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  • 'डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा': धुरंधर-2 के इस वायरल संवाद के पीछे का सच आया सामने, अभिनेता ने साझा किए निर्देशक के अतरंगी विकल्प।

    'डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा': धुरंधर-2 के इस वायरल संवाद के पीछे का सच आया सामने, अभिनेता ने साझा किए निर्देशक के अतरंगी विकल्प।

    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में ‘धुरंधर’ फ्रैंचाइजी एक ऐसी मिसाल बन चुकी है, जिसने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के साथ-साथ लोकप्रियता के भी सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। रणवीर सिंह अभिनीत ‘धुरंधर-2: द रिवेंज’ अब विश्व स्तर पर 1800 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच गई है। इस फिल्म की अपार सफलता में जहाँ मुख्य कलाकारों के अभिनय की सराहना हो रही है, वहीं ‘आलम भाई’ जैसे छोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली किरदारों ने भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह पक्की कर ली है। आलम भाई का किरदार निभाने वाले अभिनेता गौरव गेरा ने हाल ही में फिल्म से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने प्रशंसकों को हैरान और लोटपोट कर दिया है।

    गौरव गेरा ने बताया कि फिल्म में उनके किरदार का एक संवाद ‘डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा’ सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हुआ है। यह संवाद फिल्म के उस दृश्य का हिस्सा है जहाँ रणवीर सिंह का किरदार (हमजा) अपनी मायूसी के बीच आलम भाई की जूस की दुकान पर बैठता है। गौरव ने खुलासा किया कि यह मशहूर संवाद दरअसल निर्देशक आदित्य धर की रचनात्मक उपज थी। उन्होंने बताया कि शूटिंग से पहले निर्देशक ने उन्हें कई अतरंगी और मजेदार तुकबंदियां विकल्पों के तौर पर भेजी थीं, ताकि दृश्य के मूड के हिसाब से सबसे सटीक जुमला चुना जा सके। गौरव ने सोशल मीडिया पर उन विकल्पों की सूची साझा की है, जिन्हें पढ़कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस फिल्म के हर सीन पर कितनी बारीकी और रचनात्मकता के साथ काम किया गया है।

    निर्देशक आदित्य धर द्वारा दिए गए विकल्पों में कुछ बेहद अजीबोगरीब और मजेदार जुमले शामिल थे। इनमें ‘महफिल में घुस गया बहन का घोड़ा, पीलो पीलो आलम दूध सोडा’ और ‘अंडे से निकला चूजा खा लो खा लो क्रीम खरबूजा’ जैसे विकल्प थे। यही नहीं, इश्क में नाकामी पर ‘पिस्टल अनानास’ पिलाने और खूबसूरती के लिए ‘आंवला का मामला’ समझाने जैसी तुकबंदियां भी गौरव को सीखने के लिए दी गई थीं। गौरव ने बताया कि ‘लोहे पर हथौड़ा’ और ‘आलम दूध सोडा’ जैसे विकल्पों के बावजूद अंततः सेट पर ‘डार्लिंग-डार्लिंग’ वाले संवाद को ही फाइनल किया गया, क्योंकि इसमें एक अलग तरह का आकर्षण और मनोरंजन था जो दर्शकों को तुरंत पसंद आया।

    बता दें कि फिल्म के इस दूसरे भाग में आलम भाई का किरदार भावनात्मक मोड़ पर शहीद हो जाता है, जिससे कहानी में एक गहरा प्रभाव पड़ता है। पहले भाग में वह हमजा के लिए ल्यारी के मुश्किल माहौल में इकलौता सहारा था और उसे फिल्म के मुख्य विलेन रहमान डकैत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां देता था। गौरव गेरा के इस ताजा खुलासे के बाद फिल्म प्रेमी अब उन अन्य विकल्पों पर भी मजेदार चर्चा कर रहे हैं और यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या अन्य अतरंगी डायलॉग्स भी इतने ही प्रभावी साबित होते। फिलहाल, फिल्म की टीम अपनी इस ऐतिहासिक वैश्विक जीत का आनंद ले रही है और ‘धुरंधर-2’ की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है।

  • भारत-वियतनाम रिश्तों को नई रफ्तार: पीएम मोदी-तो लाम की बैठक में 13 बड़े समझौते, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत

    भारत-वियतनाम रिश्तों को नई रफ्तार: पीएम मोदी-तो लाम की बैठक में 13 बड़े समझौते, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत



    नई दिल्ली । नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में बुधवार को भारत और वियतनाम के रिश्तों ने एक नई ऊंचाई छू ली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई अहम द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों देशों ने 13 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत-वियतनाम संबंध अब “आधुनिक व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले साल भारत से भेजे गए बौद्ध अवशेषों के दर्शन वियतनाम में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों ने किए। उन्होंने चंपा सभ्यता की पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की घोषणा करते हुए कहा कि यह साझेदारी सिर्फ विकास नहीं, बल्कि विरासत को भी सहेजने का प्रयास है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि तकनीक, पर्यटन, व्यापार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं और अब इन्हें और विस्तार देने का समय है।

    इस दौरान हुए 13 समझौते कई अहम क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिनमें डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा और तकनीक शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक और वियतनाम के स्टेट बैंक के बीच डिजिटल पेमेंट सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र में दवा नियमन, और आईटी सेक्टर में साझेदारी जैसे समझौते भविष्य की आर्थिक मजबूती की दिशा तय करते हैं।

    वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम का यह भारत का पहला राजकीय दौरा है, जिसकी शुरुआत उन्होंने बिहार के बोधगया में महाबोधि मंदिर में पूजा के साथ की। इसके बाद दिल्ली पहुंचकर उनका औपचारिक स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने किया।

    बैठक से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति लाम से मुलाकात कर रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि भारत और वियतनाम अपनी रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे कर रहे हैं।

    कुल मिलाकर, हैदराबाद हाउस में हुई यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की मजबूत साझेदारी का रोडमैप साबित हुई है, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देगी।

  • सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?

    सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?



    नई दिल्ली। 6 मई को सर्राफा बाजार में फिर तेज उछाल देखने को मिला और सोना-चांदी के दाम नई ऊंचाई की ओर बढ़ गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹3000 की जोरदार बढ़त के साथ ₹1.51 लाख तक पहुंच गया। इससे पहले यह ₹1.48 लाख पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी ने भी बड़ी छलांग लगाते हुए ₹6000 की तेजी के साथ ₹2.46 लाख प्रति किलो का स्तर छू लिया, जो निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    अगर पूरे साल के ट्रेंड पर नजर डालें तो 2026 में सोना अब तक ₹18 हजार महंगा हो चुका है। साल की शुरुआत में 31 दिसंबर 2025 को जहां सोना ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, वहीं अब यह ₹1.51 लाख तक पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी ने भी निवेशकों को चौंकाते हुए ₹16 हजार की बढ़त दर्ज की है। साल की शुरुआत में ₹2.30 लाख प्रति किलो रही चांदी अब ₹2.46 लाख के स्तर पर कारोबार कर रही है। हालांकि, इससे पहले जनवरी में सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख का ऑलटाइम हाई भी छू चुकी है, जो बाजार की जबरदस्त अस्थिरता को दर्शाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक सोने-चांदी में यह तेजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग की वजह से आ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी जितनी तेज होती है, जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।

    अगर आप इस समय सोना खरीदने की सोच रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद अहम है। सबसे पहले, हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें, जिससे उसकी शुद्धता की गारंटी मिलती है। इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने की कीमत को अलग-अलग स्रोतों से जरूर जांच लें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के हिसाब से कीमतें अलग होती हैं।

    वहीं चांदी खरीदते समय भी सावधानी जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, स्मेल टेस्ट और क्लॉथ टेस्ट जैसे आसान तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती और उस पर बर्फ जल्दी पिघलती है।

    कुल मिलाकर, सोना-चांदी की कीमतों में आई यह तेजी जहां निवेशकों के लिए अवसर लेकर आई है, वहीं आम खरीदारों के लिए चिंता भी बढ़ा रही है। ऐसे में बाजार की चाल समझकर ही निवेश या खरीदारी करना समझदारी होगी।

  • 66 दिन पहले हुई थी शादी, अब तिरंगे में लौटा पति: जालौन में शहीद सिपाही के शव से लिपटकर रोती रही पत्नी, चारों जवानों को दी गई अंतिम सलामी

    66 दिन पहले हुई थी शादी, अब तिरंगे में लौटा पति: जालौन में शहीद सिपाही के शव से लिपटकर रोती रही पत्नी, चारों जवानों को दी गई अंतिम सलामी

    नई दिल्ली। हरियाणा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने जालौन पुलिस महकमे को गहरे सदमे में डाल दिया। ड्यूटी से लौट रहे चार पुलिसकर्मियों की मौत के बाद जब उनके पार्थिव शरीर जालौन पहुंचे, तो पूरा पुलिस लाइन शोक और सन्नाटे में डूब गया। बुधवार सुबह जैसे ही ताबूत पहुंचे, हर आंख नम हो गई। गार्ड ऑफ ऑनर के बीच जब अंतिम सलामी दी जा रही थी, तभी सबसे भावुक दृश्य सामने आया। सिपाही प्रदीप कुमार की पत्नी मयूरी वर्मा अपने पति के शव से लिपटकर बिलख-बिलख कर रो पड़ीं।

    मयूरी को महिला पुलिसकर्मियों ने संभालने की कोशिश की, लेकिन उनका दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा था। रोते-रोते वह बेहोश हो गईं। महज 66 दिन पहले ही दोनों ने सात फेरे लिए थे, और अब वही रिश्ता अचानक इस तरह टूट गया कि हर देखने वाले की आंखें भर आईं। वहां मौजूद हर शख्स इस मंजर को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रहा था।

    चारों शहीद पुलिसकर्मियों दरोगा मोहित यादव, दरोगा सत्यभान, कॉन्स्टेबल अशोक कुमार और सिपाही प्रदीप कुमार को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पुलिस लाइन में डीजी आलोक सिंह, आईजी आकाश कुलहरी और डीएम राजेश पांडेय समेत कई अधिकारियों ने कंधा देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद स्मारक पर गूंजती सलामी की आवाजें हर दिल को झकझोर रही थीं।

    बताया जा रहा है कि ये सभी पुलिसकर्मी हरियाणा में एक केस में दबिश देने गए थे। मंगलवार सुबह जब वे स्कॉर्पियो से लौट रहे थे, तभी कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे पर ओवरटेक के दौरान वाहन अनियंत्रित हो गया और सामने चल रही गाड़ी से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही चारों पुलिसकर्मियों और एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई।

    श्रद्धांजलि के बाद सभी पार्थिव शरीर उनके गृह जिलों के लिए रवाना कर दिए गए—कासगंज, कन्नौज, बांदा और रायबरेली। हर गांव और हर घर में मातम पसरा हुआ है, जहां इन जवानों का इंतजार अब कभी पूरा नहीं होगा।

    इस दुखद घटना के बीच राज्य सरकार ने परिजनों के लिए बड़ी घोषणा की है। डीजी आलोक सिंह ने प्रत्येक शहीद के परिवार को 1 करोड़ 90 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। यह मदद भले ही कुछ सहारा दे, लेकिन जो खालीपन इन परिवारों में आया है, उसे कोई भर नहीं सकता।

    यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि ड्यूटी पर निकले जवान हर दिन खतरे के साए में जीते हैं। उनके बलिदान के पीछे सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि टूटते हुए कई परिवारों की कहानी छिपी होती है।

  • शिक्षक भर्ती संकट गहराया: हजारों चयनित उम्मीदवार सड़क पर, सरकार को आंदोलन की चेतावनी

    शिक्षक भर्ती संकट गहराया: हजारों चयनित उम्मीदवार सड़क पर, सरकार को आंदोलन की चेतावनी

    मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हो रही लगातार देरी अब गंभीर विवाद का रूप ले चुकी है। चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों ने राजधानी भोपाल में पहुंचकर लोक शिक्षण संचालनालय के सामने प्रदर्शन किया और अपनी नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी के खिलाफ आवाज उठाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन सूची जारी हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे उनका भविष्य अनिश्चितता में फंसा हुआ है।

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने बताया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और कई चरण पूरे होने के बाद भी अंतिम नियुक्ति तक मामला नहीं पहुंच पाया है। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार चयन सूची जारी होने के बाद निर्धारित समय में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि अब तक न तो पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी की गई है और न ही चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। इस वजह से पूरी भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है और चयनित उम्मीदवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि वे लगातार संबंधित विभागों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

    प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि नियुक्ति में हो रही देरी का असर उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़ रहा है। कई उम्मीदवार वर्षों से इस नौकरी की तैयारी कर रहे थे और चयन के बाद भी नियुक्ति न मिलने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है। कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और स्थिर रोजगार का इंतजार अब लंबा खिंचता जा रहा है।

    स्थिति और गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बताई जा रही है। कई विद्यालय ऐसे हैं जहां पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब स्कूलों में पहले से ही पद खाली हैं, तो नियुक्ति प्रक्रिया में देरी क्यों की जा रही है।

    प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि अब और इंतजार संभव नहीं है और वे अपने अधिकार के लिए लगातार संघर्ष करते रहेंगे। कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि वे कई बार प्रशासनिक स्तर पर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है।

    कुल मिलाकर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी ने हजारों चयनित उम्मीदवारों को अनिश्चितता में डाल दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित विभाग कब इस मामले में ठोस निर्णय लेता है और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर चयनित अभ्यर्थियों को राहत देता है।

  • PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार

    PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार



    नई दिल्ली। यूपी की चर्चित PCS अफसर ज्योति मौर्य और उनके सफाईकर्मी पति आलोक मौर्य का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ पारिवारिक नहीं बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है। प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात के बाद आलोक मौर्य ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे जल्द ही राजनीति में कदम रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि वे आगे आएं और समाज की सेवा करें, खासकर युवाओं के मुद्दों को लेकर।

    5 मई को जब डिप्टी सीएम का हेलिकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरा, तो आलोक मौर्य अपने समर्थकों के साथ स्वागत के लिए पहले से मौजूद थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करते हैं और वे भी उसी राह पर आगे बढ़ने की सोच रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला पार्टी और जनता की इच्छा पर निर्भर करेगा।

    इस बीच, ज्योति और आलोक के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मामला फिलहाल मीडिएशन सेंटर में है, जहां सुलह की कोशिशें जारी हैं। आलोक मौर्य का कहना है कि वे परिवार को टूटने से बचाना चाहते हैं और उम्मीद है कि जल्द कोई सकारात्मक नतीजा सामने आएगा। लेकिन दूसरी तरफ PCS अफसर ज्योति मौर्य ने साफ कर दिया है कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर अब कुछ नहीं कहना चाहतीं और पहले ही अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी हैं।

    गाजियाबाद में एडीएम प्रशासन के पद पर तैनात ज्योति मौर्य पहले भी कह चुकी हैं कि तलाक की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अब यह रिश्ता बच पाना मुश्किल है। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ चुका है कि मामला जिला कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जहां एक ओर आलोक ने गुजारा भत्ता की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है, वहीं ज्योति ने तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    आलोक मौर्य ने इस पूरे विवाद को एक बड़े सामाजिक मुद्दे से भी जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने पुरुषों के अधिकारों की बात करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ‘पुरुष आयोग’ बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुरुषों को अपनी बात रखने का मंच नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से कई लोग मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या तक कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इस विवाद ने पहले भी देशभर में बहस छेड़ दी थी, जब आलोक ने ज्योति पर अफेयर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में वे इन आरोपों को साबित नहीं कर पाए और वापस लेना पड़ा। दूसरी ओर, ज्योति मौर्य ने आलोक के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है, जो फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है।

    एक साधारण परिवार से निकलकर PCS अफसर बनने तक का ज्योति मौर्य का सफर जितना प्रेरणादायक रहा, उतना ही उनका निजी जीवन विवादों में घिर गया। अब इस पूरे मामले में राजनीति की एंट्री ने इसे और ज्यादा चर्चित बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि आलोक मौर्य सच में राजनीति में कदम रखते हैं या नहीं, और कोर्ट में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल विवाद किस दिशा में जाता है।

  • नर्मदापुरम में दर्दनाक हादसा: ट्रेन की चपेट में आकर कोचिंग शिक्षक की मौत, जांच जारी…

    नर्मदापुरम में दर्दनाक हादसा: ट्रेन की चपेट में आकर कोचिंग शिक्षक की मौत, जांच जारी…

    नर्मदापुरम में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया, जब ईदगाह रेलवे फाटक के पास आउटर क्षेत्र में एक युवक ट्रेन की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना मंगलवार रात की बताई जा रही है, जब रेलवे ट्रैक के पास अचानक एक तेज रफ्तार ट्रेन गुजर रही थी और उसी दौरान यह हादसा हो गया।

    मृतक की पहचान रोशन रैकवार के रूप में हुई है, जो स्थानीय स्तर पर छोटे बच्चों को पढ़ाने का काम करता था। हादसे के बाद उसके शरीर को गंभीर चोटें आईं और वह मौके पर ही दम तोड़ गया। इस घटना से परिवार और आसपास के क्षेत्र में गहरा शोक फैल गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची। ट्रैक पर शव मिलने के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर एकत्र हो गए। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से शव को ट्रैक से हटाया गया और आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

    कुछ ही देर बाद मृतक के परिजन भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने शव की पहचान की। परिवार के अनुसार रोशन रैकवार ईदगाह मोहल्ले का निवासी था और रोजाना बच्चों को कोचिंग पढ़ाने जाता था। उसकी अचानक मौत से परिवार में कोहराम मच गया है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह हादसा कैसे हुआ। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि युवक रेलवे ट्रैक पार कर रहा था या किसी अन्य कारण से ट्रेन की चपेट में आया। यह भी जांच का विषय है कि यह एक दुर्घटना थी या किसी अन्य परिस्थिति का परिणाम।

    रेलवे और पुलिस विभाग के अधिकारी मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच कर रहे हैं। आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है और घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है ताकि सही कारण सामने आ सके।

    इस घटना ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे इलाकों में सुरक्षा इंतजाम और मजबूत किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह हादसा पूरे क्षेत्र के लिए एक गहरा सदमा बनकर सामने आया है।

  • इंदौर विकास की नई रफ्तार, 100 से ज्यादा अतिक्रमण हटाकर चौड़ी होगी प्रमुख सड़क

    इंदौर विकास की नई रफ्तार, 100 से ज्यादा अतिक्रमण हटाकर चौड़ी होगी प्रमुख सड़क

    इंदौर शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और यातायात व्यवस्था को अधिक सुचारु बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क विस्तार योजना पर काम तेज कर दिया गया है। मधु मिलन से छावनी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग को अब 60 फीट चौड़ा करने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत सड़क किनारे बने अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

    यह मार्ग शहर के व्यस्ततम इलाकों में से एक माना जाता है, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। समय के साथ बढ़ते अतिक्रमण और सीमित सड़क चौड़ाई के कारण यहां लगातार जाम की स्थिति उत्पन्न होती रही है, जिससे आम नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की तैयारी की है।

    योजना के अनुसार इस पूरे मार्ग पर मौजूद 100 से अधिक बाधक संरचनाओं को हटाया जाएगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के लोगों को पहले ही सूचित किया जा चुका है और उन्हें अपने स्तर पर अतिक्रमण हटाने के लिए समय दिया गया है। इसके बाद भी यदि कोई निर्माण नहीं हटाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें हटाया जाएगा।

    प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाना है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों से सहयोग की अपील की गई है, ताकि इस कार्य को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके। कई स्थानीय निवासी इस पहल के प्रति सकारात्मक रुख दिखा रहे हैं और स्वेच्छा से अपने निर्माण हटाने पर सहमत भी हुए हैं।

    इस सड़क को शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह कई प्रमुख इलाकों को आपस में जोड़ती है। बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में वृद्धि के कारण इस मार्ग पर दबाव लगातार बढ़ता गया, जिससे चौड़ीकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अब इस योजना को प्राथमिकता देते हुए इसे मास्टर प्लान के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क को चौड़ा करना ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर की बढ़ती आबादी और यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक स्थायी समाधान तैयार करना भी है। पहले भी इस मार्ग के विस्तार की योजना बनाई गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से वह आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब एक बार फिर इस कार्य को तेजी से पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।

    स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस सड़क के विस्तार से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में विकास की गति भी तेज होगी। साथ ही, आवागमन आसान होने से शहर के अन्य हिस्सों तक पहुंच भी सुगम हो जाएगी।

    फिलहाल प्रशासन की नजर इस पूरे अभियान पर है और इसे तय समयसीमा में पूरा करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही इस क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे इंदौर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

  • बॉलीवुड का वह दुर्लभ रिकॉर्ड जब एक ही गाने की धुन ने दो फिल्मों में फूंकी जान, चार दिग्गजों की आवाजों ने एक साथ जीता था करोड़ों का दिल।

    बॉलीवुड का वह दुर्लभ रिकॉर्ड जब एक ही गाने की धुन ने दो फिल्मों में फूंकी जान, चार दिग्गजों की आवाजों ने एक साथ जीता था करोड़ों का दिल।


    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के सौ सालों से भी ज्यादा के सफर में कई बार धुनें प्रेरित होने या पुराने गानों के रीमेक बनने के किस्से सामने आए हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि बिल्कुल एक ही गाना, एक ही संगीतकार और एक ही गीतकार के साथ दो अलग-अलग फिल्मों में महज दो हफ्तों के अंतराल पर रिलीज हुआ हो? साल 2003 में बॉलीवुड ने एक ऐसा ही अनूठा और दिलचस्प दौर देखा था। यह दुर्लभ किस्सा उस दौर की दिग्गज संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण और मशहूर गीतकार समीर के जादुई काम से जुड़ा है। इन दो फिल्मों के नाम थे ‘हंगामा’ और ‘फूटपाथ’। संगीत के इतिहास में यह पहली और शायद आखिरी बार था जब एक ही रचना को दो बिल्कुल अलग मिजाज की फिल्मों में बराबर की अहमियत के साथ शामिल किया गया और दोनों ही वर्ज़न को दर्शकों ने खूब सराहा।

    इस अनोखे सफर की शुरुआत 1 अगस्त 2003 को हुई, जब एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘हंगामा’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई। अक्षय खन्ना, रिमी सेन और आफताब शिवदासानी जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने अपनी गुदगुदाने वाली कॉमेडी से दर्शकों को लोटपोट कर दिया। इस फिल्म के संगीत में एक गाना शामिल था—’चैन आपको मिला, मुझे दीवानगी मिली’। इस फिल्म में यह गाना एक ‘सेलिब्रेशन’ यानी जश्न के गीत की तरह पेश किया गया था। इसमें शान और साधना सरगम की ऊर्जावान आवाज थी और इसे फिल्म के मुख्य किरदारों पर एक पार्टी के माहौल में बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया था। गाने की तेज लय और उत्साह भरे बोल तुरंत ही युवाओं की जुबान पर चढ़ गए थे।

    हैरानी की बात तब हुई जब इस फिल्म की रिलीज के ठीक 15 दिन बाद, यानी 15 अगस्त 2003 को एक और फिल्म ‘फूटपाथ’ बड़े पर्दे पर आई। इस फिल्म में इमरान हाशमी और आफताब शिवदासानी मुख्य भूमिकाओं में थे। दर्शकों को तब सुखद आश्चर्य हुआ जब उन्होंने इसी फिल्म के एलबम में फिर से वही गाना—’चैन आपको मिला’—सुना। हालांकि, इस बार गाने का पूरा अहसास और उसकी ‘फील’ बदल चुकी थी। जहाँ पहली फिल्म में यह एक पार्टी नंबर था, वहीं इस फिल्म में इसे एक ‘सैड सॉन्ग’ या बेहद धीमी लय वाले भावुक रोमांटिक गाने के रूप में रखा गया था। सबसे खास बात यह थी कि इस दूसरे वर्जन को दिग्गज गायक एसपी बालासुब्रमण्यम और स्वर कोकिला आशा भोसले ने अपनी मखमली आवाजों से सजाया था।

    एक ही गाने को दो अलग-अलग भावनाओं में ढालने का यह प्रयोग कलात्मक रूप से बेहद सफल रहा। संगीतकारों ने इसकी धुन को इस तरह तैयार किया था कि वह एक तरफ कॉमेडी फिल्म की रौनक में पूरी तरह फिट बैठी और दूसरी तरफ एक गंभीर ड्रामा फिल्म की गहराई में भी समा गई। दिलचस्प बात यह भी है कि अभिनेता आफताब शिवदासानी दोनों ही फिल्मों का अहम हिस्सा थे और उन्होंने एक ही गाने के दो अलग-अलग रंगों को पर्दे पर जिया। आज भी जब बॉलीवुड के दुर्लभ तथ्यों की बात होती है, तो यह उदाहरण सबसे ऊपर आता है कि कैसे एक ही बोल और धुन ने दो अलग कहानियों को अपने-अपने अंदाज में मुकम्मल बनाया। यह सुरीला प्रयोग आज भी संगीत प्रेमियों के बीच एक सुखद चर्चा का विषय बना रहता है।

  • बंगाल में सत्ता बदली तो मचा बवाल! ममता-अभिषेक के घरों से हटी सुरक्षा, TMC ऑफिस पर बुलडोजर, देशभर में सियासी हलचल तेज

    बंगाल में सत्ता बदली तो मचा बवाल! ममता-अभिषेक के घरों से हटी सुरक्षा, TMC ऑफिस पर बुलडोजर, देशभर में सियासी हलचल तेज



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की सियासत में उबाल साफ नजर आ रहा है। रिजल्ट के महज दो दिन बाद ही हालात ऐसे बने कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के घरों से अतिरिक्त सुरक्षा हटा ली गई। कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित पार्टी मुख्यालय से भी पुलिस बल कम कर दिया गया, जिससे पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, अभिषेक बनर्जी को पहले की तरह Z कैटेगरी सुरक्षा मिलती रहेगी, लेकिन अचानक सुरक्षा में कटौती ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

    इधर, चुनाव नतीजों के बाद शुरू हुई हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में मंगलवार रात हालात उस वक्त बिगड़ गए जब उग्र भीड़ ने टीएमसी के पार्टी कार्यालय पर बुलडोजर चला दिया। इस दौरान आसपास की दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। टीएमसी ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा और इसे ‘परिवर्तन की असल तस्वीर’ बताया। वहीं विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नॉर्थ 24 परगना के संदेशखाली में हुई घटना से भी लगाया जा सकता है, जहां गश्त कर रही पुलिस और केंद्रीय बलों पर हमला कर दिया गया। उपद्रवियों की फायरिंग में पांच सुरक्षाकर्मी घायल हो गए, जिनमें एक महिला पुलिसकर्मी भी शामिल है। मौके से बम से भरा बैग मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    इस बीच, बंगाल की सियासत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिला है। तमिलनाडु में कांग्रेस ने बड़ा दांव खेलते हुए TVK प्रमुख विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने खुद उनके मुख्यालय पहुंचकर समर्थन पत्र सौंपा, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में नई राजनीतिक धुरी बनने की कोशिश हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने इसके साथ ही DMK से अपना पुराना गठबंधन भी तोड़ दिया है।

    हालांकि, तमिलनाडु में अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। TVK और AIADMK के बीच संभावित गठबंधन को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पार्टी नेताओं की मुलाकातों ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह तय होगा कि विजय किसके साथ मिलकर सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।

    कुल मिलाकर, एक तरफ बंगाल हिंसा और राजनीतिक टकराव की आग में झुलस रहा है, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु में सत्ता समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। देश की राजनीति इस वक्त एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां हर दिन नई घटनाएं और नए गठबंधन तस्वीर को और दिलचस्प बना रहे हैं।