पर अपनी रणनीति साझा की है। उनके अनुसार, मेटल, बैंकिंग, ज्वेलरी और उपभोक्ता क्षेत्र के कुछ शेयर आने वाले समय में निवेशकों के लिए अवसर प्रदान कर सकते हैं, हालांकि निवेश से पहले जोखिम प्रबंधन और उचित स्तरों का ध्यान रखना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मेटल सेक्टर फिलहाल सकारात्मक संकेत दे रहा है। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में सुधार और मांग में संभावित मजबूती का लाभ भारतीय कंपनियों को मिल सकता है। इसी वजह से टाटा स्टील को इस समय प्रमुख पसंद के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लगभग 183 रुपये के आसपास यह शेयर निवेश के लिए उपयुक्त स्तर पर माना जा सकता है। यदि किसी कारणवश इसमें और गिरावट आती है तथा यह 170 से 172 रुपये के दायरे में पहुंचता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पोर्टफोलियो में जोड़ने का अवसर माना जा सकता है।

    विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि में टाटा स्टील के लिए 215 से 220 रुपये का लक्ष्य संभावित माना जा रहा है। वहीं, यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और मेटल सेक्टर में मजबूती जारी रहती है, तो दीर्घावधि में यह शेयर 270 रुपये तक पहुंचने की क्षमता रख सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शेयर 170 रुपये के नीचे साप्ताहिक आधार पर बंद होता है, तो निवेशकों को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जोखिम सीमित करने के लिए स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश केवल संभावित रिटर्न को देखकर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जोखिम और पूंजी संरक्षण को भी समान महत्व देना चाहिए। किसी भी शेयर में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जाती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है और औसत खरीद मूल्य भी बेहतर बन सकता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को केवल शेयर की कीमत पर नहीं बल्कि कंपनी की आय, लाभप्रदता, कर्ज की स्थिति, भविष्य की विकास योजनाओं और उद्योग की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना रखती हैं।

    बाजार में फिलहाल वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कमोडिटी कीमतों, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में अनुशासित निवेश और तय जोखिम सीमा के साथ बनाई गई रणनीति ही अस्थिर बाजार में बेहतर परिणाम देने की संभावना रखती है। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें तथा आवश्यकता होने पर वित्तीय सलाहकार की राय भी लें।

  • Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    नई दिल्ली । ई-कॉमर्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Meesho लिमिटेड में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। कंपनी के ताजा शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार पिछले दो तिमाहियों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) दोनों ने अपनी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की है। बाजार विशेषज्ञ इसे कंपनी के बेहतर परिचालन प्रदर्शन, मजबूत वित्तीय संकेतकों और भविष्य की विकास संभावनाओं के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत मान रहे हैं।

    जून 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है। इससे पहले मार्च 2026 में यह 4.2 प्रतिशत थी। लगातार दूसरी तिमाही में विदेशी निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। शेयर बाजार में FII की लगातार खरीदारी को अक्सर सकारात्मक निवेश संकेत माना जाता है।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी कंपनी में अपना निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। दिसंबर 2025 में DII की हिस्सेदारी 5.3 प्रतिशत थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 5.6 प्रतिशत हुई और जून 2026 में तेज उछाल के साथ 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू संस्थानों ने Meesho में निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। इससे कंपनी के प्रति घरेलू निवेशकों का बढ़ता विश्वास भी स्पष्ट होता है।

    संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ कंपनी की प्रमोटर और सार्वजनिक हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई है। प्रमोटर हिस्सेदारी 16.6 प्रतिशत से घटकर 16.4 प्रतिशत रह गई, जबकि सार्वजनिक हिस्सेदारी 73.7 प्रतिशत से घटकर 69.3 प्रतिशत पर आ गई। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के शेयरों का बड़ा हिस्सा अब संस्थागत निवेशकों के पास जा रहा है, जिसे बाजार स्थिर निवेश का सकारात्मक संकेत मानता है।

    कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में योगदान मार्जिन 170 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4 प्रतिशत तक पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी लागत में कमी, प्रीपेड ऑर्डर बढ़ने तथा डिलीवरी विफल होने की घटनाओं में कमी आने से परिचालन खर्च नियंत्रित हुआ है। इससे कंपनी की लाभप्रदता में सुधार हुआ है और भविष्य में बेहतर नकदी प्रवाह की संभावना भी मजबूत हुई है।

    Meesho का विज्ञापन कारोबार भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कंपनी के विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय विक्रेताओं की संख्या में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही विज्ञापन पर खर्च करने वाले कारोबारियों की संख्या और बजट दोनों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कंपनी द्वारा AI आधारित वॉयस शॉपिंग असिस्टेंट का उपयोग ग्रामीण और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में किया जा रहा है, जिससे ग्राहक अधिग्रहण लागत कम होने और कारोबार के विस्तार में मदद मिल रही है।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन, लागत नियंत्रण, विज्ञापन कारोबार का विस्तार और तकनीक आधारित रणनीति Meesho की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। यही कारण है कि संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय नतीजों और कारोबार की प्रगति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।