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  • पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, सोना-चांदी में जोरदार उछाल से बाजार में हलचल

    पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, सोना-चांदी में जोरदार उछाल से बाजार में हलचल


    नई दिल्ली। देश में 7 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तेल विपणन कंपनियों IOC, BPCL और HPCL ने आज भी ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। एक्साइज ड्यूटी में पहले हुई कटौती का असर अब भी दिखाई दे रहा है, जिसके चलते पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है।

    देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग स्तर पर बनी हुई हैं। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, पटना, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतें पिछले दिनों की तरह ही बनी हुई हैं। खास बात यह है कि कई बड़े शहरों में पेट्रोल अभी भी ₹100 के पार बना हुआ है, जबकि डीजल अधिकतर जगहों पर ₹100 से नीचे है।

    वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार से निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। स्पॉट गोल्ड करीब 3 प्रतिशत से अधिक उछलकर 4700 डॉलर प्रति औंस के स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं चांदी में भी तेज उछाल देखने को मिला है, जहां यह 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 77 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करती दिखी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में नरमी और संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। इसके साथ ही डॉलर के कमजोर होने से सोने की मांग बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आई है। जब डॉलर कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता हो जाता है और निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार में एक अलग प्रभाव डाला है। इससे महंगाई के दबाव में थोड़ी कमी आई है और निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोने और चांदी की ओर बढ़ा है।

    फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियां बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी राजनीतिक या आर्थिक बदलाव का सीधा असर सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

  • थलापति विजय की राजनीति में बड़ी हलचल: सुपरस्टार से सीएम तक का सफर और तृषा कृष्णन की एंट्री की चर्चा तेज

    थलापति विजय की राजनीति में बड़ी हलचल: सुपरस्टार से सीएम तक का सफर और तृषा कृष्णन की एंट्री की चर्चा तेज


    नई दिल्ली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में शुमार थलापति विजय ने राजनीति में कदम रखकर सबको चौंका दिया है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं।

    234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, ऐसे में पार्टी बहुमत से थोड़ी दूर रह गई है, लेकिन विपक्षी और सत्ता दोनों खेमों में इस नतीजे ने हलचल मचा दी है।

    दो सीटों पर जीत, अब एक छोड़ना तय

    विजय ने इस चुनाव में दो सीटों चेन्नई की पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से जीत हासिल की है। लेकिन नियम के अनुसार कोई भी उम्मीदवार एक ही सीट रख सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि विजय पेरंबूर सीट अपने पास रखेंगे, जबकि तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से इस्तीफा दिया जा सकता है। इसी सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

    क्या तृषा कृष्णन राजनीति में आएंगी?

    इसी राजनीतिक हलचल के बीच सबसे बड़ा नाम सामने आया है अभिनेत्री तृषा कृष्णन का। चर्चा है कि TVK उन्हें उपचुनाव में तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से उम्मीदवार बनाना चाहती है। पार्टी का मानना है कि उनकी लोकप्रियता वोट बैंक को मजबूत कर सकती है।

    हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक तृषा अभी राजनीति में आने को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं हैं और इस प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं। उनका अब तक किसी राजनीतिक दल से सीधा जुड़ाव नहीं रहा है।

     गठबंधन की तलाश में TVK
    सरकार बनाने के लिए TVK को किसी बड़ी पार्टी का समर्थन चाहिए। इसी वजह से तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी का झुकाव या तो DMK या AIADMK की ओर हो सकता है, हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    क्या विजय बनेंगे मुख्यमंत्री?
    सूत्रों के मुताबिक विजय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का अवसर देने की मांग की है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़
    थलापति विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह रोमांचक बना दिया है। एक तरफ गठबंधन की सियासत, दूसरी तरफ उपचुनाव की तैयारी और तीसरी तरफ तृषा कृष्णन की संभावित एंट्री—इन सबने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

    अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में विजय किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं और क्या वाकई सिनेमा की एक और बड़ी स्टार राजनीति में उतरती हैं।

  • बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता

    बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में भाजपा (BJP) की शानदार जीत के बाद अब नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है। शपथ ग्रहण नौ मई को कोलकाता (Kolkata.) के ब्रिगेड परेड ग्राउंड (Brigade Parade Ground) में सुबह दस बजे होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगते ही तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो आठ मई को भाजपा विधायकों की बैठक होगी। इस सबमें सबसे अहम बात है पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का बंगाल जाना।

    अमित शाह (Amit Shah) के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद शायद यह पहला मौका होगा कि जब वह किसी राज्य के नतीजे सामने आने के बाद बतौर पर्यवेक्षक उस राज्य का दौरा करेंगे। भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो यह कोई सामान्य घटना नहीं है। ऐसे में कयासों का दौर शुरू हो चुका है।


    कौन बनेगा बंगाल का मुख्यमंत्री?

    भाजपा ने असम और बंगाल में शानदार जीत दर्ज की है। असम में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) का नाम तय माना जा रहा है। पूरे देश की निगाहें बंगाल पर टिकी हुई हैं। राज्य में सरकार बनाने की कवायद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर जा सकते हैं। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शपथ ग्रहण से पहले गृह मंत्री का दौरा कई मायनों में अहम है। पर्यवेक्षक के रूप में गृह मंत्री दौरे के दौरान कई अहम फैसले कर सकते हैं। इसमें मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्रियों के नाम पर रणनीति बनेगी। बैठक में पश्चिम बंगाल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

    बंगाल के भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने की रेस में शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वह ममता बनर्जी के कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें पार्टी ने दो दो सीटों से उतारा था। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर टीएमसी को मात दी है। पिछली बार उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इस चुनाव में उन्होंने भवानीपुर में भी ममता को ही मात दी है। इससे उनका कद भाजपा में और बड़ा हो गया है। हालांकि अमित शाह के पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद से यह चर्चा जरूर होने लगी है कि अगर सबकुछ सामान्य तरीके से होना होता तो गृह मंत्री खुद बतौर पर्यवेक्षक बंगाल का दौरा नहीं करते।


    शुभेंदु नहीं तो कौन बनेगा बंगाल का CM?

    भारतीय जनता पार्टी ने राज्यों में मुख्यमंत्री चुनने में हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली इसका ताजा उदाहरण हैं। तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए भाजपा ने ऐसे नाम को आगे बढ़ाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अब अमित शाह के दौरे के बाद से सवाल उठ रहा है कि बंगाल में भी भाजपा ऐसा ही कुछ तो नहीं करने जा रही है। हालांकि, बाकी राज्यों की तुलना में बंगाल की स्थिति काफी अलग है। यहां भाजपा को ऐसे नेतृत्व की जरूरत होगी जो पार्टी के भविष्य के हित में हो।

  • भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप

    भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में धार (Dhar ) की ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala) को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) में चल रही सुनवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब इस बहुचर्चित विवाद में जैन समाज की एंट्री ने कानूनी और धार्मिक बहस को और तेज कर दिया है। जैन समाज की ओर से दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि भोजशाला मूल रूप से जैन धरोहर रही है, जहां प्राचीन काल में जैन गुरुकुल और मंदिर संचालित होते थे।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जैन समाज की जनहित याचिका को मुख्य याचिका के साथ टैग कर लिया। इसके बाद अब भोजशाला विवाद में जैन पक्ष की कानूनी मौजूदगी भी मजबूत से दर्ज हो गई है। इस मामले में बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जैन समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा।

    राजभर ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्राचीन संदर्भों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि राजा भोज ने यह भूमि जैन आचार्य मानतुंग को दान में दी थी। मानतुंग वही आचार्य हैं जिन्होंने जैन धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक सूत्र ‘भक्तामर स्तोत्र’ की रचना की थी। उन्होंने दावा किया कि भोजशाला परिसर में कभी जैन मंदिर और गुरुकुल हुआ करता था, साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर जोर देते हुए कहा, ‘देश के संविधान के तहत जैन धर्म के अनुयायियों को भोजशाला परिसर में पूजा का अधिकार है।’


    भोजशाला की संरचना में जैन वास्तुकला का स्पष्ट उल्लेख

    राजभर ने तर्क दिया कि धार के राजा भोज हिंदू और जैन, दोनों धर्मों के विद्वानों के संरक्षक थे। उनके अनुसार भोजशाला में संचालित शिक्षण केंद्र में जैन विद्वान भी मौजूद थे। राजभर ने ऐतिहासिक लेखों और पुरातात्विक सामग्री के हवाले से दावा किया कि भोजशाला की संरचना के कुछ हिस्सों में जैन वास्तुकला का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।


    कुछ-कुछ देलवाड़ा के जैन मंदिरों जैसी है स्थापत्य कला

    उन्होंने शिमला की ‘गवर्नमेंट सेंट्रल प्रेस’ द्वारा 1882 में प्रकाशित रिपोर्ट और अन्य प्रकाशनों का जिक्र भी किया जिसमें विवादित परिसर की मस्जिद के कुछ हिस्सों को जैन समुदाय से जुड़ी इमारतों के अवशेषों से निर्मित बताया गया था और इसके कुछ गुंबदों तथा खंभों की तुलना माउंट आबू स्थित प्रसिद्ध देलवाड़ा जैन मंदिरों से की गई थी।


    ‘लंदन में रखी मूर्ति जैन यक्षिणी अम्बिका देवी की’

    राजभर ने कुछ चित्रों और संग्रहालय के विवरणों का हवाला देते हुए कहा कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहा है, वह असल में जैन यक्षिणी अम्बिका की मूर्ति है। उन्होंने तर्क दिया कि इस मूर्ति में जैन तीर्थंकरों के प्रतीक चिन्ह हैं और यह विशिष्ट खूबी इसे देवी सरस्वती की हिंदू शैली की प्रतिमाओं से अलग करती है।


    राजभर बोले- सरकार का रवैया संदेह पैदा कर रहा

    राजभर ने यह भी कहा कि एएसआई ने भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इस स्मारक से जैन समुदाय के ऐतिहासिक संबंधों को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार विवादित स्मारक को लेकर एक वर्ग के दावों का सीधे तौर पर समर्थन कर रही है और उसका यह रवैया संदेह उत्पन्न करता है।


    ASI पर लगाया जैन सबूतों को अनदेखा करने का आरोप

    उधर जैन समाज की तरफ से अधिवक्ता प्रिया जैन ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस मामले की जानकारी दी और दावा किया कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की हालिया सर्वे रिपोर्ट में भोजशाला में मिले जैन सबूतों को अनदेखा किया गया। प्रिया के अनुसार ASI की खुदाई व सर्वे में भोजशाला से जैन तीर्थंकरों और यक्ष-यक्षणियों की कई खंडित मूर्तियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में इन अवशेषों को स्पष्ट रूप से जैन धर्म से जुड़ा नहीं बताया।


    जैन तीर्थकरों और यक्ष-यक्षणियों की खंडित मूर्तियां मिलीं

    प्रिया जैन के मुताबिक सर्वे के दौरान सात फणों वाली ‘सप्त फणी कैनोपी’ संरचना भी सामने आई है, जो जैन प्रतीकों से मेल खाती है। उन्होंने कहा कि जैन समाज की यह लड़ाई किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर है। जैन समाज ने यह भी दावा किया कि लंदन में संरक्षित वाग्देवी प्रतिमा और उससे जुड़े शिलालेख भोजशाला के जैन इतिहास की पुष्टि करते हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर समाज ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना के समान अधिकार की मांग हाईकोर्ट से की है।

    हिंदू समाज जिसे देवी सरस्वती की मूर्ति बताता है, वह असल में जैन धर्म की यक्षिणी अम्बिका देवी की मूर्ति है। फोटो में लंदन म्यूजियम में रखी मूर्ति व उसके साथ लिखा उसका परिचय दिख रहा है।


    खुर्शीद ने लंदन में रखी मूर्ति को लेकर भी किया था अलग दावा

    इससे पहले कुछ दिनों पहले हुई मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि धार में स्थित भोजशाला पर पहला हमला मुस्लिमों ने नहीं, बल्कि गुजरात के सोलंकी शासकों ने किया था, साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लंदन के म्यूजियम में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू समाज वाग्देवी की बता रहा है वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। अपने दावे के समर्थन में खुर्शीद ने लेखक रामसेवक गर्ग की लिखी पुस्तक और 2003 में लिखे गए ब्रिटिश म्यूजियम के पत्र का हवाला भी दिया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि ‘धार को पहले गुजरात के सोलंकी शासकों ने तहस-नहस किया था, जबकि मुस्लिम शासकों ने उजड़े ढांचे को फिर से व्यवस्थित किया था।’

    इसके साथ ही खुर्शीद ने साल 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भेजे पत्र का हवाला दिया था और यह दावा भी किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। बता दें कि भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।

  • Rajasthan: 900 करोड़ के जल जीवv मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार

    Rajasthan: 900 करोड़ के जल जीवv मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission- JJM) घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी (Mahesh Joshi) को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 900 करोड़ रुपए के कथित घोटाले में यह कार्रवाई की गई है। आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार कर रिश्वत ली थी।

    इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी महेश जोशी को इसी मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की और न ही कोई पैसा लिया। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें 3 दिसंबर 2025 को जमानत मिली थी।


    22 अधिकारियों समेत दर्ज हुई थी FIR

    ACB ने इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इनमें जल जीवन मिशन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर टेंडर जारी कर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया गया।


    ईमेल आईडी से मिला बड़ा सुराग

    ACB को जांच के दौरान कुछ संदिग्ध ईमेल आईडी से महत्वपूर्ण लीड मिली थी। इन्हीं के आधार पर अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत का खुलासा हुआ। अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।


    सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के बाद कार्रवाई

    इससे पहले 9 अप्रैल को जलदाय विभाग के पूर्व ACS सुबोध अग्रवाल को भी ACB ने गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान महेश जोशी की भूमिका को लेकर उनसे पूछताछ की गई थी। अब ACB ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए पूर्व मंत्री तक पहुंच बनाई है।

  • झारखंड सरकार का बड़ा फैसला…. तंबाकू युक्त गुटखा-पान मसाला पर लगाया एक साल का प्रतिबंध

    झारखंड सरकार का बड़ा फैसला…. तंबाकू युक्त गुटखा-पान मसाला पर लगाया एक साल का प्रतिबंध


    रांची।
    झारखंड (Jharkhand) में जन-स्वास्थ्य (Public Health) की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार (State Government) ने तंबाकू और निकोटीन (Tobacco and Nicotine) युक्त गुटखा और पान मसाला (Gutkha and pan masala) के निर्माण, भंडारण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से एक आदेश जारी किया गया है।

    अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह प्रतिबंध उन सभी उत्पादों पर लागू होगा, जो किसी भी नाम से बाजार में बेचे जा रहे हों, यदि उनमें तंबाकू या निकोटीन की मात्रा पाई जाती है। आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार ने यह फैसला खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम-2006 की धारा 30(2)(ए) और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियमन 2011 के नियम के तहत लिया है। इसमें कहा गया है कि प्रतिबंध का यह आदेश जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान प्रतिबंधित तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पकड़ा जाता है, तो कानून सम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • उत्तराखंड के चंपावत में 16 साल की किशोरी से गैंगरेप…. भाजपा नेता, एक अग्निवीर समेत 3 पर केस

    उत्तराखंड के चंपावत में 16 साल की किशोरी से गैंगरेप…. भाजपा नेता, एक अग्निवीर समेत 3 पर केस


    चंपावत।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चम्पावत (Champawat) में दोस्त संग शादी में गई 16 वर्षीय किशोरी (16-Year-old Teenager) दरिंदगी का शिकार हो गई। उसके दोस्त, भाजपा नेता समेत तीन लोगों ने चाकू नोक पर उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता एक सुनसान घर में निर्वस्त्र मिली। उसके हाथ-पैर भी बंधे हुए थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल तीनों फरार हैं। आरोपियों में एक अग्निवीर बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, पीड़ित के पिता ने तहरीर देकर बताया कि उनकी बेटी चम्पावत की एक दुकान में काम करती है। पांच मई की शाम को वह घर नहीं लौटी। फोन करने पर उसने बताया कि सल्ली निवासी उसका दोस्त विनोद सिंह रावत उसे एक शादी समारोह में ले गया है। लेकिन, देर रात तक वह घर नहीं लौटी। रात करीब डेढ़ बजे बेटी ने पिता को फोन किया, लेकिन तुरंत कट गया और फिर मोबाइल ऑफ हो गया। पिता ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी। बुधवार तड़के चार बजे पुलिस और ग्रामीणों को किशोरी सल्ली गांव में एक बंद कमरे में रस्सी से बंधी मिली।


    चाकू की नोंक पर दरिंदगी

    किशोरी ने बताया कि सल्ली निवासी 20 वर्षीय विनोद सिंह रावत, 30 वर्षीय नवीन सिंह और भाजपा नेता 45 वर्षीय पूरन सिंह रावत ने गले पर चाकू रखकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद तीनों ने रस्सी से बांधकर उसे कमरे में बंद कर दिया। कोतवाल बीएस बिष्ट ने बताया कि मामले की जांच एसआई प्रियंका मौर्या को सौंपी गई है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए हैं।

    पीड़ित किशोरी का मेडिकल कराकर उसकी काउंसलिंग कराई गई है। पूरन सिंह रावत पूर्व में तल्लादेश से भाजपा का मंडल उपाध्यक्ष और सल्ली गांव का प्रधान रह चुका है। भाजपा के तल्लादेश मंडल अध्यक्ष कैलाश सिंह बोहरा ने बताया कि कुछ समय पूर्व नई कार्यकारिणी के गठन में उसे पद से हटाया गया था।


    चम्पावत को चौथी गैंग रेप की वारदात ने दहलाया

    चम्पावत में हुए गैंगरैप की वारदात ने पहाड़ की शांत वादियों को झकझोर कर रख दिया है। गैंगरेप की घटना से महिला सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 13 साल के भीतर ही यह चौथी शर्मशार करने वाली वारदात है।


    पीड़िता के पिता ने कराया मुकदमा

    चम्पावत में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने देवभूमि को एक बार फिर से हिला कर रख दिया है। इस घटना ने एक बार फिर से महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता के पिता की दी तहरीर में कहा गया है कि तीन लोगों ने उसके साथ चाकू और धारदार हथियार बसूला को उसके गर्दन पर रख कर गैंग रेप किया। पुलिस पूछताछ में उसने ये भी बताया कि तीनों ने उसे रस्सी से बांध कर कमरे में बंद कर दिया। वैसे जिले में गैंगरेप की ये पहली वारदात नहीं है। इससे पूर्व भी जिले में गैंगरेप के मामले हो चुके हैं।


    पूर्व में गैंगरेप के मामले

    वर्ष 2003 में चम्पावत में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन को हिरासत में लिया गया था। अक्टूबर 2023 में सूखीढांग क्षेत्र में एक महिला के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। जबकि जुलाई 2024 में तल्लापाल बिलौना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ तीन युवकों ने दुष्कर्म किया था। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। बहरहाल जो भी हो गैंगरेप से महिला सुरक्षा पर खतरा है।

    चंपावत एसपी रेखा यादव ने बताया कि चम्पावत के सल्ली गांव में 16 साल की एक नाबालिग बालिका से सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई है। पीड़िता के पिता की तहरीर पर तीनों आरोपियों के खिलाफ चम्पावत कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    गैंगरेप का एक आरोपी अग्निवीर में भर्ती!
    आरोपी विनोद का चयन अग्निवीर में हुआ था। कुछ समय पूर्व बनबसा में हुई भर्ती के दौरान विनोद ने शारीरिक दक्षता और मेडिकल पास किया था। बताया जाता है कि विनोद का अग्निवीर का कॉल लेटर आना शेष था।


    फॉरेंसिक टीम ने जांच की

    चम्पावत। गैंगरेप की घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। फारेंसिक टीम ने सल्ली स्थित डेयरी के पास के कमरे में पहुंच कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के अनुसार फील्ड यूनिट ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित किए।


    पिता के संरक्षण में भेजी नाबालिग बालिका

    बुधवार को जिला अस्पताल में पीड़िता का मेडिकल चेकअप किया गया। जिसके बाद सीडब्ल्यूसी ने पीड़िता की काउंसलिंग की। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष आनंदी अधिकारी ने बताया कि काउंसलिंग में पीड़िता ने बीमार पिता के साथ रहने की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि इसके बाद पीड़िता को पिता के संरक्षण में भेज दिया। साथ ही किसी भी तरह की दिक्कत होने पर कमेटी को जानकारी देने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के बाद जांच अधिकारी पीड़िता को लेकर 164 के बयान लिए कोर्ट ले गई।

  • अंतरिक्ष में धरती से 30% बड़े ‘सुपर-अर्थ’ की सतह का पहली बार अध्ययन, जेम्स वेब टेलीस्कोप ने खोले रहस्य

    अंतरिक्ष में धरती से 30% बड़े ‘सुपर-अर्थ’ की सतह का पहली बार अध्ययन, जेम्स वेब टेलीस्कोप ने खोले रहस्य

    वॉशिंगटन। अंतरिक्ष विज्ञान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी दूरस्थ चट्टानी ग्रह की सतह का विस्तृत अध्ययन किया है। यह शोध जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से किया गया है, जिसमें एलएचएस 3844 बी नामक एक सुपर-अर्थ ग्रह के बारे में अहम जानकारियां सामने आई हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ग्रह हमारे सौरमंडल के बुध ग्रह जैसा बेहद गर्म, अंधकारमय और पूरी तरह निर्जीव हो सकता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ में प्रकाशित हुए हैं।

    धरती से 48.5 प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद है यह ग्रह
    एलएचएस 3844 बी पृथ्वी से लगभग 48.5 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और आकार में हमारे ग्रह से करीब 30% बड़ा है। इसे सुपर-अर्थ श्रेणी में रखा गया है। सुपर-अर्थ वे ग्रह होते हैं जो पृथ्वी से बड़े तो होते हैं, लेकिन गैसीय दानव ग्रहों जितने विशाल नहीं होते।

    बेहद तेज कक्षा में घूमता है ग्रह
    यह ग्रह अपने तारे के बेहद करीब है और केवल 11 घंटे में अपने तारे का एक चक्कर पूरा कर लेता है। इस तेज परिक्रमा के कारण इसकी सतह पर अत्यधिक तापमान और कठोर परिस्थितियां बनी रहती हैं।

    वातावरण का कोई संकेत नहीं
    शोध में यह पाया गया है कि ग्रह पर किसी भी प्रकार का वातावरण मौजूद नहीं है। न तो वहां गैसीय परत है जो तापमान को नियंत्रित कर सके और न ही सतह को विकिरण से बचा सके। इसका मतलब यह है कि ग्रह सीधे अंतरिक्षीय विकिरण और उल्कापिंडों के प्रभाव में रहता है।

    बेसाल्ट जैसी चट्टानी सतह के संकेत
    वैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रह की सतह पृथ्वी जैसी नहीं है। प्रारंभिक विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि इसकी सतह बेसाल्ट चट्टानों से बनी हो सकती है, जो ज्वालामुखीय लावा के ठंडा होने से बनती हैं।

    एमआईआरआई उपकरण ने निभाई अहम भूमिका
    इस अध्ययन में जेम्स वेब टेलीस्कोप पर लगे मिड-इंफ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (MIRI) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस उपकरण ने ग्रह से आने वाली इन्फ्रारेड रोशनी का विश्लेषण किया और सतह के तापीय गुणों का अध्ययन संभव बनाया। वैज्ञानिक सीधे ग्रह की तस्वीर लेने में सफल नहीं हो सके, लेकिन ग्रह और उसके तारे से आने वाले प्रकाश में सूक्ष्म बदलावों का विश्लेषण कर स्पेक्ट्रम तैयार किया गया, जिससे उसकी सतह की संरचना का अनुमान लगाया गया।

    भविष्य की खोजों के लिए बड़ी उम्मीद
    विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भविष्य में अन्य चट्टानी ग्रहों की सतह और भूगर्भीय इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह संभावना बढ़ती है कि आने वाले समय में दूरस्थ ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं की भी गहराई से जांच की जा सकेगी।

  • पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा

    पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की सालगिरह से ठीक पहले पंजाब (Punjab) में दो सैन्य ठिकानों के बाहर हुए धमाकों के बाद पंजाब (Punjab) में हाई अलर्ट (High alert) जारी किया गया है। पूरे पंजाब में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, आर्मी बेस, पैरामिलिट्री कैंप और दूसरे जरूरी आधारभूत संरचना के आसपास पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और चेकपॉइंट बनाए गए हैं। बॉर्डर पर भी बीएसएफ ने चौकसी बढ़ा दी है। मंगलवार शाम को जालंधर के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के पंजाब फ्रंटियर हेडक्वार्टर के पास और इसी रात अमृतसर में आर्मी के खासा कैंप के पास धमाके हुए थे। अब एनआईए, पंजाब पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगा रही है कि क्या धमाके के तार आपस में जुड़े हुए थे?

    धमाकों के समय ने जांच में एक और पहलू जोड़ दिया है और वह है ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह। हालांकि, अधिकारियों ने कोई सीधा कनेक्शन नहीं निकाला है, लेकिन उन्होंने कहा कि इस इत्तेफाक को बड़े सुरक्षा मूल्यांकन में शामिल किया जा रहा है क्योंकि बॉर्डर स्टेट पंजाब पहले भी कई आतंकी हमले झेल चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में भी पाकिस्तान ने पंजाब के सरहदी जिलों पठानकोट, अमृतसर, फिरोजपुर, जालंधर के आदमपुर एयरबेस को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया था।


    सेना ने बोर्डर से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया

    खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का में सतर्कता बढ़ाई गई है। फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन और विभिन्न बॉर्डर चौकियों पर पुलिस नाके लगाकर तलाशी अभियान तेज किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से अति संवेदनशील एवं सीमावर्ती जिला पठानकोट में पुलिस ने सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए हैं। पठानकोट के साथ लगते जम्मू-कश्मीर व हिमाचल के इंटर स्टेट नाकों पर पुलिस ने सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए फोर्स बढ़ा दी है। पठानकोट की बड़ी सीमा पाकिस्तान के साथ सटी है।

    बुधवार को पठानकोट पुलिस और सेना की ओर से भारत-पाक सीमा से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जम्मू और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले सभी एंट्री पॉइंट्स पर पुलिस की पैनी नजर है। हर आने-जाने वाले वाहन की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और बिना पहचान पत्र के किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। एसएसपी पठानकोट दलजिंदर सिंह ढिल्लो के दिशा निर्देशों के अनुसार पूरे जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कल रात से ही पठानकोट के साथ लगते जम्मू व हिमाचल से आने वाली हर गाड़ी को चेक किया जा रहा है।


    चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस के मुख्यालय पर हाई सिक्योरिटी

    पंजाब में दोहरे ब्लास्ट के बाद राजधानी चंडीगढ़ में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सख्ती से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल बदलाव एहतियात के तौर पर किया गया है, क्योंकि यह इलाका पहले से ही संवेदनशील श्रेणी में आता है।

    मुख्यालय के पास ही चंडीगढ़ पुलिस का दफ्तर और पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का कार्यालय होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के पीछे लोहे के बड़े बड़े गेट लगाए गए हैं ताकि बाहर से कोई विस्फोटक परिसर में न फैंका जा सके।


    आईएसआई, खालिस्तानी और गैंगस्टरों के गठजोड़ से बढ़ी चिंताएं

    पंजाब में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर गंभीर चिंता सामने आ रही है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। हाल के घटनाक्रम और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से साफ है कि राज्य को अस्थिर करने की कोशिशें सुनियोजित तरीके से की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी बड़ी चुनौती बन चुकी है।

    अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में कई बार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराए जाने के मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी आतंकी शामिल हैं। इनमें रंजीत नीटा और लखबीर लंडा जैसे नाम प्रमुख हैं। हालांकि पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई साजिशें नाकाम हुई हैं। इसके बावजूद सीमा पार से मिल रहे समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के कारण चुनौती बनी हुई है।

  • शुभेंदु अधिकारी को नजरअंदाज करना BJP के लिए मुश्किल, बंगाल में मुख्यमंत्री चयन पर बढ़ा सस्पेंस

    शुभेंदु अधिकारी को नजरअंदाज करना BJP के लिए मुश्किल, बंगाल में मुख्यमंत्री चयन पर बढ़ा सस्पेंस

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची भारतीय जनता पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बीच पार्टी नेतृत्व में नाम को लेकर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है और जल्द ही अंतिम फैसला होने की संभावना है।

    सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गुरुवार को कोलकाता पहुंचने की संभावना है, जबकि शुक्रवार शाम भाजपा विधायक दल की अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसी बीच शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या की घटना ने राज्य की राजनीति में तनाव और बढ़ा दिया है।

    सीएम पद की रेस में कई चेहरे
    मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि ममता बनर्जी के विकल्प के तौर पर किसी महिला चेहरे को आगे लाने पर विचार हो सकता है, जिसमें अग्निमित्रा पॉल और रूपा गांगुली के नाम शामिल हैं। इसके अलावा संगठनात्मक अनुभव के आधार पर प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि इन सभी के बीच सबसे ज्यादा चर्चा और कार्यकर्ताओं का झुकाव शुभेंदु अधिकारी की ओर देखा जा रहा है।

    शुभेंदु अधिकारी क्यों हैं सबसे मजबूत दावेदार?
    शुभेंदु अधिकारी को भाजपा की चुनावी सफलता का अहम चेहरा माना जा रहा है। 2021 में नंदीग्राम में और बाद में भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में उन्होंने सत्ताधारी टीएमसी नेतृत्व को कड़ी चुनौती दी। पूर्व में तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकार रह चुके शुभेंदु को राज्य की राजनीति की गहरी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन को जमीन पर मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई।

    कार्यकर्ताओं की पहली पसंद
    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, जमीनी कार्यकर्ता शुभेंदु अधिकारी को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। उनका मानना है कि उन्होंने लगातार टीएमसी के खिलाफ संघर्ष किया और राज्य में भाजपा को मजबूत पहचान दिलाई।

    नजरअंदाज करने के संभावित खतरे
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा नेतृत्व शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री नहीं बनाता है तो इसका असर संगठन पर पड़ सकता है। इससे उन कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है जिन्होंने चुनाव में कड़ी मेहनत की है। साथ ही, शुभेंदु का प्रशासनिक अनुभव, क्योंकि वे पहले राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं, नए शासन संचालन में बेहद अहम माना जा रहा है।

    क्या भाजपा करेगी सरप्राइज फैसला?
    भाजपा का इतिहास रहा है कि वह कई बार अप्रत्याशित फैसले लेकर सभी को चौंकाती है। ऐसे में शमिक भट्टाचार्य या अग्निमित्रा पॉल जैसे नामों को भी अंतिम क्षण में आगे किया जा सकता है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या भाजपा शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जताएगी या फिर कोई नया चेहरा सामने लाकर सबको चौंका देगी?