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  • डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा

    डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा


    नई दिल्ली । 
    भारत में डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने जापानी दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित डेंगू वैक्सीन QDENGA को देश में उपयोग की मंजूरी दे दी है। यह भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है, जिसे 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए अनुमोदित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश में डेंगू संक्रमण की रोकथाम और गंभीर मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    हर वर्ष मानसून के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में डेंगू के मामलों में तेज वृद्धि देखने को मिलती है। हजारों लोग इस मच्छरजनित बीमारी से प्रभावित होते हैं, जबकि गंभीर संक्रमण के कारण कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। ऐसे में प्रभावी वैक्सीन की उपलब्धता को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    QDENGA की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि संबंधित व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं। यह वैक्सीन उन लोगों को भी दी जा सकती है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और उन्हें भी जो कभी इस संक्रमण से प्रभावित नहीं हुए। यही विशेषता इसे डेंगू नियंत्रण के लिए अधिक उपयोगी बनाती है।

    स्वीकृत दिशा-निर्देशों के अनुसार यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जाएगी। टीकाकरण के लिए कुल दो डोज निर्धारित की गई हैं, जिनके बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाएगा। यह टीका त्वचा के नीचे लगाया जाएगा और दोनों डोज समय पर लेने पर बेहतर प्रतिरक्षा विकसित होने की संभावना बताई गई है।

    भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का संक्रमण लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले दो दशकों में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में देशभर में एक लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हुई थी, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि सभी मामलों का आधिकारिक पंजीकरण नहीं हो पाता।

    डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं और एक प्रकार से संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति दूसरे प्रकार के वायरस की चपेट में आ सकता है। QDENGA को इस तरह विकसित किया गया है कि यह डेंगू वायरस के सभी प्रमुख प्रकारों के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित करने में सहायता करे। इसी कारण इसे व्यापक सुरक्षा प्रदान करने वाली वैक्सीन माना जा रहा है।

    कंपनी के अनुसार इस वैक्सीन पर बड़े स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन और क्लीनिकल परीक्षण किए गए हैं। हजारों स्वयंसेवकों पर किए गए परीक्षणों में दूसरी डोज के लगभग एक वर्ष बाद डेंगू संक्रमण से बचाव में इसकी प्रभावशीलता 80 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। वहीं गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी उल्लेखनीय रूप से कम करने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। लंबे समय तक किए गए अध्ययन में भी इसकी प्रभावशीलता बरकरार रहने के संकेत मिले हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही डेंगू प्रभावित देशों के लिए इस वैक्सीन की उपयोगिता को स्वीकार कर चुका है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों में इसका उपयोग शुरू हो चुका है और कुछ देशों ने इसे अपने सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा भी बनाया है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन डेंगू से बचाव का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके साथ मच्छरों की रोकथाम और व्यक्तिगत सावधानी भी जरूरी है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना तथा डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर

    स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली  । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद स्पेन सिर्फ ट्रॉफी का ही नहीं बल्कि रिकॉर्ड इनामी राशि का भी हकदार बन गया। फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने वाली स्पेनिश टीम पर करोड़ों रुपए की बारिश हुई। फीफा ने चैंपियन टीम को 50 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 480 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की। पिछले विश्व कप की तुलना में इस बार विजेता टीम की इनामी राशि में 8 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की गई थी जिससे इस जीत का महत्व और भी बढ़ गया।

    फाइनल में हारने के बावजूद अर्जेंटीना भी खाली हाथ नहीं लौटा। उपविजेता टीम को 33 मिलियन डॉलर यानी लगभग 318 करोड़ रुपए की इनामी राशि मिली। वहीं तीसरे स्थान पर रहने वाली इंग्लैंड को 29 मिलियन डॉलर यानी करीब 279 करोड़ रुपए और चौथे स्थान पर रही फ्रांस को 27 मिलियन डॉलर यानी लगभग 260 करोड़ रुपए दिए गए। क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली प्रत्येक टीम को 19 मिलियन डॉलर जबकि प्री क्वार्टर फाइनल यानी राउंड ऑफ 16 में बाहर होने वाली टीमों को 15 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि दी गई।

    फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया। मैच का फैसला 106वें मिनट में हुआ जब स्पेन के स्टार खिलाड़ी फेरान टोरेस ने शानदार गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। यही गोल निर्णायक साबित हुआ और स्पेन ने 16 वर्षों बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इससे पहले स्पेन ने वर्ष 2010 में पहली बार फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीता था।

    पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन संतुलित और अनुशासित रहा। टीम की मजबूत रक्षापंक्ति उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। स्पेन ने पूरे विश्व कप अभियान में केवल एक गोल खाया जो उसकी शानदार डिफेंसिव रणनीति का प्रमाण है। आक्रमण और रक्षा के बेहतरीन तालमेल ने टीम को लगातार जीत दिलाई और आखिरकार विश्व विजेता बना दिया।

    स्पेन की सफलता में मिडफील्डर रोड्री की भूमिका भी बेहद अहम रही। पूरे टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया और प्रतिष्ठित गोल्डन बॉल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रोड्री ने अपनी सूझबूझ शानदार पासिंग और खेल पर नियंत्रण की क्षमता से स्पेन के अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    विश्व कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक जीत के साथ हुआ जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत टीम वर्क अनुशासित खेल और प्रभावी रणनीति किसी भी बड़े टूर्नामेंट में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है।

  • लखनऊ के जवाहर भवन में चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते खाली कराई गई इमारत, दमकल ने बड़े हादसे को टाला

    लखनऊ के जवाहर भवन में चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते खाली कराई गई इमारत, दमकल ने बड़े हादसे को टाला

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित जवाहर भवन में सोमवार सुबह आग लगने की घटना से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सरकारी कार्यालयों वाली इस बहुमंजिला इमारत की चौथी मंजिल पर आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और राहत एजेंसियां तत्काल मौके पर पहुंच गईं। अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई के चलते पूरी इमारत को खाली कराया गया और सभी कर्मचारियों तथा अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। आग को फैलने से रोकने के लिए इमारत के विभिन्न हिस्सों को तत्काल खाली कराया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। राहत कार्य के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि भवन के भीतर कोई व्यक्ति फंसा न रह जाए।

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने घटनास्थल की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि आग भवन की चौथी मंजिल पर स्थित कैंटीन क्षेत्र से शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि दमकल विभाग ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच कराई जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

    जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सुबह लगभग 10 बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीमें बिना विलंब मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू कर दिया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भवन को खाली कराया गया और इमारत के अंदर मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार राहत अभियान के दौरान किसी व्यक्ति के अंदर फंसे होने की पुष्टि नहीं हुई।

    फायर सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि आग पर नियंत्रण पाने के लिए 10 से अधिक फायर टेंडरों की सहायता ली गई। दमकल कर्मियों ने समन्वित तरीके से काम करते हुए आग को अन्य मंजिलों तक फैलने से रोका। आग बुझने के बाद भवन के प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया गया ताकि किसी संभावित खतरे को समाप्त किया जा सके।

    घटना के बाद जवाहर भवन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और संबंधित विभागों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए। प्रशासन अब आग से प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच कराने के साथ-साथ भवन की सुरक्षा व्यवस्था का भी आकलन करेगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    जवाहर भवन में राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं, इसलिए घटना के बाद प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर राहत, सुरक्षा और जांच की प्रक्रिया शुरू की। समय पर की गई कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय के कारण एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आग लगने के कारणों का पता लगाया जाएगा और आवश्यक सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।

  • दूधाना के पास सड़क हादसा तेज रफ्तार वाहन ने बाइक सवार को मारी टक्कर जिला अस्पताल रेफर

    दूधाना के पास सड़क हादसा तेज रफ्तार वाहन ने बाइक सवार को मारी टक्कर जिला अस्पताल रेफर


    शाजापुर । शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक सड़क हादसे में बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्राम दूधाना के पास हुए इस हादसे में अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी जिसके बाद युवक सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहन बड़ोदिया पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

    पुलिस के अनुसार घायल युवक की पहचान डांगीचा निवासी 35 वर्षीय श्याम पाल पुत्र रमेश चंद्र के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि श्याम पाल अपनी बाइक से गुजर रहा था तभी ग्राम दूधाना के समीप तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि वह सड़क पर दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही डायल 112 के पायलट संतोष मालवीय और थाना स्टाफ के सत्यनारायण यादव तत्काल घटनास्थल पहुंचे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने बिना देर किए घायल को एंबुलेंस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। चिकित्सकों के अनुसार युवक के चेहरे और होंठ पर गंभीर चोटें आई हैं। चोटों के कारण वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। बेहतर इलाज और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया।

    पुलिस ने अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि दुर्घटना करने वाले वाहन और उसके चालक की पहचान की जा सके। साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सड़क पर वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करें और दुर्घटना होने की स्थिति में घायल व्यक्ति की तुरंत मदद करें तथा पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दें। समय पर मिली सहायता कई बार गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है।

  • सतना में जुलाई में अब तक सामान्य से 3 इंच कम बारिश अब अगले 10 दिनों में झमाझम बरसात की उम्मीद

    सतना में जुलाई में अब तक सामान्य से 3 इंच कम बारिश अब अगले 10 दिनों में झमाझम बरसात की उम्मीद


    सतना । सतना जिले में मानसून इस बार अब तक अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। जुलाई का अधिकांश समय बीत जाने के बावजूद जिले में सामान्य से करीब तीन इंच कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग ने राहत भरी संभावना जताई है कि महीने के अंतिम दिनों में मानसून सक्रिय होगा और 31 जुलाई तक वर्षा का कोटा काफी हद तक पूरा हो सकता है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में जिले में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है।

    रविवार को पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे। बंगाल की खाड़ी से पहुंच रही नमी भरी हवाओं के कारण मौसम सुहावना बना रहा और अधिकतम तापमान में करीब चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान घटकर 31.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली। इसके बावजूद मौसम विभाग द्वारा जारी येलो अलर्ट के अनुरूप व्यापक बारिश नहीं हो सकी और जिले के अधिकांश हिस्सों में केवल हल्की बूंदाबांदी ही दर्ज हुई।

    मानसून सीजन की बात करें तो अब तक जिले में करीब 11 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि इस अवधि तक सामान्य रूप से लगभग 14 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी फिलहाल जिले में करीब तीन इंच बारिश की कमी बनी हुई है। जून महीने में भी मानसून कमजोर रहा था। सामान्य तौर पर जून में 5.25 इंच बारिश होती है लेकिन इस वर्ष केवल लगभग 3 इंच वर्षा दर्ज की गई। जुलाई में अब तक करीब 8 इंच बारिश हुई है लेकिन यह भी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।

    रविवार को न्यूनतम तापमान 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह के समय हवा में नमी 86 प्रतिशत और शाम तक 79 प्रतिशत रही। वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बादल बने रहे लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं हो सकी। पिछले वर्ष की तुलना करें तो स्थिति अलग नजर आती है। पिछले साल इसी अवधि तक सतना जिले में लगभग 23 इंच बारिश हो चुकी थी जबकि इस वर्ष अब तक केवल 11 इंच के आसपास वर्षा दर्ज हुई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल सकता है। फिलहाल मानसून ट्रफ लाइन बंगाल की खाड़ी से रांची वाराणसी हरदोई रोहतक होते हुए गंगानगर तक सक्रिय बनी हुई है। इसके अलावा उत्तर पंजाब बंगाल की खाड़ी ओडिशा पश्चिम मध्य प्रदेश और हरियाणा के आसपास ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इन सभी मौसमी सिस्टम के संयुक्त प्रभाव से रीवा संभाग सहित सतना जिले में अगले एक सप्ताह तक गरज चमक के साथ अच्छी बारिश होने के आसार हैं।

    मौसम विभाग का मानना है कि यदि अनुमान के अनुरूप बारिश होती है तो जुलाई के अंतिम सप्ताह तक जिले में वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इससे किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ फसलों की बढ़वार के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी। साथ ही जलाशयों और भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद है।

  • जजों पर बेबुनियाद आरोपों के गंभीर परिणाम, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी; गुलशन पाहुजा को राहत के लिए हाई कोर्ट जाने की सलाह

    जजों पर बेबुनियाद आरोपों के गंभीर परिणाम, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी; गुलशन पाहुजा को राहत के लिए हाई कोर्ट जाने की सलाह

    नई दिल्ली । यूट्यूबर गुलशन पाहुजा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ बिना ठोस आधार लगाए जाने वाले आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी न्यायिक अधिकारी पर भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप बिना पर्याप्त साक्ष्य के लगाना उचित नहीं है। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने इस स्तर पर किसी भी प्रकार की तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को राहत के लिए पहले दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी।

    मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध लगाए जाने वाले आरोपों का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब किसी जज या न्यायिक अधिकारी पर बिना प्रमाण के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते हैं तो इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और तथ्यों का विशेष महत्व होता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है। अदालत का कहना था कि याचिकाकर्ता पहले ही आपराधिक अवमानना के मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं और न्यायिक प्रक्रिया के तहत आत्मसमर्पण भी कर चुके हैं। ऐसे में वर्तमान परिस्थिति में तत्काल राहत प्रदान करना उचित नहीं माना जा सकता।

    पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया कि पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा के निलंबन से जुड़ी अर्जी पर विचार किया था। हालांकि बाद में आत्मसमर्पण की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने न्यायिक आदेश का पालन करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि सजा के निलंबन या अन्य अंतरिम राहत की आवश्यकता है तो इसके लिए संबंधित हाई कोर्ट के समक्ष आवेदन करना उचित कानूनी प्रक्रिया होगी।

    अदालत ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा आपराधिक अवमानना की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील अभी नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी है। इसके पीछे याचिका में मौजूद कुछ तकनीकी कमियों का समय पर निराकरण नहीं होना बताया गया। अदालत ने संकेत दिया कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अपील पर आगे विचार किया जा सकेगा।

    मामला उन वीडियो से जुड़ा है जिन्हें यूट्यूबर गुलशन पाहुजा ने अपने डिजिटल मंच पर प्रकाशित किया था। आरोप था कि इन वीडियो में न्यायपालिका और कुछ न्यायिक अधिकारियों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। इस मामले में कुछ न्यायिक अधिकारियों ने अदालत का रुख करते हुए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी। सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी।

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित वीडियो में शामिल दो अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांग ली थी। उन्होंने कहा था कि वीडियो के प्रकाशन और उसके साथ लगाए गए शीर्षकों की जानकारी उन्हें नहीं थी। अदालत ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी थी, जबकि मुख्य मामले में यूट्यूबर के खिलाफ कार्रवाई जारी रही।

    यह मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की गरिमा और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक बयानों की जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को सामने लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर किए जाने वाले दावों और आरोपों के लिए तथ्यात्मक आधार और कानूनी जिम्मेदारी दोनों का पालन आवश्यक है, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक संस्थाओं की गरिमा के बीच संतुलन बना रहे।

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  • शादी का झांसा देकर दो साल तक करता रहा दुष्कर्म शादीशुदा होने का राज खुलते ही आरोपी गिरफ्तार

    शादी का झांसा देकर दो साल तक करता रहा दुष्कर्म शादीशुदा होने का राज खुलते ही आरोपी गिरफ्तार


    सतना । सतना जिले में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ लंबे समय तक दैहिक शोषण करने का मामला सामने आया है। सभापुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपनी शादीशुदा होने की सच्चाई छिपाकर युवती को प्रेमजाल में फंसाया और विवाह का भरोसा देकर करीब दो वर्षों तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। जब पीड़िता को उसकी असलियत का पता चला और उसने शादी की बात कही तो आरोपी ने रिश्ता स्वीकार करने से इनकार कर दिया और उसे धमकाने लगा। इसके बाद युवती ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

    पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान 27 वर्षीय बृजेश प्रजापति निवासी देवरा थाना कोटर के रूप में हुई है। थाना प्रभारी शंखधर द्विवेदी ने बताया कि 23 वर्षीय युवती की मुलाकात करीब दो वर्ष पहले आरोपी से हुई थी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। इसी दौरान आरोपी ने खुद को अविवाहित बताते हुए युवती को शादी का भरोसा दिया। विश्वास में लेकर उसने कई बार शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी युवती के घर भी आता-जाता था और कई बार उसे अपने गांव भी लेकर गया।

    समय बीतने के साथ युवती को पता चला कि जिस व्यक्ति से वह शादी की उम्मीद लगाए बैठी थी वह पहले से ही शादीशुदा है। यह सच्चाई सामने आने के बाद उसने आरोपी से जवाब मांगा लेकिन उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं आरोपी ने युवती को डराने और धमकाने की भी कोशिश की ताकि वह किसी से शिकायत न करे। मानसिक रूप से परेशान युवती ने आखिरकार सभापुर थाने पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। रविवार को उसे न्यायालय में पेश किया गया जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शादी का झूठा वादा कर किसी महिला की सहमति प्राप्त कर बनाए गए शारीरिक संबंध कानून की नजर में गंभीर अपराध हो सकते हैं। ऐसे मामलों में पीड़िता की शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाती है। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी के साथ इस तरह की धोखाधड़ी या शोषण होता है तो बिना डर के तत्काल पुलिस से संपर्क करें ताकि समय रहते कानूनी कार्रवाई की जा सके।

  • NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया

    NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया


    नई दिल्ली ।
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा की ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जिन ओएमआर शीट्स को अभ्यर्थियों की वास्तविक उत्तर-पत्रिका बताकर साझा किया जा रहा है, वे एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज नहीं हैं। प्रारंभिक जांच में इन्हें डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज पाया गया है और घोषित परीक्षा परिणामों में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं मिली है।

    एनटीए के अनुसार हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ अभ्यर्थियों की कथित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं की तस्वीरें साझा कर यह दावा किया गया कि उनके परीक्षा परिणाम गलत घोषित किए गए हैं। एजेंसी ने इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच की और रिकॉर्ड में सुरक्षित मूल दस्तावेजों का मिलान किया। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं घोषित परिणामों का पूरी तरह समर्थन करती हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई।

    एजेंसी ने बताया कि प्रत्येक अभ्यर्थी की वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका उसके सुरक्षित रिकॉर्ड में उपलब्ध है। इन उत्तर-पत्रिकाओं पर सही रोल नंबर, टेस्ट बुकलेट नंबर, बारकोड, क्रम संख्या, टेस्ट बुकलेट कोड, अभ्यर्थी और अभिभावकों का विवरण, अभ्यर्थी के हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान तथा परीक्षा कक्ष के निरीक्षकों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। यही प्रमाणित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं रिस्पॉन्स-की चैलेंज अवधि के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेजी गई थीं और पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई थीं।

    एनटीए ने कहा कि जांच के दौरान यह भी पाया गया कि सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेजों में कई प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ की गई है। कुछ मामलों में अतिरिक्त उत्तर चिह्न जोड़ दिए गए, कहीं नाम बदल दिए गए, जबकि कुछ दस्तावेजों में निरीक्षकों के प्रमाणित हस्ताक्षरों और अन्य विवरणों में भी फेरबदल किया गया। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेजों को आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं माना जा सकता और इनका उद्देश्य अभ्यर्थियों तथा अभिभावकों को भ्रमित करना है।

    एजेंसी ने अवनीश श्रीवास्तव से जुड़े वायरल दावों पर भी विस्तार से स्पष्टीकरण दिया। एनटीए के अनुसार उसके रिकॉर्ड में सुरक्षित वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका पर अभ्यर्थी का सही नाम, अभिभावकों का विवरण, हस्ताक्षर और अन्य सभी आवश्यक विवरण दर्ज हैं। जबकि सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज में अलग नाम और अभिभावकों की जानकारी दिखाई गई है, जो नीट-यूजी 2026 के किसी भी पंजीकृत अभ्यर्थी से मेल नहीं खाती। इसी प्रकार प्रतिभा त्रिवेदी, अभय यादव और लक्ष्य सिंह से जुड़े मामलों की भी जांच की गई, जिनमें घोषित परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप पाए गए।

    एनटीए ने चेतावनी दी है कि किसी फर्जी, जाली या डिजिटल रूप से परिवर्तित ओएमआर उत्तर-पत्रिका का निर्माण, प्रसार या उपयोग सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत संज्ञेय अपराध है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत भी संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    एजेंसी ने सभी अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अप्रमाणित सामग्री पर भरोसा न करें। यदि किसी अभ्यर्थी को अपने परिणाम या ओएमआर उत्तर-पत्रिका को लेकर वास्तविक शिकायत है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करे। एनटीए ने दोहराया कि परीक्षा परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड, उत्तर-कुंजी और मूल्यांकन प्रक्रिया के अनुरूप हैं तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास किया जाना चाहिए।

  • सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका

    सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले में सामने आए चर्चित बाघ शिकार मामले की जांच को बड़ा झटका लगा है। करंट लगाकर बाघ का शिकार करने और उसके नाखून तथा केनाइन निकालने के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुन्ना कोल की गिरफ्तारी से पहले ही मौत हो गई। वन विभाग को उम्मीद थी कि उसकी गिरफ्तारी के बाद बाघ के लापता 14 नाखूनों और अन्य वन्यजीव अंगों की बरामदगी हो सकेगी लेकिन उसकी मौत के साथ ही जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है। अब वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गायब नाखूनों का पता लगाना और यह जानना है कि आखिर उन्हें कहां और किसके पास पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार मझगवां वन परिक्षेत्र में करीब ढाई महीने पहले शिकारियों ने जंगल में बिजली का करंट बिछाकर बाघ का शिकार किया था। बाघ की मौत के बाद आरोपियों ने उसके शव से नाखून और केनाइन निकाल लिए तथा सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को गड्ढा खोदकर जंगल में दफना दिया। इस सनसनीखेज घटना की भनक वन विभाग को लगभग दो महीने बाद लगी। इसके बाद तीन जुलाई को मुखबिर की सूचना पर विभाग ने जेसीबी की मदद से शव बाहर निकलवाया। जांच में पुष्टि हुई कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई थी।

    पूरे मामले की जांच के दौरान वन विभाग ने 11 आरोपियों की पहचान की थी। इनमें से 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया जबकि मुख्य आरोपी मुन्ना कोल लगातार फरार था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने बार-बार यही बताया कि बाघ के नाखूनों और उनके ठिकाने की पूरी जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास थी। ऐसे में विभाग उसकी गिरफ्तारी को इस मामले की सबसे अहम कड़ी मान रहा था।

    जांच में यह भी सामने आया कि बाघ की मौत के बाद मुन्ना कोल ने उसके चारों पैर काटकर अलग-अलग स्थानों पर जमीन में दबा दिए थे। वहीं गिरोह के अन्य दो आरोपी सत्यम और शुभम ने बाघ के केनाइन निकाल लिए थे। बाद में जब अन्य साथियों ने नाखून मांगे तो मुन्ना ने दावा किया कि जमीन में दबे पैर किसी जंगली जानवर ने खोदकर निकाल लिए जिसके कारण केवल चार नाखून ही बरामद हो सके। इसी वजह से अब तक बाघ के 14 नाखूनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार घटना उजागर होने के बाद से मुन्ना कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अलग-अलग स्थानों पर इलाज कराता रहा। विभाग उसकी तलाश में जुटा था लेकिन 18 जुलाई को उसकी मौत हो गई। इससे अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण सिरा समाप्त हो गया है और वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क तक पहुंचना भी कठिन हो गया है।

    मझगवां रेंजर रंजन सिंह परिहार ने मुख्य आरोपी की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि अन्य आरोपियों ने भी पूछताछ में नाखूनों की जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास होने की बात कही थी। वन विभाग अब उपलब्ध साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गायब नाखून कहीं वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क तक तो नहीं पहुंचा दिए गए।

  • एनआरआई और एफसीएनआर-बी जमा से बैंकों को मिलेगा सहारा, रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ का अनुमान

    एनआरआई और एफसीएनआर-बी जमा से बैंकों को मिलेगा सहारा, रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ का अनुमान

    नई दिल्ली । देश के बैंकिंग क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2026-27 सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई गई है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआई) से आने वाले निवेश और एफसीएनआर-बी जमा में बढ़ोतरी के कारण बैंकों की डिपॉजिट वृद्धि दर लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमा राशि में सुधार के साथ-साथ ऋण वितरण की रफ्तार भी मजबूत बनी रहेगी, जिससे बैंकिंग प्रणाली की स्थिति और अधिक संतुलित हो सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, एफसीएनआर-बी जमा योजनाओं के माध्यम से अब तक लगभग 13 से 14 अरब डॉलर की राशि बैंकिंग प्रणाली में आई है। इस पूंजी प्रवाह ने चालू वित्त वर्ष के दौरान बैंकों के जमा आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है तो आगामी वित्त वर्ष में भी बैंकिंग क्षेत्र को पर्याप्त वित्तीय मजबूती मिलेगी और जमा संग्रहण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

    हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि वित्त वर्ष 2023 से जो रुझान देखने को मिल रहा है, उसके अनुसार क्रेडिट ग्रोथ अभी भी डिपॉजिट ग्रोथ से अधिक बनी हुई है। जून के अंत तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बैंक ऋण में सालाना आधार पर 18.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कुल जमा में 13.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे क्रेडिट और डिपॉजिट के बीच का अंतर बढ़कर 5.3 प्रतिशत अंक तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर अस्थायी नहीं बल्कि महामारी के बाद बैंकिंग व्यवहार और वित्तीय प्राथमिकताओं में आए संरचनात्मक बदलाव का परिणाम है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़े महानगरों में पारंपरिक जमा बाजार अब काफी हद तक संतृप्त हो चुके हैं। ऐसे में बैंक अब अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाकर जमा आधार मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। इन क्षेत्रों में परिवारों की आय में वृद्धि, महिलाओं को केंद्र में रखकर संचालित कल्याणकारी योजनाएं और बैंकिंग सेवाओं का विस्तार जमा वृद्धि के प्रमुख कारण बताए गए हैं। इससे भविष्य में ग्रामीण और छोटे शहरों की भूमिका बैंकिंग क्षेत्र में और महत्वपूर्ण हो सकती है।

    दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों में निवेशकों का रुझान बैंक जमा से हटकर म्यूचुअल फंड, इक्विटी और अन्य बाजार आधारित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। इसके कारण पारंपरिक बैंक जमा में घरेलू बचत का हिस्सा धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके बावजूद एनआरआई जमा और अन्य संस्थागत स्रोत बैंकिंग प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण सहारा बने हुए हैं।

    रिपोर्ट में ऋण वितरण के बदलते स्वरूप का भी उल्लेख किया गया है। बिना गारंटी वाले व्यक्तिगत ऋणों पर नियामकीय सख्ती के बाद बैंक अब उद्योग, बुनियादी ढांचा, कार्यशील पूंजी और स्वर्ण आभूषण के बदले दिए जाने वाले ऋण जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इससे ऋण पोर्टफोलियो में विविधता बढ़ी है और जोखिम प्रबंधन को भी मजबूती मिली है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियां बैंकिंग क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन भारतीय बैंक फिलहाल मजबूत पूंजी आधार, पर्याप्त कैपिटल एडिक्वेसी और कम गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं। खपत में बढ़ोतरी और पूंजीगत निवेश के समर्थन से आने वाले समय में भी क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद है, जबकि बैंक बैलेंस शीट अनुशासन बनाए रखते हुए वित्तीय स्थिरता को और मजबूत कर सकते हैं।